एबीएन न्यूज नेटवर्क, गढ़वा। जिले के रमकंडा इलाके में रविवार की रात तेज आंधी और बारिश के साथ वज्रपात हुआ। इस दौरान कई गांवों में नुकसान हुआ और लोग परेशान रहे।
चेटे गांव में करीब आधा दर्जन खपरैल वाले घर टूट गए और कई पेड़ गिर गए। बिजली के तार टूटने से बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई। पटसर के टोला पत्थलगढ़वा में वज्रपात के कारण उपेंद्र भुइयां के दो भैंसों की मौत हो गई, जिससे परिवार को आर्थिक नुकसान हुआ।
वहीं, कुरुमदारी गांव में तेज हवा के कारण बिजली का खंभा गिर गया, जिससे पूरे गांव की बिजली गुल हो गयी और लोग रात अंधेरे में गुजारने को मजबूर हुए। मुनि भुइयां, शंभू बैठा, प्रताप रजक और सुरेश भुईयां के घरों को भी आंशिक नुकसान पहुंचा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ितों को मुआवजा देने और बिजली की व्यवस्था जल्द बहाल करने की मांग की। विधायक प्रतिनिधि ज्ञानरंजन पांडेय ने कहा कि घटना की जानकारी मिल गयी है और पीड़ितों को हर संभव मदद दी जायेगी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में टाइगर ऐस्टीमेशन का कार्य चल रहा है। बाघों की गिनती के लिए पलामू टाइगर रिजर्व को नोडल बनाया गया है। पूरे देश में पलामू टाइगर रिजर्व बाघों की गिनती में सबसे आगे है। 15 दिसंबर से झारखंड में बाघों की गिनती शुरू हुई है। दिसंबर से अप्रैल महीने तक बाघों की गिनती पूरी करने का लक्ष्य है, उसके लिए चार अलग-अलग चरण निर्धारित किये गये हैं। बाघों की गिनती के लिए कैमरा ट्रैप का कार्य किया जा रहा है। बाघों की गिनती के लिए पूरे झारखंड में 600 से अधिक हाई रिजोल्यूशन वाले कैमरे का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पलामू टाइगर रिजर्व और हजारीबाग के इलाके में कैमरा ट्रैप का कार्य पूरा हो गया है। पलामू टाइगर रिजर्व के कैमरे के डाटा को कंपाइल कर लिया गया है, जबकि हजारीबाग के इलाके में लगे कैमरों के डाटा को इकट्ठा किया जा रहा है। पलामू टाइगर रिजर्व से बाहर गढ़वा और लातेहार के साथ साथ चतरा के इलाके में ट्रैप लगाया जा रहा है।
पहली बार पूरे झारखंड में बाघों की गिनती हो रही है। इससे पहले सिर्फ पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में बाघों की गिनती होती थी। बाघों की गिनती के लिए झारखंड को छह अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। जबकि बाघ के अलग-अलग कॉरिडोर चिन्हित किया गया है। बाघ की मूवमेंट का रिकॉर्ड पलामू टाइगर रिजर्व से गुमला, लोहरदगा और खूंटी होते हुए पश्चिम बंगाल की सीमा और पलामू टाइगर रिजर्व से निकलकर चतरा होते हुए हजारीबाग तक जाने के सबूत मिले हैं। इसी रूट पर अधिकतर कैमरा को लगाया गया है और उसके डाटा को खंगाला जा रहा है।
दिसंबर महीने में बाघों की गिनती शुरू हुई है। गिनती के दौरान वन्य जीव से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारी निकलकर सामने आयी है। तेंदुआ के मूवमेंट की जानकारी पाकुड़ और गोड्डा जैसे जिलों में मिली है। जबकि पलामू टाइगर रिजर्व में बड़ी संख्या में तेंदुआ के मौजूद होने की जानकारी निकलकर सामने आई है। गिनती के दौरान हनी बैजर, भेड़िया, हाथी, हायना के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। सभी के डाटा को एक जगह इकट्ठा किया गया है। डाटा को वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया को भेजी गयी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में आने वाले दिनों में मौसम बदलने वाला है। मौसम विभाग ने राज्य के कई इलाकों में बारिश, तेज हवा और गरज-तूफान की संभावना जतायी है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गयी है।
मौसम विभाग के अनुसार झारखंड में अगले कुछ दिनों तक मौसम खराब रह सकता है। कई जगहों पर आंशिक बादल छाये रहेंगे और गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। साथ ही 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।
रविवार को राज्य के उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में तेज हवा, गरज और वज्रपात का खतरा बताया गया है। 31 मार्च को उत्तर-पश्चिमी हिस्से को छोड़कर लगभग पूरे राज्य में आंधी-तूफान और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।
2 अप्रैल को दक्षिणी और आसपास के मध्य इलाकों में भी तेज हवा और बिजली गिरने की संभावना है। हालांकि 30 मार्च, 1 अप्रैल और 4 अप्रैल को कोई खास चेतावनी नहीं दी गयी है। राजधानी रांची में भी मौसम का असर दिखेगा।
30 मार्च को आसमान में बादल रहेंगे लेकिन मौसम सूखा रहेगा। 31 मार्च को गरज के साथ बारिश हो सकती है। 1 अप्रैल को मौसम साफ रहेगा, जबकि 2 अप्रैल को फिर से बादल और गरज-तूफान बन सकते हैं। तापमान में भी बदलाव देखने को मिलेगा।
टीम एबीएन, रांची। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग,रांची द्वारा आयोजित तीन दिवसीय (20-22 मार्च) अखिल भारतीय स्प्रिंग आर्ट कैंप-2026 का आज दिनांक 22 मार्च को प्रकृति 2026 थीम के साथ गरिमामय एवं भव्य समापन हुआ। विशेष बात यह रही कि इस महत्वपूर्ण आयोजन का अंतिम दिवस, अर्थात विश्व जल दिवस के अवसर पर संपन्न हुआ, जिसने पूरे आयोजन को प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ जल संवर्द्धन और जल संरक्षण के गहरे संदेश से जोड़ दिया।
यह तीन दिवसीय कला महोत्सव केवल चित्रों का आयोजन नहीं था, बल्कि यह प्रकृति के प्रति प्रेम, संवेदना, जिम्मेदारी और जनजागरण का एक सशक्त अभियान बनकर सामने आया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित एवं प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपने कैनवास पर वनों की हरियाली, नदियों की लय, पक्षियों का सौंदर्य, वन्यजीवों की गरिमा, पृथ्वी की पीड़ा और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को अत्यंत जीवंत, भावपूर्ण और प्रभावशाली रूप में उकेरा।
समापन समारोह में कला और प्रकृति के इस अद्भुत संगम को और अधिक आकर्षक बनाया सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे सरायकेला के कलाकारों ने छऊ नृत्य पेश किया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। लोक-संस्कृति, संगीत और मंचीय प्रस्तुतियों ने यह संदेश सशक्त रूप से दिया कि भारतीय संस्कृति और प्रकृति का संबंध केवल परंपरा का विषय नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का आधार है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह में एक ऐसा भावनात्मक और सौंदर्यपूर्ण वातावरण निर्मित किया, जहाँ रंग, राग और प्रकृति एक साथ संवाद करते दिखाई दिए। समारोह में उपस्थित गणमान्य अतिथियों, वरिष्ठ अधिकारियों, कलाकारों, विद्यार्थियों एवं कला प्रेमियों की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को अत्यंत गरिमामय बना दिया।
इस अवसर पर शिविर में भाग लेने वाले सभी कलाकारों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कलाकारों का सम्मान करते हुए यह रेखांकित किया गया कि उनकी कृतियाँ केवल सृजन नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने वाली सशक्त दृश्य भाषा हैं।
इसके बाद पीसीसीएफ हॉफ, झारखण्ड श्री संजीव कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब कलाकार का हृदय प्रकृति के लिए धड़कता है, तब कैनवास पर केवल चित्र नहीं उभरते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए चेतना, करुणा और संरक्षण का संदेश आकार लेता है।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्व जल दिवस के अवसर पर इस कला शिविर का समापन अत्यंत अर्थपूर्ण है, क्योंकि जल ही जीवन का मूल है, वन ही संतुलन का आधार हैं और प्रकृति ही मानव सभ्यता की सबसे बड़ी संरक्षक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि जल बचेगा, तो कल बचेगा, यदि वन बचेंगे, तो जीवन बचेगा और यदि प्रकृति बचेगी, तो मानवता बचेगी।
टीम एबीएन, रांची। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम आॅल इंडिया स्प्रिंग आर्ट कैंप 2026 में आज दिनांक 21 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय वन दिवस मनाया गया। आज कला शिविर में प्रकृति, वन एवं वन्यजीव संरक्षण के संदेश को ओरमांझी कस्तूरबा गांधी विद्यालय से आयी छात्राओं के बीच साझा किया गया।
कार्यक्रम का आगाज प्रकृति को ध्यान में रखते हुए संगीत से किया गया। इसके पश्चात श्रीकांत वर्मा, डीएफओ, पब्लिसिटी एंड एक्सटेंशन डिवीजन, रांची द्वारा सभागार मेंं मौजूद सभी अधिकारीगण और छात्राओं का स्वागत किया और उन्होंने कहा कि आज का यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रेरणादायक और संदेशपूर्ण है, क्योंकि यह दिन केवल पेड़ों और जंगलों का उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह दिन हमें प्रकृति, पर्यावरण और जीवन के बीच के गहरे संबंध को समझने और उसे संरक्षित करने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।
वन केवल लकड़ी, फल या औषधि का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वन हमारे जीवन का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि प्रकृति हमारी सबसे बड़ी शिक्षक है। पेड़ हमें निस्वार्थ देना सिखाते हैं, नदियां हमें निरंतर बहना सिखाती हैं, और वन हमें सह-अस्तित्व का संदेश देते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि हरियाली बचायेंगे, वन्यजीवों को सुरक्षित रखेंगे, और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुंदर एवं संतुलित पर्यावरण का निर्माण करेंगे। इसके बाद पर्यावरण के थीम पर छोटे बच्चों के बीच फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें विजेताओं को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में आदिवासी दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए और प्रकृति 2026 को ध्यान में रखते हुए अधिकारयों ने पौधरोपण किया।
टीम एबीएन, रांची। पर्यावरणीय स्थिरता एवं उन्नत सामग्रियों के क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Understanding Complex Systems (Applications to Environmental Sustainability and Advanced Materials) विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन 18-19 मार्च 2026 को किया गया।
इस कार्यशाला का समन्वयन भौतिकी विभाग की डॉ निशी श्रीवास्तव द्वारा किया गया, जबकि सह-समन्वयक के रूप में फार्मास्यूटिकल एंड टेक्नोलॉजी विभाग की डॉ. नीलिमा शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस का उद्घाटन संकाय मामलों के अधिष्ठाता डॉ. अशोक शेरोन द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने जटिल प्रणालियों के अध्ययन को वर्तमान वैज्ञानिक चुनौतियों के समाधान हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
कार्यशाला का प्रथम व्याख्यान वियना, आस्ट्रिया स्थित TU Wien (Vienna University of Technology) की प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. इल्ले सी. गेबहेशूबर द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने Learning from Nature: Functional Structures in Bio-based and Biodegradable Materials विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रकृति से प्रेरित संरचनाओं के माध्यम से टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों के विकास पर प्रकाश डाला। उनके व्याख्यान ने प्रतिभागियों को नयी दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला में विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा उन्नत सामग्रियों और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। यह आयोजन वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।
टीम एबीएन, रांची। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि तेज हवा के साथ बारिश होगी। इस दौरान वज्रपात होने की भी आशंका व्यक्त की गयी है। मौसम विभाग ने लोगों से अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।
मौसम विभाग ने रांची के अलावा गुमला, खूंटी, जमशेदपुर, सरायकेला, बोकारो व धनबाद में भी तेज हवा, गरज और बारिश का अनुमान दिया है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए बिजली विभाग ने एहतियातन बिजली आपूर्ति बंद कर दी है। ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आएगा। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आज रविवार को राज्य के कई हिस्सों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में गरज के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। वहीं 9 और 10 मार्च को राज्य के उत्तर-पूर्वी और आसपास के मध्य भागों में वज्रपात और तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक 8 मार्च को राज्य के पूर्वी और निकटवर्ती मध्य भागों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इस दौरान रांची, खूंटी, बोकारो, धनबाद, जामताड़ा, दुमका और देवघर समेत आसपास के जिलों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग ने 9 और 10 मार्च को उत्तर-पूर्वी झारखंड में मौसम के अधिक सक्रिय रहने की संभावना जताई है। इन दिनों देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में कहीं-कहीं गरज के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा और वज्रपात की आशंका है। इसके साथ हल्की बारिश भी हो सकती है।
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