एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी/रांची। विश्व हिन्दू परिषद पटना क्षेत्र की बैठक खूंटी के राजस्थान भवन में संपन्न हुई। बैठक में उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार एवं झारखंड के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं ने चार दिवसीय वर्ग में लिया भाग। वर्ग में सभी कार्यकर्ताओं की गुणवत्ता में विकास हेतु इस प्रकार के वर्ग होते हैं। जहां विषयवार कालांशश: अनेक बिंदुओं पर प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा तथा केन्द्रीय अधिकारियों द्वारा कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन दिया जाता है।
आज के समापन सत्र को संबोधित करते हुए पटना क्षेत्र के संगठन मंत्री ने कहा कि कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्र में दायित्वनुसार नि:स्वार्थ भाव से अपने दायित्व का निर्वहन करने की जरूरत है। जिस तरह अभी देश में हिन्दू समाज के समक्ष चुनौतियां हैं उनसे सामना करने के लिए ही ऐसे वर्गों की आवश्यकता पड़ती है।
आज हमारे ही लोगों को हमारे सामने शत्रु बनाकार खड़ा किया जा रहा है पर हमें ऐसे षड्यंत्रों को योजनाव बद्ध तरीके से समाधान निकालने पर बल दिया। कहा अपने मान बिन्दुओं की रक्षार्थ हम सर्वस्व न्यौछावर करने लिए सदैव तत्पर रहने की आवश्यकता है और यही सच्ची देशभक्ति है। कार्यकर्ताओं को सचेत करते हुए कहा कि अभी लोकतंत्र का पर्व आने वाला है राजनैतिक पार्टियां अनेक प्रलोभन देकर, जातीय मतभेद, क्षेत्रवाद आदि मुद्दों पर भटकाने की कोशिश करेंगे इन सभी समस्याओं का हम स्वविवेक से हल निकालें और राष्ट्रविरोधियों के मंसूबे पर पानी फेर दें।
समापन कार्यक्रम के बाद महर्षि बाल्मीकि जयंती भी मनायी गयी, जिसमें मंदिरों के अर्चक-पुरोहित, स्थानीय पाहन-पुजारी एवं शहर के गणमान्य लोग भी उपस्थित हुए। धन्यवाद ज्ञापन खूंटी जिलाध्यक्ष विनोद जयसवाल ने एवं संचालन जिला कोषाध्यक्ष प्रवीण जयसवाल ने किया।
मौके पर पटना क्षेत्र मंत्री वीरेन्द्र विमल, प्रान्त संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रान्त मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, बजरंग दल प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, धर्मप्रसार प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा, मंदिर अर्चक पुरोहित प्रमुख मनोज पांडेय, खूंटी जिला अध्यक्ष विनोद जयसवाल, जिला उपाध्यक्ष विकास मिश्रा, शिवराज सिंह, जिला मंत्री राजीव कुमार झा, जिला संयोजक अभिषेक कुमार, कोषाध्यक्ष प्रवीण जयसवाल, सामाजिक समरसता प्रमुख बीरेंद्र सोनी, जिला विशेष सम्पर्क प्रमुख सह नगर अध्यक्ष मुकेश जयसवाल, नगर मंत्री सचित मिश्रा, श्री शेखर कुमार, संजय गुप्ता, प्रकाश अधिकारी आदि अनके कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उक्त जानकारी विहिप के प्रचार-प्रसार प्रांत सहप्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन धर्म में सुहागिनों द्वारा रखे जाने वाला करवा चौथ का पर्व बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हर वर्ष करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखने का विधान है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है।
वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना के लिए करवा चौथ का व्रत करती है यह व्रत निर्जला रखा जाता है। रात के समय चांद देखकर इस व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन महिलाएं चांद निकलने तक अन्न, जल का त्याग करती है उसके बाद शाम को छलनी से चांद देखकर और पति की आरती उतार कर अपना व्रत खोलती है। साथ ही मां पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा की जाती है।
इस वर्ष कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि 19 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 17 मिनट पर आरंभ हो रहा है। और 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में करवा चौथ का व्रत रविवार 20 अक्टूबर को किया जायेगा। करवा चौथ का व्रत की परंपरा सदियों पुरानी है। शास्त्रों के अनुसार माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था इस व्रत के बाद ही उनका विवाह शिवजी से हुआ।
इसके बाद से ही करवा चौथ व्रत की शुरूआत हुई। एक अन्य मान्यता के अनुसार एक बार जब देवताओं का राक्षसों के साथ युद्ध चल रहा था तो उस समय सभी राक्षस देवताओं पर भारी पड़ रहे थे। तो सभी देवी ब्रह्मा देव के पास पहुंचते हैं और उन्हें सारी बात बतायी और उनसे कहा कि वह अपनी पतियों की रक्षा के लिए क्या कर सकती है। तब ब्रह्मा देव ने उन्हें करवा चौथ का व्रत रखने का सुझाव दिया।
ब्रह्मा देव के बताये अनुसार सभी महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत रखा जिस वजह से देवताओं की रक्षा हो सकी। तभी से करवा चौथ का व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है। करवा चौथ के दिन चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है इसलिए सुहागिन महिलाएं चंद्रमा से अपनी पति की सुख, समृद्धि और लंबी आयु की कामना करते हुए चंद्रमा की पूजन करती है यह व्रत दांपत्य जीवन में अपार खुशियां लेकर आता है। तथा इस व्रत को रखने से पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत होते हैं।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि आश्विन माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चन्द्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत की बरसात करता है। इसलिए इस रात में खीर को खुले आसमान में रखा जाता है और सुबह उसे प्रसाद मानकर खाया जाता है।
दिलचस्प बात है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे पास होता है। इस रात को कोजागिरी भी कहते हैं, खुले आसमान तले रात भर जागकर लक्ष्मी जी के अवतरण के रात देवताओं ने मां लक्ष्मी का आगमन के समय शंख बजा कर श्री शुक्त के मंत्रो से मा लक्ष्मी का स्वागत किया। श्री सूक्त का पाठ करने से मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम उपाय है।
अगर आप गरीबी आर्थिक समस्या से निपटने के लिए नित्य श्रीयंत्र जो प्राण प्रतिष्ठा हो, लक्ष्मी का वास श्री यंत्र में है। नित्य प्रति श्री यंत्र की पूजा कर श्री सुक्त का पाठ शुद्ध रूप से श्रद्धा भक्ति के साथ करने से आर्थिक लाभ जरूर होगा। लोग अक्सर पूर्णिमा और स्नान-दान की तारीख को लेकर असमंजस में रहते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं शरद पूर्णिमा और स्नान दान के लिए मुहूर्त क्या रहने वाला है।
पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि 16 अक्टूबर को रात 08 बजकर 40 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन 17 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 55 मिनट पर होगा। ऐसे में शरद पूर्णिमा बुधवार, 16 अक्टूबर को मनाई जायेगी। इस दिन पूर्णिमा का व्रत भी रखा जायेगा। आश्विन पूर्णिमा का समापन 17 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 55 मिनट पर होगा। इसलिए स्नान-दान 17 अक्टूबर को किया जायेगा।
शरद पूर्णिमा के रात मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ और देवताओं ने मां लक्ष्मी का स्वागत ऋग्वेद के श्री सूक्त स्तोत्र से स्वागत किया, श्री सूक्त स्त्रोत्र का पाठ करने से लक्ष्मी बहुत जल्दी प्रसन्न होती हैं और धन धान्य से परिपूर्ण कर देती हैं। अगर शुद्ध उच्चारण से श्री सूक्त स्त्रोत्र का पाठ करने से जीवन में धन का लाभ होता है।शास्त्रों के मुताबिक इस दिन अगर अनुष्ठान किया जाए तो ये सफल होता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था। वहीं शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। माना जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी अपनी सवारी उल्लू पर बैठकर भगवान विष्णु के साथ पृथ्वी का भ्रमण करने आती हैं। इसलिए आसमान पर चंद्रमा भी सोलह कलाओं से चमकता है। शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में जो भक्त भगवान विष्णु सहित देवी लक्ष्मी और उनके वाहन की पूजा करते हैं।
ऐसा विश्वास है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत भर जाता है और ये किरणें हमारे लिए बहुत लाभदायक होती हैं। इन दिन सुबह के समय घर में माँ लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। इस दिन प्रात: काल स्नान करके आराध्य देव को सुंदर वस्त्राभूषणों से सुशोभित करके आवाहन, आसान, आचमन, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, सुपारी, दक्षिणा आदि से उनका पूजन करना चाहिए।
रात्रि के समय गौदुग्ध (गाय के दूध) से बनी खीर में घी तथा चीनी मिलाकर अर्द्धरात्रि के समय भगवान को अर्पण (भोग लगाना) करना चाहिए। पूर्ण चंद्रमा के आकाश के मध्य स्थित होने पर उनका पूजन करें। खीर का नैवेद्य अर्पण करके, रात को खीर से भरा बर्तन खुली चांदनी में रखकर जाली से ढक कर दूसरे दिन उसका भोजन करें। सबको उसका प्रसाद दें।
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार के 30 से अधिक सक्रिय भाई बहनों ने मिलकर कांके ब्लॉक के पतराटोली गांव में घर-घर जा संपर्क किया। शांतिकुंज हरिद्वार का संदेश विचार क्रांति अभियान, मानव में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण का संदेश बताते हुए पूज्य गुरुदेवश्री द्वारा रचित युग साहित्य, युग निर्माण योजना, अखंड ज्योति पत्रिका, हारिये न हिम्मत, गायत्री चालीसा, युग निर्माण सत्संकल्प पाठ, सनबोर्ड पर लगा हुआ देव स्थापना तसवीर, प्रत्येक घर में उस साहित्य का स्थापन महत्व बताते हुए प्रदान किया गया।
बुढ़मू ब्लॉक के गांव सोसइ, उमेडंडा, छोटका मुरू, अकतन, अनातू तथा पतराटोली, कांके ब्लॉक में पतराटोली गांव के 52 घरों में संपर्क किया गया। 40 सार्वजनिक जगहों पर सद्ववाय स्टीकर लगाया गया। गांव के 11 से अधिक घर के अभिभावक द्वारा अखंड ज्योति पत्रिका प्रतिमाह लेने के लिए सहमति व संकल्प किये गये। लगभग 20 तुलसी एवं चंदन के पौधे का भी वितरण कर पौधरोपण किया गया।
साथ ही सभी ने शान्तिकुञ्ज के 21 वीं सदी के युग निर्माण योजना के जयकारों, जयघोषों से पूरा ग्रामीण इलाका को गुंजायमान किया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख दीपक दयाल प्रसाद और जय नारायण प्रसाद ने दी।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद, पटना क्षेत्र (झारखंड- बिहार) की एक दिवसीय बैठक आज रांची स्टेशन रोड स्थित होटल ग्रीन होरिजन में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री व विशेष संपर्क केंद्रीय प्रमुख अंबरीश सिंह के विशेष उपस्थिति संपन्न हुई।
बैठक में पटना क्षेत्र का तीनों प्रांतों के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ-साथ आगामी कार्यक्रम तय की गयी, जिसमें 17 से 22 अक्टूबर बाल्मीकि जयंती सप्ताह, 11 से 17 नवंबर तक हुतात्मा दिवस, 23 से 30 नवंबर तक संस्कार सप्ताह व रन फॉर हेल्थ कार्यक्रम, 12 से 18 दिसंबर तक शौर्य यात्रा, 7 से 15 जनवरी तक समरसता यात्रा कार्यक्रम करने का निर्णय लिया गया।
केंद्रीय मंत्री अंबरीश सिंह ने कहा संगठन का विस्तार कार्यकर्ताओं के परस्पर विश्वास व भरोसा पर होता है। कार्यकर्ताओं को संगठन के प्रति नित्य सकारात्मक सोच के साथ प्रतिदिन कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा झारखंड एवं बिहार में रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या निरंतर बढ़ती जा रही है, जिससे कई स्थानों पर जनसंख्या संतुलन हो चुकी है जिससे जहां एक ओर सांस्कृतिक अवधारणाओं पर आघात पहुंच रही है।
वहीं लव जिहाद एवं लैंड जिहाद जैसे कुकृतियों पर बल मिल रहा है। उन्होंने कहा कई ऐसे धरायें चल रही है जो हिंदू को हिंदू से अलग करने का कुचेष्टा कर रही है, हमें समरस भाव को जागते हुए समाज में हिंदुत्व भाव को बनाए रखने के लिए निरंतर सेवा का कार्य करते रहना होगा।
बैठक में क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल, क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद कुमार, क्षेत्र सहमंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, क्षेत्र बजरंग दल संयोजक जन्मेजय कुमार, क्षेत्र धर्म प्रसार प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा, क्षेत्र विधि प्रमुख अशोक श्रीवास्तव, झारखंड प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार, बजरंग दल प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, उत्तर बिहार प्रांत अध्यक्ष संजीव कुमार, प्रांत मंत्री रणवीर कुमार, बजरंग दल प्रांत संयोजक प्रकाश पांडेय, प्रांत संगठन मंत्री नागेंद्र कुमार, दक्षिण बिहार मंत्री संजीव कुमार, प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन कुमार, झारखंड प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन उपस्थित थे। उक्त जानकारी विहिप के झारखंड प्रांत सह प्रमुख, प्रचार प्रसार प्रकाश रंजन ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू परिसर में पापांकुशा एकादशी पर 24 घंटे का गायत्री महामंत्र का आनलाइन विश्व स्तरीय अखंड जप-अनुष्ठान, व्रत-उपवास की आज पूणार्हुति सोल्लास संपन्न हुई। नौदिवसीय नवरात्र अनुष्ठान की समीक्षात्मक विचार-विमर्श व विश्लेषण भी हुआ।
यज्ञ उपाचार्य द्वारा पर्व, त्यौहार, व्रत-उपवास,अखंड जप-अनुष्ठान पर व्रियते इति व्रतम् पर प्रकाश डाला गया। बताया कि जिसका वरण, ग्रहण, आचरण, अनुष्ठान, अनुपालन किया जाये, उसे व्रत कहते हैं। पर्व त्यौहार अवसर पर व्रत- उपवास जप-अनुष्ठान करने के अनेक लाभ हैं। बताया कि व्रत, त्यौहार उपवास व उत्सव भारतीय संस्कृति के अंग-उपांग हैं।
इन्हीं केंद्र बिन्दुओं के चारों ओर विचारों,भावनाओं, विश्वासों एवं धार्मिक आध्यात्मिक एवं आचार- व्यवहार का विस्तार होता है। आध्यात्मिक ऊर्जा हमारे देश के कण कण में समाविष्ट है। भारतीय पर्वों के मूल में आनंद और उल्लास का विशेष महत्व व अनुभव होता है। पर्वों का उद्देश्य मानव को सामाजिक बनाना भी है। हमारी संस्कृति में जीवन के प्रत्येक क्षण को उत्सव की तरह जीने का ध्येय है- सभी मिल बांटकर इसका आनन्द उठायें।
पर्व मानव की भावनात्मक आवश्यकता की पूर्ति करते हैं व मन को असीम शांति और सुकुन देते हैं। कहा कि जीवन को अनुप्राणित करने और आनन्दमय तरीके से जीवन जीने और अभ्यास से भरपूर लाभान्वित होने का अनुभव करना चाहिए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संयुक्त महा मंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने आज कहा है कि हिन्दू पर्व-त्योहारों या कुम्भ जैसे महान आयोजनों की शुचिता और पवित्रता बरकरार रख, पूज्य संतों व मातृ शक्ति के सम्मान की रक्षा हेतु सम्पूर्ण हिन्दू समाज कृत संकल्पित है।
इन आयोजनों में विघ्न डालने वालों के विरुद्ध शासन-प्रशासन व समाज को सतर्क रहना होगा। इन उत्सवों व धार्मिक आयोजनों को अपवित्र करने वालों को हम बर्दस्त नहीं करेंगे। संपूर्ण देशवासियों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि मां दुर्गा से प्रार्थना है कि वे हमें वह शक्ति प्रदान करें जिससे हम राष्ट्र विरोधियों और हिंदू विरोधियों के षडयंत्रों को समाप्त कर भारत को विश्व का शीर्षस्थ देश बनाने का अपना संकल्प पूरा कर सकें।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की विशेषता है कि उसके उत्सव विभिन्न रंगों की छटाओं से भरे होते हैं। डांडिया नृत्य मां दुर्गा की आराधना का ही एक अनूठा आयोजन है। यह पूर्ण रूप से धार्मिक आयोजन है जिसमें वही भाग लेता है जो मां दुर्गा के प्रति समर्पित है। दुर्भाग्य से विकृत मानसिकता से ग्रस्त जेहादियों ने अपने गंदे इरादों के साथ डांडिया पंडालों में घुसना प्रारंभ कर दिया है।
कल ही भाग्यनगर (हैदराबाद) के डांडिया पंडाल में एक जिहादी इरशाद खान ने एक हिंदू लड़की का हाथ पड़कर अश्लील हरकत करने की कोशिश की। परिवार का विरोध करने पर वह वहां से भाग गया लेकिन परिवार जनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कर दी है।
डॉ जैन ने यह ही कहा कि कामुकता से भरे इन जेहादियों की कई प्रकार की गंदी हरकतों के समाचार मिलते रहते हैं। कभी किसी हिंदू लड़की को छेड़ना तो कभी उनको रोकने पर लड़की पर तेजाब डाल देना कहां की सभ्यता है। पत्थर बाजी के समाचार भी मिलते रहते हैं। हमारी पूजा सामग्री व प्रसाद को भ्रष्ट करने का यह लोग हमेशा प्रयास करते ही हैं। इनकी पाशविक कामवासना, जिसको लव जिहाद का नाम दिया गया है, से पूरी दुनिया त्रस्त है।
ऐसे में अगर विहिप, बजरंग दल व अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता दुर्गा पूजा के पंडालों में जेहादियों के आने पर रोक लगाते हैं तो क्या गलत करते हैं? क्या हम अपनी आस्था और बहन बेटी के शील और स्वाभिमान को बचाने का भी अधिकार नहीं रखते? दुर्घटना की प्रतीक्षा नहीं की जा सकती। हम जानते हैं कि सावधानी में ही बचाव है।
बचाव या सुरक्षा के इस पुनीत कार्य में लगे हिन्दू युवकों को हिंदू धर्म रक्षक बताते हुए उन्होंने कहा कि इनका सम्मान होना चाहिए। दुर्भाग्य से सेकुलरिज्म से ग्रस्त कुछ लोग उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं। हम उनसे पूछना चाहते हैं कि क्या उन्होंने कभी थूक जिहाद, जूस में पेशाब मिलने वाले, हिंदू उत्सवों पर पथराव करने वालों व हिंदू लड़कियों के टुकड़े-टुकड़े करने वालों के लिए जिहादी गुंडे कहने की हिम्मत दिखाई है जबकि वे फिलिस्तीन या जिहादी आतंकी संगठनों का झंडा हाथ में लेकर पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने में भी संकोच नहीं करते? अब समझ में आता है इन जेहादियों को कवर फायर कौन देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ओवैसी जैसे कट्टरपंथी नेताओं और इन सेक्युलरिस्टों की शह पर ये जेहादी कुंभ के पावन अवसर की पवित्रता को भी भंग करने का कोई अवसर नहीं छोड़ेंगे। इसलिए साधु संतों ने कुंभ के मेले में जेहादियों के प्रवेश पर रोक की जो मांग की है वह एकदम उचित है।
क्या हम अपनी आस्थाओं की पवित्रता की रक्षा करने के संवैधानिक अधिकार का उपयोग भी नहीं कर सकते? विहिप जेहादियों को चेतावनी देता है कि वे अपने कुछ मंसूबे त्याग दे तभी वे सह अस्तित्व की बात कर सकते हैं। स्मरण रहे कि सद्भाव एक तरफा नहीं हो सकता। उक्त जानकारी विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार इकाई युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा रांची परिसर में महिला मंडल प्रतिनिधित्व में स्वाध्याय पाठ व संवाद हुआ। बताया गया कि परम सत्ता को मां के रूप में देखने और उस रूप में उसकी उपासना साधना आराधना करने का प्रचलन भारतीय संस्कृति की एक मौलिक विशेषता है, जिसकी मिसाल विश्व के अन्य धर्मों या आस्था परम्पराओं में दुर्लभ है। हर दृष्टि से यह भारत की ही विशेषता है।
नवरात्र के रूप में इसकी उपासना-आराधना का विशिष्ट पर्व मनाया जाता है। इसे शक्ति पर्व भी कहा जाता है। भारत में आदिकाल से चला आ रही शक्ति पूजा का यह पर्व आज भी अगम्य आस्था के साथ जारी है। बताया कि हमारी संस्कृति का प्रत्येक कालखंड इसकी चर्चा, विवेचना एवं साधना से भरा पड़ा है। महाभारत युद्ध आरंभ होने से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्गा मां की उपासना अर्जुन से विजय के लिए करायी थी। दीदी ने कहा कि नवरात्र की ऋतु संधि की वेला स्वयं में विशेषता लिए होती है। इस समय समूची प्रकृति अपने चरम उत्कर्ष पर होती है।
आध्यात्मिक साधनाओं के लिए इस ऋतुसंधि नवरात्र से बढ़कर और कोई अवसर नहीं हो सकता है। गुरुवर श्रीपूज्यवर की युग निर्माण योजना, विचार क्रांति अभियान व सत्संकल्प पाठ के सूत्रों के अनुसार बताया कि यदि इसके साथ युग-संधि का दुर्लभ सुयोग जुड़ जाये तो इसका महत्व सौ गुना हो जाता है।
स्वाध्याय पाठ की चर्चा के उपरांत बताया कि गायत्री परिवार के नवरात्र महापर्व में लघु व्यक्तिगत जप-अनुष्ठान व समूह जप-अनुष्ठान, मंत्र लेखन, गायत्री चालीसा पाठ, सहस्र नाम पाठ की महत्ता, विशेषता व उपयोगिता तथा नियत समय नियम संयम पर प्रकाश डाल शांतिपाठ कर सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन और उज्ज्वल भविष्य की मंगलमय कामना की। पीठ व्यवस्था के अनुसार कल सुबह आठ बजे से नवरात्र अनुष्ठान की महापूर्णाहुति विधिवत 24 कुंडीय हवन-यज्ञ विधान से और भोजन प्रसाद अमृताशन भंडारा से होगा। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।
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