टीम एबीएन, रांची। को आईपीएच नामकुम में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग आयुष निदेशालय, राज्य योग केंद्र, रांची के तत्वावधान में किशोरों के लिए योग विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का उद्घाटन डॉ फजलुश समी, (निदेशक आयुष) ने किया। मौके पर डॉ नुजहत सुलताना-उपनिदेशक युनानी, डॉ मुकुल कुमार दीक्षित- प्र. पदा. राज्य योग केन्द्र रांची, डॉ सच्चिदानन्द सिंह- जिला आयुष चि. पदा. रांची, डॉ अमरेन्द्र कुमार पाठक- आर्यु. चि. पदा. नामकुम, राहुल कुमार नोडल पदा., डॉ विवेक माहेश्वरी एसो. प्रोफेसर लाकुलिस योग वि. वि. अहमदाबाद, डॉ कामता प्रसाद साहु- असि. प्रोफेसर देव संस्कृति वि.वि. हरिद्वार, डॉ अर्चना कुमारी योग प्रशिक्षिका राज्य योग केन्द्र रांची एवं अवनीश कुमार योग प्रशिक्षक रांची उपस्थित थे। सेमिनार के मुख्य वक्ता डॉ विवेक माहेश्वरी एसो. प्रोफेसर लाकुलिस योग वि. वि. अहमदाबाद, डॉ कामता प्रसाद साहु- असि. प्रोफेसर देव संस्कृति वि.वि. हरिद्वार थे। डॉ कामता प्रसाद साहु ने अपने वक्तव्य में कहा कि भावनात्मक विक्षोभ का निवारण भावों की परिपक्वता से ही संभव है तथा वैचारिक विकृति ही तनाव का मुख्य कारण है जिसे सदविचारों द्वारा दुर किया जा सकता है। सेमिनार के दूसरे सत्र में अहमदाबाद के डॉ विवेक माहेश्वरी ने किशोरावस्था में होने वाली समस्याओं के निराकरण के लिए तीन सूत्र दिये- 1. जागृत अवस्था में आंखें बंद करने का अभ्यास। 2. श्वांस पर सजगता एवं शरीर की स्थिरता का अभ्यास। 3. अवचेतन मन का प्रशिक्षण। सेमिनार के अंतिम सत्र में अमीत एवं ग्रुप, हेमा एवं ग्रुप, विकास एवं ग्रुप द्वारा योग के विभिन्न आसनों का संगीतमय प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, बोकारो सहित विभिन्न जिलों से प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन श्री राहुल कुमार नोडल पदा. ने धन्यवाद ज्ञापित कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन अवनीश कुमार ने किया।
टीम एबीएन, रांची। केन्द्रीय हिंदी निदेशालय नई दिल्ली और राजेंद्र विश्वविद्यालय, बलांगीर (उडीसा) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 8. दिवसीय नव लेखक शिविर में आज अष्टम दिवस (22.2.22) दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि के रूप मे बोलते हुए महिला कालेज संबलपुर के पूर्व हिंदी प्रो डॉ जे के शर्मा ने कहा कि इस शिविर के आयोजन से हिन्दी नव लेखकों को प्रेरणा मिली है। साहित्य संस्कार करता है और राजनीति को दिशा-निर्देश भी प्रदान करता है। उन्होंने पं. नेहरू और दिनकर के उस प्रसंग का उल्लेख जब राष्ट्र कवि दिनकर ने पं. नेहरू को संसद की सीढ़ियों से उतरते वक्त गिरने से बचा लिया था। पं. नेहरू ने कहा दिनकर जी यदि आप नहीं होते, तो आज मैं गिर गया होता।दिनकर ने कहा कि पंडित जी राजनीति जहां गिरने लगती है, साहित्य उसको संभाल लेता है।रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ जे बी पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी जन-मन की गंगा है। हिन्दी भारत मां की बिंदी है।यह हमारी अस्मिता का प्रतीक है।इस शिविर से नव-लेखक प्रेरित हुए हैं और उन्हें दिशा दृष्टि मिली है यही इस शिविर की सफलता है। डॉ सीमा असीम सक्सेना ने नव लेखन की कठिनाइयों की ओर प्रतिभागियों का ध्यान आकृष्ट किया। अध्यक्षता करते हुए डा दीप्ति मंजरी मेहर ने कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा है और हमें अपनी हिंदी पर गर्व है। इस आयोजन के लिए उन्होंने केन्द्रीय हिंदी निदेशालय का आभार व्यक्त किया। डॉ सुजाता दास और आर के महापात्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किये। बीच में डॉ जे बी पाण्डेय निर्देशित ह और म की मुठभेड़ शीर्षक प्रहसन का प्रतिभागियों ने मंचन किया। जिसमें लाल मोहन महतो म की भूमिका में उमाशंकर महतो और गुरुजी की भूमिका में अशोक कुमार प्रमाणिक ने शानदार प्रस्तुति दी और अभिनय किया, जिसकी प्रशंसा सबो ने मुक्त कंठ से की।यह प्रहसन राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित था। समापन समारोह में प्रशिणार्थियों ने अपने अनुभव बताए और इस शिविर की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। जिनमें अशोक कुमार प्रमाणिक, दयानंद राय, राम कुमार प्रसाद, लाल मोहन महतो, उमा शंकर महतो, अंगद प्रमाणिक, प्रियंका कुमारी, आरती कुमारी, स्वरूपा सिंह, क्षेत्र मणि बिभार डॉ नूतन सत्पथी, अभिषेक कुमार सिंह,भलटी खमारी, डॉ शिखा रानी त्रिपाठी, कुन्दन अग्रवाल, स्वरूप सिंह आदि प्रमुख हैं। डॉ शैलेश बिडालिया ने इस शिविर के स्वरूप और आवश्यकता पर प्रकाश डाला और नवांकुरों को लेखन के लिए प्रोत्साहित किया।सरस्वती वंदना सुश्री स्वरूपा सिंह ने भजन अशोक कुमार प्रमाणिक ने संचालन और आगत अतिथियों का स्वागत संयोजक डॉ संजय कुमार सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन श्री विनोद शर्मा जी ने किया। राष्ट्र गान से शिविर का समापन 4 बजे हुआ।
टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में स्वामी श्रद्धानंद जी की जयंती के अवसर पर सामूहिक हवन किया गया, जिसमें विद्यालय परिवार ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मौके पर स्वामी श्रद्धानंद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्राचार्य श्री संजय कुमार मिश्रा सह सभी शिक्षक और शिक्षिकाओं ने स्वामीजी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।महा हवन के उपरांत प्राचार्य ने स्वामी श्रद्धानंद को एक सच्चा साधक,देश भक्त और समाज सुधारक बताया। उन्होंने कहा कि किस प्रकार सत्संग, स्वाध्याय और सेवा से जिंदगी बदल जाती है, इसे हम मुंशीराम के जीवन से सीख सकते हैं, जो महर्षि दयानंद के प्रभाव में आकर स्वामी श्रद्धानंद बन गए। उन्होंने समाज की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। तत्कालीन समाज में जो अंध विश्वास, ढोंग और पाखंड फैला था, ऊंच-नीच, छुआछूत की भावना फैली थी, स्वामीजी ने उसका पूर जोर विरोध किया। उन्होंने लोगों को अपनी संस्कृति, अपने धर्म से प्रेम करना सिखाया। अछूतोद्धार, विधवा विवाह, नारी शिक्षा आदि का प्रचार किया। उनके द्वारा स्थापित गुरुकुल कांगड़ी आज भी शिक्षा की क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है। हम सबको उनसे प्रेरणा लेना और उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। शांति पाठ के साथ सभा समाप्त हुई।
टीम एबीएन, कोडरमा। झुमरी तिलैया के रांची-पटना रोड स्थित सोनी कॉम्पलेक्स बिग बाजार के नजदीक में रविवार को पंकज सोनी क्लॉथ सेंटर का उदघाटन जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने किया। मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो राखी भदानी उपस्थित थी। मौके पर जिप प्रधान शालिनी गुप्ता ने कहा कि एक छत के नीचे सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे ग्राहको को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस दुकान के खुलने से स्थानीय लोगों को काफी लाभ मिलेगा। वहीं दुकान के प्रोपराइटर पंकज सोनी ओर मो आसिफ ने कहा कि ग्राहकों को बेहतर सुविधा के साथ खरीदारी पर विशेष छूट दी जायेगी। मौके पर पंकज सोनी क्लाथ सेंटर के प्रोपराइटर पंकज सोनी, मो आशिक, काजू सोनी, वार्ड पार्षद मो मुस्लिम, मो नसीम, मनोज शर्मा, विनोद शर्मा, मो सलीम, मो अमजद, राजेश चंद्रवंशी, मो चांद, विशाल भदानी, मन्नु वर्णवाल समेत कई दुकानदार, राजेश वंद्रवंशी उपस्थित थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक में हिजाब विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। हिजाब वाली छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश नहीं देने और घर वापस भेजने को पर एक जूनियर कॉलेज प्रिंसिपल को जान से मारने की धमकी दी गई है। मदिकेरी जिला पुलिस ने इस मामले में प्रिंसिपल विजय की शिकायत पर मोहम्मद तौसीफ नामक युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी है। उधर, पुलिस और प्रशासन ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और प्रशासनिक समझाइश के बावजूद धरना-प्रदर्शन करने माहौल खराब करने वालों पर भी सख्ती शुरू कर दी है। जहां, तुमकुर में गुरुवार को प्रदर्शन में शामिल 15 छात्राओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, शिवमोग्गा जिले में एक प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज की 58 छात्राओं को विरोध-प्रदर्शन करने के कारण निलंबित कर दिया गया है। कर्नाटक पुलिस ने हिजाब को लेकर पारित अंतरिम आदेश और सीआरपीसी की धारा-144 के तहत जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में शनिवार को कम से कम 10 लड़कियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 143, 145, 188 और 149 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। छात्राओं ने तुमकुर में गर्ल्स एम्प्रेस गवर्नमेंट पीयू कॉलेज के बाहर गुरुवार, 17 फरवरी को प्रदर्शन किया था। इन छात्राओं पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। दक्षिण कन्नड़ जिले में स्कूल कॉलेजों के आसपास प्रतिबंध 26 तक बढ़ा : हालात को देखते हुए दक्षिण कन्नड़ जिला प्रशासन ने स्कूल व कॉलेजों के आस पास लगाए गए प्रतिबंध को 26 फरवरी तक बढ़ा दिया है। उपायुक्त केवी राजेंद्र ने कहा, हिजाब विवाद के तनाव को देखते हुए शनिवार शाम 6 बजे से 26 फरवरी शाम 6 बजे तक स्कूल कॉलेज के 200 मीटर के दायरे में प्रतिबंध लागू रहेंगे। बाहरी लोग विवाद भड़का रहे: बोम्मई : मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई ने कहा, यह सारा विवाद बाहरी लोग भड़का रहे हैं। प्रधानाचार्य, छात्राओं और उनके अभिभावकों द्वारा इस मुद्दे का समाधान निकाल सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि माहौल शांत रखा जाए। मगर कुछ लोग ऐसा होने नहीं दे रहे। छात्राओं ने रोक के बावजूद किया था प्रदर्शन : हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय में सुनवाई अभी लंबित है और अंतरिम आदेश के अनुसार, कक्षाओं में छात्र-छात्राओं के हिजाब, बुर्का और भगवा गमछे आदि पहनने पर रोक लगी है। इसके बावजूद कई छात्राएं लगातार हिजाब पहनने पर अड़ी हुई हैं। गुरुवार को भी जब छात्राओं को हाईकोर्ट के आदेशानुसार हिजाब नहीं उतारने पर कक्षाओं में प्रवेश नहीं दिया गया तो छात्राएं प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज के बाहर ही धरने पर बैठ गई और रोक के बावजूद प्रदर्शन व नारेबाजी शुरू कर दी थी। हाईकोर्ट में दलील- हिजाब इस्लाम में अनिवार्य नहीं : वहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि हिजाब इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा यानी अनिवार्य नहीं है और इसके उपयोग को रोकना भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25, जो कि धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, का उल्लंघन नहीं करता है। वहीं, मुस्लिम लड़कियों की ओर से पेश वकील विनोद कुलकर्णी ने याचिका में कहा है कि हिजाब पर प्रतिबंध पवित्र कुरान पर प्रतिबंध लगाने जैसा है।
एबीएन डेस्क। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मार्च 2022 के लिए बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट जारी कर दी है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप फरवरी के लिए छोड़े गए कामों के लिए ब्रांच जाने से पहले बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट जरूर देख लें। इस लिस्ट के मुताबिक मार्च 2022 में कुल 13 दिन बैंक बंद रहेंगे। मार्च में बैंकों की कुल 13 दिन की छुट्टियों में 4 छुट्टी रविवार के हैं। इनमें कई छुट्टियां लगातार भी पड़ने वाली है। बता दें कि पूरे देश में 13 दिन बैंक बंद नहीं रहेंगे। आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई अवकाश की सूची के मुताबिक, ये छुट्टियां अलग-अलग राज्यों में हैं। ये सभी छुट्टियां सभी राज्यो में लागू नहीं होंगी। वहीं, आरबीआई की गाइडलाइंस के मुताबिक रविवार के अलावा महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं। आइए जानते हैं कि फरवरी 2022 में किन राज्यों में कब-कब बैंक बंद रहेंगे? लिहाजा, अगले महीने छुट्टी की लिस्ट के आधार पर आप अपने बैंक से जुड़े कामकाज निपटा लें, जिससे आप बेवजह की दिक्कत से बच सकें। 1 मार्च (महाशिवरात्रि)- अगरतला, आइजोल, चेन्नई, गंगटोक, गुवाहाटी, इंफाल, कोलकाता, नई दिल्ली, पणजी, पटना और शिलांग को छोड़ अन्य स्थानों में बैंक बंद, 3 मार्च (लोसार)- गंगटोक में बैंक बंद, 4 मार्च (चपचार कुट)- आइजोल में बैंक बंद, 6 मार्च (रविवार)- साप्ताहिक अवकाश, 12 मार्च (शनिवार)- महीने का दूसरा शनिवार, 13 मार्च (रविवार)- साप्ताहिक अवकाश, 17 मार्च (होलिका दहन)- देहरादून, कानपुर, लखनऊ और रांची में बैंक बंद, 18 मार्च (होली/धुलेटी/डोल जात्रा)- बेंगलुरु, भुबनेश्वर, चेन्नई, इंफाल, कोच्चि, कोलकाता और तिरुवनंतपुरम को छोड़ अन्य स्थानों में बैंक बंद , 19 मार्च (होली/याओसांग का दूसरा दिन)- भुबनेश्वर, इंफाल और पटना में बैंक बंद, 20 मार्च (रविवार)- साप्ताहिक अवकाश, 22 मार्च (बिहार दिवस)- पटना में बैंक बंद, 26 मार्च (शनिवार)- महीने का चौथा शनिवार, 27 मार्च (रविवार)- साप्ताहिक अवकाश।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने अल्पसंख्यक समुदाय से रूढ़िवादी सोच से ऊपर उठने और प्रगतिशील विचारों को अपनाने की अपील करते हुए शनिवार को कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने से ज्यादा प्रगति के लिए शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण है। संगठन ने कहा कि भारत में मुसलमानों में निरक्षरता की दर सबसे अधिक 43 प्रतिशत है और समुदाय में बेरोजगारी की दर भी बहुत अधिक है। मुसलमान सोचें उनकी साक्षरता दर सबसे कम क्यों : एमआरएम के राष्ट्रीय संयोजक एवं प्रवक्ता शाहिद सईद ने कहा, मुसलमानों को सोचना चाहिए कि उनकी साक्षरता दर सबसे कम क्यों है। भारत के मुसलमानों को एक प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्हें यह समझना होगा कि उन्हें किताब की जरूरत है, न कि हिजाब की। उन्हें रूढ़िवादी सोच से ऊपर उठकर शिक्षा और प्रगति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में कुल मुस्लिम आबादी का केवल 2.75 प्रतिशत स्नातक या इस स्तर की शिक्षा से ऊपर है। इनमें महिलाओं का प्रतिशत मात्र 36.65 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों में स्कूल छोड़ने की दर सबसे अधिक है और ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर लड़कों की तुलना में अधिक है। सदियों पुरानी इस प्रथा के दर्द से मुक्त करवाया : उन्होंने कहा, हमें सोचना चाहिए कि हमारे पास स्नातकों का इतना कम प्रतिशत क्यों है जबकि देश में मुसलमानों की आबादी कम से कम 20 करोड़ है। उन्होंने कहा कि चाहे सरकारी क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र, रोजगार में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। सईद ने कहा, और यह अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के खिलाफ किसी पूर्वाग्रह के कारण नहीं है। जब किसी समुदाय में स्नातकों का इतना कम प्रतिशत और स्कूल छोड़ने की दर अधिक होती है, तो यह स्पष्ट है कि इसके सदस्य पीछे रह जाएंगे। एमआरएम संयोजक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन के दौरान "तीन तलाक" को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को इस सदियों पुरानी प्रथा के दर्द से मुक्त कर दिया है। रूढ़िवाद और कट्टरता के बंधन में रहें : उन्होंने कहा, यह मुस्लिम महिलाओं के स्वाभिमान और गरिमा का कानून है। आज उनकी स्थिति में बहुत बदलाव आया है। कानून लागू होने के बाद से बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं को राहत मिली है। लोग अपने परिवार को सम्मान के साथ जीने का अधिकार दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम लड़कियां, युवा और महिलाएं आज प्रगतिशील हैं लेकिन कट्टरपंथी और तथाकथित धार्मिक नेता चाहते हैं कि वे रूढ़िवाद और कट्टरता के बंधन में रहें।
एबीएन डेस्क (प्रकाश नारायण)। एक पत्रकार, पत्रकार होता है...। उसे केवल इंसान समझने की गलती तो बिल्कुल ही नहीं करनी चाहिए। उक्त बातें फ्रेंडस ऑफ झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश नारायण ने कही। वे झारखंड के पत्रकारों के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पत्रकार की शक्ल इंसान की जरूर होती है, मगर वो इंसान तो कम से कम नहीं होता...। ब्रेकिंग न्यूज के दौरान वो सुपर कमांडो ध्रुव की तेजी से खबर आप तक पहुंचाता है। खबर की जड़ तक शर्लाक होम्स बनकर जाता है। आपके खाने-पीने में कहां कितना जहर है, ये बताते वक्त वो फिजीशियन बन जाता है और मिसाइल लॉन्च की खबर लिखते हुए छोटा-मोटा वैज्ञानिक भी वही पत्रकार बनता है। राजनीति की हर रवायत को बारीकी से समझता है और आपको समझाता है। बिल्कुल प्राइमरी विद्यालय के मास्टर सिपाहीलाल की तरह...। आधी रात को जब आप स्वप्नलोक में विचरण कर रहे होते हैं, तो वो रातभर में देश दुनिया के घटनाक्रम को आप तक पहुंचाने के प्रयत्न में जार-जार हो रहा होता है। जब पूरी दुनिया काम पर निकलती है तो वो शोर-शराबे के बीच 1 घंटे सोने की जद्दोजहद में होता है। वो मंत्री, सांसद, विधायक, लेखपाल, तहसीलदार, थानेदार, हवलदार तक से गाली खाता है। उसकी पूरी कौम को कोई असामाजिक तत्व भी बिका हुआ और दलाल बड़ी आसानी से कह जाता है। दबंग उसका घर फूंक देते हैं। कई बार उसे ही फूंक डालते हैं और वो अपने मर चुके साथी की खबर भी उसी की बोर्ड पर टाइप करता है। जिस की-बोर्ड पर वो कटरीना और रणबीर की प्रेम कहानी लिखता है। पत्रकार लड़का-लड़की, महिला-पुरुष, नहीं होता वो केवल पत्रकार होता है। रंगहीन. गंधहीन.. संवेदनशील...। होली, दिवाली, ईद, बकरीद, ज्यादातर त्योहार वो न्यूजरूम या अपनी कलम के साथ टेबल पर खबर लिखते ही मनाता है। परिवार के बीच होने वाले 10 उत्सवों में से 8 में वो अक्सर नहीं पहुंच पाता। नाते रिश्तेदार उसके लिए दूरसंचार की दुनिया में सीमित होते हैं। एक बार घर से निकलते वक्त मां-बाप को सामने या फोन पर प्रणाम करता है और नौकरी खत्म करने के बाद यही औपचारिकता दोबारा करता है। दुनिया भर की तकलीफें आपतक पहुंचाता है। मगर अपना कष्ट कभी नहीं कहता। इन सबके बीच वो खुश रहता है। जानते हैं क्यों? क्योंकि पत्रकार, पत्रकार होता है। उसे केवल इंसान समझने की गलती तो बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। वो ईश्वरीय प्रेरणा से कार्य कर रहा समाज का हितैषी केवल और केवल पत्रकार होता है। सभी पत्रकार बन्धुओं को उनके इस सम्मानित, प्रतिष्ठित सेवा कार्य के लिये बहुत बहुत साधुवाद...
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