टीम एबीएन, रांची। झारखंड में 26 मार्च के बाद एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम केंद्र रांची ने इसको लेकर पूवार्नुमान जारी किया है। वहीं इसके पूर्व शुक्रवार को रांची जिले के कुछ स्थानों पर अगले तीन से चार घंटे के अंदर मध्यम दर्ज की मेघगर्जन के साथ वज्रपात का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम केंद्र ने रांची में लोगों को वज्रपात से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है और किसानों से मौसम साफ होने तक खेत में नहीं जाने की अपील की है। अपने मौसम पूर्वानुमान में मौसम केंद्र रांची ने 25 मार्च को राजयभर में मौसम शुष्क और आसमान साफ रहने की भविष्यवाणी की है।
वहीं 26 मार्च यानि रविवार को राज्य के पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी जिलों जैसे गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, रांची, खूंटी, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम में आसमान में बादल छाने, मध्यम दर्जे की मेघगर्जन, कुछ इलाकों में वज्रपात और तेज रफ्तार से हवा के झोंके के साथ बारिश की संभावना जतायी गयी है।
इन जिलों के लिए 26 मार्च के लिए वज्रपात का येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। वहीं 27 और 28 मार्च को हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, रामगढ़, धनबाद, जामताड़ा, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, सरायकेला खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम जिले के लिए आसमान में बादल छाने, कहीं-कहीं वज्रपात, मध्यम दर्जे की मेघगर्जन के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
टीम एबीएन, मेदिनीनगर/ रांची। झारखंड के टाइगर रिजर्व में एक बाघ देखा गया है। इसका प्रत्यक्ष फोटो भी सामने आ गया है। यह बाघ पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के कुटकू वन प्रक्षेत्र में स्पॉट किया गया है। यह नर बाघ है। पलामू टाइगर रिजर्व के नॉर्थ डिवीजन के डिप्टी डायरेक्टर कुमार प्रजेश कांत जेना ने स्वयं इस बाघ की तस्वीर ली है।
उन्होंने बताया कि बाघ देखे जाने के बाद इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। सभी वनकर्मियों को पूरी चौकसी बरतने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि नर बाघ पिछले दो दिन से इसी क्षेत्र में घूम रहा है। अब तक दो मवेशियों को भी मारकर खा चुका है। पीटीआर के कैमरे में दो जगहों पर बाघ कैद हुआ है।
उन्होंने बताया कि बाघ व्यस्क है। उसके पग मार्क चार इंच से अधिक के हैं, जो बाघ के व्यस्क होने का प्रमाण है। जेना ने बताया कि ग्रामीणों को जंगल में जाने पर सावधानी बरतने की अपील की गयी है। साथ ही बताया कि वर्ष 2019-20 में पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क में एक बाघिन मृत अवस्था में मिली थी। उसके बाद पहली बार बाघ की तस्वीर पलामू टाइगर रिजर्व के कैमरे में कैद हुई है।
पलामू टाइगर रिजर्व में बाघ नहीं दिख रहा था। कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ सीमा पर एक बाघ दिखा था और यह भी बताया गया था कि बाघ पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में प्रवेश किया है। इसके बाद से रिजर्व के अधिकारियों के साथ-साथ वन विभाग के अधिकारी अलर्ट पर थे और लगातार निगरानी रख रहे थे।
वन विभाग ने सुरक्षा कारणों से बाघ का वास्तविक लोकेशन सार्वजनिक नहीं किया है, जिस इलाके में बाघ दिखा है वह अति नक्सल प्रभावित इलाका रहा है और बूढ़ा पहाड़ से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। बूढ़ा पहाड़ एक तरफ से छत्तीसगढ़ से सटा हुआ है। संभावना है कि छत्तीसगढ़ सीमा पर नजर आने वाला बाघ हो सकता है। पीटीआर अधिकारियों के अनुसार इलाके में बाघ ने पिछले 24 घंटे के अंदर दो शिकार किये हैं।
दरअसल, पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को शुक्रवार को सूचना मिली थी कि इलाके में बाघ की मौजूदगी है। रिजर्व के निदेशक कुमार आशुतोष, उपनिदेशक कुमार आशीष, प्रजेश जेना इस इलाके में गये हुए थे। अधिकारियों के सामने शनिवार को बाघ ने एक शिकार किया।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में कल हुई बारिश से मौसम में काफी बदलाव आ गया है। मौसम विभाग ने 20 मार्च तक के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, बारिश के चलते वज्रपात की वजह से 2 लोगों की मौत हो गयी है जबकि बारिश में पेड़ की टहनियां गिरने से वाहनों को भी नुकसान हुआ है।
बता दें कि ठनका गिरने से धुर्वा के शालीमार बाजार में वज्रपात से 13 वर्षीय बच्ची रितिका मुंडा की मौत हो गयी, जबकि 2 घायल हो गये हैं। उधर, जमशेदपुर के कदमडीह में हाइटेंशन तार गिरने से 38 साल की झुन्नू महतो की मौत हो गयी है। वहीं, शहर में तेज बारिश की वजह से कई जगहों पर पेड़ की टहनियां व बिजली के खंभे गिरे, जिससे गाड़ियों को भी नुकसान हुआ।
बता दें कि 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती हवाओं ने राज्य के तापमान में भी गिरावट लायी है। आज (शुक्रवार) को जिन जगहों पर बारिश की संभावना जतायी गयी है उनमें रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, दुमका, धनबाद, गिरिडीह सहित कई इलाके शामिल हैं।
वहीं, आंधी और बारिश की वजह से राज्य के कई हिस्सों में बिजली गुल रही। राजधानी रांची में भी घंटों बिजली गुल रही। कई इलाकों में तार गिरने की वजह से 7 घंटे तक बिजली सेवा बाधित रही। शाम से शुरू हुई बारिश की वजह से गुल हुई बिजली को देर रात ही बहाल की गयी।
टीम एबीएन, रांची। रांची मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के 14 जिलों में 17 मार्च को ओलावृष्टि के लिए आॅरेंज अलर्ट जारी किया है। जिन जिलों के ओलावृष्टि का आॅरेंज अलर्ट जारी किया गया है। उनमें गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, देवघर, जामताड़ा, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां और पूर्वी सिंहभूम शामिल है।
रांची मौसम केंद्र ने गुरुवार के मौसम के मिजाज को लेकर दो जिलों को लेकर अलर्ट जारी किया है। गढ़वा, सिमडेगा जिला के लिए अगले तीन से चार घंटे के अंदर मध्यम दर्जे की मेघ गर्जन और वज्रपात के साथ साथ वर्षा होने की तात्कालिक चेतावनी जारी की है। इन दो जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा भी चल सकती है। वज्रपात की तात्कालिक चेतावनी जारी होने के बाद मौसम केंद्र ने गढ़वा और सिमडेगा के लोगों के सतर्क और सावधान रहने की सलाह दी है।
मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थान में शरण लेने की सलाह दी है। वज्रपात या पानी से बचने के लिए पेड़ के नीचे नहीं जाने, बिजली खंभों से दूर रहने और मौसम साफ होने तक किसानों को खेत में नहीं जाने को कहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कैबिनेट सचिव ने कहा कि चूंकि तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, इसलिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इससे निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी करनी चाहिए।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की। इसमें बताया गया कि इस साल सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने और मार्च के आखिरी सप्ताह में सिंधु-गंगा मैदान एवं पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से दो से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान दर्ज किये जाने की संभावना है।
कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में आईएमडी ने बताया कि पूर्वी एवं मध्य भारत और पूर्वोत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों एवं पश्चिमोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है।
आईएमडी ने गर्मियों के असर को कम करने के लिए उठाये जा सकने वाले कदमों की समीक्षा के लिए बुलायी गयी बैठक में बताया कि मार्च के अंत में सिंधु-गंगा के मैदान और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से दो से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज होने की संभावना है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। मौसम केंद्र, रांची ने 15 मार्च, 2023 से वज्रपात के साथ बारिश की संभावना जतायी है। इस दौरान तेज हवा भी चलने की बात कही है। इसे देख विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है।
मौसम केंद्र, रांची के मुताबिक, 15 मार्च को राज्य के मध्य भाग यानी रांची समेत बोकारो, हजारीबाग, गुमला, खूंटी और रामगढ़ के साथ पूर्वी भागों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ हल्की बारिश की संभावना जतायी है। वहीं, 16 से 20 मार्च तक राज्य के कुछ स्थानों में गर्जन के साथ हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना है। मौसम केंद्र ने 15 से 17 मार्च तक राज्य में कहीं-कहीं वज्रपात के साथ तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की है।
इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जतायी है। वहीं, 18 मार्च को राज्य में कहीं-कहीं गर्जन/वज्रपात के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जतायी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के लोगों के लिए मौसम केंद्र से थोड़ी राहत देने वाली खबर है। क्योंकि इस बार मार्च के महीने में ही जमकर गर्मी बरस रही है, जिससे लोग अब दोपहर में निकलना पसंद नहीं कर रहे। 2 दिन पहले झारखंड की राजधानी रांची समेत अन्य जिलों में जमकर बारिश हुई थी, जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिली लेकिन फिर से भीषण गर्मी शुरू हो गयी। लेकिन अब 15 मार्च से रांची समेत अन्य जिलों में जमकर बारिश होने वाली है।
रांची मौसम केंद्र मौसम विज्ञानिक प्रीति गुनवानी ने abnnews24 से बातचीत कर बताया कि 15 मार्च से मौसम फिर करवट लेगा। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, साथ ही कुछ जिलों में अधिक बारिश होगा। जिसके लिए अलर्ट भी जारी किया गया है व तेज हवा के साथ वज्रपात की भी संभावनाएं हैं। यह हाल तीन चार दिनों तक बना रहेगा, इससे लोगों को सावधान रहने की जरूरत 15 मार्च को झारखंड के कुछ जिले जैसे पलामू, लातेहार, चतरा, हजारीबाग, बोकारो व कोडरमा जैसे जिलों में बारिश होगी जिसको लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है।
यहां पर बारिश के साथ वज्रपात भी देखे जायेंगे, जिसके चलते लोगों को अधिक सावधानी बरतनी होगी। वहीं 16 व 17 को पूरे झारखंड में बारिश देखी जायेगी। तेज हवाएं 30-40 किमी प्रति घंटा के साथ थंडर स्टॉर्म भी होगा जिसके लिए हाई अलर्ट जारी की जा चुकी है। चूंकि झारखंड छोटानागपुर पठार पर ऊंचाई में बसा हुआ है। जिस वजह से बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव बनने से तेज हवाएं झारखंड की तरफ आती है, उन हवाओं में गर्मी के वजह से अधिक नमी रहती है।
यहां पहाड़ी इलाका होने का हवा व बादल पहाड़ों से अधिक टकराते हैं। इस वजह से यहां वज्रपात की संभावना भी अधिक होती है बाकी राज्यों के मुकाबले मौसम विज्ञानिक ने कहा, संथाल परगना का आने वाले 4 दिनों में दिन का तापमान 30 से 34 डिग्री व न्यूनतम तापमान 16 से 18 डिग्री पलामू प्रखंड का अधिकतम तापमान 32 से 36 डिग्री और न्यूनतम 17 से 19 डिग्री पश्चिमी सिंहभूम की अधिकतम 33 से 37 डिग्री,वही न्यूनतम 17 से 19 डिग्री की संभावना। उत्तरी व दक्षिणी छोटानागपुर की बात करें तो, अधिकतम 32 से 34 डिग्री व न्यूनतम 17 से 19 डिग्री रहने की संभावना है।
एबीएन सोशल डेस्क। गर्मी के दस्तक के साथ ही राजधानी की नदियां सूखने लगी हैं। नदियों के सूखने से शहर के कई हिस्से ड्राई जोन घोषित किये जा चुके हैं। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे शहर में भू-गर्भ का जलस्तर घटता जा रहा है। मार्च के महीने में ही राजधानी की अधिकांश नदियां सूखने लगी हैं। स्वर्णरेखा, जुमार, हरमू ने अपना रूप बदल लिया है।
रांची की लाइफ लाइन माने जाने वाली स्वर्णरेखा नदी का बहाव एक महीने पहले जहां 60 से 80 फीट चौड़ा हुआ करती थी, अब 20 फीट पर सिमट गयी हैं। अब आगे जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी वैसे-वैसे नदी ओर भी संकरी होने की संभावना है। हरमू नदी का पानी पहले ही गंदा हो चुका है। राजधानी के हरमू क्षेत्र में कई जगहों पर नदी सूख भी चुकी है। नदी अब नाले में तब्दील हो चुकी है।
आज भी आसपास के रहने वाले लोग कपड़ा धोने, नहाने और बर्तन धोने के लिए नदी पर ही निर्भर है पर, नदी कई जगहों पर पूरी तरह से सूख चुका है। नदी के सूख जाने की वजह से आसपास के लोग अब बोरिंग पर निर्भर होते जा रहे हैं। हालांकि, शहर के अधिकांश चापानल खराब हो चुके हैं। अब, चापानल ही लोगों का सहारा बना हुआ है।
बता दें कि स्वर्णरेखा, जुमार और हरमू नदी का जलस्तर सूखने का मुख्य कारण नदी के किनारे गार्डवाल, घेराबंदी और नदी का अतिक्रमण मुख्य कारण है। स्वर्णरेखा नदी पर ही रांची की आधी आबादी निर्भर है। स्वर्णरेखा नदी का पानी ही रूक्का डैम से सप्लाई होते हुए शहर के दस लाख आबादी तक पहुंचता है। अगर स्वर्णरेखा नदी इस साल गर्मी में सूख जाती है तो पूरे शहर में जल संकट गहराना तय है। पहले ही रूक्का का डैम का जलस्तर नीचे चला जा चुका है। अगर नदी के रास्ते डैम तक पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचता है तो आने वाले दिनों में काफी परेशानी हो सकती है।
राजधानी का जलस्तर 20 साल पहले सामान्य हुआ करता था। हरमू जैसे क्षेत्र में 20 फीट पर ही पानी हुआ करती थी। पर तेजी से शहरीकरण के कारण हरमू नदी का दोहण किया गया। जिसके बाद हरमू नदी अब नदी नहीं बल्कि नाले में तब्दील हो गयी है।
हरमू नदी शहर से गुजरने के बावजूद शहर का जलस्तर काफी नीचे चल गया है। हरमू क्षेत्र पूरी तरह से ड्राई जोन घोषित हो चुका है। अब हरमू नदी सिर्फ शहर के गंदे सीवरेज-ड्रेनेज का पानी शहर से बाहर निकालने का एक माध्यम बनकर रह गयी है। अब नदी की जमीन पर बिल्डिंग, मकान, एजेंसी खुल गये हैं। रांची पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता राधेश्याम रवि ने बताया कि जल संकट एक बड़ा मामला है। रूक्का डैम का जलस्तर तेजी से घट रहा है। स्वर्णरेखा नदी का पानी काफी कम मात्रा में डैम में पहुंच रहा है। अगर डैम तक पानी पहुंचना बंद हो जायें तो काफी परेशानी हो सकती है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse