एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में इस समय मौसम का मिजाज बदल रहा है। जहां दक्षिण के राज्यों में बारिश हो रह है, वहीं उत्तर भारत में अभी शुष्क मौसम है। इसके अलावा अगर देश के पहाड़ी राज्यों की बात करें तो वहां ठंड पड़नी शुरू हो गई है। लेकिन इस बीच, भारतीय मौसम विभाग ने सर्दियों को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। भारतीय मौसम विभाग ने मंगलवार को जानकारी दी है कि पूरे भारत को सर्दियों के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। विभाग ने देश के अधिकांश हिस्सों में नवंबर में रात का तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान जताया है। दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि नवंबर के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर के बड़े हिस्से, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में भी दिन में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। सर्दी में अभी देरी : यहां भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने संभावना जताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में बादलों के छाए रह सकते हैं इसका कारण यह है कि न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। इसका मतलब यह होगा कि इस बार नवंबर के दौरान शीत लहर की स्थिति कम होगी। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में नवंबर के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। गौरतलब है कि नवंबर के लिए दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के लिए औसत वर्षा 118.7 मिमी है जिसमें इस बार 23 प्रतिशत की कमी है। महापात्र ने कहा कि पूर्वोत्तर मानसून तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में 29 अक्टूबर को दस्तक देगा। गौरतलब है कि उत्तर भारत में, सर्दियां नवंबर के मध्य से शुरू हो जाती हैं। जब न्यूनतम तापमान धीरे-धीरे गिरकर 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है और रातें सर्द हो जाती हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा है कि हाल में हुई बेमौसम बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। ये बारिश जलवायु परिवर्तन का नतीजा है। राज्य सरकारें अपने-अपने क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर रही हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए पीएम मोदी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
टीम एबीएन, रांची। दशहरा, दीपावली और छठ पर्व के समापन के साथ जिंदगी की गाड़ी रफ्तार पकड़ने लगी है। बारिश का मौसम खत्म हो चुका है। सर्दी दस्तक दे चुकी है। सुबह और शाम के वक्त हाफ स्वेटर की जरूरत महसूस होने लगी है। पिछले 24 घंटे में खूंटी में न्यूनतम पारा 13.9 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ है। रांची में न्यूनतम तापमान 15.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है। जबकि सिमडेगा में 14.6 डिग्री सेल्सियस, गुमला में 14.8 डिग्री सेल्सियस और डाल्टेनगंज में 14.9 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक जमशेदपुर में सबसे ज्यादा तापमान 32 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है। अगले सात दिनों तक यानी 7 नवंबर तक पूरे राज्य में सुबह के वक्त कोहरा और धुंध देखने को मिलेगा। इसके बाद आसमान साफ हो जाएगा और मौसम शुष्क रहेगा। रांची की बात करें को अगले कुछ दिनों तक अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि न्यूनतम तापमान 15 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। उत्तर पूर्व झारखंड के देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज में अधिकतम तामपान 30 से 32 डिग्री और न्यूनतम तामपान 17 से 19 डिग्री के बीच रहेगा। उत्तर पश्चिम झारखंड के कोडरमा, चतरा, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा और पलामू में अधिकत तापमान 30 से 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 से 17 डिग्री तक रहेगा। सेंट्रल झारखंड के बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, खूंटी और गुमला में अधिकतम तामपान 28 से 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 से 17 डिग्री तक रहने का अनुमान है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक अगले सात दिनों तक मौसम सुहाना रहेगा। दिन के वक्त धूप खिली रहेगी, इसलिए सर्दी का एहसास नहीं होगा। हालांकि सुबह और शाम के बाद सर्दी महसूस होगी। डॉक्टरों का भी कहना है कि सर्दी के शुरूआती मौसम में विशेष एहतियात बरतने की जरूरत होती है। ऐसे समय में थोड़ी सी लापरवाही इंसान को कफ एंड कोल्ड की शिकार बना सकती है। बच्चों को निमोनिया होने का भी खतरा रहता है। दूसरी तरफ ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों को ऐसे मौसम में ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र से तमिलनाडु व आसपास के राज्यों में बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने चेन्नई समेत कुछ जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके चलते तमिलनाडु के तीन जिलों के स्कूल-कॉलेजों में एक नवंबर को अवकाश घोषित किया गया है। आईएमडी की भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए नागपट्टिनम, मयिलादुथुराई और तिरुवरुर जिलों के स्कूल और कॉलेज आज बंद रहेंगे। मौसम विभाग चेन्नई के अनुसार आज भारी बारिश के साथ बादल छाए रहेंगे। चेन्नई के कई इलाकों में आज सुबह बारिश हुई। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार दक्षिण पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे श्रीलंका तट पर चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। वहीं, एक ट्रफ रेखा ऊपर चक्रवात हवाओं के रूप में तमिलनाडु और केरल होते हुए दक्षिण-पूर्व अरब सागर तक फैली हुई है। उधर, पश्चिमी हिमालय के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। एक अन्य पश्चिमी विक्षोभ 4 नवंबर तक जम्मू-कश्मीर पहुंच सकता है। इसके असर से उत्तर भारत में बारिश, बर्फबारी हो सकती है और ठंड चमक सकती है। पिछले 24 घंटों से तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय है। इसके असर से तटीय आंध्र प्रदेश, तटीय तमिलनाडु और केरल के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। कुछे स्थानों पर भारी बारिश हुई। आंतरिक तमिलनाडु में छिटपुट हल्की बारिश हुई। जम्मू कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद में हल्की बारिश और हिमपात हुआ। अगले 24 घंटों में तटीय आंध्र प्रदेश और तटीय तमिलनाडु में कुछ स्थानों मध्यम से भारी बारिश संभव है। इसी तरह आंतरिक तमिलनाडु, केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और रायलसीमा में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में एक या दो स्थानों पर हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है। उत्तराखंड में छिटपुट हल्की बारिश और हिमपात हो सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रबी फसलों की बुआई अब और रफ्तार पकड़ने लगी है। अब तक गेहूं की बुआई शुरू नहीं होने के बावजूद कुल रबी फसलों की बुआई में अच्छी खासी वृद्धि होना काफी महत्वपूर्ण है। पिछले साल की तुलना में इस साल शुक्रवार तक रबी फसलों की बुआई में 15 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बेमौसम बारिश से धान की कटाई में हो रही देरी की वजह से अब तक गेहूं की बुआई शुरू नहीं हो सकी है। हालांकि सरसों और चने की बुआई तेजी से हो रही है। मिट्टी की नमी का बेहतर उपयोग करने के लिए किसान जल्द से जल्द बुआई करने पर जोर दे रहे हैं। भारत सरकार के कृषि व किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन में 28 अक्टूबर तक देश भर में 32.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी फसलों की बुआई हो चुकी है। जो पिछली समान अवधि में हुई 27.69 लाख हेक्टेयर में बुआई से 15.89 फीसदी ज्यादा है। बुआई में इतनी वृद्धि तब होना और भी महत्वपूर्ण है जब प्रमुख रबी फसल गेहूं की बुआई शुरू भी नहीं हुई है। इसके बावजूद रबी फसलों की बुआई बढ़ने की अहम वजह किसानों द्वारा सरसों और चने की बोआई पर जोर देना है। अब तक 18.99 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुआई हो चुकी है, जो पिछले साल की समान अवधि में 14.21 लाख हेक्टेयर में हुई बुआई से 33.63 फीसदी अधिक है। अब तक हुई कुल रबी फसलों की बुआई में सरसों की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है। पूरे सीजन सरसों का रकबा आमतौर पर करीब 64 लाख हेक्टेयर रहता है। इस लिहाज से देखा जाए तो सरसों की 30 फीसदी बुआई हो चुकी है। कुल बुआई में चने की हिस्सेदारी भले ही सरसों से कम हो, लेकिन बुआई में वृद्धि दर इसकी ज्यादा है। 28 अक्टूबर तक 6.96 लाख हेक्टेयर में चने की बुआई हो चुकी है, जो पिछले साल की समान में चने की बुआई 4.12 लाख हेक्टेयर से 68.93 फीसदी अधिक है। अब तक कुल बुआई में चने की हिस्सेदारी करीब 22 फीसदी है। ज्वार की बुआई बढ़कर दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। अब तक 3.42 लाख हेक्टेयर में ज्वार की बुआई हो चुकी है, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह आंकड़ा 1.58 लाख हेक्टेयर था। किसान स्वराज संगठन के अध्यक्ष और मध्य प्रदेश के किसान भगवान मीणा का कहना है कि इस बार लंबे समय तक बारिश होने के कारण खेतों में नमी है, जो खासकर चने और सरसों की बुआई होने के बाद भी इसकी फसल के लिए फायदेमंद रहने वाली है। इसलिए अभी किसान सरसों और चने की बुआई पर जोर दे रहे हैं। भाव अच्छे मिलने के कारण इस साल सरसों की बुआई काफी बढ़ सकती है। मीणा गेहूं की बुआई के बारे में कहते हैं कि अगले सप्ताह से गेहूं की बोआई भी शुरू होने की उम्मीद है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चक्रवात सितरंग ने भारत और बांग्लादेश में खासी तबाही मचाई है। बांग्लादेश में जहां चक्रवात के कारण कम से कम 35 लोगों की मौत हो गई तो वहीं असम में भी इसका खासा असर दिख रहा है। असम में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है और वहां पर तूफान की वजह से आई भीषण बाढ़ से 83 गांवों के 1100 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। भारी बारिश और बाढ़ से कई घर क्षतिग्रस्त हो गये। जबकि बांग्लादेश में करीब एक करोड़ लोग बिजली के बिना रहने को मजबूर हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक तूफान से 1146 लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, सितरंग की वजह से करीब 325.501 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है। सोमवार रात आए चक्रवाती तूफान के कारण राज्य के नागांव जिले के कई हिस्सों में बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंभे तक उखड़ गये। रिपोर्टों के अनुसार, तूफान के कारण मध्य असम जिले के कलियाबोर, बामुनि, सकमुथिया चाय बागान और बोरलीगांव क्षेत्रों में कई घर क्षतिग्रस्त हो गये हैं। हालांकि क्षेत्र में अभी तक तूफान से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। गांव के मुखिया ने कहा, हमारे कलियाबोर क्षेत्र में तूफान से कई घर क्षतिग्रस्त हो गये और कई पेड़ भी उखड़ गये हैं। एक सरकारी ग्राम प्रधान के रूप में, मैंने पूरे गांव का दौरा किया है और मैं सर्कल अधिकारी को यहां पर हुए नुकसान की रिपोर्ट सौंपूंगा। इस बीच, चक्रवात सितरंग अलर्ट के बीच पश्चिम बंगाल में दक्षिण 24 परगना में बक्खाली समुद्र तट के तट पर टाइड आ गया है। सिविल डिफेंस की ओर से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को समुद्र के पास नहीं जाने की चेतावनी दी जा रही है। दूसरी ओर, चक्रवात सितरंग के कारण बांग्लादेश के दक्षिणी तट और मध्य मध्य हिस्सों में कम से कम 35 लोगों की मौत हो गई तथा कई मकान नष्ट हो गये। बांग्ला दैनिक समाचार पत्र प्रोथोम एलो की खबर के मुताबिक, चक्रवात सितरंग ने कल मंगलवार को तड़के बांग्लादेश के तटीय क्षेत्र में दस्तक दिया और बाद में कमजोर पड़ गया। अनौपचारिक गणना के अनुसार, चक्रवात के कारण कम से कम 35 लोगों की जान चली गयी। बांग्लादेश के आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय के राज्य मंत्री इनामुर रहमान ने मंगलवार को ढाका में कहा कि चक्रवात से पूरे बांग्लादेश में करीब 10,000 घर क्षतिग्रस्त हो गये हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, 6,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को भी नुकसान पहुंचा है। चक्रवात के चलते कई मकान ढह गये। इसके अलावा कई पेड़ उखड़ गये, सड़क संपर्क और बिजली आपूर्ति बाधित हो गयी। मंगलवार को तटीय क्षेत्र के निकटवर्ती जिलों में करीब एक करोड़ लोगों को बिजली की आपूर्ति नहीं हो पायी। मंगलवार शाम छह बजे तक, 64 में से 16 प्रशासनिक जिलों से 35 लोगों की मौत होने की सूचना मिली थी। हालांकि, अधिकारियों ने अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि की है और शेष मामलों को लापता की श्रेणी में रखा है। मंगलवार शाम तक चक्रवात सितरंग से मरने वालों की संख्या 22 हो गई थी। बंगाल की खाड़ी में बने ऊष्णकटिबंधीय चक्रवात सितरंग के बांग्लादेश तट की ओर बढ़ने से पहले अधिकारियों ने सोमवार को हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चक्रवात सितरंग ने बांग्लादेश में तबाही मचानी शुरू कर दी है। अब तक यहां सात लोगों की मौत की सूचना है। अधिकारियों ने हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। आपदा मंत्रालय के नियंत्रण कक्ष के प्रवक्ता के हवाले से एएफपी ने बताया कि बरगुना, नरैल, सिराजगंज जिलों और भोला के द्वीप जिले में कम से कम सात लोग मारे गये हैं। सितरंग चक्रवात के मद्देनजर सोमवार को असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा में रेड अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि 26 अक्तूबर तक हैलाकांडी, करीमगंज, कछार, दीमा हसाओ, पूर्व और पश्चिम कार्बी आंगलोंग, मोरीगांव, नगांव, कामरूप मेट्रो, कामरूप, गोलपारा, गोलाघाट, जोरहाट और शिवसागर जिलों के कुछ हिस्सों में गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। चक्रवात सितरंग के असर के चलते पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में तेज बारिश शुरू हो गई है। इस चक्रवात का असर जिन इलाको में सबसे ज्यादा रहने की आशंका है उसमें दक्षिण 24 परगना और उत्तर 24 परगना शामिल है। इसके अलावा मिदनापुर और मुर्शिदाबाद में तेज बारिश का अनुमान है। इसके अलावा कोलकाता, हावड़ा और हुगली में भी अलर्ट जारी किया गया है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ टीमों की तैनाती जगह जगह कर दी गई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरे दबाव का क्षेत्र रविवार शाम तक चक्रवाती तूफान में बदल गया है। जिससे पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में भारी बारिश होने और 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि रविवार की सुबह सागर द्वीप के दक्षिण में 700 किमी दूर मौजूद मौसम स्थिति उत्तर-पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ रही है और सोमवार को इसके फिर से उत्तर-पूर्वी दिशा की ओर लौटने तथा टिंकोना द्वीप और सैंडविप के रास्ते बांग्लादेश तट को पार करने का अनुमान है। मौसम विभाग ने एक बुलेटिन में कहा कि सोमवार को तटीय जिलों-दक्षिण 24 परगना और उत्तर 24 परगना में भारी से बहुत भारी तथा पूर्वी व पश्चिमी मिदनापुर में भारी बारिश होने का अनुमान है। वहीं, कोलकाता, हावड़ा और हुगली में सोमवार और मंगलवार को मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है। विभाग ने कहा कि मंगलवार को उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना तथा नदिया में भारी बारिश होगी। यह मौसम घटनाक्रम ऐसे समय हो रहा है जब लोग दो साल बाद बड़े पैमाने पर काली पूजा और दीपावली मनाने की तैयारी कर रहे हैं। कोविड-19 के चलते पिछले दो साल सादगी से ये त्योहार मनाये गये थे। थाईलैंड के सुझाव के अनुसार चक्रवात का नाम सितरंग रखा जा सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि गुरुवार को एक कम दबाव का क्षेत्र बनने और उसके पश्चिम-उत्तर की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही इसके शनिवार की सुबह तक इसके और अधिक प्रबल होने की संभावना है। इससे अगले 48 घंटों यानी सोमवार तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती तूफान में बदलने की पूर्ण संभावना है। आपको बता दें कि 24 अक्टूबर को देश में दीपावली का त्योहार मनाया जायेगा। आईएमडी ने कहा कि एक ट्रफ रेखा चक्रवाती परिसंचरण से उत्तरी अंडमान सागर और इसके पड़ोस से निचले क्षोभमंडल स्तरों में बंगाल की दक्षिण खाड़ी में तमिलनाडु तट तक चल रही है। इसके कारण शनिवार तक तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और लक्षद्वीप में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। आईएमडी ने कहा, 19-22 अक्टूबर को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में व्यापक रूप से अलग-अलग जगहों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। अगले दो दिनों के दौरान पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर हल्की बारिश और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। वहीं, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के अधिक हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना है।
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