टीम एबीएन, रांची। गुरुद्वारा श्री गुरुनानक सत्संग सभा की प्रभात फेरी तीसरे दिन आज 3 नवंबर, रविवार को कृष्णा नगर कॉलोनी गुरुद्वारा साहिब से आरंभ होकर रिम्स बरियातू के सामने डॉक्टर अजय छाबड़ा के फ्लैट सुबह 6 बजे पहुंची। वहां से निकलकर फेरी बरियातू रामेश्वरम स्थित हरीश अरोड़ा, पप्पू काठपाल के अपार्टमेंट गई और फिर वहां से निकलकर रामेश्वरम स्थित स्वर्गीय जगत सिंह सुखीजा, लेखराज अरोड़ा, प्रकाश अरोड़ा, हंसराज अरोड़ा और प्रेम मिढ़ा के संयुक्त आवासीय परिसर पहुंची और मनीष मिढ़ा द्वारा अरदास के साथ यही प्रभात फेरी का समापन सुबह नौ बजे हो गया। फेरी के स्वागत में तीनों जगह श्रद्धालुओं द्वारा चाय नाश्ते के लंगर की व्यवस्था की गई।
फेरी में गीता कटारिया, शीतल मुंजाल, मंजीत कौर, रेशमा गिरधर, नीता मिढ़ा, इंदु पपनेजा, बबिता पपनेजा, जसपाल मुंजाल, इंदर मिढ़ा, रमेश पपनेजा ने हरि के जन सतगुर सतपुरखा बिनउ करउ गुर पास हम कीरे किरम सतगुर शरणाई कर दइआ नाम परगास... और सभि जीअ तुमारे जी तूं जीआ का दातारा हरि धिआवहु संतहु जी सभि दूख विसारणहारा... एवं तूं जुग जुग एको सदा सदा तूं एको जी तूं निहचल करता सोई... जैसे कई शबद गायन के साथ साथ संगत को वाहेगुरु का जाप भी कराया।
सरदार भूपिदंर सिंह ने निशान साहिब उठाकर फेरी की अगुवाई की। मनीष मिढ़ा ने श्रद्धालुओं के घरों के सामने अरदास की। श्रद्धालुओं ने अपने परिसर की साफ सफाई तथा पुष्प वर्षा कर फेरी का श्रद्धा भाव से स्वागत किया। सत्संग सभा के सचिव अर्जुन देव मिढ़ा ने सभी श्रद्धालुओं का फेरी के स्वागत और लंगर सेवा के लिए धन्यवाद किया।
मीडिया प्रभारी नरेश पपनेजा ने बताया कि सत्संग सभा द्वारा श्रद्धालुओं को ले आने जाने के लिए दो बसों की व्यवस्था भी की गयी थी। आज की फेरी में लेखराज अरोड़ा, डॉ अजय छाबड़ा, प्रेम मिढ़ा, प्रकाश अरोड़ा, हरीश अरोड़ा, पप्पू काठपाल, हंसराज अरोड़ा, गुंजन अरोड़ा, कौशिक अरोड़ा, तुषार मिढ़ा, गीत अरोड़ा, हर्षित अरोड़ा, ऋतिक सुखीजा, गर्व सुखीजा, जीत अरोड़ा, बेला सुखीजा, तरुणा छाबड़ा, गीता मिढ़ा, आशा अरोड़ा, ज्योति अरोड़ा, ऋतु अरोड़ा, ललिता काठपाल, ऋचा अरोड़ा, कोमल अरोड़ा, प्रिया काठपाल समेत अन्य शामिल थे।
टीम एबीएन, रांची। ख्रीस्तीयों ने आज अपने मृतजनों को याद किया और उनके लिए प्रार्थनाएं की। कैथोलिक विश्वासी प्रत्येक वर्ष 02 नवंबर को कब्र पर्व मनाते हैं और मृतजनों की आत्मा शांति के प्रार्थना करते हैं। इसी अवसर पर आज रांची टमटमटोली में स्थित कब्र स्थान पर कैथोलिक विश्वासी इकट्ठे हो कर रांची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद की अगुवाई में हो रहे मिस्सा बलिदान में शामिल हुए।
सभी कैथोलिक विश्वासियों के लिए कब्र पर्व एक विशेष अवसर है। इस दिन वे अपने परिवार के मृत माता पिता, भाई, बहन और रिश्तेदारों को याद करते, उनके जीवन दान के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते और उनके आत्मा शांति के लिए प्राथनाएं करते हैं। कैथोलिकों का विश्वास है कि शरीर के मर जाने पर जीवन समाप्त नहीं होता बल्कि वे एक नये जीवन में प्रवेश करते हैं।
जैसे प्रभु येसु क्रूस में मरने के बाद पुन: जी उठे वैसे ही वे भी जी उठेंगे और ईश्वर के राज्य में अर्थात स्वर्ग में दूतों एवं संतों की संगति में वे सदा सर्वदा शांति में निवास करेंगे। इसी विश्वास के साथ कैथोलिक उन मृत विश्वासियों के लिए विशेष प्रार्थना करते हैं जो अभी तक स्वर्ग राज्य में प्रवेश नहीं कर पाये हैं। कब्र पर्व के उपलक्ष्य में महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद ने मिस्सा बलिदान के दौरान अपने धर्मोपदेश में कहा कि हमारा वास्तविक निवास स्वर्ग है जिसकी ओर हम तीर्थयात्री के रूप में अपना कदम बढ़ा रहें हैं।
इस शरीर के नष्ट होने पर हम भी प्रभु येसु के समान पुन: जी उठेंगे। उन्होंने कब्र पर्व के अवसर उन सभी मृत विश्वासियों के लिए प्रार्थना की और कब्रों आशीष प्रदान की। विश्वासियों ने अपने मृतजनों की कब्रों में मोमबत्ती और अगरबत्ती जलाई तथा फूलों से कब्रों को सजाया।
कब्र पर्व के अवसर पर रांची के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद, फा आनंद डेविड खलखो रांची के पल्ली पुरोहित, फा दीपक बाड़ा, रांची पल्ली के सहायक पल्ली पुरोहित, फा रॉबिन प्रफुल टोप्पो, फा नीलम तिडू, फा इजेकिएल टोप्पो फा जॉर्ज मिंज, अन्य पुरोहितगण, धर्मबंधुगण, धर्मबहनें एवं हजारों की संख्या कैथोलिक विश्वासी उपस्थित रहे।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदू धर्म का पवित्र त्यौहार भैया दूज इस वर्ष 3 नवंबर को मनाया जायेगा। कार्तिक मास द्वितीया तिथि का आरंभ 2 नवंबर को रात में 8 बजकर 22 मिनट पर हो जायेगा। एवं कार्तिक द्वितीया तिथि 3 नवंबर को रात में 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगा।
उदया तिथि होने के कारण भैया दूज का पर्व 3 नवंबर को मनाया जायेगा। पांच दिवसीय दीपोत्सव का ये अंतिम दिन है। भैया दूज गोवर्धन पूजा के अगले दिन मनाया जाता है यह त्यौहार भाई-बहन का त्योहार है इसमें बहन अपने भाई को तिलक लगाती है उसकी आरती उतारती है और मुंह मीठा करती है।
इस दिन बहनें अपने भाई को श्रीफल यानी नारियल का गोल देती है कहा जाता है कि बहन भाई को नारियल का गोला देकर उसकी सुख शांति और समृद्धि की कामना करती है। नारियल के गोले को भाई की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। श्रीफल के साथ बहन अपने भाई को आशीर्वाद भी देती है इसके लिए पूजा की थाली में रोली, मोली, चंदन, फूल, मिठाई, आरती और सुपारी के साथ तिलक लगाकर आरती करती है।
पूजा पूरी होने के बाद भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं। भाई दूज का त्यौहार लगभग पूरे देश में मनाया जाता है। इसे अलग-अलग जगह में अलग नाम से जाना जाता है। बंगाल में भाई दूज के पर्व को भाई फूटा, महाराष्ट्र और गोवा में भाऊ व्रत, और नेपाल में इसको भाई तिहाड़ के नाम से जाना जाता है।
भारत में भाई-बहन के प्रेम एवं पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन और भैया दूज दो महत्वपूर्ण त्यौहार है दोनों ही त्योहारों में भाई और बहन एक दूसरे के प्रति परंपरागत तरीके से स्नेह प्रकट करते हैं भैया दूज भाई बहन के अटूट और अनन्य प्रेम का प्रतीक पर्व है। भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जानते हैं।
शास्त्रों के अनुसार कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि पर यम अपनी बहन के घर आये थे। वहां उनकी बहन ने उनका खूब आदर सत्कार किया था जिससे प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया था कि जो भाई-बहन इस दिन यमुना में स्नान करके यम पूजा करेंगे वह मृत्यु के बाद यमलोक नहीं जायेगा। बहने अपने भाई को अकाल मृत्यु से बचाने के लिए यह देवता की पूजा करती है।
भैया दूज को लेकर एक पौराणिक कथा यह भी है कि भगवान श्री कृष्ण नरकासुर राक्षस का वध करके द्वारका लौटे थे तो भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा ने फूल, मिठाई और अनेकों दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था। इस दिन सुभद्रा ने भगवान कृष्ण के मस्तक पर टीका लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना की थी तभी से भैया दूज पर्व मनाने की परंपरा शुरू हो गया।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि गोवर्धन पूजा पर्व 2 नवंबर को मनाया जाएगा। सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है यह पर्व दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है।
इस वर्ष गोवर्धन पूजा का पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 1 नवंबर को सांय 6 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ हो रहा है तथा इसका समापन अगले दिन 2 नवंबर को रात 8 बजकर 21 मिनट पर होगा। इसलिए गोवर्धन पूजा 2 नवंबर को होगा। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा संबंध है। इस पर्व की अपनी मान्यता और लोक कथा है गोवर्धन पूजा में गोधन अर्थात गायों की पूजा की जाती है।
गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती है उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती है। गाय संपूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय और आदरणीय है गाय के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए इस दिन गोवर्धन पूजा की जाती है।
मान्यता के अनुसार एक बार भगवान इंद्र बृजवासियों से क्रोधित हो गए और भारी बारिश कर दी भगवान इंद्र के प्रकोप से बृजवासियों को बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली से उठा लिया था तभी से हर वर्ष गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व इंद्रदेव पर भगवान श्री कृष्ण की जीत का प्रतीक है। यह त्यौहार प्रकृति को समर्पित है।
इस पर्व पर लोग गाय के गोबर से भगवान श्रीकृष्ण एवं गोवर्धन पर्वत का चित्र को बनाकर उनकी उपासना करते हैं तथा पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। साथ ही प्रभु के प्रिय भोग अर्पित किया जाता है। तथा कढ़ी और अन्नकूट चावल का भोग लगाया जाता है ? इस कार्य को करने से साधक को सुख समृद्धि में वृद्धि होती है।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि इस साल धनतेरस 29 अक्टूबर दिन मंगलवार को मनाया जायेगा। धनतेरस का शुभ मुहूर्त 29 अक्टूबर को प्रात: 11 बजे से प्रारंभ होकर 30 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट बजे तक रहेगा। धनतेरस के देवता धन्वंतरि है। तथा धन्वंतरी भगवान विष्णु के तेरहवें अवतार है।
धनतेरस के त्योहार का मुख्य संबंध यमराज की आराधना से है आयुर्वेद के प्रवर्तक धनवंतरी की जयंती भी इसी दिन होती है। एक तरफ वैद्य समाज धनवंतरी की पूजन कर सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता है तो गृहस्थ दीप जलाकर यमराज से अकाल मृत्यु टालने की प्रार्थना करते हैं। दीपावली भले ही एक दिन मनाई जाती है लेकिन यह पर्व 5 दोनों का होता है यानी धनतेरस से यम द्वितीया तक, शास्त्रों में इन पांच दिनों को यम पंचक कहा जाता है।
इन पांच दिनों में यमराज, वैद्यराज धनवंतरि, लक्ष्मी-गणेश, हनुमान जी, मां काली और भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विशेष विधान है। धनतेरस का त्योहार दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है। यह त्योहार खुशहाली समृद्धि और सेहतमंद जीवन का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। धनतेरस जिसे धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है।
धनतेरस का नाम धन और तेरस से बना है जिसमें धन का मतलब संपत्ति और समृद्धि है और तेरस का अर्थ हिंदू कैलेंडर की 13वीं तिथि है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ ही यह दिन कुबेर और लक्ष्मी माता की पूजा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार समुद्र-मंथन से जो चौदह रत्न प्रकट हुए उनमें आरोग्य के देवता धन्वंतरि के अलावा धन-समृद्धि की देवी लक्ष्मी प्रमुख हैं। पांच दिवसीय ज्योति पर्व का प्रथम दिन धनत्रयोदशी या धनतेरस भी दीपावली की तरह समृद्धि की कामना को समर्पित रहता है।
इसी दिन से लक्ष्मीजी का आवाह्न शुरू हो जाता है।और शाम को 5 (कुछ लोग तेरस होने के कारण 13 दीये जलाते हैं) नये मिट्टी के दीपकों में तेल भर कर उन्हें प्रकाशित कर खील से पूजा जाता है । फिर एक दीपक आंगन में, एक रसोई में, एक तिजोरी के पास, एक तुलसी में और एक मुख्य द्वार पर रखा जाता है। बहुत लोग धनतेरस को ही लक्ष्मीजी की पूजा कर लेते हैं।
धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन, गहने या अन्य कीमती सामान खरीदने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन जो भी चीज खरीदी जाती है। उस घर में समृद्धि और धन का आगमन करती है। लोग इस दिन नए वाहन संपत्ति या अन्य महत्वपूर्ण चीजों की भी खरीदारी करते हैं। इसके साथ ही आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक्स और नए उपकरण धनतेरस पर खरीदना शुभ माना जाता है।
एबीएन सोशल डेस्क। बाल विवाह की रोकथाम के लिए सुप्रीम कोर्ट के नये दिशा-निर्देशों के बाद नई उर्जा से लैस बिहार के नागरिक समाज संगठनों ने इसके खात्मे में राज्य सरकार के सभी प्रयासों को हरसंभव सहयोग देने का वादा किया है। बाल विवाह की 40.8 प्रतिशत दर के साथ बिहार इस मामले में देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और प्रयास जेएसी सोसायटी जैसे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस (जेआरसीए) के तमाम सहयोगी गैरसरकारी संगठन राजधानी पटना में इकट्ठा हुए और बाल विवाह के खात्मे के लिए रणनीतियों और उन पर प्रभावी अमल के तरीकों पर चर्चा की। इन संगठनों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों से पंचायतों के साथ मिलकर काम करने, जागरूकता के प्रसार और बाल विवाह के पूरी तरह खात्मे के लिए विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं को साथ जोड़ने जैसे उनके जमीनी कार्यों को और गति व मजबूती मिलेगी।
गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन जेआरसीए बाल विवाह के खिलाफ बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का समर्थक है जिसके सहयोगी सदस्य और संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी के नतीजे में सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह के खात्मे के लिए ऐतिहासिक फैसले में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये। जेआरसीए के समर्थन से चल रहा यह अभियान पहले से ही बाल विवाह के खात्मे के लिए पिकेट (पीआईसीकेईटी) रणनीति पर अमल कर रहा है और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों में इसकी छाप स्पष्ट है।
पिकेट रणनीति का खाका बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) अभियान के संस्थापक भुवन ऋभु ने अपनी किताब व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन : टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज में पेश किया था। यह एक समग्र रणनीति है जिसमें नीति, संस्थान, समन्वय या सम्मिलन, परिवेश और तकनीक जैसी सभी चीजें समाहित हैं। इस रणनीति पर अमल करते हुए सीएमएफआई ने पिछले एक साल में 120,000 से ज्यादा बाल विवाह रुकवाये हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान बिहार सरकार के प्रयासों में हरसंभव सहयोग का वादा करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के संयोजक रवि कांत ने कहा, बाल विवाह बच्चों से बलात्कार है। यह बच्चों से उनके अधिकार और उनकी स्वतंत्रता छीन लेता है। एलायंस के सहयोगी इस अपराध के खात्मे के लिए काम कर रहे हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों से हमारे संकल्प को मजबूती मिली है। जेआरसीए बिहार से 2030 तक इस घृणित अपराध के खात्मे के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य सरकार का हरसंभव सहयोग व समर्थन करेगा। हमारे लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि भारत इस घृणित अपराध के खात्मे की लड़ाई में सबसे अगली कतार में है और इसकी नीतियों व न्यायिक फैसलों ने दुनिया के सामने नजीर पेश की है।
एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के मुख्तारुल हक ने भी इस राय से सहमति जताते हुए कहा, हम इस बात के गवाह हैं कि किस तरह सभी हितधारकों के प्रयासों में समन्वय व संम्मिलन, जागरूकता और शिक्षा एक ऐसे परिवेश के निर्माण की कुंजी हैं जहां बाल विवाह की गुंजाइश खत्म हो जाती है। हम सभी इन मोर्चों पर काम कर रहे हैं और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी अहमियत को रेखांकित किया है। हम आश्वस्त हैं कि इन दिशा-निर्देशों पर तत्काल और प्रभावी अमल से हम 2030 से पहले ही बाल विवाह के खात्मे के निर्णायक बिंदु तक पहुंच जायेंगे।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रयास जेएसी सोसायटी के मुख्य समन्वयक अधिकारी जितेंदर कुमार सिंह ने कहा, यह एक ऐतिहासिक फैसला है जो भारत से बाल विवाह के खात्मे का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस फैसले ने सभी की जवाबदेही तय की है और यह सुनिश्चित किया है कि पंचायत से लेकर पुलिस तक सभी इस अपराध के खात्मे में अपनी भूमिका व जिम्मेदारी को समझें। हम राज्य सरकार के साथ खड़े हैं और जैसे भी संभव होगा, उसकी मदद करेंगे।
बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) अभियान के गठबंधन सहयोगियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक फैसले में ग्रामीण समुदायों की लामबंदी पर जोर देते हुए बाल विवाह की रोकथाम के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए। इन दिशानिदेर्शों में बच्चों के सशक्तीकरण, उनके अधिकारों के संरक्षण, यौन शिक्षा और समुदाय केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देने के साथ ही बाल विवाह की रोकथाम के लिए पंचायतों, स्कूलों और बाल विवाह निषेध अधिकारियों की जवाबदेही तय की गयी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 पर प्रभावी तरीके से अमल के लिए बचाव, संरक्षण व अभियोजन की रणनीति पर काम करते हुए कानूनी कार्रवाई को आखिरी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाये।
टीम एबीएन, रांची। विहार समाज कल्याण संस्थान द्वारा संचालित वृद्धा आश्रम नगरी के समाजिक कार्य और आश्रम संचालन करने के लिए जसोवा द्वारा सम्मानित किया गया। जसोवा आईएएस आफिसर वाइफ एसोसिएशन द्वारा संचालित किया जाता हैं जो कि समाजिक कार्य किया जाता है और हर वर्ष दिवाली उत्सव मेला का आयोजन करती है।
इस वर्ष मोरहाबादी में 23 अक्टूबर 2024 को इसका शुभ आरंभ किया गया। इस अवसर पर राज्य के चीफ सेक्रेटरी एल खियांगते ने विहार समाज कल्याण संस्थान को 50,000/ का चेक दिया। विहार समाज कल्याण संस्थान विगत 30 वर्ष से समाज में कार्य कर रही हैं। 1998 में संस्था के संस्थापक सचिव स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण सिन्हा जी द्वारा रांची जिला के नगरी प्रखंड में वृद्धाश्रम चलाना शुरू किया जो की 25 बेड का था।
वर्तमान में पांच एकड़ जमीन पर या आश्रम संचालित किया जा रहा है। इसके सचिव पंकज सिन्हा हैं और आश्रम में 50 वृद्ध की रहने की व्यवस्था है। वृद्ध आश्रम निशुल्क है जहां रहने वाले वृद्ध को किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होता है। श्री सिन्हा ने जसोवा की पूरी टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस तरह के सम्मान से कार्य को ऊर्जा मिलती हैं।
मौके पर संस्था के सदस्य प्रकाश रंजन के सम्मान ग्रहण किया। श्री रंजन ने सम्मान ग्रहण करने के बाद कहा कि समाज में बदलाव आ रहा है। लोग अच्छे काम करने वाले को खोज कर सम्मानित कर रहें हैं जिससे समाज के प्रति लोगों का जुड़ाव बढ़ेगा साथ ही अच्छे काम करने वाले की संख्या बढ़ेगी। उन्होने जसोवा की पूरी टीम को धन्यवाद दिया।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद झारखंड प्रांत कार्यकारिणी की एक दिवसीय बैठक पूर्वाह्न 10 से 5 बजे तक बैठक दो सत्रों में स्टेशन रोड स्थित होटल ग्रीन होरिजन में की गयी। जिसमें विगत माहों में संपन्न हुए कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी। साथ ही आगामी कार्यक्रमों की योजना बनायी गयी। बैठक में 9 नवंबर को गोपाष्टमी तथा 15 दिसंबर से 31 दिसंबर तक धर्मरक्षा दिवस कार्यक्रम करने का निर्णय लिया गया।
झारखंड के सभी जिलों के विद्यालयों से संपर्क कर नैतिक शिक्षा के तहत रामायण ज्ञान की पुस्तकों को पढ़ाकर बच्चों को भगवान राम जी के जीवनमूल्यों से परिचय कराने पर बल दिया गया। बैठक में लोकतंत्र के महापर्व में समस्त हिंदू समाज को राज्यहित में शत-प्रतिशत मतदान करने का आह्वान किया गया।
इस महापर्व को सफल बनाने के लिए सभी स्तरीय कार्यकर्ताओं को गांव-गांव तक जोड़कर संपन्न करने पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा सनातन हिंदू समाज की संस्कृति एवं परंपरा निरंतर निर्बाध रूप से भारतीय भू-धरा पर बनी रहे इसके लिए राष्ट्रीय चिंतन करने वाले समूह को अपना मतदान करें।
बैठक में क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल, क्षेत्र सहमंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, झारखंड प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत, प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, सुनील गुप्ता, प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार, रामनरेश सिंह, बजरंग दल प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, प्रांत मातृशक्ति प्रमुख दीपा रानी कुंज, विशेष संपर्क प्रांत प्रमुख अरविंद सिंह, प्रांत धर्माचार्य संपर्क प्रमुख युगल किशोर, मंदिर अर्चक पुरोहित प्रांत प्रमुख देवेन्द्र गुप्ता, धर्मप्रसार प्रान्त प्रमुख संजय चौरसिया, सहित सभी विभाग मंत्री, विभाग संगठन मंत्री, जिलाध्यक्ष, जिला मंत्री उपस्थित थे। उक्त जानकारी झारखंड प्रांत के प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र और प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन (93344 33338, 99737 53052) ने दी।
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