वन और पर्यावरण

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Published / 2023-06-09 14:27:55
झारखंड : 12 जून से होगी प्री-मानसून बारिश

कल से चढ़ेगा पारा; लू का अलर्ट

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में 12 जून से प्री-मानसून बारिश की शुरुआत हो जायेगी। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि झारखंड के उत्तरी-पूर्वी और मध्य भाग में स्थित जिलों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होगी। 

विभाग का यह भी कहना है कि शनिवार से राज्य का पारा और 2 डिग्री सेल्सियस चढ़ेगा इसलिए, फिलहाल गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। राज्य में मानसूनी बारिश शुरू होने के बाद ही गर्मी से राहत की उम्मीद है।

मौसम विभाग (रांची) के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि 19 जून से झारखंड में मानसून औपचारिक रूप से दस्तक देगा। गुरुवार और शुक्रवार को रांची का अधिकतम तापमान 39 डिग्री दर्ज किया गया लेकिन शनिवार को यह 2 डिग्री बढ़कर 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जायेगा।

मौसम विभाग का कहना है कि संताल परगना सहित राज्य के कई हिस्सों में लू चलेगी। गर्म हवाओं की वजह से भी राज्य में दिन के तापमान में इजाफा होगा। तेज धूप और गर्मी लोगों को परेशान करती रहेगी।

मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि 19 जून को मानसून झारखंड में दस्तक देगा। कल ही मानसून ने 4 दिन की देरी से केरल में दस्तक दी है और कर्नाटक तक में मानसूनी बारिश शुरू हो गयी है। तमिलनाडु के भी कई इलाकों में शुक्रवार को बारिश हो रही है।

आमतौर पर झारखंड में मानसून का प्रवेश 10 जून तक हो जाता है लेकिन इस बार 1 सप्ताह की देरी से दस्तक देगा। मानसूनी बारिश शुरू होने के बाद ही झारखंड में गर्मी, तेज धूप और लू से राहत मिलने की उम्मीद है। इस बीच चिकित्सकों ने लू के बीच राज्यवासियों के लिए कुछ चेतावनी और सलाह दी है।

उनका कहना है कि लू के थपेड़े स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज का कारण बन सकते हैं। यदि जरूरी न हो तो दोपहर में बाहर न निकलें। तरल पदार्थ मसलन पानी, शर्बत, जूस, छाछ, नींबू पानी आदि का सेवन करते रहें। बाहर निकलना हो तो पूरे शरीर को ढंकने वाले गर्म कपड़े पहनकर जायें।

Published / 2023-06-08 14:31:29
गंभीर तूफान में बदला चक्रवात बिपारजॉय

  • अगले 12 घंटे में गुजरात के तटों पर दिख सकता है असर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को कहा कि चक्रवाती तूफान बिपारजॉय अगले 12 घंटों के दौरान पूर्व-मध्य और आसपास के दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर एक बहुत ही गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल जायेगा। 

आईएमडी ने एक ट्वीट में कहा कि गंभीर चक्रवाती तूफान बिपारजॉय पूर्व-मध्य और आस-पास के दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर पिछले 6 घंटों के दौरान 5 किमी प्रति घंटे की गति के साथ लगभग उत्तर की ओर बढ़ा और, एक बहुत ही गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया। 

आईएमडी, अहमदाबाद की निदेशक मनोरमा मोहंती ने मीडिया से कहा कि कहा कि चक्रवात पोरबंदर जिले से लगभग 1,060 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में केंद्रित है। उन्होंने कहा कि चक्रवात से तटीय जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। 

तूफान के कारण खराब मौसम और समुद्र की स्थिति अगले तीन-चार दिनों में हवा की गति को 135-145 किमी प्रति घंटे से 160 किमी प्रति घंटे तक ले जा सकती है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने मछुआरों को 14 जून तक अरब सागर में न जाने की चेतावनी दी गयी है। 

आईएमडी के एक अधिकारी ने कहा कि चक्रवात से सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात क्षेत्रों में नौ से 11 जून के बीच हल्की बारिश होने की संभावना है।

Published / 2023-06-04 19:22:54
जीवन का स्रोत पर्यावरण ही है...

गिरीश्वर मिश्र 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। हमारा पर्यावरण पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश इन पंच महाभूतों या तत्वों से निर्मित है। आरम्भ में मनुष्य इनके प्रचंड प्रभाव को देख चकित थे। ऐसे में यदि इनमें देवत्व के दर्शन की परम्परा चल पड़ी तो कोई अजूबा नहीं है। आज भी भारतीय समाज में यह एक स्वीकृत मान्यता के रूप में आज भी प्रचलित है।

अग्नि, सूर्य, चंद्र, आकाश, पृथ्वी, और वायु आदि ईश्वर के प्रत्यक्ष तनु या शरीर कहे गए है। अनेकानेक देवी-देवताओं की संकल्पना प्रकृति के उपादानों से की जाती रही है जो आज भी प्रचलित है। शिव पशुपति और पार्थिव हैं तो गणेश गजानन हैं। सीताजी पृथ्वी माता से निकली हैं। द्रौपदी यज्ञ की अग्नि से उपजी याज्ञसेनी हैं। 

वैसे भी पर्यावरण का हर पहलू हमारे लिए उपयोगी है और जीवन को सम्भव बनाता है। वनस्पतियां हर तरह से लाभकर और जीवनदायी हैं। वृक्ष वायु-संचार के मुख्य आधार हैं। शीशम और सागौन के वृक्ष सिर्फ फर्नीचर के लिए लकड़ी ही नहीं देते बल्कि पर्यावरण को संतुलित रखते हैं। बरगद, पीपल और नीम आदि वातावरण को स्वस्थ बनाते हैं। कई वृक्ष देवताओं के आवास माने जाते हैं तो कई देवस्वरूप मान लिए गए हैं।

 आयुर्वेद में नाना प्रकार की जीवनदायी औषधियां विभिन्न वृक्षों के पत्तों, फलों, फूलों, जड़ों और छालों से मिलती हैं। इसी तरह विविध प्रकार के अन्न और शाक सब्जी के साथ आम, अमरूद, लीची, केला, संतरा और सेव आदि वृक्षों से मिलने वाले मधुर और सुस्वादु फल बलबर्धक और प्रिय भोज्य हैं। 

भारतीय पर्यावरण-चिंतन का सबसे विलक्षण पक्ष यह है कि पार्थिव रचनाएं भी हमारे लिए पूज्य हैं। अनेक कुंड, सरोवर, वन और पर्वत पवित्र तीर्थ के रूप में आराधना स्थल के रूप में लोकप्रिय हैं। नदियों में स्नान पुण्यदायी है। माघ पूस की कड़क ठंड में प्रयाग में संगम तट पर लोग कल्पवास करते हैं। मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पत्थर और काठ की मूर्तियां सजीव स्वीकार ली जाती हैं।

फिर स्नान, पूजन और नैवेद्य आदि के विधि-विधान के साथ उनकी उपासना की जाती है। यह सब न केवल मूर्त रूप अमूर्त तक पहुंचने का माध्यम है बल्कि अपने चतुर्दिक स्थित वातावरण के लिए आदर और सम्मान के भाव का भी सूचक है। इनका आशय यही है कि पर्यावरण कोई निर्जीव वस्तु नहीं है। उसके पोषण की व्यवस्था की गयी और उसे हेठा नहीं देखा गया। 

वस्तुत: भारतीय सोच में मनुष्य को भी प्रकृति के विभिन्न तत्वों में से एक था और अन्य तत्वों से प्रभावित भी होता था। यत् पिंडे तद् ब्रह्मांडे और सर्वं खल्विदं ब्रह्म कह कर व्यष्टि और समष्टि तथा मनुष्य और प्रकृति के बीच एक अनोखी किस्म की अनिवार्य पारस्परिकता और परस्पर निर्भरता को जीवन का आधार बनाया गया। 

इस ब्रह्मांड की परिकल्पना में ग्रह नक्षत्र को भी जीवन में स्थान दिया गया। नव ग्रहों का स्मरण और पूजन दैनिक कृत्य का हिस्सा बनाया गया। जीवन का ताना-बाना प्रकृति के संदर्भ में ही आयोजित किए जाने की व्यवस्था बनी जो सृष्टि में सबकी एक दूसरे के सापेक्ष्य सत्ता की पुष्टि करती है। 

वह जीवों और पदार्थों की असंबद्ध उपस्थिति को नकारती है और पारस्परिकता को प्रतिष्ठित करती है। आज भी जीवन में ज्योतिष के परामर्श पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बड़ी संख्या में विवाह आज भी वर और वधू की जन्म-कुंडली मिला कर तय होते हैं। राशि-फल मीडिया में अभी भी लोकप्रिय है। 

इस प्रसंग में यह तथ्य भी बेहद महत्व का है कि समस्त जगत के पदार्थों की मूल संरचना के स्तर पर गम्भीर समानता पहचानी गई है। मनुष्य का भी निर्माण अन्य पदार्थों जैसा ही है। तुलसीदासजी क्षिति जल पावक गगन समीरा, पंचरचित अति अधम सरीरा कह कर यही स्थापित करते हैं। 

पर हम हैं जो अपने में इतने खोए रहते हैं कि अपने अस्तित्व-रचना के आधार के रूप में इन भौतिक तत्वों की अनुभूति के लिए तैयार नहीं होते। हम अपने को एक अतिविशिष्ट एक चेतन रचना मानते हैं और शेष को जड़ समझते हैं। पाँच तत्वों में से वायु और उससे बना वातावरण अन्य चार के मुकाबले में जरूर प्रकट महत्व पा सका क्योंकि श्वांस-प्रश्वास तो जीवन का पर्याय है। 

वह प्राण से जुड़ा होने के कारण जीवन का आधार बन गया और जीव को प्राणी (प्राणयुक्त) कह दिया गया। अग्नि, जल, आकाश और पृथ्वी अपनी उपयोगिता के आधार पर महत्व पाते हैं। जीवित रहने के लिए जरूरी सारे आवश्यक तत्व हमें प्रकृति से ही मिलते हैं। रूप, रस, गंध और स्पर्श की जो संवेदनाएं हमें समृद्ध और सुखी करती हैं उनका स्रोत हमारे पर्यावरण में ही स्थित है। 

इस तरह हमारी स्थिति अन्य तत्वों के सापेक्ष भी समझी जानी चाहिए। पर हुआ इसके उल्टा और हमने सब कुछ को अपने स्वार्थ के अनुरूप देखना शुरू किया और भ्रमवश स्वयं को सृष्टि का केंद्र मान बैठे। धरती पर मानव के विकास के इतिहास की यात्रा के बीच प्रकृति और पर्यावरण से परे स्वयं को सारी सृष्टि का केंद्र मान बैठना निर्णायक साबित हुआ। 

अहंकारदीप्त मनुष्य अपने को सर्वश्रेष्ठ प्राणी मान बैठा और स्व (अपने) और अन्य (दूसरे) के बीच दुर्भेद्य रेखा खींच दी। हमने खुद को उपभोक्ता और पर्यावरण को निर्जीव वस्तु मान उपभोग्य बना दिया। फिर निर्लज्जता के साथ युद्धस्तर पर जल, थल, अंतरिक्ष, वन, पर्वत, वनस्पति और खनिज संपदा के दोहन और शोषण में जुट गये। 

अब दूसरे ग्रहों के शोषण के लिए तजबीज हो रही है। सृष्टि में हस्तक्षेप और उस पर अधिकार जमाने की प्रवृत्ति की कोई सीमा नहीं दिख रही है। यह जरूर है कि पांच तत्वों में विसंगति आने पर हमारे सामने मुश्किल चुनौती खड़ी हो जाती है। विगत इतिहास साक्षी है कि इन तत्वों की अति या न्यूनता के चलते तरह-तरह के कष्ट सहने पड़ते हैं। 

अतिवृष्टि, अनावृष्टि, ओला पड़ना, धरती की उर्वरा शक्ति का ह्रास, वन में आग, बड़वाग्नि (सुनामी!), बिजली गिरना आदि लगातार हो रहे हैं । सब मिल कर व्यापक जलवायु परिवर्तन को जन्म दे रहे हैं और सारा विश्व आज चिंतित हो रहा है। पृथ्वी का तापक्रम लगातार बढ़ रहा है, ओजोन की परत में छेद हो रहा है।

विभिन्न गैसों का उत्सर्जन ग्राह्य सीमा से अधिक हो रहा है, वनस्पतियों की प्रजातियां लुप्त हो रही हैं, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही, कूड़े-कचरे से धरती और उसके नीचे ही नहीं अंतरिक्ष में भी प्रदूषण बढ रहा है, गंगा जैसी पवित्र नदियां औद्योगिक कचरों और शहरी मल के चलते भयंकर प्रदूषण का शिकार हो रही हैं।

एवेरेस्ट पर्वत शिखर भी प्रदूषण की गिरफ्त में है, शहर कंक्रीट के जंगल हो रहे हैं, बड़े पैमाने पर शुद्ध पेय जल की कमी हो रही है तथा आणविक ऊर्जा के उपयोग से जहां बिजली मिल रही है वहीं पर उसके अवशिष्ट कचरे के निस्तारण की स्थायी समस्या खड़ी हो रही है। 

हमारा पर्यावरण हमारे अपने व्यवहार के चलते जीवन के ही विरुद्ध होता जा रहा है। इस पर विचार के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई बैठकें हो चुकी हैं फिर भी स्पर्धा की राजनीति और उपभोग की संस्कृति के चलते समय पर प्रभावी कदम उठाने में हम पिछड़ रहे हैं। 

श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म की व्याख्या करते हुए बताते हैं कि आदि काल में यज्ञ अर्थात् कर्तव्य कर्मों के विधान के साथ प्रजा अर्थात् मनुष्य की रचना हुई (सहयज्ञा: प्रजा: सृषट्वा)। साथ में यह निर्देश भी दिया गया कि कर्तव्य कर्म के द्वारा देवताओं को उन्नत करो और देवता अपने कर्तव्य के द्वारा तुम लोगों को उन्नत करें। 

एक दूसरे को उन्नत करते हुए तुम लोग परम कल्याण को प्राप्त हो जाओगे । यज्ञ अर्थात् विहित कर्म से पुष्ट हो कर देवता बिना मांगे ही कर्तव्यपालन के आवश्यक संसाधन देते रहेंगे। इस तरह प्राप्त सामग्री को लोक की सेवा में लगाए बिना जो मनुष्य स्वयं उपभोग करता है वह वस्तुत: चोरी करता है।

आगे सृष्टि-चक्र को समझाते हुए कहा गया है कि सभी प्राणी या जीव अन्न से उत्पन्न होते हैं (प्राण धारण करने के लिए जो खाया जाता है वह अन्न है)। उसी से शरीर की उत्पत्ति और भरण-पोषण होता है। अन्न या खाद्य पदार्थ जल से पैदा होते हैं और जल का आधार वर्षा है। वर्षा यज्ञ से होती है और यज्ञ कर्तव्य-कर्मों से संपन्न होता है जिसमें त्याग की भावना होती है।

निष्काम भाव से किए जाने वाले कार्य ही यज्ञ होते हैं। आगे चल कर कहा गया है कि सर्वव्यापी परमात्मा यज्ञ या कर्तव्य कर्म में स्थित होता है। यही सृष्टि-चक्र का विधान है और जो इसके अनुसार नहीं चलता वह व्यर्थ और पापमय जीवन जीता है। इसलिए अनासक्त हो कर भली-भांति सतत कार्य करना चाहिए। 

कर्म से संही सिद्धि मिलती है। इसलिए लोक संग्रह को देखते हुए निष्काम भाव से कार्य करना ही सुसंगत है। आज की स्थिति में कर्म निष्काम न हो कर अधिकाधिक उपभोग से प्रेरित हो रहा है। इसकी चपेट में आ कर पर्यावरण को खतरा बढ़ता जा रहा है। उपभोग की प्रवृत्ति लोभ से जुड़ी है जिसे नए किस्म के उपभोग से नहीं सुलझाया जा सकेगा। 

पर्यावरण के साथ जीवन की डोर बंधी हुई है। उपभोग के विशाल तंत्र से उसे हम दिन-प्रतिदिन कमजोर करते जा रहे हैं। इस दुश्चक्र से निकलने के लिए लोक-संग्रह के भाव से त्यागपूर्वक उपभोग की शैली अपनानी होगी। हम सबका अनुभव है कि त्वचा शरीर का आवरण होती है पर वह शरीर का प्रमुख अंग है। वह शरीर की रक्षा करती है और उसे पोषक आहार भी उपलब्ध कराती है। 

त्वचा कहीं कट-फट जाय तो खून निकल आता है और संक्रमण का खतरा होता है। त्वचा हमारी शारीरिक सीमा भी है और वह सेतु भी जिससे शरीर से इतर या अन्य के साथ हमारा सम्पर्क स्थापित होता है। हमारा पर्यावरण भी सृष्टि में त्वचा जैसा ही आवरण है, अत्यंत सजीव और बेहद कोमल। उसकी रक्षा से ही जीवन-चक्र निर्बाध चल सकेगा। (लेखक, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति हैं।)

Published / 2023-06-04 19:06:48
झारखंड : अभी 9 जून तक झुलसाती रहेगी गर्मी

  • बढ़ा हीट स्ट्रोक का खतरा, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में लोग भीषण गर्मी से परेशान हैं। अभी एक सप्ताह तक इस गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। मौसम विभाग ने भी बुरी खबर ही दी है। मौसम ने 9 जून तक झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में लू चलने यानी हीट वेव का येलो अलर्ट जारी किया है। संताल परगना में तो 5 जून से ही लू का कहर दिखने लगेगा। 

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रांची स्थित मौसम केंद्र ने रविवार को यह चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के पूवार्नुमान पदाधिकारी ने जो चेतावनी जारी की है, उसमें कहा गया है कि 4 जून (सोमवार) को संताल परगना के देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज के अलावा पड़ोसी जिले गिरिडीह एवं धनबाद में भी कुछ-कुछ जगहों पर लू की स्थिति देखी जा सकती है। इसके बाद अगले 5 दिन तक ऐसी ही स्थिति बनी रह सकती है।  

5 और 6 जून को संताल एवं कोल्हान प्रमंडल में चलेगी लू 

इसी तरह, 5 जून (मंगलवार) को राज्य के पूर्वी हिस्से यानी संताल परगना के सभी 6 जिलों (देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़ और जामताड़ा) में लू के थपेड़े से लोग परेशान रहेंगे। इसके बाद 6 जून को संताल परगना के साथ-साथ धनबाद, गिरिडीह जिले और कोल्हान के सभी तीन जिलों पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम एवं सरायकेला खरसावां में लू का असर देखा जायेगा। 

6 से 9 जून तक झारखंड में पड़ेगी प्रचंड गर्मी 

इसके बाद 6 जून से 9 जून तक समूचे झारखंड में प्रचंड गर्मी का अनुभव लोगों को होगा। मौसम विभाग ने इस दौरान लोगों को सावधानी बरतने की भी सलाह दी है।

Published / 2023-05-31 18:23:44
कल केरल पहुंचेगा मानसून

  • मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 15 जून से देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश संभव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अंडमान निकोबार द्वीप समूह के ऊपर 19 मई से अटके दक्षिण-पश्चिमी मानसून ने 29 मई को रफ्तार पकड़ी है। 15 जून से देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश शुरू होने की संभावना है। 

मौसम विभाग के मुताबिक, सामान्य गति से चलते हुए मानसून को 22 से 26 मई तक अंडमान निकोबार द्वीप समूह को पार करते हुए बंगाल की खाड़ी में आगे बढ़ जाना चाहिए था, लेकिन यह उस स्थिति में 31 मई को पहुंचा है। 

इस तरह से यह सामान्य की तुलना में करीब एक सप्ताह देरी से चल रहा है। मानसून की गति को देखते हुए अनुमान लगाया गया है कि एक जून को केरल और तमिलनाडु में पांच जून तक कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर में मानसूनी बारिश शुरू हो जायेगी। 10 जून तक मानसून महाराष्ट्र व तेलंगाना तक पहुंच जायेगा। 

15 जून से गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मानसूनी बारिश होने लगेगी। 20 जून से राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल व जम्मू-कश्मीर तक बारिश होगी। 

मानसून का यह दौर आठ जुलाई तक जारी रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर मध्य और ऊपरी क्षोभमंडलीय स्तर पर चक्रवाती प्रवाह बना हुआ है। वहीं, पंजाब के ऊपर क्षोभमंडल के निचले स्तर पर चक्रवात प्रेरित हवाएं चल रही हैं, जिनसे पश्चिमी विक्षोभ की स्थिति बनी हुई है। 

इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और उससे सटे पाकिस्तान व मध्य प्रदेश में भी क्षोभमंडल के निचले स्तरों पर चक्रवाती हवाएं चल रहीं हैं। इसके बाद एक जून से एक और पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम में शुरू हो जायेगा, जो मानसून की गति को बरकरार रखेगा।

Published / 2023-05-27 20:55:33
चार को केरल में हो सकता है मानसून का पदार्पण

आईएमडी ने की इस वर्ष सामान्य से कम बारिश की भविष्यवाणी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। डिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट ने शुक्रवार को कहा कि मानसून के 4 जून को केरल में शुरू होने की उम्मीद है और इस साल इसके सामान्य रहने की संभावना है। आईएमडी ने कहा, हम मानसून के 4 जून के आसपास केरल पहुंचने की उम्मीद कर रहे हैं। 1 जून से पहले हमें मानसून के आने की उम्मीद नहीं है।  इस साल मानसून सामान्य रहने की संभावना है। 

आईएमडी ने यह भी कहा कि भविष्यवाणियों के अनुसार, जो अब तक उत्तर पश्चिम भारत में है, इस साल सामान्य से कम बारिश होगी।  अगले एक हफ्ते तक अरब सागर में चक्रवात की संभावना नहीं है।  उत्तर पश्चिम भारत में अब तक सामान्य से कम बारिश होगी। 

आईएमडी ने कहा कि देश के उत्तरी हिस्से में प्री-मानसून बारिश का कारण पश्चिमी विक्षोभ की मौसमी घटनाएं हैं। आईएमडी ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण, हमने बारिश और गरज के साथ गतिविधि देखी है। इसलिए, उसकी वजह से, हम दिल्ली और पड़ोसी शहरों में थोड़ी राहत देख रहे हैं। 

यदि वर्षा का वितरण सभी जगह लगभग समान हो तो यह एक आदर्श स्थिति होगी।  कोई दिक्कत नहीं होगी। अगर हमें हर जगह समान वितरण मिलेगा तो कृषि पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। उत्तर पश्चिम भारत में फिलहाल सामान्य से कम बारिश होगी।  

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दक्षिण पश्चिम मानसून आम तौर पर 1 जून को केरल में लगभग 7 दिनों के मानक विचलन के साथ सेट होता है।  

बता दें कि भारत मौसम विज्ञान विभाग 2005 के बाद से केरल में मानसून की शुरुआत की तारीख के लिए परिचालन पूवार्नुमान जारी कर रहा है। पिछले साल, आईएमडी की 27 मई की भविष्यवाणी के दो दिन बाद 29 मई को केरल में मानसून आया था।

Published / 2023-05-27 00:13:35
झारखंड : वज्रपात से 6 की मौत झारखंड में आंधी-बारिश का कहर, मौसम विभाग ने लोगों को दी ये सलाह

टीम एबीएन, रांची। झारखंड वासियों ने सोचा था कि राज्य में बारिश होने से गर्मी से राहत मिल जाएगी, लेकिन क्या पता था कि तेज आंधी और बारिश लोगों के लिए जानलेवा साबित होगी।

बिजली गिरने से 6 लोगों की मौत

दरअसल, राज्य में तेज आंधी और बारिश के चलते कई जगहों पर बिजली गिरी है, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई है। बारिश और ओले पड़ने की वजह से कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गयी है। इतना ही नहीं बताया जा रहा है कि राज्य के कई जिलों में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही है। तेज हवा चलने के कारण कई इलाकों में सड़क पर पेड़ गिर गये हैं।

खंभे व पेड़ के नीचे खड़ने से है खतरा
मौसम केंद्र के मुताबिक झारखंड के मध्य, पूर्वी व दक्षिण भाग के जिले जैसे गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, देवघर, जामताड़ा, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, हजारीबाग, रांची, खूंटी, पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम व सरायकेला खरसावां में आज भी बारिश के साथ वज्रपात देखने को मिल सकती है।

 इन जिलों में आरेंज अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही लोगों को अलर्ट किया गया है कि यदि हल्की बारिश भी होती हैं तो घर से बाहर न निकलें और और घर के बाहर है तो किसी सुरक्षित स्थान का सहारा लें। 

खंभे के नीचे व पेड़ के नीचे बिल्कुल भी ना खड़े रहे। वहीं, जमशेदपुर जिले में मूसलाधार बारिश के चलते शहर के सड़कों पर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। वहीं, मूसलाधार बारिश और तेज हवा होने से ग्रामीण क्षेत्र में काफी नुकसान होने की खबर है।

Published / 2023-05-21 14:24:59
पूरा झारखंड भीषण गर्मी की चपेट में, कई जिलों का तापमान 40 डिग्री पार

टीम एबीएन, रांची। झारखंड भीषण गर्मी की चपेट में है। राज्य के कई जिलों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से पार चल रहा है। संताल और कोयलांचल के जिलों का अधिकतम तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक रिकॉर्ड हो रहा है। 

तेज धूप और उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल हैं। दिन चढ़ते ही तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। राज्य के ज्यादातर जगहों पर गर्म हवा औ लू चल रही है। सुबह नौ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक घर से निकलना मुश्किल हो गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने रविवार को बताया कि राज्य में अभी गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली है। अगले तीन-चार दिनों तक तापमान चढ़ने के आसार हैं। इस दरम्यान कहीं-कहीं बादल, गर्जन और वज्रपात भी हो सकता है।

 ऐसी स्थिति 25 जून तक रह सकती है। पिछले एक सप्ताह से राजधानी रांची का अधिकतम तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास है। मौसम विभाग के आंकड़े के मुताबिक डालटेनगंज का अधिकतम तापमान 43 डिग्री रहा। जमशेदपुर का तापमान 41.4 डिग्री रहा।

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