वन और पर्यावरण

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Published / 2024-06-12 20:39:04
झारखंड : इन जगहों पर पहली बार रेड अलर्ट

कहर ढा रही है गर्मी, झारखंड में अलग-अलग इलाकों के लिए पहली बार रेड अलर्ट जारी

टीम एबीएन, रांची। गर्मी का पारा सर चढ़ कर बोल रहा है। यही वजह है कि झारखंड में पहली बार रेड अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि जब तक बहुत जरूरी काम न हो तब तक घर से बाहर न निकले। राज्य के अलग अलग हिस्सों के लिए 12 से 14 जून तक रेड अलर्ट जारी किया गया है। 

15 जून के लिए रेंज अलर्ट है। जिन इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है उसमें पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, लोहरदगा समेत कई जिले शामिल हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के 13 जून से राज्य के कई इलाकों में गर्जन, वज्रपात और तेज हवा के झोंके को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। केंद्र के अनुसार, 13 से 15 जून तक संताल परगना, कोल्हान और राजधानी के आसपास कई स्थानों पर गर्जन और वज्रपात हो सकता है। 

इस दौरान कहीं-कहीं हवा की गति 50 से 60 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है। इधर, मंगलवार को सबसे अधिक गर्मी डालटनगंज में रही। यहां का अधिकतम तापमान 45.5 डिग्री सेसि रिकॉर्ड किया गया। राज्य में पाकुड़, जामताड़ा और साहिबगंज को छोड़ सभी जिलों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेसि से अधिक हो गया है।

Published / 2024-06-07 20:54:03
हीटवेव ने तोड़ डाले मई के सारे पुराने रिकॉर्ड

सामान्य से भी डेढ़ डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रही

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मई में चली हीट वेव ने गर्मी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। वैज्ञानिकों के एक समूह ने जलवायु की समीक्षा के बाद बताया कि भारत में मई में चली हीट वेव अबतक की सबसे गर्म हीट वेव से भी डेढ़ डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रही। 

क्लाइमामीटर के समीक्षों ने बताया कि मई में भारत में जो भीषण हीटवेव चली, वह अल नीनो प्रभाव, मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का असामान्य रूप से गर्म होने और ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के चलते हीटवेव और गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

वैज्ञानिकों ने बताया क्यों बढ़ रही गर्मी

वैज्ञानिकों ने साल 1979-2001 और साल 2001-2023 के बीच के तापमान की तुलना की। इस तुलना के आधार पर वैज्ञानिकों ने बताया कि देश में जो सबसे गर्म हीटवेव दर्ज की गयी थी, मई में चली हीटवेव उससे भी डेढ़ डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रही। वैज्ञानिकों ने पाया कि अब भारत में हीटवेव इंसानी सहनशीलता से ज्यादा होती जा रही है और इसकी वजह जीवाश्म इंधन का ज्यादा इस्तेमाल है। 

फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के डेविडे फ्रांडा ने बताया कि भारत में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है और इसका कोई तकनीकी समाधान नजर नहीं आ रहा है। हमें कार्बन डाइ आॅक्साइड के उत्सर्जन को कम करने की कोशिश करनी चाहिए।

बढ़ती गर्मी भारत के लिए बनी गंभीर चुनौती 

सिंगापुर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में हीटवेव और ज्यादा खतरनाक होंगी। दुनिया का तापमान बढ़ने की वजह अल-नीनो प्रभाव के साथ ही मानव जनित जलवायु परिवर्तन है। उत्तर पश्चिम भारत के कई हिस्सों और मध्य भारत में लू का प्रकोप मई में ज्यादा खतरनाक रहा। कई राज्यों में हीटवेव के चलते लोगों की मौत हुई। देश में लोकसभा चुनाव के दौरान कम मतदान प्रतिशत की वजह भी भयंकर गर्मी और लू को माना जा रहा है। 

साथ ही देश के 150 बड़े जलाश्यों में पानी घटकर सिर्फ 22 प्रतिशत रह गया है। ऊर्जा की खपत बढ़ने से भी कई राज्यों में बिजली कटौती की समस्या से लोग परेशान हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में 25 हजार के करीब हीट स्ट्रोक के मामले सामने आए, जिनमें 56 लोगों की मौत गर्मी से संबंधित बीमारियों से हुई। इनमें से 46 मौतें अकेले मई में हुईं।

Published / 2024-06-05 18:08:19
पर्यावरण हमारे जीने का आधार है, इसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य

5 जून विश्व पर्यावरण दिवस

पर्यावरण का अर्थ संपूर्ण प्राकृतिक परिवेश से है

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व पर्यावरण दिवस हर वर्ष 5 जून को आयोजित किया जाता है। पर्यावरण हमारे जीने का मुख्य आधार है तथा इसका संरक्षण हम सभी का परम कर्तव्य है। पर्यावरण का अर्थ संपूर्ण प्राकृतिक परिवेश से है, जिसमें हम रहते हैं इसमें हमारे चारों ओर के सभी जीवित और निर्जीव तत्व शामिल होते हैं। जैसे की हवा, पानी, मिट्टी, पेड़-पौधे, जानवर और अन्य जीव- जंतु है पर्यावरण के घटक परस्पर एक दूसरे के साथ जुड़कर एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं। 

हालांकि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और मानव जीवन शैली के लिए उनके गलत उपयोग से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। दूषित पर्यावरण इन घटकों को प्रभावित करता है, जो जीवन जीने के लिए आवश्यक है। ऐसे में पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने प्रकृति और पर्यावरण का महत्व समझाने के उद्देश्य से हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हैं। इस दिवस को मनाने के पीछे का उद्देश्य पूरी दुनिया के लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। 

इस संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय दिवस में 150 से अधिक देशों के लोग भाग लेते हैं। स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित पृथ्वी बनाने के लिए तरह-तरह के जागरुकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं और लोगों को पर्यावरण का महत्व समझाया जाता है। मौके पर प्रदूषण से लेकर कई ऐसे विषयों पर चर्चा की जाती हैं जो कि पर्यावरण के लिए हानिकारक है। इस अवसर पर लोगों को पेड़-पौधे लगाने के लिए भी प्रेरित किया जाता है। 

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 1972 में विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत की थी। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1972 में मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन में की गयी थी। पहला विश्व पर्यावरण दिवस एक साल बाद 5 जून 1973 को मनाया गया था। सम्मेलन ने पर्यावरणीय मुद्दों को उजागर करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की शुरूआत का संकेत दिया। इस साल समारोह की 51वीं वर्षगांठ है। 

इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस 2024 की थीम हरित भविष्य की यात्रा है, जो हमारे ग्रह की रक्षा करने और सभी के लिए अधिक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सामूहिक प्रयास पर आधारित है इस विषय को चुनने के पीछे का कारण यह है कि आज का समय में पृथ्वी को बचाने का एकमात्र उपाय वनों को बचाना ही है। विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण को समर्पित दिन है। 

यह दिन पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है, जो व्यक्तिगत, समुदाय और वैश्विक स्तर पर लोगों को प्रोत्साहित कर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारियों के बारे में भी जागरूक किया जाता है। लोगों को पर्यावरण के लिए संकट बन चुके जलवायु परिवर्तन, जंगलों की कटाई, प्रदूषण, बायोडायवर्सिटी लॉस जैसे मुद्दों पर चिंतन कर इन्हें बचाने की मुहिम के तौर पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उक्त जानकारी झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन एवं पवित्रम सेवा परिवार के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2024-06-05 11:42:10
उत्साह के साथ मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस

टीम एबीएन, रांची। अघोर पथ नागरिक मंच ने वृक्ष लगा कर मनाया विश्व पर्यावरण दिवस। रांची सहर मे बढ़ती तापमान और पर्यावरण असंतुलन के मद्देनजर अघोर पथ (रांची बड़ा तालाब, पश्चिम) के मुहल्ले वासियों ने वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित कर पीपल, मोहगनी, कोईनार, गुलमोहर और कंडेल के पोधे लगाए। कुछ महीने पहले चीनी मिट्टी कारखाना, अघोर पथ मे पुराने पीपल के वृक्ष को जला कर मार दिया गया था, जिससे सभी दुखी थे। इसके भरपाई के लिए उस स्थान मे पुनः पीपल का वृक्ष लगाया गया। इस अवसर मे वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को प्रेरित किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने इस वर्ष वर्षा ऋतु मे ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करने करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने मे विक्रम शाहदेव, ब्रिज नंदन प्रसाद, राजेश शाहू, राजू गुप्ता, मनोज ओराव, नागदमनि शाहदेव, अमित कश्यप, मुहल्ले एवं आंचल शिशु आश्रम के बच्चे, संतोष ओराव के साथ अन्य जागरूक नागरिक उपस्थित थे। सभी के सहयोग से कार्यक्रम को सफलता पूर्वक आयोजित किया गया।

Published / 2024-06-03 21:08:05
पलामू : पानी की तलाश में 40 बंदरों ने गंवायी जान

पांकी के ग्राम सोरठ में  कुआं में डुबने से 40 बंदरों की दर्दनाक मौत

बंदरों की मौत के जिम्मेवार हैं वन विभाग के अधिकारी : सतीश कुमार

एबीएन न्यूज नेटवर्क, मेदिनीनगर। पांकी थाना के सोरठ गांव में एक कुआं में पानी पीने उतरने के दौरान डूबने से करीब 40 बंदरों की मौत हो गयी। इतनी अधिक संख्या में बंदरों की मौत के जिम्मेवार वन विभाग के अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाय। उक्त बातें आजसू के केंद्रीय सचिव सतीश कुमार ने कही। 

उन्होंने कहा कि जब वन विभाग के पदाधिकारी के संज्ञान में है कि पलामू में हिट बेव जारी है, तो जानवर के लिए पानी की व्यवस्था क्यों नहीं की गयी? सरकार गर्मी में जानवर को पानी पिलाने के लिए राशि आवंटित करती है। जिसका वारा न्यारा वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी कर लेते हैं। वन्य जीव संरक्षण कानून की धज्जियां उड़ायी जा रही है। झारखंड में वन विभाग की जिम्मेवारी मुख्यमंत्री की है। 

सरकारी संरक्षण में जंगल की अंधाधुंध कटाई भी इस वन्य जीवों की हत्या का जिम्मेवार हैं। जल जंगल जमीन पर जनता का अधिकार हो, ये नारा तकिया कलाम बन कर रह गया है। हिट वेव से मरने वाले चमगादड़ और बंदर की मौत की जांच-पड़ताल कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाये।

Published / 2024-06-01 20:56:46
झारखंड : बादलों के डेरा से भीषण गर्मी से राहत

टीम एबीएन, रांची। राजधानी के लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। शनिवार को रांची का अधिकतम तापमान 38 डिग्री के आसपास रहा। इस दौरान आसपास के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। जहां बारिश नहीं भी हुई तो वहां भी बादल छाये रहे। 

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक अगले दो से तीन घंटे में संताल परगना व गुमला के कुछ इलाकों में बारिश के साथ मध्यम दर्जे की मेघ गर्जन व वज्रपात की संभावना जतायी गयी है। मौसम विभाग का कहना है कि साइक्लोनिक डिप्रेशन का असर अब कमजोर पड़ गया है। 

हालांकि एक मानसून ट्रफ है, जो कि यूपी और बिहार होते हुए पार हो रहा है। इसका असर राज्य के कई इलाकों में देखने को मिला है। जिसके कारण रांची के आसपास के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। बारिश होने से राजधानी वासियों ने राहत की सांस ली।

Published / 2024-05-30 21:17:55
समय से पहले देश में मानसून की दस्तक

केरल में जमकर हो रही बारिश

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में दस्तक दे चुका है और आज पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों की ओर बढ़ गया है 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर रखा है। हालांकि, बुधवार को दिल्ली-एनसीआर समेत पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बारिश के होने से मौसम ने अचानक से करवट ली। अब दक्षिण पश्चिम मानसून ने गुरुवार को पूर्वानुमान से एक दिन पहले ही केरल और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में दस्तक दे दी। 

किस वजह से जल्दी आया मानसून 

मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि चक्रवात ने मानसून के प्रवाह को बंगाल की खाड़ी की ओर खींच लिया, जो पूर्वोत्तर में समय से पहले मानसून के दस्तक देने का एक कारण हो सकता है। चक्रवाती तूफान रेमल रविवार को पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तट से टकराया था। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में दस्तक दे चुका है और आज यानी 30 मई 2024 को पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों की ओर बढ़ गया है। 

इससे पहले 15 मई को मौसम विभाग ने मानसून के 31 मई को केरल में दस्तक देने की घोषणा की थी। केरल में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप मई में अतिरिक्त बारिश दर्ज की गयी है। केरल में मानसून के आगमन की सामान्य तिथि एक जून और अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर व असम में मानसून के दस्तक देने की तिथि 5 जून है। 

यहां आज हो सकती है बारिश 

आईएमडी के लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक, 24 घंटों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, सिक्किम और पूर्वोत्तर में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक के कुछ हिस्सों, तमिलनाडु और गोवा में हल्की बारिश होने का संभावना है। इसके अलावा, राजस्थान के लोगों को भी बारिश के होने से इस भीषण गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। 

कैसा रहेगा आज दिल्ली का मौसम 

दिल्ली में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी ने दिन में हल्की बारिश होने और धूल भरी आंधी चलने का अनुमान भी जताया है। दिल्ली के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग वेधशाला में बुधवार को अधिकतम तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 79 वर्षों में सबसे अधिक है। दिल्ली में 17 जून 1945 को तापमान 46.7 डिग्री सेल्सियस था। मौसम विभाग ने आज आंशिक रूप से बादल छाए रहने, लू चलने, धूल भरी आंधी या तूफान आने और तेज हवाओं के साथ बहुत हल्की बारिश होने की संभावना जतायी है।

Published / 2024-05-30 21:11:46
झारखंड के इन क्षेत्रों में एक जून से मिलेगी राहत, होगी बारिश

टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने कहा कि इसी दिन यानी 1 जून को राज्य के उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी भागों में कहीं-कहीं गरज और तेज हवाओं के साथ वज्रपात होने की संभावना है। 

शनिवार एवं रविवार यानी 2 और 3 जून को भी झारखंड के उत्तर-पूर्वी तथा दक्षिणी भागों में कहीं-कहीं गरज के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज हवाएं चलेंगी। कुछ जगहों पर वज्रपात भी हो सकता है। झारखंड के 24 में से 18 जिलों में लोग लू का प्रकोप झेल रहे हैं। इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों पर भी इसका असर दिखने लगा है। 

बृहस्पतिवार (30 मई) को सूबे में 7 लोगों की मौत हो गयी। सबसे ज्यादा 4 लोगों की मौत पलामू में हुई। गिरिडीह में एक बिरहोर की, तो सरायकेला में 2 लोगों की गर्मी से मौत हो गयी। गिरिडीह जिले में सैकड़ों चमगादड़ मर गये हैं।

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