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Published / 2026-04-06 21:25:25
मोक्ष ही जीवन का अंतिम सत्य, आत्मा का सर्वोच्च उत्सव : प्रमाण सागर जी महाराज

टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के छठे एवं अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक की पावन वेला में मुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ने आत्मा की परम सिद्धि पर आधारित प्रेरणादायी व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा जब कोई बड़ा लक्ष्य लेकर निकलते हैं और इसकी पूर्णता होती है तो एक अलग प्रकार के आनंद की अनुभूति होती है मुझे लग रहा है। 

आप लोगों को भी ऐसी ही अनुभूति हो रही है लेकिन मुझे आपकी आनंद अनुभूति अल्पकालिन लग रही हैं, क्योंकि हमारे लक्ष्य रोज बदल जाते हैं। एक लक्ष्य को पूर्ण करते हैं और दूसरा सामने आ जाता है खाने का तात्पर्य है कि संसार की जितनी भी उपलब्धियां है वह संतुष्टि देता है वह अल्पकालिक होती है आज भगवान सिद्ध अवस्था को प्राप्त हुए उनके जीवन के चरम लक्ष्य की उपलब्धि थी, इसके बाद और कुछ नहीं हैं। 

मोक्ष कोई दूर की मंजिल नहीं, बल्कि भीतर की विकार-रहित अवस्था है। जब राग-द्वेष की ज्वाला शांत होती है, तभी आत्मा में सिद्धत्व का प्रकाश प्रस्फुटित होता है। सिद्ध यानी जिन्होंने अपने करने योग्य सब काम को कर लिया वो सिद्ध हैं, अब वे कृतार्थ हो चुके हैं। महाराजश्री ने बताया कि पंचकल्याणक का क्रम आत्मा की विकास यात्रा को समझाने वाला दर्पण है गर्भ, जन्म, दीक्षा, ज्ञान और अंतत: मोक्ष। 

उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि मोक्ष की प्राप्ति संभव है जब मनुष्य अपने भीतर संयम, समता और स्वच्छ चर्या का निरंतर अभ्यास करे,। मुनिश्री ने कहा कि मोक्ष कल्याणक केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर है। यदि हम अपने जीवन से अहंकार, क्रोध और लोभ को निकाल दें, तो मोक्ष का मार्ग यहीं से खुलना शुरू हो जाता है। छठे दिन के अनुष्ठानों में शांति-स्नात्र, मोक्ष कल्याणक विधान, भक्तामर एवं भगवान आदिनाथ के मोक्ष की कथा का भावपूर्ण वाचन हुआ। सभा स्थल पर रांची की महापौर रोशनी खलखो ने मुनिश्री से आशीर्वाद लिया। 

पूरी कमेटी के लोगों को मुनिश्री ने सानंद प्रतिष्ठा पूर्ण होने पर विशेष आशीर्वाद दिया और अच्छी व्यवस्था पर बधाई दी। बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों ने संयम, सदाचार एवं अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। रेखा पांड्या ने महापौर महोदया का प्रतीक चिह्न देकर स्वागत किया, मुनिश्री ने उन्हें आशीर्वाद दिया। मंत्री जीतेंद्र छाबड़ा ने सभी को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल ने सभी मीडिया, संवाददाताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, तथा कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया जिनके सहयोग से यह उत्सव सानंद सम्पन्न हुआ। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।

Published / 2026-04-06 20:28:42
कथा व्यास मां चैतन्य मीरा जी की श्रीमद् भागवत कथा आज से

कलश यात्रा प्रात: 9 बजे से राम मंदिर से चुटिया धर्मशाला तक 

टीम एबीएन, रांची। रांची में मां चैतन्य मीरा जी द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। मुख्य जजमान टिबडेवाल परिवार की ओर से 07 से 13 अप्रैल 2026 तक अपर चुटिया स्थित सेठ राम राम पोद्दार स्मृति भवन में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन होगा। कथा का वाचन सुप्रसिद्ध कथा व्यास मां चैतन्य मीरा जी प्रतिदिन रदोपहर 02:30 बजे से करेंगे। 

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलवार को सुबह 09 बजे राम मंदिर से भव्य कलश यात्रा के साथ होगा। मुख्य यजमान रघुनंदन जी टिबड़ेवाल हैं, इस धार्मिक उत्सव के आयोजन में से रामेश्वर लाल पोद्दार भवन ट्रस्ट मंडल का सहयोग जारी है। सोमवार को पोद्दार धर्मशाला चुटिया में आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों को यह जानकारी न्यास मंडल फतेहचंद अग्रवाल, न्यास सचिव राधेश्याम अग्रवाल कोषाध्यक्ष, कमल अग्रवाल सदस्य ने दी। 

उन्होंने बताया कि मंगलवार को कलश यात्रा  प्रात: 09  बजे (राम मंदिर से चुटिया धर्मशाला तक) होगी। वहीं 13 अप्रैल को सुबह 09:30 बजे से अपराह्न 12:30 बजे तक कथा व्यास मां चैतन्य मीरा जी का कथा वाचन होगा। संवाददाता सम्मेलन में मुख्य यजमान रघुनंदन जी टिबड़ेवाल, कार्यक्रम संयोजिका रेखा अग्रवाल मीडिया प्रभारी अनू पोद्दार व अन्य उपस्थित थे।

Published / 2026-04-05 19:21:50
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन 7 अप्रैल से

  • सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन 7 अप्रैल से
  • पावन कथा का वाचन सुप्रसिद्ध कथा व्यास मां चैतन्य मीरा जी के श्रीमुख से होगा

टीम एबीएन, रांची। सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार भवन न्यास मंडल के तत्वावधान में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य एवं दिव्य आयोजन रांची के चुटिया स्थित सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन (धर्मशाला) में 7 अप्रैल से 13 अप्रैल तक किया जाएगा।यह आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, ज्ञान और संस्कारों का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा।

इस पावन कथा का वाचन सुप्रसिद्ध कथा व्यास मां चैतन्य मीरा जी के श्रीमुख से प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे से सायं 5 बजे तक किया जाएगा। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति के महत्व एवं जीवन के आध्यात्मिक रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को धर्म, ज्ञान और भक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।कार्यक्रम का शुभारंभ 7 अप्रैल को प्रातः 9 बजे भव्य कलश यात्रा के साथ होगा।

यह कलश यात्रा राम मंदिर से प्रारंभ होकर चुटिया धर्मशाला तक पहुंचेगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं एवं पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेंगे। कलश यात्रा के दौरान भक्ति गीत, भजन एवं जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा। इस धार्मिक आयोजन के मुख्य यजमान रघुनंदन टिबड़ेवाल हैं। 

कथा का आयोजन समस्त टिबड़ेवाल परिवार के सौजन्य से किया जा रहा है, जिनकी सक्रिय सहभागिता से यह कार्यक्रम भव्य रूप ले रहा है। आयोजन से जुड़ी जानकारी देते हुए कार्यक्रम संयोजिका रेखा अग्रवाल एवं मीडिया प्रभारी अनु पोद्दार ने बताया कि इस सात दिवसीय कथा के माध्यम से समाज में धार्मिकजागरूकता एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रसार किया जाएगा। 

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पुण्य अवसर का लाभ उठाएं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि समाज में एकता, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का भी संदेश देगा। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी अनु पोद्दार (94311 65000) ने दी।

Published / 2026-04-04 20:28:15
अपने भीतर संस्कारों के दीप जलाइए, बाहर का अंधकार अपने आप मिट जायेगा : जैन मुनि

एबीएन सोशल डेस्क, रांची। बिरसा मुंडा फन पार्क में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन शनिवार को तप कल्याणक का आयोजन अत्यंत श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। प्रात: 6 बजे से अभिषेक नित्य पूजन के बाद तप एवं दीक्षा कल्याणक की क्रिया के बाद पुन: 12 बजे तप कल्याणक के अन्तर्गत नाभिराय का दरबार, राज्याभिषेक, षट्कर्म उपदेश, महाराजा आदिकुमार का वैराग्य एवं दीक्षा विधि पूर्ण की गयी। इस दौरान प्रात: 8.30 बजे मुनिश्री का प्रवचन हुआ जिसमें उन्होंने जीवन की सार्थकता, आत्म-जागरण और विचार-शुद्धि पर विस्तृत एवं प्रेरणादायक मार्गदर्शन दिया। 

उन्होंने कहा कि मनुष्य बाहर की परिस्थितियों को बदलने में जितना प्रयास करता है, यदि उतना ही अपने मन, विचार और स्वभाव को बदलने में करे, तो जीवन स्वत: ही शांत, सुव्यवस्थित और सफल बन जाता है। एक जिज्ञासु किसी संत के पास पहुंचा उनके चरणों में निवेदन किया कि मैं गुरुदेव एक माह से लगातार आपको सुन रहा हूं आपकी बातें अच्छी लगती है। आप कहते हैं कि क्रोध बुरा है। लोभ बुरा है। मोह बुरा है। कषाय बुरा है। अच्छा लगता है। 

आप बताते हैं कि पाप हमारा शत्रु है मन को छूता है लेकिन इसके बावजूद न तो मैं पापों से मुक्त हो पाता हूं न हीं कषायो पर नियंत्रण कर पाता हूं आखिर इससे कैसे बचा जाए। उनकी बातें सुनकर संत मुस्कुराए। उन्होंने पूछा तुम कहां से आए हो? उत्तर दिया- मैं श्रावस्ती से आया हूं। तो उन्होंने कहा- श्रावस्ती से कौशांबी कितनी दूरी है? परंतु तुम कैसे आये हो? सिर्फ चर्चा करने से तो नहीं पहुंचे।

तो उसने कहा चल कर आया हूं फिर संत ने कहा कि इस तरह तुम्हें इस मार्ग पर चलना होगा फर्क तो तब पड़ता है जब तुम चलोगे आज तप कल्याणक है आज देखेंगे भगवान राज पाट का परित्याग कर निकलेंगे वन की ओर, उनका दीक्षा कल्याणक है आपकी कोई तैयारी नहीं है जब तक मंजिल की और नहीं पहुंचेंगे चलना तो पड़ेगा आज चलो या कल इस भाव में चलो या अनंत भाव बाद चलना तो पड़ेगा अपने जीवन में त्याग को जीवन का आदर्श बनाकर त्यागियो के अनुगामी बनो।

त्यागियो की अनुगामी बनने का अर्थ उनके पीछे चलना नहीं अपितु उनकी शक्तियों का अनुशरण करना है, चिंतन, मनन, प्रवचन बहुत हुआ अब कुछ करिए आगे बढ़िये। आवरण के सामने ही प्राय नयन नम जाती है और आचरण के सामने आते ही प्राय कदम थम जाती है। धन की रक्षा में प्रवेश करने वाले को सबसे प्रथम कार्य है कुलाचर का पालन, कुलाचर का मतलब हमारे कुल कामागत जो संस्कार है उनका दृढ़ता से अनुपालन। अभक्ष्य का परहेज सात्विक का पालन अपनी खानपान प्रवृत्तियों में दया का पालन यह आपका कूलाचार है जो हमें घुटियों के संस्कार में मिला।

हम भाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म ऐसी कुल में हुआ जहां पीढ़ियों से हिंसा और हत्या नहीं हुई। खोज किया जाए तो हमारे डीएनए में अहिंसा है। अपेक्षाओं का बोझ मनुष्य को थका देता है। जितनी कम अपेक्षाएँ, उतनी अधिक शांति। कर्म से पहले विचार आता है। यदि विचार श्रेष्ठ होंगे, तो कर्म अपने आप श्रेष्ठ बन जाएंगे। अहिंसा केवल शारीरिक न हो, वाणी और विचार की अहिंसा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। 

अपने भीतर दीप जलाइए, बाहर का अंधकार अपने आप मिट जायेगा। मनुष्य के आचरण का पता उसके कुल से लग जाता हैं। कुछ लिखकर सो कुछ पढ़ कर सो जिस जगह जागा सवेरे, उससे बढ़कर सो, एक सीढ़ी बढ़ के सो। मध्याह्न में आदि कुमार की बारात के साथ वैराग्य और दीक्षा विधि संपन्न हुई। संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम में तप और दीक्षा का चित्रण किया गया। जिस तरह की विधि संस्कार पूजन के माध्यम से पंडाल में हुआ वही प्रक्रिया मंदिर की प्रतिमाओं में भी संपन्न हुई मध्याह्न बेला में मुनिश्री के द्वारा मंदिर जाकर वहां की विधि को भी संपन्न किया गया।

गृह त्याग, वस्त्र त्याग, केश लोचन, आदि सभी प्रक्रिया की गई। राँची के अलावा पूरे भारत के कई स्थानों से लोग इस प्रयोजन हेतू पहुंचे। कल दिनांक 05 अप्रैल को प्रात: 07 बजे से मुनिश्री के सानिध्य में भावना योग के फायदे एवं इसे कैसे अपने जीवन में अपनाकर दैनिक क्रियाओं में शामिल करें इसके लिए मार्गदर्शक किया जाएगा। समाज के मंत्री जीतेन्द्र छाबड़ा एवं अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल ने सभी धर्म के लोगों से अपील की गई कि आप अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।

Published / 2026-04-03 21:18:01
जन्म का मूल्य समझो, जीवन को धर्ममय बनाओ : शची इंद्राणी

टीम एबीएन, रांची। बिरसा मुंडा फन पार्क में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को तीर्थंकर बालक के जन्म कल्याणक का भव्य आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के बीच संपन्न हुआ। प्रभु आदिनाथ का जन्मोत्सव पर प्रात: 7:14 बजे इंद्र का सिंहासन कंपायमान हुआ। मंगल ध्वनियों, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नृत्य के साथ पूरे परिसर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। 

सौधर्म इंद्र एवं शची इंद्राणी राजा नाभिराय के दरबार पहुंचे शची इंद्राणी ने माता मरू देवी के गर्भ कक्ष से तीर्थंकर बालक को लिया जिसे सौधर्म इंद्र ने शची इंद्राणी से लेकर नगर भ्रमण करते हुए सुमेरु पर्वत पर स्थित पांडुक शिला पर विराजमान कर अभिषेक किया और नाम आदि कुमार रखा गया। प्रात: काल से ही पूजन और पाषाण से भगवान बनने की क्रिया होती रही ठीक 9 बजे मुनिश्री का प्रवचन हुआ, जिसमें उन्होंने जन्म कल्याणक के विषय में और क्रियाओं के बारे मे बताया जन्म केवल शरीर का नहीं, चेतना के जागरण का भी होता है। 

भगवान आदिनाथ का जन्म हमें भीतर के अज्ञान को मिटाकर सत्य, अहिंसा और संयम को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है। जन्म कल्याणक की पवित्रता और आत्म मोक्ष के मार्ग पर चलने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भगवान के जन्म कल्याणक का उत्सव हमें स्मरण कराता है कि हर जन्म केवल शरीर का नहीं, बल्कि चेतना के जागरण का अवसर है।

जन्म केवल उत्सव नहीं, उत्तरदायित्व है। जिसने अपने जन्म को साधना, संयम और सेवा से जोड़ लिया, वही जीवन का सच्चा सफल बनता है। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य बाहरी उपलब्धियों में उलझकर अंतर्मन के उत्थान को भूल जाता है। पंचकल्याणक हमें आत्मपरीक्षण और आत्म संयम की ओर प्रेरित करता है। 

मुनिश्री ने विशेष रूप से युवाओं से आवाह्न किया युवा शक्ति यदि धर्म की दिशा में जागे, तो समाज का भविष्य उज्ज्वल हो जायेगा। अपने भीतर के भगवान को पहचानो, वही जीवन का वास्तविक परिवर्तन है। जीवन में चार सत्य हैं -जिसने जन्म लिया है मृत्यु निश्चित है यह जीवन का एक सत्य है, ना कुछ लेकर आये हैं न हीं कुछ लेकर जाएंगे यह जीवन का दूसरा सत्य है, जो करेंगे वह भरेंगे यह जीवन का तीसरा सत्य है, मेरा केवल मैं हूं बाकी सब संयोग है यह जीवन का चौथा सत्य है। 

प्रवचन सभा में आदित्य साहू बीजेपी राज्य अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद, नागेन्द्र त्रिपाठी क्षेत्रीय संगठन महामंत्री, कर्मवीर सिंह राज्य संगठन महामंत्री, बालमुकुंद सहाय राज्य उपाध्यक्ष, दीपक बंका राज्य कोषाध्यक्ष, योगेंद्र सिंह राज्य प्रवक्ता भारतीय जनता पार्टी, संजीव विजयवर्गीय पूर्व उपमहापौर, के साथ हजारीबाग, कुनकुरी, कोडरमा, पेटरवार, गोमिया, साड़म, के अलावा देश के कई राज्यों से श्रद्धालु रांची पधारे हैं। मंत्री जीतेंद्र छाबड़ा अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल ने सभी का स्वागत किया और मुनिश्री ने सभी को आशीर्वाद दिया। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी। 

Published / 2026-04-02 21:42:07
सर्वतोभावेन रामकाज में श्रीहनुमान जी के समर्पण व चरित्र चित्रण से जीवंत शिक्षाएं मिलती हैं : गायत्री परिवार

एबीएन सोशल डेस्क। दो दिवसीय कार्यक्रम में गायत्री शक्तिपीठ स्थापना दिवस एवं श्रीहनुमान जयन्ती आयोजन हुए। रांची गायत्री-परिवार साधक-शिष्य भाई-बहनों ने शक्तिपीठ सेक्टर टू में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये। इसमें प्रथम दिन एक अप्रैल गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू का 46वां स्थापना वर्षगांठ बडे धूमधाम व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया। 

प्रथम दिवस एक अप्रैल को दोपहर से शक्तिपीठ सेक्टर टू पर साधकों ने पूज्यवर श्रीगुरुदेव के 1981 एक अप्रैल को रांची आगमन, उनके द्वारा निर्धारित कार्यक्रम आयोजन, वेद माता, देवमाता, विश्व माता गायत्री, सावित्री मूर्ति की स्थापना में स्थापना उद्देश्य, भविष्य सृजन व कथन पर प्रकाश डाला गया। 

इस अवसर पर गायत्री महामंत्र, गुरुवंदना का सस्वर पाठ कर प्रज्ज्वलित अखंड दीप का पूजन-अर्चन कर श्रीराम दरबार, श्री हनुमान एवं बांधव दल को आवाह्न नमन वंदन व  षोडशोपचार पूजन कर सुन्दरकाण्ड का सस्वर पाठ गीत संगीत हारमोनियम वादन किया गया। 

पाठ के पाठन में कांके प्रखंड से टीम नायक सह वाद्य वादक गुरु हरिकिशोर तिवारी के सानिध्य में टीम प्रतिनिधि, हारमोनियम वादक एवं सुन्दरकाण्ड पाठकर्ता काव्य नाथ शाहदेव, गायक सुलोचना शाहदेव, टीम सहायक कामाख्यानाथ शाहदेव  और कीर्ति कुमारी ने सहयोग किया। 

साथ-साथ  गायत्रीपरिवार महिला मंडल,  प्रज्ञा मंडल,  युवा मंडल, स्वाध्याय मंडल के दर्जनोंसदस्यगणों ने आयोजन  व्यवस्था में योगदान किये। इस अवसर पर एक दर्जन पौधों का रोपण किया गया। पाठ के बाद अपने संबोधन में गुरुजी ने बताया कि भगवान श्रीराम प्रभु के अनन्य साथी, सहयोगी, स्वजन, भक्तजन, बन्धु बान्धव सच्चे चरित्रवान रहे थे।

रामकाज में संलग्न भक्त शिरोमणि श्रीहनुमान जी सर्वतोभावेन समर्पित और उनके कठिन से कठिन कार्य कर लेने की प्रेरणास्रोत पर चर्चा हुई। कहा कि भक्त की कसौटी पर खरा होना श्री हनुमान जी से सीखना चाहिए। इसकी जीवन्त शिक्षा इनसे मिलती है।श्रीराम काज में संलग्न श्रीहनुमान जी के जीवन चरित्र में  ऐसे संदेश व प्रेरणाप्रद शिक्षाएं भरी हुई हैं। 

आज दो अप्रैल को सुबह श्रीहनुमान जी को विशेष षोडशोपचार पूजन व चालीसा पाठ, हवन-यज्ञ हुए, युग निर्माण कन्या विद्यालय के  विद्यार्थियों व अध्यापकों भी ने हनुमान जयंती पर पूजन-अर्चन कर यज्ञीय अनुष्ठान विधान किये। 

आज आनलाइन आल इंडिया स्वाध्याय मंडल प्रतिनिधित्व में 12 घंटे का जप-अनुष्ठान आयोजन हुए।  दोपहर महिला मंडल प्रतिनिधित्व में श्रीहनुमान जयन्ती पर स्वाध्याय पाठ किये,  दीपयज्ञ विधान भी किये, प्रसाद वितरण कर समापन हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दिया।

Published / 2026-04-02 18:59:15
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना...

अंजनी को लाल निरालो रे 

श्री राम नाम मतवाला , है लाल लंगोटे वाला  

दुनियां चले न श्री राम के बिना , हनुमान जी चले न श्री राम के बिना  

अंजनी मां के हुयो लाल, बधाई सारा भक्तां न  

टीम एबीएन, रांची। भजनों की लय पर भक्तगण भाव विभोर हुए , अवसर था अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में दिनांक 2 अप्रैल 2026 हनुमान जयंती अत्यंत भक्तिभाव व श्रद्धा के साथ मनाया गया। हनुमान जयंती का उल्लास लिए भक्तगण प्रात:काल से ही वीर हनुमान के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। प्रात:काल में हनुमान जी को नवीन वस्त्र पहनाकर आभूषणों से अलंकृत कर विभिन्न प्रकार के फूलों जैसे गुलाब, जूही, बेला, मोगरा, गेंदा व  से मनभावन श्रृंगार किया गया। 

साथ ही मंदिर में विराजमान शिव परिवार एवं श्री श्याम प्रभु का भी इस अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया। रात्रि 8:30 बजे श्री वीर हनुमान के जयकारों के बीच भक्तगण कतारबद्ध होकर वीर बजरंगबली का दर्शन कर मंगलमय जीवन की कामना कर रहे थे। श्री श्याम मंडल के सदस्यों ने संगीतमय संकीर्तन प्रारम्भ कर भजनों की अमृत वर्षा की। 

मौके पर वीर बजरंगबली को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा का भोग अर्पित किया गया। रात्रि 11:30 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में रमेश सारस्वत, ओम जोशी, चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, विवेक ढांढनीयां, विकास पाडिया, ज्ञानप्रकाश बगला, नितेश लखोटिया, अजय साबू, अरुण धानुका, प्रियांश पोद्दार एवं राजेश सारस्वत का विशेष सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी। 

Published / 2026-04-02 18:55:35
जय जय जय हनुमान गोसाई

कृपा करहु गुरुदेव की नाई 

देही हरो हनुमान महाप्रभु 

जो कछु संकट होय हमारो 

कौन सा संकट मोर गरीब को 

जो तुमसे है जात नहीं टारो 

एबीएन सोशल डेस्क। चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन श्रीराम भक्त बजरंगबली हनुमान जी महाराज का जन्मोत्सव मनाने की परंपरा भारतीय संस्कृति में है। आज का दिन वह शुभ मुहूर्त है जिसमें हनुमान जी भक्तों की पूजा, अर्चना और प्रार्थना से सहज प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। 

संत गोस्वामी तुलसीदास ने स्वयं ही कहा था कि उनके द्वारा रचित हनुमान चालीसा हनुमान जी महाराज की स्तुति में बहुत ही अल्प है।  हनुमान जी महाराज इतने सरल हैं कि अपने परम आराध्य प्रभु श्रीराम का मात्र नाम सुनते ही प्रसन्न हो जाते हैं और शरणागत की दुख हर लेते हैं। 

ज्ञानियों में अग्रणी श्रीराम दूत हनुमान जी महाराज के जन्मोत्सव के शुभ मुहूर्त में आप सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं। हनुमान जी महाराज से विनती है कि अपनी कृपा सभी के ऊपर बनाये रखें।

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