टीम एबीएन, रांची। पिछले कुछ दिनों से खिली धूप ने राजधानीवासियों व आसपास के जिलों के लोगों को ठंड से राहत दी है। दरअसल, पश्चिमी दिशा से बह रही ठंडी हवा का प्रकोप कम हो जाने के कारण राजधानी के न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है।
राज्य के उत्तरी हिस्सों में कोहरे और धुंध का असर देखने को मिलेगा। हालांकि, मौसम विज्ञान केंद्र रांची की मानें तो अगले तीन दिनों तक रांची के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की गिरावट हो सकती है। राहत की बात यह है कि इसके बाद 19 जनवरी से तापमान में बढ़ोत्तरी की संभावना है। पिछले कुछ दिनों से खिली धूप ने ठंड से लोगों को राहत दी है। नये साल में कोहरे, धुंध और आसमान में छाये आंशिक बादल ने तापमान को लुढ़का दिया था।
मौसम विज्ञान केंद्र रांची से जारी रिपोर्ट की मानें तो 10 जनवरी से पश्चिमी दिशा से बह रही हवा में रुकावट से ठंड का असर थोड़ा कम हुआ है। यह स्थिति पूरे राज्य में बनी है। यही वजह है कि अगले एक सप्ताह तक पूरे राज्य में अधिकतम तापमान 24 से 31 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान 9 से 13 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।
केंद्र के वरीय विज्ञानी अभिषेक आनंद बताते हैं कि यह स्थिति अगले एक सप्ताह तक पूरे राज्य में रहने की संभावना है। आसमान साफ रहेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा। आज राज्य के दक्षिणी हिस्से यानी पश्चिमी व पूर्वी सिंहभूम, सिमडेगा और सरायकेला खरसावां के कुछ हिस्सों में सुबह में धुंध के साथ आंशिक बादल छाये रहने की संभावना है।
आज राजधानी रांची का अधिकतम तापमान 26 डिग्री जबकि न्यूनतम 10 डिग्री रहने की संभावना है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 26 डिग्री जबकि न्यूनतम 10 डिग्री। बुधवार को भी अधिकतम 26 डिग्री जबकि न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। तीनों दिन राजधानी का आसमान साफ रहेगा व मौसम शुष्क बना रहेगा।
वहीं पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो राज्य में सबसे अधिक तापमान अधिकतम 30.2 डिग्री जमशेदपुर और सबसे कम न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री खूंटी का रिकार्ड किया गया है। वहीं राजधानी रांची की बात करें तो अधिकतम 26.6 डिग्री व न्यूनतम 12.2 डिग्री दर्ज किया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में लगातार बर्फबारी का दौर जारी है। ऐसे में सोमवार से अगले तीन दिनों तक दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर शीतलहर लौटने की चेतावनी दी गयी है। यहां तापमान के 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की संभावना है। मौसम विभाग ने मंगलवार से शुक्रवार तक यहां शीतलहर और घने कोहरे के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।
दिल्ली में इसी महीने पांच दिनों तक लगातार शीतलहर की स्थिति बनी हुई थी। दिल्ली में 5 जनवरी से लगातार शीतलहर की स्थिति बनी हुई थी, जहां एक दशक में पहली बार इतना लंबा शीतलहरी देखा गया। आईएमडी के एक सीनियर साइंटिस्ट ने बताया कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस खत्म होने की कगार पर है, ऐसे में अगले कुछ और दिनों तक कड़ाके की ठंड पड़ेगी। मौसम विभाग के मुताबिक, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से रात के समय में तापमान लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को सामान्य से तीन डिग्री ज्यादा 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो इस महीने अबतक का सबसे ज्यादा न्यूनतम तापमान रहा।
पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बर्फबारी : आईएमडी ने बताया कि नॉर्थ-वेस्टर्ली हवा की वजह से आने वाले दिनों में पहाड़ी इलाकों से हवाएं उत्तर भारत की तरफ चलेंगी, जिससे तापमान में गिरावट आयेगी। गौरतलब है कि, उत्तराखंड के धनोल्टी में इस सीजन की पहली बर्फबारी हुई। वहीं जम्मू कश्मीर के बांदिपोरा जिले के गुरेज सेक्टर का एक गांव हिमस्खलन की चपेट में आ गया। इसमें किसी तरह के नुकसान की जानकारी नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा सहित 12 जिलों में बर्फीले तूफान की चेतावनी जारी की गयी है।
टीम एबीएन, रांची। राजधानी समेत आसपास के जिलों में खिली धूप ने सर्दी के सितम को कम कर दिया है। उत्तर पश्चिमी दिशा से बह रही हवा शाम को कनकनी बढ़ा रही है लेकिन दोपहर को निकली धूप लोगों को राहत दे रही है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में ठंड से राहत मिलने के संकेत हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र रांची से जारी रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम दिशा से बह रही ठंडी हवा में रुकावट आयी है, जिससे ठंड का असर कम हुआ है। 10 से 17 जनवरी तक ठंड से राहत की संभावना है। वहीं उत्तरी व दक्षिणी हिस्सों में आंशिक बादल छाये रहेंगे। अगले एक सप्ताह तक पूरे राज्य में अधिकतम तापमान 24 से 31 डिग्री, जबकि न्यूनतम 09 से 13 डिग्री रहने की संभावना है।
मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में कोल्ड वेव चलने को लेकर अलर्ट जारी किया है। पलामू संभाग यानी पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार और लोहरदगा के कुछ हिस्सों में शीतलहर चलने की संभावना है। अगले दो दिनों तक कहीं-कहीं हल्के और मध्यम दर्जे का कोहरा छाया रहेगा। हालांकि, राजधानी समेत आसपास के जिलों में इससे राहत की उम्मीद है। तीन-चार दिन बाद राजधानी और आसपास के जिलों में तापमान गिर सकता है।
उत्तर भारत में घने कोहरे के कारण शुक्रवार को भी 16 घंटे तक टेनें लेट रहीं। नई दिल्ली से रांची आने वाली गरीब रथ एक्सप्रेस 15 घंटा, जम्मूतवी से टाटा जाने वाली ट्रेन 11 घंटा, पूर्णिया कोर्ट हटिया ट्रेन 16 घंटा और दिल्ली भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस 7 घंटा लेट रही। इससे रेल यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यात्री घंटों रेलवे स्टेशन पर अपनी ट्रेन के आने का इंतजार करने को मजबूर रहे। समय पर ट्रेन नहीं पहुंचने के कारण कई यात्रियों की ट्रेन छूट गयी, तो कई यात्रियों ने अपना टिकट कैंसिल करा दिया।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड वासियों को कड़ाके की ठंड से राहत मिलने वाली है क्योंकि मौसम सामान्य की तरफ बढ़ रहा है। राज्य में कुछ दिनों बाद अच्छी धूप निकलना शुरू होगी, जिससे तापमान सामान्य रहेगा।
राज्य के अभी भी कई जिलों में ठंड है, लेकिन कई जिलों में मौसम सामान्य हो जायेगा। 13 जनवरी के बाद मौसम में बदलाव का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि सुबह-शाम कोहरा होगा, लेकिन दिन में मौसम गर्म रहेगा। वहीं, सबसे ज्यादा खूंटी जिले में ठंड बताई जा रही है। पिछले 24 घंटे में खूंटी का न्यूनतम तापमान 4.7 डिग्री दर्ज किया गया है। अभी भी कई जिलों का तापमान 8 डिग्री सेल्सियस के नीचे है।
मौसम विभाग ने अभिषेक आनंद ने बताया कि अगले 24 घंटे में राज्य में ठंड कम होगी। राज्य में कहीं-कहीं ठंड का असर ज्यादा है। सर्द हवा की रफ्तार में कमी आयी है। मौसम साफ है और धूप निकल रही है। अगले 24 घंटों के दौरान रात में कनकनी की स्थिति बनी रहेगी, लेकिन इसके बाद मौसम में बदलाव होगा।
मौसम विभाग के अनुसार राज्य में 1-2 जिलों को छोड़ शेष जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर आ गया है। वहीं, मौसम विभाग ने दावा किया है कि कुछ जिलों को छोड़कर राज्य में धीरे - धीरे तापमान सामान्य की तरफ बढ़ रहा है, आसमान साफ होगा और अच्छी धूप निकलेगी।
टीम एबीएन, गढ़वा-पलामू/ रांची। झारखंड में एक आदमखोर तेंदुए को बेहोश करने या पिंजरे में कैद करने की कोशिशें असफल रहने के बाद राज्य का वन विभाग उसे देखते ही गोली मारने के आदेश जारी करने पर विचार कर रहा है। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
हैदराबाद निवासी प्रसिद्ध शिकारी नवाब शफत अली खान को तेंदुए को पकड़ने में मदद के लिए यहां बुलाया गया है। यह तेंदुआ दिसंबर महीने से अब तक झारखंड के पलामू संभाग में कथित रूप से 4 बच्चों की जान ले चुका है। चारों बच्चे 6 से 12 साल के बीच के थे, जिनमें 3 गढ़वा से और 1 लातेहार जिले से था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) शशिकर सामंता ने बताया कि निगरानी समिति ने तेंदुए को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी करने की सिफारिश की है।
हालांकि, इस बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं किया गया है। हम और विशेषज्ञों से सलाह मांग रहे हैं। राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन सामंता ने कहा कि आदेश के संबंध में फैसला 1 या 2 दिन में लिया जायेगा। तेंदुए को पकड़ने के लिए 64 वर्षीय खान 5 जनवरी से झारखंड के गढ़वा जिले में डेरा डाले हुए हैं, जहां कथित तौर पर जानवर ने 3 बच्चों को मार दिया था।
खान ने बताया कि तेंदुए को 5 जनवरी और 10 जनवरी को देखा गया था। इससे पहले 4 जनवरी तक 50 से अधिक ड्रोन कैमरों और एक ड्रोन से भी उसका पता नहीं चला था। न्होंने बताया कि तेंदुए ने गढ़वा के तिरतेडी गांव में बृहस्पतिवार सुबह एक सूअर को मार दिया, जिसे पिंजरे के बाहर खड़ा किया गया था, लेकिन उसने सूअर को खाया नहीं। वह पिंजरे में भी नहीं घुसा। उसके पैरों के निशान मिले हैं।
झारखंड समेत 9 राज्यों के वन्यजीव सलाहकार खान ने कहा कि तेंदुए आमतौर पर दिन में जंगल के घनी छाया वाले इलाकों में सोते हैं और रात को शिकार के लिए निकलते हैं। इसलिए दिन में तेंदुए का पता लगाना मुश्किल है, हालांकि हमें उसके सोने की जगह का पता चल गया है। इस तेंदुए ने जिले के 3 प्रखंडों रामकंडा, रांका और भंडारिया में 50 से ज्यादा गांवों में आतंक फैला रखा है। वहीं, वन विभाग ने ग्रामीणों से शाम के बाद घरों से नहीं निकलने को कहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका की नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) द्वारा जारी एक विश्लेषण के अनुसार, पृथ्वी की सतह का औसत तापमान 2022 में 2015 के साथ पांचवें सबसे गर्म वर्ष के रूप में दर्ज हुआ। जलवायु मॉडलिंग के लिए अग्रणी केंद्र, नासा के गोडार्ड इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज (जीआइएसएस) के वैज्ञानिकों ने गुरुवार को बताया कि पृथ्वी की दीर्घकालिक वार्मिंग प्रवृत्ति को जारी रखते हुए 2022 में वैश्विक तापमान नासा की बेसलाइन अवधि (1951-1980) के औसत से 1.6 डिग्री फ़ारेनहाइट (0.89 डिग्री सेल्सियस) अधिक था।
नासा के प्रशासक बिल नेल्सन ने कहा, गर्मी का यह चलन खतरनाक है। हमारा गर्म जलवायु पहले से ही एक निशान बना रहा है: जंगल की आग तेज हो रही है; तूफान मजबूत हो रहे हैं; सूखा कहर बरपा रहा है और समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नासा जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने में अपनी भूमिका निभाने की हमारी प्रतिबद्धता को गहरा कर रहा है। हमारी पृथ्वी प्रणाली वेधशाला हमारे जलवायु मॉडलिंग, विश्लेषण और भविष्यवाणियों का समर्थन करने के लिए अत्याधुनिक डेटा प्रदान करेगी ताकि मानवता को हमारे ग्रह की बदलती जलवायु का सामना करने में मदद मिल सके।
नासा के अनुसार आधुनिक रिकॉर्ड रखने की 1880 में शुरुआत के बाद से पिछले नौ साल सबसे गर्म साल रहे हैं। इसका मतलब है कि 2022 में पृथ्वी 19वीं सदी के अंत के औसत से लगभग 2 डिग्री फ़ारेनहाइट (लगभग 1.11 डिग्री सेल्सियस) गर्म थी। जीआईएसएस के निदेशक गेविन श्मिट ने कहा कि गर्मी की प्रवृत्ति का कारण यह है कि मानव गतिविधियां वायुमंडल में भारी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों को बढ़ना जारी रखती हैं, और दीर्घकालिक ग्रहीय प्रभाव भी जारी रहेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सर्दी का मौसम शुरू होते ही ठंडक बड़ी समस्या बनकर खड़ी हो जाती है। तेज ठंड के कारण फसलों पर पाला पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। पाला किसी प्रकार का रोग न होते हुए भी विभिन्न फसलों, सब्ज़ियों, फूलों एवं फल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। पाले के कारण सब्ज़ियों में 80-90 प्रतिशत, दलहनी फसलों में 60-70 प्रतिशत तथा अनाज फसलों जैसे गेहूं व जौ में 10-20 प्रतिशत का नुकसान हो जाता है।
इसके अतिरिक्त फलदार पौधे जैसे- पपीता व केला आदि में भी 80-90 प्रतिशत तक का नुकसान पाले के कारण हो सकता है। ऐसे में किसानों को समय रहते अपनी फसल को पाले से बचाने के उपाय कर लेना चाहिए। इसमें सबसे कारगर उपाय गंधक का फसलों पर छिड़काव है।
चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ एसएन सुनील पाण्डेय ने बताया कि देश में प्रायः पाला पड़ने की सम्भावना 25 दिसम्बर से 05 फरवरी तक अधिक रहती है। पाला तभी पड़ता है जब वायुमंडल का तापमान चार डिग्री सेल्सियस से कम तथा शून्य डिग्री तक पहुंच जाता है। इसलिए फसलों को पाले से बचाने के लिए किसी भी तरह से वायुमंडल के तापमान को शून्य डिग्री सेल्सियस से ऊपर बनाये रखना जरूरी हो जाता है।
रबी फसलों में फूल आने एवं बालियां/फलियां आने व बनते समय पाला पड़ने की सर्वाधिक सम्भावनाएं रहती है। पाला पड़ने के लक्षण सर्वप्रथम वनस्पतियों पर दिखाई देते हैं। अतः इस समय कृषकों को सतर्क रहकर फसलों की सुरक्षा के उपाय अपनाने चाहिए। इसके लिए कुछ परंपरागत एवं रासायनिक तरीके हैं जिन्हें अपनाकर किसान भाई फसलों को पाला लगने से बचा सकते हैं। इनमें से कुछ उपाय इस प्रकार हैं।
खेतों में सिंचाई से पाले का बचाव
जब भी पाला पड़ने की संभावना अधिक हो उस समय फसल में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। नमीयुक्त जमीन में काफी देरी तक गर्मी रहती है तथा भूमि का तापक्रम एकदम कम नहीं होता है। इससे तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरेगा और फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके साथ ही कृषि पैदावार के अपशिष्ट पदार्थों को जलाकर धुंआ करना चाहिए, जिससे वातावरण का तापमान शून्य से ऊपर बना रहे। यह धुआं जमीन की गर्मी, जो विकिरण द्वारा नष्ट हो जाती है, उसे रोकता है। इससे तापमान जमाव बिंदु तक नहीं गिर पाता और पाले से होने वाली हानि से बचा जा सकता है।
गंधक का छिड़काव करके पाले से फसल का बचाव
जिन दिनों पाला पड़ने की सम्भावना हो उन दिनों फसलों पर एक एमएल गन्धक का तेजाब या डाईमिथाईल सल्फोआक्साईड प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। ध्यान रखें कि पौधों पर घोल की फुहार अच्छी तरह लगे। छिड़काव का असर दो सप्ताह तक रहता है। यदि इस अवधि के बाद भी शीत लहर व पाले की सम्भावना बनी रहे तो छिड़काव को 15-15 दिन के अन्तर से दोहराते रहें या थायो यूरिया 500 पीपीएम (आधा ग्राम) प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें। सरसों, गेहूं, चना, आलू, मटर जैसी फसलों को पाले से बचाने में गन्धक का छिड़काव करने से न केवल पाले से बचाव होता है, बल्कि पौधों में लौहा तत्व की जैविक एवं रासायनिक सक्रियता बढ़ जाती है जो पौधों में रोग रोधिता बढ़ाने में एवं फसल को जल्दी पकाने में सहायक होती हैं।
डाई मिथाइल सल्फो-ऑक्साइड का छिड़काव करके डीएमएसओ पौधों से पानी बाहर निकालने की क्षमता में बढ़ोतरी करता है, जिससे कोशिकाओं में पानी जमने नहीं पाता। इस तरह उनकी दीवारें नहीं फटती और फलतः पौधा नहीं सूखता है। इस रसायन का छिड़काव पाले की आशंका होने पर 75-100 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 800-1000 लीटर पानी में घोलकर करना चाहिए। यदि आशा अनुरूप परिणाम नहीं मिलें तो 10-15 दिनों बाद एक और छिड़काव करें तथा संस्तुत सावधानियां अवश्य बरतनी चाहिए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कड़ाके की ठंड से ठिठुर रहे उत्तर भारत के लोगों के लिए राहत की खबर है। अगले चार दिनों तक राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत में शीत लहर की स्थिति की संभावना नहीं है। हालांकि अगले चौबीस घंटों के दौरान इन क्षेत्रों में घना कोहरा छाया रहेगा। पिछले चौबीस घंटों के दौरान मौसम की बात करें तो दिल्ली में मंगलवार को शीतलहर की स्थिति से उत्तर पश्चिमी भारत को प्रभावित करने वाले एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ के कारण थोड़ी राहत मिली। इस वजह से उत्तर भारत के कई इलाकों में तापमान में एक से तीन डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि दर्ज की गई।
राजस्थान के चुरु में सबसे कम 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। हालांकि घने कोहरे के कारण दृश्यता घटकर 50 मीटर रह गई जिससे सड़क तथा रेल यातायात प्रभावित हुआ। जम्मू कश्मीर में ज्यादातर स्थानों पर तापमान शून्य से नीचे चला गया लेकिन श्रीनगर और कुपवाड़ा में कुछ बेहतर स्थिति रही। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस सप्ताह के आखिर तक घाटी एक और पश्चिमी विक्षोभ की चपेट में आ सकती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा बुलेटिन के अनुसार उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों से शीत लहर की स्थिति कम हो गयी है और अगले चार दिनों के दौरान उत्तर भारत में शीत लहर की स्थिति की संभावना नहीं है। मौसम विज्ञानी तीव्र ठंड के लंबे दौर के लिए दो पश्चिमी विक्षोभों के बीच एक बड़े अंतर को जिम्मेदार ठहराते हैं, जिसका अर्थ है कि बर्फ से ढंके पहाड़ों से ठंडी हवाएं सामान्य से अधिक समय तक चलीं। आईएमडी के एक अधिकारी ने कहा कि जब एक पश्चिमी विक्षोभ (मध्य पूर्व से आने वाली गर्म नम हवाओं वाली एक मौसम प्रणाली) एक क्षेत्र में पहुंचता है, तो हवा की दिशा बदल जाती है। इसलिए, पहाड़ों से उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं कुछ दिनों के लिए बहना बंद कर देंगी, जिससे तापमान में वृद्धि होगी।
मौसम विभाग ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण अगले तीन दिनों में उत्तर पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है, जबकि अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक जाने की संभावना है। उसने कहा अगले चौबीस घंटों के दौरान पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में घना कोहरा छाया रहेगा और ठंड की स्थिति बनी रहेगी।
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