टीम एबीएन, रांची। झारखंड में इन दिनों ठंड की वजह से लोगों का हाल बेहाल है। दिन-प्रतिदिन राज्य का तापमान गिरता ही जा रहा है। मौसम विभाग की मानें तो शुक्रवार को अधिकतम तापमान 26.34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13.41 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। इस दौरान आसमान साफ रहने की संभावना है। लेकिन 8 दिसंबर से कई जिलों में बारिश के आसार जताये गये हैं।
रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक शनिवार से झारखंड के उत्तर-पश्चिमी और उससे सटे कई इलाकों में हल्के दर्जे की बारिश की संभावना जतायी गयी है। 9 दिसंबर को भी बारिश का दौरा जारी रहेगा। हालांकि, 10 दिसंबर से आसमान के साफ रहने की संभावना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देशभर में एक ओर जहां ठंड पैर पसार रही है। वहीं, दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी में बना एक डिप्रेशन फेंगल नामक चक्रवाती तूफान का रूप लेने जा रहा है। कहा जा रहा किबंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान फेंगल शनिवार दोपहर पुडुचेरी के पास तट से टकरा सकता है। हालांकि, इससे पहले ही फेंगल के असर से मौसम बदलने लगा है। इसके कारण समुद्री तट पर उथल-पुथल साफ तौर पर देखने को मिल रही है। तमिलनाडु और पुडुचेरी के कई हिस्सों में बारिश हो रही है।
समुद्र में ऊंची लहरें उठने लगी हैं। मौसम विभाग ने लोगों से घरों में रहने की अपील की है। मौसम विभाग के मुताबिक फेंगल के असर के कारण हवाओं की गति 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है।चक्रवात फेंगल के चलते कासिमेदु इलाके में समुद्र में हाई टाइड और तेजहवाएंदेखने को मिली। उत्तरी चेन्नई में तेज बारिश हुई।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में तापमान 10.1 डिग्री सेंटीग्रेड हो गया है। राजधानी रांची, जमशेदपुर, डालटेनगंज और बोकारो जैसे शहरों में अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे चला गया है।
हालांकि, न्यूनतम तापमान अभी सामान्य से मामूली अधिक है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रांची स्थित मौसम केंद्र ने बताया है कि झारखंड का न्यूनतम तापमान 10.1 डिग्री सेंटीग्रेड हो गया है। अधिकतम तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस है।
मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, पिछले 24 घंटे के दौरान गढ़वा झारखंड का सबसे सर्द जगह रहा। यहां का न्यूनतम तापमान 10.1 डिग्री सेंटीग्रेड रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने कहा है कि 30 जनवरी यानी शनिवार को सुबह में हल्के से मध्यम दर्जे का कोहरा या धुंध छाया रहेगा।
इसके बाद आसमान में आंशिक बादल छाये रहेंगे। मौसम शुष्क ही रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में अगले 2 दिन तक न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद तापमान 2 से 3 डिग्री तक बढ़ सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देशभर के कई राज्यों में एक बार फिर तबाही मचने के आसार बन रहे हैं। जी हां कोरोना महामारी की वक्त लगा लॉकडाउन एक बार फिर लग सकता है। कई हिस्सों में इसको लेकर चेतावनी जारी कर दी गयी है। दरअसल, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से एक ऐसा अलर्ट जारी हुआ है जिसने सबकी नींद उड़ा दी है। प्रशासन से लेकर लोगों तक सभी की चिंताएं बढ़ गयी हैं। मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है और इसको लेकर एक बड़ा डर भी बढ़ रहा है।
देश के कुछ हिस्सों में एक बड़ा चक्रवाती तूफान तेजी से बढ़ रहा है। इसी तूफान के डर से लोगों को घरों में कैद होने जैसी स्थिति बन रही है। ऐसे में लोगों के लिए चिंता बढ़ गयी है। बता दें कि बंगाल की खाड़ी में आने वाले कुछ घंटों में एक डीप प्रेशर बन रहा है जो आगे बढ़ रहा है। इसने अब चक्रवाती तूफान का रूप ले लिया है।
आईएमडी की ओर से साइक्लो फेंगल को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की गयी है। इस अलर्ट के तहत 27 और 28 नवंबर को देश के कुछ हिस्सों में बड़ी तबाही मच सकती है। तेज हवाओं के साथ-साथ जोरदार बारिश लोगों के लिए मुश्किल खड़ी कर देगी।
साइक्लोन फेंगल को लेकर देश के दक्षिण राज्यों को अलर्ट पर रखा गया है। इसमें प्रमुख रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक के तटीय इलाके शामिल हैं। इसके अलावा ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
बता दें कि दो दिन बाद यानी 29 नवंबर को ही एक और आसमानी आफत चिंता बढ़ा रही है। दरअसल पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ तैयार हो रहा है जो तेजी से आगे बढ़ने वाला है। इसके कुछ अन्य राज्यों में आगे बढ़ने की उम्मीद है।
मौसम विभाग की ओर से पूर्वोत्तर राज्यों में इसको लेकर चेतावनी जारी की गयी है। इसमें कुछ हिस्सों में आरेंज और तो कुछ में रेड अलर्ट जारी किया गया है। बता दें कि 30 नवंबर तक कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश और कुछ हिस्सों में अच्छी बर्फबारी भी हो सकती है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में ठंड ने दस्तक दे दी है। ला नीना के प्रभाव के कारण अब झारखंड में सर्दी का मौसम जल्दी शुरू हो गया है। तापमान में 5 डिग्री तक गिरावट आयी है। मौसम विभाग के अनुसार, ला नीना के प्रभाव के चलते आगामी दिनों में ठंड में और वृद्धि हो सकती है।
रांची समेत कई जिलों में घने कोहरे के भी छाये रहेंगे। जिससे सर्दी का असर बढ़ेगा। फरवरी और मार्च तक कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। साथ ही सुबह और शाम कोहरे के कारण विजिबिलिटी पर भी असर पड़ सकता है, मौसम विभाग ने लोगों को वाहन चलाते व सड़क पर चलते समय अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है।
मौसम विभाग के अनुसार आज के मौसम की बात की जाये तो आज मौसम शुष्क रहेगा। हालांकि दोपहर के समय अच्छी धूप खिलेगी, लेकिन शाम होते ही लोगों को ठंड का एहसास भी होगा। रांची और आसपास के इलाकों में न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री की गिरावट आ सकती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किये गये देशव्यापी अभियान एक पेड़ मां के नाम... के तहत अब तक एक अरब पेड़ लगाये जा चुके हैं। शनिवार को केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्वीट करके कहा कि एक पेड़ मां के नाम... अभियान एक बड़े पड़ाव पर पहुंच गया है। शनिवार को इस अभियान के तहत 1 अरब पेड़ लगाए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया एक पेड़ मां के नाम... के नाम अभियान एक बड़े पड़ाव पर पहुंच गया है। भूपेंद्र यादव ने कहा कि हरित भारत के निर्माण की दिशा में अभियान की आश्चर्यजनक सफलता दशार्ती है कि हम अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी दोनों पर प्रगति के लिए कैसे दृढ़ हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर इस अभियान में लाखों भारतीयों की जनभागीदारी दर्शाती है कि भारत प्रकृति के साथ एकता के सिद्धांत से कैसे जीता है। उन्होंने पड़े लगाने का आह्वान किया।
टीम एबीएन, रांची। रांची में पिछले 24 घंटे में चक्रवाती तूफान दाना का अच्छा खासा असर देखने को मिला है। चक्रवाती तूफान दाना के कारण राज्य में ठंड ने दस्तक दे दी है। इस तूफान के कारण झारखंड का मौसम बदल गया है। तेज हवाओं और बारिश के कारण प्रदेश का तापमान तेजी से नीचे गया है। लोग मॉर्निंग वॉक करते समय स्वेटर पहन निकलने लगे हैं। तापमान में गिरावट के चलते रात में भी अब रजाई निकालनी पड़ सकती है।
इन इलाकों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने राजधानी रांची समेत कुछ जिलें जैसे धनबाद, बोकारो, कोडरमा, लातेहार, चतरा, देवघर, पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां, सिमडेगा व खूंटी में जबरदस्त बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। यहां पर 75 से 100 मिमी बारिश की संभावना है। इसके अलावा इन इलाकों में खास तौर पर वज्रपात को लेकर चेतावनी भी जारी की गयी है।
बता दें कि चक्रवाती तूफान दाना का सबसे अधिक असर शुक्रवार को कोल्हान प्रमंडल में रहा। इससे कोल्हान के कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई। पिछले 24 घंटे में सबसे अधिक 71 मिमी बारिश पूर्वी सिंहभूम के गुड़ाबांधा में दर्ज की गयी है। वहीं, अगर आज तापमान की बात करें तो अधिकतम 28 व न्यूनतम 20 डिग्री दर्ज किया जा सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हरियाणा-जम्मू-कश्मीर में नयी सरकारों के गठन और महाराष्ट्र-झारखंड में जोर पकड़ रही चुनावी तैयारियों के बीच छत्तीसगढ़ से आयी एक जरूरी खबर पर चर्चा की दरकार है। खबर ये है कि सरगुजा जिले के फतेहपुर और साली गांवों के पास करीब 5,000 पेड़ों की कटाई के मामले को लेकर स्थानीय निवासियों और पुलिस प्रशासन के बीच झड़प हो गयी, जिसमें दोनों ही पक्षों को चोटें आयी हैं।
सरकारी ड्यूटी पर तैनात जिन लोगों को शारीरिक चोट पहुंची है, उनका इलाज और मुआवजा दोनों सरकार के जिम्मे पूरा हो जायेगा, लेकिन प्रदर्शनकारियों का भविष्य क्या होगा, ये कोई नहीं जानता। दरअसल, ये सारा प्रदर्शन और सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलने का फैसला भविष्य के सवाल से ही जुड़ा है। इंसानों के साथ-साथ जल, जंगल, जमीन और समूची प्रकृति के भविष्य का यह सवाल है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में पेड़ों को बचाने की लड़ाई लंबे वक्त से चल रही है। 1,500 किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह घना जंगल छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों का निवास स्थान है। इस घने जंगल के नीचे लगभग पांच अरब टन कोयला दबा है। इस वजह से पूंजीपतियों और पूंजीवादी सरकारों की गिद्ध दृष्टि यहां टिकी हुई है।
इस इलाके में खनन बहुत बड़ा व्यवसाय बन गया है, लेकिन स्थानीय लोग इस खनन का लगातार विरोध कर रहे हैं। क्योंकि इसके लिए बड़ी बेदर्दी से जंगल को काटा जा रहा है और यहां की जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। इस समय यहां पर पेड़ों की कटाई राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) को दिये गये परसा कोल ब्लॉक खनन परियोजना के तहत की जा रही है।
बीते गुरुवार को भी पेड़ों की कटाई होनी थी, लेकिन बुधवार से ही लोग यहां जमा हो गये। ताकि अधिकारियों को कार्रवाई करने से रोका जा सके। सरकार की तरफ से भी पर करीब 400 पुलिस और वन विभाग के कर्मियों को तैनात किया गया था। पुलिस का कहना है कि स्थानीय लोग लकड़ी के डंडे, तीर और कुल्हाड़ी से लैस थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस के लाठी चार्ज के बाद उन्होंने जवाबी हमला किया।
जबकि इन आरोपों से इंकार करते हुए सरगुजा के पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल का कहना है ग्रामीण हिंसक हो गये और उन्होंने हम पर हमला कर दिया। उन्हें रोकने और तितर-बितर करने के लिए हमने उचित जवाब दिया। छत्तीसगढ़ में भाजपा के सत्ता में आते ही पिछले साल दिसंबर में हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा पूर्व और केते बासन (पीईकेबी) के दूसरे चरण विस्तार के तहत कोयला खदान के लिए पेड़ काटने की कवायद बड़े पैमाने पर हुई थी।
तब भी यह काम पुलिस के सुरक्षा घेरे में किया गया था। इससे पहले वन विभाग ने मई 2022 में पीईकेबी चरण-2 कोयला खदान की शुरुआत करने के लिए पेड़ काटने की कवायद शुरू की थी, तब भी स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया था। बाद में इस कार्रवाई को रोक दिया गया था। अब स्थानीय प्रशासन ने दावा किया है कि उसके पास पीईकेब में पेड़ काटने के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां हैं, जो पीईकेबी खदान का विस्तार है।
अब सवाल यह है कि पेड़ काटने की जिन आवश्यक अनुमतियों के दावे हो रहे हैं, उसके निहितार्थ क्या हैं। सत्ता और प्रशासन में बैठे लोगों और पूंजीपतियों, उद्योगपतियों के बीच सांठ-गांठ का खेल सदियों से चला आ रहा है। विकास के नाम पर प्रकृति का बेदर्दी से दोहन किया जाता है और आने वाली पीढ़ियां उसका भुगतान करती हैं। अभी पूरी दुनिया में जलवायु गर्म होने, ग्लेशियर के पिघलने, अकाल और बाढ़ जैसी स्थितियों के निर्मित होने पर चर्चाएं होती हैं, लेकिन इनका हल कुछ नहीं निकलता, क्योंकि अनाप-शनाप खर्चों पर हाथीदांत की जिन मीनारों पर चढ़कर ये विमर्श होते हैं, वहां से जमीनी सच्चाई नजर नहीं आती है।
भारत भी इन चर्चाओं में अहम भागीदारी करता है और हमारे प्रधानमंत्री तो पर्यावरण बचाने के अचूक मंत्र वेद-पुराणों से निकालकर लाते हैं। लेकिन उनके अपने शासन के 11 सालों का हासिल ये है कि देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के नये झंडे गाड़ रही है। इसलिए पेड़ काटने की सरकारी सहमति और असहमति के बीच जरूरी मुद्दा यह है कि हजारों सालों में जो जंगल तैयार हुआ है, उसे मिनटों में उजाड़कर इन नुकसान की भरपाई कैसे की जायेगी।
गौरतलब है कि हसदेव अरण्य को 2010 में कोयला मंत्रालय एवं पर्यावरण एवं जल मंत्रालय के संयुक्त शोध के आधार पर पूरी तरह से नो गो एरिया घोषित किया था, अर्थात वहां प्रवेश निषिद्ध था, लेकिन इस फैसले को कुछ महीनों में ही रद्द कर दिया गया था और खनन के पहले चरण को मंजूरी दे दी गयी थी। बाद में 2013 में खनन शुरू हो गया था। यह समझना कठिन नहीं है कि किन लोगों के दबाव में एक जरूरी फैसले को कुछ महीनों में रद्द कर दिया गया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक दावा है कि परसा खनन परियोजना के कारण 700 लोग विस्थापित होंगे और 840 हेक्टेयर घने जंगल नष्ट हो जायेंगे। वन विभाग की 2009 की जनगणना के अनुसार, लगभग 95,000 पेड़ इस परियोजना के कारण काटे जायेंगे। लोगों को तो फिर भी किसी तरह दूसरी जगह बसाया जा सकता है, लेकिन एक बार जो पेड़ कट जायेंगे, क्या उसमें पलने वाले जीव-जंतुओं को संरक्षित किया जा सकेगा, क्या इतनी जल्दी इतना विशाल जंगल खड़ा किया जा सकेगा, इन सवालों के जवाब भी पेड़ काटने की अनुमति का कागज दिखाने वालों को देना चाहिए।
बहरहाल, गुरुवार को हुई झड़प की घटना पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक पोस्ट में कहा है कि हसदेव अरण्य में पुलिस बल के हिंसक प्रयोग के जरिये आदिवासियों के जंगल और जमीन को जबरन हड़पने का प्रयास आदिवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान हसदेव जंगल को न काटने का प्रस्ताव विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था- सर्वसम्मति का मतलब विपक्ष यानी भाजपा की संयुक्त सहमति है।
लेकिन, सरकार में आते ही उन्हें न तो यह प्रस्ताव याद आया और न ही हसदेव के इन मूल निवासियों की दुर्दशा और अधिकार। राहुल गांधी ने एक वाजिब बिंदु की तरफ इशारा किया है कि जब पहले हसदेव के जंगल न काटने में भाजपा की भी सहमति थी, तो अब उसे यह सहमति याद क्यों नहीं है। यहां कांग्रेस या भाजपा या किसी अन्य दल से ऊपर उठकर केवल जंगल को बचाने के बारे में विचार हो, यही सबके लिए बेहतर होगा। बताते चलें कि इस परियोजना के कारण 95,000 पेड़ काटे जायेंगे।
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