एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। पिछला बिहार विधानसभा का चुनाव नवंबर 2025 को हुआ था। 243 विधानसभा क्षेत्र में 89 भाजपा, 85 जदयू और 19 एलजेपी (रामविलास) तथा अन्य एनडीए गठबंधन कुल 202 सीट जीत कर बहुमत का आंकड़ा प्राप्त किया और नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। मात्र (3) सवा तीन (3:15) महीना के भीतर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का कुर्सी छोड़कर राज्यसभा के सांसद के रूप में दिल्ली जाने का निर्णय लिया जो अचंभित भी करता है और राजनीति के लिए आश्चर्यजनक है।
बताया यह जा रहा है कि नीतीश कुमार चारों सदन की सदस्यता का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं इसीलिए उन्होंने स्वेच्छा से मुख्यमंत्री पद छोड़ना स्वीकार किया; परंतु सियासत एवं वक्त में एकदम से सीधा अनोनाश्रय रिश्ता होता है जो कभी भारी पड़ता है, कभी ढीला पड़ जाता है और कभी राजनीतिज्ञ को कमजोर बना देता है।
वक्त को भारी पड़ते हुए देख राजनीति के ट्रैक में लाइन बदलने का निर्णय नीतीश कुमार के राजनीतिक परिपक्वता का परिचायक है। आजादी के बाद से भारतीय राजनीति में परिवारवाद का प्रचलन कोई अपवाद नहीं है, विशेष कर कांग्रेस एवं क्षेत्रीय दलों में तो यही परिपाटी रही है। इस परिपाटी का अनुपालन जदयू में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
नीतीश कुमार के सुपुत्र निशांत का जदयू के राजनीति में एंट्री हो चुका है। वह बकायदे सक्रिय हो चुके हैं और अपने बाबूजी की तरह अपनी राजनीतिक यात्रा बिहार के चंपारण से शुरू करने वाले हैं। पार्टी के जिला अध्यक्षों से उन्होंने लंबी मंत्रणा की है और पार्टी के युवा विधायकों के साथ जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर लंबी चर्चा की है।
इधर बिहार विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी लगातार अधिक सीट जीतने के बाद भी अधिकतम ऊंचाई उपमुख्यमंत्री तक ही सीमित रही है। सुशील कुमार मोदी की लंबी पारी के कारण भाजपा में कोई अन्य नेता उभर कर सामने नहीं आ पाया है। बिहार से नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पहले ही दिल्ली बुला लिया गया और अब उन्हें राज्यसभा भेज कर उनका स्थाई निवास दिल्ली बना दिया जा रहा है।
बीजेपी के पास बिहार के राजनीति की उच्चतम पद पर काबिज होने का यह सुनहरा मौका है और वह मुख्यमंत्री बनाने के अत्यंत करीब पहुंच भी चुकी है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री कौन होगा यह एक बड़ा सवाल है। हमेशा की तरह मोदीजी इस निर्णय पर भी चौंकाने का कार्य करेंगे? राजनीति के पंडितों के दिमाग में इसके उत्तर नहीं मिल पा रहे हैं।
नीतीश कुमार का कद, काठी, प्रभाव और केंद्र की सरकार के टिकाऊ के लिए अत्यंत आवश्यक समर्थन को देखते हुए इतना तो तय है कि बिहार की राजनीति और सरकार में उनके सुपुत्र निशांत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के ट्वीट पर जवाब दिया है। मरांडी ने लिखा, नीतिश कुमार, पिछले तीन-चार दशकों से आप बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं।
मरांडी ने आगे लिखा, बिहार को जंगलराज से बाहर निकालकर सुशासन की स्थापना में आपका योगदान सर्वोच्च रहा है। आपके नेतृत्व में राज्य ने प्रशासनिक स्थिरता, विकास और व्यवस्था की एक नई दिशा प्राप्त की। मरांडी ने लिखा, सार्वजनिक जीवन में आपने हमेशा सुचिता, सम्मान और नैतिकता के मूल्यों को स्थापित किया है। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में आपका कार्यकाल राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
मरांडी ने कहा कि अब राज्यसभा सदस्य के रूप में भी सदन आपके अनुभव, द्दष्टि और नेतृत्व से निश्चित रूप से गौरवान्वित होगा। आपके उज्ज्वल भविष्य और इस नई पारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। विकसित भारत के निर्माण में आपका अनुभव और योगदान देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, भागलपुर (बिहार)। भागलपुर के स्थानीय गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र भागलपुर में युग चेतना फाउंडेशन, अंग-जन-गण, अंग मदद फाउंडेशन और अंगिका सभा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को आयोजित दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान समारोह में हीरो राजन कुमार को दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया
यह सम्मान शहर के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. डी.पी. सिंह के द्वारा प्रदान किया गया। यह सम्मान जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष समाजसेवी डॉ. शंभू दयाल खेतान, शहर के जाने-माने चिकित्सक प्रो. डॉ. रतन कुमार मंडल, डॉ. रमेश आत्मविश्वास समेत अन्य प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति में दिया गया।
यह आयोजन विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित अंग अंगिका साहित्य महोत्सव मातृभाषा के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
दानवीर कर्ण, जो महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक हैं, त्याग, दान और मानवीय मूल्यों के प्रतीक माने जाते हैं।
हीरो राजन कुमार कर्ण की भूमिका में कर्ण जीवंत स्वरूप अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनके नाम पर दिया जाने वाला यह सम्मान साहित्य और समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को समर्पित है। बिहार के मुंगेर निवासी हीरो राजन कुमार जिन्हें चार्ली चैपलिन-2 के नाम से जाना जाता है।
उनका चार्ली चैपलिन-द्वितीय लाइव प्रस्तुति की ऊर्जा और प्रत्यक्ष संपर्क दर्शकों के साथ एक गहरा असर डालता है। जब भारतीय अभिनेता हीरो राजन कुमार मंच पर जीते-जागते भावों के साथ चार्ली चैपलिन-द्वितीय का अभिनय करते हैं, तो दर्शक सीधे उनसे जुड़ते हैं।
यही रंगमंच की जादुई ताकत है, जो आज भी लोगों को बांधे रखती है। लाइव परफॉरमेंस की वह ऊर्जा, पल-पल का कनेक्शन,सब कुछ दर्शकों को सीधे दिल से जोड़ देता है। हीरो राजन कुमार जब चार्ली चैपलिन-2 बनकर स्टेज पर आते हैं, तो रंगमंच का जादू सच में सबके रोंगटे खड़े कर देता है।
यहीं तो ख़ासियत है रंगमंच की,वह डिजिटल दुनिया से परे एक अलग ही अनुभव देता है।वह एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं,जो अभिनेता, कलाविद, कवि, सामाजिक कार्यकर्ता और किसान भी हैं। उन्होंने चार्ली चैपलिन के रूप में सबसे ज़्यादा लाइव शो करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 5157 से अधिक सजीव प्रस्तुतियाँ दी हैं।
26 जनवरी 2025 को गणतंत्र दिवस परेड में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपनी कविता जय हो का पाठ किया, जिसे काफी सराहना मिली। वे बिहार फिल्म एंड टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन (BAFTA) ट्रस्ट, मुंगेर, बिहार से जुड़े हैं और उन्होंने गणतंत्र दिवस परेड में अपनी टीम का नेतृत्व भी किया था।
उन्होंने कई हिंदी फिल्मों और टेली - फिल्म्स में काम किया है। जिनमें नमस्ते बिहार, शहर मसीहा नहीं, लहरिया कट और हाल ही में आखिर शामिल हैं। वह अपनी साइलेंट कॉमेडी के लिए भी जाने जाते हैं।
इससे पहले उन्हें प्रतिष्ठित आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र राष्ट्रीय सम्मान से भी परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें डॉ. कलाम यूथ रत्न अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया है। वह एक बहुत ही प्रतिभाशाली और प्रसिद्ध कलाकार हैं, जो अपनी कला और सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, सारण। बिहार के सारण में महज दस किलोमीटर के दायरे में देर रात हुई छापों की कार्रवाई में छह आर्केस्ट्रा समूहों से 15 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया। बिहार पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग इकाई और गैरसरकारी संगठनों एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (एवीए) व नारायणी सेवा संस्थान की पांच घंटे तक चली संयुक्त कार्रवाई में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
मुक्त कराई गई ज्यादातर लड़कियों के शरीर पर चोट के निशान थे। इन लड़कियों को ट्रैफिकिंग के जरिए पंजाब, ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से लाया गया था। इस दौरान एक गाड़ी को जब्त किया गया और मुक्त कराई गई लड़कियों को आश्रय गृह भेज दिया गया। एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के सहयोगी संगठन हैं।
यह कार्रवाई बिहार के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग, सीआईडी, बिहार पुलिस मुख्यालय) डॉ. अमित कुमार जैन के दिशानिर्देशों के बाद सारण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेश पर हुई। छापे की कार्रवाई आधी रात शुरू हुई और भोर तक जारी रही। इसमें विभिन्न आर्केस्ट्रा परिसरों से 12 लड़कियों को मुक्त कराया गया जबकि खुशी आर्केस्ट्रा के मालिक ने तीन लड़कियों को कार में लेकर भागने की कोशिश की। आठ किलोमीटर तक पीछा करने के बाद उसे पकड़ लिया गया और तीनों नाबालिग लड़कियों को मुक्त करा लिया गया।
मुक्त कराई गई सभी लड़कियों ने बताया कि उन्हें शारीरिक प्रताड़ना व यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था और अश्लील गानों पर नाचने को मजबूर किया जाता था। एफआईआर के अनुसार, इन लड़कियों को रात में भीड़ के सामने अश्लील गानों पर जबरन नृत्य कराया जाता था। इन्हें पूरी तनख्वाह नहीं दी जाती थी और इनका शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया जाता था।
लड़कियों के शरीर पर दिख रहे चोटों के निशान बता रहे थे कि आर्केस्ट्रा मालिकों ने उन पर कितना अत्याचार किया था। जिन आर्केस्ट्रा समूहों पर छापे मारे गए उनमें काजल आर्केस्ट्रा, सुर संगम आर्केस्ट्रा, कोपा चट्टी आर्केस्ट्रा, खुशी आर्केस्ट्रा, श्याम आर्केस्ट्रा और दिया आर्केस्ट्रा शामिल थे।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और बिहार पुलिस टीम की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना करते एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, बिहार पुलिस ने जिस तरह आर्केस्ट्रा समूहों पर शिकंजा कसा है, वह एक नजीर है। ये आर्केस्ट्रा समूह बड़े ट्रैफिकिंग गिरोहों के लिए एक अहम कड़ी हैं। ये गिरोह कमजोर पृष्ठभूमि की लड़कियों को जाल में फांसते हैं और उन्हें शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन चक्र में धकेल देते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि स्थानीय पुलिस इसे संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़ा मामला समझ कर इसकी छानबीन करे और उसी के अनुरूप कानूनी कार्रवाई करे। साथ ही, हमें इन नाबालिग बच्चियों का तत्काल पुनर्वास सुनिश्चित करना होगा ताकि ये फिर से समाज की मुख्य धारा में लौट सकें।
पुलिस ने सातों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं, पॉक्सो अधिनियम, 2012; किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल व संरक्षण) अधिनियम, 2015 और बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। सभी नाबालिग लड़कियों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया जहां से उन्हें काउंसलिंग व पुनर्वास के लिए आश्रय गृह भेज दिया गया।
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जितेंद्र परमार
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एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के दरभंगा में कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में दर्ज एक प्राथमिकी आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। इसका कारण यह है कि इस एक ही प्राथमिकी में पूरे गांव के ब्राह्मण समुदाय के सभी सदस्यों को आरोपी बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई लोग सालों से अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में काम कर रहे हैं, फिर भी उनके नाम भी आरोपियों की लिस्ट में शामिल हैं।
दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाने में दर्ज इस प्राथमिकी में हरिनगर गांव के करीब 70 ब्राह्मणों के नाम हैं, जबकि 100 से 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता, असरफी पासवान का आरोप है कि पूरे गांव ने मिलकर उनके परिवार पर हमला किया और उन्हें परेशान किया। इसी आधार पर पुलिस ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
जैसे ही यह मामला सामने आया, गांव में हंगामा मच गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार है कि किसी विवाद में पूरे समुदाय को आरोपी बनाया गया है।
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आवेदन में जिन लोगों के नाम हैं, उनमें से कई सालों से गांव में नहीं रह रहे हैं। कुछ दिल्ली और मुंबई में मजदूरी करते हैं, जबकि कुछ प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करते हैं। परिवार वालों का कहना है कि घटना के समय ये लोग गांव में मौजूद नहीं थे, फिर भी उन्हें आरोपी बनाया गया है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय बजट को सकारात्मक एवं स्वागत योग्य बताया और कहा कि यह बजट विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पेश किया गया है।
केंद्रीय बजट प्रगतिशील एवं भविष्योन्मुखी
नीतीश कुमार ने आज एक्स पर लिखा, केंद्रीय बजट प्रगतिशील एवं भविष्योन्मुखी है। उन्होंने कहा कि बजट के माध्यम से केंद्र सरकार ने देश के विकास की गति को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। उन्होंने कहा किइस बार केंद्रीय बजट में देश में सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है। इसमें वाराणसी -सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनने से बिहार को भी काफी फायदा होगा।
साथ ही बजट में देश भर में 20 नये राष्ट्रीय जलमार्ग बनाने की घोषणा की गई है। इसके तहत पटना और वाराणसी में जहाज मरम्मत की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बिहार के उत्पादों के निर्यात की सुविधा बढ़ेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलमार्ग के विस्तार से बिहार के भी कई शहरों को फायदा मिलेगा तथा राज्य के उत्पादों के निर्यात की सुविधा बढ़ेगी और व्यापारिक एवं व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट में देश भर में बड़े टेक्सटाइल पाकर् तथा महात्मा गांधी स्वरोजगार योजना की घोषणा की गई है। साथ ही बजट में सेमीकंडक्टर के लिए 40 हजार करोड़ रूपए के सपोर्ट का ऐलान किया गया है। इससे बिहार सहित देश भर के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश का आर्थिक विकास और तीव्र गति से हो सकेगा।
मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि केंद्रीय बजट में घोषणा की गई है कि विकास और रोजगार के अवसरों में तेजी लाने के लिए पूर्वोतर राज्यों और उत्तर-पूर्व क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जायेगा। इससे जुड़ी विकास की योजनाओं से बिहार को औद्योगिक निवेश, आधारभूत संरचना और युवाओं के लिए अधिक रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही, केंद्रीय बजट में शहरों के विकास के लिए किए गए प्रावधानों से बिहार में शहरीकरण को नई गति मिलेगी।
इससे राज्य के शहरों में आधारभूत संरचना, निवेश और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा। कुमार ने कहा कि इस बार के केंद्रीय बजट में देश के सभी जिलों में एक गर्ल्स हॉस्टल बनाने की घोषणा की गई है। इससे उच्च शिक्षा ग्रहण करने में लड़कियों को काफी सहूलियत मिलेगी। उन्होंने कहा कि एक बेहतर बजट पेश करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण धन्यवाद के पात्र हैं।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना/बिहार। इतिहास, संस्कृति और गौरवशाली विरासत की धरती पटना में एसोसिएशन आॅफ फिजिशियंस आॅफ इंडिया (एपीआई) की 81वीं वार्षिक कॉन्फ्रेंस एपिकोन 2026 का आयोजन 29 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक हो रहा है। यह प्रतिष्ठित चिकित्सा सम्मेलन पटना के हृदय स्थल पर स्थित सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हो रहा है।
चार दिनों तक चलने वाली इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस में चिकित्सा विज्ञान, आधुनिक उपचार पद्धतियों और स्वास्थ्य सेवा में नवाचार से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत चर्चा की जा रही है। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा उपहार है की मूल भावना के साथ इस आयोजन का उद्देश्य चिकित्सकों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों से अवगत कराना है।
इस वर्ष की एपिकोन 2026 में प्रमुख भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनी गल्फा लेबोरेटरीज लिमिटेड की विशेष भागीदारी है। इस अवसर पर बॉलीवुड अभिनेता एवं गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर राजन कुमार कंपनी को प्रमोट कर रहे है। साथ ही, उनका चर्चित चार्ली चैपलिन 2 लाइव शो कॉन्फ्रेंस का मुख्य आकर्षण है।
गल्फा लेबोरेटरीज लिमिटेड, जिसकी स्थापना वर्ष 1986 में नवल किशोर सिंह द्वारा की गयी थी, आज भारतीय फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में एक सशक्त और भरोसेमंद नाम बन चुकी है। कंपनी के उत्पाद अपनी किफायती कीमत और उच्च गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं। इसके प्रमुख प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में एंटीबायोटिक्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, एनएसएआईडीएस और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल उत्पाद शामिल हैं।
गल्फा लेबोरेटरीज लिमिटेड को अब तक कंपनी आॅफ द ईयर, ब्रांड आॅफ द ईयर सहित कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। गल्फा लेबोरेटरीज का फोकस इनोवेटिव हेल्थकेयर सॉल्यूशंन और मजबूत वितरण नेटवर्क पर है। कंपनी की अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, विशेष रूप से बद्दी स्थित यूनिट, जीवाईएमपी और यूके एमएचआरए के अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन करती हैं।
इस अवसर पर फिल्म अभिनेता राजन कुमार ने कहा, गल्फा लेबोरेटरीज लगभग चार दशकों की विरासत के साथ देशभर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। कंपनी का उद्देश्य है हर वर्ग तक सस्ती और उच्च-गुणवत्ता वाली फार्मास्यूटिकल सेवाएं पहुंचाना, जो इसे भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक भरोसेमंद नाम बनाता है।
गल्फा लेबोरेटरीज का मुख्यालय मुंबई में स्थित है और कंपनी किफायती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के अपने मिशन के साथ भारतीय फार्मास्यूटिकल उद्योग में निरंतर आगे बढ़ रही है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था गल्फा लेबोरेटरीज की वैश्विक उपस्थिति या विस्तृत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहती है, तो एपिकोन 2026 उनके लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, मोतिहारी/ पटना। आज बिहार के मोतिहारी में केसरिया के कठौलिया गांव में बन रहे विराट रामायण मदिर के प्रांगण में दुनिया की सबसे बड़ी शिवलिंग की स्थापना की गयी। यह मंदिर 120 एकड़ के प्रांगण में स्थापित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह दुनिया का सबसे विराट रामायण मंदिर है।
यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 2500 किमी और 40 दिन से ज्यादा की यात्रा तय करके बिहार आया है। इसे बनाने में 10 साल का वक्त लगा है, इस शिवलिंग को ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है, जिसमें 1008 छोटे शिवलिंग को उकेरा गया है और इसे बनाने में 1008 कारीगरों ने अपना योगदान दिया है।
पूर्व आईपीएस और महावीर न्यास बोर्ड के पूर्व सचिव आचार्य कुणाल का सपना था यह विराट रामायण मंदिर। इसकी नींव उन्होंने अपने जीवन में रखी थी, लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनके बेटे सयान कुणाल से आज उनके सपने को पूरा करते हुए पूरे विधि विधान से इस शिवलिंग को मंदिर प्रांगण में स्थापित किया है।
उन्होंने बताया है कि इस मंदिर के बनने से इस जगह का विकास भी तेजी से होगा। अयोध्या के बाद यह सबसे बड़ा धार्मिक स्थल बनेगा। यहां होटल्स, एयरपोर्ट और हाईवे बनेंगे और इस पूरे इलाके का विकास तेजी से होगा। इस विशाल शिवलिंग का वजन 200 मैट्रिक टन (2,00,000 किलोग्राम) है और जो 33 फीट लंबा है।
इसे स्थापित करना बेहद ही मुश्किल कार्य था, लेकिन इंजीनियर्स की टीम ने इसे बेहद सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। इस शिवलिंग को 30 फीट से ऊंचे गुंबद पर स्थापित किया गया, जिसके बाद इसके कुल उचाई 60 फीट से भी ज्यादा हो गयी है। इसे स्थापित करने में लगभग आधे घंटे का वक्त लगा है और इसे 2 भारी-भरकम क्रेन की मदद से स्थापित किया गया है।
शिवलिंग को क्रेन की मदद से पहले हवा में लिफ्ट किया गया, फिर ऊंचाई पर ले जाकर इसे स्थापित किया गया। शिवलिंग बनाने वाली टीम के मॉडरेटर वेंकटेश विनायक ने बताया कि इस शिवलिंग को 10 साल में बनाया गया और अब इसे विराट रामायण मंदिर के प्रांगण में स्थापित किया गया है।
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