एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार साधक-शिष्यों ने विजया एकदाशी पावन व्रत पर उपवास एवं जप- अनुष्ठान आज प्रात: चार बजे से कल प्रात:चार बजे तक करने का सुविधानुसार समयदान किया और गृहे गृहे सर्व देव पूजन कर शुभारंभ किया। इसमें झारखंड प्रान्त एवं रांची शक्तिपीठ से जुड़े अनेक साधक- शिष्य गण शामिल हुए।
राष्ट्रीय गायत्री साधक समूह आनलाइन जप- अनुष्ठान समूह संचालक ने आनलाइन संदेश दिया कि इस महती दैव योजना में गृह जप में शामिल हो भारत राष्ट् के उत्थान, नवसृजन, सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन, सबको सद्बुद्धि उज्ज्वल भविष्य के निमित्त प्रार्थना में सभी साधक अपने बहुमूल्य समय का एक अंश देने का संकल्प लें और जाग्रत भाव से जप-अनुष्ठान में योगदान करें।
इस पावन अवसर पर शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा परिसर, स्थानीय पीठों एवं मंडल शाखाओं और गृहे-गृहे आवास में साधकों ने भागीदारी की। इसमें साधक सदस्यों ने मंगलाचरण से रक्षा विधान में गुरु, गायत्री, ब्रह्मा विष्णु, महेश तथा सर्वदेव आवाह्न, नमन वंदन सहित विधिवत षोडशोपचार, स्वस्तिवाचन सहित यज्ञ भी किया। अनेक साधकों ने सबके कल्याणार्थ गायत्री महामंत्र, महामृत्युंजय मंत्र के साथ अन्य सहायक मंत्रों के भी जप किए।
इस अवसर पर देश-विदेश से जुड़े अनेक वरिष्ठ साधक, युवा प्रकोष्ठ के सक्रिय साधक तथा कुछ विशिष्ट श्रद्धावान साधक परिजनों ने महामंत्र जप के साथ ध्यान, मंत्र लेखन एवं सामूहिक स्वाध्याय के साथ साथ गायत्री सहस्त्रनाम पाठ भी किये तथा इसके संबंधित विज्ञान पर चर्चा की। इस अवसर पर समूह प्रतिनिधि ने बताया कि गायत्री ईश्वरीय दिव्य शक्तियों का एक पुंज है।
गायत्री सहस्त्रनाम का श्रद्धापूर्वक पाठ का शास्त्रीय महात्म्य है। समूह प्रतिनिधि ने बताया कि सबने इस सामूहिक साधना से उत्पन्न ऊर्जा शक्ति को वेदमाता और गुरुसत्ताश्री के श्रीचरणों में नवयुग सृजन और विश्व कल्याण के निमित्त समर्पित करना है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह झारखंड प्रदेश प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने सपरिवार व इष्ट मित्रों के साथ प्रयागराज महाकुंभ के त्रिवेणी संगम में स्नान किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ (जो हिंदू धर्म की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण आस्था का प्रतीक है) न केवल धर्मावलंबियों के लिए एक पुण्य अवसर है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को भी सहेजने का माध्यम है।
महाकुंभ स्नान जो न केवल व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रमाण है, बल्कि सामाजिक एकता और समर्पण का प्रतीक भी है। महाकुंभ का महत्व सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि यह समूचे समाज को एकजुट करने, शांति और सौहार्द बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। उन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो समाज में धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यताओं को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं।
उन्होंने कहा कि धर्म, संस्कृति और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है और महाकुंभ जैसे पवित्र अवसरों पर भागीदारी हमारी आस्था और समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। इस प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान न केवल व्यक्तिगत आस्था को प्रगाढ़ करते हैं, बल्कि समाज में धार्मिक सद्भावना और आपसी प्रेम का माहौल भी तैयार करते हैं।
उन्होंने कहा कि अब तक 60 करोड़ से भी अधिक श्रद्धालुओं ने प्रयागराज महाकुंभ में स्नान किया है। जो की एक विश्व रिकॉर्ड है। महाकुंभ में परिवार के आनंद अग्रवाल, निर्मल महलका, बद्री सरायका, तुषार, अमित, रजत, अनीता, अनुराधा, सीमा, अंशु, आयुषी, सहित कई लोगों ने स्नान किया।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण और विशेष पर्व है, जो भगवान शिव की पूजा और आराधना के रूप में मनाया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि 26 फरवरी को मनाई जाएगी।
वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट पर है। महाशिवरात्रि पर्व 26 फरवरी को मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि की पूजा में रात्रि के प्रहर की पूजा का महत्व खास माना जाता है। यह दिन भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए सबसे खास माना जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह दिन खासतौर पर उन भक्तों के लिए एक अत्यधिक पुण्यकारी अवसर होता है, जो भगवान शिव की उपासना में विश्वास रखते हैं।
महाशिवरात्रि का अर्थ है शिव की रात और यह दिन भगवान शिव के साथ सम्पूर्ण ब्रह्मांड के रचनाकार, पालनकर्ता और संहारकर्ता के रूप में उनकी पूजा और आराधना के लिए समर्पित होता है। इसे रात्रि के रूप में मनाने का विशेष कारण है कि शिव भक्त इस दिन उपवास रखते हुए रातभर जागरण करते हैं, जिससे उनकी आस्था और समर्पण की गहराई का प्रतीक बनता है।
महाशिवरात्रि का महत्व हिन्दू धर्म में बहुत अधिक है क्योंकि इस दिन भगवान शिव का विवाह पार्वती देवी से हुआ था, जिससे यह दिन शिव और पार्वती के मिलन के रूप में भी मनाया जाता है। विशेष रूप से इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करने, व्रत रखने, रात्रि भर जागरण करने और शिव मन्त्रों का उच्चारण करने का महत्व है। ॐ नमः शिवाय जैसे पवित्र मंत्रों के जाप से भक्तों को पुण्य और शांति मिलती है।
शिव पूजा के कई पारंपरिक रूप हैं, जैसे- भक्तों द्वारा शिवलिंग पर जल चढ़ाना, बेलपत्र अर्पित करना, और दूध, शहद, गंगाजल आदि से अभिषेक करना। इसके अलावा, कुछ लोग इस दिन रात्रि जागरण करते हुए भजन-कीर्तन करते हैं और भक्ति गीतों के माध्यम से भगवान शिव की महिमा का गान करते हैं।
महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से यह विश्वास किया जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा से सभी पापों का नाश होता है और भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, यह दिन आत्मिक उन्नति और एकाग्रता का प्रतीक भी है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था और परंपराओं का अनुसरण करने का एक अवसर है, बल्कि यह समाज में एकता और भक्ति के संदेश को भी फैलाता है।
महाशिवरात्रि का यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि हर व्यक्ति को अपने भीतर के शिव को पहचानने और उसकी उपासना करने की आवश्यकता है।इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और जीवन के उच्चतर उद्देश्य की ओर अग्रसर होने का भी एक माध्यम है।
*विश्व हिंदू परिषद्,झारखंड*
================
प्रेस विज्ञप्ति
=========
*महाकुंभ विराट हिंदू समाज का पुनर्निर्माण –अम्बरीष जी*
======================
23 फरवरी 2025, रामगढ़: *विश्व हिंदू परिषद झारखंड प्रांत कार्य समिति बैठक प्रारंभ*
तीन दिवसीय प्रांत बैठक मारवाड़ी धर्मशाला, रामगढ़ में 22 फरवरी से 24 फरवरी तक चलेगा। बैठक की अध्यक्षता चन्द्रकांत रायपत ने की। इस बैठक में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल ,मातृशक्ति, दुर्गावाहिनी एवं विहिप के अन्य सभी आयाम के प्रान्त, ज़िला अधिकारी एवं कार्यकर्ता बैठक में शामिल हुए। इस बैठक की शुरुआत दीप प्रज्वलित, एकात्मता मंत्र, परिचय के साथ शुरू हुआ । बैठक के उद्बोधन भाषण में अम्बरीष जी ने कहा कि महाकुंभ मेला समरसता का महापर्व देखने को मिला इस महाकुंभ में विराट हिंदू समाज का पुनर्निर्माण हुआ है, हमलोग एक हैं इसलिए हमारी परंपरा एक हैं हमारे देवी देवता एक हैं, हम सब एक सम्मान हैं. जब जन्म के आधार पर कोई बड़ा हो गया जन्म के आधार पर कोई छोटा हो गया था इसलिए हम गुलाम हो गए थे. इस गुलामी में अपने बहुत सारे विचारों के लोग समाप्त हो गए। परंतु गंगा स्नान बंद नहीं हुआ, कुंभ मेला बंद नहीं हुआ, मंदिर बंद नहीं हुआ, हमारे कर्मकांड बंद नहीं हुए। श्री अम्बरीष जी ने कहा कि संत महंतों की यात्रा प्रारंभ रही, शक्ति पीठ यात्रा, चार धाम यात्रा चलता रहा जो लोग इस यात्रा में शामिल नहीं हो रहे हैं, धर्म को बचाने के लिए ये यात्रा बहुत जरूरी है आज बहुत से स्थान में धर्मांतरण हो रहे हैं समाज को फिर से छोटे छोटे टुकड़ों में फिर से बांटने का कार्य किया जा रहा है श्री सिंह धर्मांतरण, लव जिहाद, घुसपैठ, लैंड जिहाद पर चिंता व्यतीत किए। तीन दिवसीय इस बैठक में सभी जिला में विगत 6 माह में किए गए कार्यो की समीक्षा की जाएगी तथा अगामी होने वाले कार्यक्रम के सन्दर्भ में योजना बनाई जानी हैं l इस बैठक में अम्बरीष जी केंद्रीय मंत्री सह विशेष संपर्क प्रमुख, वीरेंद्र विमल पटना क्षेत्रीय मंत्री, बीरेंद्र साहू चंद्रकांत रायपत प्रांत अध्यक्ष,तिलक राज मंगलम प्रांत कार्यकारी अध्यक्ष,गंगा प्रसाद यादव प्रांत उपाध्यक्ष, राजेंद्र मुंडा प्रांत उपाध्यक्ष, मिथिलेश्वर मिश्र प्रांत मंत्री,देवी सिंह प्रांत संगठन मंत्री, मनोज पोद्दार प्रांत सह मंत्री, रंगनाथ महतो प्रांत संयोजक सह प्रान्त सहमंत्री,कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, मार्गदर्शक मंडल संयोजक, देवेन्द्र गुप्ता अर्चक पुरोहित प्रांत प्रमुख, प्रांत मनोज पांडे मंदिर अर्चक पुरोहित प्रांत सहप्रमुख, कमलेश सिंह प्रांत गौ रक्षा प्रमुख, दीपक ठाकुर प्रांत गौ रक्षा सहप्रमूख,प्रकाश रंजन प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख, संजय चौरसिया धर्म प्रसार ,सच्चिदानंद धर्म प्रसार सहप्रमूख , रंजन कुमार सिंह सत्संग सहप्रमूख, कीर्ति गौरव दुर्गा वाहिनी विभाग संयोजिका, रामनरेश सिंह एवं अन्य प्रांत, विभाग,जिला प्रखंड के दायित्व कार्यकर्ता मौजूद थे। उक्त जानकारी
टीम एबीएन, रांची। छोटानागपुर विधि महाविद्यालय के प्रोफेसर एवं सिल्ली प्रखण्ड के प्रथम प्रमुख स्व. प्रो. विष्णु चरण महतो कानून के ज्ञाता के साथ ही उच्च विचार और सादगी के प्रतिमूर्ति थे। प्रो. महतो आजीवन गरीबों की सेवा एवं क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य किया। इसी का परिणाम है कि आज भी झारखण्ड खासकर रांची जिले, की जनता एक बुद्धिजीवी, समाज सुधारक, कुरमाली भाषा के अस्तित्व के रक्षक एवं न्यायप्रिय नेता के रूप में याद करती है।
प्रो. विष्णु चरण महतो का जन्म सिल्ली प्रखण्ड के कांटाडीह गांव में 23 फरवरी 1926 को एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। स्व. महतो बचपन से ही एक प्रतिभाशाली विद्यार्थी थे। उन्होंने रांची जिला स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे पटना चले गये। उन्होंने आईए एवं बीए की पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से पूरी की थी।
स्नातक के बाद एमए की पढ़ाई के लिए बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया , लेकिन कानून के प्रति विशेष रूचि के कारण वह पटना विधि विश्वविद्यालय में नामांकन कराया और वहीं स्नातक विधि की परीक्षा पास की। इसके बाद पटना उच्च न्यायालय के कार्यालय में उनकी नियुक्ति हुई, लेकिन वकालत करने के उद्देश्य से वह रांची वापस आ गये। रांची में वह पुरुलिया रोड स्थित अपने निजी मकान में रहते थे। यहीं रहकर वह वकालत करने के साथ ही छोटानागपुर विधि महाविद्यालय में अध्यापन का भी कार्य करते थे।
स्व. महतो झारखण्ड आन्दोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। मारांग गोमके जयपाल सिंह के आह्वान पर न सिर्फ आंदोलन में कूद पड़े बल्कि उस आंदोलन में बढ़-चढ़ कर मारांग गोमके के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया। स्व. महतो ने सिल्ली विधानसभा क्षेत्र से झारखण्ड पार्टी के टिकट पर 1952 एवं 1957 में चुनाव लड़ा। दोनों ही बार उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार को जबरदस्त टक्कर दी, लेकिन दोनों ही बार मामूली वोट के अन्तर से हार गये। स्व. महतो के लिए चुनाव हारना कोई मायने नहीं रखता था। चुनाव हारने के बाद भी उनके चेहरे पर हमेशा योद्धाभाव झलकता रहता था।
स्व. महतो शिक्षा के विकास पर बहुत जोर देते थे। उनका मानना था कि शिक्षा के विकास के बिना समाज का विकास नहीं हो सकता है। उनके सम्पर्क में जो भी लोग आते थे उनसे वह अक्सर कहा करते थे सूखी रोटी खाओ, माड़-भात खाओ, लाल चाय पियो, लेकिन अपने बच्चों को अधिक से अधिक शिक्षा देने का कार्य करो। नारी शिक्षा पर भी वह विशेष रूप से जोर देते थे। उनका मानना था कि इससे स्त्रियों में आत्म विश्वास बढ़ेगा, स्वावलंबी बनेंगी तथा अपने पैरों पर खड़ा होकर घर-परिवार का कायाकल्प करेंगी।
स्व. महतो ने सिल्ली प्रखण्ड प्रमुख रहते हुए कई कार्य किए। सिंगपुर से अपने गांव कांटाडीह तक श्रमदान से सड़क बनवायी, गांव में बिजली पहुंचायी। किसानों के लिए लिफ्ट एरिगेशन के तहत सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध करवायी। स्व. महतो ने तत्कालीन जिला बोर्ड के उपाध्यक्ष पॉल दयाल के सहयोग से सिल्ली क्षेत्र के सैकड़ों बेरोजगार युवकों को शिक्षक की नौकरी दिलायी थी। इसके साथ ही सिंगपुर (मुरी) में भारत माता अस्पताल के निर्माण के लिए अपनी जमीन दान में दी थी।
स्व. महतो कुरमाली भाषा के विकास लिए भी जीवन पर्यन्त कार्य करते रहे। वह हमेशा कुरमाली भाषा की चिंता करने वाले नवयुवकों से घिरे रहते थे। उनके प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन के कारण ही कई लोगों ने कुरमाली लोक-साहित्य एवं लोक परंपराओं पर शोध कर पीएचडी की उपाधि ली, लेकिन वह इतने से संतुष्ट नहीं थे, उनकी इच्छा थी कि कुरमाली का एक शोध केन्द्र हो। स्व. महतो ने कुरमी जाति को पुन: अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल कराने के लिए भी जीवन पर्यन्त संघर्ष किया। उन्होंने रांची विश्वविद्यालय में कुरमाली भाषा की पढ़ाई शुरू कराने में भी अहम भूमिका निभायी थी।
स्व. महतो क्षेत्र के युवकों की सफलता पर काफी हर्षित होते थे और उनका सही मार्गदर्शन किया करते थे। एक बार की बात है सिल्ली के जबला ग्राम निवासी नन्दलाल महतो बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 27वीं संयुक्त परीक्षा में उपसमाहर्ता के पद पर अंतिम चयन होने पर विष्णु बाबू से मिलने गये। उन्होंने नंदलाल महतो को देखकर गदगद स्वर में कहा क्या समाचार है, नंदलाल जी? नंदलाल ने बड़ी विनम्र स्वर में कहा- सर बिहार लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित 27वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में मेरा अंतिम चयन उपसमाहर्ता के पद पर हुआ है।
नंदलाल ने आगे कहा-सर, आपको तो मालूम ही है मैं यूनाइटेड बैंक आफ इण्डिया में हेड कैशियर के पद पर कार्यरत हूं और इसी वर्ष मेरी प्रोन्नति भी होने वाली है। विष्णु बाबू उठ खड़े हुए और नंदलाल महतो से कहा यू आर द सेकेण्ड कुरमी आफ छोटानागपुर रीजन आफ्टर ठाकुर दास महतो हू वाज द कलक्टर एण्ड डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट आफ पूर्णिया। उन्हीं की सलाह पर नंदलाल ने बैंक की नौकरी छोड़कर बिहार प्रशासनिक सेवा के उपसमाहर्ता संवर्ग में योगदान किया था।
उसी तरह सन 1955 में जब सोनाहातू के पाण्डू?डीह निवासी डा. हलधर महतो मैट्रिक की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए और रांची कालेज में नामांकन हेतु आवेदन देने में देर होने लगी तो विष्णु बाबू ने हलधर महतो को एक पत्र भेजा। पत्र में लिखा था- हलधर तुम पत्र पाते के साथ रांची चले आओ और मुझसे भेंट करो। मैं जानता हूं कि तुम एक गरीब किसान के पुत्र हो, हमलोग चंदा करेंगे फिर भी तुम्हें आगे पढ़ायेंगे।
तुम एक मेधावी छात्र हो। अत: तुम अपने मस्तिष्क रूपी सुमन की कली को मुरझाने मत दो। ऐसे ओजस्वी महान विभूति का स्वर्गवास दीपावली के दिन एक नवंबर 1986 को एचईसी प्लांट अस्पताल में हो गया। दीपावली के दिन जहां दीप जलने थे, लेकिन विष्णु बाबू जैसा दीपक सदा के लिए बुझ गया। आज कुरमाली भाषा परिषद और बाईसी कुटुम जैसी संस्था उनके विचारों पर चलकर उनके अधूरे सपनों को साकार करने में लगा हुआ है।
टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मंडल, रांची का तीन दिवसीय विराट फाल्गुन सतरंगी महोत्सव दिनांक 9 से 11 मार्च तक अत्यंत श्रद्धा एवं धूमधाम से आयोजित किया जायेगा। सभी कार्यक्रम अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में आयोजित होंगे। महोत्सव की तैयारी को अंतिम रूपरेखा देने हेतु मंडल के सदस्यगण पूर्ण समर्पण भाव से कार्य कर रहे हैं। इसको लेकर पूरे मंदिर की साफ-सफाई के पश्चात आकर्षक ढंग से सुसज्जित किया जा रहा है।
9 मार्च को अपराह्न 3 बजे श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर (सेवा सदन हॉस्पिटल के निकट) से विधि विधान से निशान (ध्वजा) यात्रा प्रारंभ जो नगर के प्रमुख मार्गों का भ्रमण करते हुए अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर पहुंचेगी। निशान यात्रा में दिव्य रथ पर विराजमान श्री श्याम प्रभु नगर वासियों को आशीष प्रदान करेंगे। साथ ही इस अवसर पर मुख्य तौर पर 700 नर-नारी अपने कंधों पर श्री श्याम नाम रूपी निशान लहराते हुए चलेंगे। साथ ही भजन गायक की टोली संपूर्ण मार्ग में भजनों की अमृत वर्षा करेंगे।
इस अवसर पर भक्तजनों के लिए संपूर्ण मार्ग में प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहेगी। 10 मार्च को रात्रि 9 बजे से मंदिर में मुख्य कार्यक्रम प्रारंभ होगा। श्री श्याम मंडल रांची द्वारा प्रकाशित भजन पुस्तिका 21वें बसंत उत्सव का विमोचन किया जायेगा। इस 3 दिवसीय फाल्गुन सतरंगी मोहत्सव के द्वितीय दिवस पर श्री श्याम प्रभु का भव्य एवं नयनाभिराम श्रृंगार, अखंड ज्योत, छप्पन भोग, सवामणि प्रसाद, संगीतमय संकीर्तन व श्री श्याम प्रभु के साथ केसरिया होली का आयोजन होगा। कार्यक्रम रात्रि 9 बजे से सुबह 4 बजे तक आयोजित है।
दिनांक 11 मार्च को श्री श्याम प्रभु का द्वादशी दर्शन, 251 सवामणि भोग, अखंड ज्योत व द्वादशी पूजन आयोजित होगा। इस अवसर पर मंदिर के पट विशेष रूप से संपूर्ण दिवस खुले रहेंगे व संपूर्ण दिवस श्री श्याम प्रभु का प्रिय खीर चूरमा का प्रसाद वितरण किया जायेगा।
नोट : फाल्गुन एकादशी दिनांक 24 फरवरी 2025 को खाटू धाम जाने वाले पवित्र निशान पूजन कर मंदिर में दिनांक 27 फरवरी प्रात: 11 बजे तक स्थापित रहेंगे। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
टीम एबीएन, रांची। लोहरदगा की रहने वाली एक जनजातीय महिला मुन्नी गुरकी जो असन्तुलित मानसिक अवस्था में 21 वर्ष पूर्व (वर्ष 2004) में लोहरदगा की सड़कों पर घूमती हुई मिली थी। उसको वाहन से उठाकर रांची स्थित निर्मल हृदय आश्रम में लाकर रखा गया और उसका मानसिक इलाज करवाया गया। चार वर्ष पूर्व वह स्तान कैंसर से पीड़ित हो गयी, निरंतर आश्रम में उसकी चिकित्सा हुई। अन्तत: कैंसर से उसका निधन हो गया।
विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि उनकी आयु 68 वर्ष थी और उसका घरवालों से कोई सम्पर्क नहीं रहा था, उसके नाते रिश्तेदारों का भी कोई अता पता नहीं था। उसके शवदाह के लिए विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग की ओर से रांची लायंस क्लब रांची की अनाथ दिव्यांग लोगों के प्रति संवेदनशीलता को देखते हुए अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह से आग्रह करने पर क्लब के सभी सदस्य इस मानवीय सेवा हेतु मुन्नी गुरकी के दाह संस्कार के लिए तैयार हो गए।
स्वर्गीय मुन्नी गुरकी के पार्थिव देह को पूरे सम्मान के साथ हरमू स्थित मुक्ति धाम लाया गया। चिता को जनजातिय समाज के विजय मिंज उनके दोनों पुत्र आशीष मिंज और अभय मिंज ने तैयार किया। पार्थिव देह को पंचतत्व में विलीन करने के लिए विधिवत वैदिक रीति से सभी संस्कार मुक्ति धाम हरमूघाट रांची पर किये गये। इस अवसर पर लाइंस क्लब के सदस्य प्रोफेसर हरविंदर सिंह वीर जी ने सिख परंपरा के अनुसार अरदास की और मुन्नी गुरकी की आत्मा की शांति के लिए सभी उपस्थित लोगों ने प्रार्थना की।
संतोष अग्रवाल ने नम आंखो से मुन्नी गुरकी को मुखाग्नि दी। सेवा विभाग के प्रांतीय सह सेवा प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल ने बताया कि अब से 14 वर्ष पूर्व संतोष अग्रवाल की माता का अयोध्या नगर (उ.प्र.) में अकेले रहते हुए देहांत हो गया था, उस समय उनके परिवार का कोई भी सदस्य उनके साथ नहीं था, यह पीड़ा आज भी उनके मन में है, अत: उन्होने निर्णय लिया कि जब भी किसी अनाथ की मृत्यु होगी वह उसके दाह संस्कार में आगे बढ़कर मुखाग्नि की सेवा देंगे।
सेवा विभाग, विश्व हिंदू परिषद झारखंड के सह प्रांत प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल ने बताया की सेवा विभाग की ओर से अभी तक पिछले 11 वर्षों में लगभग एक हजार से अधिक अनाथ, निराश्रित, एकाकी लोगों का दाह संस्कार किया गया है। इस मर्मस्पर्शी मानवीय कार्य में रांची नगर के लोगों के लोगों ने और समाजिक संस्थाओं ने बढ़ चढ़कर सहयोग किया है ताकि हिंदू समाज के किसी भी मृत व्यक्ति के शव को लावारिस न कहा जाये।
स्वर्गीय मुन्नी गुरकी को अंतिम विदाई देने के लिए लायंस क्लब आफ रांची के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह, लायन राजेश चौधरी, लायन हरविंदर सिंह वीर, लायन जसवीर खुराना, लाइन सुबोध वर्मा और क्लब के बहुत से सदस्य, विश्व हिंदू परिषद रांची महानगर के अध्यक्ष कैलाश केसरी, के प्रांतिय उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह मुंडा, ग्राम काटम कुल्ली पिठूरिया से मनोज मुंडा, कांके से जितेंद्र महतो, कांके से बहुत से जनजातिय समाज के लोग, सृजन हेल्प परिवार रांची के संजय कुमार, नारनौलीय अग्रवाल सभा से राजेश अग्रवाल और उनके कई मित्र, अपर बाजार से कृष्ण कुमार गाड़ोदिया, राधेश्याम शर्मा, कांके रोड से ओम प्रकाश सर्राफ वा मारवाडी समाज के बहुत से लोगों ने मृतक की आत्मा की शान्ति के लिए विनम्र भाव से श्रद्धांजली दी। उक्त जानकारी विश्व हिन्दू परिषद् झारखंड के प्रांत सह सेवा प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल (8862823043, 8789300579) और प्रवक्ता सेवा विभाग संजय सर्राफ ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। मौजूदा समय में दुनिया भर में जारी असुरक्षित प्रवासन के संकट के मद्देनजर नई दिल्ली में नौ दक्षिण एशियाई देशों की सरकारों, नीति-निमार्ताओं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, संयुक्त राष्ट्र और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग (मानव दुव्यार्पार) के खिलाफ सुरक्षित प्रवासन को प्रोत्साहन के लिए दक्षिण एशियाई संगोष्ठी में शिरकत की। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन की पहल पर इस एकदिवसीय संगोष्ठी में समग्र, अधिकार-आधारित रणनीति को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, जिससे कि पूरे क्षेत्र में प्रवासन नीतियों का समन्वय किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मानकों के अनुरूप कानूनी और नीतिगत सुधार किये जा सकें। इस संगोष्ठी में भारत के अलावा बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के ट्रैफिकिंग के पीड़ित भी मौजूद थे जिन्होंने अपनी पीड़ा और अनुभव साझा करते हुए इसकी रोकथाम के लिए सुझाव दिये। बाल अधिकारों और बाल संरक्षण के लिए दुनिया के 39 देशों में कार्यरत संगठनों का वैश्विक नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन इस परामर्श का तकनीकी सहयोगी था।
ट्रैफिकिंग के खिलाफ तत्काल एक बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, मानव दुर्व्यापार भारी मुनाफे वाला एक संगठित अपराध है, जो विशेष रूप से बच्चों और मजबूर युवाओं के शोषण के सहारे फल-फूल रहा है। इससे निपटने के लिए हमें बहु-आयामी रणनीति अपनाने की आवश्यकता है जिसमें ट्रैफिकिंग के आर्थिक ढांचे को नेस्तनाबूद करना, संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से उनकी कमर तोड़ना और ट्रैफिकिंग गिरोहों के बारे में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए वैश्विक रजिस्टर रखना और इसके माध्यम से स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुफिया समन्वय को मजबूत करने जैसे कदमों की जरूरत है।
हाल ही में बेड़ियों में डाल कर भारत भेजे गए और इसी हालात में फंसे अन्य लोगों में पसरे डर पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि यह भयावह वास्तविकता इस संगठित अपराध के खिलाफ वैश्विक प्रतिक्रिया की तात्कालिक आवश्यकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा, मैं भारत, अमेरिका और अन्य सरकारों से अपील करता हूं कि वे इन ट्रैफिकिंग गिरोहों के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर कठोर कार्रवाई शुरू करें। ट्रैफिकिंग के इस नेटवर्क को खत्म करने के लिए भारत, अमेरिका और उन सभी देशों के बीच जहां से ये गिरोह पीड़ितों को लेकर जाते हैं, के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक है। हमें पीड़ितों से मिली जानकारी का विश्लेषण करना होगा, वित्तीय लेन-देन का पता लगाना होगा और इस अपराध को बढ़ावा देने वाले गिरोहों को ध्वस्त करना होगा, ताकि शोषण के इस दुष्चक्र को तोड़ा जा सके। ऋभु ने इस सत्य को रेखांकित किया कि प्रवासन मानव स्वभाव की बुनियादी प्रवृत्ति है जो विकास, अवसरों और प्रगति की तलाश से जुड़ी है। हालांकि, जब इसमें शोषण, जबरन नियंत्रण और धोखाधड़ी जुड़ जाती है, तो प्रवासन मानव दुर्व्यापार में बदल जाता है।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के पूर्व अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा, जागरूकता एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे पहले पीड़ितों को यह समझना होगा कि उनका शोषण हो रहा है और उन्हें अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना होगा। अक्सर वे अपने साथ हो रही नाइंसाफियों से अनजान रहते हैं। जागरूकता को देश के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाना होगा, ताकि सबसे कमजोर तबकों की आवाज सुनी जा सके, उन्हें सुरक्षा मिले और उनका सशक्तीकरण हो सके।
वैश्विक समझौते (ग्लोबल कॉम्पैक्ट), सुरक्षित, सुव्यवस्थित और नियमित प्रवासन (जीसीएम) तथा दक्षिण एशिया में कोलंबो प्रक्रिया के कार्यान्वयन की प्रगति और चुनौतियां सत्र को संबोधित करते हुए माइग्रेंट फोरम इन एशिया (दक्षिण एशिया) की कार्यकारी समिति की सदस्य बिजया कुमारी श्रेष्ठ ने नेपाल सरकार से श्रमिक गंतव्यों की संख्या 110 से बढ़ाकर 160 करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि उनके फोरम ने 50 और देशों की पहचान की है जहां नेपाली युवा काम की तलाश में जा रहे हैं और जहां उनके शोषण की संभावनाएं हो सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के डीसेंट वर्क टेक्निकल सपोर्ट टीम (डीडब्ल्यूटी) के दक्षिण एशिया विशेषज्ञ इंसाफ निजाम ने जोर देकर कहा कि प्रवासन को रोकने के लिए कार्यस्थल पर गरिमा और मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र के मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) की दीपिका नरुका ने बताया कि ट्रैफिकिंग इन पर्सन 2024 रिपोर्ट के अनुसार बंधुआ मजदूरी कराने के मकसद से ह्यूमन ट्रैफिकिंग में इजाफा हो रहा है लेकिन इन मामलों में दोषसिद्धि नगण्य है।
नेपाल के लुंबिनी प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली बहादुर चौधरी ने कहा कि सुरक्षित प्रवासन सुनिश्चित करने के लिए नागरिक समाज संगठनों, सरकार और निजी संस्थानों को एक साथ आना चाहिए। मलेशिया स्थित अवर जर्नी की निदेशक सुमिता शांतिन्नि किशना ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग की चुनौती से निपटने के लिए बाल-केंद्रित नीतियों की अहमियत को रेखांकित किया। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ एमएमएसएसबी यालेगामा और नेपाल के मानवाधिकार एवं अंतरराष्ट्रीय संधि समझौता प्रभाग के संयुक्त सचिव राजेंद्र थापा ने जोर दिया कि मानव दुव्यार्पार से निपटने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत प्रतिबद्धता और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय की आवश्यकता है।
एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल ने कहा प्रवासन से सबसे अधिक प्रभावित बच्चे होते हैं। काम की तलाश में चाहे उनके माता-पिता नयी जगह चले जायें और वे पीछे छूट जायें, या उन्हें साथ ले जायें— हर स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें ही होती है क्योंकि इससे उनकी देखभाल पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा, आने जाने की समस्या के अलावा ऐसी स्थिति में कमजोर परिवारों के बच्चों का भविष्य अनिश्चित हो जाता है। इसके अलावा यह समझना जरूरी है कि ट्रैफिकिंग गिरोहों के नेटवर्क स्रोत (सोर्स) से लेकर पारगमन (ट्रांजिट) और गंतव्य तक, हर स्तर पर सक्रिय रहते हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सामुदायिक जागरूकता और ठोस कार्रवाई के बीच समन्वय से ही हम सुनिश्चित कर सकते हैं कि प्रवासन सुरक्षित हो और स्वैच्छिक हो।
संगोष्ठी मुख्य रूप से जीसीएम के कुछ प्रमुख उद्देश्यों पर केंद्रित थी जैसे कि प्रवासन की असुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में ह्यूमन ट्रैफिकिंग की रोकथाम और नियंत्रण, प्रवासियों के लिए बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता, तथा प्रवासियों एवं समाज को समावेश और सामाजिक सामंजस्य के लिए सशक्त बनाना। जीसीएम पहला अंतर-सरकारी समझौता है जो अंतरराष्ट्रीय प्रवासन को समग्र और व्यापक रूप से कवर करता है।
दक्षिण एशिया क्षेत्र में सुरक्षित प्रवासन सुनिश्चित करने के लिए संगोष्ठी में कुछ सिफारिशें भी पेश की गईं। इनमें सरकारों, नागरिक समाज संगठनों और प्रवासन-संबंधी अंतरराष्ट्रीय निकायों के बीच मजबूत समन्वय और साझेदारी को बढ़ावा, शिक्षा और जागरूकता के उपायों जैसे कि सामुदायिक निगरानी प्रणाली, इन मुद्दों को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करना, और जोखिम में रह रहे प्रवासियों के क्षमता निर्माण के अलावा प्रौद्योगिकी का उपयोग, जिसमें डिजिटल उपकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल पहचान प्रणाली शामिल हैं।
इस संगोष्ठी में भारतीय पुलिस फाउंडेशन के अध्यक्ष ओ.पी. सिंह, नेपाल के मानवाधिकार एवं अंतरराष्ट्रीय संधि समझौता प्रभाग के संयुक्त सचिव राजेंद्र थापा, श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ एमएमएसएसबी यालेगामा, श्रीलंका के इंस्टीट्यूट आॅफ पालिसी रिसर्च के माइग्रेशन एंड पालिसी रिसर्च की प्रमुख डॉ बिलेशा वीरारत्ने, भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सलाहकार ओंकार शर्मा और महाराष्ट्र पुलिस की विशेष पुलिस महानिरीक्षक अश्वती दोरजे भी शामिल थीं।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse