टीम एबीएन, पटना। बिहार में नीतीश कुमार आज फिर से सीएम के पद की शपथ लेंगे। नीतीश कुमार के साथ तेजस्वी यादव भी डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ लेंगे। इस बीच महागठबंधन की सरकार के नए स्वरूप पर जोरों की चर्चा चल रही है। सवाल यही है कि आखिरकार नई सरकार में विभागों का खाका क्या होगा? अनुमान जताया जा रहा है कि भाजपा कोटे का सारा विभाग राजद और कांग्रेस के खाते में जा सकता है। जदयू के पास एक दर्जन विभागों का जिम्मा पहले की भांति रह सकता है जिसमें एक मंत्री जीतन राम मांझी के हम के भी शामिल होंगे। यह तय माना जा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष का पद फिर से जदयू के खाते में चला जायेगा। मौजूदा समय में विधानसभा उपाध्यक्ष का पद जदयू के महेश्वर हजारी के पास है, ऐसे में संभावना इस बात की है कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने के बाद कुछ दिनों के बाद विधानसभा उपाध्यक्ष का पद राजद के कोटे में चला जायेगा। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि राजद और कांग्रेस के विधायकों की संख्या एक साथ जोड़ दी जाए तब राजद को 17 मंत्री पद मिल सकता है जबकि कांग्रेस को तीन पद पर संतोष करना पड़ेगा। पहले भी जब महागठबंधन की सरकार बिहार में थी तब भी लगभग इसी फार्मूले के तहत मंत्रिमंडल का गठन किया गया था। सामान्य प्रशासन और पुलिस विभाग को लेकर मंगलवार को सबसे ज्यादा चर्चा होती रही। पूरे दिन यह बात सामने आई कि राजद गृह विभाग चाह रहा है, जबकि गृह विभाग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास है। ऐसे में इस पर अंतिम सहमति कैसे बनी है, इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बड़े काम वाले महकमें राजद को मिल सकते हैं, जैसे पथ निर्माण विभाग मुख्य रूप से इसमें शामिल है। मौजूदा समय में यह भाजपा के पास था। महागठबंधन की सरकार के समय भी उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पथ निर्माण विभाग का कामकाज देख रहे थे। भाजपा के पास जिन विभागों का जिम्मा था वह राजद और कांग्रेस को मिल सकता है। इसमें स्वास्थ्य, पथ निर्माण विभाग, भवन निर्माण, पशु एवं मत्स्य संसाधन, कृषि, वित्त, श्रम संसाधन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी, नगर विकास उद्योग विभाग, पंचायती राज विभाग, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन, पर्यटन विभाग, कला संस्कृति एवं भूतत्व, आपदा प्रबंधन, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण, राजस्व एवं भूमि सुधार और गन्ना उद्योग विभाग शामिल हैं। जदयू के पास जिन विभागों के रहने की संभावना जताई जा रही है। उन विभागों में शिक्षा, योजना एवं विकास, ऊर्जा, परिवहन, ग्रामीण विकास, समाज कल्याण, सूचना एवं जनसंपर्क, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन, ग्रामीण कार्य और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग शामिल हैं।
त्वरित टिप्पणी (एबीएन न्यूज 24 डॉट कॉम के लिए बासुकीनाथ पाण्डेय)। सचमुच बिहार बिहार में बहार है। राज्य की राजनीति कब- किधर पलट जायेगी, ये अनुमान लगाना मुश्किल होता है। खासकर पिछले कुछ वर्षों की तो बात ही अलग है। बिहार की राजनीति के मुख्य धुरी नीतिश कुमार ने एक बार फिर पलटवार कर दिया है। भाजपा से तनातनी के बीच उन्होंने राजद के महागठबंधन के साथ जाने का निर्णय ले लिया है। सात बार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर रहे नीतिश ने एक बार फिर राजनीतिक चतुराई दिखाते हुए भाजपा को ही ‘आॅपरेशन सत्ता’ में परास्त कर दिया है। महाराष्टÑ और कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में जिस प्रकार भारतीय जनता पार्टी क्षेत्रीय दलों को तोड़ रही थी, वही फार्मूला बिहार में भी चर्चा में था। लेकिन यहां तो उलटा हो गया। बिहार में भाजपा पूरी ताकत से नीतिश कुमार को नकार रही थी। विधानसभा चुनाव हो या लोक सभा की बात तल्खी बढ़ती गयी। विधानसभा चुनाव में चिराग फैक्टर ने इस बात को हवा दी कि लोजपा को भाजपा ने ही नीतिश को कमजोर करने के लिये बढ़ावा दिया। वहीं लोकसभा चुनाव के बाद मात्र एक मंत्री पद देकर भी भाजपा ने एक गहरी चाल चल दी। जिस आजादी के लिये नीतिश कुमार ने राजद का साथ छोड़ दिया था, वह कठिनाई फिर से भाजपा की ओर से सामने आ रही थी। पूरे देश में क्षेत्रीय दलों को समाप्त करने की बात पटना में कहकर भाजपा ने जले पर नमक छिड़क दिया। वैसे भी जिन स्थितियों में नीतिश कुमार राजद से अलग हुए थे, वह स्पष्ट नहीं था। लेकिन खनिज विभाग में भ्रष्टाचार की चर्चा हुई थी। अब यह विषय नीतिश के अभिमान से छोटा पड़ गया। अगर वे और अधिक दिनों तक भाजपा के साथ रहते, तो निश्चिय ही उनका कुनबा समाप्त हो सकता था। साथ ही जदयू में भाजपा ने तोड़-फोड़ के प्रयास शुरू किये थे, जिसकी सूचना सार्वजनिक होने की बात भी कही जा रही है। लेकिन 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की जेपी नड्डा की घोषणा और अमित शाह की क्षेत्रीय पार्टियों को समाप्त करने की बात ने नीतिश को पलटवार करने के लिये मजबूर कर दिया और अब बिहार में सशक्त महागठवंधन की सरकार बनने जा रही है। (एडिटर एबीएनन्यूज24 डॉट कॉम)
टीम एबीएन, पटना। बिहार में भाजपा और जदयू का गठबंधन टूट गया है। सीएम नीतीश शाम चार बजे राज्यपाल फागू चौहान से मुलाकात करेंगे। वहीं इससे पहले जेडीयू की आज हुई बैठक में पार्टी के सभी विधायकों और सांसदों ने सीएम नीतीश कुमार के फैसले का समर्थन किया और कहा कि वे उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि वे हमेशा उनके साथ रहेंगे, जो कुछ भी वह तय करेंगे। बिहार की राजनीति में बड़े उलटफेर की खबर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बिहार में भाजपा और जेडीयू का गठबंधन टूट गया है। हालांकि अभी आधिकारिक एलान अभी बाकी है। वहीं नीतीश कुमार चार बजे राज्यपाल फागू चौहान से मुलाकात करेंगे। वहीं जेडीयू की आज हुई बैठक में पार्टी के सभी विधायकों और सांसदों ने सीएम नीतीश कुमार के फैसले का समर्थन किया और कहा कि वे उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि वे हमेशा उनके साथ रहेंगे, जो कुछ भी वह तय करेंगे। सूत्रों के हवाले से खबर ये भी आ रही है कि भारतीय जनता पार्टी के 16 मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे। वे सीएम नीतीश के फैसले का इंतजार करेंगे। वहीं भाजपा- जदयू के बीच विवाद पर बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि मुझे इस बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। मैं पटना जा रहा हूं... हम दिन रात मेहनत करके उद्योग पर पटरी पर लाया है, मुझे पूरी उम्मीद है कि उद्योग पटरी पर रहेगी। मैं 3 बजे की फ्लाइट से पटना रवाना हो रहा हूं। बिहार की सियासत में घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। अब मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल से मिलने का वक्त मांग लिया है। बताया जा रहा है कि नीतीश के साथ तेजस्वी भी राज्यपाल से मुलाकात करने जाएंगे। सूत्रों के हवाले से खबर ये भी है कि राज्यपाल से मुलाकात के बाद सीएम नीतीश इस्तीफा भी सौंप सकते हैं।
टीम एबीएन, पटना। बिहार में नीतीश कुमार के पाला बदल कर महागठबंधन की तरफ जाने की चर्चा तेज है। कहा जा रहा है नीतीश कुमार एनडीए का साथ छोड़कर महागठबंधन के साथ जा रहे हैं। इस बीच मंगलवार को बिहार में बड़ा सियासी हलचल होने वाला है। बिहार में जदयू राजद के साथ कांग्रेस और हम ने भी अपने विधायकों को पटना में बैठक के लिए बुलाया है। बिहार में इन चारों दलों की बैठक के बाद आसानी से समझा जा सकता हौ कि यहां सबकुछ सामान्य नहीं है। राजनीतिक दलों की इन बैठकों का एजेंडा क्या है यह अभी भले ही सामने नहीं आ रहा है। लेकिन इसकी वजह क्या है सभी लोग समझ रहे हैं इस बीच बिहार बीजेपी के नेता भी दिल्ली रवाना हो रहे हैं। सोमवार को रविशंकर प्रसाद, मंत्री शाहनवाज हुसैन, मंत्री नितिन नवीन, सतीश चंद्र दुबे समेत कई नेता दिल्ली रवाना हुए हैं। बिहार में हो रही राजनीतिक गतिविधि पर सभी दल खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं। भाजपा कह रही एनडीए में आॅल इज वेल है बोल रही है। इधर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह यह भी कह रहे हैं कि उनकी पार्टी के खिलाफ बड़ी साजिश हो रही है। चिराग मॉडल- दो की तैयारी थी। इधर जेडीयू नेता और नीतीश सरकार में शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बिहार में एनडीए में सब ठीक है। कोई उलट-फेर से नहीं हो रहा है। जदयू विधायकों सांसदों की पटना में बैठक पर उन्होंने कहा कि यह सामान्य राजनीतिक गतिविधि है। वहीं राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा है कि हम हर युद्ध के लिए तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने जदयू के साथ मिलकर सरकार बनाने की बात से भी इकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को राजद के साथ गठंबधन करने के बजाए जनता के पास जानी चाहिए। वहीं राजद विधायकों और विधानपरिुषद सदस्यों की बैठक पर उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी "हम" ने भी अपने विधायक दल की बैठक बुलाई है। हम ने स्पष्ट कर दिया है, वे नीतीश कुमार के साथ हैं। जीतन राम मांझी ने भी एनडीए में टूट की संभावना से इनकार किया है। इधर जदयू बैठक बुलाने को लेकर कहा है कि आरसीपी सिंह प्रकरण के बाद पार्टी में जो स्थिति बनी है। उसपर विधायकों की राय जानने के लिए मुख्यमंत्री ने विधायकों की बैठक बुलाई है।
टीम एबीएन, पटना/रांची। बिहार में सरकार को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के सभी विधायकों और सांसदों को पटना आने का आदेश दिया है। मंगलवार को बैठक होगी। इसी बीच नीतीश कुमार ने कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी फोन पर बातचीत की है। सूत्रों के अनुसार सरकार बनाने को लेकर चर्चा हुई है क्योंकि यह तय माना जा रहा है कि सरकार में कांग्रेस भी शामिल होगी। बता दें कि नीतीश कुमार पहले भी दो बार पाला बदल चुके हैं। पहले भाजपा से अलग होकर आरजेडी के साथ महागठबंधन की सरकार बनाए थे। उसमें एक कांग्रेसी भी शामिल था। वहीं 2017 में महागठबंधन से अलग होकर फिर से एनडीए की सरकार बना ली और अब एक बार फिर से नीतीश कुमार के पाला बदलने की चर्चा है।
टीम एबीएन, पटना/रांची। बिहार में सरकार को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के सभी विधायकों और सांसदों को पटना आने का आदेश दिया है। मंगलवार को बैठक होगी। इसी बीच नीतीश कुमार ने कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी फोन पर बातचीत की है। सूत्रों के अनुसार सरकार बनाने को लेकर चर्चा हुई है क्योंकि यह तय माना जा रहा है कि सरकार में कांग्रेस भी शामिल होगी। बता दें कि नीतीश कुमार पहले भी दो बार पाला बदल चुके हैं। पहले भाजपा से अलग होकर आरजेडी के साथ महागठबंधन की सरकार बनाए थे। उसमें एक कांग्रेसी भी शामिल था। वहीं 2017 में महागठबंधन से अलग होकर फिर से एनडीए की सरकार बना ली और अब एक बार फिर से नीतीश कुमार के पाला बदलने की चर्चा है।
टीम एबीएन, पटना। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए यह तय किया है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में उसका प्रतिनिधित्व नहीं होगा। जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने रविवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जदयू के शामिल होने के संबंध में पूछे गए सवाल पर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले से ही घोषणा कर रखी है कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जदयू शामिल नहीं होगी। जब कुमार ने ही निर्णय ले लिया है तो फिर सवाल कहां उठता है। ऐसे में यह पार्टी का अंतिम निर्णय है। श्री चौधरी ने कहा कि जदयू को केंद्रीय मंत्रिमंडल में सम्मानजनक संख्या नहीं मिली। इसलिए यह निर्णय लिया गया था। उन्होंने वर्ष 2024 के लोकसभा और वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर लड़ने पर कहा कि अभी हम लोग साथ मिलकर चल रहे हैं। गठबंधन नहीं चलेगा ऐसा फिलहाल नहीं दिख रहा है। भाजपा और जदयू ने पहले से ही साथ चुनाव लड़ने की घोषणा कर रखी है और जदयू ने भी अभी तक कोई दूसरा फैसला भी नहीं लिया है। मंत्री ने मुख्य विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से जदयू की नजदीकियों को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि राजद से नजदीकियां बढ़ने का कोई लक्षण मुझे नहीं दिख रहा है। बिहार में ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिसका लोग चित्रण कर रहे हैं। यह सामान्य राजनीतिक गतिविधि है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों जदयू के नेता आरसीपी सिंह का केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा हुआ था। श्री सिंह का राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद जदयू कोटा से केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल इकलौते चेहरे की पारी समाप्त हो गई थी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि अब नए सिरे से जदयू की तरफ से कुछ नेता केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं लेकिन अब जदयू ने यह तय किया है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में उसका प्रतिनिधित्व नहीं होगा।
टीम एबीएन, पटना। राजधानी पटना से एक बड़ी खबर सामने आई है। पटना के दानापुर इलाके में बालू लदे नाव पर जोरदार धमाका हुआ है। इस घटना में 4 मजदूरों की झुलस कर मौत हो गई है। मामले की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है। सिलेंडर विस्फोट बताया जा रहा है बताया जा रहा है कि पटना के मनेर के गंगा घाट पर अवैध बालू से लदे नाव पर सिलेंडर विस्फोट हुआ है। इसमें चार मजदूरों की झुलस कर मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। लोगों में काफी दहशत का माहौल है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का मच गई है। जांच में जुटी पुलिस : इस घटना की सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पुलिस पहंच गई है। मामले की जांच में जुट गई है। फिलहाल, घटना को लेकर पुलिस अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कर रही है। ये जांच के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा। वहीं, घटनास्थल पर अफरा-तफरी मचा है।
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