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Published / 2025-07-02 14:08:31
श्री श्याम मंदिर में सुंदरकांड हनुमान चालीसा का पाठ

टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मित्र मंडल की ओर से हरमू रोड श्री श्याम मंदिर में मंगलवार को 160वां सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। 

मनोज व सुनीता अग्रवाल ने अखंड ज्योति जलायी। पाठ वाचक मनीष सारस्वत व ओम शर्मा थे। 161वां श्याम भंडारा हुआ। 

मौके पर विश्वनाथ नारसरिया, श्रवण ढांनढ़निया, मयंक अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, अनिल नारनौली, हर्ष कुमार, कृष्णा अग्रवाल मौजूद थे। बुधवार को खाटू नरेश का केसर चंदन से तिलक शृंगार किया जायेगा।

Published / 2025-07-01 23:11:32
माता विपत्तितारिणी की पूजा से दूर होते हैं सभी कष्ट : जादव राय

  • लोहरदगा के आधा दर्जन स्थानों पर आयोजित की गई पूजा, सुबह से ही जुटे रहे श्रद्धालु

एबीएन न्यूज़,लोहरदगा। लोहरदगा जिले में मंगलवार को भगवती दुर्गा के विपत्तितारिणी स्वरूप की विशेष पूजा अर्चना की गई। सिद्धिदात्री दुर्गा मंदिर, वीर शिवाजी चौक और दुर्गा बाड़ी, हटिया गार्डेन काली मंदिर में इसका सामूहिक आयोजन किया गया। पूजा में शामिल होने के लिए रांची, लातेहार और गुमला के लोग भी बड़ी संख्या में आये थे। 

श्री दुर्गाबाड़ी मंदिर में मुख्य पुजारी जादव कुमार राय,सुभाष चन्द्र चौबे,गौतम देवघरिया, हरिहर शास्त्री, केशव पाठक, मृत्युंजय चौबे द्वारा धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न कराया गया। दुर्गाबाड़ी, लोहरदगा के मुख्य पुजारी जादव कुमार राय ने कहा कि मां विपत्तितारिणी की पूजा करने से सभी विपत्ति दूर हो जाती है। मंदिर में पूजा को लेकर महिलाओं की भीड़ लगी रही। 

पुजारियों ने दोपहर तक कई पाली में पूजा कराया। महिलाओं ने भी मां की पूजा-आराधना कर कथा का श्रवण किया। दोनों मंदिरों में दिनभर पूजा करने के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रही। पूजन-आरती के बाद महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाया और हाथों में रक्षा सूत्र बांधा। पूजन के बाद महिलाओं ने प्रसाद ग्रहण किया। 

आषाढ़ महीने के गुप्त नवरात्र के अवसर पर प्रतिवर्ष भगवती दुर्गा की विपत्तितारिणी स्वरूपा की पूजा होती है। यह पूजा रथ यात्रा के बाद मंगल और शनिवार को होता है, यानी आषाढ़ मास के तृतीय से नवमी तक अथवा घूरती रथ के अंदर विपत्तितारिणी की पूजा का विधान  है। इस पूजा में तेरह लाल धागों में तेरह शुद्ध दुर्बा को 13 गांठ देकर पूजा के उपरांत महिलाएं बायां और पुरुष दायां बाजू में धारण करते हैं।

पूजा के लिए थाली सजाई जाती है। इसमें 13 प्रकार के मिष्ठान, 13 प्रकार के फूल, 13 प्रकार के फल, पान पता में सुपारी के साथ सजाया जाता है। व्रत के एक दिन पहले तमाम व्रती उपवास रहते हैं। निरामिष भोजन करते हैं। पुरोहित जादव राय ने बताया कि जो भी भक्त या श्रद्धालु नियमपूर्वक माता विपत्तितारिणी की पूजा-अर्चना करते हैं, उनके सांसारिक जीवन की समस्त विपत्ति दूर हो जाती है।

​​​​​पूजा के आयोजन में इन लोगों का रहा योगदान

पूजा के आयोजन में श्री दुर्गाबाड़ी कमेटी के अध्यक्ष विजय गोपाल दत्ता, देवाशीष कार, सपन दत्ता, बासुदेव दत्ता, रथीद्र नाथ राय, तापस राय, तन्मय दत्ता, दीनबंधु डे, सोमनाथ दत्ता, अरुण दास शौर्यदीप दत्ता, वीर शिवाजी चौक सिद्धिदात्री दुर्गा मंदिर में अन्य लोगों के पुरोहित सुभाष चंद्र चौबे,अलावा मृत्युंजय चौबे, संतोष मुखर्जी, कमल केसरी, लालमोहन केसरी, नितेश केसरी, बिट्टू विश्वकर्मा, सुकला अधिकारी, विनोती मुखर्जी, सोमा मुखर्जी, पुतुल चटर्जी,नमीता मुखर्जी , बरनाली मुखर्जी, अनिता ओझा, ममता चौबे अंजना गुप्ता, प्रीति केसरी, श्रीनिवास झा, नमिता विश्वकर्मा, गायत्री घोष, सरिता घोष, पूजा मुखर्जी, सुनीता केसरी, हटिया गार्डन काली मंदिर में केशव पाठक जितेंद्र पाठक आदि ने सहयोग किया। पूजा में भाग लेने के लिए लोहरदगा के अलावा रांची और गुमला जिले के लोग भी शामिल हुए। इस मौके पर महिलाओं ने सिंदूर खेला में भी भाग लिया।

Published / 2025-06-29 20:42:48
श्रीसत्यनारायण व्रत कथा से सभी वर्गों को मार्गदर्शन मिल सकता है : गायत्री साधक

विवाह दिवसोत्सव संस्कार पर श्रीसत्यनारायण व्रत-कथामृतम पाठ का श्रवण 

एबीएन सोशल डेस्क। द्वितीय सुपुत्र परिवार आवासीय तपोवन में उसके वैवाहिक जीवन के पांचवें वर्षगांठ पर एक इच्छा के अनुसार पुत्र विपुल व पुत्रवधु स्वेच्छारानी की शुभेच्छा और अपनी सहमति से खुशी-खुशी पूजा एवं श्रीसत्यनारायण व्रत कथा व हवन-यज्ञ की विधि विधान  किया गया। 

इस दौरान व्यवस्था बनाकर परमपूज्य गुरुदेव श्रीप्रज्ञावतार की शानदार लेखनी व दिशा-निर्देश अनुसार श्रीगुरु-ईश वंदना, देव पूजन, स्वस्तिवाचन, रक्षा विधान पाठ एवं विवाह दिवसोत्सव संस्कार के सूत्र, संकल्प धारण, विधान सहित यज्ञीय विधान किये गये। 

इसके पूर्व श्रीमद्भागवत श्रीसत्यनारायण व्रत-कथा के सभी पांचों अध्याय सुनाये गये अध्याय पाठ में उसके  विशेष  धर्म, मर्म, तर्क, अर्थ, भावार्थ व व्याख्याात्मक तथ्यों पर उन सबके विशेष ध्यान आकर्षित कर आवश्यक सूत्रों पर गहराई से चर्चा की गयी। 

साथ ही उपस्थित उक्त श्रोताओं को विशेष तौर पर आज के अद्यतन लौकिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, पारिवारिक, सामाजिक, सांसारिक सामयिक परिस्थितियों की तुलनात्मक स्तर पर अध्ययन, विश्लेषण, निगरानी सावधानी बरतने के उपायों सूत्रों को सुनाये गये। 

आगे विचार-विमर्श करते हुए उनके संगी साथी मित्र मंडली के बीच इस महान युगस्रष्टा, युग प्रवर्तक की नव युग साहित्य और नवयुग के सृजेता की महत्वपूर्ण लेखनी एवं भविष्य में मानवीय मूल्यों के नैतिक चारीत्रिक गंभीर तथ्यों के आधार-भूत कथा प्रसंग में आने वाले ब्राह्मण की ब्रह्म विद्या, राजा की राज्य व्यवस्था, शासन प्रणाली, नीति अनीतिपूर्वक व्यवसाय व्यवहार, छोटे वर्ग समझे जानै वाले प्रजाजनों की धर्म भक्ति, ईश्वरीय आस्था, धार्मिक श्रद्धा में मूल्यवान, सराहनीय, अनुकरणीय अनुसरणीय बातों, तथ्यों व सूत्रों की चर्चा करते हुए चारों वर्णों, वर्गों की वास्तविक धर्म-निष्ठा, कर्तव्य- परायणता और आस्तिकता, धार्मिकता और आध्यात्मिकता की तुलनात्मक तथ्यों के प्रति सकारात्मक सोच विचार और उसके प्रयास परिणाम पर प्रकाश डालते हुए विशेष यादगार बनाने तथा औरों को बताने की आज की महती आवश्यकता पर भी सलाह सुझाव पेश किये गये। 

गुरुवर श्रीपूज्यवर की विशिष्ट लेखनी अनुसार व्रतकथा के पांचों पाठ-अध्याय की विशिष्ट खूबियों की मंगलमय चर्चा की गयी। उसे सुनकर वे लोग भी आनन्दित प्रफुल्लित होकर स्वीकार किया और बताया कि  ऐसी कथा प्रसंग व चर्चा परिचर्चा अभी तक नहीं सुनी गई है। विषयगत प्रसंग व उद्देश्य पर बताया।

श्रीसत्यनारायण व्रत कथा से सभी वर्गों को मार्गदर्शन मिल सकता है : साधक 

अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शान्तिकुञ्ज तत्वावधान में रांची मुख्य शक्तिपीठ की शाखा से संबंधित परिवार साधक के प्रवास काल में उक्त कार्यक्रम में श्रीसत्यनारायण व्रत कथामृत श्रवण हुआ, यज्ञीय अनुष्ठान विधान हुए। इस आधार पर कथावाचन में साधक ने अपनी संस्थान इकाई ओर से लिखित इस पुस्तक स्वाध्याय के आधार की भूमिका पर कथा सुनायी।

बताया कि समाज में चार शक्तियां प्रधान रूप से सक्रिय रहती हैं- १. ज्ञान, २. बल, ३. धन एवं ४. श्रम। इन सभी शक्तियों का विकास और सदुपयोग समाज की सुव्यवस्था के लिए आवश्यक है। इन्हीं शक्तियों से संपन्न व्यक्तियों को क्रमश: १. ब्राह्मण, २. क्षत्रिय, ३. वैश्य एवं ४. शूद्र कहा जाता था। इन शक्तियों को सत्य-परायण बनाकर कैसे सुख-समृद्धि पाई जाए, यह मार्गदर्शन सत्य-व्रत कथा से मिलता है। 

इस दृष्टि से सत्यनारायण व्रत कथा बहुत लोकोपयोगी है। लोकप्रिय कथा को लोकोपयोगी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके, तो समाज का उल्लेखनीय लाभ हो सकता है।  लोग सत्य-व्रत का सही रूप सत्यनारायण कथा के माध्यम से समझ लें, तो सच्चे अर्थों में आस्तिक बनें और सुख समृद्धि के अधिकारी बन सकते हैं।  

परमपूज्य गुरुदेव श्रीप्रज्ञावतार का कहना है, उनका दिशानिर्देश है इसके लिए  प्रथम कथावाचकों को अपने गम्भीर उत्तरदायित्व को समझना और पालन करना होगा। बताया कि युग निर्माण परिवार के सक्रिय श्रद्धावान साधक, कर्मठ पाठक, कथावाचक परिजन कथाओं द्वारा लोक शिक्षण के अपने अभियान अंतर्गत इस बहुमूल्य उद्देश्य की पूर्ति भी कर रहे हैं। 

साथ ही जहां ये प्रोग्राम प्रयोग हो रहे हैं, वहां आशातीत सफलताएं भी मिल रहीं हैं। इस पर कहीं एक दिवसीय भी और कहीं 5 दिवसीय अनुष्ठान भी सफलतापूर्वक संपन्न हुए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।

Published / 2025-06-28 21:06:17
सिनीडीह सिंदूर खेला के साथ पारंपरिक मां विपदतारणी पूजा संपन्न

एबीएन न्यूज नेटवर्क, गिरिडीह/ रांची। मधुबन थाना क्षेत्र  सिनीडीह में मां विपदतारणी की पूजा की सिनीडीह  काली मंदिर समिति ने विशेष व्यवस्था की थी। विपदतारणी की पुजा सुहागिन महिलाएं अपने पति संतान एवं पुरे परिवार के कल्याण के लिए करती है रथयात्रा के बाद। मां विपदतारणी मां दुर्गा के ही एक अन्य स्वरूप है। इस पूजा में ब्रतसूत्र, रक्षासूत्र बांधने की परंपरा है जो 13 दूब से तैयार किया जाता है। 

महिलाओं ने उपवास रखकर इसे तैयार करती हैं। मान्यता है कि यह सूत्र बांधने से पति एवं संतान की आने वाली हर विपत्ति टल जाती है। नवागढ़ मथाटांड़ के आचार्य सुकुमार बनर्जी एवं गुरु दास चटर्जी ने मां विपदतारणी  से क्षेत्र की सुख शांति एवं जनकल्याण हेतु पूजा आराधना किये। विपदतारणी मंत्र ऊं हीं  विपदतारणी दुर्गाये नम: के मंत्रोच्चार  से श्रद्धालुओं ने मां से हर तरह की विपत्ति हरने की प्रार्थना करती हैं। 

मां विपदतारणी को 13 प्रकार के फल फूल मिठाई पान सुपारी दूब का भोग लगाया जाता है। बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने परिवार के कल्याण की कामना के साथ पूजा अर्चना की। मां से आशीर्वाद प्राप्त किया। 

मौके पर पूर्व जिला परिषद सदस्य अंजना देवी, जया देवी, बिंदु देवी, आलता देवी, पार्वती देवी, उर्मिला देवी, छाया देवी, उषा देवी, रिंकी देवी, सुलेखा देवी, सुनीता देवी, लखी देवी, गंगा देवी, सीमा देवी, चंपा देवी, संतोषी देवी, वंदना देवी, फूला देवी, सुधा देवी, भारती देवी, पिंकी कुमारी, लाली देवी, ओरा देवी, सरस्वती देवी, राधा कुमारी, शारदा कुमारी, पूजा देवी, साधना देवी, पूनम देवी, प्रेमलता देवी, रीना देवी, सुमा देवी, सुशीला देवी, बिट्टू चौहान, लालू बाउरी, आनंद बाउरी, साहिल बाउरी, निखिल बाउरी, मनु कुमार साव, बिट्टू बाउरी, करण बाउरी, रामजी चौहान समेत कई अन्य लोग शामिल थे।

Published / 2025-06-28 21:00:28
छह को कांवर यात्रा के लिए रवाना करेगा श्री शंकर मंडल

श्री शंकर मंडल रांची कोलकाता कावड़ यात्रा के लिये 06 जुलाई को करेगी प्रस्थान

आयो  सावण  मेलो बाबो मारे हेलो।

बाबाधाम चालो भगतां नै संग लेल्यो।।

टीम एबीएन, रांची। देव आदि देव महादेव बाबा भोलेनाथ का पावन श्रावण मास 11 जुलाई 2025 से आरंभ होने जा रहा है। जैसा कि ज्ञात है सावन में कांवरिया सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर नंगे पांव 110 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए देवघर स्तिथ बाबा धाम मंदिर में जलार्पण करते हैं। 

इसी क्रम में श्री शंकर मंडल के श्री बसंत जी मूंधड़ा के नेतृत्व में रांची कोलकाता एवं सिलीगुड़ी से मिलाकर लगभग 50 कांवरिया का समूह 6 जुलाई दिन रविवार को  सुल्तानगंज के लिए प्रस्थान करेगा। यह मंडल विगत 45 वर्षों से से भी अधिक कावड़ यात्रा के लिये जाती है।

सोमवार को उत्तरवाहिनी गंगा से गंगाजल लेकर 11 जुलाई 2025 शुक्रवार को जलार्पण करेंगे। इस 5 दिन की यात्रा में कावड़िया बाबा का ध्यान लगाते हुए भजन कीर्तन, अभिषेक एवम बोल बम का नारा लगाते हुए चलते है। 

कांवड़ियों में मनोज काबरा, मनोज पोद्दार, संदीप चितलांगिया, अनिल नारनौली, विकास अग्रवाल, विष्णु अग्रवाल, अखिल पोद्दार, निखिल तनेजा, विकास काबरा, गौरव काबरा, प्रेम अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, शांति बगड़िया, कमल मोदी, शुभम, रोहन, सुनील चौधरी, विकाश लोहिया, मिलन, जय प्रकाश, कृष्णा, मोहित, ऋषभ बाबा को जलार्पण कर बाबा से सुख, शांति, समृद्धि की मनोकामना करेंगे।

Published / 2025-06-27 21:03:52
मौसीबाड़ी पहुंचे जगन्नाथ

जगन्नाथपुर, धुर्वा से ऐतिहासिक जगन्नाथपुर रथ यात्रा पूरे विधि-विधान और भव्यता के साथ मुख्य मंदिर से मौसीबाड़ी पहुंची 

जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी 

जिला प्रशासन और पुलिस की पूरी टीम ने चाक-चौबंद व्यवस्था सुनिश्चित की एवं यह रथ यात्रा सुचारू और सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ 

सुरक्षा के व्यापक इंतजाम 

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 27 जून 2025 को झारखंड की राजधानी रांची के जगन्नाथपुर, धुर्वा से ऐतिहासिक जगन्नाथपुर रथ यात्रा पूरे विधि-विधान और भव्यता के साथ मुख्य मंदिर से मौसीबाड़ी पहुंची। इस पवित्र यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, और सुभद्रा के रथ को हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक खींचा, और रथ यात्रा अपने गंतव्य तक पहुंची। इस दौरान जिला प्रशासन और पुलिस की पूरी टीम ने चाक-चौबंद व्यवस्था सुनिश्चित की, जिससे यह आयोजन सुचारू और सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ। 

प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम 

जिला प्रशासन ने रथ यात्रा और इसके साथ आयोजित होने वाले रथ यात्रा के लिए व्यापक तैयारियां की थीं।  

सुरक्षा के व्यापक इंतजाम 

रथ यात्रा मार्ग और मेला परिसर में सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन, और वॉच टावर स्थापित किये गये। पुलिसकर्मी, पुरुष और महिला के साथ-साथ मजिस्ट्रेट तैनात किये गये। सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी भीड़ पर नजर रखने के लिए मौजूद रहे। नीलाद्री भवन में एक कमांड सेंटर स्थापित किया गया, जहां ड्रोन और सीसीटीवी फुटेज से निगरानी की जा रही हैं। 

सुचारु यात्रा के लिए यातायात प्रबंधन सक्रिय 

रथ यात्रा के दौरान सुगम यातायात के लिए धुर्वा गोलचक्कर से पुराना विधानसभा, प्रभात तारा मैदान से शालीमार बाजार चौक, तिरिल मोड़ से मौसीबाड़ी गोलचक्कर, और अन्य मार्गों पर वाहनों का प्रवेश निषेध रहा।  

रथ यात्रा के दौरान पुलिस महानिरीक्षक मनोज कौशिक, उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, मंजूनाथ भजन्त्री, डीआईजी सह वरीय पुलिस अधीक्षक रांची चंदन कुमार सिन्हा, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) राजेश्वर नाथ आलोक, पुलिस अधीक्षक (नगर) अजित कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) उत्कर्ष कुमार, जिला नजारत उप समाहर्ता डॉ सुदेश कुमार, पुलिस उपाधीक्षक (हटिया व सदर) और अन्य संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे। इनके नेतृत्व में सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गयीं। 

उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने भी श्रद्धा पूर्वक भगवान के रथ को खींचा। इस दौरान उन्होंने पुरे विधि व्यवस्था पर नजर बनाये रखा था और मेला में प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे थे। जिला प्रशासन और मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पवित्र आयोजन में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करें और व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग करें।

Published / 2025-06-27 19:57:56
रथयात्रा पर श्री राधा-कृष्ण मंदिर में हजारों भक्तों ने ग्रहण किया खिचड़ी महाभोग प्रसाद

विशेष पूजा एवं भजन-कीर्तन का हुआ आयोजन 

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग में श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम श्री राधा कृष्ण मंदिर मे जगन्नाथ प्रभु की रथ यात्रा के पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर श्री राधा कृष्ण जी का भव्य अलौकिक श्रृंगार, विशेष पूजा अर्चना, खिचड़ी प्रसाद महाभोग भजन- कीर्तन एवं सामूहिक महाआरती का आयोजन किया गया। 

श्री राज श्याम जी को खिचड़ी महाभोग, फल, मेवा, चूरमा, पंचामृत, पेड़ा का विधिवत भोग पुजारी अरविंद पांडे ने लगाया। पूरे विधि विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना एवं महाआरती की गयी। तत्पश्चात भजन- कीर्तन के कार्यक्रम में महिलाओं ने अपने सुमधुर मनमोहक भजनों से भक्तों को अमृत गंगा का रसपान कराते हुए खूब झुमाया। मंदिर में उपस्थित सैकड़ों भक्तों ने सामूहिक महाआरती में भाग लिया।

तत्पश्चात हजारों श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी महाभोग प्रसाद का वितरण किया गया। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने कहा कि मंदिर में आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। उन्होंने कहा कि जगन्नाथ प्रभु जी की रथ यात्रा महोत्सव आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। 

रथ यात्रा (श्रीकृष्ण), बलभद्र और सुभद्रा से जुड़ी होती है। इस दिन श्रीकृष्ण उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को सजाकर उनकी रथ यात्रा निकाली जाती है। रथ खींचने का पुण्य अगाध माना जाता है। भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के बाद भक्तों की सारी पीड़ाएं और समस्याएं दूर होती है। 

इससे भक्तों के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा महोत्सव हिंदू धर्म में समरसता सेवा और भक्ति का विशिष्ट प्रतीक है। 27 जून से प्रारंभ होकर 6 जुलाई तक फैला यह महोत्सव भव्य रथों, अनुष्ठानों और भक्तों की भावनाओं का संगम है अखंड एवं पवित्र यह यात्रा न केवल भारत में बल्कि विश्व भर में श्रद्धालुओं का अनूठा आध्यात्मिक अनुभव बनी हुई है। 

मौके पर डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया,संजय सर्राफ पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, विशाल जालान, विष्णु सोनी, सुनील पोद्दार, सुरेश अग्रवाल, पवन पोद्दार, नंदकिशोर चौधरी, प्रमिला पुरोहित, उर्मिला पाडिया, कविता गाडोदिया, संतोष देवी अग्रवाल, सत्यभामा गोयनका, मंगला मोदी,ललिता अग्रवाल, शकुंतला केजरीवाल सहित बड़ी संख्या में महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित थे।

Published / 2025-06-25 20:33:15
27 जून को निकलेगी बाबा जगन्नाथ की रथयात्रा

रथ यात्रा हिंदू धर्म में समरसता सेवा और भक्ति का विशिष्ट प्रतीक : संजय सर्राफ 

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के उड़ीसा राज्य के पुरी में प्रतिवर्ष भव्य रथ यात्रा मनायी जाती है जिसे जगन्नाथ रथ यात्रा या श्री गुंडिचा यात्रा भी कहते हैं। इस वर्ष यह महोत्सव आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि पर 27 जून शुक्रवार से प्रारंभ होगा और 5 जुलाई को समापन होगा।

भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण), बलभद्र और सुभद्रा से जुड़ी होती है। जगन्नाथ रथ यात्रा इस साल 27 जून को जगन्नाथ पुरी सहित पूरे देश के विभिन्न राज्यों में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकली जायेगी। श्रीकृष्ण, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को सजाया जाता है। फिर उनकी रथ यात्रा निकाली जाती है। रथ खींचने का पुण्य अगाध माना जाता है। 

भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के बाद भक्तों की सारी पीड़ाएं और समस्याएं दूर होती है। वे अपना जीवन अच्छे से जी सकते हैं और अंत में मोक्ष प्राप्त करते हैं। वहीं, कई भक्त अपनी मनोकामनाओं को पूरा कराने की इच्छा के साथ भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल होते हैं। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से जुड़ी एक और धार्मिक मान्यता यह है कि रथ यात्रा में दान करने से इसका अक्षय फल प्राप्त होता है। 

भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में विशेष रथों की व्यवस्था की जाती है। जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा तीन अलग रथों पर बैठते हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ, जिसे नंदीघोष कहते हैं, लाल और पीले रंग का होता है। यह लगभग 45.5 फीट ऊंचा होता है। इस रथ को बनाने में कील या धातु का इस्तेमाल नहीं होता। यह सिर्फ नीम की लकड़ी से बनता है। 

इसकी तैयारी अक्षय तृतीया से शुरू हो जाती है। रथ में 16 पहिये होते हैं। यह बलभद्र और सुभद्रा के रथ से थोड़ा बड़ा होता है। भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की पौराणिक कहानी पद्म पुराण की कहानी के अनुसार एक बार आषाढ़ के महीने में सुभद्रा ने भगवान जगन्नाथ से शहर देखने की इच्छा जतायी। तब जगन्नाथ भगवान ने अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को रथ पर बैठाया। वे उन्हें नगर दिखाने के लिए निकल पड़े।

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र जी और सुभद्रा जी अपनी मौसी के घर गुंडिचा भी गये। इन तीनों ने अपनी मौसी के घर सात दिनों तक आराम किया। 8 दिनों तक विश्राम करने के बाद भगवान जगन्नाथ फिर से अपने निवास स्थान लौट आते हैं। विश्राम करके वापस अपने निवास स्थान लौटने के दौरान कई छोटे-छोटे पड़ाव आते हैं और जहां पर कई प्राचीन मंदिरों में भी भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। 

पुरी रथ यात्रा हिंदू धर्म में समरसता सेवा और भक्ति का विशिष्ट प्रतीक है। 27 जून से प्रारंभ होकर 5 जुलाई तक फैला यह महोत्सव भव्य रथों, अनुष्ठानों और भक्तों की भावनाओं का संगम है अखंड एवं पवित्र यह यात्रा न केवल भारत में बल्कि विश्व भर में श्रद्धालुओं का अनूठा आध्यात्मिक अनुभव बनी हुई है।

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