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Published / 2021-12-23 12:20:02
इसरो के वैज्ञानिक के रूप में बोकारो का लाल चयनित, अग्रवाल कल्याण महासभा ने किया सम्मानित

बेरमो। अन्य बड़े शहरों से अब आप बोकारो जिला को अलग नहीं कर सकते। आज के तारीख में बोकारो स्टील सिटी एजुकेशन हब के रूप में देखा जाता है। हालांकि अब बोकारो जिला में बेहतर शिक्षा का सफल रुझान आना भी शुरू हो गया है। इसी क्रम में देश के सबसे बड़े प्रयोगशाला इसरो में वैज्ञानिक के रूप में बोकारो के सागर अग्रवाल का चयन होने की खुशी में आज पूरा जिला वासी झुमते नजर आ रहे हैं। इस खुशी को अग्रवाल कल्याण महासभा ने अपने अंदाज से मनाया और उक्त मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल अग्रवाल संस्था के अन्य सदस्यों के साथ बोकारो स्थित उनके आवास पर जाकर उन्हें सम्मानित किया। मिली जानकारी के अनुसार बोकारो स्टील सिटी के रहने वाले सागर अग्रवाल पिता निरंजन अग्रवाल के पुत्र का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन करफड में वैज्ञानिक के रुप में चयन हुआ है इसकी सूचना पाकर अखिल भारतीय अग्रवाल कल्याण महासभा की ओर से सागर अग्रवाल को अंगवस्त्र वा बुके देकर सम्मानित किया तथा उनके परिजन को बधाई दी और कहा कि सागर अग्रवाल अपने समाज और गांव की ही नहीं पूरे बोकारो और झारखंड का नाम रोशन किया है। इनके द्वारा किए गए सच्चे लगन का ही यह परिणाम जिस कारण इन्हे यह सफलता मिली है मैं और पूरी संस्था इनके उज्जवल भविष्य की कामना करती है। बताते चलें कि सेक्टर चार स्थित डीएवी से 2013 में साइंस में इंटरमीडिएट करने के बाद सागर अग्रवाल का चयन भुवनेश्वर स्थित सिलिकॉन इंस्ट्रीयुट आॅफ टेक्नोलॉजी में हुआ। जहां उन्होंने 2017 में इलेक्ट्रॉनिक से बीटेक करने के बाद आईएसएम आईआईटी धनबाद में एमटेक की पढ़ाई की। वे कानपुर स्थित पीएसआईटी कॉलेज में बीटेक के छात्र को पढ़ाने में लग गए फिर 2020 जनवरी में इसरो के साइंटिस्ट पद के लिए परीक्षा में भाग लिया कोरोना कॉल के कारण 2021 में साक्षात्कार हुआ। सागर अग्रवाल ने बताया कि मैट्रिक के पढ़ाई के वक्त से ही इसरो जैसे संस्थान में काम करने की इच्छा थी। उसी लक्ष्य को लेकर मैं आगे बढ़ता रहा और आज मुझे सफलता मिली। उन्होंने कहा कि जीवन में असफलता सबसे महत्वपूर्ण चीज है क्योंकि सफलता आपको उतना नहीं सिखाती है यह सिर्फ आप के आकार को बढ़ाता है। इसलिए कभी भी असफलता से घबराए नहीं। मौके पर विनोद गर्ग अग्रवाल, नंदकिशोर अग्रवाल, राजू प्रसाद, अजय अग्रवाल, राजेंद्र गर्ग, प्रवीण अग्रवाल सहित कई लोग मौजूद रहे।

Published / 2021-12-21 12:33:23
मां भद्रकाली : लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता धार्मिक और पर्यटन स्थल

चतरा। जिला अपने प्राकृतिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के लिये प्रदेश ही नही देश के पर्यटन मानचित्र पर एक अलग स्थान रखता है। यह वनांचल अपने सुरम्य वादियों, पर्वत, झरना, नदियों को अपने आप में समेटे हुये है। यहां पर पवित्र धार्मिक नगरी भद्रकाली मंदिर, लमबोईया मंदिर और कौलेश्वरी मंदिर है, वहीं तमासीन और बलबल जैसे दो महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल भी पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करता है। जिला मुख्यालय से तकरीबन पैंतीस किमी दूर इटखोरी में स्थित मां भद्रकाली मंदिर आस्था का केंद्र बिन्दु है। इसके साथ ही यह धर्मस्थल पर्यटन का भी केंद्र बनते जा रहा है। हालांकि यहां सालों भर पूजा-अर्चना के लिए साधकों व श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। लेकिन नव वर्ष के आगमन पर यहां सैलानियों की भीड़ बढ़ने लगती है। भद्रकाली मंदिर के निकट मुहाने नदी बहती है, जो इस जगह को और अधिक आकर्षक बना देता है। मंदिर में प्रवेश करने से पहले एक डुबकी लेने के लिए नदी सबसे अच्छी जगह है। भद्रकाली मंदिर की बहुत मान्यता है। धार्मिक आस्था वाले लोगों के लिए यह तीर्थ भी है। यहां देवी मंदिर के साथ शिवलिंग भी है। वहीं जिले के पर्यटन स्थल भी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। यहां के पर्यटन स्थल घने जंगलों से ढंकी है और यहां कल-कल बहते पानी की आवाज सुनना बहुत ही सुकूनदायक लगता है। यहां कल कल करते झरने बरबस ही लोगो का मन मोह लेते है तमासीन अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। प्रति वर्ष हजारों सैलानी यहाँ आते है और पिकनिक का लुफ्त उठाते है। यहां का झरना प्रसिद्ध है यही लोग अपने आप को इसमें भीगने से रोक नहीं पाते। कौलेश्वरी मंदिर प्रकृति की गोद में बसा है यहाँ आकर आप पर्वत चढ़ने का भी मजा ले सकते है।

Published / 2021-12-17 14:01:00
कल्याण गुरुकुल रामगढ़ के 24 छात्राओं को मिला प्लेसमेंट

एबीएन डेस्क, रांची। कल्याण गुरुकुल रामगढ़ में प्रशिक्षण ले रही झारखंड की 24 छात्राओं को क्वालिटी टेक्सटाइल्स प्रक्षेत्र में प्लेसमेंट मिला है। कल्याण गुरुकुल में आयोजित एक विशेष आयोजन में छात्राओं के बीच नियुक्ति पत्र का वितरण किया गया, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप विकास आयुक्त, रामगढ़ नागेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि कल्याण गुरुकुल से अब तक जितने रोजगार मिले है उनमें अच्छा मानदेय, बेहतर सुविधा और सुरक्षित काम करने का माहौल व्याप्त रहता है, जिÞला कल्याण पदाधिकारी रामगढ़ श्री रामेश्वर चौधरी ने उपस्थित सभी श्रोताओं से कल्याण विभाग की कल्याण गुरुकुल जैसे कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने का अवहान किया। बताते चलें कि झारखंड की दूर दराज की बेटियों को उनके गरीबी चक्र से बाहर निकाल कर, आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर जीवन शैली एवं सुरक्षित रोजगार देने के लिए झारखंड सरकार के मार्गदर्शन में कल्याण गुरुकुल एक नया आयाम लिख रहा है। 2014 में तत्कालीन और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा शुरू किये गये कल्याण गुरुकुल से अब तक 15 हजार से अधिक युवक युवतियों को रोजगार मिल चुका है, 150 से अधिक युवतियों को कल्याण गुरुकुल रामगढ़, पतरातु से रोजगार मिल चुका है। इसी क्रम में कल्याण गुरुकुल के संबंध में प्रचार प्रसार जोरों पर है। ताकि ज्यादा से ज्यादा युवक युवतियां कल्याण गुरुकुल से जुड़ कर अपनी जिÞंदगी बेहतर कर सकें, इसके लिए विभाग के द्वारा हेल्प्लायन नंबर जारी किया गया है। युवा अब 6204800180 पर कॉल कर के गुरुकुल, प्रशिक्षण एवं रोजगार के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जानकारी हिंदी के साथ साथ झारखंड के अन्य भाषाओं में उपलब्ध है।

Published / 2021-12-13 15:16:02
सात साल में मंदिरों पर ही रहा पीएम मोदी का फोकस, मुस्लिम देशों में भी रखी मंदिरों की नींव

एबीएन डेस्क। काशी विश्वनाथ मंदिर में पिछले दो साल से जारी पुनर्निर्माण कार्यों का पहला फेज पूरा हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वाराणसी पहुंचकर प्रोजेक्ट का लोकार्पण भी कर दिया। मोदी ने यहां पहले गंगा नदी पर चलने वाले क्रूज से ललिता घाट तक का सफर किया और फिर गंगा में डुबकी भी लगाई। इसके बाद उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। पूरे मंदिर कॉरिडोर की बात की जाए तो पुनर्निर्माण कार्यक्रम को 700 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बताया गया है। मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र में इस महत्वाकांक्षी योजना की नींव मार्च 2019 में रखी थी। अब दो साल बाद पीएम ने पहले फेज में 339 करोड़ रुपये के खर्च से हुए पुनर्निर्माण कार्यक्रमों का लोकार्पण कर दिया है। हालांकि, किसी मंदिर के पुनर्निर्माण की यह कोई पहली योजना नहीं है, जिसकी शुरूआत या लोकार्पण पीएम मोदी के कार्यकाल में हुआ है। इससे पहले करीब सात अलग-अलग प्रोजेक्ट्स को मोदी ने अपने सात साल के कार्यकाल में शुरू कराया है। इनमें सबसे ऊपर नाम आता है अयोध्या स्थित राम मंदिर के पुनर्निर्माण कार्यक्रम का, जिसकी नींव मोदी ने ही अगस्त 2020 में हिंदू रीति-रिवाजों से पूजा करने के बाद रखी थी। इसके अलावा आधा दर्जन और योजनाओं की नींव भी पीएम अपने कार्यकाल में कर चुके हैं। ऐसे में अमर उजाला आपको बता रहा है कि बीते सात सालों में मोदी ने मंदिर के पुनर्उद्धार कार्यक्रम के लिए कितनी कीमत की योजनाओं की शुरूआत की है। 1. राम मंदिर पुनर्निर्माण योजना : राम मंदिर के पुनर्निर्माण पर बीते कई सालों से चल रहे विवाद का अंत 2019 में हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मंदिर की जमीन को हिंदू पक्ष के हवाले करने का फैसला किया। इसके बाद केंद्र की मोदी सरकार ने राम मंदिर के पुनर्निर्माण की कोशिशें तेज कर दीं। इसके लिए मोदी सरकार की तरफ से फंड का भी एलान किया गया और अगस्त 2020 में मोदी ने हिंदू रीति-रिवाजों से पूजा कर इसकी नींव रख दी। माना जा रहा है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण 2023 तक पूरा हो जाएगा। राम मंदिर ट्रस्ट ने कुछ समय पहले ही एलान किया था कि चंदे से जुटाई गई रकम अब तक 1100 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है और इसका इस्तेमाल मंदिर के निर्माण के साथ अयोध्या में अन्य धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण के लिए भी किया जाएगा। 2. सोमनाथ मंदिर कॉम्प्लेक्स : मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान सोमनाथ मंदिर के परिसर के सौंदर्यीकरण के कई प्रोजेक्ट्स शुरू करवाए थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने इन्हीं कार्यों को आगे बढ़ाते हुए मोदी ने इस साल अगस्त में एक बार फिर सोमनाथ मंदिर में 80 करोड़ की कीमत के तीन अहम प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया था। पहला प्रोजेक्ट पार्वती माता के मंदिर का शिलान्यास था। इसके अलावा मोदी ने सोमनाथ मंदिर में बने दर्शन पथ को भी देश को भेंट किया था, जिसे 47 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर की तरह ही इस दर्शन पथ से भक्त समुद्र के साथ-साथ मंदिर के भी दर्शन कर सकते थे। पीएम ने इसके अलावा एक एग्जीबिशन सेंटर और पुनर्निर्मित महारानी अहिल्याबाई मंदिर के परिसर का भी लोकार्पण किया था। सोमनाथ ट्रस्ट ने यह परिसर करीब 3 करोड़ रुपये में तैयार करवाया था। बताया जाता है कि पर्यटन मंत्रालय ने सोमनाथ मंदिर को पर्यटकों के लिए विकसित करने की भी योजना बनाई है। अगर यह योजना मंजूर होती है तो सोमनाथ मंदिर में 111 करोड़ रुपये की नई योजनाओं की शुरूआत होगी, जो मंदिर का नक्शा ही पूरी तरह बदल देगी। सोमनाथ मंदिर के मास्टर प्लान के तहत इसे टूरिस्ट स्पॉट बनाने के लिए 282 करोड़ रुपये के खर्च अनुमानित है, जिसमें अधिकतर खर्च केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों की ओर से किया जाएगा। 3. केदारनाथ मंदिर : उत्तराखंड में 2013 में आई भयानक प्राकृतिक आपदा से केदारनाथ मंदिर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। मोदी ने 2014 में पीएम बनने के बाद से ही इस मंदिर के पुनर्उद्धार की योजना तैयार करवानी शुरू कर दी थी। पीएम ने पिछले महीने ही रुद्रप्रयाग पहुंचकर करीब 130 करोड़ रुपये के खर्च से निर्मित मंदिर का लोकार्पण किया था। इसके अलावा मोदी ने रुद्रप्रयाग और आसपास के इलाके के लिए 180 करोड़ रुपये के कई प्रोजेक्ट्स का भी उद्घाटन किया था। इनमें संगम घाट के पुनर्निर्माण से लेकर टूरिस्ट सेंटर और प्रशासनिक दफ्तर और अस्पताल के निर्माण तक शामिल थे। मोदी ने पर्यटन के लिए लिहाज से अगली सदी को उत्तराखंड की सदी भी करार दिया था। 4. चार धाम परियोजना : प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में चार धाम परियोजना की शुरूआत की थी। इस योजना के तहत सरकार ने चारों धाम को जोड़ने के लिए एक सर्किट बनाने का एलान भी किया था। इसके तहत सरकार ने 889 किलोमीटर लंबे हाईवे के चौड़ीकरण का लक्ष्य रखा था और इस सर्किट पर आॅल-वेदर यानी हर मौसम में मजबूत रहने वाली सड़क के निर्माण कराया तय किया था। इसके जरिए भक्तों को हर मौसम में हिमालय के ऊपरी हिस्से पर मौजूद बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन करने का मौका मिलेगा। पीएम ने दिसंबर 2016 में प्रोजेक्ट की नींव रखी थी, तब इसकी अनुमानित लागत करीब 12 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी। 5. कश्मीर में मंदिरों का पुनर्निर्माण : जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 रद्द हो जाने के बाद सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश में अब मंदिरों के पुनर्निर्माण कार्यों को शुरू कराया है। इनमें श्रीनगर में कुछ धार्मिक स्थलों का दोबारा निर्माण कराया जाना शामिल है। हाल ही में श्रीनगर में रघुनाथ मंदिर को पुनर्निर्मित कराया गया और अब खराब स्थिति में मौजूद अलग-अलग मंदिरों को चिह्नित कर के उनके पुनर्निर्माण की योजना तैयार की जा रही है। खुद गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी कह चुके हैं कि कश्मीर में करीब 50 हजार मंदिर बंद हो चुके हैं, जिनके पुनर्निर्माण का कार्य किया जाना है और सरकार ने इसके लिए एक कमेटी का गठन भी कर दिया है। जिन मंदिरों का पुनर्निर्माम होना है, उनमें अनंतनाग का मार्तंड मंदिर, पाटन का शंकरगौरीश्वर मंदिर, अवंतिपोरा के अवंतिस्वामी और अवंतिस्वरा मंदिर और श्रीनगर के पांद्रेथन मंदिर शामिल हैं। 6. विदेश में मंदिर निर्माण कार्य : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी मंदिर निर्माण कार्यों की शुरूआत कराई है। इसी कड़ी में पीएम मोदी ने 2018 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबुधाबी में पहले हिंदू मंदिर का शिलान्यास किया था। यूएई सरकार ने 2015 में पीएम मोदी के दौरे के वक्त मंदिर के लिए जमीन आवंटित की थी। इसके बाद 2019 में पीएम मोदी ने बहरीन में स्थित 200 साल पुराने भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर के रेनोवेशन का कार्यक्रम शुरू कराने का एलान किया था। श्रीनाथ जी का यह मंदिर तीन मंजिला होगा और इसमें हिंदू रीति-रिवाजों से शादियों का आयोजन भी किया जाएगा।

Published / 2021-12-13 10:33:43
16 दिसम्बर से बंद हो जाएगी शहनाई की आवाज, एक महीने वर्जित रहेंगे सभी शुभ और मांगलिक कार्य

कोडरमा। सनातन संस्कृति और हिन्दू परंपरा में मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। हमारे सनातन धर्म में प्रत्येक कार्य के लिए एक अभीष्ट मुहूर्त निर्धारित है। वहीं कुछ अवधि ऐसी भी होती है जब शुभ कार्य के मुहूर्त का निषेध होता है। उक्त बातें मां तारा ज्योतिष संस्थान के आचार्य अनिल मिश्रा ने कही। उन्होंने कहा कि इस बार सूर्य 16 दिसंबर से धनु राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस दिन से ही खरमास आरंभ हो जाएगा, जो 15 जनवरी 2022 तक रहेगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान सभी प्रकार के शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, सगाई, गृहारंभ व गृह प्रवेश के साथ व्रतारंभ एवं उद्यापन आदि वर्जित रहते हैं। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही मकर संक्रांति भी कहा जाता है, खरमास का समापन होगा। इस दिन के बाद पुनः मांगलिक कार्य आरंभ हो जायेंगे। आचार्य अनिल मिश्रा ने कहा कि जब सूर्य गोचरवश धनु और मीन में प्रवेश करते हैं, तो इसे क्रमश: धनु संक्रांति व मीन संक्रांति कहा जाता है। सूर्य के धनु राशि व मीन राशि में स्थित होने की अवधि को ही खरमास कहा जाता है। यह महीना दान-पुण्य के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। इस समय में किए गए दान-पुण्य का अधिक फल प्राप्त होता है। इस मास में गरीबों को अन्नदान, भोजनदान, वस्त्र दान आदि करना चाहिए। इससे अशुभ ग्रहों की पीड़ा दूर होती है। यह मास भगवान विष्णु एवं शिव की उपासना, जप-तप आदि के लिए भी उत्तम होता है। इस माह में ईष्ट का ध्यान, पूजन, मंत्र जप सर्वसिद्धिदायक होता है।

Published / 2021-12-11 14:27:36
जया किशोरी के कार्यक्रम को लेकर हुई तैयारी बैठक

लोहरदगा। आज स्थानीय ललित नारायण स्टेडियम लोहरदगा में देश की प्रसिद्ध भजन गायिका जया किशोरी जी के कार्यक्रम दिनांक 15 दिसंबर, 16 दिसंबर और 17 दिसंबर 2021 को किया जाना है, जिसके निमित्त बैठक का आयोजन माननीय राज्य सभा सांसद धीरज प्रसाद साहू के प्रतिनिधि अशोक यादव की अध्यक्षता मे किया गया ज्ञातव्य हों की कार्यक्रम साहू परिवार और लोहरदगा जिला क्रिकेट एसोसिएशन के तत्वाधान में भव्य रूप से किया जाना है! बैठक की सुरुवात सांसद प्रतिनिधि अशोक यादव ने कार्यक्रम की विस्तृत रुपरेखा और बैठक बुलाने के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। तदुपरांत अन्य उपस्थित सदस्यों द्वारा अपना अपना विचार और सुझाव देकर कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु जानकारी प्रदान किया गया। उपस्थित सदस्यों द्वारा अनेको अच्छे सुझाव और विचार दिए गए जिसे क्रियान्वयन करने हेतु एक कमिटी का निर्माण करने का निर्णय लिया गया तथा ! कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और भव्य ढंग से करने का निर्णय लिया गया लोहरदगा की परम्परा के अनुसार सभी के सहयोग से ही यह कार्य- कर्म संचालित किया जाना हैँ और सबकी सहभागिता के साथ कार्यक्रम को सफल बनाना हैँ ये लोहरदगा की सम्मान और प्रतिष्ठा की भी बात हैँ की ऐसा कार्यक्रम आदरणीय धीरज प्रसाद साहू जी द्वारा करा कर राष्ट्रीय स्तर पर लोहरदगा का गौरव भजन गायन के रूप मे भी कराने का सौभाग्य प्रदान किये हैँ जिनके लिए लोहरदगा की आम जनता की ओर से साधुवाद दिया गया ! बैठक मे मुख्यरूप से चंद्रशेखर अग्रवाल (सांसद प्रतिनिधि ), निशीथ जायसवाल (विधायक प्रतिनिधि ), राजेंद्र प्रसाद खत्री, ओह्म प्रकाश सिंह,सूखैर भगत, देवाशीष कार, डॉ. शशि गुप्ता, अजय कुमार मित्तल, भाष्कर दास गुप्ता, रामवृक्ष साहू, किनेश्वर महतो, अजय पंकज, संदीप गुप्ता, लालमोहन केसरी, कमल किशोर केसरी, शिव प्रसाद राजगढ़िया, राम प्रकाश मोदी, सुबोध रॉय, मोहन दुबे, ब्रजकिशोर प्रसाद, राहुल कुमार, अरुण राम, संजय बर्मन, प्रभात भगत, रामु कुमार साहू, अभय वर्मा, अरुण वर्मा, सरोज प्रजापति, राजकुमार वर्मा, संदीप मिश्रा, दीपक कुमार महतो, दुर्गा प्रजापति, राकेश रॉय, मलय दत्ता, विशाल महेन्द्रू, दिनेश पांडेय, देसराज गोयल, प्रदीप विश्वकर्मा, सरोज प्रजापति, सत्यदेव भगत, प्रमोद गुप्ता, मनोज प्रसाद (वरीय अधिवक्ता), मनोज गुप्ता, दिनेश प्रसाद, रितेश कुमार टुन्ना, मनोरंजन वर्मा, प्रतिक प्रकाश मोनी आदि प्रबुद्ध व्यक्ति बैठक मे उपस्थित रहे। साथ ही महावीर मण्डल के सभी पदाधिकारी, दुर्गा पूजा कमिटी के सभी पदाधिकारी, रामचरित्र मानस संस्था के सभी पदाधिकारी, गायत्री परिवार के सभी पदाधिकारी के अलावा अन्य सभी सामाजिक संघठन के पदाधिकारी गणों से सहयोग करने का आग्रह किया गया एवं विशेष रूप से बरवाटोली के सभी गण्यमान्य लोगों का सहयोग लेकर एक कमिटी बना कर कार्यक्रम की भव्यता प्रदान करने का भी निर्णय सर्वसहमति से लिया गया। सांसद प्रतिनिधि अशोक यादव एवं विधायक प्रतिनिधि निशीथ जायसवाल द्वारा उपस्तिथ सभी सदस्यों को निमंत्रण कार्ड 5-5 वितरण कर सुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम का संचालन क्रिकेट असोसिएशन के उपाध्यक्ष किशोर कुमार वर्मा द्वारा किया गया एवं धन्यवाद निशीथ जायसवाल (विधायक प्रतिनिधि) द्वारा किया गया।

Published / 2021-12-04 14:21:27
मस्तिष्क के सुशुप्त केंद्रों को जागृत करता है योग : योगाचार्य स्वामी मुक्तरथ

रांची। उच्च न्यायालय परिसर में आचार्य मुक्तरथ जी के सानिध्य में चल रहे दस दिवसीय योग स्वास्थ्य प्रबंधन शिविर का आज समापन। हुआ। शिविर में 200 से भी ज्यादा संख्या में हाई कोर्ट के अधिकारी, रजिस्ट्रार, असिस्टेंट एवं कर्मचारियों ने योग से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। माननीय चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन एवं माननीय जस्टिस अपरेश कुमार सिंह के निर्णय से आयोजित यह कैंप बहुत लोगों के लिये स्वास्थ्य वर्धक सिद्ध हुआ। आचार्य मुक्तरथ ने बताया कि आज आफिस जाने के लिये न तो साईकल है और न लोगों के पास समय है। ऐसी परिस्थिति में खुद को स्वस्थ रखने के लिये यौगिक साइकिल की जरूरत है। व्यक्ति को हर दिन नब्बे मिनट यानि डेढ़ घण्टा अपने स्वास्थ्य के लिए निकलना होगा तभी आप बढ़ते हृदय रोग को, मधुमेह को,डिप्रेशन और एंजाइटी को अनिद्रा और हाइपरटेंशन को रोक सकते हैं तथा दूर हटा सकते हैं। उन्होंने कहा योग के सरल अभ्यास पवनमुक्तासन पार्ट-1 और नाड़ीशोधन तथा भ्रामरी प्राणायाम से बड़ी-बड़ी बिमारियों से मुक्ति पाया जा सकता है। शलभासन और भुजंगासन से पूरे मेरूदंड को स्वस्थ रखा जा सकता है। पवनमुक्तासन भाग-2 और सूर्यनमस्कार के अभ्यासों से मधुमेह और पूरे पाचन प्रणाली को दुरुस्त रखा जा सकता है। योगनिद्रा एंजाइटी और स्ट्रेस से व्यक्ति को मुक्त रखता है और ये सभी योग साधनायें बहुत सरल हैं। ऐसे सरल योग के अभ्यासों को कोई भी व्यक्ति कर सकता है। योग का शक्तिशाली पक्ष है दिमाग के सुषुप्त केन्द्रों की जागृति जिसमें मनुष्य की असीमित प्रतिभा छिपी हुई है। जब योग की क्रियाओं को श्वांस के साथ पूरी तन्मयता के साथ एकाग्रचित होकर किया जाता है तो उससे दिमाग खुलने लगते हैं, दिमाग में स्थिरता आती है और फिर अंदर के सुषुप्त केंद्र जागृत होने लगता है। इससे कुशल स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है,रोग नष्ट होते हैं और बुद्धि प्रकाशित होती है। लगातार ऐसा होने से व्यवहार और सोच-विचार उच्च होने लगता है और फिर मनुष्य अपने आप को सच्चा मनुष्य के रूप में देख पाता है। दस दिनों के अभ्यास से सभी लोगों को काफी लाभ मिला है और भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने योगाभ्यास को लगातार कराने की इच्छा व्यक्त की है।

Published / 2021-12-01 16:58:00
4 दिसंबर को लगेगा इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण

एबीएन डेस्क, रांची। इस साल का अंतिम खंड ग्रास सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर को मार्गशीर्ष मास शनिवार अमावस्या को भारतीय समयानुसार 10 बजकर 59 मिनट पर लगेगा, जो दोपहर 3 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। इस सम्बंध में पंडित सन्तोष कुमार पाण्डेय (सोनू) ने बताया कि सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और न ही इसका सूतक लगेगा। आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, प्रशांत, एटलांटिक, नामिबिया, अंटाकर्टिका व हिंद महासागर सहित अन्य देशों के लोग इसे देख सकेंगे। उन्होंने बताया कि अगला खंड ग्रास सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल 2022 को लगेगा, लेकिन यह ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा।

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