वन और पर्यावरण

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Published / 2021-04-10 15:42:26
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार : अमेरिकी सांसद

एबीएन डेस्क। अमेरिका के एक शीर्ष सांसद ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने की लड़ाई में भारत एक अहम साझेदार है। सांसद ने यह बात अमेरिका के विदेश दूत जॉन कैरी की हाल में की गई भारत यात्रा की सराहना करते हुए कही। कांग्रेस सदस्य फ्रैंक पैलोन ने शुक्रवार को ट्वीट किया कि मुझे प्रसन्नता है कि वैश्विक उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने में अमेरिका-भारत के सहयोग पर चर्चा करने के वास्ते कैरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने की लड़ाई में भारत एक अहम साझेदार है और राष्ट्रपति जो बाइडन के अर्थ डे सम्मेलन के लिए सम्माननीय भागीदार है। सांसद इड मर्के ने भी इसी प्रकार के विचार व्यक्त किए। मर्के ने ट्वीट किया कि मेरे मित्र कैरी को इस सप्ताह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करते देख कर प्रसन्नता हुई। विश्व के शीर्ष दूसरे और तीसरे नंबर के प्रदूषक अमेरिका और भारत 2050 में पूरी दुनिया में कॉर्बन-डाई-आॅक्साइड का उत्सर्जन शून्य पर लाने में विश्व की अगुवाई कर सकते हैं और उन्हें ऐसा करना चाहिए।

Published / 2021-04-10 15:39:34
पलामू : आम बागवानी के साथ रसदार फलों की खेती पर जोर

मेदिनीनगर। मनरेगा अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-2022 के लिए बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बागवानी के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन डीआरडीए सभागार में किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उदघाटन उपायुक्त शशिरंजन ने किया। मौके पर उपायुक्त ने कहा कि पलामू में आम बागवानी के साथ-साथ रसदार फलों की खेती पर भी जोर देने की आवश्यकता है। जिले में रसदार फल नींबू, संतरा, कीनों का बेहतर संभावनाएं है। इसके लिए यहां की मिट्टी भी उपयुक्त है। बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत रसदार फलों की खेती हेतु प्रपोजल बनाकर ग्रामीण विकास विभाग को भेजें, ताकि अधिक संभावना आधारित रसदार फलों की खेती यहां की जा सके। उपायुक्त ने कहा कि आम बागवानी की उपलब्धि इस वित्तीय वर्ष में बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए सामूहिक सहभागिता जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को पंचायत स्तर पर लोगों को प्रेरित करने, लोगों को जागरूक करने एवं पौधे की सही से देखभाल एवं उसकी सुरक्षा हेतु जागरूक करने की बात कही। मनरेगा के जिला कार्यक्रम समन्वयक सह डीडीसी शेखर जमुआर ने कहा कि पौधों को गर्मी में विशेष रूप से संभालें। उन्होंने कहा कि टाइम फ्रेम पर जोर देते हुए 18 अप्रैल तक योजना स्थल और लाभुकों का चयन सुनिश्चित करने, योजना को पंचायत कार्यकारिणी से अनुमोदन कराकर प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कराने की बातें कही। 30 अप्रैल तक प्रखंड व पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण देने, कलस्टर को-आॅर्डिनेटर, बागवानी सखी का चयन कर साप्ताहिक बैठक सुनिश्चित कराने को कहा। वहीं लाभुक समिति का गठन करने, 30 अप्रैल से 15 मई तक गड्ढे की खुदाई, 7 मई तक मेटेरियल के प्रस्ताव को जिला में भेजने की बातें कही, ताकि मई के प्रथम सप्ताह में आगे की कार्रवाई शुरू हो सके। जेएसएलपीएस के डीपीएम विमलेश शुक्ला ने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बागवानी के सफल क्रियान्वयन हेतु बागवानी सखी का चयन और उनका सप्ताहिक बैठक करने तथा लाभुक समिति का गठन करने पर जोर दिया। प्रशिक्षण में सीएसओ मृत्युंजय रत्नाकर एवं जवाहर मेहता ने भी लोगों को जानकारी दी। प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक दिलीप कुमार पांडेय, डीआरडीए के पीओ उपेंद्र राम, एपीओ संजय कुमार, सुधीर कुमार, सीएसओ मृत्युंजय रत्नाकर, जवाहर मेहता, के अलावा मनरेगा के कनीय अभियंता, बीपीओ एवं जेएसएलपीएस के बीपीएस उपस्थित थे।

Published / 2021-04-07 15:46:55
पटमदा के खेतों तक पाइपलाइन से पहुंचेगा स्वर्णरेखा नदी का पानी

जमशेदपुर। अगर झारखंड सरकार जल्द से जल्द डीपीआर बनवा कर केंद्र सरकार को भेज दे तो पटमदा एवं बोड़ाम प्रखंड के खेतों तक पाइप लाइन के जरिए स्वर्णरेखा नदी का पानी पहुंच सकता है। सिंचाई का यह प्रबंध हुआ तो इन क्षेत्रों में सालों भर सब्जियों एवं अन्य कृषि उत्पादों की खेती हो सकेगी और क्षेत्र के किसानों का कायाकल्प हो जायेगा। जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद विद्युतवरण महतो ने इस संबंध में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से चर्चा की है। शेखावत से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद सांसद बुधवार को रांची जाकर जल संसाधन विभाग, झारखंड सरकार के सचिव प्रशांत कुमार से भेंट की। सांसद ने कहा कि स्वर्णरेखा नदी का पानी पटमदा औरबोड़ाम के खेतों तक पहुंचाने का एकमात्र उपाय पाइपलाइन ही है। केंद्र इस पर विचार करने को तैयार है इसलिए आप जल्द से जल्द इसका डीपीआर बनवा कर दिल्ली भेजने का कष्ट करें। विभागीय सचिव ने सांसद को इस मुद्दे पर विचार करने का आश्वासन दिया बल्कि अभियंता प्रमुख को जल्द डीपीआर बनवाने का निर्देश भी दिया। वार्ता के दौरान सांसद विद्युत वरण महतो ने आज रांची में जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार से मुलाकात की एवं अपने क्षेत्र के कई ज्वलंत मुद्दों पर उनसे चर्चा की। सांसद ने सर्वप्रथम बागबेड़ा जलापूर्ति योजना के कार्यान्वयन में हो रहे विलंब को लेकर अपनी चिंता से अवगत कराया एवं कार्य को युद्घ स्तर पर पूरा करने को कहा। सचिव ने विभिन्न मसलों पर चर्चा करने के लिए अभियंता प्रमुख नागेश्वर मिश्रा को बुलाकर जानकारी ली। इस दौरान सचिव ने कार्यपालक अभियंता से परियोजना के संबंध में जानकारी ली एवं उन्हें निर्देश दिया की किसी भी प्रकार की कठिनाई होने पर तत्काल उन्हें सूचित किया जाए। सांसद श्री महतो ने घाटशिला स्थित बुरूडीह डैम के जीर्णोद्घार का मामला भी उनके समक्ष रखा एवं कहा यदि बुरूडीह डैम का संपूर्ण रुप से जीर्णोद्घार हो जाता है तो इससे घाटशिला क्षेत्र में सिंचाई के समस्या का समाधान हो सकेगा। साथ ही घाटशिला एवं आसपास के क्षेत्रों को पर्याप्त रूप से जलापूर्ति की जा सकेगी। सांसद श्री महतो ने गालूडीह बराज से उड़ीसा जाने वाली नहर के ऊपर बनी हुई सड़क का निर्माण करने का आग्रह भी किया। उल्लेखनीय है कि नहर के ऊपर से जाने वाली सड़क का निर्माण कार्य का खर्च का पूरा हिस्सा उड़ीसा सरकार वहन करती है। यदि इसका निविदा का निष्पादन कर दिया जाता है, जो गत वर्ष नहीं हो सका था तो क्षेत्र के लोगों को एक अच्छी सड़क की सौगात मिल जाएगी।

Published / 2021-04-07 13:27:06
आलू बीज उत्पादक जिले के रूप में भी होगी नैनीताल की पहचान

पर्यटक नगरी के रूप में विश्व प्रसिद्ध नैनीताल जिला जल्द ही देश में प्रमुख आलू उत्पादक जिले के रूप में पहचान बनाएगा। सहकारिता विभाग ने इसकी शुरुआत कर दी है। पहले चरण में जिले के धारी ब्लाक के पहाड़पानी में 700 किसानों को आलू उत्पादक किसान के रूप में चिह्नित कर उन्हें आलू बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही ब्लाक के 30 गांवों में 15-20 किसानों का एक समूह बनाया जाएगा। सहकारी संघ ने इफको की सहयोगी संस्था इंडियन फार्म फॉरेस्ट्री डेवलेपमेंट कोऑपरेटिव (आईएफएफडीसी) से इसके लिए करार किया है। इस कवायद का मकसद आलू बीज का प्रचुर मात्रा में उत्पादन कर काश्तकारों को सस्ते दरों पर बीज उपलब्ध कराने के साथ ही बाहरी राज्यों पर बीज की निर्भरता समाप्त करना और किसानों की आय दोगुना करना है। आलू बीज का प्रचुर उत्पादन कर अन्य राज्यों में भी भेजा जाएगा। सहकारिता विभाग की राज्य समेकित सहकारिता विकास योजना के तहत आईएफएफडीसी के साथ योजना को संचालित करने के लिए करार किया गया है। धारी विकासखंड की साधन सहकारी समिति पहाड़पानी के साथ मिलकर संस्था काम करेगी। नैनीताल जिला प्रमुख आलू उत्पादक जिला रहा है, लेकिन यहां आलू का बीज हिमाचल आदि राज्यों से मंगाया जाता है जो काफी महंगा मिलता है। इसी साल किसानों को 70 रुपये किलो आलू बीज खरीदना पड़ा है। यहां आलू बीज उत्पादन पर विशेष फोकस किया गया है ताकि किसानों को सस्ते दरों पर बीज मिलें और बाहरी राज्यों को आलू बेचा जा सके। आईएफएफडीसी के परियोजना प्रबंधक देश दीपक यादव का कहना है कि नैनीताल जिले को प्रमुख आलू उत्पादक जिला बनाने के साथ ही आलू के क्षेत्र में विशेष पहचान दिलाने का प्रयास होगा। मुख्य उद्देश्य किसानों की आय दोगुना करना होगा। काश्तकारों को तकनीकी सहयोग दिया जाएगा।

Published / 2021-04-06 15:01:50
सीसीएल रजरप्पा को मिला वाटर स्प्रिंकलर टैंकर पर्यावरण मित्र

रजरप्पा। सीसीएल रजरप्पा के महाप्रबंधक आलोक कुमार ने मंगलवार को वाटर स्प्रिंकलर टैंकर का विधिवत रूप से पूजा अर्चना कर व फीता काट कर उद्घाटन कर रजरप्पा परियोजना को समर्पित किया। इस दौरान प्रबंधक ने बताया की इन टैंकरों की क्षमता 28,000 लीटर है तथा यह आधुनिकतम सुरक्षा उपकरणों से लैस हैं। यदि चालक थका हुआ या नींद ग्रस्त हो तो अलार्म बजता है, जिससे चालक सतर्क होकर कोई दुर्घटना से सावधान हो जायेगा। साथ ही अन्य कई सुविधाएं इस टैंकर में लैस है जिससे रजरप्पा परियोजना को सावधानी सहित सुरक्षा के आधार पर कार्य करने में सुविधा होगी। वाटर स्प्रिंकलर टैंकर के आ जाने से रजरप्पा परियोजना तथा उसके आसपास के क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक नई पहल हुई है। इसी कारण इन टैंकरों का नाम पर्यावरण मित्र रखा गया है। इसके आने के बाद कर्मियों ने महाप्रबंधक को धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया। मौके पर सीसीएल रजरप्पा के कई पदाधिकारी व कर्मी मौजूद थे।

Published / 2021-04-05 11:42:44
धनबाद : बंजर जमीन पर पार्क बनाने की कोशिश में जुटे पांच युवा

लोयाबाद। लोयाबाद पावर हाउस के पांच उत्साहित युवाओं ने एक बंजर जमीन पर अपने खर्च व बल पर पार्क बनाने की ठानी हैं। उक्त युवाओं का मानना है कि हमारा यह प्रयास आने वाले समय में आसपास के लोगों शांति व राहत देने का काम करेगी। इस काम की बीड़ा उठाने वालो में दो शिक्षक, एक सरकारी सेवक, एक मजदूर व एक सामाजिक युवा जुड़े हुए है। ये पांचो उत्साहित युवक अपने जेब से इस पार्क पर 50 हजार रुपये खर्च करने का मन बनाया है। इस अभियान में कृष्ण कुमार, रवि कुमार, मुन्ना झा, शिवशंकर यादव, दिलीप यादव, शामिल है। इन पांचो युवाओं की सकारात्मक पहल के कारण और भी कई लोग इस मुहिम में जुड़ने लगे हैं। अभियान में शामिल युवकों द्वारा बताया गया कि फिलहाल यहां करीब दस मजदूर काम पर लगे हुए है। करीब 12 हजार स्क्वायर फीट की इस जगह में पार्क के खूबसूरती के अलावा शुद्ध देशी चीजें स्थापित करने की भी योजना है। सरकारी उदासीनता का हवाला देते हुए युवाओं ने कहा कि इस क्षेत्र में करीब पांच हजार की आबादी है। निगम व शहरी क्षेत्र होने के बावजूद भी यहां एक भी जगह ऐसी नही है जहां लोग कुछ समय शांतिपूर्वक बिता सके। कहा कि यह हमारी ओर से एक छोटी सी प्रयास है कि आने वाले दिनों में लोग यहां आकर अपने दैनिक जीवन के तनाव को कुछ कम कर सके। युवाओं की इस सोंच को कई लोग सराहना कर रहे हैं।

Published / 2021-04-02 14:35:13
छत्तीसगढ़ के कृषि वैज्ञानिकों ने तैयार की चावल की खास किस्म, कोरोना से बचाने में कारगर

एबीएन डेस्क। दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी (Corona epidemic) के बीच छत्तीसगढ़ के रायपुर से एक अच्छी खबर आ रही है। छत्तीसगढ़ के कृषि विश्वविद्यालय (Agricultural University of Chhattisgarh) के वैज्ञानिकों ने चावल की एक ऐसी किस्म तैयार की है जो आपको ना केवल कोविड से बचाने में मदद करेगा, बल्कि अगर कोरोना हो गया तो इसके बाद आपको ढेर सारी जिंक, मल्टी विटामिन्स और प्रोटीन की दवाईयां नहीं लेनी पड़ेंगी। आपकी थाली में परोसा गया यह चावल या नाश्ते की प्लेट में परोसा गया गर्मागर्म पोहा या चिवड़ा इसकी पूर्ति कर देगा। रायपुर में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के शोध से तैयार की गई धान की अलग-अलग वैरायटी को देश के कई रिसर्च संस्थानों ने सराहा है। वहीं अब यहां के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जी हां, यहां तैयार की गई है जिंको राइस एमएस, छत्तीसगढ़ जिंक राइस वन (Chhattisgarh Zinc Rice one) न केवल कोरोना से बचाएगी, बल्कि शरीर में जरूरी जिंक, मल्टी विटामिन्स और प्रोटीन की कमी को पूरा करेगी। चावल की खास वैरायटी को तैयार करने वाली टीम के प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ गिरीश चंदेल का दावा है कि यह चावल कोरोना के मर्ज की प्रमुख दवाई के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसे खाने से प्रतिरोधक क्षमता को इतनी बढ़ जाएगी कि लोग संक्रमित होने से बच जाएंगे। वहीं यदि वायरस के संपर्क में आए हैं तो भी कम से कम प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय ने करीब 20 साल तक रिसर्च करके धान की चार वैरायटी तैयार की थी, जिसमें जिंक, मल्टी विटामिन और प्रोटीन हो। अब कोरोना आने के बाद इसमें एक साल जुटकर काम किया गया, जिसके बाद ये वैरायटी तैयार की गई। इसे खासतौर पर कोरोना के अनुसार तैयार किया गया है, इसमें जिंक प्रचुर मात्रा में है, मल्टी विटामिन हैं।

Published / 2021-04-01 15:07:43
हजारीबाग : जरबेरा के फूलों से महिलाएं खोल रही हैं तरक्की का रास्ता

हजारीबाग। महिलाएं आत्मनिर्भर होने के लिए इन दिनों कई तरह से प्रयास कर रही हैं, लेकिन इनसे हटकर दारू प्रखंड की रामदेव खरीका की महिलाएं फूलों की खेती कर आत्मनिर्भर होने की ओर कदम बढ़ा रही हैं। इससे उनके जीवन में बदलाव भी आ रहा है और उनकी सोच भी सकारात्मक हो रही है। 2 महीने के अथक प्रयास के बाद अब पौधों में रंग बिरंगे फूल भी आ रहे हैं, जिसे देखकर खेती करने वाली महिलाएं बेहद खुश हैं तो दूसरी ओर पूरे गांव में यह चर्चा का विषय भी बना हुआ है। अनुदानित मूल्य पर दिया गया पौधा : झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के साथ जुड़कर महिलाएं कई तरह के कार्य कर रही हैं, जिससे केवल महिलाएं आत्मनिर्भर ही नहीं हो रही बल्कि उनके जीवन में भी बदलाव आ रहा है। हजारीबाग जिला के दारू प्रखंड के रामदेव खरीका की महिलाएं जरबेरा फूल की खेती कर आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रही हैं। महिला ग्रुप की संगीता कुमारी ने कहा कि जेएसएलपीएस ने फूल की खेती के लिए उन लोगों से आवेदन भरवाया था। आवेदन भरने के बाद ना केवल उनके ग्रुप को ग्रीनहाउस दिया गया, बल्कि पौधा भी अनुदानित मूल्य पर दिया गया। साथ ही साथ पौधा उगाने के लिए, बेड बनाने के लिए भी प्रशिक्षण दिया गया। पौधे को विदेश से हवाई जहाज के जरिए रांची पहुंचाया गया और फिर रांची से हजारीबाग के दारू प्रखंड में। दूसरों को भी कर रहीं प्रेरित : आज इन महिलाओं की मेहनत रंग लायी है और फूल खिल रहे हैं। संगीता कुमारी ने बताया कि आने वाले समय में इसका अधिक मूल्य मिलेगा, जिसका लाभ उन महिलाओं को मिलेगा जो इस खेती से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि अन्य महिलाओं को भी फूल की खेती के लिए वो प्रेरित करेंगी। फिलहाल लगन का समय नहीं है जब शादी का मौसम आएगा तो फूल की कीमत उन्हें और भी अधिक मिलेगी और वो आर्थिक रूप से सबल भी होंगी। उनका यह भी कहना है कि एक पौधा 3 सालों तक फूल देता है और इसके फूल सालों भर रहते हैं इस कारण यह मुनाफे वाली खेती है।

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