एबीएन सेंट्रल डेस्क। सर्दी का मौसम शुरू होते ही ठंडक बड़ी समस्या बनकर खड़ी हो जाती है। तेज ठंड के कारण फसलों पर पाला पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। पाला किसी प्रकार का रोग न होते हुए भी विभिन्न फसलों, सब्ज़ियों, फूलों एवं फल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। पाले के कारण सब्ज़ियों में 80-90 प्रतिशत, दलहनी फसलों में 60-70 प्रतिशत तथा अनाज फसलों जैसे गेहूं व जौ में 10-20 प्रतिशत का नुकसान हो जाता है।
इसके अतिरिक्त फलदार पौधे जैसे- पपीता व केला आदि में भी 80-90 प्रतिशत तक का नुकसान पाले के कारण हो सकता है। ऐसे में किसानों को समय रहते अपनी फसल को पाले से बचाने के उपाय कर लेना चाहिए। इसमें सबसे कारगर उपाय गंधक का फसलों पर छिड़काव है।
चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ एसएन सुनील पाण्डेय ने बताया कि देश में प्रायः पाला पड़ने की सम्भावना 25 दिसम्बर से 05 फरवरी तक अधिक रहती है। पाला तभी पड़ता है जब वायुमंडल का तापमान चार डिग्री सेल्सियस से कम तथा शून्य डिग्री तक पहुंच जाता है। इसलिए फसलों को पाले से बचाने के लिए किसी भी तरह से वायुमंडल के तापमान को शून्य डिग्री सेल्सियस से ऊपर बनाये रखना जरूरी हो जाता है।
रबी फसलों में फूल आने एवं बालियां/फलियां आने व बनते समय पाला पड़ने की सर्वाधिक सम्भावनाएं रहती है। पाला पड़ने के लक्षण सर्वप्रथम वनस्पतियों पर दिखाई देते हैं। अतः इस समय कृषकों को सतर्क रहकर फसलों की सुरक्षा के उपाय अपनाने चाहिए। इसके लिए कुछ परंपरागत एवं रासायनिक तरीके हैं जिन्हें अपनाकर किसान भाई फसलों को पाला लगने से बचा सकते हैं। इनमें से कुछ उपाय इस प्रकार हैं।
खेतों में सिंचाई से पाले का बचाव
जब भी पाला पड़ने की संभावना अधिक हो उस समय फसल में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। नमीयुक्त जमीन में काफी देरी तक गर्मी रहती है तथा भूमि का तापक्रम एकदम कम नहीं होता है। इससे तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरेगा और फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके साथ ही कृषि पैदावार के अपशिष्ट पदार्थों को जलाकर धुंआ करना चाहिए, जिससे वातावरण का तापमान शून्य से ऊपर बना रहे। यह धुआं जमीन की गर्मी, जो विकिरण द्वारा नष्ट हो जाती है, उसे रोकता है। इससे तापमान जमाव बिंदु तक नहीं गिर पाता और पाले से होने वाली हानि से बचा जा सकता है।
गंधक का छिड़काव करके पाले से फसल का बचाव
जिन दिनों पाला पड़ने की सम्भावना हो उन दिनों फसलों पर एक एमएल गन्धक का तेजाब या डाईमिथाईल सल्फोआक्साईड प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। ध्यान रखें कि पौधों पर घोल की फुहार अच्छी तरह लगे। छिड़काव का असर दो सप्ताह तक रहता है। यदि इस अवधि के बाद भी शीत लहर व पाले की सम्भावना बनी रहे तो छिड़काव को 15-15 दिन के अन्तर से दोहराते रहें या थायो यूरिया 500 पीपीएम (आधा ग्राम) प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें। सरसों, गेहूं, चना, आलू, मटर जैसी फसलों को पाले से बचाने में गन्धक का छिड़काव करने से न केवल पाले से बचाव होता है, बल्कि पौधों में लौहा तत्व की जैविक एवं रासायनिक सक्रियता बढ़ जाती है जो पौधों में रोग रोधिता बढ़ाने में एवं फसल को जल्दी पकाने में सहायक होती हैं।
डाई मिथाइल सल्फो-ऑक्साइड का छिड़काव करके डीएमएसओ पौधों से पानी बाहर निकालने की क्षमता में बढ़ोतरी करता है, जिससे कोशिकाओं में पानी जमने नहीं पाता। इस तरह उनकी दीवारें नहीं फटती और फलतः पौधा नहीं सूखता है। इस रसायन का छिड़काव पाले की आशंका होने पर 75-100 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 800-1000 लीटर पानी में घोलकर करना चाहिए। यदि आशा अनुरूप परिणाम नहीं मिलें तो 10-15 दिनों बाद एक और छिड़काव करें तथा संस्तुत सावधानियां अवश्य बरतनी चाहिए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कड़ाके की ठंड से ठिठुर रहे उत्तर भारत के लोगों के लिए राहत की खबर है। अगले चार दिनों तक राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत में शीत लहर की स्थिति की संभावना नहीं है। हालांकि अगले चौबीस घंटों के दौरान इन क्षेत्रों में घना कोहरा छाया रहेगा। पिछले चौबीस घंटों के दौरान मौसम की बात करें तो दिल्ली में मंगलवार को शीतलहर की स्थिति से उत्तर पश्चिमी भारत को प्रभावित करने वाले एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ के कारण थोड़ी राहत मिली। इस वजह से उत्तर भारत के कई इलाकों में तापमान में एक से तीन डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि दर्ज की गई।
राजस्थान के चुरु में सबसे कम 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। हालांकि घने कोहरे के कारण दृश्यता घटकर 50 मीटर रह गई जिससे सड़क तथा रेल यातायात प्रभावित हुआ। जम्मू कश्मीर में ज्यादातर स्थानों पर तापमान शून्य से नीचे चला गया लेकिन श्रीनगर और कुपवाड़ा में कुछ बेहतर स्थिति रही। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस सप्ताह के आखिर तक घाटी एक और पश्चिमी विक्षोभ की चपेट में आ सकती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा बुलेटिन के अनुसार उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों से शीत लहर की स्थिति कम हो गयी है और अगले चार दिनों के दौरान उत्तर भारत में शीत लहर की स्थिति की संभावना नहीं है। मौसम विज्ञानी तीव्र ठंड के लंबे दौर के लिए दो पश्चिमी विक्षोभों के बीच एक बड़े अंतर को जिम्मेदार ठहराते हैं, जिसका अर्थ है कि बर्फ से ढंके पहाड़ों से ठंडी हवाएं सामान्य से अधिक समय तक चलीं। आईएमडी के एक अधिकारी ने कहा कि जब एक पश्चिमी विक्षोभ (मध्य पूर्व से आने वाली गर्म नम हवाओं वाली एक मौसम प्रणाली) एक क्षेत्र में पहुंचता है, तो हवा की दिशा बदल जाती है। इसलिए, पहाड़ों से उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं कुछ दिनों के लिए बहना बंद कर देंगी, जिससे तापमान में वृद्धि होगी।
मौसम विभाग ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण अगले तीन दिनों में उत्तर पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है, जबकि अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक जाने की संभावना है। उसने कहा अगले चौबीस घंटों के दौरान पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में घना कोहरा छाया रहेगा और ठंड की स्थिति बनी रहेगी।
टीम एबीएन, रांची। इस सीजन का सबसे सर्द दिन सोमवार को रहा। झारखंड की राजधानी रांची से सटे कांके क्षेत्र का न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान में बीते 24 घंटे में करीब 1.9 डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। हवा भी 2.2 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चली। तापमान में गिरावट होने से कनकनी बढ़ गयी है।
अलाव बना सहारा
तापमान में गिरावट आने की वजह से लोग घरों में अलाव या हीटर का सहारा ले रहे हैं। जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। सर्दी बढ़ने से सबसे अधिक परेशानी गरीबों को हो रही है। फुटपाथ पर रहने वालों का जीना मुहाल हो गया है।
ऐसे गिरा तापमान
बिरसा कृषि विवि के मुताबिक 9 जनवरी को कांके का अधिकतम तापमान 17.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 0.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 8 जनवरी को कांके का अधिकतम तापमान 19.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 1.0 डिग्री सेल्सियस मापा गया था। 7 जनवरी को अधिकतम तापमान 18.5 और न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस था। 6 जनवरी को तापमान क्रमश: 21.5 और 5.0 डिग्री सेल्सियस मापा गया था। तापमान गिरने से कई जगह घास में बर्फ की हल्की परत देखी गयी।
पारा गिरता ही है
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि भौतिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के मुताबिक यह तापमान असमान्य नहीं है। इस मौसम में तापमान में अमूमन गिरावट दर्ज की ही जाती है। आने वाले दिनों में तापमान और गिरने की उम्मीद है।
शहर से कम तापमान
सामान्य तौर पर झारखंड की राजधानी रांची के शहरी इलाकों से कांके क्षेत्र का तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है। दोनों के तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक का अंतर देखा जाता है।
सतर्क रहें
तापमान में आ रही कमी को देखते हुए लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। घर से बाहर निकलने से पहले वे गर्म कपड़े जरूर पहनें। बच्चे और बूढ़ों का खासतौर पर ख्याल रखने की जरूरत है। बूढे़ सुबह में टहलने से परहेज करें। बच्चों को पूरी तरह ढंककर रखें।
टीम एबीएन, रांची। पूरे उत्तर भारत में हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ रही है। इसका असर झारखंड में भी दिख रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि रांची के कांके इलाके में पारा जीरो डिग्री तक पहुंच गया है। साल 2019 के बाद 9 जनवरी को कांके में जीरो डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के आब्जर्वेटरी में यह डाटा रिकॉर्ड हुआ है।
डाटा कंपाइल करने वाले बीएयू के आब्जर्वर अभय कुमार ने कहा कि 9 जनवरी को सुबह 6 बजकर 49 मिनट पर पारा जीरो डिग्री रिकॉर्ड हुआ। जबकि अधिकतम तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस था। उन्होंने कहा कि सुबह के वक्त आब्जर्वेटरी के आसपास मौजूद सूखे घास पर जमे ओस सफेद हो गये थे। वहीं बीएयू के वैज्ञानिक डॉ रमेश ने बताया कि बीएयू के आब्जर्वेटरी का रिकॉर्ड शत प्रतिशत सही होता है। उन्होंने कहा कि कटऊ की देखरेख और उसके मानकों के आधार पर ही आब्जर्वेटरी बनी है। उन्होंने इसकी एक्यूरेसी की वजह भी बताई।
उन्होंने बताया कि बीएयू के आब्जर्वेटरी कैंपस में ही आईएमडी का आटोमेटिक वेदर स्टेशन टावर लगा है। यह आटोमेटिक मशीन है। जो अलग-अलग अंतराल पर तापमान रिकॉर्ड करता है। लेकिन बीएयू का मैनुअल सिस्टम है। यह थमार्मीटर सिस्टम है। जब भी पारा जीरो डिग्री आया, उसे इस थमार्मीटर ने रिकॉर्ड कर लिया। इसी वजह से थोड़ी देर के लिए आसपास के इलाकों के घास पर जमी ओस की बूंदे बर्फ में तब्दील होने लगी। चूकि जीरो डिग्री वाली स्थिति ज्यादा देर तक नहीं थी। इसलिए तापमान बढ़ने के साथ ही ओस के बर्फ में कंवर्ट होने की प्रक्रिया बंद हो गयी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में और भी चीते आने वाले हैं। 20 जनवरी को साउथ अफ्रीका से 12 चीता लाये जाने की योजना है। चीता ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट के तहत ये चीते भारत आयेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 चीते के पहले बैच को पिछले साल 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के कुणो नेशनल पार्क में रिलीज किया था।
एक्शन प्लान फॉर रिइंट्रोडक्शन ऑफ चीता इन इंडिया रिपोर्ट में साउथ अफ्रीका, नाम्बिया और अन्य अफ्रीकी देशों से 12-14 चीता को भारत लाये जाने की योजना पेश की गयी थी। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा तैयार किये गये एक्शन प्लान में बताया गया है कि इस रिइंट्रोडक्शन का मकसद भारत में चीते की आबादी को बढ़ाना है। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि साउथ अफ्रीका के राष्ट्रति सिरिल रामाफोसा ने 12 अन्य चीते के ट्रांसलोकेशन को अप्रूवल दे दी है और अंतिम एमओयू एक सप्ताह में फाइनल होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्र के हवाले से बताया गया है कि यूनियन फॉरेस्ट डायरेक्टर जनरल चंद्र प्रकास गोयल, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी के सेक्रेटरी एसपी यादव और अन्य कुछ अधिकारी 13 जनवरी को दिल्ली से साउथ अफ्रीका के लिए रवाना होंगे, जो चीते को लेकर वापस लौटेंगे। भारत में चीता के इंपोर्ट से देश में बिग कैट की आबादी बढ़ेगी। इसी महीने इंपोर्ट किये जाने वाले चीते को भी कुणो नेशनल पार्क में ही रिलीज किया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने चीता रिट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट के लिए 38.7 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो इस प्रोजेक्ट के लिए पांच साल का बजट है। इससे पहले सरकार ने 29.47 करोड़ रुपये का आवंटन किया था, जिसका इस्तेमाल इंट्रोडक्शन, मैनेजमेंट और मेंटेनेंस पर किया जाना है। भारत में चीते का रिइंट्रोडक्शन सरकार का एक अहम प्रोजेक्ट है। 1952 में भारत सरकार ने चीते को विलुप्त घोषित कर दिया था और अब 70 साल हो गये हैं, जब भारत में चीते ने वापसी की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता समेत राज्य के अन्य हिस्सों में ठंड का सितम जारी है। मौसम विभाग ने रविवार को बताया कि राजधानी कोलकाता में न्यूनतम तापमान 12.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है।
कोलकाता के साथ-साथ हावड़ा, हुगली, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, पुरुलिया, बर्धमान समेत राज्य के अन्य हिस्सों में ठंड बढ़ी हुई है। हालांकि अगले सप्ताह से ठंड में कमी दर्ज की जायेगी।
मौसम विभाग ने जारी बयान में बताया है कि मंगलवार से तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो जायेगी और जो न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस के आसपास है वह 17 से 18 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। इसके बाद ठंड काफी कम हो जायेगी।
वैसे भी मकर संक्रांति से ठंड में कमी होने लगती है इसलिए यह पश्चिम बंगाल में ठंड का आखिरी दौर चल रहा है। दक्षिण बंगाल के अलावा उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग और कलिंगपोंग में भी तापमान में गिरावट दर्ज हुई है और वहां कड़ाके की ठंड पहले से ही पड़ रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार देश में बाघों की बढ़ती आबादी को देखते हुए उनके संरक्षण के लिए राज्यों के साथ मिलकर और बाघ कॉरिडोर बनायेगी। देश में पिछले एक साल में मारे गये 116 बाघों में ज्यादातर की मौत दुर्घटना और आवाजाही के दौरान हादसों में हुई हैं। ऐसे में कॉरिडोर विस्तार से बाघों को स्वच्छंद विचरण के साथ संरक्षण में भी आसानी होगी। देश में अभी 32 कॉरिडोर हैं।
साथ ही वन्य जीव मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर अधिक बाघ आबादी वाले राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक अभयारण्य से बाघों को कम आबादी वाले टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित कर रहा है। इस कड़ी में हाल में सतपुड़ा, मुकुंदरा हिल्स, सरिस्का और विषधारी टाइगर रिजर्व में बाघों को भेजा गया है। इसमें भी नर बाघ के हस्तांतरण पर फोकस किया जा रहा है। देश में 2018 की गणना के मुताबिक, 2,967 बाघ हैं। ये 54 टाइगर रिजर्व व 32 कॉरिडोर में स्वच्छंद विचरण करते हैं।
कर्नाटक में हुई बैठक में आबादी प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा
राष्ट्रीय टाइगर संरक्षण प्राधिकरण की हाल ही कर्नाटक में हुई बैठक में बाघ आबादी प्रबंधन के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई है। इसमें बिहार, ओडिशा, मिजोरम, झारखंड, केरल जैसे राज्यों के वन क्षेत्रों में कॉरिडोर विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा हुई और राजस्थान के कुंभलगढ़ को टाइगर रिजर्व घोषित करने के लिए राज्य सरकार के संज्ञान में मामले को फिर से लाने पर भी सहमति बनी है।
मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा
2018 की गणना के मुताबिक, मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 526 बाघ हैं। दूसरे नंबर पर कर्नाटक (524) और तीसरे नंबर पर उत्तराखंड (442) है। इसके बाद 312 बाघ महाराष्ट्र और 265 बाघ तमिलनाडु में हैं। मौजूदा गणना में बाघ आबादी के दोगुने होने की संभावना है। इसे देखते हुए विभाग तेजी से बाघों को संरक्षित स्थल देने के काम में तेजी के साथ जुटा है।
बाघ आबादी के इजाफे पर मंत्रालय की नजर
एनटीसीए के सदस्य सचिव डॉ एसपी यादव ने बताया कि बाघ आबादी के इजाफे पर मंत्रालय की नजर है। बाघ को विचरण और निर्बाध आवागमन के लिए आवश्यक है कि पर्याप्त स्थान हो। इससे संरक्षण के साथ बाघ की आबादी को विस्तार देने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बाघ को ज्यादा आबादी वाले स्थान से कम आबादी में भेजने की प्रक्रिया को समय-समय पर अंजाम दिया जाता है। यदि कॉरिडोर का विस्तार ठीक से कर दिया जाये तो बाघ आबादी में और बढ़ोतरी के साथ उसके संरक्षण की राह भी आसान होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में 1901 के बाद से साल 2022 को पांचवा सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 1901 से ही मौसम संबंधी रिकॉर्ड रखना शुरू किया था। मौसम विभाग कार्यालय ने 2022 के दौरान भारत की जलवायु पर दिए एक बयान में कहा कि जमीन की सतह का वार्षिक औसत तापमान लंबी अवधि के औसत से 0.51 डिग्री सेल्सियस अधिक था, जो कि 1981-2010 की अवधि का औसत तापमान है। हालांकि, यह 2016 में भारत में दर्ज किए गए अधिकतम गर्म दिनों से कम था जब औसत तापमान 0.71 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया था।
वर्ष 2022 की सर्दियों के मौसम -जनवरी से फरवरी के दौरान अखिल भारतीय स्तर पर औसत तापमान -0.04 डिग्री सेल्सियस की विसंगति के साथ सामान्य था। मॉनसून के पहले मार्च से मई के दौरान तापमान 1.06 डिग्री सेल्सियस की विसंगति के साथ सामान्य से अधिक था। वर्ष 2022 में पूरे देश में हुई वर्षा 1971-2020 की अवधि के आधार पर दीर्घावधि औसत का 108 प्रतिशत थी।
वर्ष 1965-2021 के आंकड़ों के आधार पर 11.2 के सामान्य के मुकाबले पिछले वर्ष भी 15 चक्रवात संबंधी घटनाएं देखी गईं, जिनमें तीन चक्रवाती तूफान और उत्तर हिंद महासागर के ऊपर बने निम्न दबाव के 12 क्षेत्र शामिल हैं। इनके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में अत्यधिक भारी वर्षा, बाढ़, भूस्खलन, बिजली गिरने, आंधी और सूखे जैसी मौसम संबंधी असामान्य घटनाओं का भी अनुभव किया गया।
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