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Published / 2025-07-13 17:56:23
श्रावणी मेला : दूसरे दिन 1.13 लाख भक्तों ने किया जलाभिषेक

  • श्रावणी मेला में दिखा भक्ति और आस्था का संगम
  • दूसरे दिन 1.13 लाख श्रद्धालुओं ने किया बाबा का जलाभिषेक

एबीएन न्यूज नेटवर्क, देवघर। श्रावणी मेला के दूसरे दिन भी बाबा मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा। मंदिर के पट खुलने से पहले जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी लाइन लग गयी। करीब 1.13 लाख से अधिक लोगों ने शनिवार को भोलेनाथ पर जलार्पण किया। इस दौरान कांवरियों के आकर्षक कांवर आकर्षण का केंद्र बन गये।

बताया जा रहा है कि बाहा अरघा के माध्यम से 29,962, आंतरिक अरघा से 80,532 और शीघ्रदर्शनम के माध्यम से 2908 श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया। इसके बाद रात करीब 7:40 बजे मंदिर का पट बंद हुआ। श्रद्धालुओं ने बाबा पर जलार्पण कर अपने मन की मुरादें बाबा के चरणों में समर्पित की। साथ ही भोलेनाथ का आशीर्वाद ग्रहण किया।

12 जुलाई को अहले सुबह जब बाबा मंदिर का पट खुला, तो सबसे पहले बाबा पर कांचा जल अर्पित किया गया। इसके बाद पुजारी सुमित झा ने विधिपूर्वक सरदारी पूजा कर मंदिर का द्वार आम भक्तों के लिए खोल दिया। बाबा का पट खुलने से पहले ही तिवारी चौक मोड़ से चिल्ड्रेन पार्क तक कांवरियों की लंबी कतार लग चुकी थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, पंडित शिवराम झा चौक तक श्रद्धालुओं की भीड़ सिमट गयी।

Published / 2025-07-13 17:09:23
कौन हैं शिव, क्या है सावन से कनेक्शन

त्रिवेणी दास

ॐ नम: शिवाय...

एबीएन सोशल डेस्क। पुराण के अनुसार मानसरोवर के पास अवस्थित कैलाश पर्वत पर भगवान शिव निवास करते हैं, अर्थात भगवान शिव के निवास का केंद्र बिंदु पवित्र कैलाश पर्वत है।

आदि गुरु शंकराचार्य जी महाराज ने भारत के चारों दिशाओं में अद्वैत सिद्धांत और सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए चार मठ ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ, उत्तर दिशा), शारदा मठ (द्वारका, पश्चिम दिशा), गोवर्धन मठ (पुरी, पूर्व दिशा), और श्रृंगेरी मठ (शृंगेरी, दक्षिण दिशा) की स्थापना करते हुए वहां शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा की। साथ ही साथ देश के अनेक स्थानों में शिवलिंग स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा की। 

देश भर में द्वादश ज्योर्तिलिंगम सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर,  केदारनाथ, भीमाशंकर, विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, नागेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर के स्वरूप  में महादेव स्वयं प्रकट होकर विराजमान हैं।

सूक्ष्म स्वरूप में शिव व्यापक एवं सर्वत्र उपस्थित हैं। जन-जन के हृदय में परमात्मा के रूप में निवास करते हैं। प्रकृति के पांच तत्वों में उनकी शिवत्व क्रियाशील रहती है। मन तथा बुद्धि से परे चेतना के सहारे गहराई में उतरकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए श्रावण का महीना शुभ संयोग है।

Published / 2025-07-12 21:11:26
रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन ने 100 बच्चों को दिया प्रतिभा सम्मान पुरस्कार

अपने लक्ष्य पर सतत ध्यान देना अनुशासन, परिश्रम एवं विनम्रता एक छात्र का है मूल मंत्र : सुरेश चंद्र अग्रवाल 

टीम एबीएन, रांची। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के तत्वावधान मे महाराजा अग्रसेन भवन में प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता मारवाड़ी सम्मेलन के जिला अध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार ने की। समारोह का उद्घाटन झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल ने श्री गणेश जी के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। 

सम्मान समारोह की मुख्य अतिथि झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल ने विभिन्न परीक्षाओं में सफलता पाने वाले सभी प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सफलता प्राप्ति के लिए अपने लक्ष्य पर सतत ध्यान देना अनुशासन परिश्रम एवं विनम्रता एक छात्र का मूल मंत्र है। तथा स्वयं पर विश्वास लक्ष्य के प्रति ईमानदारी सच्ची लगन धैर्य एवं दृढ़ संकल्प लक्ष्य पाने की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य दृष्टिगत हो सदा, कर्म करे दिन- रात, मन में हो विश्वास दृढ़, होगा नया प्रभात। 

ओम प्रकाश अग्रवाल ने जिला मारवाड़ी सम्मेलन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मारवाड़ी समाज सदैव आगे बढ़कर हमेशा सशक्त और सकारात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि समाज के बच्चे शिक्षा के हर क्षेत्र में पूरे देश में सफलता के परचम लहरा रहे हैं। यह एक सुखद सकारात्मक परिवर्तन है इससे समाज के युवाओं को एक नई दिशा मिलेगी। उन्होंने सभी प्रतिभावान छात्र-छात्राओं की उज्ज्वल भविष्य के लिए कामना की। 

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच के प्रांतीय अध्यक्ष विशाल पाड़िया ने सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के होने से मेधावी छात्रों को सम्मान देने से प्रतिभाओं में ऊर्जा का संचार होता है। प्रतिभा वह दीप है जो अंधकार को चीर कर रास्ता दिखाता है उन्होंने कहा कि युवा शक्ति राष्ट्र शक्ति है। 

प्रतिभा सम्मान समारोह मे सीबीएसई व आईसीएसई- 2025 की 10वीं एवं 12वीं की परीक्षा में 85% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 80 मारवाड़ी समाज के छात्र-छात्राओं को प्रतिभा प्रोत्साहन सम्मान से सम्मानित किया गया। तथा 20  प्रोफेशनल डिग्री पाने वालो मे  एमबीबीएस- रचिता चौधरी एवं साकेत अग्रवाल, सीए चार्टर्ड अकाउंटेंट-शिवम लखोटिया, विनाश फोगला, जय किशन वशिष्ठ, अमीषा सर्राफ, अपूर्व जालान, खुशी सर्राफ, शंकर गोयल, गौरव खेमका, अंचल गाड़ोदिया, श्रेया तापड़िया एवं मेघा चौधरी, एलएलबी- हरीश लाडिया, पीजीडीएम- आर्यन अग्रवाल, कोमल मारू, सीएमए सर्वेश साबू, आइओसी-रिद्धि चितलांगिया तथा कराटे चैंपियन्स-कृष भाला एवं साक्षी बांगर, सभी छात्र-छात्राओं को मोमेंटो, प्रशस्ति- पत्र, पुस्तक एवं पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। 

अध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार ने रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के द्वारा चलाए जा रहे हैं जनसेवा कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। सम्मान समारोह मे आए सभी आगंतुक अतिथियों का स्वागत सम्मेलन के पदाधिकारीयों ने पुष्प गुच्छ देकर एवं शॉल ओढ़ाकर किया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम संयोजक विकास अग्रवाल एवं उपाध्यक्ष पवन कुमार पोद्दार ने किया। धन्यवाद- ज्ञापन मारवाड़ी सम्मेलन के जिला महामंत्री विनोद कुमार जैन ने किया। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के प्रायोजक मेसर्स बाबूलाल प्रेम कुमार थे। 

उक्त जानकारी देते हुए जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि कार्यक्रम में भागचंद पोद्दार, विश्वनाथ नारसरिया, किशन साबू, नरेंद्र लखोटिया, चंडी प्रसाद डालमिया, अनिल अग्रवाल, पवन शर्मा, मनोज चौधरी, पवन पोद्दार, कौशल राजगढ़िया, प्रमोद सारस्वत, संजय सर्राफ, निर्भय शंकर हरित, निर्मल बुधिया, सनी टिंबडेवाल, आशीष अग्रवाल, नरेश बंका, विकास झाझरिया, अजय डीडवानिया, अमित शर्मा, प्रमोद बगड़िया, मुकेश जाजोदिया, कमल शर्मा, किशन अग्रवाल, अजय खेतान, अरुण जालान, गिरधारी सर्राफ, संदीप सर्राफ के अलावा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं अभिभावकगण उपस्थित थे।

Published / 2025-07-11 19:36:51
अग्रसेन भवन में हुई रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन कार्य समिति की बैठक

रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के सत्र 2025 -27 के लिए अध्यक्ष का चुनाव 27 जुलाई को 

टीम एबीएन, रांची। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन का समिति की एक अहम बैठक रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के जिलाध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार की अध्यक्षता में महाराजा अग्रसेन भवन के सभागार में संपन्न हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन की आम सभा एवं वर्ष सत्र- 2025- 27 के लिए अध्यक्ष का चुनाव 27 जुलाई दिन रविवार को महाराजा अग्रसेन भवन में होगा। इस चुनाव को सुचारू रूप से संपन्न कराने हेतु अशोक कुमार नारसरिया चुनाव अधिकारी नियुक्त किये गये। 

बैठक में उपस्थित झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल को जिला मारवाड़ी सम्मेलन के पदाधिकारियों ने शॉल ओढ़ाकर एवं पुष्प गुच्छ देकर अभिनंदन एवं सम्मानित किया। प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल ने सबों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धनबाद में आयोजित नवम प्रांतीय अधिवेशन के सफल आयोजन के लिए झारखंड के सभी जिलों को बहुत-बहुत धन्यवाद दिया। बैठक में झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन मे रांची जिला से विभिन्न पदों में शामिल हुए सभी पदाधिकारीयों को अंग वस्त्र ओढ़ाकर एवं पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। बैठक में कोषाध्यक्ष द्वारा आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। 

बैठक में जिला महामंत्री विनोद कुमार जैन ने बताया कि 12 जुलाई दिन शनिवार को समय अपराह्न 3 बजे से महाराजा अग्रसेन भवन में प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया है। जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गयी है। कार्यक्रम के संयोजक विकास अग्रवाल है। प्रतिभा सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल, उद्घाटनकर्ता पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल एवं विशिष्ट अतिथि मारवाड़ी युवा मंच के प्रांतीय अध्यक्ष विशाल पाड़िया होंगे। बैठक का संचालन संयुक्त महामंत्री कौशल राजगढ़िया एवं धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष पवन पोद्दार ने किया। 

उक्त जानकारी देते हुए मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि बैठक में कमल कुमार केडिया, किशन साबू, नरेंद्र गंगवाल, पवन पोद्दार, विनोद कुमार जैन,पवन शर्मा, विश्वनाथ नारसरिया, मनोज चौधरी,अनिल कुमार अग्रवाल कौशल राजगढ़िया,प्रमोद सारस्वत,संजय सर्राफ, नंदकिशोर पाटोदिया, नरेश बंका, निर्मल बुधिया, राजेंद्र केडिया, आनंद जालान, मनोज रूईया, प्रमोद बगड़िया, दीपेश निराला, नरेंद्र लखोटिया, पुरुषोत्तम विजयवर्गीय, सौरभ बजाज, रोहित पोद्दार, शैलेश अग्रवाल, अजय खेतान,अजय डीडवानिया रौनक झुनझुनवाला,अमित बजाज,अमित चौधरी, सुमित महलका, आशीष डालमिया, मनीष लोधा, प्रकाश चंद्र नाहटा, जितेश अग्रवाल, के अलावा अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

Published / 2025-07-09 21:07:17
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के सभी प्रांतीय विभागीय मंत्रियों के नामों की घोषणा

टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल एवं प्रांतीय महामंत्री विनोद कुमार जैन ने झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के सभी प्रांतीय विभागीय मंत्रियों का गठन करते हुए सभी के नामों की घोषणा की, जिसमें- संविधान संशोधन विभाग में कमल कुमार केडिया, पवन कुमार शर्मा, ज्योति बजाज 

  • सदस्यता विभाग- नेहा पटवारी,अजय खेतान, अमित बजाज अंकित मोदी, विकास अग्रवाल। 
  • जन सहयोग विभाग- आनंद  चौधरी, महेश चोपालिया, प्रवीण लोहिया। 
  • प्रचार प्रसार एवं जनसंपर्क विभाग- अंकुश जवान पुरिया, वीरेंद्र कुमार मुनका। 
  • महिला प्रकोष्ठ विभाग- अलका सरावगी, रीना सुरेखा, अनीता अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, रानी अग्रवाल, रिया अग्रवाल एवं रंजीता केडिया। 
  • तकनीकी एवं वेबसाइट विभाग- आनंद गोयल, वरुण जालान, राजेश कौशिक, अनिल अग्रवाल, संजय कथुरिया। 
  • सूचना एवं कार्यालय विभाग- मनीष लोधा, कमल शर्मा, आकाश अग्रवाल, अमित चौधरी एवं सुमित महलका। 
  • गृह पत्रिका विभाग- निर्मल बुधिया,शशांक भारद्वाज, नरेश अग्रवाल, अजय डीडवानिया। 
  • प्रेस- मीडिया विभाग- संजय सर्राफ,। 
  • संगठन एवं संस्कृति- मुकेश काबरा, अरविंद सोमानी, नवीन अग्रवाल, हरि मित्तल, मुकेश अग्रवाल। 
  • युवा प्रकोष्ठ विभाग- विशाल पाड़िया, सौरभ बजाज, रौनक झुनझुनवाला, निकुंज पोद्दार, ललित अग्रवाल एवं श्वेता भाला। 
  • वित्त संग्रह विभाग- हरि कनोडिया चंद्र प्रकाश धेलिया, अजय दधिच, जेपी शर्मा, रामगोपाल शर्मा। 
  • कानूनी सलाह विभाग- राजीव शर्मा, धर्मचंद पोद्दार, दीपेश निराला, श्रवण देबुका। 
  • राजनीतिक विभाग- सुरेश शर्मा, भानु जालान एवं दीपक बंका। 
  • शिक्षा विभाग- किशन पोद्दार, रिंकू अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, अमित जैन रारा, एवं संजय शर्मा। 
  • प्रतिभा सम्मान विभाग- प्रकाश बजाज, प्रमोद अग्रवाल, प्रवीण बगड़िया। 
  • साहित्य एवं शोध विभाग- नरेश बंका, नीलम पेड़ीवाल। 
  • गौ सेवा विभाग- अजय भरतिया, महेश गोयल। 

प्रशासनिक समन्वय विभाग- राम बांगड़ एवं सत्यनारायण अग्रवाल को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि झारखंड के सभी जिलों के प्रतिनिधियों को प्रांतीय कार्यसमिति कमेटी में शामिल किया गया है। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी है। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।

Published / 2025-07-08 21:10:40
ज्ञान और श्रद्धा का समर्पण दिवस गुरु पूर्णिमा 10 को

गुरु पूर्णिमा आत्मिक विकास, आत्म संयम और श्रम की योग्यता को निखारने की देता है प्रेरणा : संजय सर्राफ 

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट व विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि धर्म में गुरु पूर्णिमा को बेहद पवित्र और आध्यात्मिक महत्व का दिन माना जाता है। हर साल यह पर्व आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यही दिन व्यास पूर्णिमा और वेदव्यास जयंती के रूप में भी श्रद्धा से मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। 

उन्होंने न केवल महाभारत, बल्कि श्रीमद् भागवत 18 पुराण और ब्रह्म सूत्र जैसे ग्रंथों की रचना करके सनातन धर्म को अमूल्य धरोहर दी। हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाये जाने वाला गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख पर्व है, जो इस वर्ष 10 जुलाई, दिन गुरुवार को पड़ रहा है। यह दिन समस्त गुरुओं-आध्यात्मिक शैक्षिक या जीवन के अनुभवों से मार्गदर्शन देने वाले का आदर व आभार व्यक्त करने का शुभ अवसर है। 

गुरु पूर्णिमा का महत्व सनातन धर्म में गुरुशिष्य परंपरा के पवित्र संबंध को प्रणाम करने का होता है। श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण को अर्जुन का गुरू कहकर चिन्हित किया गया है। वेदों में इसे ऋषिपर्व के रूप में पहचाना जाता है, जिसमें सम्मानित ऋषि महर्षियों, विशेषकर ऋषि वशिष्ठ, विश्वामित्र, कणाद, कण्व और उपनिषदाचार्यो को स्मरण किया जाता है। 

शिष्य जन गुरुकुटी में रहकर शिक्षा ग्रहण करते थे, इस त्योहार से शिक्षकों को अपना सम्मान एवं कृतज्ञता प्रकट करने का परंपरागत तरीका स्थापित हुआ। आध्यात्मिक गुरु के प्रति भक्ति और समर्पण व्यक्त करने का उत्तम अवसर। छाया की भांति गुरु ज्ञान देते हैं,उनके चरणों में सिर नवाकर हम जीवन की अज्ञानता से ज्ञान की ओर अग्रसर होते हैं। यह दिन स्वयं आत्मनिरीक्षण और गुरु के दिखाए पथ पर चलने की इच्छाशक्ति हेतु आदर्श है। 

गुरुकृपा प्राप्ति के साथ सत्कर्म विनम्रता, संयम, संतोष, और आध्यात्मिक एकाग्रता को बल मिलता है। प्रात: स्नान और विष्णु-या श्रीकृष्ण मंत्र से पूजा। गुरु के चरणों में पुष्प-पेन-फल चढ़ाकर, तिलक लगाकर सम्मान। शिष्य गीता, उपनिषद, भगवद्-गीता या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं। योग, ध्यान और सत्संग करते हुए गुरु-शिष्य मिलन पर चर्चा प्रस्तुत करना आम प्रथा है। 

सामाजिक और धार्मिक सभाओं में श्लोक-भजनों के माध्यम से गुरु-बन्धु वेद्धि होती है। धार्मिक आध्यात्मिक आश्रमों में अनुष्ठान करना और दान-पुण्य व अनुशासन की शिक्षा ग्रहण करना प्रमुख है। गुरु केवल आध्यात्मिक गुरु ही नहीं होते,विश्वविद्यालयों के शिक्षक, कार्यालय में मेंटर्स, क्रिकेट टीम का कोच,जीवन के चौथे सौदृष्टि व प्रेरक, माता-पिता सभी हमारे गुरु हो सकते हैं। 

आधुनिक युग में गुरुओं का सम्मान केवल भावनात्मक पूजन से नहीं, बल्कि उनके वास्तविक योगदान से भी होता है। शिक्षा-संस्थान इस दिन कार्यक्रम आयोजित करते हैं- गुरु सम्मान, टीचर्स डे से तो भिन्न, यह पर्व विशेष आध्यात्मिक धरातल पर आधारित होता है। कॉर्पोरेट जगत में कोचिंग, नेतृत्व-विश्लेषण और परामर्श पूर्वक प्रदान करने वाले लोगों को गुरु कहा जाने लगा है। 

आनलाइन गुरु जैसे कोच, लाइफ सलाहकार, योग-गुरु आदि को भी हम श्रद्धा-पूर्वक स्मरण करते हैं। गुरु-पूजन हेतु कहा जाता है कि जीवन में शुभता, विवेक और तरक्की की प्राप्ति होती है। यह दिन आत्मिक विकास, आत्म-संयम, और श्रम की योग्यता को निखारने की प्रेरणा देता है। पुराणों में भी गुरु पूजन को श्रेष्ठतम पुण्य समझा गया है। 

गुरु पूर्णिमा का पर्व केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि यह ज्ञान की ओर प्रकट सजगता और गुरु के प्रति अविरल श्रद्धा का प्रतीक है। जब हम अपने जीवन में जो कुछ ज्ञान, संयम और पथदर्शन के योग्य बनना सीखते हैं, वह सब संतोष एवं गुरु श्री से ही संभव होता है। 

यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि जहां तक हमने देखा है, वह केवल गुरु की छाया है,और जहां तक देखना है, वह गुरु के अनुग्रह-दीप्त पथ पर चलना है। इस पूज्य पर्व पर हम सभी उन गुरुओं का सम्मान करें,जो दीपक की भांति हमें हर अंधकार से रास्ता दिखाते हैं।

Published / 2025-07-06 19:20:29
एकता बलिदान और इंसानियत का मिसाल है मोहर्रम : देवेंद्रनाथ महतो

  • JLKM ने राजधानी रांची में निकला मोहर्रम का विशाल जुलूस

टीम एबीएन, रांची। इस्लामिक कैलेंडर प्रथम महीने मोहर्रम को आज राजधानी रांची में भव्य तरीके से मनाया गया। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने महीने के आज 10वें दिन आसुरा मनाया। ढोल ताशो की गूंज, ताजिया की सजावट के साथ हुसैन या हुसैन के नारे करबला में गूंज उठा। वातावरण भावुक और श्रद्धामय हो गया। इमामबाड़ा में मुस्लिम समुदाय के लोग एकत्रित होकर इमाम हुसैन की बलिदान को याद किया।

राजधानी के डोरंडा, हिंदपीडी, कडरू, मोरहाबादी आदि क्षेत्रों से कई विशाल जुलूस निकाला गया और कर्बला चौक में इमाम हुसैन के मकबरा का प्रतीक ताजिया एवं विभिन्न रंग-बिरंगे पताका लेकर एकत्रित हुआ। जिससे भारी भीड़ देखने को मिला। प्रशासन ने कड़ी मुस्तैदी के साथ विधि व्यवस्था नियंत्रण पर लगे रहे। हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों के बलिदान को याद किया गया।

जेएलकेएम संगठन के बैनर से मेंन रोड (महात्मा गांधी मुख्य मार्ग) टैक्सी स्टैंड में भव्य स्टेज सज़ाया गया। स्मृति शोक-संगीत गाया गया। मुख्य अतिथि संगठन के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो शामिल होकर विभिन्न जुलूस के खलीफा को पगडी पहनाकर सम्मानित किया गया। बेहतर करतब दिखाने वाले को मोमेंटो से प्रोत्साहित किया। 

शहीदों को याद करते हुए श्री महतो ने कहा कि हमारा यह मुहर्रम खुशियों और जश्न का नहीं बल्कि शोक और मातम का का त्यौहार है। त्याग बलिदान और एकता का मिशाल है। पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अन्याय, असत्य और अधर्म के खिलाफ अपना साहस दिखाया था। उनके 72 सहयोगियों ने अन्याय के खिलाफ अपना बलिदान स्वीकार था।

आज के इस इस्लामी पवित्र कार्यक्रम में संगठन के अल्पसंख्यक केंद्रीय अध्यक्ष आजाद हुसैन अंसारी, नवसाद आलम,अयुब अली, इरसाद आलम, अजरुद्दीन आलम, मूदस्सिर नवाज, मोहसिन अंसारी, शाहीद अंसारी, संजय महतो आदि संगठन के पदाधिकारी मौजूद होकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

Published / 2025-07-06 09:54:30
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती आज

जन्म : 06 जुलाई 1901
मृत्यु :  23 जून 1953

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। छह जुलाई, 1901 को कोलकाता में श्री आशुतोष मुखर्जी एवं योगमाया देवी के घर में जन्मे डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी को दो कारणों से सदा याद किया जाता है। पहला तो यह कि वे योग्य पिता के योग्य पुत्र थे। श्री आशुतोष मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के संस्थापक उपकुलपति थे।

1924 में उनके देहान्त के बाद केवल 23 वर्ष की अवस्था में ही श्यामा प्रसाद को विश्वविद्यालय की प्रबन्ध समिति में ले लिया गया। 33 वर्ष की छोटी अवस्था में ही उन्हें कलकत्ता विश्वविद्यालय के उपकुलपति की उस कुर्सी पर बैठने का गौरव मिला, जिसे किसी समय उनके पिता ने विभूषित किया था। चार वर्ष के अपने कार्यकाल में उन्होंने विश्वविद्यालय को चहुँमुखी प्रगति के पथ पर अग्रसर किया।

दूसरे जिस कारण से डॉ. मुखर्जी को याद किया जाता है, वह है जम्मू कश्मीर के भारत में पूर्ण विलय की माँग को लेकर उनके द्वारा किया गया सत्याग्रह एवं बलिदान। 1947 में भारत की स्वतन्त्रता के बाद गृहमन्त्री सरदार पटेल के प्रयास से सभी देसी रियासतों का भारत में पूर्ण विलय हो गया; पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के कारण जम्मू कश्मीर का विलय पूर्ण नहीं हो पाया। उन्होंने वहाँ के शासक राजा हरिसिंह को हटाकर शेख अब्दुल्ला को सत्ता सौंप दी। शेख जम्मू कश्मीर को स्वतन्त्र बनाये रखने या पाकिस्तान में मिलाने के षड्यन्त्र में लगा था।

शेख ने जम्मू कश्मीर में आने वाले हर भारतीय को अनुमति पत्र लेना अनिवार्य कर दिया। 1953 में प्रजा परिषद तथा भारतीय जनसंघ ने इसके विरोध में सत्याग्रह किया। नेहरू तथा शेख ने पूरी ताकत से इस आन्दोलन को कुचलना चाहा; पर वे विफल रहे। पूरे देश में यह नारा गूँज उठा - एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नहीं चलेंगे।

डॉ. मुखर्जी जनसंघ के अध्यक्ष थे। वे सत्याग्रह करते हुए बिना अनुमति जम्मू कश्मीर में गये। इस पर शेख अब्दुल्ला ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 20 जून 1953 को उनकी तबियत खराब होने पर उन्हें कुछ ऐसी दवाएँ दी गयीं, जिससे उनका स्वास्थ्य और बिगड़ गया। 22 जून को उन्हें अस्पताल में भरती किया गया। उनके साथ जो लोग थे, उन्हें भी साथ नहीं जाने दिया गया। रात में ही अस्पताल में ढाई बजे रहस्यमयी परिस्थिति में उनका देहान्त हुआ।

मृत्यु के बाद भी शासन ने उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया। उनके शव को वायुसेना के विमान से दिल्ली ले जाने की योजना बनी; पर दिल्ली का वातावरण गरम देखकर शासन ने विमान को अम्बाला और जालन्धर होते हुए कोलकाता भेज दिया। कोलकाता में दमदम हवाई अड्डे से रात्रि 9.30 बजे चलकर पन्द्रह कि.मी दूर उनके घर तक पहुँचने में सुबह के पाँच बज गये। 24 जून को दिन में ग्यारह बजे शुरू हुई शवयात्रा तीन बजे शमशान पहुँची। हजारों लोगों ने उनके अन्तिम दर्शन किये।

आश्चर्य की बात तो यह है कि डॉ. मुखर्जी तथा उनके साथी शिक्षित तथा अनुभवी लोग थे; पर पूछने पर भी उन्हें दवाओं के बारे में नहीं बताया गया। उनकी मृत्यु जिन सन्देहास्पद स्थितियों में हुई तथा बाद में उसकी जाँच न करते हुए मामले पर लीपापोती की गयी, उससे इस आशंका की पुष्टि होती है कि यह नेहरू और शेख अब्दुल्ला द्वारा करायी गयी चिकित्सकीय हत्या थी। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने बलिदान से जम्मू-कश्मीर को बचा लिया। अन्यथा शेख अब्दुल्ला उसे पाकिस्तान में मिला देता।

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