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Published / 2025-09-15 12:25:19
दुनिया के पहले इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर को

  • दुनिया के पहले इंजीनियर वास्तुकार एवं ब्रह्मांड के निर्माता है भगवान विश्वकर्मा : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भगवान विश्वकर्मा पूजा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 17 सितंबर दिन बुधवार को मनाया जाएगा, विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जयंती के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू सनातन धर्म का यह एक महत्वपूर्ण पर्व है। धर्म ग्रंथो में विश्वकर्मा को सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का वंशज माना गया है। 

ब्रह्मा जी के पुत्र धर्म तथा धर्म के पुत्र वास्तुदेव थे। जिन्हें शिल्प शास्त्र का आदि पुरुष माना जाता है। इन्हीं वास्तु देव की अंगिरसी नामक पत्नी से विश्वकर्मा का जन्म हुआ। अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए विश्वकर्मा भी वास्तु कला के महान आचार्य बने। मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी,और देवज्ञ उनके पुत्र है। 

इन पांचो पुत्र को वास्तु शिल्प की अलग-अलग विधाओं में विशेषज्ञ माना जाता है। विश्वकर्मा शिल्प शास्त्र के आविष्कारक और सर्वश्रेष्ठ ज्ञाता माने जाते हैं। विश्वकर्मा पूजा एक ऐसा त्यौहार है जिसे शिल्पकार कारीगर,श्रमिक एवं सभी लोग मानते हैं। यह पर्व ब्रह्मांड के दिव्य वास्तुकार और निर्माता भगवान विश्वकर्मा को समर्पित होता है। 

विश्वकर्मा एक ऐसे देवता है जिन्होंने स्वर्ग और यहां तक की देवताओं के कुछ सबसे बड़े महलों का निर्माण किया, उन्हें कारीगरों शिल्पकारों और इंजीनियरों का देवता के रूप में भी पूजा जाता है। उन्हें सृष्टि का पहला इंजीनियर भी कहा जाता है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा जो भी कोई व्यक्ति करता है उसका घर, दुकान, कारोबार, सभी उन्नति करते हैं। 

विश्वकर्मा पूजा के दिन सच्चे मन से दान करने से अच्छे कर्म बढ़ते हैं और समृद्धि, सफलता और खुशी मिलती है विश्वकर्मा पूजा पर विशिष्ट वस्तुओं का दान करके भक्त विश्वकर्मा के साथ एक सानिध्य स्थापित करते हैं और विकास के साथ प्रचुरता के लिए दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

विश्वकर्मा दो शब्दों से विश्व (संसार या ब्रह्मांड) और कर्म (निर्माता) से मिलकर बना है इसलिए विश्वकर्मा शब्द का अर्थ है दुनिया का निर्माता यानी दुनिया का निर्माण करने वाले, इसलिए भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहले इंजीनियर और वास्तु कार माना जाता है।

Published / 2025-09-14 21:08:38
हरिद्वार में अर्धकुंभ 2027 की भव्य तैयारी शुरू

अखाड़ों ने किए तीन शाही स्नानों की तिथियों का ऐलान 

एबीएन सोशल डेस्क। साल 2027 में हरिद्वार में लगने वाला अर्धकुंभ मेला इतिहास रचने जा रहा है। यह आयोजन केवल तीर्थयात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि साधु-संन्यासियों और अखाड़ों के लिए भी विशेष होगा। पहली बार ऐसा होगा जब अर्धकुंभ में संतों और अखाड़ों के द्वारा तीन भव्य शाही स्नान किये जायेंगे। 

अखाड़ों की भागीदारी से बदलेगा मेला का स्वरूप 

अब तक हरिद्वार में आयोजित अर्धकुंभ मेलों में मुख्य रूप से आम श्रद्धालु ही स्नान करते आए थे, क्योंकि उसी वर्ष नासिक या उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होता था, जहां अखाड़ों की भागीदारी होती थी। लेकिन इस बार समय में अंतर होने के कारण साधु-संतों की उपस्थिति हरिद्वार में भी देखने को मिलेगी। 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 2027 के अर्धकुंभ के लिए तीन महत्वपूर्ण शाही स्नानों की तिथियां तय कर दी हैं। 

  1. पहला शाही स्नान : 6 मार्च 2027, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर। 
  2. दूसरा शाही स्नान : 8 मार्च 2027, सोमवती अमावस्या के दिन। 
  3. तीसरा शाही स्नान : 14 मार्च 2027, मेष संक्रांति के शुभ अवसर पर। 

इसके अलावा, मकर संक्रांति पर भी स्नान होगा, लेकिन उसे शाही स्नान की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। 

हरिद्वार में दिखेगा अमृत स्नान का दिव्य दृश्य हरिद्वार में होने वाला यह अर्धकुंभ इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस बार साधु-संन्यासियों के शाही स्नान के भव्य दृश्य भी श्रद्धालुओं को देखने को मिलेंगे। अमूमन अर्धकुंभ के दौरान अखाड़े हरिद्वार की बजाय सिंहस्थ पर्व में हिस्सा लेते हैं, लेकिन 2027 में नासिक का सिंहस्थ जुलाई-अगस्त में आयोजित होगा, जिससे अखाड़ों को दोनों मेलों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। 

सरकारी तैयारियों का इंतजार 

फिलहाल सरकार की ओर से शाही स्नानों की आधिकारिक घोषणा बाकी है। जैसे ही तिथियों की औपचारिक पुष्टि होगी, स्नान व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

Published / 2025-09-13 20:28:13
महाराजा अग्रसेन भवन में श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन

गीता जीवन का ऐसा सार है जो हर धर्म के व्यक्ति को जीने की कला को सीखता है : मां चैतन्य मीरा 

टीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी महिला मंच रांची शाखा की रजत जयंती वर्ष के सुअवसर पर रांची जिला मारवाड़ी महिला सम्मेलन द्वारा महाराजा अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस में विश्राम आरती के साथ कथा का समापन हुआ। अंतिम दिवस की कथा में मां चैतन्य मीरा ने बताया कि किस प्रकार द्वारकाधीश ने अपने मित्र सुदामा पर कृपा बरसायी। 

उन्होंने बताया कि यदि मित्र हो तो सुदामा जैसा होना चाहिए। जिसको अपने मित्र के आगे बढ़ने पर प्रसन्नता हो, जिसके मन में ईर्ष्या या द्वेष की भावना नहीं हो और सालों बाद भी यदि अपने मित्र से मिले तो वही प्रेम भावना मन में जागृत हो। मां चैतन्य मीरा ने कहा कि इसी प्रकार निरंतर श्रीमद् भागवत कथा को अपने जीवन में उतरने से सारे पाप नष्ट तो होते ही हैं। 

परंतु इसके साथ-साथ इसमें इतना ज्ञान भरा है यदि हम इसका वास्तविक में अध्ययन करें तो हम अपनी सारी समस्याओं का समाधान इससे प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को नित्य गीता का पाठ करना चाहिए और गीता को समझना चाहिए। गीता भी एक ऐसा जीवन का सार है जो हर धर्म के व्यक्ति को जीवन जीने की कला को  सीखाता है। 

संस्था की अध्यक्ष ने बताया कि विश्राम दिवस पर संस्था की सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया। इसके अलावा इसके अतिरिक्त समाज के सभी वर्गों से आए हुए अतिथियों का स्वागत किया गया और स्वागत में सभी को पौधे दिए गए। जिससे कि हर व्यक्ति प्रकृति के महत्व को समझ सके और निरंतर इसी प्रकार वृक्षों को बचाकर अनेकों बीमारियों से छुटकारा पा सके।  

कथा के अंत में सभी भक्तों ने आरती की तथा यजमान के द्वारा  कई आचार्य ने हवन कराया। तत्पश्चात सभी को महाप्रसाद महाप्रसाद वितरित की गयी और भंडारे का आयोजन किया गया। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने श्रीमद् भागवत कथा के सफल आयोजन पर मारवाड़ी महिला सम्मेलन के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी रीना सुरेखा ने दी।

कथा में नीरा बथवाल, रूपा अग्रवाल, गीता डालमिया, अनसूया नेवटिया, मधु सर्राफ, उर्मिला पाड़िया, अलका सरावगी, रीना सुरेखा, प्रीती पोद्दार, नैना मोर, बीना मोदी, मंजू केडिया, मंजू गाड़ोदिया, प्रीति बंका, शोभा हेतमसरिया, सीमा पोद्दार, सरिता अग्रवाल, बीना बूबना, प्रीति अग्रवाल, रीता केडिया, बबीता नारसरिया, सीमा टांटिया, जया बिजावत, करुणा अग्रवाल, मीरा टिंबडेवाल, ललिता नारसरिया, संगीता गोयल, सुनीता मेवाड़ा, प्रीति केडिया, प्रीति अग्रवाल, रेनू छापड़िया, सुनीता सर्राफ, शोभा जाजू,  साक्षी अग्रवाल, ममता बूबना, आदि बहनें उपस्थित थी।

Published / 2025-09-12 18:39:59
चैतन्य गुरु मां मीरा जी का श्रीकृष्ण राधा प्रणामी मंदिर और अपना घर आश्रम में भावपूर्ण आगमन

  • चैतन्य गुरु मां मीरा जी का श्रीकृष्ण राधा प्रणामी मंदिर एवं अपना घर आश्रम में भावपूर्ण आगमन
  • सेवा, भक्ति और करूणा ही मानव जीवन का है वास्तविक उद्देश्य : गुरु मां मीरा

टीम एबीएन रांची। आध्यात्मिक जगत की सुप्रसिद्ध कथा वाचक चैतन्य गुरु मां मीरा जी ने झारखंड की राजधानी रांची के पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर एवं सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम का दिव्य भ्रमण किया। यह मंदिर झारखंड का सबसे बड़ा श्रीकृष्ण-राधा मंदिर माना जाता है और इसकी भव्यता, शिल्पकला तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देशभर में प्रसिद्ध हो रहा है। 

गुरु मां के आगमन से मंदिर परिसर में भक्तों का उत्साह देखने योग्य था। उन्होंने मंदिर की नयनाभिराम शिल्पकारी, दिव्यता एवं शांत वातावरण की सराहना की और कहा कि यह स्थान केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का जीवंत माध्यम है। उन्होंने गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर विशेष पूजा अर्पित की। इसके पश्चात गुरु मां ने मंदिर में स्थित सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम का भी अवलोकन किया, जहाँ अनेक दिव्यांग, वृद्ध एवं निराश्रितजन सेवा और स्नेह की छाया में निवास कर रहे हैं।

गुरु मां ने आश्रम के सेवा कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की और वहां रह रहे लोगों को स्वयं भोजन परोसकर भावविभोर हो गईं। यह दृश्य सभी उपस्थितों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और हृदयस्पर्शी रहा। इस अवसर पर आयोजित विशेष सत्संग में गुरु मां ने व्यास पीठ से संबोधित करते हुए कहा, सेवा, भक्ति और करुणा ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य हैं। 

भगवान केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि उन चेहरों में भी बसते हैं जो पीड़ा में हैं। उन्हें भोजन कराना, सहारा देना, सबसे बड़ी पूजा है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आश्रम समाज के लिए प्रकाश स्तंभ हैं और प्रत्येक व्यक्ति को अपने सामर्थ्य अनुसार सेवा में योगदान देना चाहिए। गुरु मां के प्रेरणादायक शब्दों और उनकी करुणामयी उपस्थिति ने सभी भक्तों एवं सेवकों के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया। 

ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी, प्रवक्ता संजय सर्राफ एवं पुजारी अरविंद पांडे ने गुरु मां को अंगवस्त्र, राधा कृष्ण की स्मृति चिन्ह और श्रीफल भेंट कर उनका अभिनंदन किया।यह अवसर न केवल एक आध्यात्मिक प्रेरणा बना, बल्कि सेवा, संवेदना और भक्ति के संगम का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उक्त जानकारी ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

Published / 2025-09-12 18:26:00
श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन मना रुक्मणी विवाह

*प्रेस विज्ञप्ति* 
*श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिवस मे*

*रुक्मणी विवाह, महारास और उद्धव गोपी संवाद से भक्त भाव विभोर हुए*

रांची । अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला मंच के द्वारा आयोजित *श्रीमद् भागवत कथा* के छठे दिवस में *रुक्मणी विवाह, महारास और उद्धव गोपी संवाद* मां चैतन्य मीरा के द्वारा सुनाया गया । साथ ही *कृष्ण रुक्मणी विवाह* के उपलक्ष में एक जरूरतमंद जोड़े का विवाह भी करवाया गया एवं उसे घर की जरूरत की सामग्री एवं उपहार दिए गए। कथा के प्रारंभ में संस्था के सदस्यों के द्वारा आरती की गई। तत्पश्चात गुरु मां ने सभी को ध्यान के माध्यम से कृष्ण से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने बताया की कुछ क्षण के ध्यान से ही यदि हम शांति महसूस कर सकते हैं, सकारात्मक अनुभूति का अनुभव कर सकते हैं तो सोचिए नित्य यदि हम योग और ध्यान करें तो हमारा शरीर मानसिक तनाव अनिद्रा जैसी बीमारियों से दूर होकर एक अलग आनंद और भक्ति का अनुभव प्राप्त कर सकता है। 
उन्होंने बताया कि कृष्ण की एक बांसुरी की धुन पर समस्त गोपिया दौड़ी चली आई थी और कई कई समय तक उनके साथ रास रचाती थी । हर गोपी के दो रूप हो गए थे एक शरीर जो महारास में होता था और कन्हैया ने एक ऐसा वातावरण बना दिया था की एक और वही गोपी अपने अपने घरों में अपने दैनिक कार्य करती रहती थी । जब कृष्ण को मथुरा जाना पड़ा तो समस्त गोप गोपी इस प्रकार से हो गए कि उनसे उनका सब कुछ अलग हो रहा है । कई दूर तक वह कृष्ण के साथ उनके रथ के पीछे-पीछे दौड़ते रहे। भक्ति और प्रेम का अद्भुत मिलन क्या है यह हमें बृजवासियों से सीखना चाहिए।
आज भी जिस प्रकार से यमुना मैया वृंदावन में सभी को दर्शन दे रही है लोग किस प्रकार से उसका आनंद प्राप्त कर रहे हैं यह प्रेम और भक्ति नहीं तो क्या है।  प्रेम की असली परिभाषा ही गोपियां है जब उद्धव गोपियों को समझने जाते हैं तो गोपियों का प्रेम भाव देखकर उनकी कृष्ण के प्रति प्रेम में भक्ति को सुनकर वह समझ गए कि उनका ज्ञान इस प्रेम के आगे शून्य है।  गुरु मां ने बताया कि जब हम किसी से प्रेम करें तो हमें ज्ञान नहीं लगना चाहिए। आज परिवार में जो लोग एक नहीं हो रहे हैं ।जो आपसी गृह क्लेश चल रहे हैं ।उनका एक ही कारण है वह प्रेम भूल जाते हैं और ज्ञान का ज्यादा उपयोग कर लेते हैं। और यही हमें एक दूसरे से अलग करता है।  कथा के अंत में किस प्रकार से कन्हैया जी ने रुक्मणी जी का हरण किया और उनसे विवाह किया कथा के माध्यम से गुरु मां ने बताया । इस मनोहर झांकी के दर्शन करके सभी भक्त मंत्र मुक्त हो गए । सभी ने आनंद के साथ कृष्ण रुक्मणी की वरमाला करवाई ।मंगल गीत गाए और आपस में सभी ने नृत्य के साथ एक दूसरे को बधाइयां दी। कथा में मुख्य रूप से नीरा बथवाल, रूपा अग्रवाल ,गीता डालमिया, अनसूया नेवटिया, अलका सरावगी, मधु सर्राफ, उर्मिला पाड़िया, रीना सुरेखा,  प्रीती पोद्दार ,बीना मोदी, बीना बूबना, प्रीती बंका, ,प्रीती अग्रवाल, शोभा हेतमसरिया , संगीता गोयल,ममता बूबना, ललिता नारसरिया सीमा पोद्दार सरिता अग्रवाल, सीमा टॉटीया रीता केडिया, मंजू गाड़ोदिया, मंजू केडिया,बबीता नारसरिया,जया बिजावत, सुनीता मेवाड़ा, सुनीता सरावगी, करुणा अग्रवाल, मीरा टिंबरेवाल, शोभा जाजू, रेखा अग्रवाल, अनू पोद्दार, सुनैना लॉयलका, कलावती अग्रवाल सीमा अग्रवाल, विद्या अग्रवाल, रेनू छापड़िया,कमला  विजयवर्गीय, साक्षी अग्रवाल, पुष्पा खेतान, पदमा बंका, कुसुम मोर, नैना मोर आदि बहने उपस्थित थी। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी


Published / 2025-09-11 20:58:13
14 सितंबर को धूमधाम से मनाया जायेगा जितिया व्रत

माताएं संतान की दीघार्यु एवं सुख- समृद्धि के लिए रखती है निर्जला व्रत : संजय सर्राफ  

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि जितिया पर्व 14 सितंबर दिन रविवार को है। जितिया व्रत हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। हिंदू धर्म में जितिया पर्व को जीवित्पुत्रिका व्रत और जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। 

हिंदू सनातन धर्म का यह एक  महत्वपूर्ण पर्व है जितिया पर्व  मुख्य रूप से झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश मे बड़े ही उत्साह पूर्वक मनाया जाता है। इस वर्ष जितिया पर्व का आरंभ 13 सितंबर को नहाय-खाय के साथ होगा। इसके बाद 14 सितंबर को महिलाएं पूरे विधि-विधान से जीवित्पुत्रिका व्रत रखेंगी और अगले दिन यानी 15 सितंबर को व्रत का पारण कर व्रत संपन्न किया जायेगा। 

यह व्रत माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुख समृद्धि के लिए करती है। इस दिन महिलाएं 24 घंटे तक निर्जला व्रत उपवास रखती है। जितिया व्रत की  माताएं संतान की दीघार्यु, सुखी और निरोगी जीवन के लिए जितिया व्रत रखती है, व्रत वाले दिन महिलाएं नये वस्त्र धारण करती है। तथा उपवास के दिन जीमूत वाहन देव की पूजा पूरे विधि विधान से करती है।

पूजन पर नारियल, खीरा, चना, खाजा समेत अन्य पूजा सामग्री चढ़ाते हैं। इस दिन व्रत करने के साथ जो माताएं पूजा के दौरान व्रत कथा पढ़ती और सुनती है उन्हें कभी भी संतान वियोग नहीं सहना पड़ता है, हिंदू धर्म मे व्रत से पूर्व संतुलित आहार का बहुत महत्व दिया गया है, जितिया व्रत से पूर्व महिलाओं के खान-पान का पूरा ध्यान रखा जाता है इस संतुलित आहार के कारण लंबी अवधि तक शरीर को ऊर्जा मिलती है। 

माना जाता है कि इस व्रत को करने से सभी साधक को सभी प्रकार के कष्टों  से मुक्ति मिलती है। जो माताएं इस व्रत का पालन करती है इस व्रत का फल उनके बच्चों को बुरे स्थिति से बचाता है साथ ही साथ इस व्रत के प्रभाव से संतान की सुखों की प्राप्ति होती है। 

जितिया व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक ही सीमित नहीं है, यह माता पुत्र के अटूट बंधन आस्था तथा त्याग की मूर्ति है इस व्रत के माध्यम से नारी अपने संतान के प्रति अगाध प्यार और समर्पण व्यक्त करती है और यही भावना इस पर्व को जीवंत बनाती है।

Published / 2025-09-10 20:11:20
समन्वित कार्रवाई के बिना राजस्थान में नहीं रुकेगी बच्चों की ट्रैफिकिंग : डीजीपी

राजस्थान में राज्यस्तरीय परामर्श में डीजीपी ने कहा, समन्वित कार्रवाई के बिना नहीं रुकेगी बच्चों की ट्रैफिकिंग 

एबीएन सोशल डेस्क। जयपुर में भारत में मानव दुव्यार्पार: समन्वय और रोकथाम तंत्र की मजबूती विषय पर राज्यस्तरीय परामर्श में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि राजस्थान ने बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के लिए कानूनों पर अमल और जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम उठाये हैं लेकिन बचाव और अभियोजन के बीच की खाई बच्चों की ट्रैफिकिंग से निपटने में अब भी बड़ी रुकावट है। 

परामर्श में सभी विभागों के बीच सहयोग और समन्वय की जरूरत पर जोर देते हुए पुलिस महानिदेशक (नागरिक अधिकार एवं एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग) मालिनी अग्रवाल ने कहा, राजस्थान में सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से बच्चों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है लेकिन बच्चों की ट्रैफिकिंग का मुद्दा किसी एक विभाग के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। समन्वित कार्रवाइयों से ही बच्चों की ट्रैफिकिंग रोकी जा सकती है। 

बच्चों को मुक्त कराने के बाद हम साझा प्रयासों से उनकी देखभाल और उचित पुनर्वास सुनिश्चित कर उनका खोया बचपन लौटा सकते हैं। यह परामर्श जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन और राजस्थान पुलिस की नागरिक अधिकार एवं ह्यूमन ट्रैफिकिंग विरोधी शाखा के संयुक्त प्रयासों से हुआ। इस दौरान विशेषज्ञों और अधिकारियों ने बच्चों की ट्रैफिकिंग यानी बाल दुर्व्यापार, बाल विवाह और बाल श्रम के बीच मौजूद खतरनाक अंतर्संबंधों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यदि ट्रैफिकिंग के रोजाना बदलते स्वरूपों पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाना है तो विभिन्न हितधारकों और विभागों के बीच आपसी समन्वय को और मजबूत करना होगा।  

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी ज्यादा नागरिक संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) 418 जिलों में काम कर कर रहा है। जेआरसी ने अपने सहयोगी संगठनों की मदद से देशभर में 1 अप्रैल 2024 से 30 अप्रैल 2025 के बीच 56,242 बच्चों को ट्रैफिकिंग गिरोहों के चंगुल से मुक्त कराया और ट्रैफिकर्स के खिलाफ 38,353 से अधिक मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की। राजस्थान में जेआरसी अपने 24 सहयोगी संगठनों के साथ 39 जिलों में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। 

जेआरसी ने अप्रैल 2023 से अब तक अकेले राजस्थान में ही 30,878 बाल विवाह रोके और 8000 से अधिक बच्चों को ट्रैफिकिंग और बाल श्रम के चंगुल से मुक्त कराया। साथ ही, बाल दुव्यार्पार के 5487 मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की और यौन शोषण के शिकार 2500 से अधिक बच्चों को भावनात्मक और कानूनी सहयोग प्रदान किया। परामर्श में राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (आरएसएलएसए), बाल अधिकारिता विभाग (डीसीआर), रेलवे सुरक्षा बल और राज्य में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन मौजूद थे।  

आरएसएलएसए के सदस्य सचिव हरिओम अत्री ने कहा, प्रत्येक बच्चा समाज की साझा जिम्मेदारी है। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है और बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामले में कोई ढील नहीं बरती जा सकती। बच्चों को मुक्त कराने के साथ ही उनके पुनर्वास पर भी उतना ही ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए डीसीआर के आयुक्त आशीष मोदी ने कहा कि सभी बाल संरक्षण तंत्रों के बीच समन्वय से बच्चों की ट्रैफिकिंग की रोकथाम संभव है। 

उन्होंने कहा, बच्चों से लेकर युवाओं तक, समाज पुलिस की ओर इस उम्मीद से देखता है कि वे अपराध रोक सकते हैं। इसलिए, पुलिस और स्वयंसेवी संगठनों के संयुक्त प्रयास बच्चों के विरुद्ध अपराधों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बच्चों को मुक्त कराने के अभियानों के साथ ही हमें पुनर्वास सेवाओं को भी मजबूत करना होगा ताकि उन्हें दोबारा ट्रैफिकिंग गिरोहों के जाल में फंसने से बचाया जा सके। 

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, भारत सरकार ने देश में ट्रैफिकिंग के खिलाफ कानूनी तंत्र को मजबूत किया है और भारतीय न्याय संहिता में कई महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़े हैं। अब आवश्यकता इन कानूनों पर प्रभावी अमल की है जिसके लिए सभी स्तरों पर सभी पक्षों की समन्वित कार्रवाई जरूरी है। ट्रैफिकिंग एक संगठित अपराध है और हमें इसे इसी दृष्टिकोण से देखना होगा। 

यदि हम बच्चों की ट्रैफिकिंग करने वाले गिरोहों से दो कदम आगे रहना चाहते हैं तो समयबद्ध सुनवाई, लापता बच्चों के मामलों में त्वरित कार्रवाई, सभी हितधारकों का क्षमता निर्माण और मजबूत अभियोजन तंत्र अनिवार्य है। इस परामर्श में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक व राजस्थान पुलिस अकादमी के निदेशक एस. सेंगाथिर, उत्तर पश्चिम रेलवे में आरपीएफ के आईजी ज्योति कुमार सतीजा, जयपुर ग्रामीण की एसपी राशि डोगरा डूडी, टीएबीएएआर, जयपुर के संस्थापक सचिव रमेश पालीवाल, डीसीआर के सहायक निदेशक मनोज आर्य, आरपीए में पुलिस निरीक्षक यतींद्र कुमार खटाना के अलावा आरएसएलएसए की उपसचिव रश्मि नवल भी मौजूद थीं। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (85959 50825) से संपर्क करें।

Published / 2025-09-10 18:09:38
कृष्ण जन्मोत्सव की खुशियों में भावविभोर हुए भक्त

निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट और छल छिद्र न भावा : चैतन्य मीरा 

एबीएन सोशल डेस्क। अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला मंच रांची शाखा द्वारा आयोजित  सप्तम दिवस की श्रीमद् भागवत कथा में आज भागवत के चतुर्थ दिवस में कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। जिसमें श्रीराम अवतार, नरसिंह अवतार, गजेंद्र मोक्ष, वामन अवतार आदि की झांकी दिखायी गयी। वामन अवतार (भव्य अग्रवाल), नंद बाबा (सुनील सरावगी), यशोदा जी (सुनीता सरावगी) वासुदेव जी (अनीश सरावगी) सुनंदा भुआ (चंचल लाडिया)। परम पूज्य गुरु मां चैतन्य मीरा के द्वारा कथा के प्रारंभ में भगवान भोलेनाथ की महिमा से किया गया। 

उन्होंने बताया कि भगवान भोलेनाथ तो इतने भोले हैं कि उनके लिए कुबेर द्वारा बनायी गयी सोने की लंका को भी रावण के द्वारा दक्षिणा में मांगने पर उन्होंने उसे रावण को दान दे दी। भोलेनाथ जैसा कि नाम है भोले के नाथ ऐसे हैं की थोड़ी सी विनती पर दौड़े चले आते हैं। हमें भी इसलिए सदा निर्मल मन होकर रहना चाहिए। क्योंकि प्रभु भी कहते हैं... 

निर्मल मन जन सो मोहि पावा।  

मोहि कपट छल छिद्र न भावा॥ 

अर्थात् जो मनुष्य निर्मल मन का होता है, वही मुझे पाता है। मुझे कपट और छल-छिद्र नहीं सुहाते।  इसीलिए यदि हम निर्मल रहते हैं तो प्रभु हमें अपने चरणों में स्थान देते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि हमें सुनिति और सुरुचि में भी अंतर समझना चाहिए सुनिति में चाहे हमें प्रारंभ में परेशानी हो सकती है परंतु लंबे समय तक अच्छा फल देता है, परंतु सुरुचि हमें जल्दी अच्छा फल तो दे देगा परंतु ज्यादा समय तक नहीं चलेगा। ध्रुव महाराज ने भी सुनीति से ही कार्य किया। प्रारंभ में बहुत दुख हुआ प्राप्त हुआ परंतु अंत में प्रभु से मिलन हुआ।  

कथा के अंत में उन्होंने बताया कि किस प्रकार से श्री कृष्ण का जन्म हुआ। कंस जैसे पापी के सर्वनाश के लिए, पृथ्वी का भार हरण करने के लिए,ऋषियों के संताप को दूर करने के लिए, श्री कृष्ण ने वासुदेव और मां देवकी के यहां अवतार लिया और उसके पश्चात वासुदेव जी उन्हें यमुना पार करते हुए नंद बाबा और यशोदा मैया के यहां पर छोड़ आये। 

इस प्रसन्नता में सभी ने मिलकर कृष्ण जन्मोत्सव का आनंद प्राप्त किया और जन्मोत्सव मना कर आपस में सभी ने एक दूसरे को बधाई दी। उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था की संपूर्ण पांडाल ब्रज की पावन धरा बन चुका है और समस्त भक्ति बृजवासी बनकर इस आनंद को प्राप्त कर रहे हैं। कृष्ण जन्मोत्सव के पावन पर्व के अवसर पर मारवाड़ी महिला मंडल रांची शाखा के द्वारा शिवनारायण कन्या पाठशाला में डिक्शनरी, पाठ्य सामग्री, खेलकूद के समान और सहयोग राशि का वितरण किया गया। 

समिति के अध्यक्ष ने बताया कि समिति के द्वारा फिजूल खर्चे को छोड़कर उन बच्चों का सहयोग किया गया, जिन्हें वास्तव में आवश्यकता है। मारवाड़ी महिला मंडल का उद्देश्य भी यह है कि जितना अधिक हो सके उतना वह समाज के उन व्यक्तियों की मदद कर सके जिन्हें कहीं न कहीं आवश्यकता है। कथा के अंत में सामूहिक आरती की गई और मक्खन मिश्री एवं पंजीरी के प्रसाद का वितरण किया गया।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में नीरा बथवाल, रूपा अग्रवाल, मधु सर्राफ, उर्मिला पाड़िया, अलका सरावगी, बीना मोदी, मंजू केडिया, रीना सुरेखा, प्रीती बंका, प्रीती पोद्दार, प्रीति अग्रवाल, प्रीति फोगला, प्रीती केडिया, शोभा हेतमसरिया, सीमा पोद्दार, सरिता अग्रवाल, सीमा टाटिया, बबीता नारसरिया, ललित नारसरिया, अनसूया नेवटिया, गीता डालमिया, जया बिजावत रीता केडिया, संगीता गोयल, ममता बूबना, बीना बूबना, अनू पोद्दार, रेखा अग्रवाल आदि बहनें उपस्थित थे। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी रीना सुरेखा (8825383669) ने दी।

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