वन और पर्यावरण

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Published / 2023-05-06 23:53:27
दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी पर चक्रवाती तूफान के आसार

  • दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती तूफान के आसार : मौसम विभाग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास के क्षेत्रों के ऊपर शनिवार को सुबह साढ़े आठ बजे चक्रवाती तूफान के प्रबल होने से तूफान आने आने का अनुमान जताया गया है। यह जानकारी देते हुए मौसम विभाग के महानिदेशक ने बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती तूफान आने का अनुमान जताया है।

मौसम विभाग ने कहा कि तूफानी हवाओं के प्रभाव से सोमवार (आठ मई) सुबह तक उस क्षेत्र में हवा का कम दबाव का क्षेत्र बनने का अनुमान जताया है। उन्होंने बताया कि तूफान के मंगलवार को बंगाल की खाड़ी के उत्तर से करीब मध्य भाग की ओर चक्रवाती तूफान के बढ़ सकता है। कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद तूफान के मार्ग और इसकी तीव्रता का ब्यौरा दिया जायेगा। सिस्टम लगातार निगरानी में है। स्थिति की नियमित रूप से निगरानी की जा रही है।

मौसम की इस सिस्टम के कारण 08 से 12 मई के बीच अधिकांश स्थानों पर मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा आठ से 11 मई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर अति भारी बारिश हो सकती है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर 10 मई को अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है।

दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और अंडमान सागर के आसपास के क्षेत्रों में सात मई को 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक भी बढ़ सकती है।

Published / 2023-05-06 23:50:42
बंगाल और ओडिशा पर साइक्लोन मोचा का खतरा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बंगाल और ओडिशा पर साइक्लोन मोचा का खतरा मंडराने लगा है। बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व में चक्रवाती सर्कुलेशन की स्थिति बनने को मौसम वैज्ञानिक अगले सप्ताह क्षेत्र में चक्रवाती तूफान आने की आशंका तेज होने के रूप में देख रहे हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा, एक चक्रवाती परिसंचरण की स्थिति निचले और मध्य क्षोभमंडल स्तरों में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्व में बन रही है। इसके प्रभाव से आठ मई तक उसी क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बनने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद संभावित चक्रवात के मार्ग और तीव्रता के बारे में जानकारी बाद में उपलब्ध करायी जायेगी। महापात्रा ने कहा कि नौ मई के आसपास बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व में कम दबाव का क्षेत्र बनने और इसके चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका है।

Published / 2023-05-06 12:12:54
झारखंड में भी दिखेगा चक्रवात "मोचा" का असर

टीम एबीएन, रांची। पिछले कुछ दिनों से राजधानी समेत पूरे राज्य में आंशिक बादल छाये रहने व बूंदाबांदी से जहां तापमान गिर गया था। वहीं ताजा आंकड़ा बता रहा है कि 10 मई तक पूरे राज्य का आसमान साफ रहेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा, जिससे तापमान में 2 से 3 डिग्री तक वृद्धि होगी। फिर से गर्मी का असर बढ़ेगा।

पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो लोहरदगा के कुछ हिस्सों में सबसे अधिक 18.6 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है। वहीं सबसे अधिक अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री गोड्डा का, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.5 डिग्री रामगढ़ जिले का रिकार्ड किया गया है। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर शहर के आम जनजीवन पर भी देखने को मिल रहा है। मौसमी बीमारी मसलन सर्दी, खांसी, जुकाम से पीड़ित लोगों की संख्या अस्पतालों में बढ़ने लगी है।

 मौसम केंद्र के वरीय विज्ञानी अभिषेक आनंद ने बताया कि मोचा चक्रवात का असर झारखंड में दिखेगा। बंगाल के कुछ हिस्सों में और उत्तर पूर्वी राज्यों में इसका अधिक असर दिखेगा। 7 मई तक चक्रवात की तीव्रता का निर्धारण होने और कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद ही झारखंड में इसका असर होगा।

Published / 2023-04-29 15:29:47
दो दिन ओलावृष्टि का अलर्ट, बरतें सावधानियां...

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के किसानों के लिए एक बुरी खबर है। राज्य में दो दिन तक ओलावृष्टि होने की चेतावनी मौसम विभाग ने दी है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मौसम केंद्र रांची ने कहा है कि 30 अप्रैल और 1 मई को झारखंड के उत्तरी तथा निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं-कहीं ओलावृष्टि हो सकती है। इससे किसानों की फसल को नुकसान हो सकता है। कहा गया है कि सरसों, फल एवं सब्जियों, दलहनी फसल को नुकसान हो सकता है। मवेशियों को भी नुकसान हो सकता है। इसलिए किसानों से सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। मौसम केंद्र रांची के मुताबिक, खेतों में जलभराव के कारण सरसों की फसलें झुक सकती हैं। उसकी जड़ की वृद्धि बाधित हो जायेगी। तना सड़ जायेगा और अल्टरनेरिया ब्लाइट जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ओलावृष्टि की वजह से सरसों की फली गिर जायेगी। इसलिए किसानों को अपनी फसल की समय पर कटाई कर लेनी चाहिए। साथ ही उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखना चाहिए। कृषि क्षेत्र पर ओलावृष्टि का प्रभाव आधारित पूर्वानुमान में कहा गया है कि अगर फली पीली भूरी हो गयी हो, तो उसकी कटाई कर लें।

Published / 2023-04-26 20:06:03
2060 तक हीटवेव के डेंजर जोन में होगा भारत का बड़ा हिस्सा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के कई हिस्सों में पिछले कई महीनों से भीषण गर्मी और हीटवेव का असर देखा जा रहा है। हालांकि बारिश की वजह से फिलहाल मौसम खुशनुमा बना हुआ है। इसी बीच मौसम विभाग ने मंगलवार को एक नई रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक भारत के ज्यादातर इलाकों में 2060 तक हीटवेव का समय 12 से 18 दिनों तक बढ़ जाएगा।

मौसम विभाग की प्रॉसेस एंड प्रेडिक्शन आॅफ हीट एंड कोल्ड वेव इन इंडिया शीर्षक वाली रिपोर्ट में हीटवेव को लेकर कुछ सिफारिशें भी की गईं हैं। इसमें नई बनने वाली बिल्डिंग में वेंटिलेशन की सुविधा, गर्मी से होने वाले तनाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना, काम के समय में बदलाव, पहले अलर्ट जारी करना और ठंडे आश्रय स्थलों का निर्माण पर जोर देने की बात कही गई है। 

क्या है हीटवेव क्लाइमेटोलॉजी 

आईएमडी ने अपनी रिपोर्ट ने ट्रॉपिकल साइक्लोन के अपवाद के साथ अन्य खतरों की तुलना में अधिक हीटवेव का दावा किया है। इसने हीटवेव क्लाइमेटोलॉजी को जानने के लिए साल 1961 से 2020 तक के डेटा का प्रयोग किया गया है। 

कब जारी होता है हीटवेव का अलर्ट 

दरअसल आईएमडी हीटवेव का अलर्ट जब जारी करता है, जब अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री अधिक और 40 डिग्री से ऊपर होता है। वहीं भीषण गर्मी का अलर्ट तब जारी किया जाता है जब तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री ज्यादा और 40 डिग्री से ऊपर होता है। बता दें कि हीटवेव आमतौर पर सेंट्रल और नॉर्थ-वेस्ट इंडिया (हीटवेव जोन) और आंध्र प्रदेश और उड़ीसा के तटीय क्षेत्रों में मार्च से जून के समय में होता है। 

30 साल में तीन दिन बढ़ा हीटवेव 
देश का नॉर्थ एरिया, तटीय आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में औसतन दो से अधिक हीटवेव दर्ज की जाती है। वहीं कुछ इलाकों में तो हीटवेव चार से भी ज्यादा हो जाती है। एक साल में औसतन दो से तीन लू चलती हैं। पिछले 30 साल में हीटवेव के समय में तीन दिन बढ़े हैं।

कई इलाकों में 18 दिन बढ़ जायेगा हीटवेव 

रिपोर्ट के मुताबिक भविष्य में हर साल हीटवेव का समय दो दिन बढ़ेगा। इसका मतलब 2060 तक 12 से 18 हीटवेव के दिन बढ़ जायेंगे। सेंट्रल और नॉर्थ-वेस्ट इंडिया और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में सबसे लंबी गर्मी की लहर 10 दिनों से अधिक रहती है। वहीं भारत के नॉर्थ-वेस्ट में सबसे लंबा समय 15 दिनों से भी अधिक हो गया है। रिपोर्ट में पाया गया कि सेंट्रल और नॉर्थ-वेस्ट इंडिया में सबसे लंबी भीषण गर्मी आम तौर पर पांच दिनों तक पड़ती है। रिपोर्ट के मुताबिक 21 वीं सदी के अंत तक वर्तमान जलवायु से 30 गुना गर्मी बढ़ जायेगी।

Published / 2023-04-22 19:38:24
अमृत सरोवर योजना से बदलेगी तस्वीर

पृथ्वी दिवस/ 22 अप्रैल पर विशेष 

डॉ सौरभ मालवीय 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। पृथ्वी हमारा निवास स्थान है। मनुष्य सहित सभी प्राणी इसी धरती पर जन्म लेते हैं और इसी पर जीवनयापन करते हैं। पृथ्वी हमारे जीवन का आधार है। पृथ्वी से हमें वायु, जल और भोजन प्राप्त होता है। यह कहने में अतिश्योक्ति नहीं है कि पृथ्वी ने मनुष्य व अन्य सभी प्राणियों को जीवन प्रदान किया है। किन्तु मनुष्य ने पृथ्वी को क्या दिया? 

इस प्रश्न का उत्तर यही है कि मनुष्य ने पृथ्वी को कुछ नहीं दिया, अपितु उसे दूषित किया है। वायु प्रदूषित होकर विषैली हो गई है और जल भी दूषित हो रहा है। स्थिति इतनी भयंकर है कि यमुना सहित अनेक नदियों का जल पीने योग्य नहीं है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के एक अध्ययन के अनुसार 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 221 जिलों के कुछ स्थानों का जल आर्सेनिक युक्त पाया गया है। 

दूषित पेयजल के सेवन से उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे क्षेत्रों के लोग दूषित जलजनित रोगों की चपेट में आ जाते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भूजल संकट के कारण देश के लगभग 50 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को आज भी स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वे दूषित जल पीने को विवश हैं। देश में लोगों को पर्याप्त जल नहीं मिल पा रहा है।

 देश में प्रति व्यक्ति पानी की वार्षिक 1700 घन मीटर से कम उपलब्धता है। अंतरिक्ष से लिए गए आंकड़ों के आधार पर देश में पानी की उपलब्धता का पुनर्मूल्यांकन के अध्ययन के आधार पर आशंका व्यक्त की गई है कि वर्ष 2031 के लिए प्रति व्यक्ति पानी की औसत वार्षिक उपलब्धता घटकर 1367 घन मीटर रह जायेगी, जिससे जल संकट और गंभीर हो जायेगा। 

एक रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल वैश्विक जलस्रोत का मात्र 4 प्रतिशत ही उपलब्ध है, जबकि यहां विश्व की कुल वैश्विक जनसंख्या का 18 प्रतिशत भाग निवास करता है। केंद्रीय जल आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 में देश में उपलब्ध कुल जल स्रोतों में से 78 प्रतिशत का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा था। जल संकट के कारण वर्ष 2050 तक यह दर घटकर लगभग 68 प्रतिशत रह जायेगी। यह शुभ संकेत नहीं है। 

उल्लेखनीय है कि देश के लगभग 198 मिलियन हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र के लगभग आधे भाग की सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं। इसमें से 63 प्रतिशत क्षेत्र में भूमिगत जल से सिंचाई की जाती है, जबकि 24 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई के लिए नहरों के जल का उपयोग किया जाता है। इसमें 2 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई तालाब एवं कुंओं के जल से की जाती है तथा 11 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई के लिए अन्य स्रोत का उपयोग किया जाता है। 

इससे स्पष्ट हो जाता है कि भारतीय कृषक आज भी सिंचाई के लिए भूमिगत जल पर निर्भर करते हैं। इसलिए भूजल का अत्यधिक दोहन किया जाता है। इससे भूमिगत जलस्तर निरंतर गिरता जा रहा है। जल प्राणियों के जीवन का आधार है। जल के बिना कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता। सूखे एवं भूमि का जल स्तर नीचे गिरने के कारण अनेक क्षेत्रों में जल संकट व्याप्त हो गया है। इससे निपटने के लिए जल संरक्षण अति आवश्यक है। भीषण गर्मी के समय देश के प्राय: समस्त क्षेत्रों में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जल की समस्या उत्पन्न हो जाती है। तालाब भी शुष्क हो जाते हैं। कुंओं का जल बहुत नीचे उतर जाता है अथवा वे भी सूख जाते हैं। 

इसके कारण ग्रामीणों को उपयोग के लिए पर्याप्त जल प्राप्त नहीं होता है। इस समस्या के दृष्टिगत केंद्र सरकार ने अमृत सरोवर योजना प्रारम्भ की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल, 2022 को आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में इसका शुभारंभ किया था। इस योजना का उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले में कम से कम 75 जलाशयों का विकास एवं कायाकल्प करना है। देशव्यापी इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक राज्य के प्रत्येक जिले में 75 से अधिक तालाबों का निर्माण करवाना है। 

अमृत सरोवर योजना से राज्यों को अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त हो सकेंगे। तालाबों का निर्माण होने तथा पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार होने से क्षेत्रीय लोगों की जल की समस्या का समाधान हो सकेगा। इससे गर्मी के समय भूजल स्तर को बनाए रखने में सहायता प्राप्त हो सकेगी। इन तालाबों के जल का उपयोग कृषि कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त पशु पालन में भी इस जल का उपयोग हो पाएगा। 

लावारिस पशुओं एवं पक्षियों को भी पीने के लिए जल उपलब्ध हो सकेगा। इसके अतिरिक्त तालाबों का निर्माण होने से उस स्थान पर सुंदरीकरण होगा। तालाबों के तट पर पीपल, बरगद, नीम, अशोक, सहजन, महुआ, जामुन एवं कटहल आदि के पौधे लगाए जाएंगे। इससे जहां पर्यावरण स्वच्छ होगा तथा हरियाली में वृद्धि होगी, वहीं इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र में अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो सकेगी। इन तालाबों का उपयोग मछली पालन, मखाने एवं सिंघाड़े की खेती में भी किया जा सकेगा। 

इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक तालाबों का निर्माण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रत्येक तालाब एक एकड़ क्षेत्र में होगा, जिसमें 10 हजार घन मीटर पानी की धारण करने की क्षमता होगी। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि इसमें वर्ष भर जल भरा रहे। इस अमृत सरोवर योजना के माध्यम से ग्रामीण वासियों को मनरेगा योजना के अंतर्गत रोजगार उपलब्ध करवाया जा सकेगा। इससे बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध होगा। 

विगत दिनों प्रधानमंत्री मोदी अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत 11 माह में लगभग 40 हजार तालाबों को विकसित करने की उपलब्धि की सराहना कर चुके हैं। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि 15 अगस्त 2023 तक 50 हजार अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उल्लेखनीय है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल को विश्व में पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। (लेखक, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल में सहायक प्राध्यापक हैं।)

Published / 2023-04-21 20:32:00
झारखंड : अगले कुछ दिन गर्मी से मिलेगी राहत

  • 4 डिग्री सेल्सियस तक कम होगा अधिकतम तापमान 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में गर्मी का प्रकोप जारी है। राज्य के 24 जिलों में से 17 जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक रिकॉर्ड किया गया। वहीं राज्य के पूर्वी भाग संथाल, कोल्हान और पश्चिमी भाग में हीट वेव का प्रकोप ज्यादा दिखा। 

लेकिन गुरुवार को शाम होते होते राजधानी रांची में भी आसमान में हल्की बारिश और हवा में नमी की वजह से चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है। वहीं पलामू जिले में उत्तरी भाग में शुक्रवार को अगले 03 घंटे के लिए मेघगर्जन और वज्रपात की चेतावनी जारी करते हुए मौसम साफ होने तक सजग और सतर्क रहने की अपील की गयी है। 

तपिश और हलक सूखा देने वाला गर्मी के बीच रांची मौसम विज्ञान केंद्र ने झारखंडवासियों के लिए गर्मी से राहत की खबर दी है। मौसम केंद्र रांची ने अपने मौसम पूवार्नुमान में 21 अप्रैल को राज्य के एकाध इलाके में हल्की बारिश की संभावना जताई है। 

वहीं 22 और 23 अप्रैल को राज्य में हल्की बारिश का क्षेत्र बढ़ेगा। अगले चार दिन में हल्की बारिश और आसमान में आंशिक बादल छाए रहने से अधिकतम तापमान में 04 डिग्री सेल्सियस तक कि गिरावट होगी। अधिकतम तापमान में कमी की वजह से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने से आसार हैं। 

इस दौरान कोल्हान और संथाल के इलाके में कुछेक जगहों पर गर्म हवाएं चल सकती हैं। वहीं राज्य के पश्चिमी तथा मध्य भाग के ऊपर बनी टर्फ लाइन और हवा के बिखराव की वजह से मिलने वाली नमी का असर दिखेगा और लोगों को गर्मी से राहत मिलता महसूस होगा। 

रांची मौसम केंद्र के कार्यकारी निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि पिछले 24 घंटे में झारखंड में मौसम शुष्क रहा है। सबसे अधिक तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस गोड्डा का रिकॉर्ड किया गया है। वहीं जमशेदपुर का अधिकतम तापमान 44.1 डिग्री सेल्सियस, डाल्टनगंज का अधिकतम तापमान 43.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

Published / 2023-04-20 23:04:32
होगी बारिश... भीषण गर्मी से जल्द राहत की उम्मीद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अप्रैल महीना शुरू होते ही पूरे देश में गर्मी का कहर बरस रहा है। अप्रैल महीने में ही लोगों की हालत खराब होती दिख रही है। वहीं, उत्तर पूर्वी राज्यों में अभी से पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। बिहार-झारखंड के कई जिलों में गर्मी को देखते हुए लू अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। 

झारखंड की बात करें तो राजधानी रांची समेत करीब 19 जिलों में गर्मी रिकॉर्ड तोड़ती दिख रही है। वहीं, मौसम विभाग ने पूवार्नुमान जारी कर बताया कि कुछ दिनों तक राज्य में गर्मी का कहर जारी रहेगा, लेकिन जल्द ही लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है।

झारखंड में गर्मी का हाई अलर्ट

बता दें कि बीते दिन भी राज्य के अधिकरत जिलों का तापमान 40 डिग्री से अधिक रहा। जमशेदपुर में 44.1 डिग्री के साथ सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 21 अप्रैल से प्रदेशवासियों को राहत मिल सकती है। 21 से 24 अप्रैल तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में झमाझम बारिश की संभावना जतायी जा रही है। 

इसके साथ ही तेज हवा भी चल सकती है। वहीं, इस खबर से प्रदेशवासियों में खुशी की लहर है और वह बारिश का इंतजार कर रहे हैंं। कब बारिश आये और कब लोगों को इस तपती गर्मी से राहत मिले।

लू से रहें सावधान

बता दें कि गर्मी को देखते हुए लू से बचने की भी चेतावनी दी जा रही है। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थ जैसे जूस, लस्सी, छाछ का सेवन करें। जितना हो सके उतना पानी पीयें। 

घर से निकलने से पहले उचित मात्रा में पानी जरूर पीयें। वहीं धूप में जब भी निकले चेहरा और सर ढककर ही बाहर निकलें। कोशिश करें की हल्के रंग के कपड़े पहनकर ही बाहर निकलें।

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