राज्य में धीमा पड़ा मानसून, अगले 4 दिन बारिश के आसार नहीं; खेती पर विपरीत असर
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में अगले 4 दिनों के लिए मानसून शिथिल रह सकता है। इस दौरान राज्य में अच्छी बारिश होने की संभावना कम है। इससे राज्य की खेती पर विपरीत असर पड़ेगा। मानसून की बारिश में कमी का प्रतिशत और बढ़ेगा।
मानसून की बारिश अभी तक पूरे राज्य में 43 फीसदी कम है। 22 जुलाई तक इसकी सक्रियता में कमी रहने के बावजूद राजधानी समेत राज्य में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग (रांची) के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में फिलहाल मानसून कमजोर है।
अगले 4 दिनों के दौरान भी यह शिथिल रह सकता है। साइक्लोनिक सकुर्लेशन झारखंड से होकर गुजरता है तो इससे बारिश की संभावना बढ़ेगी। झारखंड में इस वर्ष औसत से 41 फीसदी कम बारिश हुई है। राज्य में इस साल एक जून से 18 जुलाई तक मात्र 212.6 मिमी बारिश हुई है।
यह इस समय तक के सामान्य वर्षापात 371.2 मिमी से 43 फीसदी कम है। पिछले वर्ष भी इस दौरान मानसून कमजोर रहा था। पिछले वर्ष 2022 में यह कमी 49 फीसदी थी। इस सीजन में 189.2 मिमी बारिश हुई थी। इससे पहले 2021 में 369.1 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य वषार्पात से पांच फीसदी कम रही थी।
पिछले सप्ताह हल्के से मध्यम बारिश होने से मानसून कमजोर रहा। राज्य में अब मात्र 3 जिले में सामान्य बारिश हुई है। इसमें साहिबगंज, गोड़्डा और सिमडेगा शामिल हैं। शेष जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जलवायु परिवर्तन के चलते तापमान बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। इसका एक और उदाहरण जून 2023 में दर्ज किया गया। 174 वर्षों के जलवायु इतिहास में जून के दौरान तापमान शिखर पर पहुंच गया। यह पहला मौका है जब जून के महीने का औसत तापमान सामान्य से 1.05 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज हुआ।
नेशनल ओसेनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के नेशनल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल इंफॉर्मेशन ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार यह लगातार 47वां जून का महीना है जब तापमान बीसवीं सदी के औसत तापमान से ज्यादा दर्ज किया गया है। जलवायु परिवर्तन का असर दुनिया पर हावी होता जा रहा है।
जून-जुलाई में और मजबूत हुई अल नीनों की स्थिति
इससे पहले जून के दौरान सबसे ज्यादा तापमान 2020 में दर्ज किया गया था, जब तापमान सामान्य से 0.92 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। वहीं जून 2019 के दौरान तापमान सामान्य से 0.9 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था जो उसे अब तक का तीसरा सबसे गर्म जून बनाता है। जून 2022 में भी तापमान सामान्य से 0.89 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकॉर्ड किया गया था।
अमेरिका में 11 करोड़ लोगों को लू का अलर्ट
अमेरिका के भीषण गर्मी से परेशान लोगों को जरूरत न होने पर घर से बाहर न आने की सलाह दी गई है। दक्षिण पश्चिम अमेरिका से लेकर वाशिंगटन प्रांत तक तापमान 43 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने देश के 11.30 करोड़ लोगों को लू की चेतावनी दी है। आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।
टीम एबीएन, रांची। बंगाल की खाड़ी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है। इसका असर झारखंड में भी पड़ने के संकेत हैं। इसकी वजह से कई जगहों पर भारी वर्षा हो सकती है। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रांची स्थिति मौसम केंद्र के मौसम वैज्ञानिक ने बताया है कि पश्चिमोत्तर बंगाल की खाड़ी में 16 जुलाई 2023 के आसपास एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन तैयार हो सकता है।
मौसम विभाग ने बताया है कि इस वक्त मानसून ट्रफ जैसलमेर, दिल्ली, लखनऊ, मुजफ्फरपुर, बालूरघाट होते हुए अरुणाचल प्रदेश और असम से गुजर रहा है। रांची स्थित मौसम केंद्र ने झारखंड राज्य के लिए मौसम की चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 16 जुलाई को राज्य के उत्तर-पश्चिमी भागों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है।
मौसम विभाग के मुताबिक, 15 जुलाई को दक्षिण-पूर्वी हिस्से में यानी पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा के अलावा पलामू, गढ़वा और चतरा में भी कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है। इस दौरान कुछ जगहों पर वज्रपात होने के भी आसार हैं।
रांची के मौसम की बात करें, तो 17 जुलाई तक रांची में बारिश होती रहेगी। 13 जुलाई को आसमान में बादल छाये रहेंगे। एक से दो बार हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा हो सकती है। 14, 15 और 16 जुलाई को भी मौसम के ऐसे ही बने रहने की संभावना है। यानी बादल छाये रहेंगे। दो बार या इससे ज्यादा बार हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा हो सकती है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मानसून सक्रिय है। पूरे राज्य में मानसून वाले बादल छाये हुए हैं। वहीं, मौसम विज्ञान ने बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।
14 जुलाई तक मानसून रहेगा सक्रिय
मौसम विभाग के मुताबिक, 14 जुलाई तक मानसून सक्रिय रहेगा। इस दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होने की उम्मीद है। कहीं-कहीं गर्जन और वज्रपात होने की भी संभावना है।
मौसम विभाग ने बताया कि राजधानी रांची में भी 14 जुलाई तक आकाश में बादल छाये रह सकते हैं। रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी। वहीं, मौसम केंद्र ने गर्जन और वज्रपात के कारण लोगों को सतर्क रहने का आग्रह किया है।
मौसम विभाग ने जारी किया यलो अलर्ट
मौसम विभाग के मुताबिक, 12 जुलाई को देवघर, दुमका, जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा, साहेबगंज में अच्छी बारिश का पूवार्नुमान है। मौसम विभाग ने इसके लिए यलो अलर्ट जारी किया है।
रांची मौसम केंद्र की ओर से खेतिहर किसानों और शहरी इलाकों में मौसम के प्रभाव के साथ परामर्श भी जारी किया गया है। बारिश की वजह से खेती और बागवानी वाली फसलों और पौधारोपण को मामूली नुकसान हो सकता है।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। अंडमान-निकोबार में भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 5.3 मापी गयी। फिलहाल किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप के झटके शाम सात बजकर 39 मिनट पर महसूस किये गये। इसका केंद्र कैंपबेल बे में जमीन से 70 किलोमीटर नीचे था।
क्यों आता है भूकंप
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है।
बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
टीम एबीएन, रांची। शिकारी जानवरों के लिए शिकार की उपलब्धता को बढ़ावा देने के प्रयास के तहत झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में चीतलों के लिए 4 सॉफ्ट-रिलीज सेंटर निर्माणाधीन हैं। एक वन अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि पांचवां सेंटर कभी माओवादियों का गढ़ रहे बूढ़ा पहाड़ इलाके में स्थापित करने की प्रक्रिया में है। उन्होंने बताया कि चीतलों को अभयारण्य के बेतला क्षेत्र से सॉफ्ट-रिलीज सेंटर में स्थानांतरित किया जायेगा और इस पहल से बाघों को पीटीआर में वापस लाने की उम्मीद है। सॉफ्ट रिलीज सेंटर वे होते हैं जहां जानवरों को उस स्थान के करीब रखा जाता है, जहां उन्हें छोड़ा जायेगा। 3 साल से अधिक समय के बाद मार्च 2023 में पीटीआर में एक बाघ देखा गया था।
राज्य वन विभाग ने राज्य की राजधानी रांची से लगभग 150 किमी दूर लातेहार और गढ़वा जिलों से लगे बूढ़ा पहाड़ की तलहटी पर घास के मैदान विकसित करने और चेक डैम बनाने का भी निर्णय लिया है। कुटकू रेंज में बूढ़ा पहाड़ की तलहटी लंबे समय से झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच बाघों का गलियारा रही है।
एक अधिकारी ने बताया कि घास के मैदान के विकास और सॉफ्ट-रिलीज सेंटर तथा चेक डैम के निर्माण से इस क्षेत्र में भविष्य में बाघों की आवाजाही की आवृत्ति बढ़ सकती है, जो छत्तीसगढ़ में गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान (जीजीएनपी) के करीब है।
उन्होंने कहा कि जीजीएनपी झारखंड और मध्य प्रदेश को जोड़ता है तथा मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ और झारखंड के पीटीआर के बीच बाघों को आने-जाने के लिए एक गलियारा प्रदान करता है। पीटीआर (उत्तर) के उप निदेशक प्रजेश जेना ने बताया- राष्ट्रीय बाघ रिजर्व प्राधिकरण (एनटीसीए) ने हमारे प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
हमने हाल में बूढ़ा पहाड़ की तलहटी में सॉफ्ट-रिलीज सेंटर, घास के मैदान के विकास और चेक डैम के लिए एनटीसीए को कोष की मांग सौंपी है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र माओवादी गतिविधियों के लिए कुख्यात रहा है, लेकिन बहुत जल्द इसे वन्य जीव केंद्र के रूप में जाना जायेगा।
झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा और महाराष्ट्र के शीर्ष माओवादी नेताओं द्वारा आश्रय स्थल के रूप में इस्तेमाल किये जाने वाले बूढ़ा पहाड़ को पिछले साल सितंबर में 3 दशकों से अधिक समय के बाद सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के नियंत्रण से मुक्त कराया था।
जेना ने कहा कि बूढ़ा पहाड़ में प्रस्तावित सॉफ्ट-रिलीज सेंटर 10 से 15 हेक्टेयर में बनेगा, जबकि 20 हेक्टेयर में घास का मैदान विकसित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जंगली जानवरों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगभग 15 चेक डैम बनाये जायेंगे।
पीटीआर के निदेशक कुमार आशुतोष ने बताया कि बाघों के प्रमुख शिकार में से एक चीतल मुख्य रूप से अभयारण्य के बेतला क्षेत्र में केंद्रित है। चीतल की संख्या 5,000 से अधिक होगी और इसे सॉफ्ट-रिलीज सेंटर के जरिये पूरे रिजर्व क्षेत्रों में फैलाने की जरूरत है।
बेतला क्षेत्र से चीतलों को निश्चित संख्या में सॉफ्ट-रिलीज केंद्रों में स्थानांतरित किया जायेगा और बाद में उन्हें जंगल में छोड़ दिया जायेगा। झारखंड के पूर्व प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) प्रदीप कुमार ने 2016 में प्रकाशित अपनी किताब मैं बाघ हूं में लिखा है कि 1974 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत स्थापित पीटीआर 1,129 वर्ग किमी में फैला है जहां वर्ष 1972 में 22 बाघ थे। किताब के मुताबिक 1995 में 71 बाघों की संख्या दर्ज की गयी थी। इसके बाद, इनकी संख्या घटने लगी।
राज्य वन्यजीव बोर्ड के पूर्व सदस्य डी एस श्रीवास्तव ने कहा कि अभयारण्य में बाघों की घटती संख्या के लिए अवैध शिकार, मवेशी चराना और इंसानी गतिविधियां बढ़ना प्रमुख कारण हैं। वन विभाग को पहले इन कारकों को नियंत्रित करने पर ध्यान देना चाहिए। अशांत निवास स्थान में बाघों की संख्या नहीं बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि पीटीआर प्राधिकरण ने 2017 में रांची के भगवान बिरसा जैविक उद्यान से 16 सांभरों को अभयारण्य के बारेसनर क्षेत्र में एक सॉफ्ट-रिलीज सेंटर में स्थानांतरित कर दिया था। उन्होंने कहा- पांच साल बाद भी सॉफ्ट-रिलीज सेंटर में न तो सांभर की संख्या बढ़ी और न ही किसी जानवर को इससे मुक्त किया गया। यह विफलता रही है।
टीम एबीएन, रांची। मौसम केंद्र रांची ने एक चार्ट जारी कर झारखंड में अगले सात दिनों तक मौसम का हाल बताया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, राजधानी रांची और आसपास के जिलों में झमाझम बारिश हो रही है।
विभाग के मुताबिक आज और कल इन इलाकों में भारी बारिश होगी। इस दौरान वज्रपात की भी आशंका है। इसे लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर लोगों को सावधान किया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में विलंब से आने के बावजूद मानसून अगले 2 सप्ताह के दौरान सामान्य हो सकता है। इस दौरान मानसून के बादल झारखंड पर छाये रहेंगे और राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश होने की संभावना व्यक्त की गयी है।
राजधानी रांची में अगले 24 घंटों के दौरान रुक-रुक बारिश होने की संभावना है। रांची में अगले 24 घंटों के दौरान रुक-रुक बारिश होने की संभावना है। वहीं, अगले पांच दिनों तक आसमान में बादल छाये रहेंगे।
रांची में इस मानसून सीजन में 135.6 मिमी बारिश हुई है, जो कि सामान्य वर्षापात 243.2 मिमी से 44 फीसदी कम है। राज्य में मानसून 12 जुलाई के बाद दो-तीन दिन थोड़ा धीमा होने के बाद फिर जोर पकड़ सकता है। इससे राज्य में बारिश में कमी की भरपाई होने की संभावना बढ़ गयी है।
यह बारिश राज्य में खरीफ फसलों की खेती के अनुकूल होगी। राज्य में इस मानसून सीजन के दौरान बारिश में कमी का प्रतिशत 38 फीसदी तक आ गया है।
मौसम विभाग (रांची) केंद्र के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में पिछले 24 घंटों के दौरान मानसून सामान्य रहा। बोकारो समेत राज्य के विभिन्न जिलों में बारिश हुई। आनेवाले दिनों में मानसून में और सुधार होने की संभावना है।
कई जगहों पर बरसा मानसून पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई स्थानों पर बारिश हुई। बोकारो में सबसे अधिक 95.0 मिमी बारिश हुई। धनबाद, हजारीबाग, गुमला, पलामू, रामगढ़, रांची, गिरिडीह, गढ़वा जिलों में अच्छी बारिश हुई।
मौसम विभाग के अनुसार राज्य में इस मानसून सीजन के दौरान 147.2 मिमी बारिश हुई है, सामान्य वर्षापात का औसत 236.1 मिमी है। मौसम विभाग के अनुसार 7 और 8 को कई स्थानों पर बारिश होगी, दक्षिणी हिस्से में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की चेतावनी भी जारी की गयी है।
नौ और दस जुलाई को राज्य के प्रत्येक हिस्से में बारिश की संभावना है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के ऊपर से गुजर रहा मानसून टर्फ झारखंड के दक्षिणी हिस्से से होते हुए बंगाल की खाड़ी के मध्य हिस्से तक कायम है।
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