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Published / 2025-10-12 17:12:32
संपूर्ण सृष्टि की ज्वलंत समस्याओं का मूल कारण आध्यात्मिक दरिद्रता है : ब्रह्माकुमारी निर्मला

टीम एबीएन, रांची। संपूर्ण सृष्टि की ज्वलंत समस्याओं का मूल कारण आध्यात्मिक दरिद्रता है। दरिद्र मन वाला व्यक्ति समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए बोझ है। ब्रह्माकुमारी संस्थान आध्यात्मिक सम्पन्नता के लिए विशेष कार्य कर रहा है। दीपावली का प्रकाश पर्व भी अन्दर की दरिद्रता समाप्त करके ज्ञान, गुण और शक्तियों की सम्पन्नता लाने का संदेश देता है। यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय चौधरीबगान, हरमू रोड के प्रांगण में आयोजित दीपोत्सव समारोह में सतयुग के श्री लक्ष्मी नारायण के ताजपोशी की चैतन्य झांकी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके उद्घाटन करते हुए डॉ अभिषेक, नेत्र रोग विशेषज्ञ ने व्यक्त किये। 

डॉ शांति हेल्थ डिपार्टमेंट झारखंड सरकार ने कहा जीवन में ज्ञान जागृति न होने से ही मनुष्य तनाव में है। मिथ्या समझ के कारण समाज में ये गलतियां हो रही है। ईश्वरीय ज्ञान का प्रकाश ही स्वच्छता और पारदर्शिता लायेगा। 

इफको मानव संसाधन विभाग के प्रबंधक संजय कुमार सहाय ने कहा ईश्वरीय ज्ञान से जागृत आत्माओं के सम्पूर्ण प्रकाश में अत्याचार, शोषण व भ्रष्टाचार जैसी काली प्रवृतियां समाप्त हो जायेगी व विश्व के कोने-कोने में शांति, प्रेम व भाईचारे के भावनाएं जागृत होंगी। 

जगनाथपुर मंदिर न्यास के उपाध्यक्ष अशोक नारसरिया वर्तमान समय का मानव धन दौलत की लिप्सा में आत्मा के दिव्य तेज को नष्ट कर रहा है। ज्ञान योग के बल से आलोकिक मानव ही उच्च आध्यात्मिक स्थिति से वैभवशाली बन देवई स्वराज्य की स्थापना करेंगे। 

झारखण्ड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने कहा निर्विकारी बन सदा जागती ज्योति शिव से आत्म दीप जगा कर ही हम सच्ची दीपावली मना सकते हैं। सदानंद नस्कर डीएजी उपमहालेखाकार ने कहा ईश्वरीय विश्व विद्यालय सम्पूर्ण पवित्रता का ऐसा प्रकाश स्तम्भ है जिसके प्रकाश से हर मानव अपने जीवन का अंधकार हटा सकता है। 

कौशल राजगढ़िया अधिवक्ता ने कहा कि अब इस धरा को जगमग करने के लिए परम ज्योति निराकार परमात्मा का अवतरण हुआ है। सर्व अनिष्टों से निवृति उनसे योग लगाकर ही हो सकती है। स्वामी मुक्तस्थ योग विशेषज्ञ ने कहा दीप प्रज्ज्वलित कर हम ज्ञान धन की कामना करते हैं ताकि अज्ञान का तम: जिंदगी से चला जाय। मारवाड़ी युवा मंच समर्पण शाखा की अध्यक्ष पूजा अग्रवाल ने कहा अलौकिक प्रकाश से संपन्न आत्माएं कभी किसी के मन को पीड़ा नहीं दे सकती। 

रश्मि जायसवाल ब्रांड इवेंट उपप्रबंधक ने कहा भारत देश पूर्व की भांति अब फिर से शिरोमणि और जगद्गुरु का स्थान प्राप्त करेगा और इसी भारत देश से ईश्वरीय अध्यात्म की दैदीप्यमान किरणें संपूर्ण भू-मंडल को प्रकाशित करेंगी। 

केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने ब्रह्माकुमारी संस्थान के लिए दीपावली के दिन का महत्व बताते हुए कहा इसकी स्थापना सन् 1937 में दीपावली के दिन ही की गयी थी। आज से पांच हजार वर्ष पूर्व खुशियों के दीपक जलते थे। 

कार्यक्रम में उपस्थित प्रदीप गुप्ता प्रोफेसर गोस्सनर कॉलेज, डॉ प्रोफेसर रानी प्रगति, एसएस मेमोरियल कॉलेज, अनुराधा सर्राफ ने भी अपने अपने विचार रखे। 

कार्यक्रम में गाईडेड मेडिटेशन ने राजयोग का अभ्यास कराया। समारोह में भारी संख्या में लोग उपस्थित थे। सबने आने वाले समय में आत्मदीप जाग्रत रखने का संकल्प लिया। ज्ञातव्य हो कि ब्रह्माकुमारी केंद्र में ज्ञान प्रकाश हेतु नि:शुल्क प्रशिक्षण प्रतिदिन प्रात: 7 बजे से 10 बजे तथा सन्ध्या 5 से 6.30 बजे तक दिया जाता है। उक्त जानकारी केन्द्र प्रशासिका ब्रह्माकुमारी निर्मला ने दी।

Published / 2025-10-11 17:45:20
त्योहार सीजन के आनलाइन शॉपिंग में बढ़ा साइबर ठगी का खतरा

फेस्टिव सीजन में आनलाइन शॉपिंग करने वाले रहें सतर्क, बढ़े धोखाधड़ी के मामले 

एबीएन सोशल डेस्क। जैसे-जैसे दीवाली नजदीक आ रही है, साइबर अपराधी भी त्योहारी उत्साह का फायदा उठाकर आॅनलाइन खरीदारी करने वाले लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। साइबर सुरक्षा फर्म मैकैफी के हालिया शोध से पता चला है कि करीब हर तीन में एक भारतीय उपभोक्ता छुट्टियों से जुड़ी धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है और इनमें से 37 फीसदी ने आर्थिक नुकसान होने की जानकारी दी है। 

एआई और डीपफेक तकनीक से हो रहा शिकार 

अध्ययन में यह भी सामने आया है कि साइबर अपराधी आनलाइन खर्च में वृद्धि का फायदा उठाने के लिए कई तरह की तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जैसे डीपफेक के जरिये हस्तियों के विज्ञापन, फर्जी मेसेज, फर्जी ईमेल और वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) का दुरुपयोग। मैकैफी में वरिष्ठ निदेशक प्रतिम मुखर्जी का कहना है कि त्योहारों का मौसम खुशियों का समय होता है लेकिन अब धोखेबाज इस दौरान लोगों को अपना शिकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बदलती तकनीक और एआई आधारित फजीर्वाड़ा आनलाइन खरीदारी करने वालों के लिए नया जोखिम पैदा कर रहा है। 

आनलाइन शॉपिंग का बढ़ता चलन 

भारत में लोग त्योहारी खरीदारी अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से करना पसंद कर रहे हैं। बेहतर छूट, सुविधा, अधिक विकल्प और तेज डिलीवरी जैसी वजहों से 64 फीसदी उपभोक्ता आनलाइन खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके साथ ही 77 फीसदी लोग मोबाइल के जरिए ही शॉपिंग करते हैं और 25 से 44 वर्ष के युवा सबसे बड़े डिजिटल खरीदारी उपयोगकर्ता बने हैं। 

उपभोक्ताओं की बढ़ती सतर्कता 

इस तेजी के साथ ही खरीदारों को आनलाइन धोखाधड़ी का सामना भी करना पड़ रहा है। करीब 96 फीसदी भारतीय ग्राहक आॅनलाइन फजीर्वाड़े को लेकर गंभीर चिंता जताते हैं और 72 फीसदी लोग पिछले साल की तुलना में इस साल एआई आधारित धोखाधड़ी के बारे में अधिक सतर्क हैं। 91 फीसदी उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें खरीदारी से जुड़े संदिग्ध मेसेज मिले, जिनमें फर्जी गिफ्ट कार्ड, सीमित समय की छूट और रिफंड से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं। 

आर्थिक और भावनात्मक नुकसान 

औसतन, एक भारतीय को रोजाना 12 बार धोखाधड़ी के प्रयास का सामना करना पड़ता है, जिनमें टेक्स्ट मैसेज, फर्जी ईमेल और सोशल मीडिया विज्ञापन शामिल हैं। सबसे बड़ा खतरा डीपफेक से तैयार किए गए सेलेब्रिटी विज्ञापन और नकली ई-कॉमर्स वेबसाइट से है, जिससे असली और नकली में अंतर करना मुश्किल हो गया है। फर्जीवाड़े का असर केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि 91 फीसदी पीड़ितों ने क्रोध, चिंता और शर्मिंदगी जैसी भावनाओं की बात कही, जबकि 28 फीसदी लोग अपने अनुभव सार्वजनिक रूप से शायद ही कभी साझा करते हैं।

Published / 2025-10-10 19:32:06
यह पर्व भारतीय संस्कृति की परंपरा, श्रद्धा और मातृत्व के गूढ़ भावों को करता है अभिव्यक्त : संजय सर्राफ

टीम एबीएन रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदू धर्म में कार्तिक मास का विशेष महत्व होता है। इस महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत त्यौहार मनाया जाते हैं। जो सामाजिक, धार्मिक एवं पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं। 

इन्हीं पर्वों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है अहोई अष्टमी, यह व्रत हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष अहोई अष्टमी व्रत 13 अक्टूबर दिन सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है शिवयोग, सिद्ध योग, परिघ योग और रवि योग। ये सभी योग व्रत करने वालों के लिए अत्यंत मंगलकारी माने जाते हैं।

अहोई अष्टमी व्रत जिसे विशेष रूप से संतान की दीर्घायु जीवन, कुशलता, सुख-समृद्धि और मंगल भविष्य के लिए माताएं करती हैं। इस दिन माताएं सूर्योदय से पहले आहार लेकर निर्जल व्रत का संकल्प लेती हैं। एवं रात्रि में व्रत खोलती है। 

यह व्रत विशेषकर सात संतान वाली माता अहोई और सिंह (साही) के बच्चों से जुड़ी एक पौराणिक कथा पर आधारित है, जिसमें मातृत्व के अपराध बोध,पश्चाताप और ईश्वर की कृपा का सुंदर चित्रण है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की सात बहुएं अपने घर की दीवार पर अहोई माता और सिंह की आकृति बनाकर पूजा करती थीं। एक बार साहूकार की पत्नी ने मिट्टी खोदते समय गलती से एक सिंह के बच्चे को मार दिया। 

अपराध बोध से ग्रसित होकर उसने व्रत का संकल्प लिया और सच्चे मन से अहोई माता की पूजा की। माता ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसके सभी संकट हर लिए और उसे संतान सुख की प्राप्ति हुई। यह कथा मातृत्व की करुणा, धर्म के प्रति निष्ठा और पश्चाताप के महत्व को दर्शाती है। इस कथा को पूजा के समय अवश्य पढ़ा जाता है। 

प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें। व्रती स्त्री निर्जल उपवास करती है। दीवार पर अहोई माता और साही (सिंह) की आकृति चित्रित की जाती है या चित्र लगाकर उसकी पूजा की जाती है।पूजा के लिए धूप, दीप, रोली, चावल, दूध, हलवा-पूरी, और अहोई माता की कहानी की आवश्यकता होती है। संध्या को तारों के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। 

कुछ स्थानों पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया जाता है। अहोई अष्टमी न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व मातृत्व के त्याग और प्रेम को श्रद्धा से अभिव्यक्त करने का माध्यम है। साथ ही यह व्रत संतान के प्रति माता-पिता के उत्तरदायित्व और प्रार्थना की शक्ति का प्रतीक है।

अहोई अष्टमी व्रत भारतीय संस्कृति की परंपरा, श्रद्धा और मातृत्व के गूढ़ भावों को अभिव्यक्त करता है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि निस्वार्थ प्रेम और सच्ची प्रार्थना से हर संकट को टाला जा सकता है। संतान की लंबी उम्र और जीवन में सुख-शांति की कामना के लिए यह पर्व आज भी पूरी आस्था के साथ देशभर में मनाया जाता है।

Published / 2025-10-10 19:16:53
भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय योग अनुसंधान कार्यशाला में योगाचार्य महेश पाल बने मुख्य वक्ता


। वर्तमान समय में बढ़ते योग के महत्व को देखते हुए कई शोध कार्य किये जा रहे हैं। वहीं बीमारियो से बचाव के लिए कई रिसर्च व कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इसी क्रम में भोपाल के सेम ग्लोबल यूनिवर्सिटी में एक विशेष राष्ट्रीय योग विषय पर रिसर्च (शोध-अनुसंधान) कार्यशाला आयोजित की गयी। जिसमे देश के विशेष योग्यता प्राप्त प्रोफेसर, योगगुरु, योगाचार्यों को शामिल किया गया। जिसमें  दिल्ली, मुंबई, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के योग विशेषज्ञों के बीच योगाचार्य महेश पाल को अपने विषय योग प्राणायाम रहस्य से संबंधित मुख्य वक्ता के रूप में शामिल किया गया  कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नवप्रवर्तकों का सशक्तिकरण बौद्धिक संपदा अधिकार" पर कैसे कार्य किया जाए एवं योग प्राणायाम से वर्तमान समय में बढ़ती  बीमारियों से बचाव जनसमुदाय कैसे योग के द्वारा पूर्णतः स्वस्थ रह सके। बच्चों, युवाओं में बढ़ती स्वास्थ संबंधी समस्याओ को योग के द्वारा कैसे ठीक किया जा सके। आदि विषयों पर चर्चा हुई। कार्यशाला के दौरान योगाचार्य महेश पाल ने अपना वक्तव्य  देते हुए योग प्राणायाम रहस्य से संबंधित विस्तार पूर्वक बताया कि योग एक प्राचीन भारतीय साधना पद्धति है, जिसका उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा का संतुलन एवं एकता स्थापित करना है।योग वह साधना है जो व्यक्ति को ईश्वर,आत्मा को परमात्मा, और शरीर को मन से जोड़ती है।,प्राणायाम योग की अत्यंत महत्वपूर्ण और गूढ़ साधना है। यह न केवल श्वास का अभ्यास है, बल्कि जीवन-शक्ति (प्राण) को नियंत्रित करने की प्रक्रिया भी है। “प्राण” का अर्थ है जीवन ऊर्जा और “आयाम” का अर्थ है विस्तार या नियंत्रण। इसलिए, प्राणायाम का अर्थ है, प्राण का विस्तार या नियंत्रण। उन्होंने प्राणायाम रहस्य के बारे में आगे बताया कि प्राण केवल श्वास नहीं है, यह ईश्वर की दी हुई चेतन ऊर्जा है प्राणायाम के माध्यम से साधक इस ऊर्जा को जागृत कर कुंडलिनी शक्ति को सक्रिय कर सकता है। यह साधना व्यक्ति को भौतिक से आध्यात्मिक चेतना की ओर ले जाती है। प्राणायाम के अभ्यास को कई चरणों में किया जाता है जिसमें,पूरक (Inhalation): - शुद्ध वायु को अंदर लेना। कुंभक (Retention) – श्वास को रोककर ऊर्जा का संग्रह करना। रेचक (Exhalation)- विषैली वायु का बाहर निकालना। शून्यक या बाह्य कुंभक – श्वास छोड़ने के बाद कुछ क्षण तक रुकना। योगाचार्य महेश पाल ने आगे बताया कि हमारे शरीर में मुख्य रूप से पांच प्राण ओर पांच उप प्राण पाए जाते हैं जो शरीर के विभिन्न क्षेत्रों को नियंत्रित करते हैं जिससे विभिन्न प्रकार के रोगों से बचा जा सकता है जिसमें, 1️⃣ प्राण (मुख्य प्राण):- यह  हृदय और फेफड़ों में स्थित; श्वास-प्रश्वास को नियंत्रित करता है। फेफड़ों, हृदय और मस्तिष्क को शक्ति देता है। जीवन का आधार है। 2️⃣अपान- नाभि से नीचे के भागों में कार्य करता है। मल, मूत्र, स्वेद (पसीना), शुक्र और गर्भ निष्कासन की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।3️⃣ समान- नाभि क्षेत्र में सक्रिय रहता है। पाचन, रस-रक्त निर्माण और पोषण शक्ति का नियंत्रण करता है। 4️⃣ उदान- गले और सिर के भाग में कार्य करता है। वाणी, स्मरण, बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक 5️⃣ व्यान- पूरे शरीर में संचरित रहता है। रक्त संचार, स्नायु तंत्र और अंगों की समन्वय क्रिया को नियंत्रित करता है। उपप्राण के अंतर्गत 1.नाग – डकार, छींक आदि क्रियाओं में सहायक।2.कूर्म – पलक झपकना और नेत्र सुरक्षा में कार्य करता है। 3.कृकल –भूख-प्यास की भावना उत्पन्न करता है। 4.देवदत्त – जम्हाई और नींद की प्रक्रिया नियंत्रित करता है। 5.धानंजय – मृत्यु के बाद भी कुछ समय शरीर में रहता है, विघटन को नियंत्रित करता है। यह प्राण शरीर के हर अंग को ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह सभी प्राण मिलकर पाचन, श्वसन, रक्त संचार, उत्सर्जन जैसी सभी जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। मन और शरीर में संतुलन बनाए रखते हैं। प्राणों के असंतुलन से रोग, चिंता और मानसिक अशांति उत्पन्न होती है। इन प्राणों को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए संतुलन अवस्था में रखने के लिए योग प्राणायाम अति आवश्यक है, कार्यक्रम के दोरान प्रोपसर शिवेंद्र चौराशिया ने रिसर्च मेथोलॉजी विषय पर विशेष चर्चा की। डॉ. आशीष व्यास द्वारा रिसर्च प्रॉब्लम के समाधान पर अपना उद्बोधन दिया। वहीं डॉ अनिरुध सिंह द्वारा शोध पत्र के विषय में चर्चा की। अंत में यूनिवर्सिटी चांसलर प्रीति सलूजा, वाइस चांसलर एनके तिवारी द्वारा योगाचार्य महेश पाल को योग विषय में प्राणायाम रहस्य पर उनके द्वारा  किये जा रहे शोध-अनुसंधान कार्य व उपलब्धियों के लिए उन्हें सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया यूनिवर्सिटी के प्रोपसर मनीष मिश्रा द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया।

Published / 2025-10-09 21:54:05
पतियों को लंबी उम्र प्रदान करता है करवा चौथ का त्योहार

एबीएन सोशल डेस्क। करवा चौथ का त्यौहार हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह 9 अक्टूबर को देर रात 10:54 बजे शुरू होगा और 10 अक्टूबर को रात 7:38 बजे खत्म होगा। करवा चौथ के दिन चांद की मान्यता काफी ज्यादा होती है। महिलाएं छननी में चांद को देख और फिर अपने पति को देख व्रत को तोड़ती हैं। 

इस दिन सभी को उनके शहर में चांद कितने बजे निकलेगा, ये जानने की उत्सुकता रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं, झारखंड के किन-किन शहरों में चांद कितने बजे तक निकलेगा। कहा जाता है कि चांद को देखे बिना करवाचौथ का व्रत अधूरा माना जाता है। 

कई ऐसी कथा है, जिनके कारण चांद की पूजा की जाती है। महाभारत में कृष्णा ने द्रोपदी को यह व्रत पांडवों की सुरक्षा के लिए करने को बोला था। दूसरी कथा के अनुसार एक स्त्री ने चांद को बिना देखे व्रत तोड़ दिया था। इसके कारण उसके पति की तबीयत खराब रहा करती थी। 

जानें विभिन्न शहरों में चंद्रोदय का समय 

  • रांची            : 07:44 बजे 
  • जमशेदपुर    : 07:44 बजे 
  • देवघर          : 07:40 बजे 
  • बोकरो         : 07:45 बजे 
  • धनबाद        : 07:47 बजे

Published / 2025-10-07 21:08:13
शरद पूर्णिमा पर गायत्री साधकों ने 24 घंटे का अखंड जप, सहस्रनाम पाठ व यज्ञीय समीक्षा की

हम सब में आत्मीयता का विस्तार एवं अनुशासित जीवन जीने की कला का विकास हो : जप-समूह प्रतिनिधि 

एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व स्तरीय गायत्री परिवार आनलाइन जप-अनुष्ठान समूह प्रतिनिधिमंडल ने मासिक पूर्णिमा पर 24 घंटे का अखंड जप-अनुष्ठान अभियान किया, जो करीब गत 5 वर्षों से संचालित हो रहे समूह प्रतिनिधि महिला मंडल सदस्य ने बताया कि  पूर्णिमा दिवस हम सबकी अखंड जप की मासिक साधना का विशेष पर्व है। यह युग निर्माण के निमित्त किये जा रहे हैं। 

यह अखंड पूर्णिमा जप साधना की बढ़ रही नयी उल्लास भरी आवृत्ति भी वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य गुरुसत्ता की सूक्ष्म उपस्थति, संरक्षण और आशीर्वाद से युगनिर्माण के निमित्त श्रृंखलाबद्ध, प्रत्येक पूर्णिमा को  24 घंटे के लिए आयोजित होने वाले आॅनलाइन, अखंड जप में सम्मिलित होने का यह भावभरा आमंत्रण आप सबको प्रणाम सहित सादर निवेदित है। 

6 अक्टूबर सोमवार की सुबह 5 बजे से 7 अक्टूबर मंगलवार की सुबह 5 बजे तक किया गया। सभी से अनुरोध किया था कि इस दैवीय योजना में घर बैठे- बैठे जप करते हुए  सहयोग करें और दु:ख-संताप से त्रस्त दुनिया में शांति एवं सभी के आत्मनिर्माण और कल्याण की कामना के साथ सबके लिए सद्बुद्धि व सबके लिए उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना के भाव के साथ आप सभी अपने बहुमूल्य समय का एक अंश युगनिर्माण हेतु अवश्य देने का संकल्प करें। 

कहा कि  हम सब में आत्मीयता का विस्तार एवं अनुशासित जीवन जीने की कला का विकास हो। इसी भाव के साथ  महामृत्युंजय मंत्र एवं चंद्र गायत्री मंत्र  का भी जप  आवश्यक रूप से सम्मिलित कर जप के उपरांत यज्ञीय पूर्णाहूति किया गया। मौके पर रांची शक्तिपीठ सेक्टर टू के अनेक साधकों में कुच्छेक ने गायत्री महामंत्र के जप साथ, मंत्र लेखन, अन्य सहायक गायत्री देव मंत्रों का भी उद्देश्य अनुसार जप किये। 

कुछ ने गायत्री सहस्रनाम पाठ किये। इस शरद नवरात्र में जप-अनुष्ठान की पूर्णाहूति सोल्लास संपन्न होने की खबर में बताया गया कि इस सेक्टर टू सहित अलकापुरी शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ बस स्टैंड स्थित धुर्वा प्रज्ञापीठ तथा चेतना केंद्र टाटीसिलवे सहित कई प्रखंड समन्वय समिति केंद्रों व मंडल इकाइयों में भी नवरात्र महापर्व अनुष्ठान और इसकी महा पूर्णाहूति में हर्षोल्लास सहित पूर्व की अपेक्षा इस बार दुगनी संखया में परिजन शामिल हुए। 

बताया कि इस बार गत दिसंबर से  दिव्य ज्योति-कलश रथ भ्रमण दर्शन यात्रा में जन-जन की भागीदारी व मार्गदर्शन अनुसार परिजनों में सत्प्रवृति संवर्धन, व्यसन मुक्ति अभियान से नयी जागृति, स्मृति एवं स्फूर्ति में वृद्धि हुई है। आगामी शान्तिकुञ्ज के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम समारोह में रांची जिला से साधक-शिष्यों में समयदानी संख्या में उत्साहजनक संख्या बढ़ी है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ-साधक, प्रचारक प्रसारक जय नारायण प्रसाद ने दी।

Published / 2025-10-07 21:07:07
करवा चौथ का पावन पर्व 10 अक्टूबर को

करवा चौथ अखंड सौभाग्य, नारी शक्ति के त्याग, प्रेम और समर्पण का है प्रतीक :  संजय सर्राफ 

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि करवा चौथ भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण एवं भावनात्मक पर्व है, जो विशेष रूप से विवाहित स्त्रियों द्वारा अपने पति की दीर्घायु, सुख- समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। 

इस वर्ष करवा चौथ का पावन पर्व 10 अक्टूबर दिन शुक्रवार को मनाया जायेगा। करवा चौथ की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। इस पर्व से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से वीरवती की कथा सर्वाधिक प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि वीरवती ने सच्चे मन से करवा चौथ का व्रत किया था और कुछ भ्रम के कारण व्रत अधूरा छोड़ने पर उसके पति की मृत्यु हो गई थी। 

उसकी श्रद्धा, तपस्या और भक्ति से देवी पार्वती प्रसन्न हुईं और उन्होंने वीरवती को उसका पति पुन: जीवित कर लौटाया। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य की कामना के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। करवा चौथ पर सुहागन स्त्रियां निर्जला उपवास रखती हैं, यानी वे दिन भर जल भी ग्रहण नहीं करतीं। वे प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व सांझी (सरगी) ग्रहण करती हैं, जो कि सास द्वारा बहू को दिया जाता है। 

दिन भर व्रत रखने के बाद संध्या समय चंद्रमा के उदय पर, चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर पूजा की जाती है। पूजन में करवा (मिट्टी का घड़ा), दीपक, रोली, चावल, मिठाई आदि का विशेष महत्व होता है। स्त्रियां सोलह श्रृंगार कर पारंपरिक परिधानों में सजती हैं और एकत्र होकर कथा सुनती हैं। चंद्रमा के दर्शन कर छलनी से अपने पति को देखकर व्रत खोला जाता है। पति अपनी पत्नी को जल पिलाकर व्रत संपन्न करवाते हैं। 

करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि यह नारी शक्ति के त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। यह पर्व वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और अटूट बंधन को सुदृढ़ करता है। इसके माध्यम से भारतीय समाज में स्त्रियों की भूमिका, उनकी आस्था और परिवार के प्रति उनका समर्पण उजागर होता है। आजकल यह पर्व शहरी जीवन में भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जहां पति भी पत्नी के साथ व्रत रखकर समानता एवं प्रेम का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

करवा चौथ एक ऐसा पर्व है जो न केवल वैवाहिक प्रेम और नारी समर्पण का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी संस्कृति की गहराई, परंपराओं की गरिमा, और आध्यात्मिक भावनाओं को भी उजागर करता है। आधुनिक समय में भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है, जो हमारी सनातन परंपराओं की अमरता को सिद्ध करती है।

Published / 2025-10-07 12:53:29
शरद पूर्णिमा महोत्सव श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में उल्लासपूर्वक संपन्न

टीम एबीएन, रांची। पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा शरद पूर्णिमा का पर्व हर्षोल्लास एवं भक्ति भाव से मनाया गया। इस पावन अवसर पर मंदिर प्रांगण दिव्य अलोकिकता से आलोकित हो उठा, जब श्री राज श्यामा जी का श्वेत वस्त्रों एवं आभूषणों से अलौकिक श्रृंगार किया गया। 

श्रृंगार दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा की गूंज सुनाई देने लगी। रात्रि में मंदिर प्रांगण में भजन कीर्तन एवं सामूहिक आरती का विशेष आयोजन हुआ। 

ट्रस्ट के भजन गायको द्वारा मनमोहक भजन प्रस्तुत किए गए प्रभु श्रीकृष्ण एवं राधा रानी के मधुर भजनों ने समस्त वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। आरती के समय दीपों की पंक्तियाँ और चंद्रमा की चांदनी ने माहौल को अत्यंत आध्यात्मिक एवं दिव्य बना दिया।शरद पूर्णिमा की रात्रि को विशेष महत्व प्राप्त है, क्योंकि इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात्रि चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं से युक्त होता है और उसकी चांदनी में औषधीय गुण होते हैं। 

इसी मान्यता के अनुसार मंदिर में 101 किलो दूध से बनी खीर का विशेष भोग तैयार किया गया, जिसे रात्रि भर चंद्रमा की रोशनी में रखा गया। श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को बड़े श्रद्धाभाव से निहारा। आज सुबह मंदिर के मुख्य पुजारी अरविंद पांडे  ने विधिपूर्वक खीर का भोग लगाया और तत्पश्चात इसे उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रेमपूर्वक वितरित किया गया। इस दिव्य प्रसाद को पाने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। 

इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने शरद पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व आत्मशुद्धि, भक्ति एवं शांति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा न केवल भगवान श्रीकृष्ण के रास लीला का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन का भी संदेश देती है। पूरे कार्यक्रम का आयोजन ट्रस्ट के सदस्य एवं स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से अत्यंत अनुशासित और भव्य रूप से संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने इसे एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया। 

श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा इस प्रकार का आयोजन न केवल धार्मिक भावनाओं को पुष्ट करता है, बल्कि समाज में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक चेतना को भी जागृत करता है। शरद पूर्णिमा का यह पर्व एकता, श्रद्धा और सेवा की भावना के साथ सम्पन्न हुआ। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह  मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

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