वन और पर्यावरण

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Published / 2025-10-05 21:22:56
तीन महीने बाद पर्यटकों के लिए खुला पलामू टाइगर रिजर्व

  • तीन महीने बाद पर्यटकों के लिए खोला गया बेतला नेशनल पार्क

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। तीन महीने के बाद झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले बेतला नेशनल पार्क को पर्यटन गतिविधि के लिए खोल दिया गया है। गाइडलाइन के अनुसार से 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में पर्यटन गतिविधि पर रोक लगा दी जाती है।

नवरात्र को देखते हुए बेतला नेशनल पार्क और पलामू टाइगर रिजर्व में पर्यटन गतिविधि की शुरुआत 27 सितंबर से होने वाली थी, लेकिन पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में पिछले कुछ दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही थी। इस कारण पार्क और पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले कई सड़कें टूट गई हैं, जबकि जलाशयों में पानी भरा हुआ है।

इस संबंध में पलामू टाइगर रिजर्व के उप निदेशक प्रजेशकांत जेना ने बताया कि बारिश के कारण कई सड़कें टूट गई हैं। इलाके में निगरानी रखी जा रही है। सड़कों की मरम्मत करायी जा रही है। पर्यटकों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। पर्यटकों को इस बार थोड़ा इंतजार करना पड़ा है।

दरअसल, पलामू टाइगर रिजर्व 1149 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और बेतला नेशनल पार्क पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र है। ठंड के दौरान 45,000 से भी अधिक पर्यटक यहां घूमने के लिए पहुंचते हैं।

Published / 2025-09-29 22:43:48
दो और तीन को भारी बारिश का अलर्ट

2 और 3 अक्टूबर को भारी बारिश का अलर्ट

पिछले 24 घंटे के दौरान कमजोर रहा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मानसून एक बार फिर सक्रिय होने वाला है। रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के पास स्थित मौसम केंद्र के मौसम वैज्ञानिक सतीश चंद्र मंडल ने यह जानकारी दी है। उन्होंने यह भी बताया है कि अगले 5 दिन तक झारखंड का मौसम कैसा रहने वाला है।

मौसम वैज्ञानिक सतीश चंद्र मंडल ने कहा है कि 30 सितंबर को उत्तरी अंडमान सागर में एक अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से 1 अक्टूबर 2025 को बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसका असर झारखंड पर भी देखने को मिलेगा।

2-3 अक्टूबर को कुछ जिलों में होगी भारी वर्षा

मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि मौसमी प्रणाली के प्रभाव से 2 और 3 अक्टूबर को झारखंड राज्य के लगभग सभी जिलों में हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा होगी। कुछ जिलों में भारी वर्षा होने की भी संभावना है। उन्होंने जनता से अनुरोध किया है कि वे इन दो दिनों में आवश्यक सावधानी बरतें। सतर्क रहें, क्यों तेज हवाएं भी चल सकतीं हैं।

Published / 2025-09-28 18:45:54
एक पेड़ मां के नाम 2.0 अभियान के तहत लगाये गये 30 फलदार पौधे

टीम एबीएन, रांची। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) ने सतर्कता जागरूकता अभियान-2025 के अंतर्गत सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान, गांधीनगर, रांची में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन कंपनी की प्रमुख हरित पहल एक पेड़ मां के नाम 2.0 के अंतर्गत किया गया। 

कार्यक्रम में सीसीएल के मुख्य प्रबंध निदेशक निलेंदु कुमार सिंह, पवन कुमार मिश्रा, निदेशक (वित्त), हर्ष नाथ मिश्र, निदेशक (मानव संसाधन), चंद्र शेखर तिवारी, निदेशक (तकनीकी/ संचालन), तथा पंकज कुमार, मुख्य सतकर्ता अधिकारी ने मिलकर पौधारोपण किया और हरित पर्यावरण की दिशा के संकल्प को दोहराया। इस दौरान बड़ी संख्या में सीसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता दिखाई। 

इस अवसर पर महिला सफाई कर्मियों और सुरक्षा कर्मियों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। एक पेड़ मां के नाम 2.0 के तहत आज कुल 30 फलदार पौधों का रोपण किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और भविष्य की पीढ़ियों के लिए हरित विरासत के प्रतीक है। 

यह कार्यक्रम सीसीएल द्वारा चलाए जा रहे सतकर्ता जागरूकता अभियान-2025 का हिस्सा है, जो 18 अगस्त से 17 नवंबर 2025 तक विभिन्न जागरूकता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रमों के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। कंपनी द्वारा पहले भी इस अभियान के तहत कई जागरूकता गतिविधियां, संगोष्ठियां और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

Published / 2025-09-14 21:07:18
झारखंड : इस साल बारिश ने तोड़ा रिकार्ड

52% अधिक बरसे बादल 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में इस बार जबरदस्त मानसून देखा जा रहा है। सितंबर के महीने में भी मूसलाधार बारिश हो रही है। अब तक झारखंड में 52 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। वहीं, करीब 7 जिले में तो 1200 मिमी से अधिक बारिश हो चुकी है। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि मॉनसून किस कदर मेहरबान है।

ऐसे में इस बार नवरात्रि में आपको भीगते हुए पंडाल में माता रानी के दर्शन करने पड़ सकते हैं। झारखंड राज्य में येलो अलर्ट जारी किया गया है। खासतौर पर दक्षिणी जिलों में अच्छी खासी बारिश की प्रबल संभावना है। 

जहां हवा 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। ऐसे में रांची मौसम विभाग खासतौर पर पश्चिम व पूर्वी सिंगभूम जैसे जिले में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इस दौरान भूलकर भी घर से बाहर न निकलें। क्योंकि वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है।

Published / 2025-09-14 21:06:32
खूंटी : कर्रा थाने में गरुड़ पक्षियों का बसेरा

पुलिस की सुरक्षा में बढ़ाते हैं परिवार 

टीम एबीएन, खूंटी। गरुड़ पक्षियों का बसेरा कर्रा थाना परिसर में है। यहां के लोगों का कहना है कर्रा थाना में गरुड़ की छोटी प्रजाति सालों से आती है। गरुड़ की चहचहाहट से पुलिसकर्मियों की सुबह होती है और शाम तक गरुड़ और दूसरे पक्षियों की आवाज से थाना परिसर गूंजता रहता है। 

कर्रा थाना परिसर के बगीचे में गरुड़ की छोटी प्रजाति के पक्षियों का प्रवास है। थाना परिसर में गरुड़ पक्षियों का सालों से बसेरा है और पुलिस उन्हें पूरी तरह सुरक्षा देती है। यही नहीं गरुड़ के अलावा मैना, कबूतर, बगुला जैसे पक्षियों का बसेरा है। खूंटी जिले के इस थाने के अलावा इस तरह की पक्षियों का बसेरा कहीं नहीं है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गरुड़ पक्षी को भगवान विष्णु का वाहन बताया गया है। इनसे जुड़ी कई कथा प्रचलित हैं। 

थाना परिसर में रह रहे गरुड़ मौजूद अन्य पक्षियों की चहचहाहट की आवाज से उनकी सुबह होती है।थाना परिसर में एक अलग ही शांति मिलती है। गरुड़ यहां पर खुद को सुरक्षित महसूस करता हैं। यही कारण है कि यहां वर्षों से इनका बसेरा है, लेकिन अक्टूबर माह आते आते अपने पूरे परिवार को लेकर कहीं चले जाते हैं। इनकी वापसी फरवरी में होती है और यह सितंबर महीने तक रहते हैं। 

थाना परिसर में आम समेत कई पेड़ है लेकिन गरुड़ आम के पेड़ में निवास करते हैं। जबकि बगुला और मैना भी आम के पेड़ में रहते है लेकिन दोनों के रहने का तरीका अलग है। गरुड़ और बगुला के बीच कभी भी हिंसक झड़प नहीं होती है। थाना परिसर में यह दोनों पक्षी शांति से रहते हैं। यही कारण है कि यहां पुलिसकर्मियों के अलावा बाहर से आये लोग भी इनकी चहचहाहट की आवाज से आनंदित रहते हैं।

Published / 2025-08-31 20:01:24
सितंबर में बारिश से राहत नहीं : आइएमडी

  • सितंबर में भी नहीं थमेगा मानसून : आइएमडी ने दी भारी बारिश की चेतावनी, खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका 
  • आइएमडी ने बताया कि अगले दो हफ्तों में मॉनसून के पीछे हटने के कोई संकेत नहीं हैं। उल्टा, इस दौरान और ज्यादा लो प्रेशर एरिया बनने की संभावना है 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में इस साल मॉनसून ने जमकर तबाही मचायी है। अगस्त में देश के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई। अब सितंबर में भी बारिश का जोर कम होने के आसार नहीं हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने आज अपनी ताजा भविष्यवाणी में कहा कि सितंबर में पूरे देश में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी। यह बारिश लंबी अवधि के औसत से 109 फीसदी ज्यादा हो सकती है। सितंबर का एलपीए 167.9 मिलीमीटर है। यह मॉनसून का आखिरी महीना है। 

आइएमडी ने बताया कि अगले दो हफ्तों में मॉनसून के पीछे हटने के कोई संकेत नहीं हैं। उल्टा, इस दौरान और ज्यादा लो प्रेशर एरिया (एलपीए) बनने की संभावना है। देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी। हालांकि, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ इलाकों, दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। 

आइएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने एक आनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि सितंबर में उत्तराखंड में भारी बारिश से भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से कई नदियां निकलती हैं। भारी बारिश से ये नदियां उफान पर आ सकती हैं।

इससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा है। इसका असर दिल्ली, दक्षिण हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में भी पड़ सकता है। यहां सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। महापात्रा ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ में महानदी के ऊपरी इलाकों में भी भारी बारिश की आशंका है। इससे नदी में बाढ़ की स्थिति बन सकती है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील की। 

अगस्त में मानसून ने मचायी भारी तबाही 

अगस्त में देश के कई हिस्सों में मानसून ने भारी तबाही मचाई। उत्तर-पश्चिम भारत में इस बार अगस्त में 260.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 34.4 फीसदी ज्यादा है। यह 2001 के बाद सबसे ज्यादा और 1901 के बाद 13वीं सबसे ज्यादा बारिश है। इस क्षेत्र में जून से अगस्त तक कुल 614.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य 484.9 मिलीमीटर से 27 फीसदी ज्यादा है। जून में 111 मिलीमीटर (42 फीसदी ज्यादा) और जुलाई में 237.4 मिलीमीटर (13 फीसदी ज्यादा) बारिश हुई। 

दक्षिण भारत में भी अगस्त में 250.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी, जो सामान्य से 31 फीसदी ज्यादा है। यह 2001 के बाद तीसरी सबसे ज्यादा और 1901 के बाद आठवीं सबसे ज्यादा बारिश है। जून से अगस्त तक इस क्षेत्र में 607.7 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य 556.2 मिलीमीटर से 9.3 फीसदी ज्यादा है। पूरे देश में अगस्त में 268.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 5 फीसदी ज्यादा है। जून से अगस्त तक कुल 743.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 6 फीसदी ज्यादा है। 

इस भारी बारिश का असर खेती पर भी पड़ सकता है। 22 अगस्त तक देश में 107.39 मिलियन हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी थी। यह पिछले साल की तुलना में 3.54 मिलियन हेक्टेयर ज्यादा है। धान और मक्का की बुआई में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। लेकिन सितंबर में ज्यादा बारिश से फसलों को नुकसान हो सकता है। खेतों में पानी भरने और फसलों के गिरने का खतरा है। 

उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश का कहर सबसे ज्यादा दिखा। पंजाब में दशकों बाद सबसे भयानक बाढ़ आयी। नदियों और नहरों के उफान से हजारों हेक्टेयर खेत डूब गये। लाखों लोग बेघर हो गये। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बादल फटने और अचानक बाढ़ से सड़कें और पुल बह गये। जम्मू-कश्मीर में बार-बार बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं हुईं। आइएमडी का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय मानसून की वजह से बारिश बढ़ी है।

Published / 2025-08-23 20:46:13
झारखंड : 30 तक बारिश और वज्रवात से राहत की कोई उम्मीद नहीं

झारखंड में 30 अगस्त तक बारिश और वज्रपात से राहत नहीं, कई जिलों में अलर्ट 

टीम एबीएन, रांची। बंगाल की खाड़ी में लगातार बन रहे निम्न दबाव वाले क्षेत्र के प्रभाव से झारखंड में बारिश और वज्रपात का सिलसिला 30 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है। शुक्रवार को राज्य के कई जिलों में रुक-रुक कर बारिश होती रही। 

पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में सबसे अधिक 93 मिमी वर्षा दर्ज की गयी, वहीं रांची में 15 मिमी, मेदिनीनगर में 3 मिमी और जमशेदपुर में 11 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, 23 अगस्त को गढ़वा, पलामू और लातेहार जिलों में भारी वर्षा की आशंका के चलते आरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 

इसके अतिरिक्त लोहरदगा, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, पश्चिम सिंहभूम, गिरिडीह, देवघर, धनबाद, जामताड़ा और दुमका जिलों के लिए येलो अलर्ट घोषित किया गया है, जहां मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।

Published / 2025-08-17 18:20:51
जोरदार झटकों के साथ तीन देशों में डोली धरती

महसूस किये गये जोरदार झटके, लोगों में डर का माहौल 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया के कई हिस्सों में इस समय धरती लगातार कांप रही है। शनिवार देर रात अफगानिस्तान में 4.9 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार यह भूकंप जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया था जिससे भविष्य में और भी झटके आने की आशंका है। 

इंडोनेशिया और जापान में भी कांपी धरती 

अफगानिस्तान के अलावा जापान में भी भूकंप के झटके आये। वहीं इंडोनेशिया के सुलावेसी में भी 5.7 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया। राहत की बात यह है कि इन झटकों से अभी तक किसी तरह के बड़े नुकसान की खबर नहीं है। इंडोनेशिया में आये भूकंप की गहराई भी 10 किलोमीटर मापी गयी थी जो आमतौर पर सतह के करीब होने के कारण ज्यादा महसूस होता है। 

तुर्की में भूकंप से गयी थी जान 

हाल ही में दुनिया के कई देशों में भूकंप के झटके महसूस किये गये हैं। इसी कड़ी में 11 अगस्त को तुर्की में भी 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस भूकंप में एक शख्स की मौत हो गयी थी और 15 से ज्यादा इमारतें ढह गयी थीं। 

भूकंप विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि धरती की सतह के नीचे हो रही गतिविधियों के कारण भूकंप की घटनाएं बढ़ रही हैं। हालांकि ये सभी झटके अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में आये हैं लेकिन एक के बाद एक आ रही ये आपदाएं चिंता का विषय हैं।

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