वन और पर्यावरण

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Published / 2024-07-11 21:28:17
झारखंड में झमाझम बारिश का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रहा मानसून ट्रफ, ओड़िशा में साइक्लोन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मानसून ट्रफ बीकानेर, जयपुर, ओड़ाई, बलिया, आसनसोल, बागती होते हुए बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है। असम और उससे सटे इलाकों में के साथ-साथ ओड़िशा में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से झारखंड के कई जिलों में झमाझम बारिश हुई। शुक्रवार (12 जुलाई) को भी कई जिलों में अच्छी-खासी बारिश होगी। कुछ जगहों पर वज्रपात भी हो सकता है। 

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रांची स्थित मौसम केंद्र ने यह जानकारी दी है। बृहस्पतिवार को रांची स्थित मौसम केंद्र के प्रमुख अभिषेक आनंद ने कहा है कि शुक्रवार को झारखंड में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ वज्रपात होने की संभावना है। 

उन्होंने कहा कि मौसम केंद्र की ओर से कल के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिक ने कहा कि झारखंड की राजधानी रांची समेत कई जिलों में बृहस्पतिवार को भी अच्छी-खासी बारिश देखने को मिली। कुछ जगहों पर वज्रपात भी हुआ।

Published / 2024-07-02 20:59:04
झारखंड : आठ जुलाई तक भारी बारिश का येलो अलर्ट

झारखंड में 8 जुलाई तक बारिश के आसार, भारी वर्षा को लेकर येलो अलर्ट जारी

टीम एबीएन, रांची। रांची-राजधानी रांची समेत झारखंड में मंगलवार को जोरदार बारिश हुई है। कई जगहों पर सोमवार की देर रात से ही बारिश हो रही है। मौसम विभाग की मानें, तो राज्य में 8 जुलाई तक बारिश की संभावना है। 4 जुलाई तक कई इलाकों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। 

इसे लेकर मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। झारखंड में कई स्थानों पर आठ जुलाई तक बारिश की संभावना है। तीन व चार जुलाई को राज्य के उत्तर पूर्वी और निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं-कहीं पर भारी बारिश हो सकती है। 

देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज, रांची, हजारीबाग, खूंटी, बोकारो, गुमला एवं रामगढ़ जिले में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इसे लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

Published / 2024-06-19 21:17:38
झारखंड : लगातार चार दिन बारिश का पूर्वानुमान

झारखंड में लगातार 4 दिन बारिश का अलर्ट जारी, भीषण गर्मी से मिलेगी राहत, 8 जिलों के लोग रहें सावधान

टीम एबीएन, रांची। भीषण गर्मी के बीच झारखंड के लोग राहत महसूस कर रहे है। मंगलवार सुबह को हल्की बारिश ने लोगों को राहत दे दी है। कई लोग इस दौरान बारिश में नहाते हुए भी दिखे। वहीं अब मौसम विभाग ने लगातार 4 दिनों तक बादल छाये रहने के आसार जताये हैं।

भीषण गर्मी से राहत

झारखंड में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण हाहाकार मचा हुआ था। लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त चल रहा था। इसके अतिरिक्त शहरवासियों को बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसी दौरान हुई हल्की बारिश ने जहां जनजीवन को राहत दी, वहीं पशु-पक्षियों की बेचैनी भी खत्म होती नजर आई। साथ ही जहां झारखंड में तापमान 40 डिग्री पार कर चुका था, वहीं हल्की बारिश से ठंडी-ठंडी हवा चलने के कारण तापमान 4 डिग्री सेल्सियस गिर गया है। 

इन जिलों में बारिश का अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, रांची, रामगढ़ आदि जिलों में हल्की व तेज बारिश होने की संभावना जतायी है। जहां इन जिलों के लोगों को राहत मिलने वाली है। वहीं मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह भी दी है। 

मानसून की वर्षा का इंतजार

बता दें कि लोगों को अब भी मानसून की वर्षा का इंतजार है। मौसम विभाग ने 15 जून को ही प्रदेश में मानसून के आने का पूर्वानुमान जारी किया था, लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी मानसूनी बादल रूठे हुए हैं। अब इस वर्ष भी विभाग की ओर से पांच से छह दिनों की देरी बतायी जा रही है, जिसका सीधा असर किसानी पर पड़ रहा है।

Published / 2024-06-16 21:22:56
झारखंड में कब होगी बारिश!

मॉनसून की इंट्री पर जानें मौसम विभाग का क्या है अपडेट

टीम एबीएन, रांची। इस बार झारखंड में मॉनसून प्रवेश को लेकर अनिश्चितताएं बढ़ने लगी हैं। इस बार भी इसके काफी विलंब से झारखंड में प्रवेश करने की संभावना है। इसके 23 से 25 जून के बीच झारखंड में मॉनसून प्रवेश की संभावना है। राज्य में अगले पांच दिनों तक इसके आने की संभावना नहीं है। 

जबकि पूर्वानुमान के मुताबिक इसके आने में आठ से नौ दिन के समय और लग सकते हैं। इस दौरान इसके बिहार और बंगाल के कुछ भागों में आच्छादित होने की संभावना बन रही है। 

मौसम विभाग के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया, मॉनसून आने की कोई एक निर्धारित तिथि नहीं होती। यह मॉनसून के प्रवेश और प्रस्थान की तिथि को लेकर अध्ययन के आधार पर एक औसत अवधि होती है, जिस बीच मॉनसून आगमन और प्रस्थान करता है। मॉनसून के प्रवेश या प्रस्थान की तिथियों के कारण यह अवधि निश्चित की जाती है।

Published / 2024-06-13 23:26:14
20 तक गर्मी से राहत की कोई उम्मीद नहीं

  • झारखंड में और सतायेगी गर्मी, 20 जून तक राहत के आसार नहीं

टीम एबीएन, रांची। हीटवेव से झुलस रहे झारखंड के लोगों को 20 जून तक राहत के आसार नहीं हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के रांची केंद्र की ओर से गुरुवार शाम जारी बुलेटिन के मुताबिक 14 से लेकर 20 जून तक राज्य में सामान्य बारिश की उम्मीद नहीं है। 

कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन पूरे हफ्ते राज्य के ज्यादातर इलाकों में हीटवेव का सिलसिला जारी रहेगा। मौसम केंद्र के प्रमुख अभिषेक आनंद ने बताया है कि इस सप्ताह के मध्य तक राज्य के विभिन्न शहरों में अधिकतम तापमान 38 से लेकर 46 डिग्री सेल्सियस के रेंज में रह सकता है। 

21 से लेकर 27 जून तक के हफ्ते के लिए जारी पूवार्नुमान के अनुसार, राज्य के ज्यादातर इलाकों में सामान्य वर्षा होने की संभावना है। इसके बावजूद गर्मी से खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। इस दौरान कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक और कुछ इलाकों में सामान्य दर्ज किया जा सकता है। इसका रेंज 34 से 40 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है।

Published / 2024-06-12 20:39:04
झारखंड : इन जगहों पर पहली बार रेड अलर्ट

कहर ढा रही है गर्मी, झारखंड में अलग-अलग इलाकों के लिए पहली बार रेड अलर्ट जारी

टीम एबीएन, रांची। गर्मी का पारा सर चढ़ कर बोल रहा है। यही वजह है कि झारखंड में पहली बार रेड अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि जब तक बहुत जरूरी काम न हो तब तक घर से बाहर न निकले। राज्य के अलग अलग हिस्सों के लिए 12 से 14 जून तक रेड अलर्ट जारी किया गया है। 

15 जून के लिए रेंज अलर्ट है। जिन इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है उसमें पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, लोहरदगा समेत कई जिले शामिल हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के 13 जून से राज्य के कई इलाकों में गर्जन, वज्रपात और तेज हवा के झोंके को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। केंद्र के अनुसार, 13 से 15 जून तक संताल परगना, कोल्हान और राजधानी के आसपास कई स्थानों पर गर्जन और वज्रपात हो सकता है। 

इस दौरान कहीं-कहीं हवा की गति 50 से 60 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है। इधर, मंगलवार को सबसे अधिक गर्मी डालटनगंज में रही। यहां का अधिकतम तापमान 45.5 डिग्री सेसि रिकॉर्ड किया गया। राज्य में पाकुड़, जामताड़ा और साहिबगंज को छोड़ सभी जिलों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेसि से अधिक हो गया है।

Published / 2024-06-07 20:54:03
हीटवेव ने तोड़ डाले मई के सारे पुराने रिकॉर्ड

सामान्य से भी डेढ़ डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रही

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मई में चली हीट वेव ने गर्मी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। वैज्ञानिकों के एक समूह ने जलवायु की समीक्षा के बाद बताया कि भारत में मई में चली हीट वेव अबतक की सबसे गर्म हीट वेव से भी डेढ़ डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रही। 

क्लाइमामीटर के समीक्षों ने बताया कि मई में भारत में जो भीषण हीटवेव चली, वह अल नीनो प्रभाव, मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का असामान्य रूप से गर्म होने और ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के चलते हीटवेव और गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

वैज्ञानिकों ने बताया क्यों बढ़ रही गर्मी

वैज्ञानिकों ने साल 1979-2001 और साल 2001-2023 के बीच के तापमान की तुलना की। इस तुलना के आधार पर वैज्ञानिकों ने बताया कि देश में जो सबसे गर्म हीटवेव दर्ज की गयी थी, मई में चली हीटवेव उससे भी डेढ़ डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रही। वैज्ञानिकों ने पाया कि अब भारत में हीटवेव इंसानी सहनशीलता से ज्यादा होती जा रही है और इसकी वजह जीवाश्म इंधन का ज्यादा इस्तेमाल है। 

फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के डेविडे फ्रांडा ने बताया कि भारत में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है और इसका कोई तकनीकी समाधान नजर नहीं आ रहा है। हमें कार्बन डाइ आॅक्साइड के उत्सर्जन को कम करने की कोशिश करनी चाहिए।

बढ़ती गर्मी भारत के लिए बनी गंभीर चुनौती 

सिंगापुर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में हीटवेव और ज्यादा खतरनाक होंगी। दुनिया का तापमान बढ़ने की वजह अल-नीनो प्रभाव के साथ ही मानव जनित जलवायु परिवर्तन है। उत्तर पश्चिम भारत के कई हिस्सों और मध्य भारत में लू का प्रकोप मई में ज्यादा खतरनाक रहा। कई राज्यों में हीटवेव के चलते लोगों की मौत हुई। देश में लोकसभा चुनाव के दौरान कम मतदान प्रतिशत की वजह भी भयंकर गर्मी और लू को माना जा रहा है। 

साथ ही देश के 150 बड़े जलाश्यों में पानी घटकर सिर्फ 22 प्रतिशत रह गया है। ऊर्जा की खपत बढ़ने से भी कई राज्यों में बिजली कटौती की समस्या से लोग परेशान हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में 25 हजार के करीब हीट स्ट्रोक के मामले सामने आए, जिनमें 56 लोगों की मौत गर्मी से संबंधित बीमारियों से हुई। इनमें से 46 मौतें अकेले मई में हुईं।

Published / 2024-06-05 18:08:19
पर्यावरण हमारे जीने का आधार है, इसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य

5 जून विश्व पर्यावरण दिवस

पर्यावरण का अर्थ संपूर्ण प्राकृतिक परिवेश से है

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व पर्यावरण दिवस हर वर्ष 5 जून को आयोजित किया जाता है। पर्यावरण हमारे जीने का मुख्य आधार है तथा इसका संरक्षण हम सभी का परम कर्तव्य है। पर्यावरण का अर्थ संपूर्ण प्राकृतिक परिवेश से है, जिसमें हम रहते हैं इसमें हमारे चारों ओर के सभी जीवित और निर्जीव तत्व शामिल होते हैं। जैसे की हवा, पानी, मिट्टी, पेड़-पौधे, जानवर और अन्य जीव- जंतु है पर्यावरण के घटक परस्पर एक दूसरे के साथ जुड़कर एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं। 

हालांकि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और मानव जीवन शैली के लिए उनके गलत उपयोग से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। दूषित पर्यावरण इन घटकों को प्रभावित करता है, जो जीवन जीने के लिए आवश्यक है। ऐसे में पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने प्रकृति और पर्यावरण का महत्व समझाने के उद्देश्य से हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हैं। इस दिवस को मनाने के पीछे का उद्देश्य पूरी दुनिया के लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। 

इस संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय दिवस में 150 से अधिक देशों के लोग भाग लेते हैं। स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित पृथ्वी बनाने के लिए तरह-तरह के जागरुकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं और लोगों को पर्यावरण का महत्व समझाया जाता है। मौके पर प्रदूषण से लेकर कई ऐसे विषयों पर चर्चा की जाती हैं जो कि पर्यावरण के लिए हानिकारक है। इस अवसर पर लोगों को पेड़-पौधे लगाने के लिए भी प्रेरित किया जाता है। 

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 1972 में विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत की थी। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1972 में मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन में की गयी थी। पहला विश्व पर्यावरण दिवस एक साल बाद 5 जून 1973 को मनाया गया था। सम्मेलन ने पर्यावरणीय मुद्दों को उजागर करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की शुरूआत का संकेत दिया। इस साल समारोह की 51वीं वर्षगांठ है। 

इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस 2024 की थीम हरित भविष्य की यात्रा है, जो हमारे ग्रह की रक्षा करने और सभी के लिए अधिक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सामूहिक प्रयास पर आधारित है इस विषय को चुनने के पीछे का कारण यह है कि आज का समय में पृथ्वी को बचाने का एकमात्र उपाय वनों को बचाना ही है। विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण को समर्पित दिन है। 

यह दिन पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है, जो व्यक्तिगत, समुदाय और वैश्विक स्तर पर लोगों को प्रोत्साहित कर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारियों के बारे में भी जागरूक किया जाता है। लोगों को पर्यावरण के लिए संकट बन चुके जलवायु परिवर्तन, जंगलों की कटाई, प्रदूषण, बायोडायवर्सिटी लॉस जैसे मुद्दों पर चिंतन कर इन्हें बचाने की मुहिम के तौर पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उक्त जानकारी झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन एवं पवित्रम सेवा परिवार के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

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