टीम एबीएन, रांची। झारखण्ड चित्रांश विचार मंच द्वारा प्रकाशित चित्रांश मंजूषा-3 स्मारिका का भव्य विमोचन समारोह आज पलाश ऑडिटोरियम, वन भवन, डोरंडा में आयोजित किया गया। इस अवसर पर साहित्य, कला एवं संस्कृति के विविध आयामों का संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम में 12 वर्षीय बाल कलाकार अबीर दयाल सत्संगी ने अपने मधुर स्वर में सांसों की माला भजन की प्रस्तुति देकर उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान चित्रांश मंच के योगदान एवं समाज में उसकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। कहा गया कि मंच का उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्वों को प्रोत्साहित करना है, जो दूसरों के दुख को अपना समझते हैं, सच्चाई एवं सेवा के मार्ग पर चलते हैं और समाज में भलाई का वातावरण स्थापित करते हैं, वही सच्चे अर्थों में “चित्रांश” कहलाते हैं।
झारखण्ड चित्रांश विचार मंच के उपाध्यक्ष सह पत्रिका संपादक राजीव सहाय ने कहा कि चित्रांश मंजूषा-3 केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं, संस्कारों और सृजनशीलता का दस्तावेज है। हमारा प्रयास है कि मंच के माध्यम से साहित्य, कला और सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। आज का यह आयोजन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें कलाकारों एवं साहित्यकारों ने अपनी प्रतिभा से इसे सफल बनाया है। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों, साहित्यकारों एवं उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में सांसद (राज्यसभा) दीपक प्रकाश, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद मुख्य रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में मंच के सदस्य डॉ राघव शरण, प्रेमचंद श्रीवास्तव, अध्यक्ष संजय पीपरवाल , सचिव प्रखर जयपुरियार, पंकज पियूष, आनंद श्रीवास्तव, दिवाकर, कोषाध्यक्ष साकेत बिहारी शरण, उपाध्यक्ष साकेत शरण ने मुख्य भूमिका निभाई। मंच संचालन श्वेता सिन्हा ने किया। इस अवसर पर काफी संख्या में मंच के सदस्य एवं शहर के गणमान्य उपस्थित थे। उक्त जानकारी झारखण्ड चित्रांश विचार मंच के उपाध्यक्ष राजीव सहाय ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदू धर्म में भगवान परशुराम को न्याय, पराक्रम और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष परशुराम जयंती 20 अप्रैल को मनायी जायेगी। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है, जो कि अत्यंत शुभ और पुण्यदायी मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म अत्याचार और अधर्म के बढ़ते प्रभाव को समाप्त करने के लिए हुआ था। वे महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे। भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, जिन्होंने पृथ्वी पर अन्याय करने वाले क्षत्रियों का नाश कर धर्म की पुन: स्थापना की। उनके हाथ में धारण किये गये फरसे (कुल्हाड़ी) के कारण उनका नाम परशु-राम पड़ा।
परशुराम जयंती केवल एक जन्मोत्सव नहीं, बल्कि सत्य, साहस और न्याय के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा देने वाला पर्व है। यह दिन हमें सिखाता है कि जब समाज में अन्याय और अत्याचार बढ़े, तो उसका डटकर सामना करना चाहिए। भगवान परशुराम का जीवन त्याग, तपस्या और कर्तव्यनिष्ठा का अद्भुत उदाहरण है। वे एक ऐसे योद्धा ब्राह्मण थे, जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों का संतुलन बनाए रखा।
इस पर्व का मुख्य उद्देश्य समाज में नैतिकता, धर्म और कर्तव्य के प्रति जागरूकता फैलाना है। यह हमें अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। साथ ही, यह दिन ब्राह्मण समाज के लिए विशेष महत्व रखता है, जो भगवान परशुराम को अपना आराध्य मानते हैं। परशुराम जयंती के दिन श्रद्धालु प्रात: स्नान कर व्रत रखते हैं और भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना करते हैं।
मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन, हवन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। कई स्थानों पर शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं, जिनमें भगवान परशुराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का चित्रण किया जाता है। दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करना भी इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
परशुराम जयंती हमें धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाने का संदेश भी देता है। आज के समय में, जब नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है, भगवान परशुराम का जीवन हमें साहस, संयम और कर्तव्य परायणता का मार्ग दिखाता है। यही इस पावन पर्व की सबसे बड़ी सार्थकता है।
एबीएन सोशल डेस्क। परमहंस डा संत शिरोमणी स्वामी सदानंद जी महाराज के द्वारा संचालित एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट रांची के अंतर्गत काम कर रही सामाजिक संस्था श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम पुंदाग में चल रहे मंदबुद्धि, दिव्यांग, निराश्रितों लोगों की नि:शुल्क सेवा संस्था जनवरी 2024 से लगातार कर रही है।
सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि शुक्रवार को एक मंदबुद्धि असहाय व्यक्ति को आश्रम में लाया गया। जो मानसिक रोगी है आश्रम की टीम को सूचना मिली कि एक व्यक्ति सेवा सदन मार्ग बड़ा तालाब के नजदीक लावारिस अवस्था में मंदबुद्धि व्यक्ति घूम रहा है। जो कि बहुत ही अस्वच्छ अवस्था में था।
आश्रम की टीम ने उस व्यक्ति को बड़ा तालाब के पास से रेस्क्यू करके आश्रम लाया। टीम में आश्रम के सेवा साथी मुकुंद यादव, सूरज कुमार, धीरज कुमार गुप्ता और सत्यम कुमार शामिल थे। उसके बाद अस्पताल में उसकी मेडिकल जांच करायी गयी। बाद में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य प्रेम सभागार) मे लाया गया। उस व्यक्ति का नाम और पते की कोई जानकारी नहीं मिली है।
याददाश्त भी खो चुके थे, आश्रम कमेटी ने उस व्यक्ति का नाम गोविंद रखा है। आश्रम की टीम को सूचना मिलने पर समय-समय पर जरूरतमंदों को रेस्क्यू किया जाता है आश्रम में रह रहे इन सभी निराश्रितो को गुरुजी सदानंद जी महाराज के सहयोग से घर जैसा माहौल देने की कोशिश की जाती है। प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि अब निराश्रितों की संख्या 47 हो गया है। उन्होंने कहा कि मानव सेवा से बढ़कर कोई सेवा कार्य नहीं है।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अक्षय तृतीया भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है,जो इस वर्ष 20 अप्रैल को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जायेगा। कई लोग 19 अप्रैल को भी यह पर्व मनायेंगे, हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है।
अक्षय शब्द का अर्थ है- जिसका कभी क्षय न हो, अर्थात इस दिन किये गये शुभ कर्म, दान-पुण्य, जप-तप और आराधना का फल कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि वह अनंत काल तक बढ़ता रहता है। अक्षय तृतीया का धार्मिक और पौराणिक महत्व अत्यंत व्यापक है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था, इसलिए इसे परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
इसके अतिरिक्त, इसी पावन तिथि पर महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना का शुभारंभ हुआ था, जब महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश को इसका लेखन करने के लिए प्रेरित किया। यह दिन ज्ञान, सृजन और धर्म के संगम का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता को समाप्त कर उन्हें समृद्धि का आशीर्वाद दिया था।
यह कथा न केवल मित्रता की सच्चाई को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि सच्ची भक्ति और निष्कपट भाव से की गई प्रार्थना अवश्य फलदायी होती है। यही कारण है कि अक्षय तृतीया को समृद्धि, विश्वास और संबंधों की दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त के रूप में भी जाना जाता है। इसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।
विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना, भूमि पूजन, वाहन या आभूषण खरीदना-सभी कार्य इस दिन अत्यंत शुभ माने जाते हैं। विशेष रूप से सोना-चांदी खरीदने की परंपरा इस दिन बहुत प्रचलित है, क्योंकि यह विश्वास है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं समृद्धि में निरंतर वृद्धि करती हैं। इस पर्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष दान-पुण्य भी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जल से भरे घड़े, अन्न, सत्तू, गुड़, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि समाज में सहयोग और सहानुभूति की भावना को भी सुदृढ़ करता है। अक्षय तृतीया का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को धर्म, परोपकार और सद्कर्म की ओर प्रेरित करना है।
यह पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में किये गये अच्छे कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाते, बल्कि उनका प्रभाव दीर्घकाल तक बना रहता है। यह दिन सकारात्मक सोच, नयी शुरुआत और आत्मिक उन्नति का प्रतीक है। सामाजिक दृष्टि से भी अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। यह पर्व हमें समाज में जरूरतमंदों की सहायता करने, प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने तथा सामूहिक समृद्धि के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है।
आज के समय में, जब भौतिकता बढ़ रही है, यह पर्व हमें मानवीय मूल्यों की ओर लौटने का संदेश देता है। अंतत: अक्षय तृतीया केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक और समृद्ध बनाने का एक अवसर है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनायें, दूसरों के लिए उपयोगी बनें और अपने जीवन को अक्षय-अर्थात सदैव उन्नति, सुख और शांति से परिपूर्ण बनायें।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, चतरा। जिले से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। वशिष्ठ नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत दंतार गांव में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली एक गंभीर घटना सामने आयी है। जहां गुरुवार सुबह उस समय तनाव फैल गया जब ग्रामीण पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे।
उन्होंने मंदिर की दीवार पर भगवान राम और माता सीता के खिलाफ अमर्यादित भाषा लिखी देखी। इस घटना ने स्थानीय हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचायी है, जिसके विरोध में पूरे गांव में भारी आक्रोश व्याप्त है।
घटना की खबर तेजी से पूरे गांव में फैलते हुए भारी संख्या में मंदिर परिसर के पास ग्रामीण एकत्रित हो गये। जिसके बाद आक्रोशित हिंदू समाज के लोगों ने विरोध स्वरूप बाजार की दुकानों को बंद करा दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी अमित कुमार सिंह और अंचलाधिकारी (सीओ) भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने सबसे पहले मंदिर की दीवार पर लिखी गयी आपत्तिजनक भाषा को साफ करवाया और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जायेगा।
घटना के बाद पूरे इलाके को पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों में से एक राहुल कुमार का ने मामले को लेकर बताया कि इस तरह की घटना पहली बार इस इलाके में नहीं हुई है। इससे पहले भी यहां मंदिर को निशाना बनाकर ऐसी अभद्र हरकत की जा चुकी है, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस बार साफ चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक बाजार बंद रहेगा। फिलहाल गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है, जबकि प्रशासन स्थिति पर नजर बनाये हुए है और मामले की जांच में जुट गयी है।
एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने मारवाड़ी समाज के गौरव, प्रख्यात आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के ईमानदार, साहसी एवं सिद्धांतनिष्ठ कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया है।
उन्होंने कहा कि खेमका जैसे अधिकारी प्रशासनिक व्यवस्था में सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता की जीवंत मिसाल हैं। हरियाणा कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने हाल ही में 34 वर्षों की लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ग्रहण की। अपने कार्यकाल के अंतिम क्षणों में उन्होंने एक भावुक संदेश साझा करते हुए अपने परिवार, सहकर्मियों एवं शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
साथ ही उन्होंने विनम्रता का परिचय देते हुए कहा कि यदि उनके किसी निर्णय से किसी को भी कष्ट पहुंचा हो, तो वे उसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं। यह उनकी संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। वर्ष 1991 बैच के इस जांबाज अधिकारी का प्रशासनिक जीवन संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा।
34 वर्षों के कार्यकाल में उनका कुल 57 बार तबादला हुआ, जो औसतन हर सात माह में एक स्थानांतरण को दर्शाता है। इतना ही नहीं, कई बार उनका कार्यकाल एक माह से भी कम रहा। इसके बावजूद उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और निर्भीकता के साथ किया।
अशोक खेमका वर्ष 2012 में उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आये, जब उन्होंने गुरुग्राम की एक बहुचर्चित भूमि सौदे से जुड़े मामले में तत्कालीन प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर निर्णय लेते हुए म्यूटेशन को रद्द कर दिया। इस फैसले ने उन्हें ईमानदार और निडर अधिकारी के रूप में स्थापित किया।
कोलकाता के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे खेमका ने आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनके पास पीएचडी और एमबीए जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएं भी हैं। वे चाहते तो आरामदायक जीवन चुन सकते थे, किंतु उन्होंने सदैव सत्य और नैतिकता के मार्ग को प्राथमिकता दी।
संजय सर्राफ ने कहा कि अशोक खेमका का निष्कलंक एवं साहसी प्रशासनिक सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनका जीवन संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से समझौता नहीं करना चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के चतरा जिला अंतर्गत सिमरिया प्रखंड के पिरी में पूर्वी भारत के सबसे बड़े उदधिक्रमण संकटमोचन हनुमान धाम का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। करीब 8 एकड़ क्षेत्र में आकार ले रहे इस भव्य धाम में विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों के साथ 108 फीट ऊंची हनुमान जी की विराट प्रतिमा स्थापित की जानी है। इसी धाम के प्रचार-प्रसार और श्रद्धालुओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुरुवार को राजधानी रांची में संकटमोचन रथ यात्रा निकाली गयी।
रथ यात्रा सुबह 7.30 बजे अरगोड़ा स्थित हनुमान मंदिर से शुरू हुई और कडरू, चुटिया होते हुए हिनू चौक स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर पहुंची। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे मार्ग में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। इस शोभायात्रा में शहर के कई डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, शिक्षाविद और व्यवसायी भी शामिल हुए।
शोभायात्रा के दौरान कडरू स्थित हज हाउस के पास सांप्रदायिक सौहार्द्र का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का जोरदार स्वागत किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को माला पहनाकर, चुनरी और अंगवस्त्र भेंट कर तथा अल्पाहार की व्यवस्था कर आपसी भाईचारे और एकता का सशक्त संदेश दिया गया।
इसके बाद रथ कडरू हनुमान मंदिर पहुंचा, जहां मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने भव्य स्वागत किया। कडरू से रथ चुटिया स्थित राम मंदिर पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यहां समिति की ओर से पानी, ठंडे पेय, फल और मिठाइयों से स्वागत किया गया। दिनभर चली इस यात्रा का समापन महावीर मंडल न्यास में हुआ, जहां रथ में शामिल श्रद्धालुओं का लस्सी और फल से सत्कार किया गया।
निर्माणाधीन संकटमोचन धाम को एक समग्र आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परिसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। लगभग 8 एकड़ क्षेत्र में फैल रहे इस धाम में एक एकड़ क्षेत्र में अशोक वाटिका विकसित की जा रही है, जहां 108 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित होगी। इसके साथ ही 20 हजार वर्ग फीट के विशाल प्लेटफॉर्म पर राम दरबार, शिव परिवार और संकटमोचन हनुमान मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।
परिसर में दशरथ कुंड, सीता रसोई, महर्षि वशिष्ठ आश्रम, महर्षि विश्वामित्र आश्रम और माता शबरी आश्रम जैसे पौराणिक स्थलों की स्थापना की जा रही है, जबकि 20 हजार वर्ग फीट का महर्षि वाल्मीकि सभागार भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा यहां सनातन साहित्य के लिए एक विशाल पुस्तकालय भी प्रस्तावित है।
रथ यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं द्वारा संकल्पित मिट्टी और अक्षत एकत्र किये जा रहे हैं, जिन्हें धाम की नींव में स्थापित किया जायेगा। आयोजकों के अनुसार, इससे पूरे राज्य के लोगों की आस्था इस निर्माण से सीधे जुड़ सकेगी और यह धाम भविष्य में धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
एबीएन सोशल डेस्क। परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज के सान्निध्य में एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट रांची के द्वारा संचालित विगत 2 वर्षों से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) रांची में आज कविता गाड़ोदिया एवं उनके परिवार के सौजन्य से आश्रम में रह रहे 46 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों के बीच विभिन्न व्यंजनों के साथ अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में भोजन बनवाकर भोजन खिलाया गया।
सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक 15 दिनों मे 3230 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया।
मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम सदगुरू कृपा अपना घर (सत्य-प्रेम सभागार) में अनिष्क नारायण, बिंदु वर्मा, संजय अग्रवाल, अनमोल सिन्हा, संतोष कुमार नायक, सुशील अग्रवाल, राजेंद्र सरावगी, मिलन जालान, शालिनी सिन्हा, सुरेश चौधरी, अनिमा प्रसाद, महेंद्र प्रसाद, संतोष कुमार शर्मा मनीष कुमार के सौजन्य से सभी निराश्रित प्रभुजी को भोजन प्रसादी खिलाकर सेवा की गयी।
सभी ने ट्रस्ट के सदस्यों को बहुत बहुत धन्यवाद एवं अपना अमूल्य आशीर्वाद दिया। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इसके अलावे कई लोगों द्वारा आश्रम में रह रहे निराश्रितों, मंदबुद्धि, दीनबंधुओं के लिए खाद्य सामग्री एवं जरूरत के सामान दिया गया। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।उन्होंने कहा कि मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है।
अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, नंद किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया, विष्णु सोनी, सुरेश चौधरी, सुरेश भगत, पवन पोद्दार सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
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