वन और पर्यावरण

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Published / 2022-05-18 13:40:15
केरल में भारी बारिश से कई जिलों में आॅरेंज और रेड अलर्ट, रात्रि यात्रा पर रोक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केरल के कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को राज्य के सात जिलों में दिन भर के लिए आॅरेंज अलर्ट जारी किया है। आईएमडी ने केरल के त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझीकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में बुधवार के लिए आॅरेंज अलर्ट जारी किया है। साथ ही कन्नूर और कासरगोड में बृहस्पतिवार के लिए आॅरेंज अलर्ट जारी किया गया। देश के विभिन्न मौसम पूवार्नुमान केंद्रों ने बुधवार को राज्य भर में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान जताया है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने केरल और उसके आसपास के चक्रवाती परिसंचरण के साथ-साथ उत्तरी केरल से विदर्भ क्षेत्र तक एक कम दबाव वाली ट्रफ रेखा के कारण अगले पांच दिनों में राज्य में भारी बारिश की संभावना जताई है। केंद्रीय मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए राज्य में भारी और बहुत भारी बारिश और उसके बाद अगले दो दिनों तक भारी बारिश का अनुमान जताया है। केरल में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश के चलते राज्य के कुछ हिस्सों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस महीने के अंत तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने की संभावना के बावजूद भारी बारिश को देखते हुए राज्य सरकार ने जिला अधिकारियों की एक बैठक बुलाई थी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश जारी किए थे।राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने पहले ही केरल में पांच दलों को तैनात कर दिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) ने लोगों से बारिश कम होने तक नदियों और अन्य जलाशयों से दूर रहने को कहा है। एसडीएमए ने लोगों से जब तक आपात स्थिति न हो पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा नहीं करने के लिए कहा है। साथ ही बारिश कम होने तक रात की यात्रा से बचने की भी सलाह दी है। जिला प्रशासन ने भी लोगों को तटीय क्षेत्रों के पास न जाने की चेतावनी दी है। आईएमडी ने पहले भविष्यवाणी की थी कि दक्षिण-पश्चिम मानसून, जिसे राज्य में एडवापति के नाम से भी जाना जाता है, के कारण पहली बारिश 27 मई तक हो सकती है। यह मानसून के आगमन की सामान्य तिथि से पांच दिन पहले ही मानसून की दस्तक हो जाएगी।

Published / 2022-05-17 17:42:46
प्री मॉनसून एक्टिविटी शुरू, 12 से 14 जून के बीच झारखंड पहुंचेगी मॉनसून एक्सप्रेस

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में चिलचिलाती गर्मी पड़ रही है। राजधानी रांची में तापमान 40 से 41 डिग्री के बीच दर्ज किया जा रहा है। ऐसे में गर्मी से बेहाल लोग झारखंड में मॉनसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक झारखंड के कुछ इलाकों में प्री मॉनसून एक्टिविटी दिखने लगी है। मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक उपेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक झारखंड में अभी प्री मॉनसून एक्टिविटीज देखने को मिल रही है, जिसकी वजह से झारखंड के कई हिस्सों में बादल गरजने के साथ बारिश शुरू हुई है। झारखंड के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र जैसे धनबाद, बोकारो, दुमका ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इन जिलों में गर्जन के साथ हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश भी देखने को मिल रही है। बंगाल की खाड़ी में मॉनसून की हलचल : मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में मॉनसून की हलचल शुरू हुई है। झारखंड में 12 से 15 जून के बीच मॉनसून के आने की संभावना है। मॉनसून ने अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी हिस्से में दस्तक दे दी है। केरल में मॉनसून 27 मई तक पहुंच जाएगा। मौसम पूर्वानुमान है कि अगले दो-तीन दिनों में पूरे अंडमान सागर, अंडमान निकोबार द्वीप समूहों, मध्य-पूर्व बंगाल की खाड़ी में मॉनसून छा जाएगा। मौसम विभाग के वैज्ञानिक अभिषेक आंनद के अनुसार राजधानी रांची में मंगलवार को भी धूल भरी आंधी और हल्के बादलों के आसार हैं। हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश की वजह से लोगों को लू से राहत मिलेगी। वहीं उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत के राज्यों को भी लू से राहत की उम्मीद है। अगले चौबीस घंटों में केरल, पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तर के पर्वतीय राज्यों में बारिश होनी की संभावना है।

Published / 2022-05-16 17:30:35
मानसून ने दी दस्तक, केरल में जल्द पहली बारिश की उम्मीद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने मानसून को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि मानसून आज अंडमान सागर और उससे सटे दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने दिल्ली वालों को भी गुड न्यूज दी है, जिसमें कहा गया है कि आज तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक गिर जाएगा। दिल्ली और यूपी के बांदा में रविवार को अधिकतम तापमान 49 डिग्री के पार पहुंच गया। मौसम विभाग के अधिकारी आरके जेनामणि ने इस मामले में न्यूज एजेंसी एएनआई से बात की है। उन्होंने कहा, अंडमान सागर और और दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर मानसून आज पहुंच चुका है। हमने केरल के लिए भविष्यवाणी की है कि यह 27 मई के आसपास आएगा। इसलिए, प्रगति और सभी निगरानी के अनुसार, यह दर्शाता है कि मानसून को लेकर हमारी भविष्यवाणी सही होगी। मौसम विभाग ने इस सप्ताह उत्तराखंड, केरल, मेघालय, असम समेत कई राज्यों में बारिश का अनुमान जताया है। राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को सुबह आसमान में आंशिक रूप से बादल छाने के साथ ही न्यूनतम तापमान सामान्य से चार डिग्री अधिक दर्ज किया गया। मौसम विज्ञान विभाग ने दिन में गरज के साथ छींटे पड़ने और आंधी चलने का अनुमान भी जताया था।

Published / 2022-05-13 17:13:55
15 मई को बंगाल की खाड़ी में रहेंगे मानसून के बादल, जानिए झारखंड का क्या रहेगा हाल...

टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची में अगले कुछ दिनों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। इसके अलावा झारखंड के अन्य जिलों में आसमान में बादल छाए रहेंगे। कुछ जिलों में बारिश की भी संभावना है। अंडमान के सागर में मानसून की एक्टिविटी बढ़ गई है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि 15 मई तक मानसून के बादल दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी तक पहुंच जाएंगे। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार मध्य प्रदेश से होता हुआ झारखंड तक साइक्लोनिक टर्फ बन रहा है, जिसका असर झारखंड के उत्तर पूर्व और पश्चिमी भागों में देखने को मिलेगा, इस वजह से आगामी 13, 14, 15, 16 और 17 मई तक राज्य के उत्तर पूर्वी भाग और इससे सटे पूर्वोत्तर भागों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश सकती है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने मानसून संबंधित एक बुलेटिन में सूचना दी है कि आगामी 15 मई को दक्षिण पूर्वी अंडमान सागर में मानसून के बादल स्थित दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने की संभावना है। झारखंड में साइक्लोनिक टर्फ की वजह से उत्तर पूर्वी जिलों में थोड़ी बहुत मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। इस बीच उत्तर पूर्वी भाग को छोड़कर बाकी जिलों में 3 से 4 डिग्री का तापमान में वृद्धि देखी जाएगी, जिसमें राजधानी रांची भी शामिल है।

Published / 2022-05-13 15:49:20
सावधान... 2080-99 तक 5 डिग्री बढ़ जायेगा दिल्ली-मुंबई का तापमान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी समिति की छठी आकलन रिपोर्ट पर आधारित ग्रीनपीस इंडिया के नए लू अनुमान के मुताबिक, अगर कार्बनडाई आॅक्साइड का वैश्विक उत्सर्जन 2050 तक दो गुना हो जाता है तो दिल्ली और मुंबई का औसत वार्षिक तापमान 1995-2014 की अवधि की तुलना में 2080-99 की अवधि में पांच डिग्री सेल्सियस ज्यादा होगा। राष्ट्रीय राजधानी का वार्षिक अधिकतम तापमान (1995 से 2014 तक जून महीने के रिकॉर्ड का औसत) 41.93 डिग्री सेल्सियस है। गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट में कहा गया कि यह 2080-99 की अवधि के दौरान बढ़कर 45.97 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाएगा और कुछ बेहद गर्म वर्षों में यह 48.19 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है। इसमें बताया गया कि हाल की लू में दिल्ली में 29 अप्रैल को अधिकतम 43.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो महीने के औसत अधिकतम तापमान से काफी ऊपर है। क्या कहती है रिपोर्ट : रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 1970 से 2020 तक के ऐतिहासिक दैनिक तापमान के विश्लेषण से पता चलता है कि केवल चार वर्षों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया है। >> रिपोर्ट में कहा गया है कि मुंबई का औसत वार्षिक तापमान 2080-99 की अवधि में 1995-2014 की अवधि की तुलना में पांच डिग्री सेल्सियस अधिक होगा और वार्षिक अधिकतम तापमान वर्तमान में 39.17 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 43.35 डिग्री सेल्सियस हो जाएगा। >> रिपोर्ट कहती है कि 31 डिग्री सेल्सियस के अनुमानित औसत वार्षिक तापमान के साथ चेन्नई अब औसत से चार डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म होगा। इसका वार्षिक अधिकतम तापमान वर्तमान में 35.13 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 2080-99 की अवधि में 38.78 डिग्री सेल्सियस हो जाएगा। भारत में लंबे समय तक चलेंगी गर्म हवाएं : ग्रीनपीस इंडिया ने कहा तापमान में इतनी ज्यादा और तेजी से वृद्धि का मतलब होगा कि भारत अधिक अभूतपूर्व और लंबे समय तक गर्म हवाएं चलेंगी, मौसम में अत्यधिक बदलाव होगा, अस्पताल में भर्ती होने वाले बढ़ेंगे और कृषि और वन्यजीवों के लिए अपूरणीय क्षति देखने को मिलेगी जो खाद्य और पोषण सुरक्षा को खतरे में डालेगी। ग्रीनपीस इंडिया के अभियान प्रबंधक अविनाश चंचल ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए लू घातक है। यह पारिस्थितिक तंत्र को भी खतरे में डालती है। हमारे पास इस तरह के अप्रत्याशित मौसमी घटनाओं को जलवायु परिवर्तन से जोड़ने के लिए पर्याप्त विज्ञान है। दुर्भाग्य से, अगर हम अभी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो खतरा केवल आवृत्ति, अवधि और परिमाण में वृद्धि करने वाला है। उन्होंने कहा कि अंतदेर्शीय शहरों में महासागरों द्वारा नियमन के अभाव में और तटीय क्षेत्रों की तुलना में उच्च तापमान सीमा के कारण लू का अधिक खतरा होता है। उन्होंने कहा कि तापमान में तेज वृद्धि से समान तापमान पैटर्न वाले विशेष रूप से दिल्ली, लखनऊ, पटना, जयपुर और कोलकाता जैसे शहरों में नागरिकों पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है। चंचल ने कहा कि दुर्भाग्य से संकट से सबसे बुरी तरह प्रभावित कमजोर तबका होगा। उन्होंने कहा कि शहरी गरीबों, बाहर काम करने वाले श्रमिकों, महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, लैंगिक अल्पसंख्यकों आदि पर जोखिम सबसे ज्यादा होगा क्योंकि उनकी सुरक्षात्मक उपायों तक पर्याप्त पहुंच नहीं है। जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी समिति जलवायु परिवर्तन से संबंधित विज्ञान का आकलन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र निकाय है। इसकी छठी आकलन रिपोर्ट तीन भागों में प्रकाशित की गई है। पहली अगस्त 2021 में, दूसरी फरवरी 2022 में और तीसरी अप्रैल 2022 में आई थी।

Published / 2022-05-13 04:29:58
सबसे पहले अंडमान -निकोबार पहुंचेगा मानसून

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सबसे पहले अंडमान-निकोबार पहुंचेगा मानसून-मौसमी गतिविधियां धीरे-धीरे मानसून की ओर अग्रसर हो रही हैं। इस बीच यह खबर भी सामने आई कि इस वर्ष मानसून 10 दिन पहले दस्तक देगा और 21 मई तक केरल के तट से टकराएगा। इस संबंध में मौसम केंद्र भोपाल के मौसम विज्ञानी श्री वेदप्रकाश सिंह का कहना है कि हर वर्ष की तरह इस साल भी मानसून सबसे पहले अंडमान -निकोबार पहुंचेगा। श्री सिंह ने कृषक जगत को बताया कि हर साल मानसून सबसे पहले अंडमान -निकोबार ही पहुंचता है। इस वर्ष भी चक्रवात (साइक्लोन) बन रहा है, जिससे पूर्वी हवाएं ज़्यादा मज़बूत हो जाएंगी और एक सप्ताह पहले अर्थात 25 तक मानसून अंडमान निकोबार तक पहुंच जाएगा। केरल में मानसून 1 जून तक ही आएगा। भारतीय मौसम केंद्र द्वारा 15 मई तक पूर्वानुमान जारी किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मौसम विभाग अप्रैल में पहला पूर्वानुमान जारी करता है, इसके बाद मई के दूसरे सप्ताह में दूसरा पूर्वानुमान जारी किया किया जाता है, जिसमें मानसूनी वर्षा की स्थिति स्पष्ट की जाती है। जहां तक वर्तमान मौसम की बात है तो मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर के ऊपर मध्य क्षोभमंडल की पछुवा पवनों के बीच ट्रफके रूप में 32 डिग्री उत्तर अक्षांश के उत्तर में अवस्थित है, जबकि चक्रवातीय परिसंचरण पूर्वोत्तर बांग्लादेश और विदर्भ के ऊपर सक्रिय हैं। साथ ही, विदर्भ और मराठवाड़ा से लेकर कर्नाटक तक हवाओं में असततता व्याप्त है। वहीं दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में अतिनिम्न दाब क्षेत्र सक्रिय है, जिसके और प्रभावशाली होकर कल तक चक्रवातीय तूफान में विकसित होने की संभावना बनी हुई है। 11 मई से अगले पश्चिमी विक्षोभ के प्रभावी होने की संभावना बनी हुई है।

Published / 2022-05-12 12:44:59
रिपोर्ट का दावा... 5 साल में ही डेढ़ डिग्री सेंटीग्रेड तक गर्म हो सकती है दुनिया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पिछले कुछ सालों से पर्यावरण के लिए ग्लोबल वार्मिंग एक चिंताजनक विषय बना हुआ है। पेरिस समझौते में गर्म होती पृथ्वी के औसत तापमान को नीचे बकरार रखने के लिए एक लक्ष्य तय हुआ था। औद्योगिक क्रांति काल के औसत तापमान की तुलना में वर्तमान औसत तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से काफी (संभव हो ते 1.5 डिग्री से भी) नीचे रखने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन हाल ही संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट ने चेताया है कि 1.5 डिग्री की सीमा तो अगले पांच साल में पार हो सकती है। खतरे में पेरिस समझौते के लक्ष्य : साल 2015 में पेरिस समझौते में में तय किए गए तापमान वृद्धि को नियंत्रित करने के लक्ष्यों में बदलाव करने के प्रयास पिछले साल ग्लासगो में हुए जलवायु सम्मेलन में किए गए थे लेकिन इन लक्ष्यों में कायम रखने पर ही सहमति बन सकी। अब संयुक्त राष्ट्र की विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अपने वार्षिक जलवायु अपडेट में कहा है कि संभावना है कि वैश्विक सतह के पास के तापमान पूर्व औद्योगिक काल से 1.5 डिग्री ज्यादा की वृद्धि 2022 स 2026 के किसी भी साल में होने की आधी आधी संभावना बन गई है। टूट सकता है 2016 का रिकॉर्ड : डब्ल्यूएमओ ने इस संभावना को 48 प्रतिशत रखा है और कहा है कि यह समय के साथ बढ़ रही है। इससे पेरिस समझौते की लक्ष्य टूट सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस बात के 90 प्रतिशत संभावना है कि की 2022-2026 के बीच किसी एक साल में पृथ्वी 2016 के रिकॉर्ड को तोड़ कर सबसे ज्यादा गर्म हो सकती है। निचले लक्ष्य की ओर : इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साल 2022-2026 के बीच का पांच साल का औसत तपमान पिछले पांच साल (2017-2021) के औसत तापमान से ज्यादा होने की संभावना भी करीब 93 प्रतिशत है। डब्ल्यू एम ओ के प्रमुख पेटेरी तालास ने कहा कि यह अध्ययन दशार्ता है कि उच्च स्तर की वैज्ञानिक क्षमताओं के साथ हम अस्थायी तौर पर पेरिस समझौते के निचले लक्ष्य तक पहुंच रहे हैं। अभी से ही बढ़ रहा है तापमान : तालास ने कहा कि 1.5 डिग्री सेंटीग्रेट का आंकड़ा कोई बेतरतीब संख्यिकीय आंकड़ा नहीं है। बल्कि यह तो एक सांकेतिक बिंदु है जो दशार्ता कि जलवायु प्रभाव लोगों और यहां तक कि पूरे ग्रह के लिए तेजी से नुकसानदेह बनता जा रहा है। पेरिस समझौते के 1।5डिग्री का स्तर लंबे समय की वार्मिंग को दशार्ता है। लेकिन तात्कालिक बढ़ोत्तरी ही वैश्विक तापमान वृद्धि की आवृति को बढ़ा रहे हैं

Published / 2022-05-11 17:33:35
"असानी" ने फिर बदला रास्ता, आंध्र में भारी बारिश की चेतावनी, ओडिशा के 5 जिलों में हाई अलर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि भीषण चक्रवात असानी बुधवार को एक चक्रवाती तूफान में तब्दील होते हुए उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ गया और इस दौरान क्षेत्र में 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। IMD के मुताबिक, चक्रवात "असानी" के गुरुवार तक और कमजोर पड़ने और एक निम्न दबाव वाले क्षेत्र में तब्दील होने की संभावना है। मौसम विभाग ने अपने राष्ट्रीय बुलेटिन में बताया, असानी के अगले कुछ घंटों में उत्तर की ओर बढ़ने की संभावना है। बुधवार को दोपहर से शाम के बीच इसके एक बार फिर जोर पकड़ने और नरसापुर, यानम, काकीनाड़ा, तुनी तथा विशाखापत्तनम तटों के साथ उत्तर-उत्तर पूर्व की ओर धीरे-धीरे बढ़ने और रात में उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों से पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में समा जाने की संभावना है। मौसम विभाग के वैज्ञानिक आरके जेनामणि ने बताया कि असानी चक्रवात पूर्व की तरफ बढ़ गया है। फिलहाल यह आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के पूर्व में है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में अत्यधिक वर्षा होगी। इलके लिए रेल अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि कल यानी गुरुवार को यहां अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होगी। इसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जेनामणि ने बताया कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, ओडिशा सरकार ने पांच दक्षिणी जिलों मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा, गंजाम और गजपति में हाई अलर्ट की घोषणा की है। इन इलाकों में चक्रवात का असर दिखने की आशंका है, जो ओडिशा से लगभग 200 किलोमीटर दूर काकीनाडा और विशाखापत्तनम के बीच पहुंच सकता है। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा, कालाहांडी, गंजाम, गजपति, कंधमाल, नयागढ़, खुर्दा, पुरी, कटक और भुवनेश्वर में हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ने का पूर्वानुमान है। विशेष राहत आयुक्त पीके जेना ने बताया कि राज्य में उत्पन्न होती स्थिति के मद्देनजर ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल (ओडीआरएएफ) की 60 इकाइयों और दमकल कर्मियों के 132 दलों को तैनात किया गया है। NDRF ने 50 दलों का किया गठन : राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) ने प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत कार्यों को अंजाम देने के लिए कुल 50 दलों का गठन किया है। एनडीआरएफ के एक प्रवक्ता ने बताया कि 50 में से 22 दलों को पश्विम बंगाल, ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश में जमीनी स्तर पर तैनात किया गया है, जबकि अन्य 28 दलों को इन्हीं राज्यों में तैयार रहने को कहा गया है। इस बीच, कोलकाता में मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि चक्रवात से पश्चिम बंगाल के गांगेय क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। बंगाल में भारी बारिश की संभावना : विभाग ने कहा, पश्चिम बंगाल के गांगेय क्षेत्र पूर्व तथा पश्चिम मेदिनीपुर, उत्तर तथा दक्षिण 24 परगना और नादिया जिलों में गुरुवार सुबह तक एक या दो स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। विभाग के अनुसार, कोलकाता में सुबह साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटे में 44.8 मिमी बारिश हुई। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, पश्चिम-मध्य और उससे सटी उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में समुद्र में बुधवार शाम तक काफी हलचल रहने और उसके बाद बृहस्पतिवार को उसी क्षेत्र में स्थिति बेहद खराब रहने का पूर्वानुमान है। मछुआरों को अगले कुछ दिनों तक क्षेत्र से दूर रहने को कहा गया है। उसने कहा कि इस तूफान से आंध्र प्रदेश के कृष्णा के निचले इलाकों, पूर्वी तथा पश्चिम गोदावरी जिलों और पुडुचेरी के यानम में बाढ़ आ सकती है। आईएमडी चक्रवाती तूफान पर नजर बनाए हुए है और सात मई से अभी तक 30 राष्ट्रीय बुलेटिन जारी कर चुका है, ताकि स्थानीय प्रशासन को तूफान के बारे में जानकारी और उससे निपटने के सुझाव दे पाए।

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