टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग मे श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम में 230वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद भंडारा का आयोजन किया गया। आज का श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा भंडारे समाजसेवी नंदकिशोर पाटोदिया एवं उनके परिवार के सौजन्य से आयोजित किया गया।
अन्नपूर्णा महाप्रसाद का विधिवत भोग दोपहर 12:30 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडे द्वारा लगाई गई, तत्पश्चात मंदिर परिसर में उपस्थित दो हज़ार से भी अधिक श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। आज के महाप्रसाद में केसरिया खीर, पुड़ी आलू चना सब्जी, जीरा राइस, चिप्स, आदि का वितरण किया गया।
तत्पश्चात भजन- संध्या के कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी के गाये मनमोहक सुमधुर भजनों में ये सुंदर श्रृंगार सुहाना लगता है भक्तों को तो दिल दीवाना लगता है..., श्याम देने वाले हैं हम लेने वाले हैं आज खाली हाथ नहीं जाना है..., किसने सजाया मुरली वाले को बड़ा प्यारा लागे... अमृत गंगा का रसपान कराते हुए श्रोताओं को खूब झुमाया।
श्री राधा कृष्ण के जयकारा से पूरा वातावरण कृष्णमय एवं भक्तिमय बन गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती की गई। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि संस्था द्वारा श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर मे आज अन्नपूर्णा महाप्रसाद एवं भजन संध्या में आज सुबह से ही श्रद्धालुओं का भीड़ लगा रहा। तथा भगवान श्री राधा कृष्ण मंदिर मे 5 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किये।
इस अवसर पर-ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल छावनिका, पूरणमल सर्राफ , सुरेश चौधरी, सुरेश भगत, विशाल पाटोदिया, सुप्रिया पाटोदिया,अंश अमायरा पाटोदिया, डॉ आशुतोष पांडे, चंदन कुमार, हेमंत प्रजापति, विष्णु सोनी, विजय कुमार अग्रवाल, पवन पोद्दार, मुरली प्रसाद, हरीश कुमार, परमेश्वर साहू, बसंत वर्मा, सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
टीम एबीएन, रांची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र चौधरी बगान, हरमू रोड में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस सप्ताह में संगम-गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए राजेंद्र मिश्रा अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि हर प्रकार की यात्रा की तैयारी करनी पड़ती है और इस जीवन यात्रा की तैयारी तो वाल्यकाल से ही करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि झुरियाँ हमारे माथे पर पड़नी ही है परंतु उन्हें हृदय पर मत पड़ने दीजिए क्योंकि हृदय स्रोत है उमंग उत्साह का। वास्तव में आत्मा न बूढ़ी होती है, न जवान।
कार्यक्रम में उपस्थित डा० प्रियदर्शनी विजयलक्ष्मी पूर्व विभागाध्यक्ष दर्शनशास्त्र ने कहा प्रकृति सिर के बालों को तो सफेद कर देती है परंतु अपने मन को हमें स्वयं ही स्वच्छ बनाना होगा। अब तो पूरी सृष्टि ही वानप्रस्थी हो गई है। कोई भी यात्रा के अंतिम पड़ाव पर पहुँचता है तो प्रसन्नता का अनुभव करता है परंतु आज की परिस्थिति में यात्रा का अंतिम पड़ाव यदि दुखदायी है तो उसके कारणों को समझना होगा।
कार्यक्रम में उपस्थित सत्येंद्र kishor पूर्व जीएम कोल इंडिया ने कहा वृद्ध तो केवल शरीर है आत्माएँ तो अजर हैं। जितना जितना देहभान छोड़ आत्मस्मृति का अभ्यास किया जाएगा, उतना उम्र के नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रह सकेंगे।
मन का सकारात्मक चिंतन, उमंग उत्साह धैर्य आदि गुण शारीरिक उम्र की अधिकता के असर को समाप्त कर देंगे जिस प्रकार राजयोग के निरंतर अभ्यास से कर्मभोग को कर्मयोग में बदला जा सकता है उसी प्रकार इस अभ्यास से वृद्ध अवस्था को भी वरदानी अवस्था में बदला जा सकता है।
डा० प्रोफेसर सुनीता ठाकुर ने कहा कि सदा याद रखिये अब आप वरदानी बन गये हैं। अब आपको यही करना है। निरंतर भगवान शिव से लेते रहो और अन्य सभी को देते रहो। ईश्वरीय ज्ञान, योग, धारणा सेवा में अपने को इतना व्यस्त रखें जो जीवन सार्थक बन जाये व सफल हो जाये और लोगों को आप वृद्ध नहीं लेकिन वरदानी-मूर्ति नजर आयें।
कार्यक्रम में उपस्थित सुधा लील्हा निदेशक दीपशिखा संस्था ने कहा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आपने जीवन भर जो अच्छे कार्य किये हैं उसके फल को पाने की इच्छा रखने के वजाय ये सोचिए कि पुण्य कर्म जमा है उसका पुण्य खाता अभी नहीं तो आगे जरूर प्राप्त होगा। सदा याद रखिये, आप वृद्ध नहीं वरदानी आत्मा हैं। अभी से पहले आप तन और धन से देने वाले दानी थे लेकिन अब आपको मन से भी दुआ और आशीर्वाद देने में व्यस्त रहना है।
किशन साबू माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष ने कहा कि शरीर को धारण करने वाली आत्मा तो आज भी वैसी ही है जैसी कि गर्भ प्रवेश के समय थी तो बुढ़ापा कैसा । जो थकान, निराशा, खीझ अनुभव करता है वास्तव में वह बूढ़ा है, जिसमें आशा उत्साह हिम्मत मौजूद है वही जवान है। महात्मा गांधी, मदर टेरेसा, दादी प्रकाशमणि कभी बूढ़े नहीं दिखाई पड़े। जिसने अपनी आदतें इच्छाएँ और गतिविधियाँ ऊँचे स्तर की रखी है उन्हें कभी बुढ़ापा नहीं देखना पड़ा है।
ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि जीवन गतिशील है। गतिशील जीवन के चार पड़ाव हैं - बचपन, जवानी, वृद्धावस्था एवं मृत्यु। इनमें से दो को वरदान और अंतिम दो को अभिशाप माना जाता है परंतु जीवन तो जीवन ही है और उसका हर पल उपयोगी है। संसार में अनेक ऐसे लोग हुए हैं, जिनके श्रेष्ठ कर्मों का आरंभ ही वृद्धावस्था में हुआ और उन्होंने वृद्ध अवस्था को वरदानिया अवस्था बना कर नया इतिहास रच डाला।
वृद्धजनों के लिए विशेष गौरव की बात यह है कि सृष्टि के आदि कर्ता के रूप में जिस प्रथम पुरुष की चर्चा की जाती है उन्हें वृद्ध दिखाया गया है। फिर उसे चाहे एडम कहें, आदम कहें या ब्रह्मा। दाढ़ी युक्त व्यक्तित्व वाला यह प्रथम पुरुष देवता भी कहलाया जबकि वास्तव में देवता न वृद्ध होते हैं, न दाढ़ी वाले।
सत्यनारायण की कथा जो भारत में बहुत प्रचलित है, उसमें भी भगवान को बूढ़े ब्राह्मण के रूप में कंचन महल देते हुए दिखाया है। ये सभी यादगारें यही बताती है कि भगवान सृष्टि परिवर्तन के कार्य में वृद्धों के अनुभव और उनके पिता समान प्यार का विशेष उपयोग करते हैं। प्रजापिता ब्रह्माबाबा ने यही करके दिखाया, 93 वर्ष तक की आयु भी उनके ऊँचे कार्यों के लिए छोटी पड़ गई। इसलिए आज वे अव्यक्त शरीर द्वारा विश्व परिवर्तन के कार्य को प्रैक्टिकल स्वरूप दे रहे हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत नृत्य के साथ किया गया। गाइडेड मेडिटेशन के द्वारा राजयोग का अभ्यास कराया गया। सभा में उपस्थित सभी वृद्धजनों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में अशोक सिन्हा सीनियर मैनेजर उषा मार्टिन, अजय वर्मा डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर, साकेत बिहारी पूर्व बैंक प्रबंधक, सत्य नारायण शर्मा, समाजसेवी, अमरेन्द्र विष्णुपुरी, समाजसेवी, रतन मोदी समाज सेवी, ले० कर्नल रोबिन देव, विनोद कुमार पाण्डेय, पूर्व जी०एम० सीएमपीडीआई इत्यादि के साथ साथ 80 से भी अधिक वृद्धजन उपस्थित थे।
ज्ञातव्य हो कि राजयोग का निःशुल्क प्रशिक्षण ब्रह्माकुमारी केन्द्र चौधरी बगान, हरमू रोड में प्रतिदिन प्रातः 7.00 बजे से 10.00 बजे तक और संध्या 3.00 बजे से 7.00 बजे तक दिया जाता है। उक्त जनकारी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की केंद्र प्रशासिका ब्रह्माकुमारी निर्मला ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष 6 अक्टूबर दिन सोमवार को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इसे अत्यंत पवित्र एवं फलदायक रात्रि माना जाता है।
शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा तथा लक्ष्मी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस रात्रि को देवी लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और जो व्यक्ति जागरण करता है व मां लक्ष्मी की आराधना करता है, उस पर मां की विशेष कृपा होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी रात्रि को वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था, जो भक्ति, प्रेम और अध्यात्म की पराकाष्ठा मानी जाती है।
यह तिथि देवी लक्ष्मी की पूजा हेतु विशेष मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने, रात्रि जागरण करने एवं खीर का सेवन करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। लक्ष्मी पूजन करने से दरिद्रता दूर होती है। शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों से औषधीय गुणों का संचार होता है। इसीलिए खीर को चांदनी में रखने की परंपरा है ताकि वह प्राकृतिक ऊर्जा से युक्त होकर स्वास्थ्यवर्धक बने।
इस खीर को अमृत के समान माना जाता है कहते हैं कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की रोशनी में खीर रखकर खाने से इंसान का भाग्योदय होता है और रोग बीमारियों से मुक्ति मिलती है। कई क्षेत्रों में यह रात्रि प्रेम और भक्ति की प्रतीक मानी जाती है। उत्तर भारत में जगह-जगह कीर्तन, रासलीला, कथा एवं भजन संध्याओं का आयोजन होता है।
इस दिन व्रती व्यक्ति दिनभर उपवास रखता है। रात्रि को देवी लक्ष्मी का पूजन कर घर में दीप जलाये जाते हैं। खीर बनाकर उसे चांदनी में रखकर भगवान को अर्पित किया जाता है। रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। शरद पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, विज्ञान और संस्कृति का संगम है। यह दिन आत्मिक शुद्धि, सामाजिक समरसता और भक्ति के भाव को पुष्ट करता है। इस शुभ अवसर पर हम सभी मां लक्ष्मी से सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करें।
टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मंडल, रांची ने अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में आज दिनांक 4 अक्टूबर 2025 को खाटू नरेश श्याम बाबा को चांदन द्वादशी के पावन अवसर पर संध्या 6:30 बजे से 9 बजे तक श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमा का भोग अर्पित किया गया।
आज के भोग के मुख्य यजमान श्याम सुंदर पोद्दार ने पूरे परिवार पार्वती देवी पोद्दार, ज्योति पोद्दार, ऋतु पोद्दार, रोहित पोद्दार, पूजा पोद्दार, अभिषेक, अभिराज, सृष्टि, अर्पण, अनिल अग्रवाल, ममता अग्रवाल, आयुष, आदित्य ने श्याम बाबा को खीर चूरमा का भोग अर्पित किया।
सर्वप्रथम मंडल के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश बागला, मंत्री धीरज बंका एवं पोद्दार परिवार ने गणेश पूजन कर मंदिर में विराजे वीर बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी पूजन कर विभिन्न प्रकार के फल एवं मिष्ठान अर्पित कर श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमे का भोग अर्पित किया। मौके पर पूरा मंदिर परिसर हारे के सहारे की जय-लखदातार के जय जयकारों के गूंज उठा।
द्वादशी के दिन श्री श्याम प्रभु का प्रिय भोग खीर चूरमा को लेने भक्तगण कतारबद्ध होकर प्राप्त कर रहे थे। साथ ही श्री श्याम मंडल के कार्यकर्ता आये हुए भक्तजनों को शुद्ध पेयजल का वितरण कर रहे थे तथा उनके चरण पादुका को रखने की उत्तम व्यवस्था बनी हुई थी। आज के खीर चूरमा का भोग श्री श्याम मंदिर में ही निर्मित किया गया तथा 500 से ज्यादा भक्तजनों प्रसाद प्राप्त किया।
आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में राजेश सारस्वत, प्रदीप अग्रवाल, प्रियांश पोद्दार, जितेश अग्रवाल, अजय साबू, नितेश लखोटिया, महेश सारस्वत, अमित जलान का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन मार्ग रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वावधान में संत शिरोमणि परमहंस डॉ सदानंद जी महाराज द्वारा संचालित एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग रांची में विजय दशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर एक भव्य एवं दिव्य धार्मिक आयोजन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। जिसमें नगर के श्रद्धालुजनों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।
इस पावन अवसर पर पुजारी अरविंद पांडे द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पूरे विधि विधान के साथ शस्त्र पूजन की पूजा-अर्चना की गई, जिसमें परंपरागत अस्त्र-शस्त्रों की विशेष रूप से आराधना की गई। शास्त्रों के अनुसार शस्त्र पूजन आत्मबल, धर्म रक्षा और विजय के प्रतीक रूप में किया जाता है।
इसके उपरांत सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा पाठ एवं भजन जागरण का आयोजन हुआ, जिससे सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। ट्रस्ट के भजन गायक सज्जन पाड़िया एवं उर्मिला पाड़िया द्वारा प्रभु श्रीराम, हनुमान जी, श्री कृष्ण एवं मां दुर्गे की भजनों एवं स्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि शहर के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. एच.पी. नारायण थे, जिन्होंने अपने उद्बोधन में धर्म, सेवा और आत्मबल की महत्ता पर प्रकाश डाला।
इस शुभ अवसर पर नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 151 महिलाओं को आत्मरक्षा हेतु प्रतीकस्वरूप तलवारें वितरित की गईं। यह पहल समाज में नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास के रूप में सराही गई। ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं कोषाध्यक्ष सज्जन पाड़िया ने भी अपने विचार साझा करते हुए धर्म, सेवा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कुशलता पूर्वक किया तथा उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज में एकजुटता, आध्यात्मिक जागरूकता एवं सांस्कृतिक मूल्यों को प्रोत्साहन देने वाला सिद्ध हुआ। ट्रस्ट का यह आयोजन आने वाले समय में समाज को धर्म, सेवा एवं सशक्तिकरण के पथ पर अग्रसर करने के लिए प्रेरणा देता रहेगा। इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं के लिए खिचड़ी महाभोग प्रसाद का भंडारा का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
मौके पर साध्वी मीणा महाराज, साध्वी पूर्णा महाराज, प्रणामी मंदिर भिवानी के पुजारी दिलीप कुमार, डूंगरमल अग्रवाल पूरणमल सर्राफ, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, नंदकिशोर चौधरी, विष्णु सोनी, सुरेश अग्रवाल, संजय सर्राफ, मधुसूदन जाजोदिया, अंजनी अग्रवाल, विश्वनाथ बागला, दीपक पोद्दार, अनिल बजाज, सुनीता अग्रवाल, सुमन चौधरी, संतोष अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, करुणा बागला, अंजू बजाज, अनीता अग्रवाल, पिंकी सिंह, आरव अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क लोहरदगा। 1501 कन्याएं 5 से 15 वर्ष की संथाल, भूमिज, सबर, मुंडा, गोराई, मंडल आदि जनजातियों के पटमदा प्रखंड, जिला सिंहभूमि, झारखंड के निवासियों का सनातनी पद्धति से सनातन धर्मनूसार नवरात्रि के दिन जम्मूआल बाबा के अनुष्ठान से संपन्न हुआ।
जनजातीय समाज के प्रमुख शरद सिंह सरदार, रामचंद्र शहीद, विधायक एवं पूर्व मंत्री झारखंड सरकार, कृपा प्रसाद सिंह,ग्राम विकास कार्यकर्ता एवं पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, वनवासी कल्याण आश्रम, राजेंद्र कुमार झुनझुनवाला, वनवासी कल्याण केन्द्र, सुधीर लाल संघ कार्यकर्ता ने सामूहिक रूप से माता दुर्गा के समक्ष दीप प्रज्वलित कन्या पूजन प्रारंभ किया।
देवी के सभी रूपों का ध्यान करते हुए सभी कन्याओं को देवी रूप प्रदान करने का कार्य प्रारंभ हुआ। जलाशय से स्नान करने के पश्चात देवी यात्रा करते हुए सभी कन्याओं पैर रंगाई हेतु पंक्ति बद्ध होकर 150 की 10 पंक्तियों में बैठी।
चुनरी टीका आदि से सजावट के पश्चात दुर्गा अष्टमी मंत्रों के साथ पूजन होने के पश्चात प्रत्येक कन्या को T shirt एवं हॉफ पेंट एवं एक तौलिया एवं नगद 20 रुपए की राशि सभी को भेट की गयी। सभी कन्याओं को खीर का भोजन साथ में खिचड़ी आदि खिलाया गया। इस कार्यक्रम से सनातन धर्म, देवी एवं कन्या का महत्व, सनातन जीवन पद्धति का जीवंत प्रदर्शन, कन्या को पैर छू कर प्रणाम करना एवं सुसंस्कृत एवं श्रेष्ठ समाज की अनुभूति लोगो को कराई गई।
Women empowerment evam girl child education का वनवासी कल्याण आश्रम का यह एक व्यावहारिक प्रयोग तथा RSS के 100 वे वर्ष के समरस्ता अभियान के जीवंत प्रयोग देखने लायक है।
वनवासी कल्याण केन्द्र का गत 16 वर्षों से यह एक सतही सेवा का प्रयोग सामाजिक परिवर्तन का एक साक्षात उदाहरण है। 4000 वनवासी महिला पुरुष, नगरवासी, ग्रामवासी के एक साथ बैठ कर पत्ते के थाल में भोजन भोजन सामाजिक समरसता का अनूठा प्रयास है।
टीम एबीएन, रांची। रांची की दुर्गाबाड़ी में दुर्गा पूजा की पारंपरिक विधियों और रीति-रिवाजों के लिए खास पहचान रखता है। यहां पूजा-अर्चना से लेकर मां की विदाई तक हर आयोजन पूरी तरह परंपरा के अनुरूप किया जाता है।
विजयादशमी के पावन अवसर पर गुरूवार को देवी मां की डोली उठाकर पारंपरिक ढाक और ढोल की थाप पर भक्तों ने माता रानी को नम आंखों से विदाई दी। भावुकता और उत्सव का यह संगम बारिश के बावजूद पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ देखने को मिला।
मां की डोली उठाकर कंधों पर ले जाने की परंपरा यहां लंबे समय से निभाई जा रही है। इस साल भी भक्तों ने पारंपरिक अंदाज में मां की प्रतिमा को डोली पर सजाया और कंधों से उठाकर जलाशय की ओर प्रस्थान किया। चारों ओर जय मां दुर्गा और बोलो दुर्गा माई की जय के जयकारे गूंजते रहे। डोली यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हुए।
एबीएन सोशल डेस्क। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि आज के समय में जब युवा वर्ग अनेक चुनौतियों और प्रलोभनों से गुजर रहा है, विजयदशमी का आध्यात्मिक महत्व उनके लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। भारतीय संस्कृति में विजयदशमी (दशहरा) एक अत्यंत पावन और प्रेरणादायक पर्व है। यह पर्व असत्य पर सत्य की, अहंकार पर विनम्रता की और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।
रामायण में श्रीराम द्वारा रावण का वध और महिषासुर पर माँ दुर्गा की विजय, दोनों ही घटनाएँ हमें यही संदेश देती हैं कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य और धर्म की शक्ति के आगे उसे झुकना ही पड़ता है।आज का युवा केवल शिक्षा और करियर की ही नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की भी चुनौती से गुजर रहा है।
विजयदशमी इस संदर्भ में उन्हें कई महत्वपूर्ण सीख देती है: आत्म-संयम और अनुशासन की प्रेरणा, रावण विद्वान और शक्तिशाली था, लेकिन उसकी कमजोरी उसका अहंकार था। युवाओं के लिए यह शिक्षा है कि प्रतिभा तभी सफल होती है जब उसमें विनम्रता और अनुशासन जुड़ा हो। यह पर्व सिखाता है कि वास्तविक विजय केवल दूसरों को हराने में नहीं, बल्कि स्वयं को निखारने में है।
विजयदशमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जीवन का गहन संदेश देने वाला आध्यात्मिक उत्सव है। यह युवाओं को यह समझाता है कि असली विजय बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक है। जब युवा अपने भीतर के रावण अहंकार, आलस्य, लोभ और क्रोध को पराजित कर देंगे, तभी वे जीवन में वास्तविक सफलता, शांति और संतोष पा सकेंगे। इस प्रकार, विजयदशमी युवाओं के लिए केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि आत्मविकास, आध्यात्मिक उत्थान और समाज में सकारात्मक योगदान का एक संकल्प दिवस है।
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