टीम एबीएन, रांची। रांची के आने वाले 2-3 दिनों में लोगों को कड़ाके की ठंड के लिए तैयार रहने की जरूरत है; क्योंकि तापमान में 3 से 4 डिग्री की गिरावट की संभावना है। यहां फिलहाल दिन का तापमान 26 डिग्री के आसपास रह रहा है। इस वजह से कड़ी धूप में लोगों को थोड़ी गर्मी का एहसास हो रहा है। सुबह 10 बजे के बाद कड़ाके की धूप निकलती है, इस वजह से ठंड का असर कम होता चला जाता है।
रांची मौसम विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक प्रीति गुणवानी ने कहा कि रांची सहित पूरे झारखंड में दिन का तापमान 26 डिग्री के आसपास रहने के आसार हैं। इसमें कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। वहीं रात के तापमान में 3 से 4 डिग्री की गिरवाट की संभावना है। रात में पारा फिलहाल 12 से 14 डिग्री है, जो घटकर या 9 से 10 डिग्री जा सकता है। यानी रात में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। राज्य में शीतलहर की शुरुआत हो गयी है। खासकर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में शीतलहर चल रही है। इसका असर पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार और लोहरदगा जिले में देखने को मिल रहा है। डाल्टनगंज में न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री पहुंच गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वैश्विक जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (सीसीपीआई) में भारत को शीर्ष पांच देशों में और जी-20 देशों में पहला स्थान दिया गया है। यह सूचकांक जर्मनी में स्थित जर्मन वॉच, न्यू क्लाइमेट इंस्टीट्यूट और क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क इंटरनेशनल द्वारा प्रकाशित किया जाता है। सीसीपीआई का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय जलवायु राजनीति में पारदर्शिता बढ़ाना है और जलवायु संरक्षण प्रयासों और अलग-अलग देशों द्वारा की गई प्रगति की तुलना करना है।
भारत को दुनिया के शीर्ष 5 देशों में और जी-20 देशों में सर्वश्रेष्ठ स्थान मिला
बिजली मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है, भारत को अपने जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन के आधार पर दुनिया के शीर्ष 5 देशों में और जी-20 देशों में सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (सीसीपीआई, 2023) के अनुसार भारत ने दो स्थानों की छलांग लगाई और अब 8वें स्थान पर है। नवंबर 2022 में कॉप27 (कॉप27) में जारी सीसीपीआई की नवीनतम रिपोर्ट में चार छोटे देश डेनमार्क, स्वीडन, चिली और मोरक्को भारत से ऊपर क्रमशः चौथे, पांचवें, छठे और सातवें स्थान पर हैं। किसी भी देश को पहली, दूसरी और तीसरी रैंक नहीं दी गई। सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की रैंक सबसे अच्छी है।
2005 के बाद से सालाना प्रकाशित सीसीपीआई 59 देशों और यूरोपीय संघ के जलवायु संरक्षण प्रदर्शन को ट्रैक करने के लिए एक स्वतंत्र निगरानी तंत्र है। हर साल सीसीपीआई मूल्यांकन किए गए देशों के भीतर महत्वपूर्ण सार्वजनिक और राजनीतिक बहसें शुरू करता है। वैश्विक ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन के 92 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार इन 59 देशों के जलवायु संरक्षण प्रदर्शन का मूल्यांकन चार श्रेणियों में किया जाता है - जीएचजी उत्सर्जन (समग्र स्कोर का 40 प्रतिशत), नवीकरणीय ऊर्जा (20 प्रतिशत), ऊर्जा उपयोग (20 प्रतिशत) और जलवायु नीति (20 प्रतिशत)।
भारत को जीएचजी उत्सर्जन और ऊर्जा उपयोग श्रेणियों में उच्च रेटिंग मिली
बयान में कहा गया है कि भारत ने जीएचजी उत्सर्जन और ऊर्जा उपयोग श्रेणियों में उच्च रेटिंग अर्जित की है, जबकि जलवायु नीति और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए मध्यम रेटिंग प्राप्त की है। नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से उपयोग और ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों के लिए मजबूत ढांचे की दिशा में भारत की आक्रामक नीतियों ने काफी प्रभाव दिखाया है। सीसीपीआई रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने 2030 उत्सर्जन लक्ष्य को पूरा करने के लिए ट्रैक पर है। सीसीपीआई द्वारा दी गई रैंकिंग भारत को शीर्ष 10 रैंक में एकमात्र जी-20 देश के रूप में रखती है। इसमें कहा गया है कि भारत अब जी-20 की अध्यक्षता ग्रहण करेगा और यह दुनिया को अपनी जलवायु शमन नीतियों जैसे ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों की तैनाती और अन्य ऊर्जा संक्रमण कार्यक्रमों को दिखाने का एक उपयुक्त समय होगा।
टीम एबीएन, रांची। इन दिनों देश के उत्तरी इलाकों में बर्फबारी जारी है। जिसके कारण यूपी बिहार और झारखंड के मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। झारखंड में भी इन दिनों लगातार ठंड बढ़ रही है। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार राज्य में बीते चार दिनों से आसमान में बादल छाए हुए हैं। जिसके कारण लोगों को ठंड का एहसास हो रहा है। इन दिनों राज्य में तेज हवाओं और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के चलते तापमान में भी गिरावट हो रही है।
वहीं, राजधानी रांची में पिछले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां पर 1.3 डिग्री सेल्सियस तापमान में बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले रांची का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया था। लेकिन 24 घंटों में बढ़ोतरी के बाद राजधानी का न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
राज्य में अगले दो से तीन दिनों में मौसम की स्थिति में बदलाव देखने को मिल सकता है। इस दौरान तापमान में गिरावट की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के अपडेट के अनुसार तमिलनाडु में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। जिसके कारण कर्नाटक तक इसका असर दिखाई दे रहा है।
दक्षिणी पश्चिमी हवाएं चल रही हैं, जिसके चलते राज्य में आसमान में बादल छाये हुए हैं। इस दौरान तापमान में गिरावट होने की संभावना है। वहीं, 24 नवंबर के बाद तापमान में गिरावट होने की संभावना भी बनी हुई है और मौसम शुष्क बना रहेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। लगातार बन रहे पश्चिमी विक्षोभ के असर से पहाड़ों पर बर्फबारी का सिलसिला तेज हो सकता है। इसके साथ ही मैदानी भागों में अब उत्तरी बयार बहने लगेगी। इसके असर से देश के तमाम राज्यों में तापमान में गिरावट आयेगी।
मौसम विभाग के अनुसार बुधवार से हवाओं की दिशा बदलकर उत्तरी हो जाएगी। ये हवाएं हिमालय के पहाड़ों से होकर आएंगी, इसलिए इनके असर से दिन व रात के तापमान में गिरावट आयेगी। इससे सुबह व रात को ठंड बढ़ेगी। अगले दो-तीन दिनों में रात का तापमान तेजी से गिरेगा।
हिसार स्थित मौसम विशेषज्ञ डॉ चंद्रमोहन ने बताया कि वर्तमान में देश के उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहे हैं। इनकी वजह से उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में भारी हिमपात हो रहा है। कुछ मैदानी राज्यों में हल्की बारिश भी हुई है। 16 व 19 नवंबर को भी कमजोर श्रेणी के पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होंगे।
बर्फ की सफेद चादर में लिपटे हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर के पहाड़
हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर के पहाड़ बर्फ की सफेद चादर में लिपटे दिखाई देने लगे हैं। अब दिल्ली, हरियाणा, यूपी, बिहार, राजस्थान, मप्र समेत समूचे उत्तर पश्चिमी व उत्तर पूर्वी राज्यों में ठंड बढ़ेगी। सुबह व शाम के समय धुंध भी देखने को मिलेगी। कई राज्यों में न्यूनतम तापमान 10 से 15 डिग्री तक पहुंच सकता है।
बंगाल की खाड़ी में बनेगा कम दबाव का क्षेत्र
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों के दौरान उत्तर पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। इसके साथ ही आज दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी और उसके पड़ोस के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पिछले दो दिनों से कनकनी बढ़ गई है इसके पीछे की वजह उत्तरी विक्षोभ और देश के उत्तरी भाग में बर्फबारी, बारिश और पश्चिम-उत्तर पश्चिमी हवा को बताया जा रहा है। इसके चलते झारखंड के प्रमुख शहरों का तापमान गिर गया है। इसमें सर्वाधिक ठंडा शहर डाल्टनगंज बना रहा। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कोहरा भी पड़ने लगा है। अगले दो दिन मौसम में बदलाव की उम्मीद नहीं है। लेकिन 17 और 18 नवंबर को तापमान में गिरावट आ सकती है।
क्या कहते हैं मौसम विभाग के जानकार
रांची मौसम विज्ञान केंद्र के एक्टिंग डायरेक्टर अभिषेक आनंद ने अगले पांच दिनों का मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार अगले दो दिन (15 और 16 नवम्बर) को न्यूनतम तापमान में कोई खास परिवर्तन या गिरावट नहीं होगा, लेकिन 17-18 नवंबर से एक बार फिर राज्य में न्यूनतम तापमान में गिरावट होगी और राज्य में ठंड बढ़ेगी।
अगले पांच दिन राज्य में पलामू और उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में शुष्क रहेगा मौसम
मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार अगले पांच दिन राज्य में पलामू और उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में मौसम शुष्क रहेगा। हालांकि सुबह हल्का कोहरा पड़ने की भी संभावना है। मौसम केंद्र रांची के कार्यकारी निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा कि अभी तापमान में उतार चढ़ाव का दुष्प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसलिए ठंडी हवा से खुद को बचाने की जरूरत है और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड देश के उन प्रदेशों में है, जिसका मिजाज जलवायु परिवर्तन की वजह से बुरी तरह बिगड़ रहा है। यहां की खेती, वर्षा, तापमान, भूमिगत जल, मौसम के पैटर्न आदि में बदलाव आ रहा है। इस बात की तस्दीक सरकार से लेकर एजेंसियों तक की रिपोर्ट करती है। वर्ष 2020 में आईआईटी-मंडी, गुवाहाटी और आईआईएससी बेंगलुरु ने एक रिसर्च के आधार पर भारत के राज्यों की क्लाइमेट वल्नरबिलिटी इंडेक्स रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें सबसे संवेदनशील राज्यों में झारखंड के अलावा मिजोरम, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम, बिहार, अरुणाचल प्रदेश व पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इस इंडेक्स में देश के जिन टॉप-100 संवेदनशील जिलों को चिन्हित किया गया है, उसमें 60 फीसदी जिले झारखंड, असम और बिहार के हैं। पिछले साल भारत सरकार की एक रिपोर्ट (क्लाइमेट वल्नरेबिलिटी असेसमेंट फॉर एडेप्टेशन प्लानिंग इन इंडिया) से भी खुलासा हुआ, कि जलवायु परिवर्तन के कारण पड़ने वाले दुष्प्रभावों के लिहाज से झारखंड, देश के सर्वाधिक संवेदनशील राज्यों में शामिल है। केंद्र सरकार ने अभी हाल में संसद में भी स्वीकार किया है कि झारखंड देश के उन प्रदेशों में शामिल है, जहां जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाले चुनौतियां सबसे ज्यादा है। इसी साल संसद के मॉनसून सत्र में झारखंड पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर राज्य के भाजपा सांसद दीपक प्रकाश ने एक सवाल पूछा था। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने बताया था। झारखंड में 6 जिले ऐसे हैं, जहां कृषि-फसल चक्र पर जलवायु परिवर्तन का व्यापक और प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सरकार ने इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) और सर्वे प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के हवाले से संसद में बताया था कि झारखंड के गढ़वा, गोड्डा, गुमला, पाकुड़, साहिबगंज और पश्चिमी सिंहभूम जिले ऐसे हैं, जिन्हें जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से बेहद जोखिम वाली श्रेणी में चिन्हित किया गया है। झारखंड के 18 ग्रामीण जिलों को किया शामिल : आईसीएमआर ने अपने एनआईसीआरए (नेशनल इनोवेशन ऑन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर) प्रोजेक्ट के तहत पूरे देश में क्लाइमेट चेंज से कृषि पर पड़ रहे असर का अध्ययन किया है। इस अध्ययन में झारखंड के 18 ग्रामीण जिलों को शामिल किया गया था। इनमें से जिन छह जिलों को सबसे अधिक जोखिम वाली कैटेगरी में माना गया है, वहां के बारे में बताया गया है कि चावल, गेहूं, मक्का, मूंगफली, चना और आलू जैसी फसलों के उत्पादन पर जलवायु परिवर्तन का बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने भाजपा सांसद के सवाल के जवाब में यह भी बताया था कि इन जिलों में चावल, गेहूं, दलहन और टमाटर की ऐसी किस्में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। जिनका उत्पादन अधिक तापमान या अत्यधिक वर्षा की स्थिति में भी सुनिश्चित किया जा सके। रांची के पर्यावरणविद् और भूगर्भशास्त्री डॉ नीतीश प्रियदर्शी देश-विदेश की कई संस्थाओं के लिए जलवायु परिवर्तन, भूगर्भ जल और झारखंड से पर्यावरण से जुड़े विषयों पर रिसर्च कर चुके हैं। वह आईएएनएस को बताते हैं कि ढाई दशकों में अलग-अलग रिसर्च, स्टडी और सर्वे के आधार पर इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि झारखंड के प्राय: सभी क्षेत्रों में तापमान और वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन आया है। इसी वर्ष राज्य में जून-जुलाई और मध्य अगस्त में बारिश नहीं के बराबर होने से सूखे की स्थिति पैदा हो गई और खरीफ की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके विपरीत मध्य अगस्त से सितंबर-अक्टूबर तक अच्छी बारिश हुई। अप्रैल से जून-जुलाई तक झारखंड के उन इलाकों में भी तापमान में वृद्धि का रिकॉर्ड देखा, जिनकी पहचान कभी हिल स्टेशन के तौर पर हुआ करती थी। डॉ प्रियदर्शी का दावा है कि खनन वाले क्षेत्रों में झारखंड में उपजाऊ भूमि का जितनी तेजी से क्षरण हो रहा है। अगर उस पर नियंत्रण के प्रभावी कदम नहीं उठाये गये तो आने वाले 100-150 वर्षों में राज्य का एक बड़ा इलाका रेगिस्तानी भूमि में तब्दील हो सकता है। जंगलों की लगातार हो रही कटाई, अनियोजित नगरीय विकास, राज्य में खनन क्षेत्रों के विस्तार, भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन की वजह से यहां जलवायु परिवर्तन का प्रतिकूल असर दिखता है। राज्य की दर्जनों ऐसी नदियां सूख रही हैं, जिनमें साल भर पानी रहता था। झारखंड की राजधानी रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़े बताते हैं कि कभी हिल स्टेशन के रूप में जानी जाने वाली रांची अब गर्म शहरों की श्रेणी में शुमार होती जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक साल 1969 से 2014 तक यानी 45 साल के दौरान रांची का अधिकतम तापमान का औसत 35.8 डिग्री रहा है, जबकि साल 2015 से 2021 तक अधिकतम तापमान का औसत 36.7 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है। यानी सात साल में अधिकतम तापमान में औसतन एक डिग्री का इजाफा हुआ है। 45 सालों की तुलना में इन सात सालों में औसतन न्यूनतम तापमान भी 0.9 डिग्री बढ़ गया है। इससे गर्मी ज्यादा पड़ने लगी है। राज्य में खाद्य पदार्थों के उत्पादन पर इसका असर झारखंड के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय से निदेशक (अनुसंधान) के पद से सेवानिवृत्त हो चुके डॉ ए वदूद बताते हैं कि पिछले 100 वर्षों में राज्य के तापमान में करीब 1 डिग्री औसत वृद्धि हो गयी है। यह अच्छा संकेत नहीं है। पहले 40-45 डिग्री तापमान राज्य में एक या दो दिन होता था। अब कई-कई दिनों तक ऊंचे तापमान का रिकॉर्ड बन रहा है। राज्य में खाद्य पदार्थों के उत्पादन पर भी इसका असर पड़ने लगा है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के मद्देनजर झारखंड में ढाई साल पहले तीन हजार करोड़ रुपये का एक्शन प्लान बना था। इस एक्शन प्लान को केंद्र सरकार की भी स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन इस पर अब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ है। जलवायु परिवर्तन को लेकर राज्य में एक निदेशालय का गठन किया जाना था, वह भी नहीं हो पाया। इस प्लान के तहत झारखंड में जलवायु परिवर्तन के अनुसार योजनाएं तैयार की जानी थी। प्लान के अनुसार बिजली के क्षेत्र में 333.25 करोड़, उद्योग के क्षेत्र में 68 करोड़, कृषि के क्षेत्र में 518 करोड़, फॉरेस्ट्री में 496 करोड़ खर्च होने थे। इसके तहत जल प्रबंधन, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत, भूगर्भ जलस्तर का दोहन रोकने, जल संचयन और जल स्रोतों के संरक्षण की योजना पर काम किया जाना था, लेकिन निदेशालय का गठन नहीं होने के कारण स्थिति जस की तस है। 23 अगस्त को हुई झारखंड मॉड्यूल की लांचिंग जलवायु परिवर्तन पर झारखंड के किसानों और आम लोगों को रियल टाइम उपयोगी सूचनाएं देने के लिए ब्रिटेन सरकार के सहयोग से क्रिस्प-एम (क्लाइमेट रेजेलिएंस इन्फॉर्मेशन एंड प्लानिंग) टूल के झारखंड मॉड्यूल की लांचिंग इसी साल 23 अगस्त को रांची में हुई। इस मौके पर मौजूद रहे भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त एलेक्स एलिस ने कहा कि क्रिस्प-एम टूल एक वेब और मोबाइल फोन आधारित भौगोलिक सूचना प्रणाली है, जो झारखंड जैसे प्रदेश के लोगों के लिए उपयोगी साबित होगा। दरअसल, यह टूल झारखंड सहित देश के सात राज्यों में ब्रिटेन सरकार के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लाया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कुछ राज्यों में शनिवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता का 5.4 मापी गयी। भूकंप का केंद्र नेपाल में 10 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप का झटका शाम सात बजकर 57 मिनट पर महसूस किया गया। भूकंप के कारण जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। इससे तीन दिन पहले भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे, जिसका केंद्र नेपाल में था। पड़ोसी देश में इस भूकंप की वजह से छह लोगों की मौत हो गई थी। नेपाल में एक सप्ताह में तीसरी बार भूकंप आया है। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर भूकंप कैसे आते हैं? माना जाता है कि दुनियाभर में हर साल 20000 से अधिक बार भूकंप आते हैं। इससे इतर, एक तथ्य ये भी है कि भूकंप के झटके लाखों बार आते हैं लेकिन ज्यादातर झटके इतने हल्के होते हैं कि सिस्मोग्राफ पर दर्ज नहीं किए जाते। इसके पीछे का क्या है वैज्ञानिक कारण, इसे समझने की कोशिश करते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के नेताओं से ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के अपने संकल्प को और मजबूत करने का आग्रह किया और कहा कि यूक्रेन पर रूस का आक्रमण जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की आवश्यकता को पुष्ट करता है। बाइडेन ने कहा, हम अब अपने कार्यों के परिणामों के बारे में अनजान नहीं बने रह सकते या अपनी गलतियों को दोहराना जारी नहीं रख सकते। शर्म अल शेख में सीओपी27 नामक संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में शुक्रवार को बाइडेन की उपस्थिति उनकी यात्रा का पहला पड़ाव है। इसके बाद वह दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के नेताओं की बैठक में शामिल होने के लिए कंबोडिया और फिर जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इंडोनेशिया के बाली पहुंचेंगे। बाइडेन ने सीओपी27 में स्वच्छ ऊर्जा पहलों पर खर्च बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने कीमतों को कम करने के लिए किस प्रकार तेल एवं गैस के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया।
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