टीम एबीएन, रांची। झारखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। मौसम केंद्र, रांची ने 15 मार्च, 2023 से वज्रपात के साथ बारिश की संभावना जतायी है। इस दौरान तेज हवा भी चलने की बात कही है। इसे देख विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है।
मौसम केंद्र, रांची के मुताबिक, 15 मार्च को राज्य के मध्य भाग यानी रांची समेत बोकारो, हजारीबाग, गुमला, खूंटी और रामगढ़ के साथ पूर्वी भागों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ हल्की बारिश की संभावना जतायी है। वहीं, 16 से 20 मार्च तक राज्य के कुछ स्थानों में गर्जन के साथ हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना है। मौसम केंद्र ने 15 से 17 मार्च तक राज्य में कहीं-कहीं वज्रपात के साथ तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की है।
इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जतायी है। वहीं, 18 मार्च को राज्य में कहीं-कहीं गर्जन/वज्रपात के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जतायी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के लोगों के लिए मौसम केंद्र से थोड़ी राहत देने वाली खबर है। क्योंकि इस बार मार्च के महीने में ही जमकर गर्मी बरस रही है, जिससे लोग अब दोपहर में निकलना पसंद नहीं कर रहे। 2 दिन पहले झारखंड की राजधानी रांची समेत अन्य जिलों में जमकर बारिश हुई थी, जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिली लेकिन फिर से भीषण गर्मी शुरू हो गयी। लेकिन अब 15 मार्च से रांची समेत अन्य जिलों में जमकर बारिश होने वाली है।
रांची मौसम केंद्र मौसम विज्ञानिक प्रीति गुनवानी ने abnnews24 से बातचीत कर बताया कि 15 मार्च से मौसम फिर करवट लेगा। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, साथ ही कुछ जिलों में अधिक बारिश होगा। जिसके लिए अलर्ट भी जारी किया गया है व तेज हवा के साथ वज्रपात की भी संभावनाएं हैं। यह हाल तीन चार दिनों तक बना रहेगा, इससे लोगों को सावधान रहने की जरूरत 15 मार्च को झारखंड के कुछ जिले जैसे पलामू, लातेहार, चतरा, हजारीबाग, बोकारो व कोडरमा जैसे जिलों में बारिश होगी जिसको लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है।
यहां पर बारिश के साथ वज्रपात भी देखे जायेंगे, जिसके चलते लोगों को अधिक सावधानी बरतनी होगी। वहीं 16 व 17 को पूरे झारखंड में बारिश देखी जायेगी। तेज हवाएं 30-40 किमी प्रति घंटा के साथ थंडर स्टॉर्म भी होगा जिसके लिए हाई अलर्ट जारी की जा चुकी है। चूंकि झारखंड छोटानागपुर पठार पर ऊंचाई में बसा हुआ है। जिस वजह से बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव बनने से तेज हवाएं झारखंड की तरफ आती है, उन हवाओं में गर्मी के वजह से अधिक नमी रहती है।
यहां पहाड़ी इलाका होने का हवा व बादल पहाड़ों से अधिक टकराते हैं। इस वजह से यहां वज्रपात की संभावना भी अधिक होती है बाकी राज्यों के मुकाबले मौसम विज्ञानिक ने कहा, संथाल परगना का आने वाले 4 दिनों में दिन का तापमान 30 से 34 डिग्री व न्यूनतम तापमान 16 से 18 डिग्री पलामू प्रखंड का अधिकतम तापमान 32 से 36 डिग्री और न्यूनतम 17 से 19 डिग्री पश्चिमी सिंहभूम की अधिकतम 33 से 37 डिग्री,वही न्यूनतम 17 से 19 डिग्री की संभावना। उत्तरी व दक्षिणी छोटानागपुर की बात करें तो, अधिकतम 32 से 34 डिग्री व न्यूनतम 17 से 19 डिग्री रहने की संभावना है।
एबीएन सोशल डेस्क। गर्मी के दस्तक के साथ ही राजधानी की नदियां सूखने लगी हैं। नदियों के सूखने से शहर के कई हिस्से ड्राई जोन घोषित किये जा चुके हैं। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे शहर में भू-गर्भ का जलस्तर घटता जा रहा है। मार्च के महीने में ही राजधानी की अधिकांश नदियां सूखने लगी हैं। स्वर्णरेखा, जुमार, हरमू ने अपना रूप बदल लिया है।
रांची की लाइफ लाइन माने जाने वाली स्वर्णरेखा नदी का बहाव एक महीने पहले जहां 60 से 80 फीट चौड़ा हुआ करती थी, अब 20 फीट पर सिमट गयी हैं। अब आगे जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी वैसे-वैसे नदी ओर भी संकरी होने की संभावना है। हरमू नदी का पानी पहले ही गंदा हो चुका है। राजधानी के हरमू क्षेत्र में कई जगहों पर नदी सूख भी चुकी है। नदी अब नाले में तब्दील हो चुकी है।
आज भी आसपास के रहने वाले लोग कपड़ा धोने, नहाने और बर्तन धोने के लिए नदी पर ही निर्भर है पर, नदी कई जगहों पर पूरी तरह से सूख चुका है। नदी के सूख जाने की वजह से आसपास के लोग अब बोरिंग पर निर्भर होते जा रहे हैं। हालांकि, शहर के अधिकांश चापानल खराब हो चुके हैं। अब, चापानल ही लोगों का सहारा बना हुआ है।
बता दें कि स्वर्णरेखा, जुमार और हरमू नदी का जलस्तर सूखने का मुख्य कारण नदी के किनारे गार्डवाल, घेराबंदी और नदी का अतिक्रमण मुख्य कारण है। स्वर्णरेखा नदी पर ही रांची की आधी आबादी निर्भर है। स्वर्णरेखा नदी का पानी ही रूक्का डैम से सप्लाई होते हुए शहर के दस लाख आबादी तक पहुंचता है। अगर स्वर्णरेखा नदी इस साल गर्मी में सूख जाती है तो पूरे शहर में जल संकट गहराना तय है। पहले ही रूक्का का डैम का जलस्तर नीचे चला जा चुका है। अगर नदी के रास्ते डैम तक पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचता है तो आने वाले दिनों में काफी परेशानी हो सकती है।
राजधानी का जलस्तर 20 साल पहले सामान्य हुआ करता था। हरमू जैसे क्षेत्र में 20 फीट पर ही पानी हुआ करती थी। पर तेजी से शहरीकरण के कारण हरमू नदी का दोहण किया गया। जिसके बाद हरमू नदी अब नदी नहीं बल्कि नाले में तब्दील हो गयी है।
हरमू नदी शहर से गुजरने के बावजूद शहर का जलस्तर काफी नीचे चल गया है। हरमू क्षेत्र पूरी तरह से ड्राई जोन घोषित हो चुका है। अब हरमू नदी सिर्फ शहर के गंदे सीवरेज-ड्रेनेज का पानी शहर से बाहर निकालने का एक माध्यम बनकर रह गयी है। अब नदी की जमीन पर बिल्डिंग, मकान, एजेंसी खुल गये हैं। रांची पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता राधेश्याम रवि ने बताया कि जल संकट एक बड़ा मामला है। रूक्का डैम का जलस्तर तेजी से घट रहा है। स्वर्णरेखा नदी का पानी काफी कम मात्रा में डैम में पहुंच रहा है। अगर डैम तक पानी पहुंचना बंद हो जायें तो काफी परेशानी हो सकती है।
टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने जानकारी दी है कि यह बारिश प्री मानसून थंडर स्टॉर्म की वजह से देखने को मिलेगी। ये थंडर स्टॉर्म 15 जून तक रहेगा। इस वजह से आए दिन रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी।
होली के दिन और उसके अगले दिन भी इसका असर देखने को मिल सकता है। आगे जानकारी देते हुए मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने कहा कि गाल की खाड़ी में निम्न दबाव बनने की वजह से गर्म हवा सबसे पहले झारखंड के पश्चिमी छोर से गुजरती है। इसी वजह से पश्चिमी छोर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। इसके अलावा होली के दिन राज्य के जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। राज्य में इस समय चक्रवर्ती हवाएं 30 से 34 किलोमीटर की रफ्तार से चल रही हैं।
मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने आगे कहा कि संथाल परगना में 8 मार्च को तेज हवा के साथ बारिश भी हो सकती है, इसकी अलावा दक्षिणी व उत्तरी छोटानागपुर में बिजली की गड़गड़ाहट के साथ हल्की बारिश हो सकती है। कोल्हान परगना में हल्की बारिश हो सकती है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। रांची के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार राज्य के कई जिलों में छह मार्च को बादल छाये रहेंगे। इतना ही नहीं सात और आठ मार्च को बारिश की भी संभावना है। शेष दिनों में मौसम में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान में बदलाव की कोई संभावना नहीं है।
विभाग के अनुसार सबसे अधिक तापमान 36.0 डिग्री सेल्सियस जमशेदपुर में दर्ज किया गया। यह सामान्य से 2.4 डिग्री सेल्सियस अधिक है। न्यूनतम तापमान 13.0 डिग्री सेल्सियस सिमडेगा केवीके में दर्ज किया गया। छह मार्च को राज्य के दक्षिण, पश्चिमी और निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं-कहीं आंशिक बादल छाये रहेंगे। इसका असर पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा में देखने को मिलेगा।
सात मार्च को राज्य के उत्तगर-पश्चिमी, दक्षिण-पश्चिम और निकटवर्ती मध्यक भागों में कहीं-कहीं आंशिक बादल छाये रहेंगे। कहीं-कहीं मेघ गर्जन के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। कुछ जगहों पर वज्रपात की आशंका भी है। इसका असर पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, हजारीबाग, रांची, पश्चिम सिंहभूम, सिमडेगा आदि जिलों में देखने को मिलेगा।
आठ मार्च को राज्य के पश्चिमी और निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ हल्कीर बारिश होने की संभावना है। इसका असर पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, हजारीबाग, रांची, पश्चिम सिंहभूम, सिमडेगा आदि जिलों में देखने को मिलेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। रांची के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार राज्य के कई जिलों में छह मार्च को बादल छाये रहेंगे। इतना ही नहीं सात और आठ मार्च को बारिश की भी संभावना है। शेष दिनों में मौसम में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान में बदलाव की कोई संभावना नहीं है।
विभाग के अनुसार सबसे अधिक तापमान 36.0 डिग्री सेल्सियस जमशेदपुर में दर्ज किया गया। यह सामान्य से 2.4 डिग्री सेल्सियस अधिक है। न्यूनतम तापमान 13.0 डिग्री सेल्सियस सिमडेगा केवीके में दर्ज किया गया। छह मार्च को राज्य के दक्षिण, पश्चिमी और निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं-कहीं आंशिक बादल छाये रहेंगे। इसका असर पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा में देखने को मिलेगा।
सात मार्च को राज्य के उत्तगर-पश्चिमी, दक्षिण-पश्चिम और निकटवर्ती मध्यक भागों में कहीं-कहीं आंशिक बादल छाये रहेंगे। कहीं-कहीं मेघ गर्जन के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। कुछ जगहों पर वज्रपात की आशंका भी है। इसका असर पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, हजारीबाग, रांची, पश्चिम सिंहभूम, सिमडेगा आदि जिलों में देखने को मिलेगा।
आठ मार्च को राज्य के पश्चिमी और निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ हल्कीर बारिश होने की संभावना है। इसका असर पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, हजारीबाग, रांची, पश्चिम सिंहभूम, सिमडेगा आदि जिलों में देखने को मिलेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मौसम का मिजाज बदल रहा है। धीरे-धीरे ठंड जा रही है और गर्मी दस्तक देने लगी है। फरवरी के महीने में ही लोगों को जून का अहसास होने लगा है। दोपहर में तेज धूप पसीने छुड़ाने लगी है।
राज्य में बिना बसंत ऋतु आये, गर्मी के आने और कई जिलों में सामान्य से अधिक तापमान को लेकर मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में पिछले वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी समय से पहले गर्मी ने दस्तक दे दी है। उन्होंने कहा कि ठंड राज्य से चली गयी है, राज्य के कई जिलों में पारा सामान्य से ऊपर है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी होली से पहले राज्य में लू चलने लगी थी।
अभिषेक आनंद ने कहा कि वैश्विक स्तर पर क्लाइमेट चेंज, पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने और पहाड़ों पर कम बर्फबारी के अलावा अलनीनो का प्रभाव और बरसात के बाद झारखंड में लंबे ड्राई स्पेल ऐसी वजहें है, जिसके कारण गर्मी समय से पहले आ गयी है।
उन्होंने कहा कि कभी संयुक्त बिहार के समय में ग्रीष्म कालीन राजधानी रांची, अब 20 वर्ष पहले वाली रांची नहीं रही है। राजधानी बनने के बाद शहर में तेजी से कंस्ट्रक्शन, प्रदूषण, जंगल की सघनता कम होने की वजह से यहां का भी तापमान बढ़ा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। किसानों की इन दिनों हरी पत्तेदार और मिर्च-टमाटर जैसी सब्जियों की पैदावार से मोहभंग होने के साथ ही उन्हें अब महंगी और विदेशी सब्जियों की खेती रास आने लगी है। इन सब्जियों से किसान हजारों रुपए की कमाई आसानी से करने लगे हैं। बड़े-बड़े नगरों एवं महानगरों में इन सब्जियों की मांग बढ़ चुकी है, जिनमें गुच्छी, चेरी टमाटर, जुकीनी, पर्सले, बोक चाय और शतावरी जैसे औषधीय पौधे भी हैं, जिन्हें इन दिनों बाहर से आयात किया जा रहा है। देश के बाजारों में ये सब्जियां 12 सौ से 15 सौ रुपये प्रति किलो बिकने लगी है।
चेरी टमाटर की किस्म साधारण टमाटर से कुछ अलग है। पास्ता से लेकर सलाद और कई प्रकार के व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। छोटी साइज होने के बावजूद चेरी टमाटर 250 से 300 रुपए किग्रा बिक रहा है। इसकी उपज महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों के किसान लेने लगे हैं। पर्सले-विदेशी धनिया के नाम से मशहूर हो रहे अजमोद हरी पत्तेदार सब्जी है। इसका स्वाद धनिया से काफी अलग है और सलाद के रूप में बड़े होटलों में इसका उपयोग किया जा रहा है। बाजार में ये पत्तेदार सब्जी सौ रुपए प्रति किलो बिक रही है।
गुच्छी जंगली मशरूम है। इसकी किस्म हिमालय की तलहटी में तैयार की गई। चमत्कारी औषधीय गुणों के कारण देश के हर हिस्से में इसकी मांग बढ़ चुकी है। पहले यह मशरूम प्राकृतिक रूप से उगता था, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसे नई तकनीक ईजाद कर किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित कर दिया है। इसकी कीमत लाखों में है और किसान नई तकनीक के दम पर इसकी खेती कर अच्छा-खासा मुनाफा कमाने लगे हैं।
जुकीनी कद्दू वर्गीय सब्जी है। इसका आकार खीरा या तोरई की तरह है। इसका उपयोग वजन घटाने में कारगर साबित हुआ है। बड़े नगरों- महानगरों में जिम जाने व फिटनेस की चिंता रखने वालों की यह पहली पसंद बन चुकी है। बाजार में 150 से 200 रुपये प्रति किलो के भाव से ये बिक रहा है और इसकी डिमांड दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
बोकचाय फाइव स्टार होटल की डिमांड बन चुकी है। यह पत्तेदार सब्जी है और इसे उगाना बहुत आसान है। इसके एक तने की कीमत 115 रुपये के लगभग किसानों को मिल रही है। इसकी खेती भी किसानों के लिए वरदान साबित होने लगी।
शतावरी जो एक औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है, इसे दूसरे देशों से आयात किया जाता रहा है। यह यहां 1200 से 1500 प्रति किलो की कीमत पर बिकने लगा है। इसकी उपज फिलहाल गंगा के मैदानी और बिहार के पठारी इलाकों में अधिक है लेकिन अब इसकी उपज उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भी ली जाने लगी है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse