एबीएन सेंट्रल डेस्क। आईएमडी के मुताबिक, शनिवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड, मणिपुर और मेघालय के अलग-अलग इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, पूर्वी राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़ के अलावा राजधानी दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के भी अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
भूस्खलन और बाढ़ की बढ़ी संभावना
मौसम विभाग के मुताबिक, मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शनिवार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में शनिवार और रविवार, असम, मेघालय, नागालैंड और मणिपुर में रविवार को भारी बारिश का असर देखने को मिलेगा।
आईएमडी ने सड़कों पर स्थानीय बाढ़, निचले इलाकों में जलभराव और प्रमुख शहरों में यातायात पर भारी बारिश के असर को लेकर आगाह किया है। इस दौरान पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन या भूस्खलन का अनुभव देखने को मिल सकता है।
बता दें कि भारी बारिश के चलते एक बार फिर से किसानों की मुश्किल बढ़ने वाली है। एग्रोमेट सेवाओं ने किसानों को उत्तरी आंतरिक ओडिशा, उत्तरी छत्तीसगढ़ और पूर्वी और मध्य मध्य प्रदेश में धान की रोपाई स्थगित करने की सलाह दी है। इसके साथ ही किसानों अपने खेतों से पानी निकालने को कहा है जिससे खेतों में जल भरा न हो।
टीम एबीएन, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिला में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। खरकई नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर और खतरे के निशान के नजदीक पहुंचने के कारण डीसी मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी बीडीओ, सीओ व नगर निकायों को जरूरी एहतियातन कदम उठाने के निर्देश दिया है।
स्वर्णरेखा व खरकई नदियों के तटीय क्षेत्रों में जानमाल का कोई नुकसान नहीं हो इसको लेकर सभी तटीय क्षत्रों में रहने वाले लोगों को लगातार अलर्ट रहने और नदी किनारे तरफ नहीं जाने को लेकर आगाह किया गया है। डूब क्षेत्र में नदी का पानी घुसने पर तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चिह्नित आश्रय गृह में भेजना सुनिश्चित करने को कहा है।
लाइफ सेविंग जैकेट, नाव, मेडिकल किट आदि के मुकम्मल इंतजाम के निर्देश दिए गए हैं ताकि आकस्मिक स्थिति में ऊहापोह की स्थिति नहीं रहे। कदमा, बागबेड़ा, भुइंयाडीह, कल्याणनगर, शास्त्रीनगर, मानगो, जुगसलाई आदि में नदी के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की गयी है। डीसी के आदेश के बाद नगर निकायों की ओर से राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मौसम विभाग ने अगले 7 दिनों तक बारिश का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विज्ञान केंद्र (रांची) के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन और लोकल सिस्टम मजबूत होने का असर झारखंड के मौसम पर दिख रहा है। इसी वजह से बीते रविवार से ही राजधानी रांची सहित आसपास के जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है।
मंगलवार को संताल परगना के साहिबगंज सहित आसपास के जिलों में बारिश हुई। मौसम विभाग का कहना है कि अगले एक सप्ताह तक झारखंड का मौसम ऐसा ही होगा। हालांकि, 28-30 जुलाई के बीच भी साइक्लोनिक सकुर्लेशन की वजह से बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव से झारखंड में बारिश का अनुमान जताया गया था लेकिन इसका ज्यादा फायदा ओडिशा ओर छत्तीसगढ़ को हुआ।
मौसम विभाग का पूवार्नुमान है कि राजधानी रांची सहित आसपास के सभी जिलों में अगले एक सप्ताह तक बारिश होगी। इससे खेतों में इतना पानी होगा कि किसान रोपनी शुरू कर सकें। गौरतलब है कि झारखंड में लगातार दूसरे वर्ष मानसून की बेरुखी से सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। झारखंड में इस अवधि में अब तक 205 मिमी बारिश होनी चाहिए थी लेकिन महज 104 मिमी ही हुई है। यह औसत से 36 फीसदी कम है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि रविवार से हो रही बारिश से यह आंकड़ा 3 फीसदी के करीब पहुंच पायेगा। गौरतलब है कि रांची में आमतौर पर इस अवधि में 324 मिमी बारिश होती है लेकिन अब तक महज 207.7 मिमी ही बारिश हुई है। राज्य में औसत से 41 फीसदी कम बारिश हुई। इधर, 31 जुलाई से हो रही बारिश की वजह से राज्य के अधिकतम तापमान में कमी आयी है। लोगों को ठंड का अहसास हो रहा है। गर्मी से राहत मिली है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पिछले 24 घंटों में मानसून कमजोर रहा है। इस दौरान कुछेक स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा हुई है। राज्य से मानसून की बेरुखी का असर यह है कि 24 जुलाई तक राज्य में 434.7एमएम की जगह मात्र 236.3एमएम वर्षा हुई है, जो सामान्य से 46% कम है।
पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक वर्षा 36 एमएम बोकारो में रिकॉर्ड किया गया है जबकि अधिकतम तापमान 36.2डिग्री सेल्सियस गोड्डा का रहा है। राज्य में सामान्य से कम वर्षा होने के कारण 12.79% ही धानरोपनी हो पायी है।
रांची मौसम केंद्र के प्रभारी निदेशक अभिषेक आनंद ने ताजा मौसम पूर्वानुमान में कहा है कि अभी मानसूनी टर्फ लाइन झारखंड के दक्षिण में ओडिशा के ऊपर से गुजर रही है। इसी वजह से झारखंड में मानसून की स्थिति अभी कमजोर है।
अभिषेक आनंद ने बताया कि पश्चिमी मध्य और उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है, जो 25 जुलाई को लो प्रेशर में तब्दील होगा। इसके प्रभाव से 28 जुलाई से राज्य में अच्छी मानसूनी वर्षा की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि 24, 25, 26 और 27 जुलाई को राज्य में कुछ स्थानों पर और 28 जुलाई को कई स्थानों पर हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा की बात कही।
टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची में काले बादल घिर चुके हैं। तेज हवाएं चल रही हैं। थोड़ी देर में बारिश होगी। हालांकि, राजधानी समेत पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, खूंटी, सरायकेला व अन्य जिलों में सुबह से रुक-रुककर बारिश हो रही है।
मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। सरायकेला खरसावां, पश्चिम सिंहभूम जिले के कुछ भागों में अगले एक से तीन घंटे में हल्के दर्ज की मेघ गर्जन के साथ बारिश होने की संभावना है।
बोकारो, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, रांची जिले के कुछ भागों में अगले एक से तीन घंटे में हल्के दर्ज की मेघ गर्जन के साथ बारिश होने की संभावना है। पूर्वी सिंहभूम जिले के कुछ भागों में अगले एक से तीन घंटे में हल्के दर्ज की मेघ गर्जन के साथ बारिश होने की संभावना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राजस्थान की राजधानी जयपुर शुक्रवार तड़के तीन बार भूकंप के झटके महसूस किये गये। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलोजी के अनुसार पहला झटका तड़के चार बजकर नौ मिनट अड़तीस सैकंड पर आया, जिसकी रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.4 थी। इसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। भूकंप का दूसरा झटका चार बजकर 22 मिनट 57 सेकंड पर महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 3.1 मापी गयी और इसकी गहराई पांच किलोमीटर थी।
इसके बाद चार बजकर 25 मिनट 33 सैकंड पर भूकंप का तीसरा झटका महसूस किया गया, जिसकी रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.4 मापी गयी और इसकी गहराई दस किलोमीटर थी।
भूकंप से नींद में सो रहे लोग अचानक उठ गए और कई लोग घरों के बाहर आ गये। भूकंप के पहले झटके के दौरान जोरदार गड़गड़ की आवाज सुनाई दी और मकान, दरवाजे एवं खिड़कियां हिलते नजर आये। हालांकि भूकंप से किसी भी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में भी शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) ने बताया कि राज्य के उखरुल में 3.5 तीव्रता का भूकंप आया। एनसीएस के मुताबिक, भूकंप शुक्रवार सुबह 5.01 बजे आया, जिसका केंद्र 20 किलोमीटर की गहराई में थी।
हालांकि भूकंप से किसी के तरह के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। बता दें, शुक्रवार सुबह राजस्थान के जयपुर में भी आंधे घंटे के अंतराल पर भूकंप के तीन झटके महसूस किये गये।
राज्य में धीमा पड़ा मानसून, अगले 4 दिन बारिश के आसार नहीं; खेती पर विपरीत असर
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में अगले 4 दिनों के लिए मानसून शिथिल रह सकता है। इस दौरान राज्य में अच्छी बारिश होने की संभावना कम है। इससे राज्य की खेती पर विपरीत असर पड़ेगा। मानसून की बारिश में कमी का प्रतिशत और बढ़ेगा।
मानसून की बारिश अभी तक पूरे राज्य में 43 फीसदी कम है। 22 जुलाई तक इसकी सक्रियता में कमी रहने के बावजूद राजधानी समेत राज्य में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग (रांची) के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में फिलहाल मानसून कमजोर है।
अगले 4 दिनों के दौरान भी यह शिथिल रह सकता है। साइक्लोनिक सकुर्लेशन झारखंड से होकर गुजरता है तो इससे बारिश की संभावना बढ़ेगी। झारखंड में इस वर्ष औसत से 41 फीसदी कम बारिश हुई है। राज्य में इस साल एक जून से 18 जुलाई तक मात्र 212.6 मिमी बारिश हुई है।
यह इस समय तक के सामान्य वर्षापात 371.2 मिमी से 43 फीसदी कम है। पिछले वर्ष भी इस दौरान मानसून कमजोर रहा था। पिछले वर्ष 2022 में यह कमी 49 फीसदी थी। इस सीजन में 189.2 मिमी बारिश हुई थी। इससे पहले 2021 में 369.1 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य वषार्पात से पांच फीसदी कम रही थी।
पिछले सप्ताह हल्के से मध्यम बारिश होने से मानसून कमजोर रहा। राज्य में अब मात्र 3 जिले में सामान्य बारिश हुई है। इसमें साहिबगंज, गोड़्डा और सिमडेगा शामिल हैं। शेष जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जलवायु परिवर्तन के चलते तापमान बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। इसका एक और उदाहरण जून 2023 में दर्ज किया गया। 174 वर्षों के जलवायु इतिहास में जून के दौरान तापमान शिखर पर पहुंच गया। यह पहला मौका है जब जून के महीने का औसत तापमान सामान्य से 1.05 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज हुआ।
नेशनल ओसेनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के नेशनल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल इंफॉर्मेशन ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार यह लगातार 47वां जून का महीना है जब तापमान बीसवीं सदी के औसत तापमान से ज्यादा दर्ज किया गया है। जलवायु परिवर्तन का असर दुनिया पर हावी होता जा रहा है।
जून-जुलाई में और मजबूत हुई अल नीनों की स्थिति
इससे पहले जून के दौरान सबसे ज्यादा तापमान 2020 में दर्ज किया गया था, जब तापमान सामान्य से 0.92 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। वहीं जून 2019 के दौरान तापमान सामान्य से 0.9 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था जो उसे अब तक का तीसरा सबसे गर्म जून बनाता है। जून 2022 में भी तापमान सामान्य से 0.89 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकॉर्ड किया गया था।
अमेरिका में 11 करोड़ लोगों को लू का अलर्ट
अमेरिका के भीषण गर्मी से परेशान लोगों को जरूरत न होने पर घर से बाहर न आने की सलाह दी गई है। दक्षिण पश्चिम अमेरिका से लेकर वाशिंगटन प्रांत तक तापमान 43 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने देश के 11.30 करोड़ लोगों को लू की चेतावनी दी है। आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।
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