एबीएन सेंट्रल डेस्क। पान मसाले में कई कंपनियां कत्था नहीं बल्कि चमड़े को रंगने वाले केमिकल गैंबियर मिला रही हैं। अलीगढ़ में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा लिए गए शिखर, प्रधान व पानबहार मसालों के नमूनों की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। गैंबियर कानपुर की टेनरियों में चमड़े को रंगने में प्रयोग किया जाता है। पान मसाले के सेवन से कैंसर हो सकता है। इसके बावजूद लोग इसका सेवन करते हैं। जिस पानमसाले में कत्था, केसर सहित अन्य पदार्थों के मिलाने का दावा किया जाता है। उसको लेकर चौंकाने वाला खुलासा अलीगढ़ में एफडीए द्वारा अक्तूबर 2021 में लिए पान मसाले की नमूना रिपोर्ट में हुआ है। विभाग ने उदयसिंह जैन रोड स्थित वार्ष्णेय एजेंसीज के यहां से शिखर, प्रधान व पानबहार पान मसाले का नमूना भरकर लेब्रोट्ररी में जांच के लिए भेजा था। अब लैब से आई रिपोर्ट में पान मसाले में कत्थे का मिश्रण नहीं पाया गया है बल्कि उसमें चमड़े को रंगने में प्रयोग किए जाने वाले गैंबियर मिलाने की पुष्टि हुई है। मामले में कंपनियों को नोटिस जारी किया है।
टीम एबीएन, चतरा। राजकीय इटखोरी महोत्सव का उद्घाटन शनिवार को दोपहर तीन बजे मां भद्रकाली मंदिर परिसर में किया जाएगा। महोत्सव का उद्घाटन श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता, स्थानीय सांसद सुनील कुमार सिंह, सिमरिया विधायक किशुन कुमार दास, उपायुक्त अंजली यादव एवं पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन संयुक्त रूप से करेंगे। इटखोरी महोत्सव के आयोजन की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है। माता का दरबार महोत्सव के सांकेतिक आयोजन के लिए सज-धज कर तैयार हो गया है। इटखोरी महोत्सव के आयोजन को लेकर मां भद्रकाली मंदिर के साधना चबूतरा के समीप मंच बनाया गया है। महोत्सव के मंच से ही कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि इटखोरी महोत्सव का विधिवत उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन से पूर्व आगंतुक अतिथिगण मां भद्रकाली की विशेष पूजा में भी शामिल होंगे। पंचमुखी हनुमान, शनिदेव महाराज तथा सहस्र शिवलिंग महादेव की पूजा अर्चना करने के बाद अतिथियों के द्वारा शिव मंदिर परिसर में रुद्राक्ष, चंपा तथा बेल का पौधा लगाया जाएगा। इसके बाद मिथिलांचल के स्रोत गायक विपिन मिश्रा के शंख तथा डमरु वादन के बीच महोत्सव का उद्घाटन किया जाएगा। उद्घाटन सत्र के पश्चात महोत्सव के मंच पर भक्ति कार्यक्रम की प्रस्तुति होगी। महोत्सव के प्रथम दिन शनिवार को जिले के स्थानीय कलाकार भक्ति कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। महोत्सव के तीनों दिन मां भद्रकाली की विशेष शृंगार पूजा होगी। दोपहर के वक्त खीर व हलवे का भोग लगाया जायेगा। 20 फरवरी को महोत्सव के दूसरे दिन भी कलाकारों के द्वारा भक्ति कार्यक्रम की प्रस्तुति होगी।
एबीएन डेस्क। वैज्ञानिकों ने डायनासोर की एक नई प्रजाति को लेकर बड़ा दावा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बिना हाथों वाले डायनासोर बेहद खतरनाक शिकारी थे। टायरेनोसौरस रेक्स प्रजाति की तुलना में इनके हाथ काफी छोटे थे। डायनासोर की यह प्रजाति अर्जेंटीना में 7 करोड़ साल पहले पाई जाती थी। डायनासोर की इस नई प्रजाति का नाम गुमेसिया ओचोआइ है। लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के शोधकर्ताओं ने अर्जेंटीना में इस नई प्रजाति के जीवाश्म अवशेष की खोज की है। इस रिसर्च से मिले डेटा के मुताबिक, गुमेसिया ओचोआइ और एबेलिसौर एक ही प्रजाति के थे और इनके सामने वाला अंग छोटा होता था। इस प्रजाति के डायनासोर अपने सिर और मजबूत जबड़े के जरिए शिकार करते थे। इस रिसर्च को करने वाली टीम की मुखिया और सह लेखिका प्रोफेसर अंजलि गोस्वामी का कहना है कि बेहद अनोखे हैं इस प्रजाति के डायनासोर। आइए जानते हैं इन प्रजाति के डायनासोर के बारे में वैज्ञानिकों ने क्या-क्या बताया है... प्रोफेसर अंजलि गोस्वामी ने बताया है कि इस प्रजाति के डायनासोर में कई विशेषताएं थीं। इस नए प्रजाति के डायनासोर से दुनिया के एक क्षेत्र के बारे में अहम जानकारियां मिलती हैं जिनके बारे में हमें बहुद ज्यादा पता नहीं है। पेटागोनिया और गोंडवाना के क्षेत्रों में थेरोपोड डायनासोर मिलते थे। इससे पहले साल 2021 में वैज्ञानिकों ने डायनासोर की एक नई प्रजाति खोजी थी। रिसर्च के मुताबिक, इस प्रजाति के डायनासोर 13 फीट लंबे, पांच फीट ऊंचे थे जबकि वजन 1 टन था। शाकाहारी डायनासोर के करीब दो पूर्ण खोपड़ी जीवाश्म मिले थे। शोधकर्ताओं ने पूर्वी ग्रीनलैंड के जेम्सन लैंड में इनकी खोज की थी। इस डायनासोर को वैज्ञानिकों ने "Issi saaneq" नाम दिया है जिसका मतलब कोल्ड बोन होता है। ट्रियासिक काल के आखिरी में इस प्रकार के डायनासोर धरती पर मिलते थे। 214 मिलियन साल पहले यूरोप से पूर्वी ग्रीनलैंड जुड़ा हुआ था। लंबी गर्दन वाले डायनासोर के ग्रुप से कोल्ड बोन संबंधित है जिसको सॉरोपोडा मोर्फ भी कहा जाता है। इसी समूह से सबसे बड़े डायनासोर का संबंध था।
एबीएन डेस्क। आजाद परिंदों की चहचहाहट में दुनियावी शोर-गुल को भुलाने और उनके खूबसूरत परवाज को घंटों निहारने वाले पक्षी प्रेमियों के लिए चार दिवसीय बर्ड-ए-थॉन की 18 फरवरी से शुरुआत होगी। इस अभियान के तहत देशभर के पक्षी प्रेमी विभिन्न पक्षियों की प्रजातियों को देखेंगे और उसके बारे में जानकारी दर्ज करेंगे। संगठन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट (जीबीबीसी) में दुनियाभर के एक लाख से ज्यादा पक्षी प्रेमी भाग लेते हैं। पिछले साल पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के बारे देश भर के पक्षी प्रेमियों ने रिकॉर्ड तैयार किया था। भारत को इस अभियान में दुनिया में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था।स्टेला मैरिस कॉलेज, चेन्नई की प्रोफेसर विद्या स्वामीनाथन ने कहा, मैं हर साल जीबीबीसी और सीबीसी का इंतजार करती हूं। इसके जरिये देशभर के साथ ही दुनियाभर के पक्षी प्रेमी पक्षियों को निहारने और उनके बारे में रियल टाइम चेक लिस्ट तैयार करने में मदद करते हैं। यह हमारे आसपास उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए महत्वपूर्ण है। वर्ष 2021 में भारत पक्षियों की प्रजातियों के बारे में सूचना देने में कोलंबिया के बाद दूसरे स्थान पर था। वहीं, चेक लिस्ट अपलोड करने के मामले में अमेरिका और कनाडा के बाद तीसरे नंबर पर था। भारत में तीन जो सबसे ज्यादा पक्षी दिखे, उनमें मैना, बुलबुल और तोता थे। बता दें कि बर्ड काउंट इंडिया विभिन्न पक्षी प्रेमी संगठनों का एक समूह है। यह पक्षियों के बारे में लोगों की जानकारी को बढ़ाने और यह बताने का प्रयास करता है कि कहां किन प्रजातियों के पक्षियों की संख्या अधिक है। यह संगठन पक्षियों की निगरानी के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करता है और इससे जुड़े संगठनों की मदद करता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रेल ने अपने यात्रियों के लिए नई सुविधा शुरू की है, इसके जरिए अब यात्री क्यूआर कोड और यूपीआई पेमेंट के माध्यम से ट्रेन टिकट खरीद पाएंगे। लेकिन यह सुविधा सिर्फ ऐसे स्टेशन पर होगी जहां ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM) की सुविधा पहले से मौजूद है। ऐसी मशीन एटीएम की तरह होती हैं। पहले इनके उपयोग से यात्री केवल लोकल या प्लेटफॉर्म टिकट निकाल पाते थे, लेकिन अब इनकी मदद से लंबी यात्रा के लिए टिकट भी निकाले जा सकेंगे।
एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड में बोकारो जिला के कसमार प्रखंड के मुरूलसुदी पंचायत का चौरा गांव में गेंदा के फूल ना सिर्फ फिजा में खुशबू बिखेर रहे हैं, बल्कि महिला किसानों की जिंदगी भी संवर रही है। लिलू देवी उन महिला किसानों में से एक है, जिसने महज कुछ माह में गेंदा फूल की खेती कर अपने परिवार की जिंदगी बदल दी है। लिलू देवी ने महज कुछ हजार रुपये से गेंदा के फूल की खेती शुरू की। इसके चार माह बाद ही उसने एक लाख रुपये से अधिक का मुनाफा कर लिया। लिलू देवी ने बताया, राज्य सरकार की मदद से उसने गेंदा फूल की खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया। सरकार की मदद से उसने पश्चिम बंगाल से लाकर हाईब्रिड नस्ल के पांच हजार गेंदा के फूल लगाए। इस कार्य में उनका स्नातक उतीर्ण बेटा लगुन किस्कू एवं परिवार के अन्य सदस्य भी हाथ बटा कर अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। कसमार प्रखंड के अन्य किसानों समेत लिलू देवी को पिछले दो वर्षों से पारंपरिक खेती धान एवं टमाटर की फसल से उम्मीद अनुरूप उत्पादन नहीं होने से काफी निराशा हुई। कई किसानों ने नई फसल लगाने का मन बनाया। इसी दौरान सरकार द्वारा महिलाओं को मल्टी ग्रेन खेती करने के लिए प्रेरित किया गया। लिलू ने भी इसमें रुचि दिखाई और परिवार के सभी सदस्यों ने भी हामी भरी। इसके बाद सरकार से ऋण प्राप्त कर गेंदा फूल की खेती शुरू की। इसके साथ खेत में सरसों और अरहर की भी मिक्स खेती की और यह प्रयोग सफल रहा।
एबीएन डेस्क (संतोष पाण्डेय)। माघ मास की पूर्णिमा तिथि गंगा स्नान के लिए सबसे पवित्र दिन है। माघ पूर्णिमा पर माघ स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। माघ महीने में गंगा स्नान करने, विष्णु पूजा करने और खिचड़ी खाने का विशेष प्रावधान बनाया गया है। इस बार माघ पूर्णिमा 16 फरवरी 2022 को है। माघ माह में चलने वाला यह स्नान पौष मास की पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा तक होता है। लोग करते हैं कल्पवास तीर्थराज प्रयाग में कल्पवास करके त्रिवेणी स्नान करने का अंतिम दिन माघ पूर्णिमा ही है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार माघ स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते हैं तथा उन्हें सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते हैं। मघा नक्षत्र के उदय होने से माघ पूर्णिमा की उत्पत्ति होती है। मघा नक्षत्र को श्रीविष्णु जी का हृदय कहा जाता है। गंगा स्नान की विधि : माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि के साथ-साथ उसके सभी रोगों का नाश होता है। माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और उन्हें प्रणाम करें। इसके बाद ह्यॐ घृणि सूर्याय नम:ह्ण इस मंत्र का 108 बार जाप करें। माघ पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें और काले तिल से अपने पितरों का तर्पण करें और फिर हवन करें। माघ पूर्णिमा व्रत के दौरान किसी से झूठ बोलने, किसी पर क्रोध करने किसी के बारे में अप शब्द बोलने से बचें। माघ मेला और कल्पवास : तीर्थराज प्रयाग (इलाहाबाद) में हर साल माघ मेला लगता है, जिसे कल्पवास कहा जाता है। इसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। प्रयाग में कल्पवास की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कल्पवास का समापन माघ पूर्णिमा के दिन स्नान के साथ होता है। माघ मास में कल्पवास की बड़ी महिमा है। इस माह तीर्थराज प्रयाग में संगम के तट पर निवास को कल्पवास कहते हैं।
टीम एबीएन, कोडरमा। गुरुद्वारा रोड निवासी सरदार सगल दीप सिंह ने जेनरल कोटे में 2021 के नीट मेडिकल के एग्जाम में झुमरी तिलैया का नाम रौशन किया है। उन्होंने आॅल इंडिया रैंकिंग 5414 स्थान प्राप्त किया। उन्होंने घर पर रहकर ही परीक्षा की तैयारी की थी। सगलदीप को राज्य भर में 45वां स्थान प्राप्त हुआ है। ज्ञात हो कि सगल दीप सिंह स्वर्गीय अशोक सलूजा के छोटे पुत्र और गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के सचिव यशपाल सिंह गोल्डन के भतीजे हैं। उन्होंने दसवीं की परीक्षा में भी 10 सीजीपीए प्राप्त किया था। 12वीं की परीक्षा में भी प्रथम आया था। सगलदीप की सफलता पर सारे समाज और परिवार मेंं हर्ष एवं खुशी का वातावरण है। सगल दीप सिंह ने दूरभाष पर बताया कि यह उसके गुरुजनों एवं बड़ों का आशीर्वाद है। उनके परिजनों से बातचीत में उन्होंने बताया कि यह उनकी अपनी मेहनत का फल है। वह रात को 3:30 बजे तक पढाई करता था। सगलदीप के डॉ बनाना उनके स्वर्गीय पिताा अशोक सलूजा का सपना था।
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