वन और पर्यावरण

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Published / 2026-06-27 21:16:27
झारखंड : एक जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट

1 जुलाई को रांची सहित कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के कई हिस्सों में अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मॉनसून पहुंचने के लिए मौसम अनुकूल बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में राज्य के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी और तापमान में भी गिरावट आयेगी। 

पिछले 24 घंटे में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान डाल्टनगंज में 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान कांके, रांची में 21.6 डिग्री सेल्सियस रहा। 

सबसे ज्यादा 38.6 मिमी बारिश सिमडेगा के कोलेबिरा में रिकॉर्ड की गयी। रांची में अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जमशेदपुर में अधिकतम तापमान 37 डिग्री, बोकारो थर्मल में 39.1 डिग्री, चाईबासा में 35.8 डिग्री और पाकुड़ में 36 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। 

मौसम विभाग के अनुसार, रांची में 27 जून को आंशिक रूप से बादल छाये रहेंगे और मेघ गर्जन के साथ बारिश हो सकती है। 28 जून से 3 जुलाई तक शहर में बादल छाये रहने और हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है।

Published / 2026-06-22 18:14:37
झारखंड : कई जिलों में आज बारिश-आंधी की चेतावनी

  • झारखंड के कई जिलों में आज बारिश-आंधी का अलर्ट

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मानसूनी गतिविधियां धीरे-धीरे सक्रिय हो रही हैं। मौसम केंद्र, रांची के मुताबिक आज यानी 22 जून को राज्य के अधिकांश हिस्सों में आसमान में बादल छाए रहेंगे। 

कई स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। इसके साथ ही गरज-चमक और तेज हवाओं की भी संभावना जताई गई है। अगले दो दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। मौसम केंद्र ने राज्य के दक्षिणी एवं निकटवर्ती मध्य भागों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। 

इन क्षेत्रों में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा और धनबाद जिले शामिल हैं। यहां कहीं-कहीं वज्रपात के साथ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। इसके अलावा राज्य के शेष हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

23 जून को कैसा रहेगा मौसम

23 जून को भी राज्य में मौसम का यही रुख बना रहेगा। उत्तर-पश्चिमी हिस्सों को छोड़कर अधिकांश जिलों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। साथ ही गरज-चमक, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।

24 जून का पूर्वानुमान

24 जून को राज्य के उत्तर-पश्चिमी और निकटवर्ती उत्तर-मध्य क्षेत्रों को छोड़कर बाकी हिस्सों में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। कई इलाकों में गर्जन, वज्रपात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चल सकती हैं। 

Published / 2026-06-21 20:58:57
वन बंधु परिषद ने 4500 एकल विद्यालयों में आज योग दिवस मनाया

  • वन बंधु परिषद ने 4500 एकल विद्यालयों में आज योग दिवस मनाया

टीम एबीएन, रांची। एकल अभियान के अंतर्गत वन बंधु परिषद के रांची चैप्टर के 19 अंचल के अंतर्गत  4500 एकल विद्यालयों में योग दिवस मनाया गया। सभी विद्यालयों के बच्चों के साथ उनके अभिभावकों ने भी योग में हिस्सा लिया।

वन बंधु परिषद के अध्यक्ष श्री अंचल किंगर ने बताया कि इस वर्ष एकल विद्यालयों में योग दिवस को सभी विद्यालयों में सफलतापूर्वक मनाने के लिए रांची चैप्टर अंतर्गत सभी 19 अंचल के प्रभारी चैप्टर से नियुक्त किये गये थे। उनके सफल नेतृत्व से झारखंड के 4500 गांवों में एकल विद्यालयों में आज योग दिवस मना।

रांची, रामगढ़, रातू, खूंटी, गुमला, पलामू, लोहरदगा, हजारीबाग कोडरमा बोकारो लातेहार जामताड़ा देवघर पाकुड़ चतरा गढ़वा सिमडेगा पांकी जिलों के एकल विद्यालयों में योग दिवस का नेतृत्व अजयदीप वाधवा, मनोज तुलस्यान, मोनिका जैन, वंदना मोदी, राजकुमारी जैन, सुमन मिनोचा, मंजू खेतान, राजेश अडूकिया, दीपक श्रीवास्तव, अजय रूंगटा, सज्जन सर्राफ, विनोद भंडारी, संजय टांटिया, शिव शंकर साबू ने किया। सभी विद्यालयों के बच्चो ने योग किया साथ ही उन्हें योगा का महत्व भी बताया गया।

Published / 2026-06-19 21:20:31
झारखंड : 24 जून तक बारिश के आसार

  • 24 जून तक इस राज्य में झमाझम बारिश के आसार
  • वज्रपात की भी चेतावनी; मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

टीम एबीएन, रांची। रांची समेत राज्य के कई जिलों में शुक्रवार सुबह तेज बारिश हुई। आसमान में घने काले बादल छाए हुए हैं और मौसम सुहावना हो गया है। गुरुवार को दिनभर उमस भरी गर्मी से लोग परेशान रहे, हालांकि पलामू, कोडरमा और गुमला समेत कुछ इलाकों में हुई बारिश से राहत मिली।

कई हिस्सों में ऑरेंज अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, जामताड़ा, देवघर, दुमका, सरायकेला- खरसावां तथा पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूम जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। 

कई स्थानों पर रुक-रुक कर वर्षा होती रहेगी। मौसम विभाग ने मेघ गर्जन, वज्रपात और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी जारी की है। विशेष रूप से रांची, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, देवघर, दुमका, जामताड़ा और पूर्वी सिंहभूम के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

24 जून तक लगातार बारिश के आसार
विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों में राज्य के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। इसके बाद अगले दो दिनों तक तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 24 जून तक झारखंड में लगातार बारिश का दौर बना रह सकता है। 

पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य के कई हिस्सों में गर्जन के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सर्वाधिक 35.0 मिमी वर्षा बालूमाथ में रिकॉर्ड की गई। वहीं सबसे अधिक अधिकतम तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस डाल्टनगंज में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.6 डिग्री सेल्सियस लातेहार में रहा।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक जून से 18 जून तक झारखंड में सामान्य से 59 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस अवधि में सामान्य वर्षापात 74.9 मिमी होना चाहिए था, जबकि वास्तविक वर्षा केवल 30.8 मिमी दर्ज की गई। 

गढ़वा जिला अब तक 100 प्रतिशत वर्षा घाटे की स्थिति में है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो परिस्थितियां और स्थानीय स्तर पर मानसून की धीमी प्रगति राज्य में सामान्य से कम वर्षा के प्रमुख कारण हैं। हालांकि आने वाले दिनों में मानसून के और सक्रिय होने की संभावना जताई गई है।

Published / 2026-06-08 19:34:45
झारखंड : अगले तीन दिन कई जिलों में बारिश के आसार

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में जून की गर्मी के बीच मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम केंद्र रांची के ताजा पूवार्नुमान के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बादल, बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। खासकर दक्षिणी, मध्य और उत्तर-पूर्वी जिलों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गयी है। 

आज 8 जून का मौसम 

सोमवार को राज्य में आंशिक रूप से बादल दिखी है। दक्षिणी झारखंड और उत्तर-पूर्वी झारखंड के कई इलाकों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश के आसार नजर आये। कुछ स्थानों पर गर्जन के साथ वज्रपात और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। 

मौसम केंद्र के अनुसार आज उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। इस दौरान पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज में असर दिख सकता है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गयी है। 

9 जून को इन इलाकों में बारिश की संभावना 

मंगलवार को राज्य के दक्षिणी भाग और उससे सटे मध्य क्षेत्रों में मौसम सक्रिय रह सकता है। कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने तथा गर्जन के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है। रांची, बोकारो, रामगढ़, खूंटी, गुमला और कोल्हान क्षेत्र के जिलों में मौसम का असर अधिक देखने को मिल सकता है। 

10 जून को अधिकांश जिलों में बरस सकते हैं बादल 

बुधवार को उत्तर-पश्चिमी हिस्से के कुछ जिलों को छोड़कर राज्य के अधिकांश भागों में बारिश की संभावना बनी हुई है। कई स्थानों पर मेघ गर्जन के साथ वर्षा और तेज हवाएं चल सकती हैं। संथाल परगना, कोल्हान और रांची प्रमंडल के कई जिलों में मौसम अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय रहने का अनुमान है। 

11 जून को वज्रपात और तेज हवाओं का खतरा 

गुरुवार को उत्तर-पूर्वी तथा मध्य झारखंड के कई जिलों में मौसम और प्रभावी हो सकता है। धनबाद, बोकारो, कोडरमा, हजारीबाग, रामगढ़ और रांची समेत आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना जतायी गयी है। कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। 

मौसम केंद्र के अनुसार अगले एक-दो दिनों में अधिकतम तापमान में लगभग 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद बारिश की गतिविधियां बढ़ने पर तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। इससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। 

राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में 8 और 9 जून को आंशिक बादल छाए रहने तथा गर्जन वाले बादल बनने की संभावना है। 10 और 11 जून को बारिश और मेघ गर्जन की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मौसम केंद्र ने इस दौरान लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

Published / 2026-06-06 11:45:21
पलामू : विश्व पर्यावरण दिवस पर एके सिंह कॉलेज जपला में पौधरोपण

  • विश्व पर्यावरण दिवस पर ए.के. सिंह कॉलेज जपला में पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

एबीएन न्यूज नेटवर्क, हुसैनाबाद। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ए.के. सिंह कॉलेज जपला की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई के तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस दौरान स्वयंसेवकों ने आंवला, नींबू, कदम और गुलमोहर सहित विभिन्न पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. राम सुभग सिंह ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधा अवश्य लगाना चाहिए। यह हम सभी का नैतिक कर्तव्य है। 

प्रो. सूर्यमणि सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जन्मदिन जैसे विशेष अवसरों पर एक पौधा लगाए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करे। एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. राजेश कुमार सिंह ने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए पेड़-पौधों का होना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से घरों के आसपास खाली भूमि में पौधारोपण करने की अपील की। 

प्रो. राहुल कुमार सिंह ने कहा कि लगातार पेड़ों की कटाई के कारण ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है, इसलिए अधिक से अधिक पौधे लगाने की जरूरत है। मौके पर प्रो. शशिभूषण सिंह, डॉ. शिवकुमार विश्वकर्मा, प्रिंस कुमार सिंह, अश्विनी कुमार, उत्तम कुमार, विवेक कुमार, रिंकी कुमारी, खुशबू कुमारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं स्वयंसेवक उपस्थित थे।

Published / 2026-06-05 21:49:08
विश्व पर्यावरण दिवस पर नवा बिहान ने किया पौधरोपण सह गोष्ठी

  • विश्व पर्यावरण दिवस पर नवा बिहान द्वारा वृक्षारोपण सह गोष्ठी का आयोजन
  • देशभर से आए इंटर्नशिप के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

टीम एबीएन, रांची। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था नवा बिहान – नर्चरिंग इनिशिएटिव्स द्वारा राँची के होचर, रिंग रोड क्षेत्र में वृक्षारोपण सह गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों एवं प्रतिष्ठित महाविद्यालयों से इंटर्नशिप के लिए आए छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम का शुभारंभ अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, राँची जिला इकाई के अध्यक्ष आलोक कुमार पांडे एवं उपाध्यक्ष बृज मोहन ओझा द्वारा नीम एवं कदम के पौधे लगाकर किया गया। दोनों अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा पौधों की नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राँची जिला पुलिस के सार्जेंट मेजर आनन्द राज खालको ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2026 के विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य विषय जलवायु परिवर्तन : पृथ्वी के संकेत और हमारी प्रतिक्रिया है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी लगातार हमें बढ़ते तापमान, असामान्य मौसम, जल संकट तथा जैव विविधता में कमी के रूप में चेतावनी दे रही है। ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के वैश्विक अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान सभी लोगों से आगे बढ़कर अधिक प्रयास करने तथा पहले से ही गतिमान दुनिया को सही दिशा देने का आह्वान करता है। उन्होंने कहा कि केवल सरकारों के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना किया जा सकता है।

नवा बिहान के जिला अध्यक्ष गौतम तिवारी के संरक्षण में होचर, रिंग रोड क्षेत्र में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस दौरान लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण की जिम्मेदारी भी स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण प्रदान करने का संकल्प है। उन्होंने सभी युवाओं से अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नवा बिहान के संस्थापक आर. अजय ने कहा कि देशभर से आए इंटर्नशिप के छात्र-छात्राएं विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति ही विकसित भारत के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं के पास ऊर्जा, नवाचार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि नवा बिहान द्वारा संचालित सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, स्वास्थ्य, आजीविका संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लगातार कार्य किया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य युवाओं को समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना तथा उन्हें सेवा, नेतृत्व और सतत विकास की भावना से जोड़ना है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेते हुए प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, अधिक से अधिक वृक्ष लगाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा स्वच्छ और हरित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने सामुदायिक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और पर्यावरण संबंधी गतिविधियों में निरंतर भागीदारी निभाने का भी संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों से आए इंटर्नशिप के प्रतिभागियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां उन्हें केवल व्यावहारिक अनुभव ही नहीं प्रदान करतीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित करती हैं। उन्होंने नवा बिहान द्वारा प्रदान किए जा रहे सामुदायिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के अवसरों की सराहना की।

कार्यक्रम का समापन एक पेड़ माँ के नाम, पेड़ लगाओ–भविष्य बचाओ तथा हरित भारत, विकसित भारत के संदेश के साथ किया गया। सभी प्रतिभागियों ने पौधों की सुरक्षा एवं संरक्षण का संकल्प लेते हुए पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में कृतिका लकड़ा, स्वीटी भेंगरा, किरण नागौवर, सृष्टि कुमारी मुण्डा, शुभम कुमार, रौशन कुमार, अंकित भगत, सौरभ कुमार महतो, आयुष कुमार, मनोहर ओरांव, तन्मय जयसवाल, साक्षी जसवाल, रोहित कुमार, अमन राज, प्रिया तांशू मुन्डा, आर्यन केरकेट्टा, श्रेष्ठा जयसवाल, कृषिका अग्रवाल, अमन कुमार, प्रवीण कुमार केरकेट्टा, सुमंत कुमार यादव, कुमार तनिष्क, आर्यन, निरंजन और एस कुमार का सहयोग सहराणीय रहा।

Published / 2026-06-04 20:52:22
डॉ कौशल : एक व्यक्ति, एक संकल्प और हरित क्रांति की आधी सदी

एक व्यक्ति, एक संकल्प और हरित क्रांति की आधी सदी : डॉ कौशल किशोर जायसवाल का वनराखी आंदोलन 

विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर विशेष 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जब पर्यावरण संरक्षण की चर्चा भी आम नहीं थी, तब पलामू की धरती से एक युवा ने प्रकृति को बचाने का संकल्प लिया। वर्ष 1966 के भीषण अकाल ने उसके मन पर ऐसी छाप छोड़ी कि उसने अपना जीवन जंगल लगाने, वृक्ष बचाने और पर्यावरण जागरूकता के लिए समर्पित कर दिया। वह युवा आज देश-विदेश में पर्यावरणविद के रूप में पहचान बना चुके डॉ. कौशल किशोर जायसवाल हैं, जिनके वनराखी मूवमेंट ने इस वर्ष अपने गौरवशाली 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर देशभर में वनराखी आंदोलन की स्वर्ण जयंती समारोह श्रृंखला आयोजित की जा रही है। पर्यावरण धर्म और वृक्ष संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने वाले डॉ. कौशल का अभियान आज सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है। 

अकाल से मिली प्रेरणा, पर्यावरण बना जीवन का धर्म 

डॉ. कौशल बताते हैं कि 1966 के महाअकाल ने उन्हें प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को समझने का अवसर दिया। उन्होंने महसूस किया कि जल, जंगल और पर्यावरण के बिना मानव सभ्यता का अस्तित्व संभव नहीं है। इसी सोच ने उन्हें पर्यावरण धर्म और वनराखी मूवमेंट की स्थापना के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि ऊपर सूर्य देव और नीचे वृक्ष देव हैं। यदि ये दोनों नहीं रहेंगे तो पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी संभव नहीं होगी। 

पांच दशक का संघर्ष, लाखों पौधों का हरित संदेश 

पिछले छह दशकों में डॉ. कौशल ने देश के 26 राज्यों के 181 जिलों के साथ-साथ नेपाल, भूटान, म्यांमार, सिंगापुर, मलेशिया, अजरबैजान, थाईलैंड, इंडोनेशिया, जापान और वियतनाम सहित कई देशों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाया है। 

उनके नेतृत्व में अब तक लगभग 59 लाख पौधों का नि:शुल्क वितरण एवं रोपण किया जा चुका है। वहीं 26 लाख से अधिक वृक्षों पर रक्षाबंधन कर उन्हें संरक्षण का प्रतीक बनाया गया है। उनका मानना है कि वृक्ष केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य हैं और उनकी रक्षा हमारा नैतिक दायित्व है। 

डाली का जंगल: जुनून की जीवंत मिसाल 

पलामू जिले के छतरपुर अनुमंडल अंतर्गत ग्राम पंचायत डाली आज डॉ. कौशल की तपस्या का सजीव उदाहरण है। जहां कभी बंजर भूमि थी, वहां आज हरियाली का विस्तृत संसार विकसित हो चुका है। 

डाली स्थित मोहनलाल खुर्जा-पार्वती देवी पार्क में 22 देशों की 200 से अधिक प्रजातियों के पौधे लगाये गये हैं, जिनमें अनेक दुर्लभ एवं औषधीय प्रजातियां शामिल हैं। यह क्षेत्र आज पर्यावरण प्रेमियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए अध्ययन एवं प्रेरणा का केंद्र बन गया है। 

दुनिया का पहला पर्यावरण धर्म ज्ञान वृक्ष देव मंदिर 

डॉ. कौशल की सोच केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रही। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का प्रयास किया। इसी दिशा में 12 फरवरी 2026 को डाली में दुनिया के पहले पर्यावरण धर्म ज्ञान वृक्ष देव मंदिर का उद्घाटन किया गया। इस अनूठे मंदिर की विशेषता यह है कि यहां ईंट-पत्थर की पारंपरिक संरचना नहीं, बल्कि वृक्ष ही देवस्वरूप माने जाते हैं। 

मंदिर का उद्घाटन अमेरिका के शोधकर्ता जॉर्ज जेम्स, कर्नाटक के प्रसिद्ध पर्यावरणविद एवं आपीको आंदोलन के नेता पांडुरंग हेगड़े सहित विभिन्न राज्यों से आए पर्यावरण विशेषज्ञों की उपस्थिति में किया गया। आज प्रतिदिन सैकड़ों लोग यहां पहुंचकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश सीख रहे हैं और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझ रहे हैं। 

जब लोग कहते थे पागल, आज वही आंदोलन बना प्रेरणा 

डॉ. कौशल के संघर्ष का प्रारंभिक दौर आसान नहीं था। जब वे अपनी गाड़ी में पौधे लेकर गांव-गांव जाते थे, तब कई लोग उनका मजाक उड़ाते थे। उन्हें पागल तक कहा जाता था। लेकिन उन्होंने आलोचनाओं की परवाह किए बिना अपना अभियान जारी रखा। 

कोरोना महामारी के दौरान जब आॅक्सीजन की कमी ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया, तब लोगों को उनके वर्षों पुराने संदेश का महत्व समझ में आया। डॉ. कौशल कहते हैं कि जब मैं जल संकट और आॅक्सीजन संकट की बात करता था, तब लोग हंसते थे। लेकिन कोरोना ने बता दिया कि जीवन के लिए सबसे आवश्यक क्या है। 

किसानों को सिखायी वृक्ष खेती की अवधारणा 

डॉ. कौशल ने दशकों पहले किसानों को वृक्ष आधारित खेती का महत्व समझाया। उनका कहना है कि वृक्ष किसानों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह होते हैं। सूखा, बाढ़ या विपरीत परिस्थितियों में भी वृक्ष भविष्य की आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। वे कहते हैं कि वन राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति हैं। इन्हें काटना ही नहीं, अनावश्यक क्षति पहुंचाना भी प्रकृति के प्रति अपराध है। 

पाठ्यपुस्तकों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहचान 

डॉ. कौशल के पर्यावरणीय योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। उनकी जीवनी सीबीएसई बोर्ड की कक्षा आठ और आईसीएसई बोर्ड की कक्षा छह के पाठ्यक्रम में शामिल की जा चुकी है। झारखंड के कई शैक्षणिक कार्यक्रमों में भी उनके कार्यों का अध्ययन कराया जाता है। 

उनके जीवन और कार्यों पर आधारित प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं तथा लोकप्रिय ज्ञान कार्यक्रमों में भी पूछे जा चुके हैं। अब तक उन्हें लगभग 80 सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें 10 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी शामिल हैं। 

एक व्यक्ति का संकल्प, जन-आंदोलन की सफलता 

वनराखी आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह किसी संस्था या सरकार का अभियान नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के संकल्प से शुरू होकर जन-आंदोलन में परिवर्तित हुआ है। आज हजारों लोग इस अभियान से जुड़कर वृक्ष संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का कार्य कर रहे हैं। 

स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका यह आंदोलन आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश देता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो तो एक अकेला व्यक्ति भी समाज और प्रकृति दोनों की दिशा बदल सकता है। 

निष्कर्ष 

विश्व पर्यावरण दिवस केवल पौधे लगाने का अवसर नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपने दायित्व को समझने का दिन है। डॉ. कौशल किशोर जायसवाल की जीवन यात्रा हमें बताती है कि पर्यावरण संरक्षण कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन जीने की संस्कृति है।

आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब वनराखी आंदोलन जैसी पहलें आशा की नयी किरण बनकर उभर रही हैं। प्रकृति की रक्षा ही मानवता की रक्षा है, और यही संदेश डॉ. कौशल के पांच दशक लंबे संघर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

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