एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत और बांग्लादेश में शनिवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 9.05 बजे दोनों देशों में 5.6 तीव्रता के भूकंप से जमीन कांपी।
अभी तक दोनों ही देशों में इस भूकंप से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। भूकंप के ये झटके पश्चिम बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में भी महसूस किये गये।
भूकंप का केंद्र दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश में 55 किलोमीटर गहराई में था। पश्चिम बंगाल आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि फिलहाल राज्य में कहीं से किसी नुकसान की खबर नहीं मिली है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोलकाता में बेमौसम बारिश की वजह से आस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच खेले जा रहे सेमीफाइनल मैच पर ब्रेक लग गयी थी। वहां बदले मौसम ने झारखंड पर भी असर डाला है।
मौसम केंद्र रांची के मुताबिक राज्य के पूर्वी भागों मसलन संथाल के इलाकों में कहीं-कहीं हल्के दर्जे की बारिश हो सकती है। मौसम में हुए बदलाव का असर राजधानी रांची में भी दिखने लगा है।
रांची के आसमान में बादलों की आंखमिचौनी चल रही है। हालांकि रांची में बारिश की संभावना नहीं है। इसकी वजह से अगले दो दिनों तक पूर्वी और मध्य भागों में धीरे-धीरे न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है।
मौसम में हुए बदलाव की वजह बंगाल की खाड़ी के पश्चिम मध्य में बना डीप डिप्रेशन है। जो आगे चलकर उत्तर-पूर्व की ओर शिफ्ट होगा और साइक्लोनिक स्टॉर्म में तब्दील हो जायेगा।
इसका सबसे ज्यादा असर बांग्लादेश पर पड़ेगा। मौसम केंद्र का मानना है कि 17 नवंबर को भी आंशिक बादल छाये रह सकते हैं। इस दौरान मौसम शुष्क रहेगा। 18 नवंबर से धूप की कमी पूरी हो जायेगी।
यह छठ व्रतियों के लिए सुकून देने वाली खबर है। जहां तक तापमान की बात है तो पिछले 24 घंटे में अधिकतम पारा गोड्डा में 30.7 डिग्री रिकॉर्ड हुआ है। वहीं न्यूनतम पारा 13.4 डिग्री सेल्सियस गढ़वा का रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तरकाशी में एक बार फिर भूकंप आया है। देर रात 02.02 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.1 मैग्नीट्यूड रही।
भूकंप से किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। भारतीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार भूकंप की गहराई 5 किलोमीटर थी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में पिछले 7 महीने में 13 बार भूकंप आ चुके हैं।
देर रात आया भूकंप 7वें महीने में इस जिले में आया 13वां भूकंप रहा। हालांकि इन भूकंप में अभी तक किसी तरह के जन धन की हानि नहीं हुई है। इसके बावजूद बार-बार भूकंप आने से लोग डरे हुए हैं। भू वैज्ञानिक भी इसे बड़े भूकंप का ट्रेलर मान रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राजधानी में गुरुवार की सुबह वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गयी। हालांकि, मौसम की स्थिति अनुकूल होने की संभावनाओं के मद्देनजर शहर में दिवाली से ठीक पहले प्रदूषण के स्तर में मामूली कमी आने की उम्मीद जतायी जा रही है।
दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) वीरवार सुबह आठ बजे 420 दर्ज किया गया, जबकि बुधवार शाम चार बजे यह 426 था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा तैयार एक्यूआई मानचित्र में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में कई जगहों पर लाल बिंदू (खतरनाक वायु गुणवत्ता का संकेत) दिखाये गये हैं।
दिल्ली के पड़ोसी शहर गाजियाबाद में एक्यूआई 369, गुरुग्राम में 396, नोएडा में 394, ग्रेटर नोएडा में 450 और फरीदाबाद में 413 दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अधिकारियों के मुताबिक, एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण हवा की दिशा उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की तरफ बदलने से भारत के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में पराली जलाने से निकलने वाले धुएं के योगदान को कम करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, हवा की धीमी गति इस प्रक्रिया पर विपरीत असर डालेगी। अधिकारियों ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद हवा की गति मौजूदा समय में लगभग पांच से छह किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 11 नवंबर को लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटे हो जायेगी, जिससे दिवाली से पहले प्रदूषक तत्वों को तितर-बितर करने में मदद मिलेगी।
दिल्ली के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में बुधवार को 38 फीसदी प्रदूषण के लिए पड़ोसी राज्यों, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में पराली जलाये जाने से निकला धुआं जिम्मेदार था।
टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची समेत झारखंड के मौसम में बदलाव आ रहा है। हवा के रुख में बदलाव आने से आसमान में बादल छा रहे हैं। शुक्रवार को राजधानी समेत राज्य के दक्षिणी भागों में हल्की बारिश होने की संभावना व्यक्त की गयी है।
हालांकि तीन नवंबर के बाद बादल छंट जायेंगे और मौसम साफ होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। बादल छाने के कारण राज्य में न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री की वृद्धि होगी। वहीं, अधिकतम तापमान में करीब एक डिग्री की गिरावट आ सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार देश के पश्चिमोत्तर भाग में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव है। इससे झारखंड के ऊपरी वातावरण में हल्के बादल छाए हुए हैं, जबकि वातावरण के निचले हिस्से में दक्षिण पूर्व की नम हवाएं आ रही हैं। इससे बादल गहराएंगे और राजधानी समेत राज्य में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना बनी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी में गहरा निम्न दबाव पिछले 6 घंटों के दौरान 13 किमी प्रति घंटे की गति के साथ उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ गया।
आज, 23 अक्टूबर को 0830 बजे IST, अक्षांश 17.0°N और देशांतर 86.8°E के करीब, पारादीप (ओडिशा) से 360 किमी दक्षिण, दीघा (पश्चिम बंगाल) से 510 किमी दक्षिण-दक्षिणपश्चिम और खेपुपारा (बांग्लादेश) से 660 किमी दक्षिण-दक्षिणपश्चिम क्षेत्र पर केंद्रित था। अगले 6 घंटों के दौरान इसके चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की संभावना है।
उसके बाद इसके लगभग उत्तर-उत्तर पूर्व की ओर बढ़ने और पुनः गहरे निम्न दबाव के रूप में 25 अक्टूबर की शाम के आसपास खेपुपारा और चटगांव के बीच बांग्लादेश तट को पार करने की संभावना है।
झारखंड पर इस गहरे निम्न दबाव का आंशिक असर पड़ने की संभावना है
23 से 25 अक्टूबर, 2023 के दौरान सामान्यतः बादल छाये रहेंगे। 23.10.2023 को उत्तर-पूर्वी भाग में और 24.10.2023 को पूर्वी तथा निकटवर्ती मध्य भागों में हल्की बारिश हो सकती है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मानसून के शुरुआती दिनों में बारिश ने अपना कमाल नहीं दिखाया था, लेकिन इसके विदाई लेने के दिनों में मानसून तेज रहा। बताया जा रहा है कि राज्य के कई हिस्सों में मौसम बदल रहा है।
मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में आसमान साफ रहेगा। रात में ठंड दस्तक देने लगेगी। रात में ठंड महसूस होने लगेगी और कंबल निकालने की नौबत आ जायेगी। मौसम विभाग के मुताबिक, दुर्गा पूजा के दौरान भी आसमान साफ रहने का अनुमान लगाया गया है।
राज्य में धीरे-धीरे ठंड दस्तक दे रही है। हालांकि बीते घंटों में झारखंड के कुछ इलाकों में हल्की बारिश रिकॉर्ड की गयी है। गौरतलब है कि बीते कुछ दिन पहले राज्य में बारिश ने अपना कहर बरपाया हुआ था।
मानसून के शुरूआती दिनों में लोगों को अच्छी बारिश के लिए तरसना पड़ रहा था। किसानों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन मानसून के आखिरी दिनों में लोगों को अच्छी बारिश देखने को मिली।
टीम एबीएन, गुमला। दुनिया भर में तेजी से बदलते पर्यावरण प्रदूषण ऋतुओं में परिवर्तन कृषि वानिकी और वन उत्पादों में पड़ रहा इसका गहरा प्रभाव मानव जीवन की शैली में अत्यंत आमूल चूल परिवर्तन के लिए विवश कर रहा है। ऐसे मे पारिस्थितिकी के साथ-साथ मानव जीवन और उनके व्यवहार पर अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों का ध्यान उस पर केंद्रित होना स्वाभाविक है।
गुमला की भूमि आरंभ से ही यहां की जनजातीय और वनस्पतियों की विविधता के अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं को आकर्षित करती रही है। लेकिन जब से वनस्पतियों को लेकर वर्षों से लगातार शोध कर रहे प्राध्यापक प्रसनजीत मुखर्जी कार्तिक उरांव महाविद्यालय गुमला में योगदानन दिया है वनस्पति विज्ञान के छात्रों और इससे रुचि रखने वालों की जिज्ञासा को तृप्तकर उनके अरमानों पर पंख लगाने का भरपूर प्रयास किया है।
यूं तो प्रोफेसर मुखर्जी ने इस दिशा में अनेक पहल किए हैं लेकिन इथेनॉबॉटनी एनवायरमेंटल स्टेनबिलिटी एंड मल्टीडिसिंप्निरी रिसर्चस पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन करने की एक महत्वाकांक्षी पहल गुमला ही नहीं रांची विश्वविद्यालय और झारखंड प्रदेश के लिए एक माइल स्टोन होगा।
इस सम्मेलन में जनजातीय जनजीवन जैव विविधता पर्यावरण संरक्षण पर्यावरण क्षति ऋतु परिवर्तन प्रदूषण खनन और उसका प्रभाव कृषि वानिकी एवं वन उत्पाद पारितंत्र जनजातीय अधिकारों का संरक्षण आदि विषयों पर तथ्य पूर्ण चर्चा होगी ।इस सम्मेलन में देश-विदेश के 100 से अधिक वैज्ञानिक और शोधकर्ता भाग लेंगे।
इसकी जानकारी देते हुए इस सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉक्टर प्रसनजीत मुखर्जी ने कहा कि इसमें भाग लेने वाले वैज्ञानिक अथवा शोधार्थी नवंबर तक अपना संक्षिप्त सार mailcser@ gmail.com में भेज सकते हैं। इस सम्मेलन के लिए रांची की संस्था सेंटर फॉर सोशल एंड एनवायरमेंटल रिसर्च ने सहयोग का पूरा आश्वासन दिया है।
मौके पर इथेनोबॉटनी विषय पर एक कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी जिसमें स्थानीय आयुर्वेद विधि द्वारा उपचार कर रहे चिकित्सक भी हिस्सा ले सकेंगे। मौके पर जनजातीय भोजन बनाने की प्रतियोगिता एवं औषधीय पौधों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
इस अवसर पर उन्होंने कॉन्फ्रेंस ब्रोशर का भी विमोचन किया गया। इसकी सफलता के लिए कार्तिक उरांव महाविद्यालय के प्राचार्य ए जे खलखो, डॉ दिलीप प्रसाद, डॉ सतीश गुप्ता, प्रोफेसर टेटरु तिर्की, डॉ सीमा, डॉ कंचन और डॉक्टर संजय भोक्ता तैयारी शुरू कर दी है।
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