चौपारण। ग्राम डुमरी निवासी दिनेश साव ने स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल प्रांगण में सोमवार को 1001 पेड़ का वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया। मुख्य अतिथि बरही विधायक उमाशंकर अकेला, चैय विश्वकर्मा समाज अध्यक्ष मिथिलेश्वर प्रसाद राणा, विधायक प्रतिनिधि रामफल सिंह, जनजागरण संस्थापक रामलाल साव, कृषि विधायक प्रतिनिधि गोपाल विश्वकर्मा, शिक्षक विजय सिन्हा, बैजू गहलौत, रेवाली पासवान सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने पेड़ देकर पेड़ लगाने के फल के बारे में बताया। मुख्य अतिथि अकेला ने कहा कि दिनेश जी हर वर्ष अपना रुपया लगा कर सही मायने में हरियाली लाने का कार्य कर रहे है। विधायक ने वन विभाग को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि एक तरफ रुपया लगा कर दिनेश लोगो को जीने के लिए प्राकृतिक आॅक्सीजन प्लांट लगा रहे है। वही दूसरी तरफ वनकर्मी सरकार का रुपये को लेकर जंगल के पेड़ों को काट कर वीरान करने वालो पर कार्रवाई नही कर सहयोग कर रहे है। अवैध कटाई का कार्य पर विराम लगाया जाए और पेड़ लगाया जाय तो चौपारण में कभी वातावरण दूषित नही होगा। ज्ञात हो कि दिनेश के अंदर हर वर्ष 1001 पेड़ लगाने का जुनून को देख 2020 को चौपारण प्रखंड प्रशासन ने हरियाली दूत का उपाधि दिया था। मौके पर कृषि विधायक प्रतिनिधि गोपाल विश्वकर्मा, शिक्षक विजय सिन्हा, दीपक गुप्ता, लालेश साहू, संतोष रजक, रामा साव, नकुल रजक, राजेन्द्र रजक, भुनेश्वर रजक, सुनील राणा सहित कई लोग उपस्थित थे।
मेराल (गढ़वा)। जिले के मेराल प्रखंड अंतर्गत करकोमा पंचायत के लालीदामर में गढ़वा विधायक झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने शनिवार को पानी रोकोे, पौधा रोपो अभियान का उद््घाटन किया। बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत संचालित इस अभियान के फेज वन कार्यक्रम का का उद्घाटन मंत्री श्री ठाकुर ने नारियल फोड़कर तथा गड्ढा खोदकर किया। इस योजना के तहत अजय तिवारी के खेत में तीन लाख 73 हजार 300 रुपये की लागत से एक एकड़ में लगने वाला आम बागवानी में गड्ढा खोदकर मंत्री ने अभियान की शुरुआत की। मौके पर मंत्री श्री ठाकुर ने कहा कि मनरेगा योजना अंतर्गत नीलांबर पितांबर जल समृद्धि योजना एवं बिरसा हरित ग्राम योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन योजनाओं को मिशन मोड में क्रियान्वित करने के लिए राज्य में 26 जून से दो जुलाई तक पानी रोको पौधा रोपो फेज वन अभियान चलाया जाएगा। मंत्री ने कहा कि इस अभियान के तहत जल एवं मृदा संरक्षण कार्यों से गांव का पानी गांव में एवं खेत का पानी खेत में रखने के उद्देश्य को पूरा किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत वर्तमान में राज्य के ग्रामीण जनता को बृहद पैमाने पर मनरेगा योजनाओं से जोड़कर लाभप्रद रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ गांव को जल स्वालंबी बनाने एवं ग्रामीणों की आजीविका को सुदृढ़ करने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है। इनके माध्यम से मानव दिवस के सृजन के साथ-साथ जल एवं मृदा संरक्षण कार्यों को भी अमल में लाया जायेगा। मौके पर उप विकास आयुक्त सत्येंद्र नारायण उपाध्याय, मेराल बीडीओ गौतम कुमार, सीओ अंगार नाथ स्वर्णकार, जेएमएम जिला अध्यक्ष तनवीर आलम खान, सचिव मनोज ठाकुर, प्रवक्ता धीरज दुबे, युवा जिलाध्यक्ष नितेश कुमार सिंह, कंचन साहू, कमल किशोर चौबे, मेराल प्रखंड अध्यक्ष दशरथ प्रसाद, विनोद प्रसाद, ज्ञान रंजन मिश्र, बृजराज चौबे, मुखिया प्रतिनिधि शिव कुमार चैधरी, गौरी शंकर तिवारी, फिरोज अंसारी देवनाथ गौतम, बीपीएम पिंकी कुमारी सहित जेएसएलपीएस की महिलाओं सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।
केंद्र सरकार ने बुधवार को बाजार सत्र 2021-22 के लिए खरीफ की फसलों पर एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाने को अनुमति दे दी। केंद्र ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले एमएसपी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी तिल (452 रुपये प्रति कुंतल) में की गई है। इसके बाद तुअर और उड़द (दोनों 300 रुपये प्रति कुंतल) आते हैं। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने खरीफ की फसलों पर 50 फीसदी तक एमएसपी बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पिछले सात साल से किसानों के हित में फैसले ले रही है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए चर्चा करने के लिए हर वक्त तैयार है। तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य पिछले साल के मुकाबले 72 रुपये बढ़कर 1940 रुपये प्रति कुंतल हो गया है। उन्होंने कहा कि पिछले साल यह राशि 1868 रुपये प्रति कुंतल थी। उल्लेखनीय है कि एमएसपी वह दर होती है जिस दर से सरकार किसानों से खाद्यान्न खरीदती है। जिद छोड़े केंद्र सरकार: कांग्रेस वहीं केंद्र सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस ने कहा है कि किसानों के आंदोलन को समाप्त करने का एक ही तरीका है कि तीनों नए कृषि कानून वापस लिए जाएं। देश के मुख्य विपक्षी दल ने इन कानूनों को विनाशकारी करार देते हुए कहा कि सरकार को अपनी जिद छोड़ देनी चाहिए और किसानों की मांगें मान लेनी चाहिए। इन फैसलों को भी मिली मंजूरी कैबिनेट ने रेलवे की संचार व सिग्नल प्रणाली उन्नत करने के लिए पांच मेगाहर्ट्ज के 4जी स्पेक्ट्रम को मंजूरी दे दी। इस पर अगले पांच साल में 25 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। रामागुंडम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड में संशोधन के साथ नई निवेश नीति (एनआईपी)-2012 की प्रायोज्यता के विस्तार को भी मंजूरी दे दी गई।
भवनाथपुर। प्रखंड चपरी पंचायत के सिंघीताली गांव में मनरेगा के रोजगार दो योजना के तहत लगाएं गए फलदार वृक्ष पानी के अभाव से मरने का मामला प्रकाश में आया है। सिंघीताली गांव के अरुण सिंह के खेत मे मनरेगा रोजगार दो योजना के तहत लगभग 1 एकड़ में 200 फलदार वृक्षारोपण किया गया था जिसमे आम, अमरूद, काजू, शिशम, कटहल, आदि थे। जो कि पानी नहीं मिलने के कारण सूख गये। उक्त मामले के बारे में जानकारी देते हुए लाभुक अरुण ने बताया कि सरकार द्वारा रोजगार दो योजना के तहत 200 फलदार वृक्ष लगाए थे, जिसे हरियाली जिंदा रखने के लिए पानी की आवश्यकता को मद्देनजर रखते हुए पानी देने के लिए कुंवा सरकार द्वारा दिया जाना था। जिसका रेकड़ तैयार कर हम लगभग आज से तीन माह पूर्व रोजगार सेवक मनीष जायसवाल को दिए उन्होंने कुँए की स्वीकृति देने के लिए घुस के रूप में 25000 रु की डिमांड की फिर हम रेकड़ बीपीओ मनोज कुमार को दिया तो उन्होंने भी स्वीकृति देने के लिए 25000 रु की डिमांड की जो हमारे द्वारा घूस नही देने के कारण टालमटोल करते नजर आये और अन्तत: लगभग 80 से 85 पौधे पानी नही मिलने के कारण मर चुके हैं। इस बाबत पूछे जाने पर रोजगार सेवक मनीष जायसवाल ने बताया कि लाभुक द्वारा दिये गए रेकड़ को तीन माह पूर्व ही बीपीओ को दे दिया गया है स्वीकृति क्यों नही मिली हमे जानकारी नही है और घूस मांगने के आरोप को निराधार बताया। वही फोन बंद होने के कारण बीपीओ से संपर्क नही हो पाया।
एबीएन डेस्क। 05 जून को पूरी दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। ऐसे मौके पर जानिए ऐसे ही आसान तरीकों के बारे में जिनसे आप बदरंग होती धरती को बर्बाद होने से रोक सकते हैं। बढ़ती आबादी और प्रदूषण के चलते न सिर्फ ओजोन परत को खतरा है बल्कि ग्लोबल वॉर्मिंग का खतरा बढ़ गया है। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर जानिए ऐसे ही आसान तरीकों के बारे में जिनसे आप बदरंग होती धरती को बर्बाद होने से रोक सकते हैं। सबसे आसान और कारगर तरीका है कि पौधारोपण कीजिए। ये प्रकृति को संवारने का बेहतरीन विकल्प है। ये कार्बनडाई आॅक्साइड को अवशोषित कर आॅक्सीजन का उत्सर्जन करता है। पेंट के जरिए भी आप प्रकृति संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं। ओहायो की पर्यावरण एजेंसी के मुताबिक घरों में लेटेक्स पेंट का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि आॅयल पेंट हाइड्रोकार्बन छोड़ते हैं। बड़ी तादाद में पानी की बर्बादी भी प्रकृति को भारी नुकसान पहुंचाती है। गर्मी के दिनों में पानी की कमी के चलते देश-दुनिया के कई इलाकों में मारामारी है। पानी बचाने का सही तरीका है कि आप गाड़ी को पाइप की बजाए बाल्टी से धोएं। इससे बर्बादी कम होती है। पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के मुताबिक लॉन को हर रोज पानी की जरूरत नहीं होती है। सप्ताह में सिर्फ एक इंच पानी चाहिए होता है। जो एक दिन में दिया जा सकता है। देश-दुनिया में बिजली बनने के प्रमुख दो ही तरीके हैं। एक डैम के जरिए पानी के बहाव और दूसरा कोयले से। दोनों ही संसाधन बेशकीमती है। समझा जा सकता है कि इससे बनने वाली बिजली की कितनी अहमियत है। इसलिए हमें बिजली का बेजा इस्तेमाल रोकना चाहिए। भारी आबादी के चलते बढ़ते कूड़े और प्रदूषण से धरती को नुकसान पहुंच रहा है। प्रदूषण में सबसे ज्यादा हानिकारक तत्व प्लास्टिक है। क्योंकि प्लास्टिक दशकों तक नहीं समाप्त होती है इसलिए हमें थैलियों की बजाए कपड़े के थैलों का इस्तेमाल करना चाहिए। बैट्री के आविष्कार ने इंसानी जिंदगी में बड़ा बदलाव किया है। लेकिन बहुत आयात में उत्पादन ने नुकसान भी पहुंचाया है। पर्यावरण बचाने के लिए हमें वो बैट्री इस्तेमाल करनी चाहिए, जो बार-बार इस्तेमाल हो सकें। ज्यादा आबादी के चलते ज्यादा कूड़ा-कबाड़ जमा हो रहा है। इसका नतीजा है कि इन्हें खपाने के लिए जगह की कमी है। हमें अपने स्तर पर पुरानी बेकार चीजों को रि-साइकल करना होगा। ऐसे कार्यक्रमों में न खुद बल्कि बच्चों को भी बढ़ाना होगा। धुएं और कार्बन उत्सर्जन ने पर्यावरण को जितना नुकसान पहुंचाया है, शायद ही किसी ने पहुंचाया हो। इसलिए इसे बर्बाद होने से बचाने के लिए हमें वाहनों का इस्तेमाल कम और साइकिल पैदल का इस्तेमाल ज्यादा करना चाहिए। फर्टिलाइजर का ज्यादा इस्तेमाल न सिर्फ इंसानों के लिए खतरनाक है बल्कि प्रकृति को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। दरअसल, फर्टिलाइजर बारिश के पानी में घुलकर स्त्रोतों तक पहुंच जाते हैं।
एबीएन डेस्क। दुनिया भर के ग्लेशियर 15 साल पहले के मुकाबले इन दिनों काफी तेजी से पिघल रहे हैं। इनके पिघलने की तस्वीरें 3डी सैटेलाइट में कैद हुई हैं। सैटेलाइट के आकलन के मुताबिक जिस हिसाब से ये ग्लेशियर पिघल रहे हैं, उससे हम प्रति वर्ष 31 फीसदी बर्फ गंवा रहे हैं। नेचर जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने इसके लिए इंसानों द्वारा जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया है। वैज्ञानिकों ने हाल ही में सार्वजनिक किए गए 20 साल के सैटेलाइट डाटा के आधार पर बताया कि दुनिया भर के 2,20,000 ग्लेशियर 328 अरब टन से ज्यादा बर्फ प्रतिवर्ष गंवा रहे हैं। दुनिया भर में पिघलते ग्लेशियरों से पानी समुद्र का जलस्तर बढ़ा रहा है और इससे स्विट्जरलैंड जैसा देश हर साल करीब 24 फुट पानी के नीचे आ जाएगा। ग्लेशियरों के पिघलने की दर 2000 से 2004 के बीच जो 78 अरब टन थी, वह 2015 से 2019 के बीच सालाना बढ़ गई है। पिघलने वाले आधे से ज्यादा ग्लेशियर अमेरिका और कनाडा के हैं। वहीं अलास्का के ग्लेशियर के पिघलने की दर धरती पर सबसे ज्यादा है।
जादूगोड़ा। कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के बीच जहां छोटे-मोटे रोजगार खत्म के कगार पर पहुंच गए हैं वहीं आर्थिक स्थिति ने उनकी कमर तोड़ दी है वहीं इससे उलट जादूगोड़ा के भाटीन गांव के एक किसान खेलाराम मुर्मू ने खेती को जीविका का साधन बनाकर जहां 25 परिवार को रोजगार दे रखा है। वहीं धरती का सीना चीर कर प्रतिदिन तीन क्विंटल भिंडी, टमाटर व बैगन की खेती से प्रतिमाह 30,000 की कमाई भी हो रही है। यहां से निकलने वाले उत्पाद सीधे जमशेदपुर स्थित साकची बाजार में अच्छी कीमत मिल जाती है। इस बाबत भाटीन गांव के किसान खेलाराम मुर्मू कहते है कि 10 एकड़ से अधिक बंजर भूमि में खेती करते आ रहे है। इस बंजर भूमि से फिलहाल तीन क्विंटल भिंडी का उत्पादन होता है। बाजार में इसकी कीमत प्रति क्विंटल 3000 से लेकर 35 00 मिलती है। जिससे प्रतिदिन कमाई 9000 हो जाती है। कोरोना का असर सब्जी मंडी पर भी पड़ा है व बिक्री में 1 क्विंटल की कमी आई है। इसके बावजूद बाजार संतोषजनक बता रहे हैं। इसी तरह टमाटर 5 से 10 क्विंटल का उत्पादन होता है। बाजार में इसकी कीमत प्रति क्विंटल 1000 है। बीच में हुई असमय बारिश से टमाटर को भारी नुकसान पहुंचा है। जिसकी वजह से टमाटर में कीड़े लग गए व टमाटर के कारोबार में करीबन तीन लाख का नुकसान उठाना पड़ा। किसान खेला राम मुर्मू कहते हैं कि खेती उद्योग का रूप ले सकती है जब लोग मेहनत व तकनीक का इस्तेमाल करें।
एबीएन डेस्क। मौसम संबंधी पूवार्नुमान व्यक्त करने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट वेदर ने मानसून के शुरुआती महीने जून और आखिरी हिस्से यानी सितंबर में देश भर में व्यापक बारिश के संकेत जताए हैं। स्काइमेट ने मंगलवार को कहा कि जून से सितंबर के दौरान देश में 75 प्रतिशत से अधिक वर्षा का योगदान देने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल सामान्य रहेगा। स्काइमेट वेदर के अध्यक्ष (मौसम विज्ञान) जी पी शर्मा ने कहा कि जून से सितंबर के दौरान वर्षा का दीर्घावधि औसत (एलपीए) 103 प्रतिशत रहेगा। जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर की औसत वर्षा इइट.6 मिमी की तुलना में 2021 में 103 फीसदी बारिश होने को संभावना है। ह्यसामान्यह्ण मानसून रहने की 60 प्रतिशत संभावना है और ह्यसामान्य से ज्यादाह्ण बारिश की 15 प्रतिशत संभावना है। जुलाई के दौरान महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश राज्यों में अच्छी बारिश की होगी, जबकि नॉर्थ ईस्ट और कर्नाटक में बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है। दीर्घावधि औसत के हिसाब से 96-104 प्रतिशत के बीच मानसून को सामान्य माना जाता है और 103 प्रतिशत वर्षा सामान्य रेंज में सबसे अधिक औसत है।
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