टीम एबीएन, रांची। झारखंड में अब ठंड जा रही है। गर्मी दस्तक देने लगी है। वहीं कई जिलों में मौसम अपना मिजाज बदल रहा है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के मुताबिक आने वाले पांच दिनों में राज्य के तापमान में वृद्धि होगी। यह वृद्धि पांच से छह डिग्री तक हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार हवा के रूख में अब बदलाव हो रहा है। जिसके कारण राज्य में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। उत्तर दिशा से आने वाली हवा के साथ पश्चिम की शुष्क और गर्म हवा भी आने लगी है। समय बीतने के साथ पश्चिम की गर्म हवा जोर पकड़ेगी और वातावरण गर्म होगा। झारखंड में अक्टूबर मध्य के बाद से बारिश नहीं हुई है।
फिलहाल, बंगाल की खाड़ी में भी बारिश को लेकर सिस्टम बनने के आसार कम है। धरती की सतह सूख रही है। नमी कम हो जाने और गर्म हवा से वातावरण गर्म हो रहा है।
टीम एबीएन, रांची। फरवरी महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है। अभी होली का त्योहार आना भी बाकी है। लेकिन इससे पहले ही मौसम ने करवट ले ली है। दिन में गर्मी का एहसास हो रहा है। हालांकि सुबह शाम ठंड अभी बाकी है। मौसम विभाग की माने तो दो से तीन दिनों में पारा ऊपर चढ़ेगा। आगामी कुछ दिनों में मौसम में बदलाव दिख सकता है।
रांची मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने अनुमान व्यक्त किया है कि देवघर, दुमका, धनबाद और साहिबगंज के तापमान में अगले कुछ दिनों में दो-तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आयेगी। इसके बाद धीरे-धीरे तापमान में वृद्धि होगी। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से रांची और आसपास के जिलों में दोपहर के समय तेज धूप खिलने से गर्मी महसूस होने लगी है।
ऐसे में रांची में दिन का तापमान 32 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं रात को न्यूनतम तापतान भी 16 से 17 डिग्री पहुंच जायेगा। इसके बाद लोगों को गर्मी का एहसास होने लगेगा।
पिछले 24 घंटे की बात करें तो डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 32.1 डिग्री गढ़वा में न्यूनतम तापमान 13.8 रिकॉर्ड किया गया। वहीं कई जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री तक पहुंच गया है, जिससे साफ है कि इस बार गर्मी कहर बरपायेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली के कुख्यात प्रदूषण की तुलना में हाल के महीनों में मुंबई के वायु प्रदूषण के बारे में बहुत कुछ सामने आ रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वैश्विक रैंकिंग ट्वीट की है जिसमें मुंबई को दूसरे स्थान पर दिखाया गया है। उन्होंने इस पोस्ट पर कैप्शन लिखा है कि लंबे समय के बाद राष्ट्रीय राजधानी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में नहीं है।
हालांकि, यह एक ऐसा दिन था, जब दिल्ली को तेज हवाओं का फायदा मिला था जिसमें ज्यादातर प्रदूषक हवा में उड़ जाते हैं। यह रैंकिंग एक स्विस फर्म ने जारी की थी जो कि आईक्यू एयर नाम से दी जाती है। यह रैंकिंग आम तौर पर बदलती रहती है। जबकि मुंबई की वायु गुणवत्ता वास्तव में खराब हो गई है, आईक्यू एयर का नया डेटा वास्तविक तस्वीर के बारे में अलग और चिंताजनक रुझान दिखा रहा है।
एनडीटीवी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार डेटा से पता चलता है कि राष्ट्रीय राजधानी का प्रदूषण स्तर भारत की वित्तीय राजधानी, मुंबई के स्तर से लगातार दोगुना रहा है। यह पीएम 2.5 पॉल्यूटेंट के लेवल पर आधारित है। यह सूक्ष्म और घातक कण (पीएम) मानव शरीर के लिए खतरा बढ़ा सकते हैं। यह कण खुद को फेफड़ों में और अन्य अंगों में गहराई तक एम्बेड कर सकते है।
नया डेटा दिखाता है कि कैसे दिल्ली का वायु प्रदूषण स्तर 2022 में मुंबई के हर महीने की तुलना में अधिक रहा है, विशेष रूप से नवंबर-दिसंबर में, जब मुंबई का वायु प्रदूषण पहली बार राष्ट्रीय राजधानी को पार करने के लिए सुर्खियों में आया था और यह हाल के महीनों की बात नहीं है। पिछले चार वर्षों से, दिल्ली का वार्षिक पीएम 2.5 का औसत 95 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा है, जबकि मुंबई का 45 माइक्रोग्राम रहा है।
तट पर स्थित महानगर आमतौर पर समुद्री हवा से लाभान्वित होते हैं, जो मुख्य रूप से वाहनों, निर्माण और सड़क की धूल से शहर को प्रदूषण से मुक्त करते हैं। हालांकि, इस सर्दी में, डॉक्टरों ने विशेष रूप से बच्चों में श्वसन संक्रमण के रोगियों में तेजी की सूचना दी है। डेटा से पता चलता है कि नवंबर और दिसंबर में पीएम 2.5 का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत बढ़ा है। सरकार के आंकड़े कथित तौर पर पिछले नवंबर में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं।
डेटा, जो स्वच्छ हवा के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देश (नीचे दी गई तालिका) के साथ प्रस्तुत किया गया है, दिखाता है कि दोनों शहर केवल 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सुरक्षित पीएम 2.5 सीमा से कितने दूर हैं। पिछले नवंबर और दिसंबर के लिए, दिल्ली ने डब्ल्यूएचओ के सुरक्षित वायु गुणवत्ता मानक को लगभग 40 गुना और मुंबई को लगभग 16 गुना पार कर लिया। दोनों ही स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ऋतुराज बसंत इन दिनों पूरे शवाब पर है। एक ओर जहां जंगलों और सड़क के किनारे सूर्ख लाल वन ज्योति (पलाश के फूल) और सेमल के फूल प्राकृतिक सौंदर्य को चार चांद लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम की टहनियों पर खिले आम के मंजर इस बात का एहसास दिला रहे हैं कि इस बार आम की बंपर पैदावार होगी।
पेड़ों पर लदे आम के मंजरों को देखकर किसानों के चेहरे भी खिल गये हैं। आम उत्पादक किसानों को भरोसा है कि इस बार आम की भरपूर फसल होगी। तोरपा प्रखंड के किसान उत्पादक फगुवा सिंह कहते हैं कि मौसम अनुकूल रहा और मार्च-अप्रैल में थोड़ी बहुत बारिश हो गई, तो पिछल वर्ष की तुलना में आम की उपज अच्छी होगी। उनका कहना है कि मदमस्त बसंती बयार यदि आंधी में तब्दील हो गई, तो आम के मंजर झड़ जायेंगे। किसानों का कहना है कि लाही और मधुवा रोग का प्रकोप अभी से दिखने लगा है।
खूंटी जिले में बीजू आम के साथ ही मालदा, दशहरी सहित अन्य वैरायटी के आम की भरपूर पैदावार होती है। किसान अभी से मंजरों पर दवा का छिड़काव करने लगे हैं। जिला प्रशासन ने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत जिले के छह प्रखंडों खूंटी, तोरपा, कर्रा, रनिया, मुरहू और अड़की प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में छह हजार एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में आम की बागवानी की है।
तोरपा के ही सुंदारी गांव के आम उत्पादक किसान और जिला परिषद के पूर्व सदस्य प्रेमजीत भेंगरा कहते हैं कि झारखंड खासकर खूंटी जिले की जलवायु और भौगोलिक स्थिति आम की फसल के लिए काफी उपयुक्त है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां उद्यानिक खेती की आपार संभावनाएं हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र के किसान परंपरागत खेती के अलावा आम, ड्रैगन फ्रूट, लीची, अमरूद स्ट्रोबेरी जैसे फलों और सुंगध फूलों की खेती के अलावा लेमनग्रास आदि के उत्पादन में रुचि ले रहे हैं। भेंगरा ने कहा कि आम की फसल में मेहनत और लागत कम होने के कारण किसान इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
तोरपा के 3600 किसान कर रहे आम की बागवानी : जिले में कार्यरत स्वयंसेवी संस्था प्रदान के अधिकारी रवि रंजन कुमार बताते हैं कि यहां कि मिट्टी आम ही नहीं, अन्य फलों और फूलों की खेती के लिए काफी अनुकूल है। उन्होंने कहा कि सिर्फ तोरपा प्रखंड में पिछले छह वर्षों में बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बड़े पैमाने पर आम की बागवानी की गई है।
तोरपा एक ऐसा प्रखंड है, जिसमें बिरसा हरित ग्राम योजना के अंतर्गत पूरे झारखंड में सबसे अधिक आम बागवानी हुई है। आम बागवानी से 3600 किसान जुड़े हैं। तोरपा में इस वर्ष पांच से छह सौ एकड़ में आम की बागवानी की गयी है।
टीम एबीएन, डेस्क। झारखंड के मौसम में अचानक से बदलाव होने वाला है। राज्य के उत्तरी हिस्से में अचानक तापमान 4 से 6 डिग्री के बीच गिरेगा। यह गिरावट पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा और चतरा जैसे जिलों में होगी।
राजधानी रांची स्थित भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ अभिषेक आनंद का कहना है कि राज्य के इन इलाकों में मौसम एक बार फिर से करवट लेगा। इन इलाकों के अलावा राज्य के मध्य भाग में राजधानी रांची, रामगढ़, खूंटी, गुमला और बोकारो भी शामिल है, जबकि दक्षिणी भाग में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला में भी मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा।
मौसम विभाग के अनुसार 1 और 2 फरवरी को राजधानी रांची के न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि 30 और 31 जनवरी को न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकती है। वहीं 1 और 2 फरवरी को रांची का न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का संभावना है। इस दौरान आसमान पूरी तरह साफ रहेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा। इसके अलावा राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मौसम ठंड से सामान्य की तरफ बढ़ेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मौसम का मिजाज अभी भले ही स्थिर लगने लगा हो लेकिन मौसम एक बार फिर करवट लेगा। मौसम में अभी उतार चढ़ाव जारी रहेगा। अभी राज्य के कई जिलों के तापमान में गिरावट आयेगी। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों के दौरान राज्य के पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जिले में एक बार फिर से न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आने की संभावना है।
साफ रहेगा आसमान
राज्य के दूसरे जिलों में मौसम विभाग ने किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। राजधानी रांची के मौसम में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। तापमान अचानक सामान्य की तरफ बढ़ने लगा है। सुबह- सुबह पड़ने वाली ठंड कम हो गयी है। झारखंड में अगले पांच दिनों के दौरान मौसम शुष्क रहेगा। 30 जनवरी को आंशिक बादल छा सकते है। जबकि 31 जनवरी, 1 और 2 फरवरी को सुबह में कोहरा या धुंध के बाद आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा।
जमशेदपुर में सबसे अधिक तापमान दर्ज
सबसे अधिक उच्चतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस जमशेदपुर में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 13.3 डिग्री सेल्सियस खूंटी में दर्ज किया गया। रांची का न्यूनतम तापमान 15.3 डिग्री, जमशेदपुर का 16.6, डालटनगंज का 15.8, बोकारो का 15.2, चाईबासा का 16.0 देवघर का 15.6 गिरिडीह का 15.9, रामगढ़ का 13.9 और सिमडेगा का 14.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राज्य में ज्यादातर जिलों में तापमान 30डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। मौसम में यह बदलाव 2 से 5 डिग्री सेल्सियस सामान्य तापमान से अधिक है।
रांची और आसपास के क्षेत्र में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज
रांची और आसपास के इलाके में अगले पांच दिनों तक न्यूनतम तापमान 14 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान मौसम विभाग ने लगाया है। 30 जनवरी को आंशिक रूप से बादल रहने की आशंका जाहिर की गयी है। 2 फरवरी तक मौसम साफ रहेगा। इस दौरान अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में अभी तापमान में उतार चढ़ाव जारी है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों के दौरान झारखंड राज्य के पलामू, चतरा, लातेहार और गढ़वा में एक बार फिर ठंड का असर दिखने वाला है। एक बार फिर वहां के न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आ सकती है। वहीं राज्य के अन्य हिस्सों में अगले 2-3 दिनों मौसम में बदलाव की संभावना नहीं है। अगले 5 दिन तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
30 जनवरी को छा सकते हैं आंशिक बादल : वहीं जानकारी के मुताबिक 30 जनवरी को राज्य में आंशिक बादल छा सकते है, जबकि 31 जनवरी, 1 और 2 फरवरी की सुबह कोहरा या धुंध आसमान से साफ हो जायेगी। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में पिछले 24 घंटे के अंदर मौसम शुष्क रहा है। वहीं राज्य में सबसे अधिक तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस जमशेदपुर में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 13.3 डिग्री सेल्सियस खूंटी में दर्ज किया गया है।
रांची में रहा 15.3 डिग्री न्यूनतम तापमान : रांची का न्यूनतम तापमान 15.3 डिग्री, जमशेदपुर 16.6, डालटनगंज 15.8, बोकारो 15.2, चाईबासा 16.0, देवघर 15.6, गिरिडीह 15.9, रामगढ़ 13.9 और सिमडेगा का तापमान 14.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। वहीं इस दौरान राज्य के अधिकांश जिलों का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा, जो सामान्य से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक है।
दक्षिण दिशा की ओर हुआ हवा का रुख : वहीं मौसम विभाग के अनुसार 29 और 30 जनवरी को आसमान में सुबह के समय बादल रहने की संभावना है। इसके साथ ही राजधानी और आसपास के जिलों में मौसम में कोई बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन न्यूनतम तापमान में कमी देखने को मिल रही है। जिसके वजह से लोगों को ठंड से राहत मिली है। वहीं उतरी पश्चिम की ओर से चलने वाली हवा का रुख दक्षिण दिशा की ओर जाने के कारण ठंड का असर कम रहेगा।
31 जनवरी को मौसम रहेगा शुष्क : 31 जनवरी को राजधानी में सुबह मौसम शुष्क रहेगा। इसके साथ ही मौसम विभाग ने तापमान में 3 डिग्री वृद्धि होने की बात कही है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि देर शाम से हवा बहने से कनकनी हल्की ठंड लगती है। हालांकि इससे असर नहीं बढ़ेगा। बता दें कि खूंटी समेत राज्य के तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की कमी दर्ज की गयी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देते हुए शुक्रवार को सूचित किया कि विश्व के 70 फीसदी बाघ भारत में हैं। वर्ष 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के 53 बाघ अभयारण्यों में इनकी संख्या 2967 है। कोर्ट को जानकारी दी गई कि बाघों की छह प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।
केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ के समक्ष कहा कि बाघों के संरक्षण और उनकी आबादी बढ़ाने के लिए बहुत काम किया गया है।
एक स्थिति रिपोर्ट में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने कहा कि भारत दुनिया में 70 फीसदी से अधिक बाघों की आबादी का घर बन गया है। अखिल भारतीय बाघ अनुमान (2018) की एक व्यापक रिपोर्ट 29 जुलाई, 2020 को जारी की गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बाघों की 6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दिखाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अखिल भारतीय बाघ अनुमान का पांचवां चक्र अभी चल रहा है और यह 2023 में पूरा हो जाएगा। यह स्थिति रिपोर्ट वर्ष 2017 में वकील अनुपम त्रिपाठी द्वारा याचिका याचिका के जवाब में दायर की गई है, जिसमें लुप्तप्राय बाघों को बचाने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि बाघों की संख्या देश में लगातार घट रही है।
शीर्ष अदालत ने एएसजी भाटी की दलीलें दर्ज करने के बाद मामले को मार्च में आगे की सुनवाई के लिए रख दिया, क्योंकि त्रिपाठी मौजूद नहीं थे। पीठ ने नोट किया कि 2018 की गणना के अनुसार, भारत में 53 बाघ अभयारण्यों में 2,967 बाघ हैं और यह संख्या वैश्विक संख्या का 70 फीसदी है और आंकड़े बाघों की वृद्धि की ओर इशारा करते हैं।
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