एबीएन सोशल डेस्क। मौनी अमावस्या के दिन गंगा में स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गये पाप धुल जाते हैं। मां गंगा की कृपा भी भक्तों पर बरसती है। कुंडली में शामिल अशुभ ग्रहों से मुक्ति मिलती है। इस बार माघी अमावस्या पर कई शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। आइए जानते हैं कौन से हैं ये शुभ योग और इस दौरान क्या करना चाहिए क्या नहीं।
वैदिक पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष की अंतिम तिथि को मौनी अमावस्या है। इसे माघी या मौनी अमावस्या भी कहते हैं। इस बार माघी अमावस्या 29 जनवरी को है। सनातन धर्म में मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने की परंपरा है। इस शुभ अवसर पर भक्त गंगा तट पर स्नान करते हैं, ध्यान करते हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा में स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गये पाप धुल जाते हैं। मां गंगा की कृपा भी भक्तों पर बरसती है। कुंडली में शामिल अशुभ ग्रहों से मुक्ति मिलती है। इस बार माघी अमावस्या पर कई शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। आइए जानते हैं कौन से हैं ये शुभ योग और इस दौरान क्या करना चाहिए क्या नहीं।
मौनी अमावस्या पर दुर्लभ शिववास योग का संयोग बन रहा है। शिववास का संयोग मौनी अमावस्या यानी 29 जनवरी को सायं 06: 05 मिनट तक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव कैलाश पर मां गौरी के साथ विराजमान रहेंगे।
टीम एबीएन, रांची। अद्भुत अलौकिक, अवर्णणीय, अविस्मरणीय, आस्था का महाकुंभ 2025। ईश्वरीय आस्था और आमजनों की उसमें आस्था का प्रबल प्रवाह। सनातन के ब्रह्मामांडीय ज्ञान का प्रतिबिंब। प्रकृति के सम्मान का प्रबल उद्घोष महाकुंभ। मातृरूप में मां गंगा की गोद में समर्पित यमुना का नाम रूप का गंगा में अपने को विलीन करने का संकेत। संदेश सनातन के उच्च आदर्शों का, जिसमें सन्निहित मापदंडों को सहज बुद्धि और दुबुर्द्धि से समझना असंभव।
जीव का शिव से संगम। प्रबल आर्त से सनातन का उद्घोष। विश्व नहीं ब्रह्मांड के कल्याण की अवधारणा। नाश और निर्माण का संगम महाकुंभ तीर्थराज प्रयाग 2025 का चिंतन, मनन और आशीर्वाद देने वाले सभी जनों को सनातन गौरव का अहसास पाने का महाकुंभ। तन से न पायें तो मन से अवश्य जायें। दरश, परस अंजन अरू पाना। जय महाकुंभ जय सत्य सनातन। मौनी अमावस्या की शुभकामना। 29 जनवरी 2025
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि मौनी अमावस्या का पर्व हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व रखता है। यह माघ माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस साल मौनी अमावस्या 29 जनवरी यानी बुधवार को है। इस दिन मौन व्रत रहकर स्नान करना चाहिए। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान आदि कर पूरे दिन मौन रहकर उपवास करते हैं।
इस दिन भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ अमावस्या के दिन संगट तट और गंगा पर देवी-देवताओं का वास होता है। इस समय प्रयागराज में महाकुंभ भी चल रहा है। मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में अमृत स्नान भी होगा। महाकुंभ के अमृत स्नान के समय में गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद ही शुभ रहता है।
जो व्यक्ति इस समय गंगा स्नान या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।महाकुंभ के दौरान अमृत स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। जो आत्म- निर्माण, साधना और मानसिक शांति का प्रतीक है। इस दिन विशेष रूप से मौन व्रत रखने की परंपरा है, जिससे व्यक्ति अपने भीतर की आंतरिक शांति और संतुलन की ओर अग्रसर होता है।
वहीं, प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला इस दिन और भी विशेष बन जाता है, जहां लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान करने के लिए जुटते हैं। प्रयागराज जिसे त्रिवेणी संगम के नाम से भी जाना जाता है, यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का मिलन होता है। यह स्थान हिंदू धर्म के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है, जहां हर 12 वर्षों में महाकुंभ मेला आयोजित होता है।
इस दिन लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान कर अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करने का विश्वास रखते हैं। खासकर मौनी अमावस्या के दिन कुंभ मेला अधिक श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में महाकुंभ स्नान का महत्व अत्यधिक है। माना जाता है कि इस दिन गंगा-यमुनाजी में स्नान करने से व्यक्ति के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
साथ ही, इस दिन विशेष रूप से मौन रहकर साधना, ध्यान और पूजा करने का महत्व भी है। श्रद्धालु इस दिन मौन रहकर आत्म-निरीक्षण करते हैं और अपनी मानसिक शांति के लिए ध्यान करते हैं। यह दिन आत्मा की शुद्धि का होता है, जहां व्यक्ति अपने भीतर की आवाज को सुनकर ईश्वर से जुड़ने की कोशिश करता है।महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में स्नान, पूजन और तर्पण के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठान भी बड़े धूमधाम से होते हैं।
यह पर्व न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगम भी है, जहां देश-विदेश से लाखों लोग एकत्रित होते हैं। यहां साधु-संतों, योगियों और भक्तों की अनूठी साधना देखने को मिलती है, जो पूरी दुनिया को शांति और प्रेम का संदेश देती है। प्रयागराज में महाकुंभ स्नान का आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक पुण्य अवसर है, बल्कि यह समाज में धार्मिक सौहार्द और एकता का प्रतीक भी बनता है।
इस दिन विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिससे मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। वहीं, समाज के प्रत्येक वर्ग के लोग इस अवसर का लाभ उठाते हुए जीवन की वास्तविकता को समझने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार, मौनी अमावस्या और महाकुंभ का संगम न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में सामूहिक शांति, सद्भाव और समृद्धि का संदेश भी देता है। यह दिन हमें आत्म-निर्माण और आत्म-शुद्धि की ओर प्रेरित करता है, जिससे हम अपनी आत्मा को शुद्ध कर जीवन में सुख-शांति प्राप्त कर सकें।
टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के कडरू स्थित सिस्टर्स आफ लिटिल फ्लावर (बेथानी धर्मसंघ) की 01 धर्मबहन ने 50वर्षीय एवं 06 धर्मबहनों ने 25वर्षीय अपने समर्पित जीवन का जंयती मनाया। इस जंयती का धन्यवादी मिस्सा बलिदान रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद द्वारा उनके प्रोविंशियल हाऊस कडरू में अर्पित किया गया।
आज बेथानी सिस्टर्स की 01 धर्मबहन सिस्टर लूसी सेवरीन डिसूजा ने 50 वर्षीय जयंती एवं 06 धर्मबहनों सिस्टर अग्नेस टेटे, सिस्टर अनीता सोरेन, सिस्टर अनुज्योति, सिस्टर मोनिका डुंगडुंग, सिस्टर रंजना एवं सिस्टर रोजलिन क्लारा ने 25वर्षीय जंयती मनायी। इस जुबिली अवसर पर धन्यवादी पवित्र मिस्सा बलिदान का आयोजन रहा, जिसकी अगुवाई रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने की।
महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने अपने धर्मोपदेश में कहा कि हमारे जीवन में विभिन्न उपलक्ष्य का जयंती आनंद का कारण बनता है किन्तु उस से भी बढ़ कर हमारे जीवन में हृदय एवं मन का परिवर्तन सबसे बड़ा आनंद का क्षण होता है। चूंकि आज कैथोलिक कलीसिया प्रेरित संत पौलुस के मन परिवर्तन का पर्व मानती है इसलिए संत पौलुस के मन परिवर्तन का उदाहरण देते हुए रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने सभी जुबिली मानने वाली धर्मबहनों को घमंड से नम्र बनने, आज्ञाकारी बनने एवं सीखने की की इच्छा रखने का संदेश भी दिया।
मिस्सा के पश्चात सभी जुबिली मानने वाली धर्मबहनों के आदर में एक छोटा सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों को उनके समर्पित जीवन जीने, सेवा का भाव रखने आदि के लिए विशेष धन्यवाद दिया गया। महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने भी बेथानी धर्मबहनों के जुबली के उपलक्ष्य में उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया साथ ही आगे भी अच्छे एवं स्वास्थ्य जीवन की कामना करते हुए उन्हें उनके जंयती के अवसर पर बधाईयां एवं शुभकामनाएं देते हुए ईश्वर की आशीष के लिए विशेष प्रार्थना किया। महाधर्माध्यक्ष ने जुबिली मानने वाले सभी धर्मबहनों चादर ओढ़ा कर सम्मानित भी किया।
बेथानी धर्मबहनों के जुबिली के अवसर पर रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद, संत अल्बर्ट कॉलेज रांची के निर्देशक फाङ्म अजय कुमार खलखो, फाङ्म जॉन क्रस्टा, फाङ्म रोनाल्ड, फाङ्म रेजीनाल्ड, डोरंडा के पल्ली पुरोहित फाङ्म पीटर सांगा, फाङ्म आंद्रियास, फाङ्म ब्राइट, महाधर्माध्यक्ष के सचिव फाङ्म असीम मिंज अन्य पुरोहितगण, बेथानी धर्मसंघ की प्रोविंशियल सिङ्म जेसी मारिया एवं विभिन्न स्थानों में कार्यरत बेथानी धर्मसंघ की धर्मबहनें उपस्थित रहे।
एबीएन सोशल डेस्क। बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने और भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जिले को बाल विवाह और बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए गैरसरकारी संगठन काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान के जागरूकता वाहन को बदायूं की जिलाधिकारी निधि श्रीवास्तव ने कलेक्ट्रेट से रवाना किया।
काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान (केएसएसवीएस) का यह मोबाइल वाहन जिले की 50 से भी ज्यादा ग्राम पंचायतों में घूम-घूम कर बाल विवाह और बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता का प्रसार करेगा। केएसएसवीएस बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए देश के 416 जिलों में जमीनी स्तर पर काम कर रहे 250 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है।
गांवों और कस्बों में घूम-घूम कर जागरूकता के प्रसार के लिए नारों और पोस्टरों से सुसज्जित इस मोबाइल वैन में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए पहले से रिकार्ड किए गए संदेश होंगे जो ग्रामीणों को सुनाए जाएंगे। लोगों के किसी सवाल का जवाब देने के लिए वैन में एक सामुदायिक सामाजिक कार्यकर्ता भी होगा।
इस मौके पर जिलाधिकारी ने कहा कि देश से बाल विवाह की बुराई समाप्त करने के लिए भारत सरकार ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया है। इसके तहत सभी हितधारकों को साथ लेते हुए ग्राम पंचायतों, स्कूलों और प्रखंडों में लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया जायेगा और उन्हें बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई जायेगी। प्रशासन सभी के सहयोग से बदायूं जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मौके पर आकांक्षा समिति की सचिव रूबी शर्मा, एसडीएम कल्पना जायसवाल, एडीएम नम्रता सिंह, बाल कल्याण समिति की सदस्य सविता मालपाणी व नंद किशोर पाठक, जिला प्रोबेशन अधिकारी अभय कुमार, जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण अधिकारी रवि कुमार व चाइल्डलाइन समन्वयक कमल शर्मा व केएसएसवीएस के समस्त कार्यकर्ता मौजूद थे।
केएसएसवीएस सामुदायिक केंद्रों, स्कूलों और यहां तक कि मंदिरों, मस्जिदों, गिरिजाघरों जैसे धार्मिक स्थलों में बाल विवाह और बाल मजदूरी के खिलाफ जागरूकता का प्रसार कर रहा है। पोस्टरों और बाल विवाह एवं बाल श्रम के खिलाफ लोगों को शपथ दिलाने के अलावा इस गैरसरकारी संगठन ने लोगों को बाल विवाह के सामाजिक, कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।
इस मौके पर काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान की सचिव मीना सिंह ने कहा कि जागरूकता के प्रसार की दिशा में हम जो भी कदम उठाते हैं, वह बाल विवाह मुक्त भारत की दिशा में उठाया गया कदम है। हम भारत सरकार, सरकारी विभागों और स्थानीय प्रशासन के आभारी हैं जहां हर कोई मिलकर साझा प्रयासों से जिले से जल्द से जल्द बच्चों के प्रति अपराधों के खात्मे के लिए दृढ़संकल्पित है।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी के तौर पर हम बाल विवाह और बाल मजदूरी के खात्मे के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं और इस मुहिम में सभी हितधारकों के साथ आने से हम अब अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आश्वस्त हैं। बताते चलें कि काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान ने वर्ष 2024-2025 में ही 300 परिवारों से यह हलफनामा लिया है कि वे अपने बच्चों का विवाह उनकी कानूनी रूप से वैध उम्र से पहले नहीं करेंगे।
जमीनी स्तर पर इन प्रयासों का स्वागत करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संयोजक रवि कांत ने कहा- बाल विवाह की बुराई की जड़ें हमारे समाज में गहरे तक पसरी हुई हैं और इसके खात्मे के लिए एक पारिस्थितिकी या परिवेश के अभाव की वजह से यह अब तक जारी है। हालांकि, अब चीजें तेजी से बदल रही हैं।
भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के साथ ही अब सभी हितधारक एक साझा लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एकजुट होकर साझे प्रयास कर रहे हैं। इन प्रयासों से स्पष्ट है कि किस तरह अब हम इस मुद्दे पर हम नीतिगत स्तर से लेकर जमीनी स्तर पर जागरूकता और संवाद के माध्यम से सामूहिक रूप से इस चुनौती का मुकाबला कर रहे हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग द्वारा हरमू मुक्तिधाम में राजू कुमार का दाह संस्कार किया गया। चौवन वर्षीय राजू कुमार जो जनजातीय समाज से था, उसकी मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हो गयी। राजू कुमार पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से राधारानी कुष्ठ आश्रम में रहते थे।
बीमारी के कारण घरवालों ने उन्हे त्याग दिया था और उन्होंने घर को वह खुद भी भूल चुके थे कि वह कहां से है, ठीक होने के बाद वह वहीं आश्रम में रहकर कुष्ठ रोगियों की सेवा किया करते थे। उनका आगे पीछे कोई नहीं था। विश्व हिन्दू परिषद झारखंड के सेवा विभाग के विश्व हिन्दू परिषद झारखंड के प्रांतीय सह सेवा प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल ने उनके विधिवत दाह संस्कार करने का बीड़ा उठाया।
नारनौली अग्रवाल समाज के संतोष अग्रवाल जिन्होने अबतक 50 से अधिक अनाथ शवों का दाह संस्कार किया है। अपने अनुज राजेश अग्रवाल के साथ उनको मुखाग्नि दी और चिता को सजाया विजय मिंज ने। प्रकाश बजाज, ओम प्रकाश सर्राफ, जितेन्द्र महतो कांके, अभय मिंज, आशीष मिंज, मनोज मुंडा काटमकुल्ली पिठूरिया, उत्तम साहू राहे, महेन्द्र लोहरा जगन्नाथपुर, विहिप के प्रान्तीय उपाध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद सिंह मुंडा, विहिप रांची महानगर के कैलाश केसरी, सेवा विभाग के प्रांतीय सह सेवा प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल, महेन्द्र अरोड़ा गुरुद्वारा, चन्द्रभान तनेजा राधाकृष्ण मंदिर (बिरला मैदान) रातू रोड़ सूरज झंडई नानक सेवा जत्था सभी ने अंतिम संस्कार के समय उन्हें भावभीनी श्रद्धांजली अर्पित की और उनकी सद्गति के लिए प्रार्थना की।
विहिप सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि रांची महानगर में किसी भी अनाथ के दाह संस्कार का दायित्व सेवा विभाग विश्व हिन्दू परिषद झारखंड की रांची महानगर शाखा ने उठाया हुआ है। पिछले 10 वर्षों में एक हजार से अधिक मृतकों को विधिवत सनातन रीति से पंचतत्व में विलीन कराया गया है, किसी ने सच ही कहा है जिसका कोई नहीं उसका भगवान होता है। मृतक राजू कुमार के शव को पंचतत्व में विलीन हेतु पूरा समाज उठ खड़ा हुआ।
एबीएन सोशल डेस्क। मकर संक्रांति महापर्व निजी तौर पर मनाये जाने के बाद गायत्री परिवार साधक-शिष्यों और भाई-बहनों ने समूह प्रतिनिधित्व में गायत्री प्रज्ञापीठ बस स्टैंड धूर्वा में 19 जनवरी रविवार को एक सामूहिक गोष्ठी के साथ मकर संक्रांति मनाया। दही चूड़ा गुड़ तिलकूट प्रसाद का समूह आनन्द लिया।
इसमें रांची जिला समन्वय समिति के नवगठित सदस्यगण तथा धूर्वा क्षेत्र के प्रज्ञा मंडल, महिला मंडल स्वाध्याय मंडल ने शान्तिकुञ्ज द्वारा प्रतिपादित ज्ञानघट, धर्म घट,ज्ञान रथ, अंशदान, यज्ञीय अनुष्ठान, संस्कार परम्परा, झोला पुस्तकालय, प्रभात फेरी, बाल संस्कारशाला, वृक्षारोपण, नशा मुक्ति आन्दोलन, सामूहिक साधना, मंत्र-जप, मंत्र लेखन, दीवार लेखन, स्वच्छता अभियान, सामूहिक स्वाध्याय व संस्कृति ज्ञान परीक्षा, स्टीकर साटन व अभियान, मासिक पत्रिका-अखंड ज्योति, युग निर्माण योजना, प्रज्ञा अभियान पाक्षिक, युग शक्ति युग प्रवाह और संगठन की रीति नीति, एक मासीय युग शिल्पी शिविर सत्र, नौ दिवसीय सत्र की रचनात्मक क्रिया-कलाप आदि अनेक विषयों पर विचार-विमर्श व चर्चाएं हुईं। नये पुराने मंडलों के सकारात्मक व सक्रिय कार्यक्रम आयोजनों पर प्रकाश डाला गया।
साथ ही रांची शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हुए दिव्य ज्योति व शक्ति
कलश रथ-दर्शन भ्रमण यात्रा प्रखंडीय स्तर पर अनुकुल व सकारात्मक समीक्षात्मक विश्लेषण कर बहुत आश्चर्यजनक खुशी जाहिर की गयी। मुख्य ट्रस्टी मनोजकुमार राय, जेएनपी, राजू कुमार सहित, रामवरण सिंह और शोभा दीदी, संजू सरस्वती दीदी, कौशल्या दीदी, विमला दीदी ने शान्तिकुञ्ज की योजनात्मक कार्यक्रम सूत्रों पर विचार व्यक्त किये।
अगले कार्यक्रम की रूप रेखा का शान्तिकुञ्ज मुख्यालय के निर्देशानुसार करने का आश्वासन दिया गया। इस बीच पीछले माह दिवंगत हुए वरिष्ठ साधक एवं शक्तिपीठ सेक्टर टू के पूर्व व्यवस्थापक व कर्मठ परिजन स्वर्गीय सुरेन्द्र प्रसाद शर्मा की दिवंगत आत्मा को शत-शत नमन कर दो मिनट का मौन धारण कर शोक व दुख व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम गुरु-ईश ध्यान नमन वंदन व, प्रज्ञागीत गायन कर शुभारंभ किया गया। साथ ही इस गोष्ठी में चान्हों प्रखंड के समन्वयक नन्दकिशोर साहु ने भागीदारी कर अपने प्रखंड की प्रगतिशील कार्य की चर्चा कर आगे के कार्यक्रम का आमंत्रण दिया और कहा कि समयानुसार नये जनों को जगाते और जोड़ते जाने के अभियान को जारी रखना है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के मनोज कुमार राय, मुख्य ट्रस्टी, गायत्री प्रज्ञापीठ मंदिर एवं जय नारायण प्रसाद, रांची ने दी।
टीम एबीएन, रांची। गायत्री तीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धुर्वा में महिला मंडल प्रतिनिधियों ने मंजू पाण्डे परिवार में अपने पौत्र शिशु का जन्मदिवस संस्कार दीपयज्ञ में वैदिक विधान से मनाया। इस अवसर पर शक्तिपीठ पुजारी रणवीर कुमार ने जन्मोत्सव मनाने की खूबियों, विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जीवन में जन्मोत्सव भी एक व्रत धारण की तरह है।
व्रतों के बंधन में बंधा हुआ व्यक्ति किसी उच्च लक्ष्य की ओर अग्रसर हो सकने में समर्थ हो सकता है। कहा कि शुभ अवसरों पर भावनात्मक वातावरण में देवताओं की उपस्थिति में, अग्नि की साक्षी में व्रत धारण करना चाहिए और उनका पालन करने के लिए साहस एकत्रित करने चाहिए।
डफली पर प्रज्ञागीत गायन कर किया गया और थाली में दीपक सजा कर प्रज्ज्वलित कर पंच तत्वों का पूजन-अर्चन सहित अखंड दीपक की तरह हमें अखंड पात्रता प्राप्त हो, हमारी निष्ठा ऊर्ध्वमुखी हो, हम जीवन को कल्याणकारी मार्ग पर चलायेंगे जैसे सूत्रों से संकल्प कराकर दीपयज्ञ विधान हुआ। दीपयज्ञ विधान के उपरांत जन्मदिवस संस्कार कराया गया।
साथ ही बताया कि अपनी कमियों, खामियों व बुराइयों को संकल्पपूर्वक त्यागने के लिए जन्मदिवस का शुभ अवसर बहुत ही उत्तम है। अंत में आत्मबोध व वैदिक मंत्रों से आशीर्वचन पाठ कर शिशु के यशस्वी जीवन व उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना पुष्प वर्षा से सभी ने उनके मंगलमय जीवन की जयघोष किया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse