टीम एबीएन, रांची। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ, डोरंडा के तत्वावधान में चातुर्मास परम पूज्य श्री खतरगच्छाधिपति मणिप्रभसागर सूरीश्वर जी की परम पूज्य गुरूवर्या श्री लयस्मिता श्री जी, प.पू. अमीवषार्जी श्री जी, प.पू. भव्योंदया श्री जी, प.पू. गुणोंदया श्री जी, प.पू. जिनवर्षा श्री जी आदि ठाना 5 का भव्य चातुर्मास चल रहा है। नित्य जप तप ज्ञान ध्यान चल रहा है।
चातुर्मासिक व्याख्यान के साथ सामायिक विषयों पर श्री गुरूवर्या का विवेचन चल रहा है। पूज्या जी ने कहा है कि सामायिक 48 मिनट की होती है 48 मिनट अर्थात 2 घड़ी की इसीलिए की मनुष्य की स्थिरता उतनी ही होती है। उसी तरह पूज्या गुरूवर्या ने चौखट की चर्चा करते हुए कहा कि आज से 20-25 वर्ष पहले हर घर में चौखट होती थी। चौखट यानी जीवन मर्यादित होता था, आज जीवन मे मर्यादा खत्म हो गयी है। हर व्यक्ति स्वतंत्र जीवन जीना चाहता है। अभी स्वछंदता आ गयी है।
आज श्रीमती केशर देवी पींचा के ग्यारह उपवास व श्री विनय नाहटा व श्रीमती सोनल नाहटा के आठ उपवास की तपस्या हेतु बहुमान किया गया साथ ही भजन संध्या का आयोजन किया गया। उससे पहले से डोरंडा में नमिनाथ भगवान के जन्म कल्याणक उपलक्ष्य में सुबह शुक्रस्तव द्वारा भगवान का अभिषेक हुआ, बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने बताया कि मौके पर संपत लाल रामपुरिया, श्रीलाल सेठिया, सुरेश बोथरा, रिखभ चंद, पूनम चन्द, धर्म चंद भंसाली,विमल दस्सानी, घेवर चन्द नाहटा, लाल चन्द बोथरा, प्रकाश चन्द नाहटा, मदन बैंगानी, अनिल कोठरी, बालबीर बोथरा, मनोज नाहटा, संजय कोठारी, राकेश कोठारी, राजेश पींचा, राकेश बछावत, राजू रामपुरिया आदि उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। रविवार को श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा रांची (औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड पश्चिम, रांची) ने सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान : वर्ष - 2024 का दूसरे चरण का आयोजन ग्राम- आनंदी, प्रखंड- ओरमांझी, जिला- रांची में किया गया। सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान वर्ष 2024 के दूसरे चरण में आम, अमरूद, मोहगनी, सागवान, अर्जुन, सीसम, मौलसरी, दालचीनी इत्यादि के 200 पौधों का रोपण एवं वितरण किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय ग्राम देवी के प्राचीन मंदिर में विधिवत आरती-पूजन के साथ किया गया तथा मंदिर परिसर में पीपल, बरगद एवं हरसिंगार के पौधों का रोपण किया गया। तत्पस्च्यात स्वास्थ्य उपकेंद्र, आनंदी, स्थानीय कब्रिस्तान एवं शैलेंद्र कुमार मिश्रा के निजी परिसर में लगभग 100 पौधों का रोपण किया गया।
कार्यक्रम के अंत मे आनंदी ग्राम के ग्रामीण बंधुओं के बीच एक लघु गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें श्री सर्वेश्वरी समूह का संक्षिप्त परिचय देते हुए समूह द्वारा किये जा रहे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में भी ग्रामीण बंधुओं को अवगत कराया गया। साथ ही वृक्षों के कमी से हो रहे दुष्परिणामों के बारे में अवगत करते हुए वृक्षों के बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। गोष्ठी के बाद ग्रामीण बंधुओं के बीच पौधों का वितरण किया गया।
ज्ञात हो कि श्री सर्वेश्वरी समूह एक विश्व स्तरीय सामाजिक एवं धार्मिक संस्था है जो अनेक जनकल्याण के कार्यक्रम लगातार करती रहती है। सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान उन्हीं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में से एक है जिसे पूरे वर्षा ऋतु में चलाया जायेगा। श्री सर्वेश्वरी समूह का नाम गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड एवं लिम्का बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से लोगों को वृक्ष लगाने एवं वृक्षों को बचाने के प्रति भी जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में रामटहल चौधरी- भूतपूर्व सांसद, बनवारी लाल साहू- उप मुखिया आनंदी, शशि मिश्रा- सदस्य पंचायत समिति आनंदी, शैलेन्द्र कुमार मिश्रा - महासचिव प्रगति परिषद, दुर्गा चरण साहू, अमर नाथ चौधरी, मो. कुदुस अंसारी, जय गोबिंद साहू, मोती लाल महतो, गायत्री देवी, अघनु मुंडा, नीरज मिश्रा शामिल हुए एवं सराहनीय सहयोग प्रदान किया।
श्री सर्वेश्वरी समूह- शाखा रांची के ओर से आशुतोष कुमार, नवल किशोर सिंह, सुनील सिंह, राधा मोहन मिश्रा, गंगाधर नाथ शाहदेव, प्रताप आदित्य नाथ शाहदेव, कीर्तिमान नाथ शाहदेव, सौरभ चौधरी, द्वेद नाथ शाहदेव, उदित सिंह, राजेन्द्र साहू, पृथ्वी नाथ शाहदेव, रविन्द्र साहू, रौशन गोप, राहुल गोप, ऋषभ सिंह, नागदमनी नाथ शाहदेव, सोमेश्वर नाथ शाहदेव, यदुनाथ शाहदेव के साथ शाखा के लगभग 30 सदस्यगण शामिल हुए।
टीम एबीएन, रांची। रांची गायत्री परिवार युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में महिला मंडल प्रतिनिधित्व में आज गुरुवार को स्वाध्याय पाठ-संवाद में शिक्षा व विद्या का विषय रहा। भौतिकी शिक्षा, साक्षरता, भौतिक ज्ञान विज्ञान एवं आध्यात्मिक ज्ञान विज्ञान और विद्या पर स्वाध्याय पाठ-संवाद हुआ। इसके अंतर्गत शिक्षा, साक्षरता, भौतिक ज्ञान, कला कौशल, ज्ञान-विज्ञान, विद्या, अध्यात्म, स्वाध्याय, सरकारी नौकरी उद्देश्य से शिक्षा, ज्ञान प्राप्त करना, सामाजिक सेवा, लोक सेवा भाव रखना आदि पर गुरुवर श्रीआचार्य के युग साहित्य पर स्वाध्याय,विचार-विमर्श और विश्लेषण हुए।
इसमें बुद्धि विवेक में परिष्कृत अभिरूचि रखना, स्नेह-सौहार्द, स्वच्छता, सज्जनता, शालीनता में सौष्ठव, मधुरता, विनम्रता सुव्यवस्था दर्शन, आकर्षण व झलक में विद्या से युक्त होना चाहिए और दिखायी पड़नी चाहिए। विचार संवाद में विद्या ददाति विनयम पर चर्चा हुई। कहा गया कि विद्या एक बहुत सुंदर सराहनीय व महत्वपूर्ण संपदा है।
पात्रता है, यह मानव को मानसिक सामाजिक, आध्यात्मिक स्तर पर सद्कर्म, सद्ज्ञान, सद्विचार-विमर्श में समृद्ध करता है। इसके साथ साथ भजन-कीर्तन युग-गायन भी किया गया। आज इस बीच बारिश भी तेज हो रही थी। फिर भी सत्संग में महिला मंडल सदस्यगणों ने उल्लास व उत्साहपूर्वक अपनी भागीदारी अच्छी बनाये रखा। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन रांची शाखा ने दिनांक 25 जुलाई को स्वर्गीय बजरंग लाल बूबना की पुण्य स्मृति एवं स्व मुरारी लाल अग्रवाल की पुण्य स्मृति में बीना बूबना एवं सुनीता सरावगी के सौजन्य से सूरज सिंह मेमोरियल कॉलेज के भवन परिसर में स्थायी प्याऊ का निर्माण किया गया जिसका विधिवत उद्घाटन पूर्व प्रधानाध्यापिका डा वंदना राय ने किया।
मौके पर वंदना राय ने कहा कि सावन के महीने में प्याऊ लगाकर महिला मंच की बहनों ने बहुत ही पुण्य का कार्य किया है तथा स्थायी प्याऊ लगने से सभी को शुद्ध ठंडा जल मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है, जल है तो कल है।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में नये प्रधानाध्यापक डॉक्टर बीपी वर्मा, प्रोफेसर इंचार्ज राजेश कुजूर, प्रोफेसर मुकेश उरांव (ज्योग्राफी डिपार्टमेंट) डॉ सुभाष साहू, डीआर समर सिंह, डॉ संजय सारंगी, कई कॉलेज के अध्यापक सहित निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरा बथवाल, निवर्तमान राष्ट्रीय सचिव रूपा अग्रवाल, गीता डालमिया, अलका सरावगी, शाखा अध्यक्ष मधु सराफ, सचिव उर्मिला पाड़िया, नैना मोर, अनसूया नेवटिया, प्रीति पोद्दार, छाया अग्रवाल, अर्चना अग्रवाल, मीना अग्रवाल, प्रीति बंका, कुसुम पटवारी, मंजू तुलसियान, शांति जैन, मीरा अग्रवाल, उमा शाह, निर्मला केडिया, सीमा बूबना, ममता बूबना, दीपक बूबना, प्रकाश बूबना आदि का सहयोग रहा।
रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने मारवाड़ी महिला सम्मेलन रांची शाखा द्वारा किये जा रहे जनसेवा कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। उक्त जानकारी मारवाड़ी महिला सम्मेलन रांची शाखा की मीडिया प्रभारी रीना सुरेखा ने दी।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक आगामी 27-28 जुलाई को राजस्थान के जोधपुर जिले में होगी। बैठक में देश के संपूर्ण प्रांतों के लगभग ढाई सौ कार्यकर्ता शामिल होंगे। बैठक में विगत 6 माह की कार्यक्रम यथा श्री रामोत्सव, श्री हनुमान जन्मोत्सव सहित अन्य वार्षिक कार्यक्रमों तथा विहिप, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी व मातृशक्ति प्रशिक्षण वर्ग, सेवा कार्य सहित विभिन्न आयाम की समीक्षा के साथ आगामी 6 माह के कार्यक्रमों की योजना बनायी जायेगी। बैठक में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर चिंतन एवं आवश्यकतानुसार विषयों पर प्रस्ताव भी लाया जायेगा।
बैठक में सम्मिलित होने के लिए झारखंड प्रांत के प्रतिनिधि के रूप में क्षेत्र सहमंत्री डॉ वीरेंद्र साहू (झारखंड - बिहार) व प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र आज रांची से प्रस्थान हुए। बैठक में क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद कुमार, क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल एवं प्रांत संगठनमंत्री देवी सिंह भी शामिल होंगे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार प्रसार, प्रांत सहप्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क। सभी धर्मों में बाल विवाह की स्वीकार्यता और सामाजिक धारणाओं में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की दिशा में एक कदम उठाते हुए, नौ धर्मों के धार्मिक नेताओं ने बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का संकल्प लिया। ये धार्मिक नेता बाल विवाह मुक्त भारत के गठबंधन सहयोगी इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की ओर से बाल विवाह के खिलाफ अंतर धार्मिक संवाद में इकट्ठा हुए थे। कार्यक्रम में उपस्थित धार्मिक नेताओं ने एक स्वर से कहा कि कोई भी धर्म बाल विवाह का समर्थन नहीं करता और इसलिए किसी भी धर्मगुरु या पुरोहित को बाल विवाह संपन्न नहीं कराना चाहिए।
इस बात पर सहमति जताते हुए कि सभी धर्मस्थलों को अपने परिसर में बाल विवाह के खिलाफ संदेश देने वाले पोस्टर -बैनर लगाने चाहिए, इन धर्मगुरुओं ने अपने समुदाय के बीच बाल विवाह की कुप्रथा के खात्मे के लिए काम करने पर सहमति जतायी। हिंदू, इस्लाम, सिख, ईसाई, बौद्ध, बहाई, जैन, यहूदी और पारसी धर्म के इन धर्मगुरुओं ने इस साझा लक्ष्य की प्राप्ति में एकता के महत्व पर जोर दिया। संवाद का आयोजन बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) के गठबंधन सहयोगी इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन ने किया। बाल विवाह मुक्त भारत के 200 से अधिक सहयोगी गैरसरकारी संगठन 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने के लक्ष्य के साथ देश भर में काम कर रहे हैं।
इस बात पर जोर देते हुए कि सभी बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और विकास तक पहुंच होनी चाहिए, इन धर्मगुरुओं ने यह भी कहा कि जो भी बाल विवाह संपन्न करा रहा है या इसे प्रोत्साहित करता है, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। यह संवाद इस तथ्य की पृष्ठभूमि में था कि भारत जैसे अत्यधिक धार्मिक प्रकृति के देश में सामाजिक मानदंडों और प्रथाओं को आकार देने और उन्हें कायम रखने में धार्मिक नेताओं की खासी बड़ी भूमिका है। वे अक्सर सामाजिक और नैतिक दोनों स्तरों पर सामुदायिक गतिविधियों का नेतृत्व करते हैं। बाल विवाह के कानूनन अपराध होने के बावजूद विभिन्न समुदाय अक्सर इस कुप्रथा को जारी रखने के लिए धर्म की आड़ लेते हैं जो बाल विवाह को समाप्त करने के रास्ते में एक बड़ी चुनौती है।
इस संवाद के महत्व पर बोलते हुए, चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया के संस्थापक और व्हेन चिल्ड्रन हैव चिल्ड्रेन: टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरिज के लेखक भुवन ऋभु ने कहा- बाल विवाह जैसे सामाजिक रूप से स्वीकृत अपराध को तभी खत्म किया जा सकता है जब सभी समुदाय इसके खिलाफ लड़ाई में साथ आयें। आस्था, धर्म और कानून सभ्यता की आधारशिला हैं और बाल विवाह को जड़मूल से खत्म करने के लिए इन्हें मिलकर काम करने की जरूरत है। ईश्वर की नजर में सभी बच्चे समान हैं तो कानून और न्याय की नजर में भी समान होने चाहिए। धार्मिक रीति-रिवाजों की आड़ में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ अस्वीकार्य है।
बाल विवाह के खात्मे के लिए बाल विवाह मुक्त भारत देश का सबसे जनजागरूकता अभियान चला रहा है। इसके तहत गांवों में लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाने और कानूनी हस्तक्षेपों के अलावा अपने मतावलंबियों के बीच असर रखने वाले धर्मगुरुओं को भी इससे जोड़ा जा रहा है। पूरे देश में मंदिरों, मस्जिदों और गिरिजाघरों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और सभी धर्मों के पुरोहितों जैसे पुजारियों, मौलवियों को शपथ दिलायी जा रही है कि वे बाल विवाह नहीं करायेंगे।
इस्लाम में बाल विवाह के बारे में प्रचलित धारणाओं का खंडन करते हुए जमात-ए-इस्लामी हिंद के डॉ एम इकबाल सिद्दीकी ने संवाद में कहा कि इस्लाम में विवाह की किसी उम्र का प्रावधान नहीं है लेकिन इस्लाम निश्चित रूप से कहता है कि दूल्हे और दुल्हन दोनों को विवाह पर सहमति देनी होगी और यह एक खास उम्र और परिपक्वता के बाद ही आ सकती है। इसके अलावा इस्लाम कहता है कि ज्ञान हर मुस्लिम के लिए जरूरी है लेकिन दुर्भाग्य से कुछ मजहबी नेताओं ने ज्ञान को दीनी तालीम तक सीमित कर दिया है। यह पूरी तरह से गुमराह करने वाली बात है क्योंकि एक दुआ में कहा गया है- मुझे वो ज्ञान दो जिससे मुझे लाभ हो। मजहबी नेताओं को इन शिक्षाओं पर तार्किक अमल के बारे में सोचना चाहिए और उन्हें यह समझना होगा कि मानवता को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कानून शरिया के खिलाफ है। उनकी बात से इत्तेफाक जताते हुए वर्ल्ड पीस आर्गेनाइजेशन के महासचिव मौलाना मोहम्मद एजाजुर रहमान शाहीन कासमी ने कहा कि इस्लाम बाल विवाह की इजाजत नहीं देता है।
बाल विवाह के खात्मे के लक्ष्य के प्रति समर्थन जताते हुए भारतीय सर्व धर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक गोस्वामी सुशील जी महाराज ने कहा- बाल विवाह की समस्या सभी धर्मों और समुदायों में है और हम सभी धार्मिक नेता साथ मिलकर इस समस्या के समाधान की कोशिश में हैं।
यह अनूठा और ऐतिहासिक संवाद बाल विवाह मुक्त भारत के सपने को पूरा करने के लिए विभिन्न धर्मों के प्रभावशाली धर्मगुरुओं के बीच एकजुटता का साक्षी बना।
देश में बाल विवाहों की भारी संख्या पर क्षोभ जताते हुए सीबीसी के उप महासचिव रेवरेंड डॉ मैथ्यू कोइकाल ने दशकों पहले बाल विवाह की एक घटना को याद करते हुए कहा कि यह देखना दुखद था कि एक 14 वर्ष की बच्ची के उसके माता पिता ने जबरन हाथ पीले कर दिए। वह अभी बच्ची थी और इसके बावजूद उसका बचपन उससे छीन लिया गया। उन्होंने आगे कहा कि ईसाइयों में शादी विवाह चर्च के कानूनों से संचालित होते हैं।
आचार्य सुनील मुनि मिशन (एएसएमसी) के संस्थापक और जैन धर्मगुरु आचार्य विवेक मुनि जी महाराज ने संवाद में कहा, हर धर्म कहता है कि ज्ञान मनुष्यों को डर, अंधेरे और अज्ञानता से मुक्त करता है। बाल विवाह को अगर रोकना है तो हमें उन जगहों को चिह्नित करना होगा जहां बाल विवाह की प्रथा अब भी जारी है और उन जिलों में जागरूकता का प्रसार करना होगा। हम बाल विवाह मुक्त भारत के इस अभियान में साथ हैं। संवाद में मौजूद अन्य धर्मगुरुओं ने इन विचारों से सहमति जताते हुए अपने समुदायों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता के प्रसार के साथ ही हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने का भी संकल्प लिया।
संवाद में मौलाना मोहम्मद एजाजुर रहमान शाहीन कासमी, महासचिव वर्ल्ड पीस आर्गेनाइजेशन; सुश्री कार्मेल एम त्रिपाठी, निदेशक, बहाई केंद्र बहापुर; स्वामी चंद्र देवजी महाराज, संस्थापक अध्यक्ष, वैश्विक संत समाज कल्याण फाउंडेशन; रब्बाई ईजेकील मालेक्कर यहूदी प्रमुख, यहूदी समुदाय; डॉ. इमाम उमर अहमद, इलियासी मस्जिद; डॉ. एम. इकबाल सिद्दीकी, जमात-ए-इस्लामी हिंद; सुश्री जसमिंदर कस्तूरिया, पूर्व राजदूत उत्तर कोरिया; रेवरेंड डॉ. रॉबी कन्ननचिरा सीएमआई, निदेशक, चावारा सांस्कृतिक केंद्र; रेव. डॉ. मैथ्यू कोइकल, उप महासचिव, सीबीसीआई; मरजबान नरीमन जैवाला, बेहदीनपाशबान, पारसी समुदाय दिल्ली; भारत के बहाईयों की राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा की सार्वजनिक मामलों की निदेशक सुश्री नीलाक्षी राजखोवा; राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य श्रीमती रिनचेन लामो, रेवरेंड डॉ. रॉबी कन्ननचिरा सीएमआई, निदेशक, चावारा सांस्कृतिक केंद्र; फादर सेबस्टियन कोलिथानम, कॉर्नर स्टोन फाउंडेशन; संजय जैन, महासचिव, अखिल भारतीय धर्म परिषद; गोस्वामी सुशील जी महाराज, द्वार मंदिर, ग्रेटर नोएडा; आचार्य विवेक मुनि जी महाराज, संस्थापक, आचार्य सुनील मुनि मिशन (एएसएमसी); और तिब्बती सर्वोच्च न्याय आयोग के बौद्ध आचार्य येशी फुनस्टॉन्ग भी उपस्थित थे।
एबीएन सोशल डेस्क। गुरुपूर्णिमा आध्यात्मिक माहात्म्य बोध पर प्रकाश डालते हुए यज्ञाचार्य लक्ष्मण मंडल ने बताया कि गुरु-पूर्णिमा एक महान अनुशासन पर्व भी है। गुरु-पर्व शिष्य के लिए अपनी श्रद्धा, निष्ठा, तपस्चर्या व साधना द्वारा सशक्त सृजन का प्रयास जारी रखना चाहिए,यही अवसर लेकर पर्व आता है।
गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में मंडल जी ने आगे गुरु शिष्य की संबन्धों व शिक्षा दीक्षा, अनुशासनपूर्ण जीवनचर्या पर प्रकाश डाल कहा कि यह पर्व गुरु-शिष्य दोनों वर्गों के लिए अनुशासन का सन्देश लेकर आता है, इसलिए यह अनुशासन पर्व कहा जाता है। अनुशासन मानने वाला ही शासन करता है, यह तथ्य समझे बिना राष्ट्रीय या आत्मिक प्रगति सम्भव नहीं है।
गुरु पूर्णिमा पर व्यास पूजन का भी क्रम है। जो स्वयं चरित्रवान् हैं और वाणी एवं लेखनी से प्रेरणा संचार करने की कला भी जानते हैं, ऐसे आदर्शनिष्ठ विद्वान् को व्यास की संज्ञा दी जाती है। इसलिए गुरु-पूजा को व्यास पूजा भी कहते हैं। महर्षि व्यास अपने आप में महान् परम्परा के प्रतीक हैं। आदर्श के लिए समर्पित प्रतिभा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। बताया कि सामान्यरूप से भी सिखाने वाले गुरुजनों का अनुशासन स्वीकार किये बिना कुशलता में निखार नहीं आ सकता।
जहाँ यह आवश्यक है कि गुरुजनों को अपना क्रम ऐसा बनाकर रखना चाहिए कि शिष्य वर्ग में उनके प्रति सहज श्रद्धा-सम्मान का भाव जागे, वहाँ यह भी आवश्यक है कि सीखने वाले, शिष्य भाव रखें और गुरुजनों का सम्मान और अनुशासन बनाये रखें।आगे सोदाहरण प्रस्तुत कर बताया कि द्रोणाचार्य कौरवों के सामान्य वेतनभोगी शिक्षक से अधिक कुछ नहीं बन सके ,किन्तु पाण्डवों के लिए अजेय विद्या के स्रोत बने और एकलव्य के लिए एक अद्भुत चमत्कार बन गये।
रामकृष्ण परमहंस भी जन सामान्य को एक बाबा जी से अधिक लाभ न दे सके, किन्तु जिन ने अपनी श्रद्धापूर्ण भक्ति से गुरु रूप में विकसित कर लिया,उसके लिए अवतार तुल्य सिद्ध हुए। अतः गुरुपर्व शिष्य के लिए अपनी श्रद्धा, निष्ठा, तपस्चर्या, साधना द्वारा सशक्त सृजन का प्रयास जारी रखना चाहिए, यही अवसर लेकर आता है।
इस वर्ष में साधक-शिष्यों की संख्या
वृद्धि तथा जन्मदिवस संस्कार, विवाह दिवस संस्कारोत्सव सहित अनेकानेक संस्कार शिक्षण ग्रहण में उत्तरोत्तर वृद्धि को भांपते हुए गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शक्तिपीठ सेक्टर टू में परिवार जनों, साधक-शिष्यों समूहों की उपस्थिति में सुविधानुसार यज्ञ आहुति प्रदान करने वास्ते 24 कुण्डीय महायज्ञ आयोजन की व्यवस्था की गई।इस अवसर पर कई संस्कार प्रकरण संपन्न किये गये।
शान्तिकुञ्ज की ओर से तथा गायत्री परिवार संगठन समन्वय समिति प्रभारियों की ओर से जेएनपी समन्वयक ने गुरु पूर्णिमा पर हार्दिक
बधाई संदेश सुनाया।साथ-साथ जेएनपी ने बुद्ध-पूर्णिमा से गुरु-पूर्णिमा तक एक हजार नये गृहे गृहे हुए यज्ञीय अनुष्ठानों ,जागिए जगाइए, जुड़िए जोड़िए, नयी नीति- रीति आधार पर,कुछ प्रखंड स्तर में हुए नवगठन समिति का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर समयदान करने का आवाहन किये।
गुरु-शिष्य के पावन-पुण्य पर्व अवसर पर कई संस्कार भी हुए, जिनमें दो दर्जन गायत्री महामंत्र का दीक्षा संस्कार व यज्ञोपवीत संस्कार, विद्यारम्भ, नामकरण हुए। साथ ही सैकड़ों अस्वस्थ व बीमार जनों के स्वास्थ्य लाभ व परिजनों के सफल सुफल जीवन के लिए गायत्री महामंत्र का जप-अनुष्ठान तथा मंत्र लेखन और उच्चस्तरीय चंद्रायण व्रत-उपवास व मासपारायण अनुष्ठान का संकल्प कराया गया और गायत्री के सहायक 24 मंत्रों की मंगलमय दिव्य आहुतियां सर्वार्थ मंगलमय वातावरण के लिए प्रदान की गयी।
भोजन प्रसाद में अमृताशन की व्यवस्था थी। इसके अतिरिक्त गायत्री शक्तिपीठ अलकापुरी, बस स्टैंड स्थित धूर्वा प्रज्ञापीठ, चेतना केन्द्र टाटीसिलवे और अन्य इकाइयों में यह कार्यक्रम सोल्लास संपन्न हुए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार रांची के जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। प्रत्येक पूर्णिमा के पावन अवसर पर विश्व व भारत स्तरीय आनलाइन गायत्री परिवार जप-अनुष्ठान व व्रत उपवास करने वाले समूह संचालन प्रतिनिधिमंडल सदस्य के सानिध्य में महापावन पुण्यदायी आषाढ़ी गुरु-पूर्णिमा 21 जुलाई रविवार को मना रहे हैं।
इस दिन अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शान्तिकुञ्ज तत्वावधान व मार्गदर्शन में स्थानीय सेक्टर टू शक्तिपीठ सहित अन्य पीठों, इकाइयों और मडलों में गुरुपूर्णिमा के पावन पुण्यदायी अवसर के पूर्व संध्या पर 24 घंटे और 12 घंटे का सुविधानुसार समयदान निर्धारित कर अखंड जप-अनुष्ठान किया जा रहा है।
आगे के लिए सूचना संदेश दिया है कि इस महापर्व दिवस पर इच्छुक, सक्रिय, श्रद्धालु साधक गण विश्वस्तरीय चाद्रायण महाव्रत एवं मासपारायण साधना अनुष्ठान हेतु संकल्पित होने के लिए साधकों को युगतीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार से श्रद्धेय द्वय ने दोष परिमार्जन, संरक्षण एवं आशीर्वाद पत्रक भिजवाया है। अतः इसे सभी साधक गण हृदय और मस्तिष्क से लगा कर श्रद्धा पूर्वक गुरुसत्ताश्री को नमन वंदन कर ग्रहण करेंगे।
साथ ही ध्यान आकर्षित कर बताया कि सभी साधक-शिष्य गण इस महान अनुष्ठान हेतु संकल्पित होने जा रहे साधकों का संकल्प 21 जुलाई गुरु पूर्णिमा को ही प्रातःकाल ऑनलाइन के माध्यम से शांतिकुंज से (LIVE) संपन्न करवाया जायेगा। अतः इच्छुक व उत्सुक सभी अपनी तैयारी और पूर्ण व्यवस्था के साथ लाइव प्रसारण से जुड़कर लाभान्वित होने के लिए उपस्थित रहेंगे और मार्गदर्शन के अनुसार व्रत व साधना-अनुष्ठान के नियम संयम का पालन करेंगे।
गायत्री शक्तिपीठ टीम सदस्यों द्वारा यहां साधना कक्ष परिसर में गायत्री महामंत्र का जप-अनुष्ठान सुबह 5 बजे से शाम बजे तक का जप किया। कल सुबह 8 बजे गुरुपूर्णिमा को इसकी विधिवत यज्ञीय विधान से महापूर्णाहुति होगी।
आज रविवार को एसटीएफ जगुआर टेंडरग्राम कैम्पस में 2 हजार पौधों का रोपण भी गुरुपूर्णिमा के पावन दिवस के पूर्व मध्यान्ह 11 से अपरान्ह 3 बजे रांची शक्तिपीठ के जिला समन्वय एवं युवा प्रकोष्ठ डिवाइन इन्डिया यूथ एसोसिएशन (दीया) सक्रिय व श्रद्धावान, निष्ठा सदस्यों के माध्यम और वन विभाग तथा एसटीएफ फोर्स दीम व अधिकारी गणों के सानिध्य में वृक्षारोपण कार्यक्रम हुआ। इसमें पौधों को विधि-विधान से पूजा-पाठ व मंगलमय स्वस्तिवाचन स्वर और वृक्षारोपण संबंधित नारों, जयघोषों से वातावरण को गुंजायमान सहित सानन्द किया।
वृक्षों के संग नवजीवन का उमंग, मां की ममता पेड़ का दान, दोनों करते जनकल्याण, बंजर भूमि करे पुकार- पेड़ लगाकर करो श्रृंगार, जड़ी बूटियों का संयोग, हमें करते स्वस्थ निरोग जैसे अनेक मंगलमय वातावरण से सबको उत्साहित प्रमुदित किया। सभी ने सामूहिक योगदान प्रदान कर परस्पर सबको हृदय से सानन्द धन्यवाद दिया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।
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