एबीएन सोशल डेस्क। रक्षाबंधन हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि की कामना करती है। इसके साथ ही भाई बहन को जीवन भर रक्षा करने का वचन देता है।
इस साल श्रावण पूर्णिमा की तिथि दो दिन होने के कारण इस साल काफी कंफ्यूजन बना हुआ है कि किस दिन राखी का पर्व मनाना लाभकारी हो सकता है। आइए जानते हैं रक्षाबंधन की सही तारीख, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय और रक्षाबंधन का आध्यात्मिक महत्व।
भद्रा काल आरंभ- 8 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से भद्रा काल समाप्त- 9 अगस्त को तड़के 1 बजकर 52 मिनट पर ।
9 अगस्त को सुबह 5 बजकर 35 मिनट से दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक राखी बांधने का सबसे अच्छा मुहूर्त है। इस मुहूर्त में भाई की कलाई में राखी बांधना सबसे ज्यादा शुभ है।
एबीएन सोशल डेस्क। रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि रक्षा बंधन सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस रक्षाबंधन भाई-बहनों के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, तरक्की और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए उसे राखी बांधती हैं, और बदले में भाई जीवन भर उनकी रक्षा का वचन देता है। रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है।
रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती है।राजसूय यज्ञ के समय श्रीकृष्ण को द्रौपदी ने भी रक्षासूत्र रूप में अपने आंचल का टुकड़ा बांधा था। इसी के बाद से बहनों द्वारा भाई को राखी बांधने की परंपरा शुरू हो गयी, रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्तों के कुछ उदाहरण जैसे सुरक्षा का वचन, प्यार और स्नेह, विश्वास, खुशी और उत्सव, पारिवारिक बंधन, जब एक बार भगवान श्रीकृष्ण की उंगली से खून बहते देख द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया।
श्रीकृष्ण ने बदले में उन्हें यह वचन दिया कि वे हर संकट में उनकी रक्षा करेंगे। दुर्योधन द्वारा द्रोपदी के चीर हरण के समय भगवान श्री कृष्णा अपने भाई होने का कर्तव्य निभाया और उसे चीर हरण के समय द्रौपदी की सुरक्षा की यही रक्षा का भाव रक्षाबंधन का मूल है। संत कबीर की बहन ने उन्हें राखी बांधते हुए रक्षा का आग्रह किया।कबीर ने कहा कि वे हमेशा उन्हें न केवल शारीरिक खतरों से, बल्कि आध्यात्मिक अज्ञान से भी बचायेंगे।
यह कथा बताती है कि रक्षा केवल तलवार से नहीं, बल्कि मार्गदर्शन और अच्छे जीवन के मूल्यों से भी होती है। राजस्थान के जयपुर में रहने वाली 24 वर्षीय पूजा को एक सड़क दुर्घटना में काफी खून बह गया। डॉक्टरों ने तुरंत ड-नेगेटिव ब्लड की जरूरत बताई, जो दुर्लभ है। अस्पताल पहुँचे से पहले ही उसका भाई रोहित, जिसने कुछ महीने पहले ही ब्लड डोनेशन के लिए अपना नाम रजिस्टर कराया था, दौड़कर पहुँचा और बहन की जान बचाने के लिए रक्तदान किया। दिल्ली की सीमा को अचानक किडनी फेल होने की समस्या हुई।
डायलिसिस पर जीवन कट रहा था। टेस्ट में पाया गया कि उसके भाई अनिल का मैच पूरी तरह सही है। बिना एक पल सोचे अनिल ने अपनी किडनी बहन को डोनेट कर दी। आज सीमा पूरी तरह स्वस्थ है और कहती हैं, मेरे भाई ने मुझे दूसरी बार जन्म दिया। रक्षाबंधन की परंपरा का मूल भाव बहन का रक्षा-सूत्र बांधना और भाई का रक्षा-वचन निभाना अब भी वही है, लेकिन समय और समाज के बदलाव के साथ इस त्योहार की कई नई रूपरेखाएं उभर आयी हैं।
पहले भाई बहनों को मिठाई, कपड़े या थोड़े पैसे देते थे। अब गिफ्ट कार्ड, आनलाइन शॉपिंग वाउचर, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, इंश्योरेंस पॉलिसी, और यहां तक कि म्युचुअल फंड एसआइपी जैसी निवेश योजनाएं भी उपहार में दी जा रही हैं।
दूरी के कारण डिजिटल रक्षाबंधन प्रवासी और दूर रहने वाले भाई-बहन अब वीडियो कॉल, ई-राखी, और आॅनलाइन गिफ्ट डिलीवरी के जरिए त्योहार मनाते हैं। कई ऐप और वेबसाइट पर वर्चुअल राखी भेजने की सुविधा है।
कई राज्यों में रक्षाबंधन के दिन महिलाओं के लिए मुफ्त बस या ट्रेन यात्रा की सुविधा दी जाती है (जैसे यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश)। स्कूलों, कॉलेजों और एनजीओ में रक्षाबंधन को पर्यावरण या सामाजिक संदेशों के साथ जोड़ा जाता है—जैसे पेड़ों को राखी बांधकर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना।
अब रक्षा का मतलब केवल शारीरिक सुरक्षा नहीं रहा। भाई बहनों को साइबर सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और भावनात्मक समर्थन भी देने लगे हैं।
बहनें भी भाइयों को राखी बांधकर उन्हें स्वास्थ्य और मानसिक सुख-शांति की शुभकामनाएं देती हैं। रक्षाबंधन का सार यह है कि रक्षा केवल शारीरिक खतरे से नहीं, बल्कि जीवन के हर भय, चिंता और असुरक्षा से होती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि वचन निभाना ही सच्चे रिश्ते की पहचान है—चाहे समय महाभारत का हो, मध्यकाल का हो या आज का।
राखी का धागा सिर्फ कलाई में नहीं, बल्कि विश्वास और प्रेम में बंधा होता है। रक्षाबंधन समय के साथ अपने रूप और तरीकों में भले बदल गया हो, लेकिन इसकी आत्मा आज भी वैसी ही है—रिश्तों में प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का वचन। यह धागा अब सिर्फ भाई-बहन के बीच ही नहीं, बल्कि समाज और इंसानियत के बीच भी जुड़ाव का माध्यम बन चुका है।
टीम एबीएन, रांची। युवा एकता मंच एवं सदर अस्पताल के संयुक्त तत्वाधान मे आज हिन्दपीढ़ी लह फैक्ट्री रोड नूर अपार्टमेंट में बहुउद्देशीय चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। चिकित्सा शिविर में व्यवस्था की बहाल युवा एकता मंच की तरफ से प्रदान किया गया।
युवा एकता मंच के केंद्रीय अध्यक्ष इमरान हसन ने कहा कि इस प्रकार कि शिविर आम जनता के लिए वरदान है, जहां गरीब एवं निर्धन लोग पैसे के अभाव में अपना समुचित इलाज नहीं करा पाते हैं। वह इस इस प्रकार के शिविर में आकर लाभ पा सकते हैं। उक्त शिविर में सदर अस्पताल के फिजिशियन, चर्म रोग, हड्डी रोग तथा स्त्री रोग विशेषज्ञ उपस्थित हुए। जहां लोगों का इलाज किया गया।
शिविर में बीपी, शुगर तथा स्त्री रोग के अधिक रोगी पहुंचकर अपना इलाज कराये। बीपी, शुगर, थायराइड की जांच भी शिविर में 270 मरीजों का इलाज तथा जांच किया गया।
शिविर में सदर अस्पताल के फिजिशियन चिकित्सा के डॉ प्रीति प्रसाद, चर्म रोग के डॉ स्मृति कुमारी, हड्डी रोग डॉ तन्मय, स्त्री रोग डॉ चंदा कुमारी तथा डॉ असीम कुमार मांझी डीआरसीएचओ, वॉइस अहमद पीएचएम मो मुस्तफा आदि ने बड़ी जिम्मेदारी से उक्त शिविर में अपना भागीदारी सुनिश्चित करते हुए लोगों का इलाज किया। शिविर में पहुंचे रोगियों तथा चिकित्सक की ग्रुप के व्यवस्था आदि का प्रबंध युवा एकता मंच ने किया।
उक्त शिविर में युवा एकता मंच के केंद्रीय अध्यक्ष इमरान हसन के अलावा सरपरस्त अतिकुर रहमान, सरपरस्त मोजामिल अंसारी, महासचिव उमर अली, सदस्य फरहान अंसारी, तौसीफ खान, मेराज अंसारी, सरताब आलम, अकील मेराजी, रोशन कोंगारी, मो अख्तर, नदीम अनवर, मो बबन, मो जावेद, अलकमा सिद्दीकी, फिरोज अंसारी, परवेज अख्तर, मो मिनी, पठान तंजीम के तौसीफ खान आदि मुख्य रूप से उपस्थित होकर जनहित में तत्परता दिखाये।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (गुना)। संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी सोनू दास रूठियाई वालो ने ईमानदारी का परिचय दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुना जिले के राघोगढ़ तहसील के ग्राम रुठियाई में सोनू दास ओझा संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयाई हैं, जो एक छोटी सी गैस वेल्डिंग आदि की दुकान चलाते हैं। धरनावदा रोड खटीक मोहल्ला रूठियाई में जब वह दुकान खोलने गये तो उनकी दुकान के सामने एक बैग पड़ा हुआ था।
देख कर उन्होंने उनके पड़ोसी भंवर सिंह नाम के व्यक्ति को बुलाया और बैग को खोला तो बैग में बैंक की डायरी एटीएम पैन कार्ड बहुत सारे कागज व कंट्रोल राशन की मशीन के कागज थे। उस बैंग में मोबाइल नंबर मिला। मोबाइल नंबर मिलाया तो बैग मालिक बोला भैया मेरा नाम राजेंद्र राय रघुनाथपुरा तहसील राधोगढ से हूं। मेरा बैग कहीं गिर गया है। उन्होंने बोला आपका बैग मेरे पास है, आकर प्राप्त कर लो।
जिसे लेने वह आया और उसको बैग वापस दिया तो बहुत खुश हुआ। बोला- भाई आप कहां के लोग हो, यार इतने ईमानदार मेरा बैग में लाखों का हिसाब का सामान भरा था। सोनू दास ने बताया हम संत रामपाल जी महाराज के अनुयाई हैं। लाखों हो करोड़ रुपये हो उसको भी लौटा देते हैं। मेरे भाई आपका बैग ले जाइए आराम से आपके बैग में तो कागज एटीएम पासबुक वह आपका लाखों का कागजों का हिसाब भी था। हम तो लाखों रुपये होते हैं वह भी लौटा देते हैं मेरे दोस्त..।
टीम एबीएन, रांची। परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य मे श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वावधान में विगत 19 माह से चल रहे पीडित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) रांची में आज 6 अगस्त को कुसुम तुलस्यान के सौजन्य से आश्रम में रह रहे 37 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में भोजन बनवाकर भोजन खिलाया गया।
अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 18 जुलाई से 6 अगस्त तक तक 20 दिनों मे 3580 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया।
मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम सदगुरू कृपा अपना घर (सत्य-प्रेम सभागार) में-जानवी कुमारी, संतोष कुमार, दिलीप कुमार गुप्ता, दीपांजलि कुमारी, संतोष शर्मा, स्वाति कुमारी, मुकुल कुमार, बृजेश सिमरन, निर्मल छावनिका, सिमरन अग्रवाल, गौतम ओझा, जितेंद्र कुमार, नवीन मोदी,पंकज पोद्दार, विजय कुमार सिंह, अलका रंजन, सोनू कुमार, रितिका खेतान, अरुण बाजोरिया, के सौजन्य से सभी निराश्रित प्रभुजी को भोजन प्रसादी खिलाकर सेवा की गई। सभी ने ट्रस्ट के सदस्यों को बहुत बहुत धन्यवाद एवं अपना अमूल्य आशीर्वाद दिया। प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष निर्मल जालान, राजेन्द्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुर्णमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल,नन्द किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधु जाजोदिया, अरविंद अग्रवाल,पवन कुमार पोद्दार, विष्णु सोनी, सुरेश भगत सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम और श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
*प्रेस विज्ञप्ति*
*एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन की सूचना पर देह व्यापार में धकेली गई बच्ची को कराया मुक्त*
द्वारका पुलिस ने एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन की सूचना पर जबरन देह व्यापार के दलदल में धकेली गई 16 साल की एक नाबालिग बच्ची को मुक्त कराया। बच्ची ने बताया कि उसे तकरीबन साल भर पहले इस धंधे में धकेल दिया गया जहां उसे हर रात 8 से 10 ग्राहकों को खुश करना पड़ता था। पुलिस ने मामला दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और इस गिरोह में शामिल अन्य संदिग्धों के बारे में तहकीकात जारी है।
पीड़ित बच्ची ने बताया कि दर्द की शिकायत करने पर उसे दर्द निवारक गोलियां दी जाती थीं और फिर ग्राहकों के पास भेज दिया जाता था। इस काम के लिए उसे 500 रुपए दिए जाते थे लेकिन ये पैसे भी उसे कभी-कभार और मांगने पर ही मिलते थे। जब उसने खुद को छोड़ देने की विनती की तो ट्रैफिकिंग गिरोह के सदस्य उसे उसके रिकॉर्ड किए गए वीडियो दिखाकर धमकाते थे कि अगर उसने इस काम से मना करने या भागने की कोशिश की तो इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
पीड़ित बच्ची को उसकी एक सहेली ने बहला-फुसला कर इस धंधे में धकेला था। सहेली ने बच्ची से कहा था कि वह उसे किसी ऐसे आदमी से मिलवाएगी जो रुपए-पैसे की उसकी सभी समस्याएं चुटकियों में दूर कर देगा।
बच्ची ने बताया, सहेली ने मुझे एक भईया से मिलवाया जिन्होंने मुझे ढेर सारे पैसे कमाने के सब्जबाग दिखाए। तब मुझे समझ में नहीं आया कि मुझे किस दलदल में धकेला जा रहा है। जैसे ही मुझे समझ में आया, मैंने इससे बाहर निकलने की कोशिश की। लेकिन उन लोगों ने चुपके से रिकॉर्ड किए गए वीडियो दिखाकर मुझे मुंह बंद रखने की धमकी दी। बच्ची ने बताया कि उसकी मां की साल भर पहले मौत हो गई थी। वह अपने पिता के साथ रहती है जिन्हें शराब पीने की लत है। बच्ची से जब पूछा गया कि क्या उसके पिता इस बारे में कुछ जानते हैं तो उसने नहीं में सिर हिलाया। उसने कहा, उन्हें कुछ नहीं पता। मैंने उन्हें बता रखा था कि मैं एक काल सेंटर में काम करती हूं जहां रात को ड्यूटी होती है।
बच्ची ने बताया कि वह हर रोज शाम पांच बजे घर से निकलती थी और ग्राहकों के साथ रात बिताने के बाद सुबह 5-6 बजे लौटती थी। इस काम में उसे कोई छुट्टी नहीं मिलती थी और उसे रोजाना पांच से दस ग्राहकों को खुश करना पड़ता था।
एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने बताया, हमारी टीम खुद को ग्राहक की तरह पेश करते हुए गिरोह तक पहुंची। हमें उनका भरोसा जीतने में एक महीने से भी ज्यादा का समय लगा। काफी सौदेबाजी के बाद हमने उसे ऑनलाइन पेमेंट किया लेकिन इसके बाद उसने तुरंत अपना ठिकाना बदल लिया। आखिर में उसने हमें द्वारका बुलाया। हमने तत्काल पश्चिमी द्वारका रेंज के डीसीपी अंकित कुमार सिंह को इस बाबत जानकारी दी। सिंह ने तुरंत अपनी टीम को सूचित किया और छापे की तैयारी की। एवीए बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है। जेआरसी के 250 से भी ज्यादा सहयोगी संगठन देश के 418 जिलों में काम कर रहे हैं।
मनीष शर्मा ने बताया कि आरोपी ने आखिरी वक्त पर फिर अपना ठिकाना बदल लिया और उन्हें द्वारका के पास मोहन गार्डन के एक फ्लैट में बुलाया। डीसीपी ने मोहन गार्डन थाने की पुलिस से बात कर यह सुनिश्चित किया कि छापे में कोई अड़चन नहीं आए।
मौके पर पहुंचने पर हमारी टीम को वहां से शराब की खाली बोतलें, दर्द निवारक दवाइयां, कुछ एंटी बायोटिक और यौन संक्रमण के इलाज में काम आने वाली कुछ दवाइयां मिलीं। पुलिस ने इब्राहिम नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है लेकिन उसका मानना है कि वह अकेला नहीं है बल्कि उसके पीछे एक पूरा गिरोह है।
इस त्वरित और समन्वित कार्रवाई के लिए आभार जताते हुए मनीष शर्मा ने कहा, हमारी सूचना पर दिल्ली पुलिस ने जिस तत्परता से कार्रवाई की, वह सराहनीय है। लेकिन दिल्ली के मुहल्लों व कालोनियों में इस तरह के सेक्स रैकेट चलना चिंता की बात है। कोविड के पश्चात हमने बहुत से घरों या मसाज पार्लरों में सेक्स रैकेट चलते देखे हैं। हमारा मानना है कि अगर हम इन गिरोहों के पैसे के लेन-देन की छानबीन करें तो इन्हें प्रभावी तरीके से ध्वस्त किया जा सकता है। जहां इतनी बड़ी संख्या में ग्राहक ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर रहे हों तो इन गिरोहों के वित्तीय लेन-देन की छानबीन हमें शोषण की इस पूरी श्रृंखला से जुड़े तत्वों की शिनाख्त और उनकी धरपकड़ में मदद कर सकती है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि शोषण के शिकार ज्यादातर बच्चे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के हैं। इन बच्चों को ट्रैफिकिंग के जरिए महानगरों मे लाया जाता है जहां उन्हें देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया जाता है।
और जानकारी के लिए संपर्क करें
जितेंद्र परमार
8595950825
एबीएन सेंट्रल डेस्क (झालावाड़)। बीते रविवार 3 अगस्त को झालावाड़ जिले की तहसील गंगधार के गांव पीपाखेड़ी के शिव मंदिर धर्मशाला में संत रामपाल जी महाराज जी के सान्निध्य में एक दिवसीय विशाल सत्संग और नि:शुल्क नामदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित विशेष सत्संग कार्यक्रम ने हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक समागम नहीं बल्कि एक सामाजिक क्रांति का संदेश भी लेकर आया। संत रामपाल जी महाराज ने अपने प्रवचनों में समझाया कि यह दुर्लभ मानव जीवन केवल खाने-पीने, धन कमाने और भौतिक सुखों में खोने के लिए नहीं मिला है, बल्कि यह परमात्मा की भक्ति करके मोक्ष प्राप्त करने का एक सुनहरा अवसर है।
उन्होंने बताया कि बिना सच्चे गुरु के मार्गदर्शन और शास्त्रानुकूल भक्ति के, आत्मा बार-बार जन्म और मृत्यु के चक्र में फंसी रहती है। सत्संग के दौरान उन्होंने वेदों, श्रीमद्भगवद गीता, पुराणों और अन्य धार्मिक ग्रंथों से प्रमाण प्रस्तुत करते हुए बताया कि पूर्ण संत की शरण में जाकर ही मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
सामाजिक कुरीतियां मैं योगदान सत्संग में केवल आध्यात्मिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार की दिशा में भी संदेश दिया गया:
सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नामदीक्षा लेकर सत्य साधना का मार्ग चुना और संयमित जीवन जीने का संकल्प लिया।
टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मंडल, रांची की एक आम सभा आज दिनांक 03 अगस्त 2025 को श्री श्याम मंदिर के सभागार में आयोजित की गयी, जिसमें झारखंड की प्राचीनतम धार्मिक संस्था श्री श्याम मंडल, दिनांक 16 अगस्त 2025 को श्री श्याम मंडल, रांची के तत्वावधान में श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव अत्यंत धूमधाम से आयोजित किया जायेगा।
इस अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को सुचारूपूर्ण ढंग से सजाया जा रहा है। आकर्षक बैलून, रंग-बिरंगे विद्युत की लड़ियों से मंदिर को मनभावन स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। साथ ही श्री कृष्ण लीला पर आधारित झांकियों सजाने के लिए विगत कई दिनों से कारीगर जुटे हुए हैं। मुख्य झांकी में रजत झूले पर लड्डू गोपाल का दिव्य स्वरूप होगा। साथ ही रात्रि 9 बजे से संगीतमय संकीर्तन प्रारम्भ होगा।
रात्रि 12 बजे श्री कृष्ण जन्म के समय घंटा- घड़ियाल - नगाड़ा व शंख ध्वनि से जन्मोत्सव की बधाई दी जायेगी एवं महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। साथ ही श्री श्याम मंडल के 58वें चार दिवसीय वार्षिक श्री श्याम मोहत्सव आगामी 28 अगस्त से 31 अगस्त 2025 तक अत्यंत धूमधाम व उत्साह के साथ आयोजित करने का निर्णय किया गया। महोत्सव के आयोजन श्री श्याम मंडल रांची द्वारा निर्मित अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में आयोजित होगा।
आज की सभा में विभिन्न उप समितियों कर उनके माध्यम से महोत्सव की तैयारियों में समर्पण भाव से कार्य पर विचार विमर्श कर मंदिर परिसर की साफ सफाई व रंग रोगन का कार्य पर चर्चा की गयी। ज्ञात हो कि प्रतिवर्ष महोत्सव में श्री श्याम दरबार का श्रृंगार एक विशिष्ट स्थान रखता है- श्री श्याम प्रभु व मंदिर में विराजमान बजरंगबली व कामना शिव परिवार के मनमोहक श्रृंगार के लिए कोलकाता से ही कुशल मालाकार से करने का निर्णय किया गया। महोत्सव में आने वाले भग्तों को पूर्ण सुविधा मिले, इस कार्य का विशेष ध्यान रखा जायेगा।
आज की सभा में चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, विवेक ढांढनीयां, जितेश अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, बालकिशन परसरामपुरिया, राजेश सारस्वत, मनोज सिंघानिया, विकास पाडिया, प्रियांश पोद्दार, कुणाल जलान उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
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