टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पिछले 24 घंटे में मौसम शुष्क रहा है। इस दौरान सबसे कम तापमान 12.8 डिग्री सेल्सियस गुमला में दर्ज किया गया, जबकि आज का अधिकतम तापमान सरायकेला खरसावां में 34.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विज्ञान केंद्र, रांची के निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से 04 से 06 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने के कारण फरवरी महीने में ही गर्मी का एहसास हो रहा था, लेकिन आज उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा से आ रही हवाओं के कारण राज्य के उत्तर-मध्य भाग और रांची में अधिकतम तापमान में 03 से 04 डिग्री की कमी आयी है।
07 और 08 फरवरी को राज्य के पूर्वी और दक्षिणी हिस्से के तापमान में 03 से 04 डिग्री सेल्सियस की कमी आएगी और लोगों को गर्मी का एहसास नहीं होगा। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक के अनुसार 10 फरवरी से राज्य के कई हिस्सों में आंशिक बादल बनने के कारण तापमान में एक बार फिर से वृद्धि होगी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, चाकुलिया/ जमशेदपुर। जमशेदपुर के चाकुलिया में आज दिनांक 6 फरवरी 2025 को बहरागोड़ा विधायक समीर मोहंती मोहंती, पूर्व विधायक कुणाल षाडंगी, न्यूरो सर्जन डॉ संजय कूमार ने संयुक्त रूप से प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित करने और मानव जीवन को सशक्त बनाने की और कदम बढ़ाते हुए प्योरसम के नये प्लांट का उद्घाटन किया। मौके पर प्योरसम के सीओओ सहित प्रमुख चिकित्सक डॉ संजय कुमार उपस्थित रहे।
अपने विस्तार के हिस्से के रूप में प्योरसम ने झारखंड के चाकुलिया में एक नई सीएफओएम उत्पादन सुविधा की नींव रखी है। यह प्लांट रणनीतिक रूप से 20,000 मवेशियों के लिए एक आश्रय के साथ एकीकृत है, जो एक बंद लूप सिस्टम बनाता है जहां गाय के गोबर को प्रीमियम जैविक खाद में परिवर्तित किया जाता है। 100 टन प्रति माह की लक्षित उत्पादन क्षमता के साथ, यह सुविधा स्थानीय समुदायों के लिए स्थिर रोजगार और कौशल विकास के अवसर प्रदान करेगी, जिससे प्योरसम के ग्रामीण सशक्तिकरण के मिशन को और मजबूती मिलेगी।
प्योरसम एक अग्रणी सामाजिक उद्यम, झारखंड भर में सीमांत और आदिवासी किसानों को सशक्त बनाते हुए, गाय के गोबर को उच्च मूल्य वाले जैविक उत्पादों में बदलकर ग्रामीण कृषि में क्रांति ला रहा है। प्राकृतिक खेती, नवीन जैव उत्पादों और किसान शिक्षा को एकीकृत करके, प्योरसम एक आत्मनिर्भर कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा दे रहा है जो मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ाता है, फसल की पैदावार में सुधार करता है, और सिंथेटिक/रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता को कम करता है।
प्योरसम बायोप्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और सीईओ अरविंद त्रिपाठी के नेतृत्व में, संगठन ने छउइ फर्टिलाइजर्स के साथ फसल-विशिष्ट किण्वित जैविक उर्वरक (सीएफओएम) पेश करने के लिए साझेदारी की है - पुनर्योजी खेती में एक सफलता।
न्यूरो सर्जन डॉ संजय ने कहा कि ऐतिहासिक स्थान से एक ऐतिहासिक कार्य की शुरुआत हो रही है। यह प्रयास सार्थक तभी होगा जब क्षेत्र के किसानों को इसका लाभ आसानी से मिल सके। तकनीक के फायदे बनाते हुए बताया कि कृषि के क्षेत्र में भी विकसित तकनीक से विकसित खेती की जा सके। कृषि में रासायनिक खाद का इस्तेमाल एक गहरी साजिश है। जिसमें भारत के लोग फंस चुके हैं। यदि हम मिट्टी और बीज को विकसित कर दें तो कम पानी में भी बेहतर कृषि कार्य हो सकते है। चाकुलिया से फसल और नसल को बचाने की शुरूआत हुई है। इस प्योरसम इंडिया फाउंडेशन आगे तक ले जाएगी।
टीम एबीएन, रांची। मौसम विज्ञान केंद्र रांची द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार एक बार फिर से सर्दी के लौटने के आसार हैं। मौसम विज्ञानी अभिषेक आनंद ने बताया कि जो संकेत मिल रहे हैं उसके अनुसार तापमान में बदलाव होगा। राज्य में अगले 2 दिनों में न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है।
इसके बाद 7, 8 और 9 फरवरी तक न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है जिससे तापमान में गिरावट होगी और एक बार फिर ठंड का असर देखने को मिलेगा। मौसम केंद्र के अनुसार, 6 से 8 फरवरी तक सुबह में कोहरा या धुंध छायी रहेगी। मौसम केंद्र के अनुसार, पिछले 24 घंटे में राजधानी रांची समेत पूरे राज्य का मौसम शुष्क बना रहा।
इस दौरान आसमान मुख्यत: साफ रहा और सर्दी का असर भी कम देखने को मिला। वहीं, आज संभावित तापमान की बात करें तो देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ व साहिबगंज में अधिकतम 29 व न्यूनतम 14 डिग्री, कोडरमा, चतरा, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, पलामू में अधिकतम 28 डिग्री व न्यूनतम 13 डिग्री, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, खूंटी, गुमला अधिकतम 29 डिग्री व न्यूनतम 13 डिग्री, पूर्वी व पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला खरसावां व सिमडेगा अधिकतम 33 व न्यूनतम 17 डिग्री दर्ज किया जा सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जाने माने जलवायु वैज्ञानिक जेम्स हांसेन के नेतृत्व में बनायी गयी यह रिपोर्ट एनवायरनमेंट: साइंस एंड पॉलिसी फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट पत्रिका में छपी है। इसमें यह निष्कर्ष निकाला गया है कि बढ़ती ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के प्रति धरती की जलवायु को अभी तक जितना संवेदनशील समझा जाता था वह उससे ज्यादा संवेदनशील है।
इसके अलावा रिपोर्ट यह भी कहती है कि एक ऐसी घटना की वजह से यह संकट और बढ़ गया है जो असल में सकारात्मक है। जहाजरानी उद्योग का एयरोसोल प्रदूषण सूर्य की रौशनी को ब्लॉक करता है जिससे ग्लोबल वार्मिंग का असर थोड़ा कम होता है, लेकिन हाल ही में यह प्रदूषण कम हो गया है जिससे वार्मिंग के मोर्चे पर नुकसान हो रहा है।
हांसेन पहले नासा के चोटी के जलवायु वैज्ञानिक थे। वो 1988 में अमेरिकी संसद में दिए गए बयान के लिए मशहूर हैं जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि ग्लोबल वार्मिंग शुरू हो चुकी है। उन्होंने अब एक कार्यक्रम में कहा कि संयुक्त राष्ट्र की जलवायु समिति द्वारा खींची गई महत्वाकांक्षी तस्वीर एक असंभव परिदृश्य है। इस समिति ने पहले कहा था कि साल 2,100 तक वार्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस से कम रखने की 50 प्रतिशत संभावना है।
हांसेन ने कहा, यह परिदृश्य अब नामुमकिन है। दो डिग्री का लक्ष्य अब मर चुका है। उन्होंने और रिपोर्ट के अन्य लेखकों ने आगे कहा है कि दूसरी तरफ जीवाश्म इंधनों को जलाने से पर्यावरण में जो ग्रीनहाउस गैसें छोड़ी गई हैं उन्होंने वार्मिंग के और बढ़ने को सुनिश्चित कर दिया है।
उनका पूर्वानुमान है कि आने वाले सालों में वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस या उसके ऊपर ही रहेगा और 2045 तक करीब दो डिग्री के आस पास पहुंच जायेगा। उन्होंने यह भी अनुमान लगाया कि अगले 20-30 सालों में ध्रुवीय बर्फ के पिघलने और उत्तरी अटलांटिक में ताजे पानी के बढ़ने से अटलांटिक मेरिडीयोनल ओवरटर्निंग सकुर्लेशन लहर बंद हो जायेगी।
यह लहर दुनिया के कई कोनों में आवश्यक गर्मी पहुंचाती है और समुद्री जीवों के लिए जरूरी पोषक तत्व भी लाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अंत के साथ कई समस्याएं आयेंगी, जिनमें समुद्र की सतह का कई मीटर बढ़ना शामिल है। इसलिए हम इस लहर के अंत को ऐसा पड़ाव मान रहे हैं जहां से लौटना संभव नहीं होगा।
2015 में दुनियाभर के देशों में पेरिस जलवायु संधि के तहत यह समझौता हुआ था कि इस सदी के अंत तक वार्मिंग को औद्योगिक युग की शुरुआत से पहले के स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ने नहीं देंगे। पेरिस संधि ने दशकों में दिखाई देने वाले लॉन्ग टर्म ट्रेंड की बात की थी, लेकिन यूरोपीय संघ का जलवायु मॉनिटरिंग सिस्टम कॉपरनिकस का डाटा दिखा रहा है कि यह लक्ष्य अभी से पार हो चुका है।
दो डिग्री पर तो असर और गंभीर होगा। नयी रिपोर्ट के लेखकों ने माना कि उनके निष्कर्ष डरावने हैं लेकिन उनका मानना है कि बदलाव के लिए ईमानदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जलवायु मूल्यांकन में रीयलिस्टिक नहीं होने से और मौजूदा नीतियों के प्रभावशाली ना होने को ना मानने से युवाओं का भला नहीं होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वे भविष्य के लिए आशावान हैं और यह भी कहा कि अब हम ऐसे पड़ाव पर आ गये हैं जब हमें विशेष हितों की समस्या को संबोधित करना ही चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में ठंड का असर धीरे-धीरे कम हो रहा है। फरवरी शुरू होते ही मौसम का मिजाज बदल गया है। यहां लोगों को गर्मी का एहसास होते दिख रहा है। वहीं, मौसम विभाग ने भी अगले 24 घंटों तक राज्य के न्यूनतम तापमान में कोई बड़े बदलाव नहीं होने की बात कही है।
रांची मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी अभिषेक आनंद ने बताया कि अगले 5 दिनों तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। हिमालयी क्षेत्रों में भी बर्फबारी नहीं हो रही है। पश्चिमी विक्षोभ का असर भी नहीं देखा जा रहा है।
वहीं आज यानी मंगलवार को भी दोपहर में अच्छी-खासी धूप देखने को मिली, जिससे गर्मी का एहसास हुआ। शाम को ठंडी-ठंडी हवा चलने से मौसम सुहाना रहा। फिलहाल बारिश और शीतलहर की कोई संभावना नहीं है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के ज्यादातर जिलों में आज हल्के से मध्यम दर्जे की कोहरे के साथ दिन की शुरुआत हुई। इसके बाद आसमान में आंशिक बादल छाये रहे, जिसकी वजह से राज्य के ज्यादातर जिलों में पारा चढ़ा और अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर ही रहा।
राज्य भर में अधिकतम तापमान पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में 30.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जो सामान्य से 5.2 ℃ अधिक रहा। इसी तरह रांची का अधिकतम तापमान 25℃ रिकॉर्ड हुआ, जो सामान्य से 0.8℃ अधिक रहा। वहीं, जमशेदपुर का अधिकतम तापमान भी सामान्य से 0.8℃ अधिक जाकर 28℃ रिकॉर्ड हुआ।
धनबाद का अधिकतम तापमान 26 ℃ और बोकारो का अधिकतम तापमान 26.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जो सामान्य अधिकतम तापमान से क्रमश 0.4℃ और 0.6 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा. इस दौरान राज्य में सबसे कम तापमान 5.7℃ गुमला में रिकॉर्ड किया गया।
आसमान में आंशिक बादल बनने की वजह से ज्यादातर जिलों में न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली। गुमला के बाद राज्य का सबसे कम यानी न्यूनतम तापमान रांची के नामकुम में दर्ज किया गया। नामकुम में 6.3℃ डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. चतरा जिले में न्यूनतम तापमान 6.9 ℃ रिकॉर्ड किया गया। वहीं, हजारीबाग का न्यूनतम तापमान 10.6 ℃ और रांची से सटे रामगढ़ जिले का न्यूनतम तापमान 9.8℃ रिकॉर्ड हुआ।
मौसम केंद्र, रांची के अनुसार पिछले 24 घंटे में झारखंड में मौसम शुष्क रहा। वहीं, अगले 04 दिनों तक झारखंड में न्यूनतम तापमान में कोई बड़े बदलाव की संभावना नहीं हैं।
टीम एबीएन, रांची। पहाड़ी प्रदेशों से आ रही बर्फीली हवाओं से झारखंड में अभी ठंड से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राज्य में लोगों को अभी ठंड से राहत नहीं मिलेगी। वहीं तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार गुरुवार को झारखंड के अधिकांश हिस्सों में सुबह-शाम कोहरा छाया रहेगा। आज खासतौर पर गढ़वा, साहिबगंज, गुमला, कोडरमा, पाकुड़, चतरा, हजारीबाग व पलामू यहां पर सुबह में जबरदस्त घना कोहरा देखा जायेगा। कोहरा छंटने के बाद आसमान में आंशिक बादल छाये रहेंगे। साथ ही रांची और आसपास के इलाकों का तापमान 12 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।
पिछले 24 घंटे में राज्य का सबसे कम तापमान हजारीबाग में 7.7 रिकॉर्ड किया गया, जबकि राज्य का अधिकतम तापमान पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में 27.4 रिकॉर्ड किया गया। गुमला में 7.9 दर्ज किया गया। इसके अलावा, जमशेदपुर में तापमान 12.6 दर्ज किया गया। जबकि डाल्टनगंज में 12 दर्ज तो खूंटी में 9.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मौसम का मिजाज में थोड़ी तब्दीली देखी जा रही है। सोमवार के प्रदेश के कई जिलों में घने और आंशिक कोहरे के साथ दिन की शुरूआत होने की संभावना है। इसके साथ ही आगामी दो से तीन दिनों में तापमान के और गिरने की संभावना मौसम विभाग की ओर से जतायी गयी है।
मौसम केंद्र रांची के अनुसार पिछले 24 घंटे में मौसम शुष्क रहा है। अगले 24 घंटे में राज्य में न्यूनतम तापमान में 02 से 03 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी। उसके बाद अगले तीन दिनों तक पारा 02 से 03 डिग्री सेल्सियस तक गिरेगा। 13 जनवरी 2025 को राज्य में कहीं-कहीं हल्के से मध्यम दर्जे के कोहरे या धुंध बनने की प्रबल संभावना है। दिन चढ़ने के बाद आंशिक बदला छाये रहने की भी संभावना है।
14 जनवरी 2025 को राज्य में कहीं-कहीं हल्के से मध्यम दर्जे के कोहरे या धुंध बनने के बाद आसमान साफ हो जायेगा। 15 से 18 जनवरी तक के मौसम पूवार्नुमान ने सुबह में कोहरे बनने के बाद आसमान में आंशिक बादल बनने की संभावना मौसम केंद्र ने व्यक्त की है। इस दौरान रांची और आसपास का तापमान 12 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना व्यक्त की गयी है।
इससे पहले रविवार के दिन कई इलाकों में कोहरे की स्थिति देखी गयी। को ज्यादातर जिलों में हल्के से मध्यम दर्जे की कोहरे के साथ दिन की शुरुआत हुई। इसके बाद दिन चढ़ने के साथ साथ आसमान में आंशिक बादल छाए रहे। आसमान में आंशिक बादल बनने की वजह से शनिवार की अपेक्षा न्यूनतम तापमान में भी थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गयी।
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