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Published / 2024-10-07 20:33:45
संवेदनशील होने का तप और साधना के हैं नवरात्र के नौ दिन

चेतना और श्रेष्ठ समृद्ध भावना मिलकर मनुष्य को संवेदनशील बनाता है : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि चेतना तथा भावना का संयुक्त स्वरूप को संवेदना कहा जाता है। जीवंत एवं जागरूक ग्रहण करने को क्षमता और अनुभूति का मिश्रण यदि व्यक्तित्व में समावेश हो तो वह व्यक्ति चैतन्य के श्रेणी में आता है। 

वैसे तो प्राणी मात्र को सृष्टिकर्ता ने भावनाएं प्रदान की है जैसे कोई भी मादा जानवर अपने शिशु के लिए भावुक होती है और नर जानवर सुरक्षा देने का कार्य करता है। इसका यह कार्य ईश्वर प्रदत भावनाओं के वशीभूत ही होता है। परंतु मनुष्य में आकृत भावनाएं ईश्वर ने प्रदत की है। नकारात्मक भाव और सकारात्मक भाव से हम या तो सकारात्मक कार्य करते हैं या फिर नकारात्मक कार्य करते हैं। 

जब भावनाएं सकारात्मक हो और उदारता की श्रेष्ठ भावना अंतस में कार्य हो तो व्यक्ति भावना से समृद्ध रहता है। चेतना और श्रेष्ठ समृद्ध भावना मिलकर मनुष्य को संवेदनशील बनाता है। संवेदना का अर्थ इस प्रकार समझा जा सकता है कि किसी के दुख में दुखी हो जाना तथा किसी के सुख में खुश हो जाना दूसरे के अनुभूति को ध्यान रखने वाला व्यक्ति संवेदनशील व्यक्ति कहलाता है।

जब हम आध्यात्मिक दृष्टि से अपने-अपने आराध्य से प्रार्थना याचना और आराधना करते हैं तो वास्तव में उनकी संवेदना का आकांक्षी होते हैं; क्योंकि पराशक्ति अति संवेदनशील होती है और अपने उपासक की अनुभूति को अनुभव करती है। 

उसकी संवेदना वरदान और आशीर्वाद के रूप में प्राप्त होता है जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता और उसके स्थायित्व का अनुपात हमारी संवेदना के समानुपात है। नवरात्रि के 9 दोनों में हम संवेदनशील होने का तप और साधना करते हैं। और इसका प्रतिफल हमें आशीर्वाद के रूप मे प्राप्त होता है।

Published / 2024-10-06 20:01:21
तमाम विवादों को मिटाकर हिंदू समाज को एकजुट होना होगा : मोहन भागवत

भारत एक हिंदू राष्ट्र, हमें अपनी सुरक्षा के लिए एकजुट होना होगा, आएसएस चीफ मोहन भागवत का बयान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत को हिंदू राष्ट्र बताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भाषाई, जातीय और क्षेत्रीय विवादों को मिटाकर हिंदू समाज को अपनी सुरक्षा के लिए एकजुट होना होगा। भागवत ने शनिवार शाम को राजस्थान के बारां में स्वयंसेवक एकत्रीकरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, हम यहां प्राचीन काल से रह रहे हैं, भले ही हिंदू शब्द बाद में आया। हिंदू सभी को गले लगाते हैं। वे निरंतर संवाद के माध्यम से समरसता के साथ रहते हैं। 

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को भाषा, जाति और क्षेत्रीय विवादों को दूर कर अपनी सुरक्षा के लिए एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा, आचरण में अनुशासन, राज्य के प्रति कर्तव्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण आवश्यक गुण हैं। एक समाज केवल व्यक्तियों और उनके परिवारों से नहीं बनता है, बल्कि उन व्यापक चिंताओं पर विचार करने से बनता है जिनके माध्यम से कोई आध्यात्मिक संतुष्टि प्राप्त कर सकता है। 

आरएसएस प्रमुख ने कहा, आरएसएस की कार्यप्रणाली यात्रिक नहीं बल्कि विचारों पर आधारित है। यह एक अद्वितीय संगठन है जिसके मूल्य समूह के नेताओं से लेकर स्वयंसेवकों, उनके परिवारों और बड़े पैमाने पर समाज से मिलते हैं। स्वयंसेवकों से समुदायों के भीतर व्यापक संपर्क बनाए रखने का अनुरोध करते हुए भागवत ने कहा कि समाज को सशक्त बनाकर सामुदायिक कमियों को दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए। 

भागवत ने कहा, सामाजिक समरसता, न्याय, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वावलंबन पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए। स्वयंसेवकों को हमेशा सक्रिय रहना चाहिए और परिवारों के भीतर सौहार्द, पर्यावरण जागरूकता, स्वदेशी मूल्यों और नागरिक चेतना को बढ़ावा देना चाहिए, जो किसी समाज के बुनियादी घटक हैं। 

उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक साख और प्रतिष्ठा का श्रेय इसकी ताकत को जाता है और इसके प्रवासियों की सुरक्षा तभी सुनिश्चित होती है जब उनका राष्ट्र मजबूत बने। कुल 3,827 आरएसएस स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इसमें आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी रमेश अग्रवाल, जगदीश सिंह राणा, रमेश चंद मेहता और वैद्य राधेश्याम गर्ग भी शामिल हुए।

Published / 2024-10-02 20:32:46
पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने की शास्त्र और शस्त्र पूजा

टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, रांची ने शास्त्र और शस्त्र पूजा का आयोजन महालया के मौके पर किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। मां दुर्गा के चित्र पर पुष्प, आरती तथा शस्त्र पर पुष्प चंदन अर्पित कर पूजा के साथ कार्यक्रम शुरू किया गया। 

मौके पर भाजपा प्रदेश नेता सह महावीर मंडल नामकुम के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने सनातन धर्म के विषय में प्रकाश डालते हुए कहा कि जिसका आदि न अंत वही सनातन धर्म है। वेद, पुराण, उपनिषद, रामचरित मानस, गीता ये सभी धर्म के आधार हैं। 

जाति पाती से ऊपर उठकर इन शास्त्रों ने जीना सिखाया है। प्रभु श्रीराम का जूठ बेर खाना, केवट का पैर पाखरना, जाति धर्म से ऊपर के काम है।  हमे सनातन संस्कृति शिक्षा देती है कि हम सब एक हैं। एक रहकर ही मानव का कल्याण हो सकता है। प्रभु श्री राम समस्त मानव के प्रेरणा श्रोत हैं। विश्व हिंदू परिषद के कैलाश केसरी ने कहा रामचरित मानस जीवन जीने की शिक्षा देती है। 

संचालन अरुण झा एवं अमर ठाकुर ने किया। जबकि सैनिक परिषद की मातृ शक्ति जिलाध्यक्ष मीरा देवी ने संगठन का विस्तार किया। मौके पर जिलाध्यक्ष नारायण प्रसाद, अक्षय मिश्रा, विकास सिंह, पंकज तिवारी, देवाशीष ठाकुर, शिल्पी शालिनी, इंदु देवी श्याम सिंह सहित काफी संख्या में लोग शामिल थे।

Published / 2024-10-02 20:21:13
सेवा कार्य से सबल और सक्षम हिंदू समाज बनाये : अजय पारिक

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद्, प्रांत कार्यालय, शक्ति आश्रम, किशोरगंज में बैठक की गयी। जिसमें विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री एवं केंद्रीय सेवा प्रमुख अजय पारीक का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि विहिप के स्थापना से सेवा कार्य किया जा रहा है। विहिप का स्वभाव सेवा कार्य का है। हर कार्यकर्ता एक सेवा कार्य चला सकता है। अपने घर अपने मोहल्ले में ही सेवा कार्य किया जा सकता है। 

सप्ताह में एक बार शिक्षा और संस्कार देने का कार्य किया जा सकता हैं। देश में 5000 से अधिक सेवा कार्य चल रहे है। जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में सुदूर क्षेत्र में 100 से ज्यादा छात्रावास चलाया जा रहा है, 300 से अधिक स्कूल और कॉलेज चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य में 5 अस्पताल चलाया जा रहा है, समाजिक और स्वालंबन के लिए मातृ शक्ति और दुर्गा वाहिनी के दीदी को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 

श्री पारीक ने कहां कि विहिप का मुख्य कार्य है नर सेवा नारायण सेवा है, सेवा के लिए सेवा करना विश्व हिंदू परिषद् का कार्य नहीं है, आज समरसता के अभाव में भाई से भाई अलग हो रहे है, धरती बाट्टा जा रहा है, क्षेत्रीयता में बाट्टा जा रहा है। सेवा का मुख्य कार्य समरसता का भाव प्रकट करना है। सेवा से कार्यकर्ता का निर्माण किया जाता है, समाजिक जागरण और संगठन और धर्म जागरण करना विश्व हिंदू परिषद् का मुख्य कार्य है। 

बैठक में प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत, पटना क्षेत्र सहमंत्री बीरेंद्र साहू, उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, सुनील गुप्ता, राजेंद्र मुंडा, प्रांत मंत्री देवी सिंह, प्रांत मंत्री मिथलेश्वर मिश्र, प्रांत सहमंत्री रंगनाथ महतो, प्रांत सेवा सहप्रमूख अशोक अग्रवाल, आचार्य पुरोहित संपर्क प्रमुख जुगल किशोर, प्रांत सह कोषाध्यक्ष साबू जी, धर्मप्रसार प्रयोजना सहप्रमुख रेणु अग्रवाल, प्रांत सह संयोजिका कीर्ति गौरव, महानगर कैलाश केशरी, अमर प्रसाद, बजरंग दल सह संयोजिक दीपक ठाकुर, बबीता हिन्दू, कुणाल कुमार, पारस, मंजू सिंह एवं अन्य लोग मौजूद थे। उक्त जानकारी विहिप झारखंड के प्रान्त प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2024-09-30 21:37:41
होचर, कांके में विहिप के सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ

शिक्षित, स्वस्थ, सामाजिक समरस व स्वालंबन बनाना ही विहिप सेवा विभाग का मुख्य उद्देश्य है

टीम एबीएन, रांची। बिरसा सेवा न्यास, झारखंड के द्वारा होचर, कांके में सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मंत्री वह केंद्रीय सेवा प्रमुख अजय पारीक, झारखण्ड बिहार क्षेत्र सहमंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, झारखंड प्रांत सेवा प्रमुख अजय अग्रवाल, जिला परिषद सदस्य कांके किरण देवी, होचर पंचायत के उप मुखिया जीतेन्द्र साहु, महानगर सेवा प्रमुख रोहित कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन, पूजा अर्चना व नारियल फोड़कर शुभारंभ किया गया। 

इस केंद्र का शुभारंभ के मुख्य वक्ता केंद्रीय मंत्री व केंद्रीय सेवा प्रमुख अजय पारीक ने कहा भारत माता को सुखी, संपन्न, स्वच्छ एवं स्वालंबन बनाना हम नागरिकों का कर्तव्य है। सभी के पुरुषार्थ से ही  देश आगे बढ़ता है। भारतवर्ष हिंदू राष्ट्र था, है और आगे भी युगों युगों तक रहेगा,परंतु इसके लिए समग्र जनमानस को परिश्रम करते रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ दैहिक ताप (बीमारी), दैविक ताप (भगवत कोप) व भौतिक ताप (व्यापार क्षति) से मुक्त होना हीं श्रीराम राज्य का घोतक है।

हर छोटे - छोटे उद्यमों के माध्यम से हम आत्मनिर्भर बन सकते हैं। अपने कला, कौशल व ज्ञान को बढ़ाने से ही भारतवर्ष सशक्त एवं स्वावलंबी बना रहेगा। हिंदू समाज को शिक्षित, स्वस्थ, सामाजिक  समरस व स्वालंबन बनाना ही विहिप सेवा विभाग का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि माता सरस्वती की भंडार से जितना खर्च हम करते हैं उतना हीं बढ़ता है, जबकि खर्च न करने पर वह कम होता जाता है। स्वयं का ज्ञान का प्रचार- प्रसार निरंतर सभी को करना चाहिए। 

क्षेत्र सहमंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू ने कहा सशक्त नारी शक्ति से ही सशक्त समाज का निर्माण संभव है। प्रशिक्षण से आत्मविश्वास बढ़ता है एवं स्वावलंबी होने का मार्ग प्रशस्त होता है। जिला परिषद सदस्य किरण देवी ने कही पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार भी जरूरी है। अपना हाथ- जगन्नाथ ऐसा सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। 

कार्यक्रम में मुख्य रूप से मनीष साहू, सुजीत उपाध्याय, सुनीता कश्यप, सुनीता मुंडा, विजय उरांव, सुजीत उपाध्याय, उर्मिला केरकेट्टा, कुसुम टोप्पो, पूजा देवी, रीना देवी, रामकिश्वर साहू, अनु देवी, चंदन सिंह, राकेश चंद्र झा, आशीष कुमार, पवन राम सहित कई प्रशिक्षु बहने उपस्थित थे। उक्त जानकारी विहिप के सेवा विभाग, झारखंड प्रांत प्रमुख अजय अग्रवाल (7004777156) ने दी।

Published / 2024-09-28 23:08:43
धर्मांतरण, घुसपैठ, हिंदू समाज कने का षड्यंत्र को समाप्त करना एक बड़ी चुनौती : अंबरीश सिंह

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद रांची महानगर द्वारा रांची एयरपोर्ट रोड स्थित ग्रीन एकर्स होटल में वर्तमान चुनौतियां और हमारी भूमिका विषय को लेकर प्रबुद्धजनों की एक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के कई वकील प्रतिष्ठित व्यवसायी विहिप के अधिकारीगण एवं अन्य गणमान्य नागरिक सम्मिलित हुए। 

गोष्ठी कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री एवं विशेष संपर्क प्रमुख अंबरीश सिंह ने अपने संबोधन में कहां की अवैध धर्मांतरण, घुसपैठ, हिंदू समाज को बांटने का षड्यंत्र सहित अनेक समस्याओं को एक चुनौती के रूप में लेकर इनके निराकरण का मार्गदर्शन किया।

उन्होंने कहा इस राष्ट्र की विशेषता है कि सदियों की परतंत्रता के बाद भी हमारा राष्ट्र आज भी पूरी मजबूती के साथ खड़ा है और विश्व का मार्गदर्शन कर रहा है। भारत माता की जय केवल एक नारा नहीं है बल्कि हमारे बीच  एक ही भारत माता के पुत्र हैं इस नाते सहोदर होने की भावना जगाने वाला ध्येय वाक्य है। 

हमारे पूर्वजों ने मुगलो ,अंग्रेजों से युद्ध किया जिनके बलिदान के फलस्वरुप आज हम यहां खड़े हैं। देश और धर्म पर आज भी अनेक आक्रमण हो रहे हैं जिन्हें चुनौती के रूप में लेकर हमें सामना करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व हिंदू परिषद के प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत ने की। संचालन महानगर मंत्री विश्वरंजन ने एवं धन्यवाद ज्ञापन महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी ने किया।

मौके पर विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र मंत्री श्री वीरेंद्र विमल, प्रांत उपाध्यक्ष श्री राजेंद्र सिंह मुंडा, प्रांत संगठन मंत्री श्रीमान देवी सिंह, प्रांत मंत्री  मिथिलेश्वर मिश्र, स्वामी दिव्यानंद ,युगल किशोर प्रसाद, अमरनाथ ठाकुर, किशुन झा, मनोज पांडेय, अजय अग्रवाल, मदन बगड़िया, दुर्गा वाहिनी विभाग संयोजिका कीर्ति गौरव ,झारखंड स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष श्रीमान राजेंद्र कृष्ण, झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अजय पांडेय, अवनीश रंजन मिश्रा, डॉ भारती सिंह, डॉ सीमा सिंह,  आरती सिंह, शंभू गवारे, पारस नाथ मिश्रा, रवि शंकर राय, राजेश अग्रवाल, योगेश खेड़वाल सहित विश्व हिंदू परिषद के महानगर एवं नगर के पदाधिकारी उपस्थित थे। उक्त जानकारी प्रान्त प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन (93344 33338) ने दी।

Published / 2024-09-27 17:47:42
सार्वजनिक संपति पर कब्जा जमाने वाले का समूल नाश हो जाता है : जीयर स्वामी

एबीएन न्यूज नेटवर्क, मेदिनीनगर। निगम क्षेत्र के सिंगरा स्थित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान जीयर स्वामी ने कहा कि कभी भी सार्वजनिक संपत्ति, पंचायत की संपत्ति, जनहित की संपत्ति, स्कूल, अस्पताल, अनाथालय, मंदिर, मठ, गोशाला, गुरु, पुरोहित को दान दी हुई भूमि संपति को पुन: स्वीकार, भोग या हड़पना नहीं चाहिए। ऐसा करने से कुल खानदान समाप्त हो जाता है। 

आज का परिवेश ऐसा है कि दादाजी ने स्कूल, मंदिर, मठ, गुरु, पुरोहित सहित सार्वजनिक उपयोग में दान दिया था। अब उनके नाती, पोता कहते हैं कि लिखा पढ़ी नहीं हुआ था हम नहीं मानते हैं। लिखा पढ़ी तो एक कागजी बात है लेकिन जब दिया हुआ था तो दिया हुआ था। ऐसे दान की संपत्ति को अपने पास रख लेते हैं या हड़प लेते है तो जैसे किसी के शरीर पर तेजाब गिर जाने से  शरीर धीरे-धीरे गलकर समाप्त हो जाता है वैसे ही पूरा कुल खानदान समाप्त हो जाता है। 

इसलिए सार्वजनिक उपयोग में की जाने वाली दान की संपत्ति को हड़पने की कोशिश नहीं करनी चाहिए चाहे कारण हो या ना हो कोई देखा हो या ना देखा हो।यही बातों को भगवान श्रीकृष्णा अपने कुल खानदान के बालकों को समझाया लेकिन कुछ मान गये और कुछ नही माने इसका परिणाम अच्छा नहीं हुआ।

अकारण किसी से ईर्ष्या, द्वेष नहीं करना चाहिए

भगवान श्रीकृष्ण धर्म की रक्षा एवम मानव कल्याण के धरती पर आए। कभी जंगलों में रहे कभी मथुरा, ब्रज, गोकुल, बृंदावन में रहते हुए द्वारिका में रहे,लेकिन राजा पौंड्रक अकारण ही भगवान श्रीकृष्ण से ईर्ष्या, द्वेष करने लगा। पौंड्रक पुंड्र देश का राजा था जो, खुद को असली कृष्ण घोषित कर रखा था। राजा पौंड्रक के पास नकली सुदर्शन चक्र, शंख, मोर मुकुट, कौस्तुभ मणि जैसी चीजें थीं। राजा पौंड्रक ने खुद को भगवान विष्णु का अवतार कहता था और द्वारिकधीश श्रीकृष्ण को नकली बताता था।

भगवान श्रीकृष्ण बहुत समय तक पौंड्रक की इन गलतियों को क्षमा करते रहे। एक दिन राजा पौंड्रक ने द्वारिका में श्रीकृष्ण को संदेश भेजा था कि अब धरती पर भगवान विष्णु का असली अवतार हो चुका है। तुम द्वारिका छोड़कर भाग जाओ अन्यथा युद्ध के लिए तैयार रहो। इस संदेश के बाद श्रीकृष्ण और बलराम पौंड्रक से युद्ध किये। युद्ध में पौंड्रक ने श्रीकृष्ण जैसा स्वरूप बना रखा। पौंड्रक भी युद्ध विद्या जनता था। श्रीकृष्ण और पौंड्रक बीच घमासान युद्ध हुआ जिसमें कृष्ण ने पौंड्रक का अंत कर दिया।

Published / 2024-09-26 22:59:01
गायत्री परिवार महिला मंडल सत्संग में हुआ अखंड ज्योति मासिक पत्रिका का स्वाध्याय

  • भारतीय संस्कृति-विश्व संस्कृति में हम से आशाएँ व अपेक्षाएँ विषय पर  पाठ व संवाद हुआ

एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार शाखा रांची युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू परिसर में आज गुरुवार महिला मंडल सत्संग में गायत्री महामंत्र जप, लेखन का अनुष्ठान, भजन और अखंड ज्योति मासिक पत्रिका का स्वाध्याय हुआ। विषयगत स्वाध्याय पाठ में दीदी ने बताया कि हम विकास के चरम पर हैं, फिर भी वैश्विक संकट के एक नये दौर से गुजर रहे हैं। 

तकनीकी विकास में पूरा विश्व एक गाँव के रूप में तब्दील हो गया है। फिर भी लोगो के दिलों के बीच की दूरिया बढ़ रही हैं।भयंकर घृणा, विद्वेष, संघर्ष, हिंसात्मक, युद्धात्मक रूप बन रहा है। ऐसे में आपसी सद्भाव, विश्वास और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता व अपेक्षा है, जो पहले से कहीं अधिक आन पड़ी है। 

इस विषय पर चर्चा हुई कि यहाँ भारतीय संस्कृति की महत्ता अधिक प्रासंगिक हो जाती है, जो सार्वभौम स्वरूप एवं शाश्वत मूल्यों के आधार पर विश्व संस्कृति की भूमिका में अपना योगदान दे सकती है। इस पर महर्षि अरविंद के शब्दों में बताया गया कि आध्यात्मिकता भारतीय संस्कृति को समझने की कुंजी है, जो इसे अन्य संस्कृतियों से अलग करती है। 

आत्मा-परमात्मा पर जितना चिंतन यहाँ पर हुआ है, उतना शायद ही अन्यत्र कहीं हुआ हो।आगे श्रीअरविंद लिखते हैं कि भारतीय सभ्यता में धर्म द्वारा क्रियाशील हुआ दर्शन और दर्शन द्वारा आलोकित हुआ धर्म ही नेतृत्व करते आये हैं। भारतीय संस्कृति आरंभ से ही एक आध्यात्मिक एवं अंतर्मुखी धार्मिक व दार्शनिक संस्कृति रही है। इसकी 
व्यापकता व समग्रता भारतीय संस्कृति की विशेषता है। 

जीवन के समग्र परिष्कार, समाज के बहुमुखी विकास, चेतना के उत्तम उत्कर्ष का जो चिन्तन यहाँ मिलता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। इसकी सर्वोच्चता, श्रेष्ठता में निहित शाश्वत व चिरस्थायी मूल्य में आतमवत् सर्वभूतेषु और वसुधैव कुटुंबकम् जैसे उदात्त जीवन दर्शन को संभव बनाते हैं। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।

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