वन और पर्यावरण

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Published / 2022-11-14 23:07:38
उत्तरी विक्षोभ और देश के उत्तरी भाग में बर्फबारी ने बढ़ायी झारखण्ड में कनकनी

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पिछले दो दिनों से कनकनी बढ़ गई है इसके पीछे की वजह उत्तरी विक्षोभ और देश के उत्तरी भाग में बर्फबारी, बारिश और पश्चिम-उत्तर पश्चिमी हवा को बताया जा रहा है। इसके चलते झारखंड के प्रमुख शहरों का तापमान गिर गया है। इसमें सर्वाधिक ठंडा शहर डाल्टनगंज बना रहा। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कोहरा भी पड़ने लगा है। अगले दो दिन मौसम में बदलाव की उम्मीद नहीं है। लेकिन 17 और 18 नवंबर को तापमान में गिरावट आ सकती है।
क्या कहते हैं मौसम विभाग के जानकार
रांची मौसम विज्ञान केंद्र के एक्टिंग डायरेक्टर अभिषेक आनंद ने अगले पांच दिनों का मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार अगले दो दिन (15 और 16 नवम्बर) को न्यूनतम तापमान में कोई खास परिवर्तन या गिरावट नहीं होगा, लेकिन 17-18 नवंबर से एक बार फिर राज्य में न्यूनतम तापमान में गिरावट होगी और राज्य में ठंड बढ़ेगी। 

अगले पांच दिन राज्य में पलामू और उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में शुष्क रहेगा मौसम
मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार अगले पांच दिन राज्य में पलामू और उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में मौसम शुष्क रहेगा। हालांकि सुबह हल्का कोहरा पड़ने की भी संभावना है। मौसम केंद्र रांची के कार्यकारी निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा कि अभी तापमान में उतार चढ़ाव का दुष्प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसलिए ठंडी हवा से खुद को बचाने की जरूरत है और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है।

Published / 2022-11-13 10:57:33
क्लाइमेट चेंज का असर : सर्वाधिक संवेदनशील राज्यों की सूची में शामिल हुआ झारखंड

टीम एबीएन, रांची। झारखंड देश के उन प्रदेशों में है, जिसका मिजाज जलवायु परिवर्तन की वजह से बुरी तरह बिगड़ रहा है। यहां की खेती, वर्षा, तापमान, भूमिगत जल, मौसम के पैटर्न आदि में बदलाव आ रहा है। इस बात की तस्दीक सरकार से लेकर एजेंसियों तक की रिपोर्ट करती है। वर्ष 2020 में आईआईटी-मंडी, गुवाहाटी और आईआईएससी बेंगलुरु ने एक रिसर्च के आधार पर भारत के राज्यों की क्लाइमेट वल्नरबिलिटी इंडेक्स रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें सबसे संवेदनशील राज्यों में झारखंड के अलावा मिजोरम, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम, बिहार, अरुणाचल प्रदेश व पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इस इंडेक्स में देश के जिन टॉप-100 संवेदनशील जिलों को चिन्हित किया गया है, उसमें 60 फीसदी जिले झारखंड, असम और बिहार के हैं। पिछले साल भारत सरकार की एक रिपोर्ट (क्लाइमेट वल्नरेबिलिटी असेसमेंट फॉर एडेप्टेशन प्लानिंग इन इंडिया) से भी खुलासा हुआ, कि जलवायु परिवर्तन के कारण पड़ने वाले दुष्प्रभावों के लिहाज से झारखंड, देश के सर्वाधिक संवेदनशील राज्यों में शामिल है। केंद्र सरकार ने अभी हाल में संसद में भी स्वीकार किया है कि झारखंड देश के उन प्रदेशों में शामिल है, जहां जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाले चुनौतियां सबसे ज्यादा है। इसी साल संसद के मॉनसून सत्र में झारखंड पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर राज्य के भाजपा सांसद दीपक प्रकाश ने एक सवाल पूछा था। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने बताया था। झारखंड में 6 जिले ऐसे हैं, जहां कृषि-फसल चक्र पर जलवायु परिवर्तन का व्यापक और प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सरकार ने इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) और सर्वे प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के हवाले से संसद में बताया था कि झारखंड के गढ़वा, गोड्डा, गुमला, पाकुड़, साहिबगंज और पश्चिमी सिंहभूम जिले ऐसे हैं, जिन्हें जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से बेहद जोखिम वाली श्रेणी में चिन्हित किया गया है। झारखंड के 18 ग्रामीण जिलों को किया शामिल : आईसीएमआर ने अपने एनआईसीआरए (नेशनल इनोवेशन ऑन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर) प्रोजेक्ट के तहत पूरे देश में क्लाइमेट चेंज से कृषि पर पड़ रहे असर का अध्ययन किया है। इस अध्ययन में झारखंड के 18 ग्रामीण जिलों को शामिल किया गया था। इनमें से जिन छह जिलों को सबसे अधिक जोखिम वाली कैटेगरी में माना गया है, वहां के बारे में बताया गया है कि चावल, गेहूं, मक्का, मूंगफली, चना और आलू जैसी फसलों के उत्पादन पर जलवायु परिवर्तन का बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने भाजपा सांसद के सवाल के जवाब में यह भी बताया था कि इन जिलों में चावल, गेहूं, दलहन और टमाटर की ऐसी किस्में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। जिनका उत्पादन अधिक तापमान या अत्यधिक वर्षा की स्थिति में भी सुनिश्चित किया जा सके। रांची के पर्यावरणविद् और भूगर्भशास्त्री डॉ नीतीश प्रियदर्शी देश-विदेश की कई संस्थाओं के लिए जलवायु परिवर्तन, भूगर्भ जल और झारखंड से पर्यावरण से जुड़े विषयों पर रिसर्च कर चुके हैं। वह आईएएनएस को बताते हैं कि ढाई दशकों में अलग-अलग रिसर्च, स्टडी और सर्वे के आधार पर इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि झारखंड के प्राय: सभी क्षेत्रों में तापमान और वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन आया है। इसी वर्ष राज्य में जून-जुलाई और मध्य अगस्त में बारिश नहीं के बराबर होने से सूखे की स्थिति पैदा हो गई और खरीफ की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके विपरीत मध्य अगस्त से सितंबर-अक्टूबर तक अच्छी बारिश हुई। अप्रैल से जून-जुलाई तक झारखंड के उन इलाकों में भी तापमान में वृद्धि का रिकॉर्ड देखा, जिनकी पहचान कभी हिल स्टेशन के तौर पर हुआ करती थी। डॉ प्रियदर्शी का दावा है कि खनन वाले क्षेत्रों में झारखंड में उपजाऊ भूमि का जितनी तेजी से क्षरण हो रहा है। अगर उस पर नियंत्रण के प्रभावी कदम नहीं उठाये गये तो आने वाले 100-150 वर्षों में राज्य का एक बड़ा इलाका रेगिस्तानी भूमि में तब्दील हो सकता है। जंगलों की लगातार हो रही कटाई, अनियोजित नगरीय विकास, राज्य में खनन क्षेत्रों के विस्तार, भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन की वजह से यहां जलवायु परिवर्तन का प्रतिकूल असर दिखता है। राज्य की दर्जनों ऐसी नदियां सूख रही हैं, जिनमें साल भर पानी रहता था। झारखंड की राजधानी रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़े बताते हैं कि कभी हिल स्टेशन के रूप में जानी जाने वाली रांची अब गर्म शहरों की श्रेणी में शुमार होती जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक साल 1969 से 2014 तक यानी 45 साल के दौरान रांची का अधिकतम तापमान का औसत 35.8 डिग्री रहा है, जबकि साल 2015 से 2021 तक अधिकतम तापमान का औसत 36.7 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है। यानी सात साल में अधिकतम तापमान में औसतन एक डिग्री का इजाफा हुआ है। 45 सालों की तुलना में इन सात सालों में औसतन न्यूनतम तापमान भी 0.9 डिग्री बढ़ गया है। इससे गर्मी ज्यादा पड़ने लगी है। राज्य में खाद्य पदार्थों के उत्पादन पर इसका असर झारखंड के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय से निदेशक (अनुसंधान) के पद से सेवानिवृत्त हो चुके डॉ ए वदूद बताते हैं कि पिछले 100 वर्षों में राज्य के तापमान में करीब 1 डिग्री औसत वृद्धि हो गयी है। यह अच्छा संकेत नहीं है। पहले 40-45 डिग्री तापमान राज्य में एक या दो दिन होता था। अब कई-कई दिनों तक ऊंचे तापमान का रिकॉर्ड बन रहा है। राज्य में खाद्य पदार्थों के उत्पादन पर भी इसका असर पड़ने लगा है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के मद्देनजर झारखंड में ढाई साल पहले तीन हजार करोड़ रुपये का एक्शन प्लान बना था। इस एक्शन प्लान को केंद्र सरकार की भी स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन इस पर अब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ है। जलवायु परिवर्तन को लेकर राज्य में एक निदेशालय का गठन किया जाना था, वह भी नहीं हो पाया। इस प्लान के तहत झारखंड में जलवायु परिवर्तन के अनुसार योजनाएं तैयार की जानी थी। प्लान के अनुसार बिजली के क्षेत्र में 333.25 करोड़, उद्योग के क्षेत्र में 68 करोड़, कृषि के क्षेत्र में 518 करोड़, फॉरेस्ट्री में 496 करोड़ खर्च होने थे। इसके तहत जल प्रबंधन, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत, भूगर्भ जलस्तर का दोहन रोकने, जल संचयन और जल स्रोतों के संरक्षण की योजना पर काम किया जाना था, लेकिन निदेशालय का गठन नहीं होने के कारण स्थिति जस की तस है। 23 अगस्त को हुई झारखंड मॉड्यूल की लांचिंग जलवायु परिवर्तन पर झारखंड के किसानों और आम लोगों को रियल टाइम उपयोगी सूचनाएं देने के लिए ब्रिटेन सरकार के सहयोग से क्रिस्प-एम (क्लाइमेट रेजेलिएंस इन्फॉर्मेशन एंड प्लानिंग) टूल के झारखंड मॉड्यूल की लांचिंग इसी साल 23 अगस्त को रांची में हुई। इस मौके पर मौजूद रहे भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त एलेक्स एलिस ने कहा कि क्रिस्प-एम टूल एक वेब और मोबाइल फोन आधारित भौगोलिक सूचना प्रणाली है, जो झारखंड जैसे प्रदेश के लोगों के लिए उपयोगी साबित होगा। दरअसल, यह टूल झारखंड सहित देश के सात राज्यों में ब्रिटेन सरकार के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लाया गया है।

Published / 2022-11-12 22:34:31
फिर भूकंप : जानें क्यों और कैसे आता है भूकंप...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कुछ राज्यों में शनिवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता का 5.4 मापी गयी। भूकंप का केंद्र नेपाल में 10 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप का झटका शाम सात बजकर 57 मिनट पर महसूस किया गया। भूकंप के कारण जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। इससे तीन दिन पहले भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे, जिसका केंद्र नेपाल में था। पड़ोसी देश में इस भूकंप की वजह से छह लोगों की मौत हो गई थी। नेपाल में एक सप्ताह में तीसरी बार भूकंप आया है। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर भूकंप कैसे आते हैं? माना जाता है कि दुनियाभर में हर साल 20000 से अधिक बार भूकंप आते हैं। इससे इतर, एक तथ्य ये भी है कि भूकंप के झटके लाखों बार आते हैं लेकिन ज्यादातर झटके इतने हल्के होते हैं कि सिस्मोग्राफ पर दर्ज नहीं किए जाते। इसके पीछे का क्या है वैज्ञानिक कारण, इसे समझने की कोशिश करते हैं।

Published / 2022-11-12 15:14:45
जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयास पहले से ज्यादा जरूरी : बाइडेन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के नेताओं से ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के अपने संकल्प को और मजबूत करने का आग्रह किया और कहा कि यूक्रेन पर रूस का आक्रमण जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की आवश्यकता को पुष्ट करता है। बाइडेन ने कहा, हम अब अपने कार्यों के परिणामों के बारे में अनजान नहीं बने रह सकते या अपनी गलतियों को दोहराना जारी नहीं रख सकते। शर्म अल शेख में सीओपी27 नामक संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में शुक्रवार को बाइडेन की उपस्थिति उनकी यात्रा का पहला पड़ाव है। इसके बाद वह दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के नेताओं की बैठक में शामिल होने के लिए कंबोडिया और फिर जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इंडोनेशिया के बाली पहुंचेंगे। बाइडेन ने सीओपी27 में स्वच्छ ऊर्जा पहलों पर खर्च बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने कीमतों को कम करने के लिए किस प्रकार तेल एवं गैस के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया।

Published / 2022-11-10 12:22:15
झारखंड : ठंड की दस्तक के साथ राजधानी रांची सहित कई शहरों का तापमान गिरा

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में सर्दी ने आहट दे दी है। रांची समेत राज्य के विभिन्न जिलों में न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट देखी जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में अगले पांच दिनों के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। इस दौरान धीरे-धीरे न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट हो सकती है। सुबह में कोहरे की धुंध और बाद में आंशिक बादल छाये रहेंगे। बाद में आसमान साफ हो जायेगा। झारखंड में दिनों दिन चढ़ने के साथ ही धूप भी तेज होते जाती है और गर्मी का अहसास होने लगता है। सूर्योदय और सूर्यास्त से पहले हल्की सर्दी का अहसास होता है। रांची में सुबह से ही तेज धूप खिली है। पिछले 24 घंटे में रांची का अधिकतम तापमान 29.9 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। झारखंड में गढ़वा या डाल्टनगंज से सर्दी का प्रवेश होगा। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि सर्दी के लिए फिलहाल हवा का पैटर्न माकूल नहीं है। इसके लिए हवा का रुख नॉर्थ वेस्टर्ली या नॉर्दन होना चाहिए, या पहाड़ी क्षेत्र में लगातार बर्फबारी के कारण भी तापमान में गिरावट है। फिलहाल, दोनों चीजें नहीं हो रही है, ऐसे में सर्दी अपने समय से ही झारखंड आयेगी। मौसम विभाग की ओर से यह जानकारी दी गई है कि 13 नवंबर तक गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, देवघर, चतरा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां का अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला और सिमडेगा का अधिकतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। इसी तरह से साहिबगंज, गोड्डा, पाकुड़, दुमका, देवघर, जामताड़ा, धनबाद, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम का न्यूनतम तापमान 18 से 19 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। जबकि कोडरमा, गिरिडीह, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, चतरा, पलामू और गढ़वा जिले का न्यूनतम तापमान 16 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

Published / 2022-11-01 23:05:06
अभी कम रहेगी सर्दी, गर्म रहेगा नवंबर : आईएमडी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में इस समय मौसम का मिजाज बदल रहा है। जहां दक्षिण के राज्यों में बारिश हो रह है, वहीं उत्तर भारत में अभी शुष्क मौसम है। इसके अलावा अगर देश के पहाड़ी राज्यों की बात करें तो वहां ठंड पड़नी शुरू हो गई है। लेकिन इस बीच, भारतीय मौसम विभाग ने सर्दियों को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। भारतीय मौसम विभाग ने मंगलवार को जानकारी दी है कि पूरे भारत को सर्दियों के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। विभाग ने देश के अधिकांश हिस्सों में नवंबर में रात का तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान जताया है। दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि नवंबर के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर के बड़े हिस्से, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में भी दिन में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। सर्दी में अभी देरी : यहां भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने संभावना जताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में बादलों के छाए रह सकते हैं इसका कारण यह है कि न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। इसका मतलब यह होगा कि इस बार नवंबर के दौरान शीत लहर की स्थिति कम होगी। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में नवंबर के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। गौरतलब है कि नवंबर के लिए दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के लिए औसत वर्षा 118.7 मिमी है जिसमें इस बार 23 प्रतिशत की कमी है। महापात्र ने कहा कि पूर्वोत्तर मानसून तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में 29 अक्टूबर को दस्तक देगा। गौरतलब है कि उत्तर भारत में, सर्दियां नवंबर के मध्य से शुरू हो जाती हैं। जब न्यूनतम तापमान धीरे-धीरे गिरकर 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है और रातें सर्द हो जाती हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा है कि हाल में हुई बेमौसम बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। ये बारिश जलवायु परिवर्तन का नतीजा है। राज्य सरकारें अपने-अपने क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर रही हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए पीएम मोदी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

Published / 2022-11-01 20:07:09
झारखंड : अगले एक हफ्ते तक सतायेगी सर्दी या खिलेगी धूप!

टीम एबीएन, रांची। दशहरा, दीपावली और छठ पर्व के समापन के साथ जिंदगी की गाड़ी रफ्तार पकड़ने लगी है। बारिश का मौसम खत्म हो चुका है। सर्दी दस्तक दे चुकी है। सुबह और शाम के वक्त हाफ स्वेटर की जरूरत महसूस होने लगी है। पिछले 24 घंटे में खूंटी में न्यूनतम पारा 13.9 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ है। रांची में न्यूनतम तापमान 15.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है। जबकि सिमडेगा में 14.6 डिग्री सेल्सियस, गुमला में 14.8 डिग्री सेल्सियस और डाल्टेनगंज में 14.9 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक जमशेदपुर में सबसे ज्यादा तापमान 32 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है। अगले सात दिनों तक यानी 7 नवंबर तक पूरे राज्य में सुबह के वक्त कोहरा और धुंध देखने को मिलेगा। इसके बाद आसमान साफ हो जाएगा और मौसम शुष्क रहेगा। रांची की बात करें को अगले कुछ दिनों तक अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा जबकि न्यूनतम तापमान 15 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। उत्तर पूर्व झारखंड के देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज में अधिकतम तामपान 30 से 32 डिग्री और न्यूनतम तामपान 17 से 19 डिग्री के बीच रहेगा। उत्तर पश्चिम झारखंड के कोडरमा, चतरा, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा और पलामू में अधिकत तापमान 30 से 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 से 17 डिग्री तक रहेगा। सेंट्रल झारखंड के बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, खूंटी और गुमला में अधिकतम तामपान 28 से 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 से 17 डिग्री तक रहने का अनुमान है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक अगले सात दिनों तक मौसम सुहाना रहेगा। दिन के वक्त धूप खिली रहेगी, इसलिए सर्दी का एहसास नहीं होगा। हालांकि सुबह और शाम के बाद सर्दी महसूस होगी। डॉक्टरों का भी कहना है कि सर्दी के शुरूआती मौसम में विशेष एहतियात बरतने की जरूरत होती है। ऐसे समय में थोड़ी सी लापरवाही इंसान को कफ एंड कोल्ड की शिकार बना सकती है। बच्चों को निमोनिया होने का भी खतरा रहता है। दूसरी तरफ ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों को ऐसे मौसम में ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है।

Published / 2022-11-01 11:41:56
पश्चिम विक्षोभ : भारी बारिश से तमिलनाडु के स्कूलों में छुट्टी, यहां बदलेगा मौसम

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र से तमिलनाडु व आसपास के राज्यों में बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने चेन्नई समेत कुछ जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके चलते तमिलनाडु के तीन जिलों के स्कूल-कॉलेजों में एक नवंबर को अवकाश घोषित किया गया है। आईएमडी की भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए नागपट्टिनम, मयिलादुथुराई और तिरुवरुर जिलों के स्कूल और कॉलेज आज बंद रहेंगे। मौसम विभाग चेन्नई के अनुसार आज भारी बारिश के साथ बादल छाए रहेंगे। चेन्नई के कई इलाकों में आज सुबह बारिश हुई। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार दक्षिण पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे श्रीलंका तट पर चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। वहीं, एक ट्रफ रेखा ऊपर चक्रवात हवाओं के रूप में तमिलनाडु और केरल होते हुए दक्षिण-पूर्व अरब सागर तक फैली हुई है। उधर, पश्चिमी हिमालय के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। एक अन्य पश्चिमी विक्षोभ 4 नवंबर तक जम्मू-कश्मीर पहुंच सकता है। इसके असर से उत्तर भारत में बारिश, बर्फबारी हो सकती है और ठंड चमक सकती है। पिछले 24 घंटों से तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय है। इसके असर से तटीय आंध्र प्रदेश, तटीय तमिलनाडु और केरल के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। कुछे स्थानों पर भारी बारिश हुई। आंतरिक तमिलनाडु में छिटपुट हल्की बारिश हुई। जम्मू कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद में हल्की बारिश और हिमपात हुआ। अगले 24 घंटों में तटीय आंध्र प्रदेश और तटीय तमिलनाडु में कुछ स्थानों मध्यम से भारी बारिश संभव है। इसी तरह आंतरिक तमिलनाडु, केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और रायलसीमा में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में एक या दो स्थानों पर हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है। उत्तराखंड में छिटपुट हल्की बारिश और हिमपात हो सकता है।

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