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Published / 2025-07-18 20:46:19
कामिका एकादशी व्रत 21 जुलाई को

  • कामिका एकादशी आत्मशुद्धि, श्रद्धा, भक्ति और मोक्ष का अद्भुत अवसर: संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत करने का खास महत्व होता है। इसे करने से व्यक्ति के जीवन के दुख दूर हो सकते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

सावन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इसका विशेष महत्व है, क्योंकि इसे पापों से मुक्ति, मनोकामना की पूर्ति और मोक्ष प्राप्ति का दिन माना जाता है। इस वर्ष कामिका एकादशी का व्रत 21 जुलाई दिन सोमवार को रखा जायेगा। 

शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी व्रत से बढ़कर कोई दूसरा पुण्य नहीं होता। ब्रह्मवैवर्त पुराण और स्कंद पुराण में कामिका एकादशी का महात्म्य विस्तार से वर्णित है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा एवं नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और मन को शांति प्राप्त होती है। 

कामिका एकादशी का व्रत विशेष रूप से अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह जैसे आंतरिक दोषों से छुटकारा पाने का अवसर प्रदान करता है। यह व्रत व्यक्ति के भीतर सात्त्विकता का संचार करता है और अध्यात्म की ओर प्रवृत्त करता है। सावन मास में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह महीना स्वयं भगवान शिव और विष्णु दोनों की उपासना के लिए पवित्र माना गया है। 

कामिका एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। घर में या मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाकर, तुलसी दल चढ़ाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप किया जाता है। व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और रात्रि में जागरण कर श्रीहरि का भजन-कीर्तन करते हैं। 

द्वादशी के दिन पारण कर व्रत पूर्ण किया जाता है। इस व्रत से जुड़ी मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक कामिका एकादशी का पालन करता है, उसे गंगास्नान, गौदान और तप के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। यहां तक कि पितृदोष और पूर्वजों की अशांति भी इस व्रत से शांत होती है। 

कामिका एकादशी आत्मशुद्धि, भक्ति और मोक्ष का अद्भुत अवसर है। सावन मास में इसका व्रत करके जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त की जा सकती है। यह एक ऐसा पुण्य पर्व है जो आत्मा को प्रभु से जोड़ने की राह दिखाता है।

Published / 2025-07-17 20:54:03
भगवान शिव का उग्र और शक्तिशाली अवतार है काल भैरव

एबीएन सोशल डेस्क। काल भैरव का अवतार भगवान शिव का उग्र और शक्तिशाली अवतारों में एक माना जाता है। काल का अर्थ है समय और भैरव का अर्थ है भय को नाश करने वाला। काल भैरव समय और न्याय का देवता है। काल भैरव शिव का रौद्र रूप है जो दुष्टों का नाश करते हैं। ये शिव के क्रोध से उत्पन्न हुए जो ब्रह्माजी के अहंकार को नष्ट किया और सृष्टि के विकास में बाधक दुष्टों का संहार किया।

काल भैरव को तंत्र मंत्र , शक्ति और ज्योतिष साधना के देवता के रूप में पूजा जाता है। काल भैरव ही बटुक भैरव का बाल रूप है जो ब्रह्मा के अहंकार को नष्ट कर शिव के अपमान करने पर उनके पांचवे मस्तक को काट कर उन्हें दंडित किया। बटुक भैरव का स्वरूप सौम्य और शांत है। काल भैरव को भगवान शिव ने काशी का कोतवाल नियुक्त किया और पापियों को दंडित करने का कार्य सौंपा। 

काल भैरव भक्तों को सभी प्रकार के नाकारात्मक शक्तियों , भय और बुराइयों से बचा कर उनकी रक्षा करते हैं। इनका सवारी श्वान है जो अन्याय तथा बुराई को खत्म करने के लिए अवतरित होकर धरा पर न्याय और धर्म की प्रतिस्थापन की। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।

Published / 2025-07-16 22:06:01
स्वामी सदानंद जी महाराज का जन्मदिवस एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव 21 जुलाई को

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के संस्थापक परमहंस डॉ० संत शिरोमणि श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम श्री राधा कृष्ण मंदिर पुंदाग रांची में 21 जुलाई को पधार रहे हैं। 

ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 21 जुलाई, दिन सोमवार को अपराह्न 2.30 बजे से संध्या 5 बजे तक श्री राधा कृष्ण मंदिर मे परम वंदनीय सद्गुरु श्री सदानंद महाराज जी का जन्म दिवस एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। 

इस अवसर पर श्री सदगुरु महाराज हम सबों शिष्यों व श्रद्धालुओं को अपनी दिव्य वाणी से गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु पूजन,भजन- सत्संग प्रवचन के माध्यम से अमृत वर्षा का रसपान करायेंगे। कार्यक्रम के समापन पर गुरु महाराज जी सबों को आशीर्वाद एवं प्रसाद देंगे। उक्त जानाकरी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

Published / 2025-07-15 21:22:58
श्री राधा-कृष्ण मंदिर के नेत्र चिकित्सा शिविर में 90 लोगों के आंखों की जांच

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम श्री राधा कृष्ण मंदिर में ट्रस्ट के तत्वाधान तथा एएसजी आई हॉस्पिटल के सौजन्य से एक दिवसीय नि:शुल्क नेत्र चिकित्सा जांच लगाया गया। शिविर में आंखों की गंभीर बीमारियों का इलाज नेत्र चिकित्सक डॉ मो रियाज ने आधुनिक तकनीक मशीनों द्वारा किया गया। 

उन्होंने मरीजों की आंखों की बारीकियां से जांच के साथ-साथ इलाज हेतु परामर्श भी दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र, प्रदूषण और पोषण की कमी के कारण नेत्र रोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है और समय पर जांच एवं देखभाल से इन समस्याओं से बचा जा सकता है। शिविर में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में रह रहे 40 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रितों सहित 50 अन्य लोगों का नेत्र की जांच की गयी, कुल 90 लोगों की नेत्रों की जांच की गयी एवं जरूरतमंदों को दवाइयां भी दी गयी। 

नेत्र विशेषज्ञ के साथ सहायक के रूप में रूपेश कुमार झा, श्रेया शुभम, निखिल गुप्ता, नीतिका कुमारी ने सहयोग दिया। मौके पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि शिविर का उद्देश्य था समाज के वंचित जरूरतमंद और असहाय वर्ग के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करना विशेष कर नेत्र जांच जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधा जो अनेक बार इन वर्गों तक नहीं पहुंच पाती है। उन्होंने कहा कि सदानंद सेवा धाम मंदिर में समय-समय पर सभी बीमारियों के इलाज हेतु का स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाता है तथा मरीजो को दवाइयां भी नि:शुल्क दी जाती है। 

मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, शिवभगवान अग्रवाल, मधु  जाजोदिया, पूरणमल सर्राफ, सुरेश चौधरी, अंजनी अग्रवाल, बिष्णु सोनी, बिजय कुमार अग्रवाल, हरीश सोनी, मुरली प्रसाद, चंद्रदीप साहु, हरीश कुमार, परमेश्वर साहू, बसंत वर्मा आदि उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

Published / 2025-07-15 17:59:54
श्रावण मास आस्था, भक्ति, श्रद्धा, तपस्या, साधना और शिवभक्ति का पवित्र पर्व : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा-धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में श्रावण मास का अत्यंत विशेष महत्व है। यह महीना आस्था, भक्ति, तपस्या और साधना का प्रतीक है, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से पवित्र माना जाता है, बल्कि यह प्रकृति और जीवन के संतुलन का भी प्रतीक है। 

इसकी शुरुआत आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन से होती है। यह संपूर्ण मास भगवान शिव को समर्पित होता है, जिसे भक्तगण विशेष श्रद्धा और उत्साह से मनाते हैं। श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय मास माना जाता है। पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला, तो संपूर्ण ब्रह्मांड की रक्षा हेतु भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। 

जिससे उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाये। इस विष की ज्वाला को शांत करने के लिए देवताओं ने शिवजी पर जल अर्पित किया। तभी से श्रावण मास में जलाभिषेक की परंपरा शुरू हुई। श्रावण सोमवार का विशेष महत्व है। श्रावण के सभी सोमवार को व्रत रखकर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, शहद आदि चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। 

ऐसा माना जाता है कि इस मास में शिवभक्ति से मोक्ष प्राप्त होता है और समस्त पापों का नाश होता है। श्रावण मास में अनेक धार्मिक अनुष्ठान, व्रत एवं पर्व आते हैं। श्रावण सोमवार व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने हेतु यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है।

  • मंगला गौरी व्रत- विवाहित महिलाएं मंगलवार को यह व्रत कर सुख-समृद्धि एवं अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
  • नाग पंचमी- इस दिन नाग देवता की पूजा कर रक्षा और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। रक्षा बंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक पर्व इसी मास में आता है। 
  • हरियाली अमावस्या और हरियाली तीज- ये पर्व प्रकृति और नवजीवन का उत्सव हैं, जो महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं।श्रावण मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति जागरूकता का भी प्रतीक है। 

वर्षा ऋतु के कारण यह समय हरियाली, जल संरक्षण और भूमि की उर्वरता से जुड़ा होता है। इस महीने वृक्षारोपण का विशेष महत्व है, जिसे हमारी परंपरा ने धर्म से जोड़कर स्थायी जीवन शैली का हिस्सा बनाया है। श्रावण मास में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्त्व है, जिसमें लाखों श्रद्धालु गंगाजल लेकर शिवधामों तक पदयात्रा करते हैं। 

यह न केवल एक धार्मिक क्रिया है, बल्कि एक सामाजिक समरसता और साहस का उदाहरण भी है। श्रावण मास आत्मनिरीक्षण, संयम और साधना का समय है। उपवास, ध्यान, जाप और स्वाध्याय के माध्यम से यह मास आध्यात्मिक प्रगति का द्वार खोलता है। विशेषतः शिवमहापुराण, रुद्राष्टाध्यायी, शिव तांडव स्तोत्र आदि का पाठ इस मास में विशेष फलदायी माना गया है। 

श्रावण मास न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की गहराई और आध्यात्मिक विरासत को भी उजागर करता है। यह मास हमें भक्ति, सेवा, समर्पण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाता है।  इस पावन मास में हम सभी श्रद्धा और संयम के साथ शिवभक्ति में लीन होकर जीवन को सकारात्मकता से भरें।

Published / 2025-07-15 12:39:32
अनेक गुणों से परिपूर्ण है बिल्ववृक्ष

एबीएन सोशल डेस्क। भगवान शिव सबसे ज्यादा पसंद आने वाला बेलपत्र का वृक्ष कई गुणों से भरपूर होता है। आइये जानते हैं इसके गुण : 

  1. बिल्ववृक्ष के आसपास सांप नहीं आते l 
  2. अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है।
  3. वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है l
  4. चार, पांच, छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्र पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है l
  5. बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है एवं बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
  6. सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता है।
  7. बेल वृक्ष को सींचने से पित्र तृप्त होते है।
  8. बेल वृक्ष और सफ़ेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
  9. बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे ।
  10. जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी शिव लिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी जीव सभी पापों से मुक्त हो जाते है l
  11. बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है।
  12. कृपया बिल्व पत्र का पेड़ जरूर लगाये । बिल्व पत्र के लिए पेड़ को क्षति न पहुचाएं l

शिवजी की पूजा में ध्यान रखने योग्य बात 

शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव को कौन सी चीज़ चढाने से मिलता है क्या फल 

किसी भी देवी-देवता का पूजन करते समय उनको अनेक चीज़ें अर्पित की जाती है। प्रायः भगवान को अर्पित की जाने वाली हर चीज़ का फल अलग होता है। शिव पुराण में इस बात का वर्णन मिलता है की भगवान शिव को अर्पित करने वाली अलग-अलग चीज़ों का क्या फल होता है। शिवपुराण के अनुसार जानिए कौन सा अनाज भगवान शिव को चढ़ाने से क्या फल मिलता है:

  1. भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
  2. तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
  3. जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।
  4. 4गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद गरीबों में वितरीत कर देना चाहिए।

शिव पुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से उसका क्या फल मिलता है -

  1. ज्वर (बुखार) होने पर भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जलधारा द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।
  2. नपुंसक व्यक्ति अगर शुद्ध घी से भगवान शिव का अभिषेक करे, ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा सोमवार का व्रत करे तो उसकी समस्या का निदान संभव है।
  3. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिश्रित दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।
  4. सुगंधित तेल से भगवान शिव का अभिषेक करने पर समृद्धि में वृद्धि होती है।
  5. शिवलिंग पर ईख (गन्ना) का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।
  6. शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
  7. मधु (शहद) से भगवान शिव का अभिषेक करने से राजयक्ष्मा (टीबी) रोग में आराम मिलता है।

शिव पुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन का फूल चढ़ाया जाए तो उसका क्या फल मिलता है -

  1. 1. लाल व सफेद #आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर भोग व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  2. 2. #चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
  3. 3. #अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने से मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।
  4. मी पत्रों (पत्तों) से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
  5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।
  6. जूही के फूल से शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
  7. कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।
  8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
  9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर
    सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
  10. लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है।
  11. दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है।

Published / 2025-07-15 11:33:05
जानें कैसे वेदवती के श्राप ने रावण का किया समूल सत्यानाश

एबीएन सोशल डेस्क। एक बार जब रावण हिमालय के जंगलों में विचरण कर रहा था, तभी उसकी नज़र एक तपस्विनी पर पड़ी जो युवावस्था के पूर्ण सौंदर्य में थी। उस युवती का नाम वेदवती था। उसकी अनुपम सुंदरता और मोहकता को देखकर रावण मोहित हो गया और तीव्र वासना से भर उठा। वह उसके पास गया और बोला- तपस्या क्यों कर रही हो? ऐसी तपस्विनी वृत्ति एक सुंदर युवती को शोभा नहीं देती। तुम्हारा सौंदर्य तो ऐसा है कि कोई भी पुरुष उस पर मोहित हो जाए। तुम किसकी पुत्री हो और किस देवता की आराधना कर रही हो?

रावण के इस प्रश्न पर वेदवती ने उत्तर दिया,
मैं बृहस्पति के पुत्र कुशध्वज की कन्या हूँ। जब मैं विवाह योग्य हुई, तब अनेक देवता, गंधर्व, यक्ष और यहाँ तक कि राक्षस भी मेरे हाथ माँगने आए। लेकिन मेरे पिता ने किसी को भी मुझे सौंपा नहीं, क्योंकि उन्होंने केवल श्रीविष्णु को ही मेरे लिए वर रूप में स्वीकार किया था। एक राक्षस ने उन्हें मार डाला, और अब उनके उस संकल्प को पूरा करने हेतु मैं तप कर रही हूँ, जिससे मेरा विवाह केवल श्रीविष्णु से हो सके।

यह सुनकर रावण की वासना और अधिक बढ़ गई। उसने वेदवती को मीठे और लुभावने शब्दों से प्रलोभन देने की कोशिश की कि वह उससे विवाह कर ले। किंतु वेदवती ने उसके सारे प्रस्ताव दृढ़तापूर्वक ठुकरा दिए। इस अस्वीकृति से रावण क्रोधित हो गया। उसने बलपूर्वक वेदवती के बाल खींचे और उसे अपमानित करने लगा।

रावण की इस धृष्टता से वेदवती क्रुद्ध हो उठी। उसने अपने बाल काट डाले और स्वयं को उससे मुक्त कर लिया। अपमान और पीड़ा से जलती हुई वेदवती ने उसी क्षण रावण के सामने अग्नि में प्रवेश कर लिया — लेकिन उससे पहले उसने उसे श्राप दिया: तूने मेरा अपमान किया है, इसलिए मैं फिर से जन्म लूंगी... और तेरी विनाशलीला का कारण बनूंगी। इतना कहकर वेदवती अग्नि में विलीन हो गई।

बाद में जब रावण की श्रीराम से पहली मुठभेड़ में पराजय हुई, तो उसे वेदवती की याद आई। वह व्याकुल होकर बोला: ऐसा प्रतीत होता है कि वेदवती, जिसने मेरे द्वारा किए गए अपमान पर मुझे श्राप दिया था — वही अब सीता के रूप में जन्म लेकर मेरी विनाश का कारण बनी है।

(स्रोत: वाल्मीकि रामायण, उत्तर कांड – सर्ग 17; युद्ध कांड – सर्ग 60)

Published / 2025-07-14 22:00:54
श्रावणी मेला-2025 : तीसरे दिन बासुकीनाथ धाम में 50 हजार शिव भक्तों ने किया जलाभिषेक

एबीएन न्यूज नेटवर्क, दुमका। झारखंड में प्रसिद्ध तीर्थ स्थल फौजदारी बाबा बासुकीनाथ धाम में श्रावणी मेला के तीसरे दिन यानी रविवार को लगभग 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया और पूर्ण श्रद्धा भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की। सावन शुरू होते ही पूरा इलाका गेरुआ वस्त्र धारी कांवर यात्रियों के बोल- बम के जयघोष से गुंजायमान हो रहा है। 

बासुकीनाथ मेला प्रबंधन समिति से मिली जानकारी के मुताबिक रविवार की संध्या चार बजे तक सामान्य रूट लाइन से 41773, शीघ्र दर्शनम की सुविधा के तहत 1550 एवं जलार्पण काउंटर से 1574 श्रद्धालु जलार्पण कर चुके हैं। इसके साथ ही कांवर यात्रियों की लम्बी कतार लगी हुई है। बीते रविवार को यहां पहुंचे श्रद्धालुओं से शीघ्र दर्शनम् की सुविधा के रूप में चार लाख 65 हजार और अन्य स्रोतों से 4011 रुपये नकद राशि प्राप्त हुए। 

दुमका के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा कि जिला प्रशासन बाबा बासुकीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को हर तरह सुविधा मुहैया कराने के लिए कृत संकल्प है। उन्होंने कहा कि बाबा बासुकीनाथ धाम में चल रहे राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव के अंतर्गत श्रद्धालुओं की सुविधा और समस्या के त्वरित समाधान के लिए जिला प्रशासन ने एक नई व्यवस्था लागू की है। 

श्रावणी मेला में आने वाले श्रद्धालु मेला क्षेत्र में बने टेंट सिटी, आवासन केंद्र, पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई, स्वास्थ्य सुविधा आदि से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या से संबंधित शिकायतें अपनी मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर दर्ज करा सकते हैं। मेला क्षेत्र में जगह-जगह इस क्यूआर कोड को लगाया गया है, जिसे श्रद्धालु अपने मोबाइल कैमरे से स्कैन कर आनलाइन शिकायत प्रपत्र तक पहुंच सकते हैं। यह सुविधा खासतौर से श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई के लिए शुरू की गई है। 

श्रद्धालु अपनी शिकायत या सहायता की तत्काल आवश्यकता होने पर इन 9508250080 / 9934414404 हेल्पलाइन नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं। इन नंबरों पर कॉल कर मेला क्षेत्र में हो रही किसी भी तरह की असुविधा की सूचना दी जा सकती है। जिला प्रशासन द्वारा बनाये गये नियंत्रण कक्ष की टीम चौबीसों घंटे सक्रिय है। इसके माध्यम से शिकायत मिलते ही संबंधित विभाग को कारर्वाई के लिए सूचित किया जाता है। 

बासुकीनाथ धाम मेला क्षेत्र में कई नयी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इसमें आधुनिक टेंट सिटी, बेहतर आवासन व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, स्वच्छता युक्त शौचालय, और 24 घंटे स्वास्थ्य सेवा शामिल हैं। इन सभी व्यवस्थाओं की सतत निगरानी के लिए क्यूआर कोड आधारित फीडबैक सिस्टम एक महत्वपूर्ण कदम है। 

दुमका जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा होती है, तो वे क्यू आर कोड या हेल्पलाइन के माध्यम से तुरंत संपर्क करें ताकि सेवा में कोई बाधा न आये। ताकि यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं को बाबा बासुकीनाथ की नगरी में सुखद एवं सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिल सके।

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