वन और पर्यावरण

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Published / 2021-03-27 13:17:49
पलामू : तेजस्विनी क्लब ने किया पौधारोपण

उंटारी रोड पलामू। प्रखंड क्षेत्र में तेजस्विनी परियोजना अंतर्गत विभिन्न तेजस्विनी क्लब में पोषण अभियान के तहत वृक्षारोपण किया गया। जिसमें तेजस्विनी क्लब मुरमा कलां, प्रतापपुर, गवरलेटवा, सतबहिनी क्लब की किशोरियां एवं युवतियां ने आम, नींबू, अमरूद, गुलाब, गेंदा आदि विभिन्न प्रकार की पौधे का रोपण किया। परियोजना के क्षेत्रीय समन्वयक विशाल कुमार ने बताया कि पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है हमारे लिए पर्यावरण बहुत ही जरूरी है। मौके पर आराधना कुमारी, प्रिया, खुशबू, गुड्डी, पूजा, लक्ष्मी भारती समेत कई युवतियों ने पौधारोपण किया।

Published / 2021-03-25 15:08:30
गिद्धों के संरक्षण के लिए संरक्षित की जायेगी हजारीबाग की वनभूमि

बरही। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा ग्राम वन प्रबंधन, संरक्षण समिति के सदस्यों, ग्रामीणों एवं वन कर्मचारियों के बीच गिद्ध संरक्षण व गर्मी में जंगल में आग जाने को लेकर जवाहर घाट स्थित वन विश्रामागार में प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता व संचालन वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी गोरख राम ने किया। कार्यशाला में मुख्य रूप से हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी आरएन मिश्रा, पर्यावरणविद्द सत्यप्रकाश एवं इंद्रजीत सामंता शामिल हुए। कार्यशाला को संबोधित करते हुए हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी आरएन मिश्रा ने बताया कि मानव हितैशी पक्षी गिद्ध की बड़ी तेजी से इसकी प्रजाति विलुप्त हो रही हैं। उन्होंने गिद्ध के न रहने पर आने वाले खतरे को लेकर विस्तार पूर्वक जानकारी दी। साथ ही बताया कि गिद्ध एक मानव हितैशी पक्षी है, जो स्वभाव से शव भक्षण कर प्रकृति की सफाई करने के लिए जाना जाता है। साथ ही बताया कि एक लाख 37 हजार हेक्टयर वन भूमि को सुरक्षित, विकसित करने का प्रयास वनविभाग के द्वारा जारी हैं। वहीं जीपीएस के आधार पर वह पता लगा लेते है कि आग कहां लगी हैं, उसे बुझाने को लेकर क्षेत्रीय अधिकारी को भेजा जाता है, तांकि उसका बचाव किया जा सकें। अध्यक्षता कर रहे वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी गोरख राम ने कहा कि गिद्ध को आहार श्रृंखला के सर्वोच्च स्थान पर रखा गया है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि गिद्ध एक सामाजिक पक्षी है। वह झुंड में रहना पसंद करता है और अपने साथी पक्षी के प्रति बेहद ईमानदार होता है। मौके पर महेश कुमार दास, आनन्द सिंह सहित दर्जनों लोग शामिल थे।

Published / 2021-03-24 12:25:19
देसी ज्ञान से बचेगा पर्यावरण

आज की प्रचलित प्रौद्योगिकी ने विकास के नाम पर विस्थापन, बिगाड़ और विनाश किया है। प्राचीन काल में संवेदनशील, अहिंसक विज्ञान से ही भारत आगे बढ़ा था। प्रौद्योगिकी और अभियांत्रिकी को जब संवेदनशील विज्ञान के साथ समग्रता से जोड़कर रचना और निर्माण होता है, वहीं विस्थापन, विकृति और विनाश मुक्त स्थायी विकास होता है। इस संपूर्ण प्रक्रिया में सदैव नित्य नूतन निर्माण होने से ही सनातन विकास बनता है। इसे ही हम नई अहिंसक प्रौद्योगिकी कह सकते हैं। इसी से जलवायु परिवर्तन के संकट से मुक्ति मिल सकती है। ऐसी प्रौद्योगिकी का आधार भारतीय जनतंत्र से ही हो सकता है। भारतीयों का भगवान भ-भूमि, ग-गगन, व-वायु, अ-अग्नि और न-नीर से रचा हुआ माना जाता है। आम लोग नीर-नारी-नदी को नारायण मानते हैं। यही भारतीय आस्था और पर्यावरण है। पर्यावरण विज्ञान संवेदनशील अहिंसक विज्ञान ही है। इसे आध्यात्मिक विज्ञान भी कह सकते हैं। आधुनिक विज्ञान तो केवल गणनाओं और समीकरणों के फेर में फंसकर संवेदना रहित विज्ञान की निर्मिति करता है। भारतीय ज्ञानतंत्र का ज्ञान-विज्ञान अनुभूति में आते-आते संवेदनशील और अहिंसक बन जाता है। आस्था के विज्ञान से ही अभी तक हमारे पर्यावरण का संरक्षण होता रहा है। जब से हमारे विज्ञान से संवेदना और आस्था गायब हुई है, तभी से जलवायु परिवर्तन का संकट और उससे जन्मी हिमालय की आपदाओं का चक्र भी बढ़ गया है। जाहिर है, समृद्धि केवल मानव के लिए होगी, तो प्रकृति और मानवीय रिश्तों में दूरी ही पैदा करेगी। ऐसी स्थिति में खोजकर्ता एटम बम बनाएगा और तीसरा विश्वयुद्ध कराएगा। जब मानवीय संवेदना कायम रहती है, तो शोध करके आरोग्य रक्षक आयुर्वेद का चरक बनता है, जो जीवन को प्राकृतिक औषधियों से स्वस्थ रहने, ज्यादा जीने और प्राकृतिक संरक्षण का काम करके साझा भविष्य को समृद्ध करने के काम में डूबा रहेगा। वह मानव के स्वास्थ्य में बिगाड़ नहीं करेगा, बल्कि दोनों को स्वस्थ रखने की कामना और सद्भावना अपने शोध द्वारा करेगा। कभी हमारी दृष्टि समग्र दृष्टि थी। इस दृष्टि के कारण हम जितना बोलते थे, उतना ही अनुभव करते थे। अनुभव से शास्त्र बनते और गढ़े जाते थे। अगली पीढ़ी उन शास्त्रों का ही पालन करती थी। ये शास्त्र आज के विज्ञान से अलग नहीं थे। वही समयसिद्ध गहरे अनुभव थे। आज के शास्त्र केवल कल्पना-गणना, क्रिया-प्रतिक्रिया से गढ़े जा रहे हैं। इसमें अनुभव तथा अनुभूति नहीं है। इसलिए कल जिस जंगल को काटकर खेती को बढ़ावा देने को क्रांतिकारी काम मान रहे थे, देश की जिन बावड़ियों तथा तालाबों के जल को रोग का भंडार मान उन्हें पाटने में करोड़ों रुपये खर्च कर रहे थे, आज उन्हीं तौर-तरीकों को संयुक्त राष्ट्र बैड प्रैक्टिस कह रहा है। भारत की प्रकृति की समझ में ऊर्जा थी। यही भारतीय ज्ञान दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम कहकर एक करने वाली ऊर्जा से ओतप्रोत था। तभी तो हम जैसलमेर जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्र को पुराने जमाने में ही आज के वाशिंगटन से बड़ा व्यापार केंद्र बना सके थे। लेकिन अब हमने ऊर्जा और शक्ति में फर्क करना छोड़ दिया, और शक्ति को ही ऊर्जा कहने लगे। शक्ति निजी लाभ के रास्ते पर चलती है, जबकि ऊर्जा शुभ के साथ रास्ता बनाती है। इसलिए शक्ति विनाश और ऊर्जा सुरक्षा व समृद्धि प्रदान करती है। आज भू-जल भंडारों को उपयोगी बनाने के नाम पर भू-जल भंडारों में प्रदूषण और उन पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। सृजन प्रक्रिया को रोककर आज पूरे ब्रह्मांड में प्रदूषण बढ़ रहा है। केवल प्राकृतिक प्रदूषण बढ़ा है, ऐसा ही नहीं है। हमारी शिक्षा ने मानवीय सभ्यता और सांस्कृतिक प्रदूषण को भी बुरी तरह बढ़ा दिया है। संवेदनशील विज्ञान ही हमें आज भी आगे बढ़ा सकता है। इसी रास्ते हम पूरी दुनिया को कुछ नया सिखा सकते हैं। यही आधुनिक दुनिया के प्राकृतिक संकट, जलवायु परिवर्तन का समाधान करने वाला विज्ञान सिद्ध हो सकता है।

Published / 2021-03-23 14:31:01
पिपरमिंट और फलों की खेती से बदलेगी पलामू के किसानों की तकदीर : आयुक्त

हुसैनाबाद/हरिहरगंज (पलामू)। मंगलवार को पलामू प्रमंडल के आयुक्त जटाशंकर चौधरी और जिला कृषि पदाधिकारी अरुण कुमार क्षेत्र भ्रमण में रहे, जहां उन्होंने हुसैनाबाद के दंगवार के डुमरहथा में पिपरमिंट और काला गेहूं जबकि हरिहरगंज प्रखंड के खड़कपुर पंचायत अंतर्गत लुकुवा मौजा स्थित मौर्या फल सब्जी कृषि फार्म की खेती का निरीक्षण किया। कृषि फॉर्म में लगे अमरूद, सेव, सहजन के लहलहाते पौधे को देख खुशी जताते हुए, किसान अजय कुमार मेहता को और बढ़ चढ़कर खेती करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी तरह का खेती करने में परेशानी हो तो सीधे हमसे संपर्क करें। परेशानियों का निराकरण किया जाएगा। साथ ही उन्होंने लोगों को इससे प्रेरित होकर बड़े पैमाने पर अमरुद सहित अन्य फलों की खेती कर इस क्षेत्र को फलों का हब बनाने की बात कही। साथ ही कहा कि युवा किसान आगे बढ़ कर खेती कर बेरोजगारी सहित आर्थिक उपार्जन का बड़ा साधन बनाकर क्षेत्र का विकास कर सकते है। मौर्या सब्जी कृषि फॉर्म में 60 एकड़ में अमरूद व 40 एकड़ में सहजन के पौधे लगाए गए हैं। इस मौके पर प्रमोद कुमार सिंह अनुसंधान केंद्र चियाकी, बीटीएम अमित कुमार, कृषक अजय कुमार मेहता, अविनाश कुमार, देवेंद्र कुमार, अरविंद कुमार सहित कई लोग मौजूद थे। अमरूद की खेती अजय कुमार मेहता, अविनाश कुमार, अरविंद कुमार, वीरेंद्र कुमार, सत्येंद्र कुमार आदि किसान मिलकर कर रहे हैं। किसानों ने आयुक्त को बताया कि 60 एकड़ की भूमि पर 42,000 अमरूद के पौधे लगाये गयें हैं। किसानों को क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा मार्गदर्शन मिलता है। हुसैनाबाद के दंगवार के डुमरहथा में किसानों द्वारा पिपरमिन्ट व काला गेहूं की खेती के निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रस्तावित पिपरमिन्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बीर कुंवर सिंह कृषक सेवा सहकारी समिति लिमिटेड के कार्यक्रम में भी शिरकत की। उन्होंने किसानो का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि हुसैनाबाद क्षेत्र के किसान जागरुक हैं। उन्होंने कम वर्षा में होने वाली खेती कर यह साबित कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि पिपरमिन्ट की खेती से हुसैनाबाद के किसानों की तकदीर बदलेगी। पलामू व गढ़वा में कम वर्षा होती है। उसे ध्यान में रखते हुए यहां के किसानो को कम वर्षा आधारित खेती करनी चाहिए। मौके पर क्षेत्रिय कृषि अनुसंधान केंद्र चिंयाकी के वरीय वैज्ञानिक प्रमोद सिंह ने अपने विचार व्यक्त किये। मौके पर समिति के अध्यक्ष ने आयुक्त को विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। मौके पर सीओ नंदकुमार राम, बीटीएम अमित कुमार, वरुण यादव, समिति के अध्यक्ष प्रियरंजन सिंह उर्फ टुन्ना सिंह, सचिव राजू विश्वकर्मा के अलावा कई किसान शामिल थे।

Published / 2021-03-22 11:33:10
पलामू : नीलांबर पीतांबरपुर के कुंदरी में 9 मई को होगा पर्यावरणविदों का महाकुंभ

नीलांबर पीतांबरपुर। प्रखंड के कुंदरी में उद्घोष फाउंडेशन के अध्यक्ष कमलेश सिंह कुंदरी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि 09 मई को राष्ट्रीय पर्यावरण अधिवेशन कुंदरी में होना सुनिश्चित किया गया। जिसमें देश के कई क्षेत्रों से पर्यावरण पर्यावरणविदों वआगमन होगा। राष्ट्रीय पर्यावरण अधिवेशन 2021 के मुख्य विषय : पलाश संरक्षण और स्वरोजगार,गौरेया संरक्षण में आम आदमी की भूमिका, वन्य जीव संरक्षण और मानव जीवन का अस्तित्व, देव स्थानों में देववृक्ष की स्थापना, संरक्षण और आध्यात्मिक लाभ और ज्योतिषीय लाभ, तालाब संरक्षण से जल संकट का समाधान, औद्योगिक विकास और पर्यावरण में संतुलन की आवश्यकता, प्लास्टिक की चुनौतियां और समाधान-झारखंड मॉडल, गंगा नदी साफ हो सबका साथ हो, प्रवासी पक्षियों का संरक्षण-भागलपुर मॉडल, वनों में आग-समस्या और समाधान, वाटर हार्वेस्टिंग में योद्धाओं का अनुभव समेत भारत की पर्यावरण नीति और स्वरोजगार नीति कैसी हो। जिसमें जल संरक्षण, वायु संरक्षण, मृदा संरक्षण, पशु-पक्षी संरक्षण, स्वरोजगार के क्षेत्रो में कार्य के पर्यावरण योद्धाओं को सम्मानित भी किया जायेगा। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मुख्य अतिथि सरयू राय, विधायक पूर्वी जमशेदपुर सह पर्यावरणविद, मुख्य वक्ता सह विशेष आमंत्रित अतिथि राजेंद्र सिंह (जल पुरुष), राम लखन सिंह, कुलपति नीलांबर-पीतांबर विवि पलामू, ब्रिजेशकांत कांत द्विवेदी, निदेशक बायोवेद विश्वविद्यालय प्रयागराज, राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्राप्त ईहा दीक्षित मेरठ, डॉ धर्मेंद्र कुमार, पीपल नीम तुलसी अभियान के प्रणेता, बिहार, नीतीश कुमार, देववृक्ष महायज्ञ, विजय पाल बाघेल, दिल्ली सहित सैकड़ों पर्यावरण प्रेमियों का आगमन होगा। उन्होंने बताया कि इस कोरोना संकट को देखते हुए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। मौके पर अर्जुन महतो, विनोद राम, लभल पाल, राजेश पाल ,दिगनु देवी, मंजू देवी, सरिता देवी मुख्य रूप से उपस्थित थे।

Published / 2021-03-22 11:32:31
पलामू : नीलांबर पीतांबरपुर के कुंदरी में 9 मई को होगा पर्यावरणविदों का महाकुंभ

नीलांबर पीतांबरपुर। प्रखंड के कुंदरी में उद्घोष फाउंडेशन के अध्यक्ष कमलेश सिंह कुंदरी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि 09 मई को राष्ट्रीय पर्यावरण अधिवेशन कुंदरी में होना सुनिश्चित किया गया। जिसमें देश के कई क्षेत्रों से पर्यावरण पर्यावरणविदों वआगमन होगा। राष्ट्रीय पर्यावरण अधिवेशन 2021 के मुख्य विषय : पलाश संरक्षण और स्वरोजगार,गौरेया संरक्षण में आम आदमी की भूमिका, वन्य जीव संरक्षण और मानव जीवन का अस्तित्व, देव स्थानों में देववृक्ष की स्थापना, संरक्षण और आध्यात्मिक लाभ और ज्योतिषीय लाभ, तालाब संरक्षण से जल संकट का समाधान, औद्योगिक विकास और पर्यावरण में संतुलन की आवश्यकता, प्लास्टिक की चुनौतियां और समाधान-झारखंड मॉडल, गंगा नदी साफ हो सबका साथ हो, प्रवासी पक्षियों का संरक्षण-भागलपुर मॉडल, वनों में आग-समस्या और समाधान, वाटर हार्वेस्टिंग में योद्धाओं का अनुभव समेत भारत की पर्यावरण नीति और स्वरोजगार नीति कैसी हो। जिसमें जल संरक्षण, वायु संरक्षण, मृदा संरक्षण, पशु-पक्षी संरक्षण, स्वरोजगार के क्षेत्रो में कार्य के पर्यावरण योद्धाओं को सम्मानित भी किया जायेगा। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मुख्य अतिथि सरयू राय, विधायक पूर्वी जमशेदपुर सह पर्यावरणविद, मुख्य वक्ता सह विशेष आमंत्रित अतिथि राजेंद्र सिंह (जल पुरुष), राम लखन सिंह, कुलपति नीलांबर-पीतांबर विवि पलामू, ब्रिजेशकांत कांत द्विवेदी, निदेशक बायोवेद विश्वविद्यालय प्रयागराज, राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्राप्त ईहा दीक्षित मेरठ, डॉ धर्मेंद्र कुमार, पीपल नीम तुलसी अभियान के प्रणेता, बिहार, नीतीश कुमार, देववृक्ष महायज्ञ, विजय पाल बाघेल, दिल्ली सहित सैकड़ों पर्यावरण प्रेमियों का आगमन होगा। उन्होंने बताया कि इस कोरोना संकट को देखते हुए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। मौके पर अर्जुन महतो, विनोद राम, लभल पाल, राजेश पाल ,दिगनु देवी, मंजू देवी, सरिता देवी मुख्य रूप से उपस्थित थे।

Published / 2021-03-20 14:48:55
नमामि गंगे : दामोदर हिंदुस्तान पुल के निकट हुई भव्य गंगा आरती

बेरमो /करगली। नगर परिषद फुसरो क्षेत्र अंतर्गत नमामि गंगे योजना के तहत गंगा स्वच्छता पखवाड़ा 2021 कार्यक्रम के तहत दामोदर हिन्दुस्तान पुल के निकट भव्य गंगा आरती का आयोजन किया गया।जिसमें पंडित बरमदेव पांडेय ने विधिवध पूजा कर कार्यक्रम की शुभारंभ किया।मुख्य यजमान नप कार्यपालक पदाधिकारी अरुण कुमार भारती सह धर्मपत्नी रही। कार्यक्रम में मुख्य रुप से नप अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष छेदी नोनिया, गिरिजा शंकर पाण्डेय, आर उनेश शामिल रहे। नप अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने कहा कि नमामि गंगे योजना के तहत सभी नगरवासियों को बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए। इस योजना को सफल बनाकर ही दामोदर नदी को स्वच्छ रखा जा सकता है। नदियों को प्रदूषित होने से बचायें। वहीं इससे पूर्व आरडीपीएस की छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम को सफल व दामोदर नदी को स्वच्छ रखने के लिए नप कार्यालय से प्रभातफेरी निकल कर लोगों को जागरूक किया गया। महेंद्र चौधरी, नीरज पाठक, नीतू सिंह, सुनीता सिंह, मुन्ना सिंह, कुमुद नोनिया, कैलाश ठाकुर, नीरज पाठक, दिनेश सिंह, परवेज अख्तर, शिवनंदन चौहान, उत्तम सिंह, कृष्ण चांडक, अरविंद वर्मा, रेहाना खातून, जितेंद्र सिंह, राकेश मालाकार, सुरेश बंसल, सुशांत राईका, पम्मी सिंह, सिकंदर ठाकुर, रमेश स्वर्णकार, भोला दिगार आदि मौजूद थे।

Published / 2021-03-19 13:13:41
पर्यावरणविद ने पोती के जन्मदिन पर लगाया चंदन का पौधा

मेदिनीनगर। शहर के बाईपास रोड स्थित पर्यावरण भवन के ऊपरी तल पर पर्यावरणविद कौशल किशोर जायसवाल ने अपनी पोती अद्रिका जायसवाल के तीसरे जन्मदिन पर आकाश बाग में चंदन का पौधा लगाकर परिवार के सभी सदस्यों के साथ जन्म दिन मनाया। मौके पर जायसवाल ने पर्यावरण धर्म के प्रार्थना के साथ पौधरोपण करवाने के बाद सभी सदस्यों को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण धर्म का अर्थ है कि लोग अपने जन्मदिन या जीवन के किसी भी शुभ अवसर या पूर्वजों की याद में पौधा लगाकर उसे बच्चों की तरह बचायें। संस्था के प्रधान सचिव पूनम जायसवाल, डाली बाजार के मुखिया अमित कुमार जायसवाल ने कहा कि बचपन से ही बच्चों को घर से लेकर स्कूल तक पौधा लगाने की शिक्षा देना चाहिए। जिससे आने वाले पीढ़ी को लाभ मिलेगा। मौके पर सूरज कुमार, सुमित कुमार, विकास कुमार, अमन कुमार, दीदी आराध्या, आशिका अनुषा भाई आकस समेत घर के सभी सदस्य और नाना नानी ने जन्मदिन पर बधाई दी।

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