वन और पर्यावरण

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Published / 2022-04-14 09:38:55
मौसम विभाग का पूर्वानुमान : इस साल अच्छी बारिश की उम्मीद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार को बताया कि इस साल देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य रहने की संभावना है। IMD के अनुसार, बारिश के 1971-2020 की अवधि के 87 सेंटीमीटर दीर्घावधि औसत (LPA) के 96 से 104 प्रतिशत रहने की संभावना है। IMD ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के लिए 1971-2020 (अवधि) के आधार पर भारत में 868.6 मिलीमीटर वर्षा होने की संभावना है। यह 1961-2010 अवधि की सामान्य वर्षा 880.6 मिलीमीटर की जगह लेगा। प्रायद्वीपीय भारत के उत्तरी भाग, मध्य भारत, हिमालय की तलहटी और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों और दक्षिणी प्रायद्वीप के दक्षिणी हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। गत वर्ष 2021 में जून से सितंबर के बीच चार महीने के दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान देश में सामान्य वर्षा हुई थी। लगातार तीसरे वर्ष देश में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। 2019 और 2020 में बारिश सामान्य से अधिक हुई थी। दो चरणों में मॉनसून की बारिश पर पूर्वानुमान : हर साल IMD दो चरणों में मॉनसून की बारिश पर पूर्वानुमान जारी करता है। पहली भविष्यवाणी अप्रैल में होती है और दूसरी जून में। पहली स्टेज में मौसम विभाग की ओर से पूरे देश में मॉनसून सीजन (जून-सितंबर) के दौरान होने वाली बारिश का पूर्वानुमान पेश किया जाता है।

Published / 2022-04-14 04:12:02
तमिलनाडु के दक्षिणी तट पर बना चक्रवात, गर्मी से राहत के आसार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सीएमडी ने तमिलनाडु के दक्षिणी तट पर बने चक्रवात के प्रभाव के कारण भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। विभाग ने कहा कि गर्मियों में बारिश गरज के साथ होती है और तेज हवाएं चल सकती हैं, जो खतरनाक साबित होती हैं। उसने जनता को अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी, खासकर बाढ़ और भू-स्खलन के जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को। जब मौसम की स्थिति तेज हवाओं और भारी बारिश से चिह्नित की जाती है, तो ऑरेंज अलर्ट जारी किया जाता है। केरल में भारी बारिश, इडुक्की जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी केंद्रीय मौसम विभाग (सीएमडी) ने बुधवार को राज्य में भारी बारिश के बीच केरल के इडुक्की जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। सीएमडी ने जिले में 24 घंटों में बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया है। उसका कहना है कि 115.6 मिमी से 204.4 मिमी तक बारिश हो सकती है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में पिछले एक सप्ताह से मध्यम से भारी बारिश हो रही है। दिल्ली में पांच-छह दिनों तक लू से मिलेगी राहत : दिल्ली-एनसीआर में बुधवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से कम रहने का अनुमान है। शहर के लिए मौसम के आधिकारिक आंकड़े एकत्र करने वाली सफदरजंग वेधशाला ने आज का न्यूनतम तापमान 21.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। हिमालयी क्षेत्र में कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और पंजाब के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण से मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी से थोड़ी राहत मिली है। हालांकि, बाद में अधिकतम तापमान फिर से बढ़ने का अनुमान है। दिल्ली में अधिकतम तापमान शुक्रवार तक 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहने का अनुमान है। सोमवार तक यह धीरे-धीरे बढ़कर 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में अगले पांच से छह दिनों तक लू चलने का अनुमान नहीं है। दिल्ली वालों को भीषण गर्मी और हीट वेव से मिली राहत : भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि आंशिक रूप से बादल छाए रहने से दिल्ली में मंगलवार को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिली, जबकि दिल्ली-एनसीआर में अगले पांच से छह दिनों तक लू का अनुमान नहीं है। सफदरजंग वेधशाला में सोमवार को दर्ज किए गए 42.6 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। मौसम विभाग ने कहा कि आंशिक रूप से बादल छाए रहने के बीच अगले तीन दिनों तक अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्टेशन शहर का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में चलेगी तेज लू : भारतीय मौसम विभाग ने कहा कि उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत के आसपास के हिस्सों में अप्रैल में अधिक तीव्र और लगातार लू की स्थिति बने रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार राजधानी में इस साल अप्रैल में अब तक पांच दिन ऐसे दर्ज किए गए हैं, जब लू चली है और यह संख्या 12 वर्षों में सबसे अधिक हैं। इससे पहले अप्रैल, 2017 में ऐसे चार दिन दर्ज किए थे। राजधानी में 21 अप्रैल, 2017 को अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। महीने का अब तक का उच्चतम अधिकतम तापमान 29 अप्रैल, 1941 को 45.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। पश्चिमी विक्षोभ से राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में छाए रहे बादल : पिछले कई दिनों से लू के थपेड़े झेल रहे राजस्थान के लोगों को मंगलवार को थोड़ी राहत मिली, जब पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादल छाए रहे। इससे अधिकतम तापमान में भी कमी की उम्मीद है। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार, करीब एक महीने बाद कम तीव्रता के पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए हुए हैं। मौसम केंद्र के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की कमी आएगी। साथ ही, 13 अप्रैल को जोधपुर एवं बीकानेर संभाग के जिलों में छिटपुट स्थानों पर अंधड़ के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बूंदाबांदी होने की संभावना है।

Published / 2022-04-12 17:18:18
रांची : 14 अप्रैल से बदल सकता है मौसम का मिजाज, गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में भीषण गर्मी पड़ रही है। कई जिलों में लू चल रही है। इन हालात के बीच एक अच्छी खबर आई है। 14 अप्रैल से मौसम का मिजाज बदलेगा। तीन दिन कई इलाकों में बारिश होगी। एक दिन गर्जन के साथ वज्रपात होने की भी आशंका है। बारिश होने से लोगों को कुछ राहत मिलेगी। राज्य में अगले 5 दिन तक अधिकतम तापमान में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। यह जानकारी रांची मौसम केंद्र ने 11 अप्रैल की बुलेटिन में दी है। यहां आंशिक बादल छाये रहेंगे : मौसम केंद्र के मुताबिक 14 और 15 अप्रैल को राज्य के उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी-पूर्वी भागों में आंशिक बादल छाये रहेंगे। इसका प्रभाव देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहेबगंज, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां देखने को मिलेगा। कई जगह गर्जन वाले बादल भी बन सकते हैं। इन जिलों में लू चलेगी : राज्य के कई जिलों में 13 और 14 अप्रैल को उत्तर-पश्चिम और मध्य भागों में कहीं-कहीं लू चलेगी। इसका असर पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़ आदि जिलों में देखने को मिलेगा। यहां बारिश की संभावना : केंद्र के मुताबिक 16 से 18 अप्रैल को राज्य के पूर्वी भाग में कहीं-कहीं आंशिक बादल छाये रहेंगे। यहां गर्जन और हल्की बारिश होने की संभावना है। इसका प्रभाव गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज में देखने को मिलेगा। इन्हीं जिलों में कहीं-कहीं 16 अप्रैल को गर्जन के साथ वज्रपात भी होने की आशंका है।

Published / 2022-04-12 17:10:40
देश में 122 साल का रिकॉर्ड तोड़ रही गर्मी, अगले 3 दिन में उत्तर भारत में मिल सकती है राहत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में लगातार पारा चढ़ता ही जा रहा है और राजधानी में आज मंगलवार को लगातार छठे दिन भी भीषण गर्मी पड़ने की संभावना जताई है क्योंकि मौसम विभाग ने दिन का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने अनुमान जताया है। हालांकि अब कुछ दिनों में झुलसाने वाली गर्मी से निजात मिलने की संभावना है और यहां पर बादल छाए रहने की भविष्यवाणी की गई है जिससे तापमान में गिरावट आएगी। मौसम विभाग के महानिदेशक आरके जेनामणि ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि राजधानी दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा में बादलों की उपस्थिति बढ़ने से तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आएगी और लू भी कम चलेगी। दिल्ली में हवा चलती रहेगी और बादल छाए रहेंगे। उन्होंने कहा कि पूवार्नुमानित पश्चिमी विक्षोभ पहले से ही उत्तर-पश्चिमी भारत पर प्रभाव दिखा रहा है। वहीं मौसम विभाग ने आज देर शाम से उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई है। लू के प्रकोप के बारे में महानिदेशक आरके जेनामणि ने संभावना जताते हुए कहा कि लू का बड़ा दौर खत्म हो गया है। पश्चिमी राजस्थान और पंजाब में गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि पिछले 50 दिनों में बारिश नहीं होने के कारण पूरे देशभर में तापमान तेजी से बढ़ता चला गया जो 122 सालों में सबसे अधिक रहा। 16 अप्रैल के आसपास राजस्थान में गर्मी के बढ़ने की संभावना है। जबकि 18 अप्रैल से एक और पश्चिमी विक्षोभ की भी उम्मीद जताई है। मौसम विभाग का कहना है कि मंगलवार रात से उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। कल से अगले 2 दिन (13 और 14 अप्रैल) को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। राज्य के शेष पर्वतीय इलाकों में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। इससे पहले राजधानी दिल्ली में मंगलवार को लगातार छठे दिन भीषण गर्मी पड़ने की संभावना जताई गई क्योंकि मौसम विभाग ने दिन का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना जताई। दिल्ली में आज की सुबह में गर्माहट बनी रही जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से दो डिग्री अधिक 22.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक अधिकारी ने बताया कि सुबह सापेक्षिक आर्द्रता 25 प्रतिशत रही। जबकि मंगलवार को न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी के अनुसार, दिल्ली में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है और सोमवार को अधिकतम तापमान बढ़कर 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पांच साल में अप्रैल के महीने में सर्वाधिक है। मौसम विभाग का कहना है कि 72 साल में पहली बार दिल्ली में अप्रैल के पहले पखवाड़े में इतना अधिक तापमान दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल अप्रैल में अब तक पांच दिन जबर्दस्त गर्मी दर्ज की गई और आईएमडी के आंकड़ों से पता चलता है कि 5 साल पहले अप्रैल 2017 में ऐसे छह दिन दर्ज किए थे। लेकिन आज मंगलवार को बादल छाए रहने से भीषण गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की संभावना है। दिल्ली में 21 अप्रैल, 2017 को अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि अप्रैल का अब तक का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 29 अप्रैल, 1941 को 45.6 डिग्री सेल्सियस आंका गया था।

Published / 2022-04-08 06:37:24
अभी नहीं कम होगा झारखंड का पारा, फिलहाल गर्मी से राहत की उम्मीद नहीं

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में अगले पांच दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि अभी चल रहे नवरात्र, रमजान और चैती छठ त्योहारों में गर्मी से राहत की संभावना नहीं है। आने वाले कुछ दिन तापमान में कोई बदलाव की संभावना नहीं देखी जा रही है। जैसा कि मौसम विज्ञान केंद्र का पूर्वानुमान था, पिछले 24 घंटों में राज्य का तापमान शुष्क रहा और और राज्य के पश्चिमी भाग में लू की स्थिति बनती हुई देखी गई। झारखंड में अधिकतम तापमान डाल्टनगंज में 42.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राज्य के मुख्य शहरों के तापमान में राजधानी रांची में 38.8 डिग्री सेल्सियस, जमशेदपुर में 41 डिग्री सेल्सियस, बोकारो थर्मल में 39.5 डिग्री सेल्सियस, चाईबासा में 40.6 डिग्री सेल्सियस, देवघर और गोड्डा में 42 डिग्री सेल्सियस और गिरिडीह में 39.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया है।

Published / 2022-04-07 10:51:52
पर्यावरण बचेगा तभी हम बचेंगे : डॉ निलाभ

टीम एबीएन, रांची। इस बार के विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम हमारा गृह हमारा स्वास्थ्य है। यह संदेश देता है कि हमें स्वस्थ्य रहना है तो अपने पर्यावरण को भी स्वस्थ्य रखना होगा। हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो हम भी स्वस्थ्य रहेंगे। ये बातें विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मेदांता अस्पताल रांची के इंटरनल मेडिसिन के डॉ नीलाभ सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में बहुत सी बीमारियां इसलिए हो रहीं हैं कि ग्लोबल वार्मिंग बढ़ गयी है, प्रदूषण बढ़ा है। ग्लोबल वार्मिंग से गर्मी बढ़ी है जिससे लू लगने से लेकर त्वचा से संबंधित बीमारियां तक हो रही हैं। इसके कारण ही अब अप्रैल में ही भीषण गर्मी होने लगी है। प्रदूषण बढ़ने से सांस एवं छाती से जुड़ी बीमारियां, पेट से जुड़ी बीमारियां काफी बढ़ी हैं। हम नदियों को प्रदूषित करते हैं और उसका पानी किसी न किसी रूप में मनुष्य फिर से इस्तेमाल करता है, जिससे बीमारियां हो रही है। इसके साथ ही हमारी जीवनशैली में आए बदलाव से डायबिटीज और हाइपर टेंशन जैसी बीमारी खूब हो रही हैं। कोरोना में भी वैसे लोगों की मौत ज्यादा हुई है जो सांस से जुड़ी बीमारियों, डायबिटीज आदि किसी बीमारी से ग्रसित थे। इस मौसम में लू से बचाव जरूरी : डॉ नीलाभ सिंह कहते हैं कि इन दिनों गर्मी और लू तेजी से बढ़ी है। लू लगने से मौत तक हो सकती है। ऐसे में इससे बचना जरूरी है। बचने के लिए पानी भरपूर मात्रा में पीयें। अनावश्यक रूप से धूप में न निकले। अगर लू लगने के बाद थकान जैसा महसूस होता है तो मेहनत वाला कोई काम नहीं करें और ठंडी जगह पर आराम करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से राहत मिलेगी। तबियत खराब लगे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। अपने स्वास्थ्य को नजरंदाज न करें : डॉ नीलाभ सिंह कहते हैं कि विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें संदेश देता है कि हम अपने स्वास्थ्य को नजरंदाज नहीं करें। बीमारी होने पर बेहतर अस्पताल में इलाज करवाएं, इलाज में देरी न करें। समय पर इलाज से बीमारी जल्दी ठीक होती है। स्वास्थ्य के लिए अच्छी जीवनशैली अपनाएं। संतुलित आहार लें। अपने पर्यावरण को भी बचाने का प्रयास करें क्योंकि यह बचेगा तभी हम बचेंगे। मेदांता अस्पताल रांची में मिल रही है विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं : डॉ नीलाभ सिंह ने कहा कि आज मेदांता अस्पताल रांची में विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां नवीनतम तकनीक से बेहतरीन चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जाता है। अस्पताल में पूरे झारखंड से मरीज बेहतर इलाज के लिए आते हैं। यह बताता है कि मेदांता अस्पताल रांची पर मरीजों कि विश्वास काफी ज्यादा है।

Published / 2022-04-06 17:44:17
जीवनशैली में बदलाव से दूर ही होगा जलवायु संकट

एबीएन डेस्क (नितिन देसाई)। एक अंतर-सरकारी समिति (आईपीसीसी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि जलवायु परिवर्तन से पर्यावरण को असाधारण नुकसान हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्रीय, स्वच्छ जल और तटीय एवं खुले सागर के जलीय पारिस्थितिकीतंत्र को भारी नुकसान पहुंचा है। इन समस्याओं से निपटने के लिए नीतिगत स्तर पर शुरू किया प्रयास आपूर्ति पक्ष में बदलाव लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इन बदलावों में कार्बन उत्सर्जन कम करने वाले उत्पादों पर जोर दिया जा रहा है। खासकर कम बिजली या ऊर्जा का इस्तेमाल करने वाले उपकरणों के निर्माण एवं इनके उपयोग की विशेष हिमायत की जा रही है। जिस तेजी से जलवायु परिवर्तन का असर दिख रहा है उसे देखते हुए मांग के मोर्चे पर भी उतना ही ध्यान देने की की आवश्यकता महसूस की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2021 में यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन आॅन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) में शामिल पक्षों की ग्लासगो में हुई बैठक में पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अभियान में यही दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया था। जीवन-शैली पर ध्यान इस पक्ष पर जोर देने का प्रयास है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन की समस्या का निवारण केवल आपूर्ति के मोर्चे पर तकनीकी बदलाव लाकर नहीं किया जा सकता है बल्कि मांग के स्तर पर भी व्यवहारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है। हाल में चीन के एक शोध संगठन के अध्ययन में 116 देशों के लिए वस्तुवार उपभोग आंकड़ों का इस्तेमाल कर उपभोग से जुड़ी आदतों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन के प्रभाव का अनुमान लगाया गया है। वैश्विक स्तर पर दुनिया की कुल आबादी में 10 प्रतिशत सबसे धनी लोग 47 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। इनमें भी सर्वाधिक धनी 1 प्रतिशत 15 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। बीच की 40 प्रतिशत आबादी 43 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है इसलिए इस समूह का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कमोबेश वैश्विक औसत जितना है। सर्वाधिक गरीब 50 प्रतिशत लोग केवल 10 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। लिहाजा यह कहा जा सकता है कि दुनिया की आबादी में सर्वाधिक धनाढ्य 1 प्रतिशत लोगों का प्रति व्यक्ति उपभोग सर्वाधिक 50 प्रतिशत गरीब लोगों के प्रति व्यक्ति उपभोग की तुलना में 75 प्रतिशत अधिक है। अमीर एवं गरीब लोगों के भौगोलिक वितरण में काफी असमानता है। सहारा मरुस्थलीय देशों में रहने वाली ज्यादातर आबादी सबसे कम कार्बन उत्सर्जन करने वाली 50 प्रतिशत जनसंख्या में आती है। दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में आधी से अधिक आबादी कम कार्बन उत्सर्जन करने वाली 50 प्रतिशत जनसंख्या में आती है। मगर पश्चिम देशों एवं सोवियत संघ के पूर्व देशों में 10 प्रतिशत से कम आबादी इस 50 प्रतिशत आबादी का हिस्सा है। इन देशों में अधिकांश आबादी बीच की 40 प्रतिशत आबादी का हिस्सा है। सर्वाधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाली शीर्ष 10 प्रतिशत आबादी पश्चिमी देशों और अमेरिका में अधिक है। अमेरिका में करीब 60 प्रतिशत राष्ट्रीय आबादी सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाली 10 प्रतिशत आबादी का हिस्सा है। प्रति डॉलर व्यय निम्नतम से उच्चतम आय वाले वर्गों में अलग-अलग है। ज्यादातर ऊंचे एवं मध्य-आय वाले देशों में कार्बन उत्सर्जन करने की रफ्तार उच्च आय समूह से निम्र आय वर्ग समूह में कम होती जाती है। भारत में इसका उलटा है। व्यय के लिहाज से कार्बन उत्सर्जन आय वर्गों के साथ बढ़ता जाता है और सबसे निचले आय वर्ग की तुलना में यह शीर्ष आय वर्ग में दोगुना है। इसका कारण यह है कि अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले उत्पादों जैसे कार एवं वातानुकूलित मशीनों का इस्तेमाल ज्यादातर शीर्ष आय वर्ग वाले लोग करते हैं। ये आंकड़े इस ओर इशारा देते हैं कि जीवन शैली में बदलाव का अभियान दुनिया की 10 प्रतिशत सबसे धनी आबादी पर केंद्रित होना चाहिए। इनमें आधे लोग विकसित देशों में रहते हैं। ये आंकड़े यह भी बताते हैं कि कई देशों में एक असंतुलन की स्थिति जरूर बनेगी जब प्रति व्यक्ति धनाढ्य लोगों का कार्बन उत्सर्जन में कमी पर जोर दिया जाएगा और गरीब लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए उन्हें अधिक उत्सर्जन की इजाजत दी जाएगी। भारत इन्हीं देशों में एक है। क्या धनी देश इस बदलाव को स्वीकार करेंगे? 1992 में उपभोक्तावाद पर तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा था, अमेरिकी जीवन शैली पर किसी तरह का वाद-विवाद नहीं हो सकता। वास्तव में अमेरिका की जीवन शैली वैश्विक समस्या बन गई है। वहां की जीवन शैली के आधार पर ज्यादातर देशों में जीवन यापन मानक और उपभोक्ता व्यवहार तय हो रहे हैं। इस अंधाधुंध उपभोक्तावाद और मुनाफा कमाने की होड़ में बदलाव की जरूरत है। यह धनी देशों के साथ सभी देशों में होना चाहिए। 30 वर्ष पहले रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश व्यावहारिक एवं दीर्घ अवधि के लिए अनुकूल उपभोग को बढ़ावा देने पर सहमत हुए थे। इनमें लोगों एवं परिवारों के लिए पर्यावरण के अनुकूल उपभोग से जुड़े कदम उठाना शामिल था। यह यूनएनएफसीसीसी की आगामी बैठकों में इस लक्ष्य को साधने का एक शुरूआती बिंदु हो सकता है। अगर भारत को वैश्विक स्तर पर इस अभियान को आगे बढ़ाना है तो उसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए कदमों का साक्ष्य पेश करना होगा। शुरूआत के तौर पर सरकार को उत्पाद एवं आय समूह के आधार पर श्रेणीबद्ध व्यय से उत्पन्न कार्बन उत्सर्जन पर सर्वेक्षण शुरू करना चाहिए। यह व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक जीवनशैली तैयार करने का खाका उपलब्ध करा सकता है। कार्बन उत्सर्जन अधिक करने वाले उपकरणों पर कर लगाने के लिए जिंसों की कीमतें प्रभावित करना एक अच्छा कदम नहीं माना जा सकता है। इससे धनी एवं गरीब लोगों के उपभोग में थोड़ी असमानता लाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। उदाहरण के लिए निजी वाहनों का इस्तेमाल रोकने के लिए पेट्रोल के दाम बढ़ाने से धनी लोगों पर न्यूनतम प्रभाव होगा जबकि मध्यम वर्ग पर असर अधिक होगा। परिवहन के लिए सार्वजनक साधनों पर निर्भर रहने वाले कम आय वर्ग के लोगों पर असर सर्वाधिक होगा। सार्वजनिक सड़कों पर निजी कारों के इस्तेमाल की खुली छूट पर पाबंदी लगाना एक रास्ता हो सकता है। भारत में वर्तमान समय में पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली रखने के लिए कुछ खास उपायों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इनमें कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अनिवार्य उत्पादन मानक तय करना, पर्यावरण के अनुकूल सुरक्षित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खरीद कार्यक्रम शुरू करना और कार्बन उत्सर्जन की मात्रा दिखाने के लिए उत्पादों पर लेबल लगाना आदि शामिल हैं। इनके अलावा सूचना तंत्र के माध्यम से उपभोक्ता का व्यवहार बदलना, अपशिष्ट पदार्थों का उत्सर्जन कम करना और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के कूड़े का अनिवार्य पुनर्चक्रीकरण आदि जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करने के लिए धनी लोगों के उपभोग ढर्रों में बदलाव उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना आपूर्ति मोर्चे पर नए प्रयोग आवश्यक हैं। यह जलवायु परिवर्तन के विषय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए भी जरूरी है और यूएनएफसीसीसी में यह लक्ष्य हासिल करने की दिशा में कदम उठाना भारत के लिए बिल्कुल वाजिब है।

Published / 2022-04-05 17:20:06
दक्षिणी अंडमान सागर पर चक्रवाती परिसंचरण की संभावना

टीम एबीएन, रांची। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बुधवार यानी 6 अप्रैल को दक्षिणी अंडमान सागर के ऊपर ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। इसके साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव के कारण अगले 24 घंटों के दौरान बंगाल की दक्षिणपूर्व खाड़ी पर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।

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