टीम एबीएन, रांची। झारखंड में सोमवार 27 जुलाई को मौसम पूरी तरह मानसूनी बना रहेगा। मौसम केंद्र, रांची के पूवार्नुमान के मुताबिक राज्य के अधिकांश हिस्सों में दिनभर बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
दक्षिणी और मध्य झारखंड के कुछ इलाकों में बारिश का असर अधिक रहने की संभावना है। सूबे के रांची, खूंटी, गुमला और लोहरदगा जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही कई जिलों में मेघ गर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। 28 जुलाई को भी राज्य में मानसून का प्रभाव बना रहेगा। पूरे झारखंड में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। लेकिन पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, गुमला, खूंटी और लोहरदगा जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है।
इन इलाकों में जलभराव, छोटी नदियों और नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने गरज-चमक और तेज हवाओं को लेकर भी सतर्क रहने की अपील की है। 29 जुलाई को भी झारखंड के अधिकांश जिलों में बादल छाए रहने और रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
इस दौरान राज्य के दक्षिणी और मध्य हिस्सों में मौसम का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है। गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाओं की आशंका बनी रहेगी। हालांकि भारी बारिश का दायरा पहले दो दिनों की तुलना में कुछ सीमित रह सकता है। लेकिन संवेदनशील इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होगी।
टीम एबीएन, रांची। पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रांची नगर निगम पहली बार सखुआ महोत्सव-2026 आयोजित करेगा।
अगस्त माह से शुरू होने वाला यह विशेष अभियान अगले कुछ महीनों तक चलेगा। इसके तहत नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों, स्कूल-कॉलेजों, पार्कों, सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, धार्मिक स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर सखुआ के पौधे लगाए जाएंगे।
महोत्सव की तैयारियों को लेकर सोमवार को रांची नगर निगम सभागार में महापौर रोशनी खलखो की अध्यक्षता में सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में वृक्षारोपण स्थलों के चयन, पौधों की सुरक्षा, जनजागरूकता अभियान और नागरिकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
महापौर रोशनी खलखो ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन को भी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सखुआ झारखंड की संस्कृति, परंपरा, प्रकृति और आदिवासी समाज की आस्था का प्रतीक है। इसलिए इसके संरक्षण को जनभागीदारी के माध्यम से जनआंदोलन बनाया जाएगा।
महापौर ने बताया कि सखुआ महोत्सव का शुभारंभ अगस्त में चुटिया स्थित ऐतिहासिक इक्कीसो महादेव मंदिर परिसर से किया जाएगा। इसके बाद शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक पौधे की सुरक्षा के लिए गेबियन लगाए जाएंगे, ताकि पशुओं और अन्य बाहरी नुकसान से पौधों की रक्षा की जा सके। नगर निगम नियमित रूप से पौधों की निगरानी और देखभाल भी करेगा।
टीम एबीएन, रांची। पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रांची नगर निगम पहली बार सखुआ महोत्सव-2026 आयोजित करेगा।
अगस्त माह से शुरू होने वाला यह विशेष अभियान अगले कुछ महीनों तक चलेगा। इसके तहत नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों, स्कूल-कॉलेजों, पार्कों, सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, धार्मिक स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर सखुआ के पौधे लगाए जाएंगे।
महोत्सव की तैयारियों को लेकर सोमवार को रांची नगर निगम सभागार में महापौर रोशनी खलखो की अध्यक्षता में सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में वृक्षारोपण स्थलों के चयन, पौधों की सुरक्षा, जनजागरूकता अभियान और नागरिकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
महापौर रोशनी खलखो ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन को भी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सखुआ झारखंड की संस्कृति, परंपरा, प्रकृति और आदिवासी समाज की आस्था का प्रतीक है। इसलिए इसके संरक्षण को जनभागीदारी के माध्यम से जनआंदोलन बनाया जाएगा।
महापौर ने बताया कि सखुआ महोत्सव का शुभारंभ अगस्त में चुटिया स्थित ऐतिहासिक इक्कीसो महादेव मंदिर परिसर से किया जाएगा। इसके बाद शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक पौधे की सुरक्षा के लिए गेबियन लगाए जाएंगे, ताकि पशुओं और अन्य बाहरी नुकसान से पौधों की रक्षा की जा सके। नगर निगम नियमित रूप से पौधों की निगरानी और देखभाल भी करेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस मनाया जाता है।
इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रकृति, जैव विविधता, वन, जल, भूमि, वन्यजीव तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। यह दिन हमें यह संदेश देता है कि यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानव जीवन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।
वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण, अंधाधुंध वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, जल संकट और जैव विविधता का लगातार हो रहा ह्रास पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। ऐसे समय में विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण कराने वाला वैश्विक अभियान है।
प्रकृति मानव जीवन का आधार है। शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, उपजाऊ भूमि, औषधीय पौधे, वन्यजीव और खनिज संसाधन हमें प्रकृति से ही प्राप्त होते हैं। यदि इन प्राकृतिक संपदाओं का संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग नहीं किया गया तो भविष्य में मानव जीवन अनेक संकटों का सामना करेगा। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और उनका सतत उपयोग समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्रोत्साहित करना, जैव विविधता की रक्षा करना, जल एवं ऊर्जा की बचत के लिए प्रेरित करना तथा लोगों को अधिक से अधिक वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना है। साथ ही यह दिवस पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने,प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल स्रोतों को स्वच्छ रखने तथा वन्यजीवों के संरक्षण का संदेश भी देता है।
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस की विशेषता यह है कि इस अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं एवं सरकारी संगठनों द्वारा वृक्षारोपण अभियान, पर्यावरण रैली, संगोष्ठी, स्वच्छता अभियान, तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण संरक्षण को अपनाए। जल की बचत, वृक्षारोपण, ऊर्जा का संयमित उपयोग, प्लास्टिक से परहेज तथा प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग जैसे छोटे-छोटे प्रयास भी प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि प्रकृति केवल हमारी आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी अमूल्य धरोहर है। यदि हम आज प्रकृति की रक्षा करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण प्रदान कर सकेंगे। यही इस दिवस का मूल संदेश और मानवता के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में इस वर्ष मानसून के कमजोर पड़ जाने का असर राज्य की खेती बाड़ी पर पड़ा है। राज्य के कुल 24 जिलों में से महज 07 जिले ही ऐसे हैं, जहां का वर्षापात सामान्य हुआ है। जबकि 17 जिलों में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है, उसमें भी गढ़वा, चतरा, पाकुड़, देवघर और कोडरमा ऐसे पांच जिले हैं, जहां मानसून की बारिश अब तक सामान्य से आधी भी नहीं हुई है।
राज्य के कई जिलों में कम हुई मानसूनी बारिश का असर खेतीबाड़ी पर पड़ा है। राज्य में इस वर्ष धान की खेती के लिए निर्धारित लक्ष्य 18 लाख 01 हजार 400 में से सिर्फ 04 लाख 11 हजार 972 हेक्टेयर में ही धनरोपनी हो सकी है, जो लक्ष्य का 22.87% है। रांची में धनरोपनी सिर्फ 28.57% हुई है।
कृषि पदाधिकारी, रांची रामशंकर प्रसाद सिंह ने बताया कि हाल ही में हुई अच्छी बारिश से धान समेत दूसरी खरीफ फसलों का आच्छादन की स्थिति में सुधार हुआ है और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि धान की बुआई की रफ़्तार को देखते हुए रांची में पूरी रिपोर्ट 50% तक पहुंच जाएगी।
राज्य कृषि निदेशालय की 24 जुलाई, 2026 तक की जिलेवार कवरेज रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर जिलों में धान की रोपाई तेजी से हो रही है। इसके साथ ही, मक्का, रागी, अरहर, उड़द, मूंग और तिलहल में मूंगफली, तिल फसलों की बुवाई भी लगातार बढ़ रही है।
टीम एबीएन, रांची। रविवार को श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा रांची ने सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान वर्ष- 2026 के पहले चरण का आयोजन ग्राम- हिसरी, पंचायत- बाजपुर, जिला- रांची में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अनिल कश्यप के प्लॉट पर मोहगनी, सीसम, सागवान, गमहार, जामुन, अमरूद, कटहल इत्यादि के लगभग 50 पौधों के रोपण के साथ किया गया।
उसके पश्चात ग्राम- हिसरी के ग्रामीण बधुओं के बीच एक लघु गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें श्री सर्वेश्वरी समूह का संक्षिप्त परिचय देते हुए समूह द्वारा किये जा रहे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में सभी को अवगत कराया गया।
साथ ही वृक्षों के कमी से हो रहे दुष्परिणामों के बारे में अवगत करते हुए वृक्षों के बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। गोष्ठी के बाद ग्रामीण बंधुओं के बीच लगभग 200 पौधों का वित्रण किया गया।
समस्त कार्यक्रम के कुशल आयोजन में अनिल कश्यप, अंकित कश्यप, विक्रम तिवारी, कृष्णा गोप, श्रीकांत तिवारी, विनय तिवारी, सजाद अंसारी एवं पिंटू प्रजापती का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।
श्री सर्वेश्वरी समूह- शाखा रांची की ओर से राधेश्याम सिंह, विभूति शंकर सहाय, हेमंत नाथ शाहदेव, अभय सहाय, नवल किशोर सिंह, अरुण सिंह, आशुतोष कुमार के साथ लगभग 20 सदस्यगण शामिल हुए।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन ने वर्षा ऋतु के अवसर पर राज्यभर के सभी जिला एवं शाखा इकाइयों से व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने का आह्वान किया है। सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल एवं प्रांतीय महामंत्री विनोद कुमार जैन ने सभी शाखा एवं जिला अध्यक्षों, पदाधिकारियों, सदस्यों तथा समाजबंधुओं से अपने-अपने क्षेत्र में कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु प्रकृति का अनुपम उपहार है और पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय भी। इस मौसम में लगाये गये पौधों के जीवित रहने की संभावना अधिक होती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य भी सफल होता है। उन्होंने कहा कि आज बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, तापमान में वृद्धि तथा घटते हरित क्षेत्र मानव जीवन के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं।
ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक का यह नैतिक दायित्व है कि वह पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि एक वृक्ष केवल पौधा नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। वृक्ष हमें शुद्ध वायु, शीतल छाया, वर्षा, जैव विविधता का संरक्षण तथा संतुलित पर्यावरण प्रदान करते हैं। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसे वृक्षारोपण के माध्यम से प्रभावी ढंग से निभाया जा सकता है।
सम्मेलन के सभी पदाधिकारियों ने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने घर, प्रतिष्ठान, विद्यालय, मंदिर, सार्वजनिक स्थल, पार्क अथवा आसपास के खाली स्थानों पर कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगायें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि लगाये गये पौधों की नियमित देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा की व्यवस्था हो, क्योंकि पौधा लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उसका संरक्षण उससे भी अधिक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल वृक्ष लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरण का भी माध्यम बनेगा।
यदि प्रत्येक सदस्य एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो पूरे राज्य में हजारों नए वृक्ष तैयार होंगे, जो भविष्य में हरित एवं स्वच्छ झारखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों एवं सामाजिक संगठनों से भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा करना हम सभी का साझा दायित्व है। सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने सभी सदस्यों से आह्वान किया कि वे एक पौधा-एक जीवन, हर सदस्य-एक संकल्प के संदेश को जन-जन तक पहुंचायें तथा अधिक से अधिक लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित करें। वृक्ष लगायें, पर्यावरण बचायें और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित झारखंड का निर्माण करें। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के अधिकांश हिस्सों में रविवार को मानसूनी गतिविधियां और तेज हो गयीं। मुंबई में भारी बारिश के कारण विमान परिचालन बाधित हुआ जबकि केरल, ओडिशा और झारखंड में मौसम को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी व्यापक बारिश हुई है।
इस मानसून में मुंबई पर सबसे तगड़ी मार पड़ी है जहां रातभर हुई भारी बारिश के कारण छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर करीब एक घंटे तक विमानों का परिचालन रोकना पड़ा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को मुंबई के लिए रेड अलर्ट बरकरार रखा है और आगे भी लगातार बारिश तथा कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा होने का अनुमान जताया है।
विमान परिचालन बाधित होने से कई उड़ानें प्रभावित हुईं, जिससे यात्रियों को विमानों के प्रस्थान में औसतन 75 मिनट और आगमन में कम से कम 28 मिनट की देरी का सामना करना पड़ा। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने एक बयान में कहा, सुबह करीब 10.17 बजे खराब मौसम, जिसमें 42 नॉट तक की तेज हवाएं और भारी बारिश के कारण कम दृश्यता शामिल थी, की वजह से रनवे का संचालन प्रभावित हुआ।
हालांकि, मौसम में सुधार के बाद एक घंटे के भीतर हवाई पट्टी पर परिचालन सामान्य कर दिया आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुंबई के कई इलाकों में पिछले 24 घंटों में 200 मिमी से अधिक और कुछ जगहों पर 300 मिमी तक बारिश दर्ज की गई है। ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र गहरे अवदाब में बदल गया है, जिसके बाद राज्य प्रशासन ने सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक, यह प्रणाली अगले एक दिन में चांदबली और दीघा के बीच उत्तरी ओडिशा तट को पार कर सकती है, जिससे ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश होने की संभावना है। केरल के भी अधिकांश हिस्सों में रविवार को व्यापक वर्षा हुई जिसके बाद कई क्षेत्रों में आॅरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने छह जुलाई को कन्नूर और कासरगोड तथा सात जुलाई को कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड के लिए आॅरेंज अलर्ट जारी किया है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भूस्खलन, मिट्टी धंसने और अचानक आने वाली बाढ़ के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रशासन के निदेर्शानुसार सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। दिल्ली के कई हिस्सों में रविवार को हुई मध्यम बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत दी।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दोपहर 2.30 बजे तक छतरपुर में सबसे अधिक 49 मिमी बारिश दर्ज की गयी। इसके बाद गुरुग्राम में 35 मिमी, महरौली में 18 मिमी, ग्रेटर नोएडा में 17 मिमी, नजफगढ़ में 8 मिमी और जनकपुरी में 7 मिमी बारिश हुई।
मौसम विभाग ने दिन के समय आमतौर पर बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने का अनुमान जताया है जबकि अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। उधर झारखंड में, आईएमडी ने छह से नौ जुलाई तक सभी 24 जिलों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।
मौसम केंद्र ने कहा, राज्य में बादल छाये रहने और अधिकांश हिस्सों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ सुदूर स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। इस दौरान अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। सोमवार को गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और रांची में भारी बारिश होने का अनुमान है।
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