वन और पर्यावरण

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Published / 2023-02-11 12:17:35
आम पर लदे मंजर दिला रहे बंपर पैदावार की उम्मीद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ऋतुराज बसंत इन दिनों पूरे शवाब पर है। एक ओर जहां जंगलों और सड़क के किनारे सूर्ख लाल वन ज्योति (पलाश के फूल) और सेमल के फूल प्राकृतिक सौंदर्य को चार चांद लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम की टहनियों पर खिले आम के मंजर इस बात का एहसास दिला रहे हैं कि इस बार आम की बंपर पैदावार होगी। 

पेड़ों पर लदे आम के मंजरों को देखकर किसानों के चेहरे भी खिल गये हैं। आम उत्पादक किसानों को भरोसा है कि इस बार आम की भरपूर फसल होगी। तोरपा प्रखंड के किसान उत्पादक फगुवा सिंह कहते हैं कि मौसम अनुकूल रहा और मार्च-अप्रैल में थोड़ी बहुत बारिश हो गई, तो पिछल वर्ष की तुलना में आम की उपज अच्छी होगी। उनका कहना है कि मदमस्त बसंती बयार यदि आंधी में तब्दील हो गई, तो आम के मंजर झड़ जायेंगे। किसानों का कहना है कि लाही और मधुवा रोग का प्रकोप अभी से दिखने लगा है।

खूंटी जिले में बीजू आम के साथ ही मालदा, दशहरी सहित अन्य वैरायटी के आम की भरपूर पैदावार होती है। किसान अभी से मंजरों पर दवा का छिड़काव करने लगे हैं। जिला प्रशासन ने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत जिले के छह प्रखंडों खूंटी, तोरपा, कर्रा, रनिया, मुरहू और अड़की प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में छह हजार एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में आम की बागवानी की है।

तोरपा के ही सुंदारी गांव के आम उत्पादक किसान और जिला परिषद के पूर्व सदस्य प्रेमजीत भेंगरा कहते हैं कि झारखंड खासकर खूंटी जिले की जलवायु और भौगोलिक स्थिति आम की फसल के लिए काफी उपयुक्त है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां उद्यानिक खेती की आपार संभावनाएं हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र के किसान परंपरागत खेती के अलावा आम, ड्रैगन फ्रूट, लीची, अमरूद स्ट्रोबेरी जैसे फलों और सुंगध फूलों की खेती के अलावा लेमनग्रास आदि के उत्पादन में रुचि ले रहे हैं। भेंगरा ने कहा कि आम की फसल में मेहनत और लागत कम होने के कारण किसान इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

तोरपा के 3600 किसान कर रहे आम की बागवानी : जिले में कार्यरत स्वयंसेवी संस्था प्रदान के अधिकारी रवि रंजन कुमार बताते हैं कि यहां कि मिट्टी आम ही नहीं, अन्य फलों और फूलों की खेती के लिए काफी अनुकूल है। उन्होंने कहा कि सिर्फ तोरपा प्रखंड में पिछले छह वर्षों में बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बड़े पैमाने पर आम की बागवानी की गई है। 

तोरपा एक ऐसा प्रखंड है, जिसमें बिरसा हरित ग्राम योजना के अंतर्गत पूरे झारखंड में सबसे अधिक आम बागवानी हुई है। आम बागवानी से 3600 किसान जुड़े हैं। तोरपा में इस वर्ष पांच से छह सौ एकड़ में आम की बागवानी की गयी है।

Published / 2023-01-30 14:07:10
झारखंड : फिर बदलेगा मौसम, जानें कब मिलेगी ठंड से राहत

टीम एबीएन, डेस्क। झारखंड के मौसम में अचानक से बदलाव होने वाला है। राज्य के उत्तरी हिस्से में अचानक तापमान 4 से 6 डिग्री के बीच गिरेगा। यह गिरावट पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा और चतरा जैसे जिलों में होगी। 

राजधानी रांची स्थित भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ अभिषेक आनंद का कहना है कि राज्य के इन इलाकों में मौसम एक बार फिर से करवट लेगा। इन इलाकों के अलावा राज्य के मध्य भाग में राजधानी रांची, रामगढ़, खूंटी, गुमला और बोकारो भी शामिल है, जबकि दक्षिणी भाग में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला में भी मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। 

मौसम विभाग के अनुसार 1 और 2 फरवरी को राजधानी रांची के न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि 30 और 31 जनवरी को न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकती है। वहीं 1 और 2 फरवरी को रांची का न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का संभावना है। इस दौरान आसमान पूरी तरह साफ रहेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा। इसके अलावा राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मौसम ठंड से सामान्य की तरफ बढ़ेगा।

Published / 2023-01-28 19:15:04
एक बार फिर करवट लेगा झारखंड के मौसम का मिजाज

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मौसम का मिजाज अभी भले ही स्थिर लगने लगा हो लेकिन मौसम एक बार फिर करवट लेगा। मौसम में अभी उतार चढ़ाव जारी रहेगा। अभी राज्य के कई जिलों के तापमान में गिरावट आयेगी। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों के दौरान राज्य के पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जिले में एक बार फिर से न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आने की संभावना है। 

साफ रहेगा आसमान 
राज्य के दूसरे जिलों में मौसम विभाग ने किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। राजधानी रांची के मौसम में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। तापमान अचानक सामान्य की तरफ बढ़ने लगा है। सुबह- सुबह पड़ने वाली ठंड कम हो गयी है। झारखंड में अगले पांच दिनों के दौरान मौसम शुष्क रहेगा। 30 जनवरी को आंशिक बादल छा सकते है। जबकि 31 जनवरी, 1 और 2 फरवरी को सुबह में कोहरा या धुंध के बाद आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा। 

जमशेदपुर में सबसे अधिक तापमान दर्ज 
सबसे अधिक उच्चतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस जमशेदपुर में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 13.3 डिग्री सेल्सियस खूंटी में दर्ज किया गया। रांची का न्यूनतम तापमान 15.3 डिग्री, जमशेदपुर का 16.6, डालटनगंज का 15.8, बोकारो का 15.2, चाईबासा का 16.0 देवघर का 15.6 गिरिडीह का 15.9, रामगढ़ का 13.9 और सिमडेगा का 14.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राज्य में ज्यादातर जिलों में तापमान 30डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। मौसम में यह बदलाव 2 से 5 डिग्री सेल्सियस सामान्य तापमान से अधिक है। 

रांची और आसपास के क्षेत्र में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज 
रांची और आसपास के इलाके में अगले पांच दिनों तक न्यूनतम तापमान 14 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान मौसम विभाग ने लगाया है। 30 जनवरी को आंशिक रूप से बादल रहने की आशंका जाहिर की गयी है। 2 फरवरी तक मौसम साफ रहेगा। इस दौरान अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

Published / 2023-01-28 13:48:44
झारखंड : उतार चढ़ाव के बीच धीरे-धीरे चढ़ेगा पारा

  • जमशेदपुर में पहुंचा 32.8 डिग्री तापमान

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में अभी तापमान में उतार चढ़ाव जारी है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों के दौरान झारखंड राज्य के पलामू, चतरा, लातेहार और गढ़वा में एक बार फिर ठंड का असर दिखने वाला है। एक बार फिर वहां के न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आ सकती है। वहीं राज्य के अन्य हिस्सों में अगले 2-3 दिनों मौसम में बदलाव की संभावना नहीं है। अगले 5 दिन तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है।

30 जनवरी को छा सकते हैं आंशिक बादल : वहीं जानकारी के मुताबिक 30 जनवरी को राज्य में आंशिक बादल छा सकते है, जबकि 31 जनवरी, 1 और 2 फरवरी की सुबह कोहरा या धुंध आसमान से साफ हो जायेगी। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में पिछले 24 घंटे के अंदर मौसम शुष्क रहा है। वहीं राज्य में सबसे अधिक तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस जमशेदपुर में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 13.3 डिग्री सेल्सियस खूंटी में दर्ज किया गया है।

रांची में रहा 15.3 डिग्री न्यूनतम तापमान : रांची का न्यूनतम तापमान 15.3 डिग्री, जमशेदपुर 16.6, डालटनगंज 15.8, बोकारो 15.2, चाईबासा 16.0, देवघर 15.6, गिरिडीह 15.9, रामगढ़ 13.9 और सिमडेगा का तापमान 14.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। वहीं इस दौरान राज्य के अधिकांश जिलों का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा, जो सामान्य से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक है।

दक्षिण दिशा की ओर हुआ हवा का रुख : वहीं मौसम विभाग के अनुसार 29 और 30 जनवरी को आसमान में सुबह के समय बादल रहने की संभावना है। इसके साथ ही राजधानी और आसपास के जिलों में मौसम में कोई बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन न्यूनतम तापमान में कमी देखने को मिल रही है। जिसके वजह से लोगों को ठंड से राहत मिली है। वहीं उतरी पश्चिम की ओर से चलने वाली हवा का रुख दक्षिण दिशा की ओर जाने के कारण ठंड का असर कम रहेगा।

31 जनवरी को मौसम रहेगा शुष्क : 31 जनवरी को राजधानी में सुबह मौसम शुष्क रहेगा। इसके साथ ही मौसम विभाग ने तापमान में 3 डिग्री वृद्धि होने की बात कही है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि देर शाम से हवा बहने से कनकनी हल्की ठंड लगती है। हालांकि इससे असर नहीं बढ़ेगा। बता दें कि खूंटी समेत राज्य के तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की कमी दर्ज की गयी है।

Published / 2023-01-28 11:01:04
गर्व की बात... भारत में हैं दुनिया के 70 फीसदी बाघ

  • केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देते हुए शुक्रवार को सूचित किया कि विश्व के 70 फीसदी बाघ भारत में हैं। वर्ष 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के 53 बाघ अभयारण्यों में इनकी संख्या 2967 है। कोर्ट को जानकारी दी गई कि बाघों की छह प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।

केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ के समक्ष कहा कि बाघों के संरक्षण और उनकी आबादी बढ़ाने के लिए बहुत काम किया गया है।

एक स्थिति रिपोर्ट में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने कहा कि भारत दुनिया में 70 फीसदी से अधिक बाघों की आबादी का घर बन गया है। अखिल भारतीय बाघ अनुमान (2018) की एक व्यापक रिपोर्ट 29 जुलाई, 2020 को जारी की गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बाघों की 6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दिखाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अखिल भारतीय बाघ अनुमान का पांचवां चक्र अभी चल रहा है और यह 2023 में पूरा हो जाएगा। यह स्थिति रिपोर्ट वर्ष 2017 में वकील अनुपम त्रिपाठी द्वारा याचिका याचिका के जवाब में दायर की गई है, जिसमें लुप्तप्राय बाघों को बचाने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि बाघों की संख्या देश में लगातार घट रही है।

शीर्ष अदालत ने एएसजी भाटी की दलीलें दर्ज करने के बाद मामले को मार्च में आगे की सुनवाई के लिए रख दिया, क्योंकि त्रिपाठी मौजूद नहीं थे। पीठ ने नोट किया कि 2018 की गणना के अनुसार, भारत में 53 बाघ अभयारण्यों में 2,967 बाघ हैं और यह संख्या वैश्विक संख्या का 70 फीसदी है और आंकड़े बाघों की वृद्धि की ओर इशारा करते हैं।

Published / 2023-01-20 14:31:06
हिमाचल प्रदेश : बर्फबारी से ऊपरी शिमला में आवागमन प्रभावित

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिमाचल प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के असर से बारिश और बर्फबारी से ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। शिमला जिला के ऊपरी क्षेत्रों को जाने वाली प्रमुख सड़कें भारी बर्फबारी के कारण बाधित हैं। शिमला पुलिस ने अपने फेसबुक पेज पर जानकारी दी है कि रामपुर-शिमला नेशनल हाइवे नारकंडा में सुबह से अवरुद्ध है।

पुलिस के मुताबिक शिमला-चौपाल सड़क खिड़की, शिमला-रोहड़ू सड़क खड़ापत्थर के पास बंद है। चौपाल में लगभग 3-4 इंच और नारकंडा में करीब 5 इंच बर्फ गिरी है। इन क्षेत्रों में बर्फ अभी भी गिर रही है। शिमला की ऊंची चोटी जाखू भी बर्फ से लकदक है।
शिमला के निकटवर्ती पर्यटन स्थल कुफरी में ताजा बर्फबारी से सड़क पर फिसलन बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन ने बर्फ हटाने के लिए मशीनरी तैनात की है। पुलिस और प्रशासन ने पर्यटकों से आग्रह किया है कि जब तक सड़कों से बर्फ नहीं हटा दी जाती, तब तक वे इन मार्गों पर यात्रा न करें।

राज्य के जनजातीय जिलों लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी हिमपात हो रहा है। मैदानी भागों में सर्द हवाओं के साथ बारिश हो रही है। बर्फबारी के कारण लाहौल-स्पीति में मनाली-लेह नेशनल हाइवे और दारचा-शिंकुला मार्ग बाधित है। मौसम विज्ञान विभाग ने अगले 24 घंटों तक राज्य के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी भागों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जतायी है।

Published / 2023-01-19 23:08:41
झारखंड : ठंड के प्रकोप के बीच 23 से हो सकता है मौसम साफ

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में कड़ाके की ठंड जारी है। उत्तर भारत और बंगाल की खाड़ी की ओर से आ रही हवा और नमी के कारण रांची समेत पूरे झारखंड में कोहरे और बादल छाए हुए हैं। ऐसी स्थिति अगले 4 से 5 दिनों तक रहने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार रांची समेत अन्य जिलों में 5 से 6 दिन तक इसी तरह कड़ाके की ठंड पड़ेगी।

 वहीं कोहरे की वजह से एक बार फिर विमान और रेलवे पर इसका असर देखने को मिलेगा। रांची समेत पूरा झारखंड कोहरे की चादर में तब्दील हो चुका है। इसके चलते ठंड बढ़ गयी है। राज्य के उत्तरी हिस्सों में शीतलहर जैसे हालात बने हुए हैं. इसके चलते 23 जनवरी तक ठंड रहने के आसार हैं। मौसम बदलाव से झारखंड में ठंड बढ़ने की संभावना जाहिर की गयी है।

वहीं मौसम विभाग के अनुसार 23 जनवरी से मौसम का मिजाज बदलेगा। 23 और 24 जनवरी को सुबह में आसमान साफ रहेगा और मौसम शुष्क रहेगा। राजधानी रांची में बुधवार को कोहरा होने के वजह से कई विमानों का आवागमन प्रभावित हुआ था। जिसके वजह से कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।

 बेंगलुरु रांची एयर एशिया के विलंब होने के वजह से बाकी कई उड़ानों पर भी इसका प्रभाव पड़ा। वहीं जानकारी के मुताबिक मौसम केंद्र रांची में डॉप्लर वेदर रडार लगाया जाएगा। यह मौसम के हर करवट पर निगरानी रखने में मददगार होगा। 
वहीं मौसम केंद्र रांची में डॉप्लर वेदर रडार लगाया जायेगा। जिसकी सहायता से मौसम की हर करवट पर निगरानी रखी जा सकेगी। नये रडार में भारी बारिश, आंधी, ओला की बिल्कुल सटीक जानकारी मिल पायेगी। हालांकि डॉप्लर वेदर रडार इस साल के अंत तक रांची केंद्र में लगाया जायेगा। मौसमी चेतावनी में सुधार के लिए यह मददगार साबित होगा।

Published / 2023-01-19 22:35:21
डॉ अशोक नाग ने सीएम से की करम नदी को पुनर्जीवित करने की मांग

टीम एबीएन, रांची। शहर के समाजसेवी सह पर्यावरणविद् डॉ अशोक कुमार नाग (9835114732) ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि शहर का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते मैं अपने राज्य के मुखिया को नगर निगम रांची के अनैतिक कार्य के सम्बन्ध में यह पत्र आपको लिख कर जानकारी दे रहा हूं।

उन्होंने सीएम से अपने स्तर पर इसकी छानबीन कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनकी मांगें निम्नवत है : 

  1. करमटोली तालाब से होकर पूर्व दिशा की ओर, सबसे निचले इलाके से होकर करम नदी बहती थी जिसमें शहर के अधिकांश इलाके लालपुर, मोराबादी, बरियातु, कोकर का भी पानी निकलकर डिस्टलरी पुल, भगवान बिरसा मुण्डा की समाधि स्थल के रास्ते स्वर्णरेखा नदी में मिलता था।
  2. करम नदी के कारण ही रांची शहर के अधिकांश आबादी के घरों में भूगर्भ जलस्तर ऊंचा रहता था और बहुत सारे कुओं में तो गर्मी में भी लवालव पानी भरा रहता था और पूरी रांची को पानी की समस्या से नहीं जूझना पड़ता था।
  3. बरसात के समय करम नदी के रास्ते पूरे शहर का पानी डिस्टलरी पुल होता हुआ, स्वर्णरेखा नदी में मिलता था और घनघोर बारिश के आधे घंटे बाद ही रांची शहर में कहीं जलजमाव नहीं होता था।
  4. रांची शहर के लिए डिस्टलरी पुल और करम नदी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता था क्योंकि भूगर्भ जल करम नदी के कारण और पूरी रांची में बाढ़ की समस्या कभी नहीं हुई, क्योंकि बरसात का अधिकांश पानी करम नदी के संग मिलकर डिस्टलरी पुल होता हुआ स्वर्णरेखा नदी में मिल जाता था।
  5. महाशय, यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि भगवान बिरसा मुण्डा की समाधि स्थल, कोकर
    डिस्टलरी पुल के पास ही क्यों है? भगवान बिरसा मुण्डा की असहज विवादास्पद मौत रांची जेल में हुई तो अंग्रेजों ने उनके शव को डिस्टलरी पुल के पास फेंक दिया, जहां पानी
    जलप्रपात के रूप में बहता था, अंग्रेजों को लगा कि बिरसा की मौत की खबर से शहर में दंगा नहीं फैलेगा और उनका शव डिस्टलरी पुल से होता हुआ पानी के बहाव के साथ स्वर्णरेखा नदी में मिल जायेगा।
  6. महाशय, डिस्टलरी पुल, करम नदी अपने प्रवाह में आराम से बहती रही जबतक की रांची नगर निगम के पदाधिकारियों और भू-माफिया की कुदृष्टि डिस्टलरी पुल और करम नदी के प्रवाह के रास्ते में नहीं पड़ी।
  7. भू-माफियाओं और नगर निगम के अधिकारियों ने करम नदी को ही विलुप्त करने की ठानी और डिस्टलरी पुल को ही पाट दिया और वहां करम नदी के रास्ते को घेरकर पार्क और
    डिस्टलरी मार्केट का निर्माण करा दिया। भारत ही नहीं विश्व में यह प्रथम घटना होगी जहां जीवित नदी के रास्ते को वहीं के नगर निगम ने घेरकर पार्क व दुकान बना दिया है, जो आज भी बरसात में पूरा डूब जाता है, क्योंकि पानी निकासी का वही एकमात्र निचला इलाका है।
    8रांची नगर निगम के इस कुकृत्य के कारण रांची के लगभग 7-8 लाख लोगों के यहां भूगर्भ जलस्तर बिल्कुल नीचे चला गया है और रांची शहर में बरसात में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जा रही है और पानी निकासी की समस्या से शहर जूझ रहा है।
  8. महाशय, विडम्बना यह है कि रांची नगर निगम के सरकारी बेवसाईट में रांची मास्टर प्लान 2037 का उल्लेख है जिसमें पानी निकासी के रास्ते दिखाये गये हैं (संलग्न-1) जो जमीन खाता नं0, प्लॉट नं0 के रूप में उल्लेखित है। रांची नगर निगम अपने रांची मास्टर प्लान 2037 के तहत जिस भूमि को वाटर वॉडी बनाता है उसी में पार्क और दुकान का निर्माण कैसे कराता है? यह समझ से परे हैं?

इन सब बातों को ध्यान में रखकर मैं माननीय मुख्यमंत्री महोदय से आग्रह करता हूं कि
अवलिम्ब करम नदी को करमटोली तालाब से होकर डिस्टलरी पुल तक अतिक्रमण मुक्त करायें और नदी के रास्ते में नगर निगम द्वारा बनाये गये अवैध पार्क व दुकानों को अविलम्ब तोड़ा जाए और करम नदी को पुनर्जीवित किया जाये।

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