टीम एबीएन, रांची। भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम व बहन सुभद्रा बुधवार को रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी से अपने धाम यानी जगन्नाथपुर मुख्य मंदिर लौट आये। नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में विश्राम के बाद दसवें दिन भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ रथ पर आरूढ़ होकर मुख्य मंदिर लौट आये। रथ मेले में लोगों ने जमकर खरीदारी की।
महिलाओं ने घरेलू सामान खरीदा और बच्चों संग झूला का आनंद लिया। बुधवार की दोपहर चार बजे सैकड़ों भक्त भगवान जगन्नाथ समेत सभी विग्रहों को रथ पर आरूढ़ कर रस्सी से खींच मुख्य मंदिर तक लाये। वहीं, इस दौरान प्रशासनिक खेमा भी विधि व्यवस्था की मजबूती में तैनात नजर आया। जब भगवान जगन्नाथ अपने रथ पर सवार होकर मुख्य मंदिर की ओर रवाना हो रहे थे तो उस वक्त सिर्फ उनके नाम का जयकारा ही लगाया जा रहा था।
हजारों भक्तों की भीड़ भगवान जगन्नाथ की मुख्य मंदिर वापसी के दौरान उनकी एक झलक पाने को पूरी तरह से बेताब दिखे। वहीं, दूसरी तरफ भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी थामें श्रद्धालु उनके अप्रतिम श्रृंगार को देखते थक नहीं रहे थे। रथ मेला में मंगलवार को लोगों ने जमकर खरीदारी की। महिलाओं ने घरेलू सामान खरीदा और बच्चों संग झूला का आनंद लिया। वहीं रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण लोगों का आनंद थोड़ा फीका रहा।
एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुञ्ज तत्वावधान में एकादशी व्रत उपवास, जप-अनुष्ठान राष्ट्रीय आनलाइन प्रतिनिधित्व में गायत्री साधक समूह आनलाइन जप- अनुष्ठान में 24 घंटे का अखंड जप-अनुष्ठान आज 17 जुलाई सुबह 4 बजे से कल 18 जुलाई गुरुवार को सुबह 4 बजे तक अपना समय निर्धारित कर शुरू किये।
मौके पर आनलाइन संचालन प्रतिनिधिमंडल ने सभी से अनुरोध किया कि इस दैवीय योजना में घर बैठे सहयोग करें व राष्ट्रीय नवनिर्माण के लिए,सभी के लिए स्वस्थ-सुखद जीवन,सबको सद्बुद्धि प्राप्ति व उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना भाव के साथ सभी साधक अपने बहुमूल्य समय का एक अंश अवश्य देने का संकल्प ले जप-अनुष्ठान में योगदान करें।
इस पावन अवसर पर शक्तिपीठ सेक्टर टू परिसर में स्थानीय पीठों एवं मंडल शाखाओं और गृहे गृहे आवासीय तपोवन में साधकों ने भागीदारी की है। प्रात:काल से शक्तिपीठ सेक्टर टू में साधकों ने जप-अनुष्ठान के साथ यज्ञीय अनुष्ठान किये। इसमें साधक सदस्यों ने मंगलाचरण से रक्षा विधान में गुरु-ईश व सर्वदेव आवाह्न नमन वंदन सहित षोडशोपचार, स्वस्तिवाचन पाठ कर यज्ञीय विधान किया।
यज्ञीय अनुष्ठान विधान में यज्ञाचार्य ने क्षमा प्रार्थना, शुभकामना व साष्टांग नमन-वंदन का विधान व भावार्थ सोदाहरण बताया। कई साधकों ने सर्वे भवन्तु सुखिन: व वसुधैव कुटुंबकम् कल्याणार्थ भाव से गायत्री महामंत्र, महामृत्युंजय मंत्र के साथ अन्य सहायक मंत्रों के भी जप किये।
गुरुवार महिला मंडल प्रतिनिधित्व में रांची शक्तिपीठ में समूह जप, सत्संग व स्वाध्याय पाठ होगा।आगामी चंद्रायण व्रत-उपवास संबंधित आध्यात्मिक कायाकल्प जप-अनुष्ठान की भी आनलाइन समूह संदेश में चर्चा हुई। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। गायत्री परिवार संगोष्ठी कार्यक्रम प्रारंभ पूर्व गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू में एक प्रसिद्ध व विशिष्ट वृक्ष कल्पतरू (वैज्ञानिक नाम एडेनसोनिया डिजिटाटा) का पौधरोपण हुआ। यह पौधरोपण रवि शंकर प्रसाद मुख्य तकनीकी अधिकारी, वन उत्पादकता संस्थान लालगुटवा रांची के सौजन्य से गायत्री शक्तिपीठ के अतिथि, विशिष्ट व प्रभारियों के सानिध्य में पौधरोपण कार्य विधिवत मांगलिक मंत्रोच्चारण, पवित्रीकरण, पृथ्वी पूजन, चंदन तिलक, रक्षासूत्र बांधकर, जगह का शुद्धिकरण और अभिसिंचन सहित स्वस्तिवाचन, पूजा-पाठ करके किया गया। इसके बाद संगोष्ठी कार्यक्रम प्रज्ञागीत गायन हारमोनियम व ढफली वादन साथ हुआ।
मां इतनी कृपा कर दो, इतनी दया कर दो, तुम से मांग रहे हम वरदान, देश धर्म-संस्कृति की खातिर हों जाएं, हम हंसते हंसते बलिदान, स्वयं भगवान हमारे गुरु ,परम सौभाग्य हमारा है, स्वयं नारायण नर तन धरे हमारे बीच पधारा है, समयदान व अंशदान मानव को श्रेष्ठ बनाता है, जो इसे अपनाता है, वह धन्य धन्य हो जाता है जैसे प्रज्ञागीतों, संगीतमय व डफली वादन के मधुर स्वर व करतल ध्वनि से गुंजायमान हुआ संगोष्ठी वातावरण।
अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शांतिकुंज के पूर्वीजोन प्रकोष्ठ से झारखंड प्रभारी श्रद्धेय त्रिलोचन साहू की उपजोन स्तरीय संगोष्ठी दिनांक 14/07/2024 (रविवार) को पूर्वाह्न 11 से गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा रांची में आयोजित हुई। जिसमें गायत्री शक्तिपीठ एवं परिवार के उपजोन के 5 जिलों से जिला स्तर और प्रखंड स्तरीय समन्वय समिति के आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, युवा, दीया मंडल के सक्रिय, नैष्ठिक, गतिशील, उद्यमी प्रतिनिधि सदस्यगण, ट्रस्टीगण, प्रज्ञा/ महिला/ मंडल, युवा मंडलों के सभी सदस्यगण की उपस्थिति बहुत सुंदर सराहनीय रही। संगोष्ठी में उपजोन के पांचों जिला से करीबन डेढ़ सौ से अधिक सदस्यगण उपस्थित होकर सफल सुफल बनाये।
इससे संबंधित शांतिकुञ्ज मुख्यालय की परम आदरणीया जीजी के दिशा-निर्देश, पत्र एवं कार्यक्रम की सिड्यूल चर्चा हुई। बताया गया कि मिशन के कार्यक्रम स्वरूप को संगठनात्मक गतिविधियों के साथ और अधिक गति देने की आवश्यकता है। इसमें केंद्रीय प्रतिनिधि त्रिलोचन साहू, झारखंड प्रभारी राम नरेश प्रसाद, उपजोन प्रभारी श्रद्धेय उदय शंकर पंडित के पावन सानिध्य में एक विशिष्ट संगोष्ठी हुई। संगठनात्मक स्वरूप को मजबूत करना है इस विषय पर रांची जिला के सभी प्रखंडों और प्रखंडों के अंतर्गत पंचायतों व गांवों की चर्चा हुई।
शांतिकुञ्ज के तत्वावधान व मार्गदर्शन में कार्यक्रम को जमीन पर उतारना है, गतिशील व सार्थक बनाना है। रामनरेश प्रसाद ने बताया कि यह असामान्य व संकटग्रस्त समय है। संक्रांति काल है। यह परिवार संगठन अन्य से भिन्न है। यह अवतारी चेतना से संचालित है। यह साधारण समय नहीं है। दादा गुरुदेव व गुरुदेव के मध्य हुई लक्ष्य निर्धारित रचनात्मक लक्ष्यों का जिक्र हुआ। वायुमंडल का शुद्धिकरण, वातावरण का परिष्करण, नवयुग का सृजन (निर्माण), महाविनाश से बचाव जैसे कार्य, देवमानव का उत्पादन आदि अनेक गुह्य विषयों पर प्रकाश डालकर बताया। देश विदेश के शासनाध्यक्ष, धनाध्यक्ष, वैज्ञानिक गतिविधियों की स्थिति व विपरीत भयानक स्वरूप पर प्रकाश डाला।
त्रिलोचन साहू ने शांतिकुञ्ज मुख्यालय आदरणीय दीदी का पावन मार्गदर्शक संदेश सुनाये। गुरुमाता भगवती का जन्म शताब्दी सह दिव्य व प्रचण्ड अखंड ज्योति दीप का होने जा रहे 100 वर्ष के शताब्दी वर्ष पर मंगल कलश ज्योति यात्रा पर चर्चा व गुरुदेव श्री प्रज्ञावतार का नवयुग सृजन अभियान संदेश गावं गांव-गांव, घर घर जन-जन तक पहुंचाये जाने का कारण, साधन, प्रचार प्रसार मार्गदर्शन विस्तार से भगवान व भक्त के कल्याणप्रद संबन्धित अनेकानेक सटीक उदाहरण दृष्टांत से प्रस्तुत कर किया।
आगे मार्गदर्शन में बताया कि हर एक इकाई में स्थापित शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ, चरणपीठ को मजबूत संगठनात्मक, रचनात्मक सुपरिणाम देना है। इसके बाबत समयदान व अंशदान के योगदान पर चर्चाएं हुईं। अंत में आगामी झारखंड के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के बारे में दीपक दयाल प्रसाद ने संवाद किया और शांति पाठ, जयघोष तथा उपरांत भोजन प्रसाद ग्रहण कर गोष्ठी कार्यक्रम समापन हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के रांची जिला समन्वयक जय नारायण प्रसाद, उपजोन समन्वयक दयाशंकर पंडित और रांची के व्यवस्थापक जटाशंकर झा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना एक फिर राज्य में शुरू हो चुकी है। शुक्रवार को इसाई धर्मावलंबियों का एक जत्था गोवा के लिए रवाना हो गया। हटिया स्टेशन से सैकड़ों इसाई तीर्थ यात्री गोवा के लिए रवाना हुए। यह कार्यक्रम 8 दिनों का है।
जिसमें उनके साथ एक कॉर्डिनेटर भी होगा जो उन्हें गाइड करेगा और उनका ध्यान रखेगा। पर्यटन विभाग ने लोगों को रहने और खाने की सुविधा दे रहा है। अगर आप भी इस योजना के बारे में जानना चाहते हैं तो हम इस आर्टिकल में आपको पूरी जानकारी देंगे।
यह योजना बीपीएल कार्डधारी गरीब वरिष्ठ नागरिकों के लिए है जो पैसे की कमी के कारण किसी भी तीर्थ स्थल पर नहीं जा पाते हैं। यह योजना हिंदू, मुस्लिम और इसाईयों के लिए है। इस योजना के अंतर्गत हिंदू धर्म धर्मावलंबियों के लिए 20 जुलाई से लेकर 27 जुलाई 2024 तक द्वारिका सोमनाथ की यात्रा करायी जायेगी।
इस यात्रा के लिए आवेदन करने की अंतिम आखिरी तारीख 15 जुलाई 2024 है। वहीं मुस्लिम धर्मवलंबी इस योजना के तहत अजमेर फतेहपुर सिकरी का दर्शन कर पायेंगे। जिसका कार्यक्रम 2 से 8 अगस्त निर्धारित किया गया है। इस यात्रा के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 25 जुलाई 2024 है।
इस योजना का लाभ लेने के लिए यात्रियों को अपना आवेदन प्रखंड/ जिला/ अनुमंडल या नगर निगम कार्यालय में दे सकते हैं। बस शर्त ये है कि आप स्थानीय निवासी होने के साथ-साथ बीपीएल कार्डधारी हो और आपकी उम्र 60 वर्ष से अधिक हो। साथ ही यह भी जरूरी है कि आपने इससे पहले इस योजना का लाभ नहीं लिया हो।
अगर आप किसी को अपने साथ सहायता के लिए लेकर जाना चाहते हैं तो परिवार के किसी एक सदस्य को ले जा सकते हैं। यदि कोई समूह में यात्रा करना चाहता है तो पूरे समूह के तरफ से एक ही आवेदन मान्य होगा। इस समूह में लोगों की संख्या 25 से अधिक नहीं होनी चाहिए। जो कि सरकार के इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं उन्हें आवेदन करते समय दो फोटो चिपकाना अनिवार्य है।
इसके अलावा आपको अपने साथ स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र भी साथ रखना होगा। आप इसके लिए प्रूफ के रूप में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, बिजली बिल, मतदाता पहचान पत्र या राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी एक प्रमाण पत्र को दे सकते हैं। इसके अलावा आपको फिट फॉर ट्रैवल सर्टिफिकेट भी देना होगा।
तीर्थयात्रियों का चयन जिला स्तरीय प्रबंधन समिति करेगी। पहले आओ और पहले पाओ के तहत लोगों को चयनित किया जायेगा। अगर यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है तो एक अतिरिक्त प्रक्रिया भी लागू होगी। समर्पित आवेदनों को पर्यटन विकास निगम को दिया जायेगा।
एबीएन सोशल डेस्क। विचार बीज है तो कर्म पौधा है, सत्प्रवृति के विचार में सत्कर्म के बीज बोने के लिए संस्कार पूर्णतः समर्थ होते हैं। विषय पर आध्यात्मिक चर्चा हुई। गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा सत्संग में महिला मंडल सदस्यों द्वारा गायत्री महामंत्र का 108 मिनट सामूहिक जप किया गया।
जप उपरान्त उनने प्रज्ञागीत, गायन-वादन व भजन-कीर्तन किया। तत्पश्चात पूज्यवर वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीरामशर्मा आचार्यजी द्वारा लिखित युग निर्माण सत्संकल्प व विचार क्रांति अभियान के अंतर्गत गायत्री महामंत्र जप महिमा, यज्ञीय अनुष्ठान महिमा और संस्कार प्रकरण पर स्वाध्याय पाठ व संवाद हुआ
बाल संस्कारशाला महिला संचालिका प्रतिनिधि एवं रांची जिला महिला समन्वयक सदस्य बहनों ने बताया कि भारतीय संस्कृति व धर्म के अनुसार संस्कार 16 हैं, जिन्हें षोडश संस्कार कहे गये हैं।बताया कि प्राचीन काल में माता के गर्भ में आने के दिन से लेकर मृत्यु तक की अवधि में समय समय पर प्रत्येक भारतीय अध्यात्म-दर्शन के प्रेमी व धर्मावलम्बी को 16 बार संस्कारित करके एक प्रकार का आध्यात्मिक रसायन की तरह से आध्यात्मिक उपचार किया जाता था।
बीज बोने के बाद ही पौधा उगने की आशा बंधती है। विचार बीज है तो कर्म पौधा है। सत्प्रवृत्ति के रूप में सत्कर्म के बीज बोने के लिए संस्कार पूर्णतः समर्थ होते हैं। संस्कारों की व्यवस्था यज्ञीय वातावरण में, यज्ञीय आयोजनों में,प्रज्ञा संस्थानों में या तीर्थस्थलों में ज्यादा संस्कारित व लाभान्वित होते हैं। परम पूज्य गुरुदेव ने इस युग के लिए 12 संस्कार व संस्कारोत्सव पर विशेष ध्यान आकर्षित किया है इसकी स्वाध्याय- चर्चा अगले सत्संग में होगी।
सत्संग शुभारंभ गायत्री महामंत्र सस्वर पाठ, गुरु-ईश ध्यान,नमन-वंदन और समापन शांतिपाठ व सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन व उज्जवल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन पाठ व हमारा युग निर्माण सत्संकल्प व विचार क्रांति अभियान पूर्ण हो सहित अनेक जयघोष हुए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार रांची के वरिष्ठ-साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क। अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है। इसी बीच अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को अब नंदी के भी दर्शन होंगे। जानकारी के अनुसार प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने भगवान शिव के वाहन नंदी की मूर्ति बनायी है। उक्त मूर्ति को अमरनाथ गुफा के बाहर सीढ़ियों के पास स्थापित किया गया है।
नंदी जी की मूर्ति को एक शैड में स्थापित किया गया है जहां श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन करने से पहले उनके दर्शन कर रहे हैं। बता दें कि नंदी की मूर्ति बनाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज हैं जिन्होंने अयोध्या में स्थापित रामलला की मूर्ति बनायी थी। उन्हें नंदी जी की मूर्ति बनाने के लिए अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने न्योता दिया था।
इस बात को लेकर मूर्तिकार अरुण योगीराज ने एक्स पर एक ट्वीट भी किया है जिसमें उन्होंने श्राइन बोर्ड प्रशासन का आभार भी व्यक्त किया है। बता दें कि नंदी जी की मूर्ति इतनी अद्भुत है कि उनसे नजरें हटा पाना बेहद मुश्किल है।
एबीएन सोशल डेस्क। आज गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में गायत्री महिला मंडल प्रतिनिधित्व में अखंड ज्योति पत्रिका का स्वाध्याय पाठ हुआ। परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य के जीवन के दृश्य-अदृश्य, लौकिक- अलौकिक, दार्शनिक, तपस्वी, सिद्ध साधक, शुभचिंतक, लेखक, सुधारक, युगऋषि, युगद्रष्टा, युगस्रष्टा कई रूप में उनके उल्लेखनीय व्यक्तित्व पर स्वाध्याय किया गया।
उसमें गायत्री की 24-24 लाख की 24 महापुरश्चरण हो, सूक्ष्मीकरण हो, हिमालय का एकांतवास हो, चंद्रायण व्रत-उपवास की शृंखलाबद्ध तपस्या हो, उनके पास बैठने मात्र से ऊर्जा का एक ऐसा दिव्य संचार मन-मस्तिष्क में होना, उस पर वर्णन कर पाना संभव नहीं है।
गुरुवर श्री पूज्यवर लिखते हैं कि संकट की वर्तमान परिस्थितियों से तो मनुष्य स्वयं ही निपट लेता है, पर असामान्य संकटग्रस्त विपन्नताओं के स्वर उत्पन्न होने पर स्रष्टा को स्वयं ही सक्रिय होना पड़ता है। युग निर्माण योजना अपने समय की अवतार चेतना के क्रियाकलापों का मूर्तरूप ही कह सकते हैं, जिसका उद्देश्य आध्यात्मिक समाज की कायाकल्प व स्थापना करना है। उनके अनुसार पूरे मानव समाज को बदलना है।
इसी मानवीय प्रकृति के रूपान्तरण पथ को मानवीय उत्कर्ष पथ कहा जा सकता है।अत: माननीय उत्कर्ष से संबंधित समस्त विधाओं पर अब गंभीर अध्ययन व शोधकार्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। सत्संग का शुभारंभ गायत्री महामंत्र सस्वर पाठ, भजन-कीर्तन और समापन मंगलमय वंदना एवं शान्ति-पाठ से हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क। स्त्री सत्संग सभा द्वारा आज गुरुद्वारा श्री गुरुनानक सत्संग सभा, कृष्णा नगर कॉलोनी में सिख पंथ के छठे नानक श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी का पावन प्रकाश पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस उपलक्ष में विशेष दीवान सजाया गया।
दीवान की शुरूआत दोपहर 3 बजे श्री सुखमनी साहिब जी के सामूहिक पाठ से हुई, जिसमें स्त्री सत्संग सभा की सैंकड़ों सदस्यों तथा पुरुष श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्री सुखमनी साहिब जी का पाठ जाप किया। तत्पश्चात स्त्री सत्संग सभा की शीतल मुंजाल द्वारा हरगोबिंद नवा निरोआ कर किरपा प्रभ हाथ दे राखेआ... एवं वड्डी आरजा हरगोबिंद की सुख मंगल कल्याण विचारिआ... तथा पंज पीर पंज प्याले छठम पीर बैठा गुर भारी... शबद गायन किया गया।
श्री अनंद साहिब जी के पाठ के पश्चात गुरु घर के सेवक मनीष मिढ़ा ने अरदास की एवं गुरु का हुकुमनामा पढ़ा। उन्होंने वाहेगुरु की महिमा का बखान करते हुए उपस्थित साध संगत से कहा कि हर गुरुपर्व में लंगर के प्रशादा (रोटी) बनाने की जो सेवा महिला श्रद्धालुओं द्वारा अनवरत की जा रही है, वो अतुलनीय है और गुरु की सेवा का फल निश्चित प्राप्त होता है।
सत्संग सभा की गीता कटारिया ने सत्संग सभा की सभी सदस्यों का गुरु पर्व को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया और इसी तरह रोजाना गुरु घर में हाजिरी भर गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त करने को कहा। कढ़ाह प्रशाद वितरण के साथ दीवान की समाप्ति शाम 6.30 बजे हुई। दीवान समाप्ति के उपरांत मिस्से प्रशादे (मिस्सी की रोटी) और प्याज अचार, रायता का लंगर वरताया गया।
आज के विशेष दीवान में सत्संग सभा के सचिव अर्जुन देव मिढ़ा, सुरेश मिढ़ा, अनूप गिरधर, लक्ष्मण सरदाना, मनीष मिढ़ा, विनोद सुखीजा, हरीश मिढ़ा, रमेश पपनेजा, गीता कटारिया, मनोहरी काठपाल, बबली दुआ, शीतल मुंजाल, मनजीत कौर, बिमला मिढ़ा, रमेश गिरधर, रेशमा गिरधर, नीता मिढ़ा, ममता थरेजा, नीतू किंगर, इंदु पपनेजा, रूपा मिढ़ा, दुर्गी देवी मिढ़ा, खुशबू मिढ़ा, आशा मिढ़ा, एकता मिढ़ा, गूंज काठपाल, रश्मि मिढ़ा, उषा झंडई, किरण अरोड़ा, बंसी मल्होत्रा, श्वेता मिढ़ा, अमर मुंजाल, रजनी तेहरी, गुड़िया मिढ़ा, अंजू काठपाल, रजनी कौर, उषा पपनेजा, बबीता पपनेजा, नीती थरेजा, हर्षा मिढ़ा, सुषमा गिरधर, रेखा मुंजाल, मीना गिरधर, शीतल तेहरी, रानी तलेजा, प्रेमी काठपाल, कांता मिढ़ा, रेशमा गिरधर, सिम्मी पपनेजा, अंजू पपनेजा, श्वेता मुंजाल, गरिमा अरोड़ा, उर्वशी अरोड़ा समेत अन्य शामिल थे।
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