एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध का असर दिखने लगा है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि की है। कामर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 105 रुपये का इजाफा हुआ है। वहीं, पांच किलो के रसोई गैस सिलेंडर छोटू के दाम भी 27 रुपये बढ़ गए। ऐसे में माना जा रहा है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद घरेलू गैस सिलेंडर के साथ पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ सकते हैं। बता दें आखिरी चरण का चुनाव 7 मार्च को है। एक मार्च से हुई बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में कामर्शियल सिलेंडर की कीमत 1907 से बढ़कर 2012 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है। वहीं, पांच किलो के छोटे गैस सिलेंडर के दाम 27 रुपये बढ़कर 569.5 रुपये हो गई है। कंपनियों ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत छह अक्तूबर 2021 के बाद स्थिर हैं। ऐसे में चुनाव के बाद दाम बढ़ सकते हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमत भी पिछले कई माह से स्थिर हैं। केंद्र सरकार ने तीन नवंबर 2021 को उत्पाद शुल्क में पेट्रोल पर पांच और डीजल पर दस रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। इसके बाद कई राज्य सरकारों ने भी अपना टैक्स कम किया था। उस वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम औसतन 82 डॉलर प्रति बैरल थे। रूस और यूक्रेन की लड़ाई में कच्चे तेल 104 डॉलर के पार पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में जल्द कमी के आसार नहीं है। इसका कारण यह है कि अमेरिका के आग्रह के बावजूद सबसे बड़े उत्पादक सऊदी अरब ने अपना उत्पादन नहीं बढ़ाया है। ऐसे में कच्चे तेल के दाम में फिल्हाल कमी की संभावना कम है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी के एक अधिकारी के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से कंपनियां दबाव में हैं। ऐसे में जल्द पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।
एबीएन डेस्क। हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत का बहुत महत्व है; क्योंकि यह भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। लेकिन इसमें सोचने वाली बात ये है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को अभी तक 7000 से ज्यादा लोग फतह कर चुके हैं, जिसकी ऊंचाई 8848 मीटर है। लेकिन कैलाश पर्वत पर आज तक कोई नहीं चढ़ पाया, जबकि इसकी ऊंचाई एवरेस्ट से लगभग 2000 मीटर कम यानी 6638 मीटर है। यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है। कैलाश पर्वत पर कभी किसी के नहीं चढ़ पाने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कैलाश पर्वत पर शिव जी निवास करते हैं और इसीलिए कोई जीवित इंसान वहां ऊपर नहीं पहुंच सकता। मरने के बाद या वह जिसने कभी कोई पाप न किया हो, केवल वही कैलाश फतह कर सकता है। ऐसा भी माना जाता है कि कैलाश पर्वत पर थोड़ा सा ऊपर चढ़ते ही व्यक्ति दिशाहीन हो जाता है। चूंकि बिना दिशा के चढ़ाई करना मतलब मौत को दावत देना है। इसीलिए कोई भी इंसान आज तक कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक पर्वतारोही ने अपनी किताब में लिखा था कि उसने कैलाश पर्वत पर चढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन इस पर्वत पर रहना असंभव था। क्योंकि वहां शरीर के बाल और नाखून तेजी से बढ़ने लगते हैं। इसके अलावा कैलाश पर्वत बहुत ही ज्यादा रेडियोएक्टिव भी है। इसके अलावा कहते हैं कि कैलाश पर्वत का स्लोप (कोण) भी 65 डिग्री से ज्यादा है, जबकि माउंट एवरेस्ट में यह 40-60 तक है, जो इसकी चढ़ाई को और मुश्किल बनाता है। ये भी एक वजह है कि पर्वतारोही एवरेस्ट पर तो चढ़ जाते हैं, लेकिन कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाते। रूस के एक पर्वतारोही, सरगे सिस्टियाकोव ने बताया कि जब मैं कैलाश पर्वत के बिल्कुल पास पहुंच गया तो मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैं उस पर्वत के बिल्कुल सामने था, जिस पर आज तक कोई नहीं चढ़ सका, लेकिन अचानक मुझे बहुत कमजोरी महसूस होने लगी और मन में ये ख्याल आने लगा कि मुझे यहां और नहीं रुकना चाहिए। उसके बाद जैसे-जैसे मैं नीचे आते गया, मेरा मन हल्का होता गया। कैलाश पर्वत पर चढ़ने की आखिरी कोशिश लगभग 18 साल पहले यानी साल 2001 में की गई थी। जब चीन ने स्पेन की एक टीम को कैलाश पर्वत पर चढ़ने की अनुमति दी थी। फिलहाल कैलाश पर्वत की चढ़ाई पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है, क्योंकि भारत और तिब्बत समेत दुनियाभर के लोगों का मानना है कि यह पर्वत एक पवित्र स्थान है, इसलिए इस पर किसी को भी चढ़ाई नहीं करने देना चाहिए। हालांकि कहते हैं कि 92 साल पहले यानी साल 1928 में एक बौद्ध भिक्षु मिलारेपा ही कैलाश पर्वत की तलहटी में जाने और उस पर चढ़ने में सफल रहे थे। वह इस पवित्र और रहस्यमयी पर्वत पर जाकर जिंदा वापस लौटने वाले दुनिया के पहले इंसान थे। इसका उल्लेख पौराणिक साहित्यों में भी मिलता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दो नए अध्ययनों से यह संकेत मिलते हैं कि कोविड-19 का कारक सार्स-सीओवी-2 वायरस की उत्पत्ति वुहान के हुआनान सीफूड मार्केट में जानवरों में हुई और 2019 के अंत में इसका प्रसार इंसानों में हुआ। पहला अध्ययन में यह दिखाने के लिए स्थानिक विश्लेषण का उपयोग किया गया कि दिसंबर 2019 में सबसे शुरू में कोविड-19 के जिन मामलों का उपचार किया गया वे वुहान के बाजार पर केंद्रित थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि वायरस के लिए सकारात्मक परीक्षण करने वाले पर्यावरणीय नमूने जीवित जानवरों को बेचने वाले विक्रेताओं से दृढ़ता से जुड़े थे। अमेरिका स्थित एरिजोना विश्वविद्यालय में एक प्रोफेसर माइकल वोरोबे ने ट्वीट किया, हमने दिसंबर 2019 में लक्षण की शुरुआत के साथ वुहान से अधिकांश ज्ञात कोविड-19 मामलों के लिए अक्षांश और देशांतर निकालने के लिए सार्स-सीओवी-2 की उत्पत्ति पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) मिशन की रिपोर्ट में मानचित्रों का उपयोग किया। दोनों ही शोध पत्रों के लेखक वोरोबे ने कहा, हमने पाया कि दिसंबर में मामले हुआनान बाजार के करीब और अधिक केंद्रित थे, जितना कि उम्मीद की जा सकती थी ... इसका केंद्र बाजार में था। एक दूसरे अध्ययन में पाया गया कि दो प्रमुख वायरल वंशावली कम से कम दो घटनाओं की परिणाम थीं जिनमें वायरस जानवरों से मनुष्यों में आया। शोधकर्ताओं ने कहा कि पहला संचरण सबसे अधिक नवंबर के अंत या दिसंबर 2019 की शुरुआत में हुआ था, और दूसरी वंशावली संभवतः पहली घटना के हफ्तों के अंदर आ गई। उन्होंने कहा कि ये निष्कर्ष उस छोटे दायरे को परिभाषित करते हैं जब सार्स-सीओवी-2 ने पहली बार मनुष्यों को संक्रमित किया और जब कोविड-19 के पहले मामले सामने आए। लेखकों ने दूसरे शोधपत्र में लिखा, 2002 में सार्स-सीओवी-1 और 2003 में सार्स-सीओवी-2 में उभार संभवत: कई "जूनोटिक" (पशुजन्य) घटनाओं के परिणामस्वरूप हुआ। इन शोधपत्रों की हालांकि अभी विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जानी बाकी है। इनमें यह पहचान स्पष्ट नहीं हुई है कि बाजार में किस जानवर से इस संक्रमण का प्रसार इंसानों में हुआ।
टीम एबीएन, दुमका। मंगलवार को महाशिवरात्रि है। इसको लेकर झारखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बासुकीनाथ मंदिर में सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है। शिवरात्रि के दिन मंदिर परिसर में भव्य पूजा का आयोजन किया जाएगा। लेकिन सोमवार से ही झारखंड और आसपास के राज्यों से श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे हैं। परंपरा के अनुसार मंदिर के शिखर पर स्थित पंचशूल को उतारा गया है। इस पंचशूल की विधिवत पूजा अर्चना की जाएगी और शिवरात्रि के दिन पंचशूल को फिर से मंदिर के शीर्ष पर स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही शिव मंदिर और पार्वती मंदिर को गठबंधन के जरिए जोड़ा गया है। इस गठबंधन को भी खोल दिया गया है और शिवरात्रि के दिन पूजा अर्चना कर इस गठबंधन को दोबारा जोड़ा जाएगा। बा की बारात निकलेगी। गौरतलब है कि प्रतिवर्ष हाथी में बाबा की बारात निकलती थी। लेकिन इस साल कोरोना को देखते हुए पालकी में बारात निकाली जाएगी। बासुकीनाथ पंडा धर्मरक्षिणी सभा के महामंत्री संजय झा कहते हैं कि हमलोग काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि परंपरागत और धार्मिक नियमों का पालन करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की शादी होगी। बासुकीनाथ मंदिर के प्रभारी आशुतोष झा ने बताया कि कोरोना गाइडलाइन के अनुसार बारात निकाली जाए गी। इसके साथ ही सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर और आसपास के इलाकों में पुख्ता साफ सफाई की गई है, ताकि आने वाले भक्तों को असुविधा नहीं हो सके।
टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रांची महानगर ने मेट्रो गली रातू रोड गुरुद्वारा में श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश वर्ष मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत गुरुवाणी के साथ हुई।सर्वप्रथम मनीष मीढा ने गुरु तेग बहादुर जी के गौरवशाली इतिहास के विषय में बताया कि हमारे देश के शिक्षण संस्थानों में वास्तविक भारतीय इतिहास को नहीं पढ़ा करके षड्यंत्र के तहत अन्य इतिहास पढ़ाया जा रहा है। जिससे हमारी आनेवाली पीढ़ी वीर शिवाजी और गुरु तेग बहादुर जी जैसे धर्म योद्धाओं के इतिहास से परिचित न हो और उनकी तरह वीर ना बन पाये। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के झारखण्ड प्रांत प्रचारक श्रीमान दिलीप जी ने श्री गुरु के गौरवशाली इतिहास को सबके समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि भारत देश के अन्यत्र विश्व में कहीं भी अपने धर्म के लिए प्राण देने का इतिहास कहीं नहीं मिलता। जिस प्रकार से सिख धर्म के चार साहबजादों ने बचपन में ही अपने धर्म के लिए अपना सर्वस्व बलिदान दिया था, वह अतुलनीय है। उन्होंने गीत के माध्यम से सिख धर्म गुरुओं के द्वारा हिंदू समाज के संरक्षण के लिए किए गए अतुलनीय बलिदान का भी स्मरण कराया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भारत पर मुगलों ने हिंदुओं पर अत्याचार किया, जिसकी रक्षा के लिए सिख धर्म के धर्म गुरु उनके समक्ष हिंदू धर्म की ढाल बनकर के खड़े रहे। उन्होंने बताया कि सिख गुरु के बलिदान के समय की स्थिति आज भी प्रासंगिक जान पड़ती है। आज भी समाज में धर्मांतरण के लिए अनेक शक्तियां लगी हुई है। गुरु तेग बहादुर जी ने समाज के लिए कार्य करने की शिक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि भारत में जन्मे जितने भी पंत- संप्रदाय हैं वह सभी एक ही ईश्वर की प्राप्ति के लिए उपासना करते हैं। उन्होंने दिल्ली के शीश गंज गुरुद्वारा में सभी को जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता भारत की दुर्बलता नहीं बल्कि भारत की शक्ति है। यही भारत का सौंदर्य है। अंत में अतिथियों को सराफा देकर सम्मानित किया गया। "जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल" के जयघोष से पूरा कार्यक्रम स्थल गूंज उठा। मौके पर श्री गुरु सिंह सभा से श्री अर्जन जी, श्री गगनदीप सिंह सेठी, श्री मनीष मिढा एवं संघ के क्षेत्र संघचालक श्री देवब्रत पाहन, श्री राकेश लाल, श्री पवन मंत्री, श्री धनन्जय कु सिंह, हरविंदर सिंह वेदी, गुरविंदर सिंह सेठी, राजेन्द्र मिश्र, शालिनी सचदेव, प्रीति सिंह, जिज्ञासा ओझा, डॉ अनुराधा, डॉ सतीश मिढा, पंकज वत्सल, डॉ उमाशंकर, श्रवण कुमार, नवजोत सिंह अलंग सहित इस पावन अवसर पर सैकड़ों हिन्दू सनातन सिख परिवारों की उपस्थिति रही।
एबीएन सोशल डेस्क। आपने फ्लावर पार्क या फूड पार्क के बारे में जरूर सुना और देखा होगा, लेकिन बात अगर मनरेगा पार्क की करें, तो शायद आप सोचने पर मजबूर हो जायेंगे। एक ऐसा पार्क जहां लोगों के रोजगार का सृजन हो रहा है। एक ऐसा पार्क जहां सरकार की योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं, जो ग्रामीणों के वर्तमान से लेकर भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभाएगी। सरकार की इच्छाशक्ति और ग्रामीणों की मदद से मनरेगा की 10 से ज्यादा योजनाएं आपको इस पार्क में दिख जाएंगी। सिंचाई कूप, डोभा, दीदी बाड़ी, वर्मी कम्पोस्ट, टीसीबी, शेड सहित मनरेगा से संचालित अन्य योजनाएं यहां धरातल पर उतर चुकी हैं। हम बात कर रहे हैं हज़ारीबाग के चुरचू प्रखण्ड स्थित डूमर गांव में में बने मनरेगा पार्क की। यहां मनरेगा की 10 से ज्यादा योजनाएं धरातल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराती दिख रही हैं। मनरेगा पार्क का निर्माण 9 परिवारों को मिला कर 10 एकड़ भूमि पर किया गया है। ग्राम डूमर के ग्रामीणों को यहां महीने में कम से कम 20 दिन रोजगार की गांरटी है। 10 एकड़ में यह पार्क न सिर्फ ग्राम विशेष में स्थायी परिसंपत्ति का सृजन करेगा, बल्कि संबंधित प्रखण्ड में रोजगार मांगने वाले श्रमिकों को रोजगार की गारंटी भी सुनिश्चित करेगा। मनरेगा पार्क योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का मॉडल है। यह ग्राम स्वराज का भी सशक्त मॉडल है। मनरेगा अन्तर्गत विभिन्न परिसंपत्तियों का समेकित निर्माण कर उन्हें एक स्थल पर प्रदर्शित करने के लिए मनरेगा पार्क का निर्माण चुरचू प्रखण्ड के ग्राम डूमर में किया गया है। मनरेगा पार्क में कम से कम 10 प्रकार की परिसम्पत्तियों का एक ही क्षेत्र में प्रत्यक्षण किया जा सकता है। पार्क का निर्माण होने से परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग एवं उचित प्रबंधन किया जा सकेगा। साथ ही सालों भर उस स्थान पर रोजगार का सृजन हो सकेगा एवं लाभुकों को रोजागर से जोड़ा जा सकेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मुगल शहंशाह शाहजहां का तीन दिवसीय उर्स रविवार से ताजमहल में शुरू हो रहा है, जो एक मार्च तक मनाया जाएगा। इन तीन दिनों तक ताजमहल में शाहजहां मुमताज की भूमिगत असली कब्रें पर्यटक देख सकेंगे। वहीं आज से एक मार्च तक निशुल्क प्रवेश भी मिलेगा। आज और कल दोपहर दो बजे के बाद तथा एक मार्च को पूरे दिन पर्यटकों को निशुल्क प्रवेश मिल पाएगा। ताजमहल में अगले तीन दिनों तक शहनाई की मधुर लहरियां सुनाई देंगी। रॉयल गेट पर शाहजहां उर्स के तीनों दिन शहनाई वादन के साथ मुख्य गुंबद पर शाम को कव्वालियां गूंजेंगी। दरअसल, आज से शाहजहां का उर्स शुरू हो रहा है। पहले दिन रविवार को दोपहर दो बजे से मुख्य मकबरे में तहखाने में स्थित शाहजहां व मुमताज की कब्रों पर गुस्ल की रस्म से उर्स शुरू होगा। दूसरे दिन दोपहर दो बजे संदल चढ़ाया जाएगा। तीसरे दिन सुबह से शाम तक चादरपोशी का सिलसिला चलेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने स्मारक के निशुल्क रहने की सूचना जारी कर दी है। 1381 मीटर लंबी हिंदुस्तानी सतरंगी चादर : शाहजहां उर्स पर तीसरे दिन यानी एक मार्च को दोपहर में सर्वधर्म सद्भाव की प्रतीक कपड़े की सतरंगी चादर चढ़ाई जाएगी। खुद्दाम-ए-रोजा कमेटी द्वारा इस बार 1381 मीटर लंबी चादर चढ़ाई जाएगी, पिछले वर्ष उर्स में 1331 मीटर लंबी चादर चढ़ाई गई थी। खुद्दाम-ए-रोजा कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिरुद्दीन ताहिर ने बताया कि उर्स में चादरपोशी के लिए कपड़े की सतरंगी चादर तैयार कराई जा रही है। दक्षिणी गेट स्थित हनुमान मंदिर से यह चादर ताजमहल में ले जायी जाएगी।
टीम एबीएन, रांची। रांची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एसजे तथा सहायक बिशप थियोडोर मसकरेन्हस एसएफएक्स ने शुक्रवार को संयुक्त रुप से ख्रीस्त विश्वासियों तथा धर्मसंघी भाईबहनों के लिए चालीसा धर्म पत्र-2022 जारी कर 02 मार्च को राख बुधवार (ऐेश वेडनेसडे) से शुरु होने वाले चालीसा (लेंट) महाउपवास काल के आध्यात्मिक गतिविधियों और तपस्या उपवास की जानकारी दी है। इस चालीसा घर्मपत्र का थीम पवित्र बाइबल से उद्धृत है:- पश्चाताप कर और सुसमाचार में विश्वास करो (मारकुस 1:15)। बिशपद्वय ने इस चालीसा धर्मपत्र को जारी करते हुए तमाम पुरोहितों को निदेश दिया है कि 02 मार्च से यह धर्मपत्र सभी पवित्र मिस्सा में विश्वासियों को पढ़कर सुनाया जाए और उन्हें चालीसा के प्रति आध्यात्मिक रुप से जागरुक व सक्रिय करें। महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो व बिशप थियोडोर मसकरेन्हस ने जारी चालीसा धर्म पत्र में संयुक्त रुप से पुरोहित भाईयों, धर्मसंघी भाईयों व बहनों तथा समस्त ख्रीस्त विश्वासियों को संबोधित करते हुए कहा है कि दो मार्च से हम सभी पुन: एक और चालीसा का आरंभ कर रहे है। बिशपद्वय ने चालीसा की इस अवधि को आशा तथा ख्रीस्तीय जीवन पर मनन करने का समय बताया। कहा कि सभी ख्रीस्त विश्वासियों के लिए यह समय आध्यात्मिक नवीनीकरण का और व्यक्ति तथा कलीसिया के लिए ईश्वरीय कृपा का है। उन्होने कहा कि सि वर्ष जब धर्मसभा की प्रक्रिया प्रगति में है इस चालीसा काल को एसा समय बनाएं जहां हम एक दूसरे को विम्रतापूर्वक सुन सकें और ईश्वरीय प्रेम में एक साथ चल सकें। प्रार्थना करें कि चालीसे की इस अवधि में कृपा की नदी और बहुतायत से बहे और हम सभी इस नदी में अपने आप को धोकर साफ करे। जारी चालीसा धर्मपत्र में बिशपद्वय ने मसीहियों के ख्रीस्तीय और आध्यात्मिक जीवन के विकास के लिए चालीसा साधनाओं के पालन का सुझाव दिया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि चालीसा ईश्वर के राज्य की घोषणा है। जिसमें ख्रीस्त विश्वासियों को पवित्र बाईबल पढने के लिए आमंत्रण है। जिसमें खासकर रविवारीय पाठों को जरुरत पढें। इसक्रम में बिशपद्वय ने बताया कि हमारा रविवारीय प्रवचन हिंदी में और गाना के रुप में भजन स्तोत्र रांची महाधर्मप्रांतीय यू ट्यूूब चैनल में उपलब्ध है। इस चालीसे काल काल में हम लोग महाधर्माध्यक्ष फेलिक्सटोप्पो के द्वारा प्रत्येक दिन दैनिक पाठ पर आधारित संक्षिप्त मनन चिंतन अपलोड करेंगे। अगर इस चैनल को सब्सक्राइब कर बेल आईकन को क्लीकि करेंगे तो जब भी नयी वीडियो अपलोग की जाएगी तो सब्सक्राइब करने वालों को तुरंत इसका संदेश मिल जाएगा। उक्त धर्मपत्र में यह भी उल्लेख है कि चालीसा उपवास करने का समय है। संत लियो ने लिखा है ख्रीस्तीयों कोजो काम सब समय करना है उसे उन्हें अभी और अधिक उत्साह के साथ करना चाहिए ताकि प्ररितो द्वारा चालीसा उपवास का जो आनंदि लिया गया था वह मात्र भोजन के त्याग से नहीं लेकिन पापों के परित्याग से पूरा हो सके। अपनी बुरी आदतों और घिनौने प्रवृतियों को उखाड़ फेंकने का प्रयास करे। खासकर आलस्य, निंदा, दूसरों के प्रति लंबे समय तक घृणा व क्रोध रखना, पूर्वाग्रह, झूठ बोलना और किसी भी प्रकार का आत्मसंयम रहित भोग बिलास का परित्याग करें। उक्त चालीसा धर्म पत्र से ख्रीस्त विश्वासियों को यह भी कहा गया है कि गत वर्ष की तरह इस साल भी हम यह सोचें कि प्राय: हम किन चीजों के लिे पैसे खर्च करते है। पूरे परिवार को आमंत्रित करते हैं कि वे एक साथ आकर कुछ आराम और सुख सु्विधाओं का त्याग कर बचत करे तथा भूखमरी से लड़ने के लिए आयोजित अभियान लिए उदारतापूर्वक सहयोग करें ताकि जरुरतमंद लोगों की मदद की जा सके। बिशपद्वय ने जारी धर्मपत्र के माध्यम से तमाम मसीही विश्वासियों से अनुरोध करते हुए कहा है कि अब आवाम साधारण जीवन की ओर वापस लौट रहे है। ऐेसे में आप सभी गिरजाघरों व संस्कारों की ओर वापस जाएं। चालीसा काल के साधनाओं विशेषकर दैनिक मिस्सा बलिदान, क्रूस रास्ता, रोजरी माला विनती, बाईबल पाठ और पुण्य सप्ताह की धर्मविधि के द्वारा अपने विश्वास को मजबूत करें। इस पुण्य अवधि में पापस्वीकार संस्कार ग्रहण करे और प्रत्येक पल्ली और धर्मसंघी संस्थाओं से निवेदन है कि वे विश्वासियों के लिए इस प्रकार के अवसर उपलब्ध कराएं। यह भी बताया कि पारंपरिक चालीसा की प्रार्थना, उपवास, दान जैसी साधनाएं मसीहियों के आाध्यात्मिक जीवन और आध्यात्मिक बंधन को मजबूत बनाती है। प्रार्थना को प्रत्त्यक दिन के लिए जीवन रेखा है, जो हमें हमारे सृष्टिकर्ता, मुक्तिदाता और ईश्वर जो हमें प्यार करता है से हमें जोड़े रखता है। उपवास रा मतलब अन्न जल त्याग कर भूखे रहने का नहीं बल्कि चालीसा में हमारी भूख भोजन से बढ़कर ईश्वर के वचन के लिए होनी चाहिए। इसमें दान देना भी हमारी मदद करता है। धर्मग्रंथ में यह भी उल्लेख है कि दान देने की प्रक्रिया हमारे पापों के लिए प्रायश्चित करता है। किसी भी प्रकार का पुण्य काम एक प्रकार कार दान है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse