एबीएन सेंट्रल डेस्क। आस्था और भक्ति किसी धर्म की चौहद्दी की बंदिनी नहीं हो सकती। एक धर्म जब दूसरे धर्म को आत्मा से अपनाता है, तो किसी भी धर्म की हानि नहीं होती। वास्तव में इसी प्रकार की आस्था और भक्ति को महानता का प्रतिबिंब कहा जाता है और इसके उदाहरण हैं इश्तियाक अहमद खान। उन्होंने विराट रामायण मंदिर बनने के लिए ढाई करोड़ की 23 कट्ठा जमीन देकर इसी महानता का परिचय दिया है। इश्तियाक जमींदार परिवार से आते हैं। मुस्लिम परिवार से आते हुए भी उन्होंने पूरी आस्था के साथ जमीन दान में दी है। इश्तियाक गुवाहाटी में व्यवसायी हैं। इश्तियाक और उनके परिजनों ने बीते बुधवार को पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया निबंधन कार्यालय में 23 कट्ठा जमीन को विराट रामायण मंदिर के नाम निबंधित करा दिया। सरकारी मुआवजा के हिसाब से जमीन का मूल्य ढाई करोड़ से अधिक आंका गया है। 125 एकड़ जमीन पर बनेगा भव्य मंदिर : इश्तियाक अहमद खान ने 21 मार्च को पटना के महावीर मंदिर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। बताया कि हमने देखा कि विराट रामायण मंदिर का कार्य जमीन की वजह से रुक रहा है, तो हमने कमिटमेंट किया कि हम जमीन फ्री ऑफ कॉस्ट देंगे और हमने दिया। महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि इसके पहले भी इश्तियाक अहमद खान के परिजनों ने विराट रामायण मंदिर लिए जमीन लेने में बहुत सहयोग किया है। महावीर मंदिर की इस अति महत्वपूर्ण परियोजना के लिए कैथवलिया में जमीन देने की शुरुआत भी खान परिवार ने ही की। विराट रामायण मंदिर के लिए अब तक एक सौ एकड़ जमीन मिल चुकी है। 25 एकड़ जमीन और मिलनी है। कुल 125 एकड़ जमीन पर संसार का सबसे ऊंचा और विशालतम मंदिरों में एक विराट रामायण मंदिर का निर्माण होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मोदी ने उन 29 पुरावशेषों का निरीक्षण किया, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया से भारत वापस लाया गया है। थीम के मुताबिक, पुरावशेष 6 व्यापक श्रेणियों में हैं – शिव और उनके शिष्य, शक्ति की पूजा, भगवान विष्णु और उनके रूप, जैन परंपरा, चित्र और सजावटी वस्तुएं। पीएमओ ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि ये मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार की सामग्री – बलुआ पत्थर, संगमरमर, कांस्य, पीतल, कागज में निष्पादित मूर्तियां और पेंटिंग हैं। भारत में एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए प्राचीन वस्तुएं राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल से हैं। बता दें कि ये पुरावशेष अलग-अलग समय अवधि से आते हैं, जो 9-10 शताब्दी ईस्वी पूर्व के हैं भारत-ऑस्ट्रेलिया वर्चुअल शिखर सम्मेलन आज : बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष स्कॉट मॉरिसन आज यानी सोमवार को एक डिजिटल शिखर बैठक करेंगे, जिसमें व्यापार एवं निवेश के क्षेत्रों सहित दोनों पक्षों के बीच संपूर्ण व्यापक रणनीतिक संबंधों को और आगे बढ़ाने की उम्मीद है। मोदी और मॉरिसन के बीच जून 2020 में हुई पहली डिजिटल शिखर बैठक के बाद सोमवार को बैठक होने वाली है। उस वक्त भारत-आस्ट्रेलिया संबंध को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाया गया था। राजनयिक सूत्रों ने बताया कि मॉरिसन भारत के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये की एक निवेश योजना की घोषणा करेंगे। इसमें स्वच्छ प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग के लिए 183 करोड़ रुपये तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में संबंध बढ़ाने के लिए 136 करोड़ रुपये शामिल हैं। बैठक में दोनों पक्षों के दुर्लभ खनिज के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक विशेष घोषणा करने की उम्मीद है। ऑस्ट्रेलिया वैश्विक लिथियिम उत्पादन का 55 प्रतिशत उत्पादित करता है और उसके पास विश्व के लिथियम भंडार का करीब 20 प्रतिशत है। 1500 करोड़ रुपये का निवेश द्विपक्षीय संबंध में किया गया सबसे बड़ा निवेश होगा : सूत्रों ने बताया कि 152 करोड़ रुपये का कुल पैकेज अलग से नए केंद्र स्थापित करने के लिए रखा जाएगा जो द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेंगे, 97 करोड़ रुपये अलग से कौशल विकास के लिए और 136 करोड़ रुपये अंतरिक्ष में सहयोग बढ़ाने के लिए होगा। उन्होंने बताया कि 1500 करोड़ रुपये का निवेश ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंध में किया गया सबसे बड़ा निवेश होगा। सूत्रों ने बताया कि सम्मेलन में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच युवा रक्षा अधिकारियों के आदान-प्रदान के कार्यक्रम की घोषणा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का नाम भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल विपिन रावत के नाम पर होने की संभावना है, जिनकी मौत पिछले साल दिसंबर में हेलीकॉप्ट दुर्घटना में हो गई थी।
एबीएन सोशल डेस्क। सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने और नदियों में रसायन का प्रवेश रोकने के लिए गंगा नदी की गाद (कीचड़) को शोधित करके उसे खाद के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक अशोक कुमार बताया कि फास्फोरस और पोषक तत्वों से भरपूर शोधित जल फसल की वृद्धि के लिए अच्छा होता है। पिछले दो हफ्तों में गंगा नदी के गाद से निपटने के तरीकों पर कई दौर की चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि शोधित गाद का उत्पादन कर किसानों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। हमने पाया कि शोधित गाद खाद के समान हो सकती है। इसलिए अगर हम गाद का शोधन करें तो यह अच्छा उर्वरक हो सकता है और जैविक खेती में मदद करेगा। उन्होंने कहा, हम शोधित गाद का उत्पादन करने के लिए कंपनियों के साथ बातचीत कर रहे हैं जिसे उर्वरक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है और किसानों को रियायती दर पर दिया जा सकता है। इसके पीछे हमारा उद्देश्य यह है कि किसान प्राकृतिक उर्वरकों का उपयोग करेंगे और गाद के ढेर की समस्या का समाधान किया जा सकेगा। अधिकारी ने कहा कि यह रसायनों को नदियों में प्रवेश करने और प्रदूषण फैलाने से भी रोकेगा। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों में फास्फेट और नाइट्रेट होते हैं जो जल प्रदूषण का मुख्य कारण हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पर्याप्त बारिश होने के बावजूद यहां पर किसानों के लिए सिंचाई एक बड़ी समस्या है। यही कारण है की झारखंड में आज भी कई इलाके ऐसे हैं जहां पर किसान साल भर एक ही फसल उगा पाते हैं। खास कर लातेहार जिले के महुआडाड़ इलाके में किसान आज भी किसान साल में एक ही बार सिर्फ बरसात के मौसम में खेती करते हैं। इसके अलावा यहां की भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि पानी तालाब या कुआं में सालों भर नहीं टिक पाता है। ऐसे इलाकों में सोलर पंप किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इसके अलावा किसानों के पास सिंचाई के लिए बिजली का नहीं होना भी एक बड़ी समस्या है। जेएसएलपीएस द्वारा संचालित जोहार परियोजना के जरिए झारखंड में कृषि को बढ़ावा देने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसके तहत किसान खास कर महिला किसानों का क्षमता निर्धारण किया जा रहा है। साथ ही उन्हें विभिन्न प्रकार की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इनमें सोलर पंप योजना भी शामिल है। इसके तहत महिलाओं के समूह को एक मोबाइल सोलर पंप दिया जाता है, जिसमें सोलर पैनल और दो पहिया रिक्शे में फिक्स किया रहता है। साथ ही इसके साथ एक मोटर पंप भी रहता है जिससे कुएं या नदीं के पानी से सिंचाई की जा सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि किसानों को सिंचाई करने के लिए बिजली का इंतजार नहीं करना पड़ता है। बिजली का नहीं करना पड़ता है इंतजार : जोहार द्वारा दिए दिए गए इस सोलर पंप से महिला किसानों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ। महिला किसानों का कहना है कि पहले उन्हें सिंचाई के लिए बिजली का इंतजार करना पड़ता था। जिस समय बिजली रहती थी, ना चाहते हुए भी धूप, गर्मी और ठंड में उसी समय सिंचाई करना पड़ता था। हमेशा रात में सिंचाई करना पड़ता था। ठंड के मौसम में रात में खेत में सिंचाई करना बेहद की कष्टदायी काम होता था। इसके अलावा गर्मियों के दिनों में दोपहर में बिजली रहने पर सिंचाई करना काफी मुश्किल होता था। अब अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं सिंचाई : चान्हो प्रखंड के गणेशपुर गांव की रहने वाली महिला किसान बताती हैं कि सोलर पंप मिलने से उन्हें काफी लाभ हुआ है। अब अपने सुविधानुसार वो सिंचाई कर सकती है। उन्होंने बताया की रात में सिंचाई करने पर जंगली क्षेत्र होने के कारण हाथियों का डर रात भर बना रहता था। इसके अलावा गांव में रात में सिंचाई कर रहे किसान की सांप काटन से मौत हो गई थी। साथ ही एक किसान जो बिजली से खेतो की सिंचाई करने के लिए नदीं की ओर गया था, करंट लगने से उसकी मौत हो गई थी, क्योंकि रात में एक टॉर्च के सहारे सब कुछ देखना संभव नहीं होता है। इसलिए सोलर पंप उनके लिए काफी लाभदायी है।
एबीएन डेस्क। हम सब जानते हैं कि होली रंगों का त्योहार है। रंग के बिना होली फीकी हो जाएगी। इसके लिए तो आपको रंग खरीदना ही पड़ेगा। लेकिन रंग भी अज़ीब है, अगर खरीदो तो नकली मिलता है और चुराओ तो असली। अब यह भी क्या बात हुई, भला रंग भी चुराया जा सकता है? हां, वह गीत सुना है न आपने, रंग भरे मौसम से रंग चुरा के.... तो अगर दुकान से रंग लेना हो तो खरीदना होगा, मगर प्रकृति से लेना हो तो चुराना होगा। पुड़ियों में खरीदे गए रंग होली के दूसरे दिन तक भी ठीक से बने नहीं रहते मगर प्रकृति से चुराए रंग आजीवन रहते हैं। जानते हैं क्यों? क्योंकि पुड़ियों के रंग तन रंगते हैं और प्रकृति के रंग मन। हम सबने हमेशा होली को मस्ती और बेफ़िक्री के अवसर के तौर पर लिया और कुछ गलत भी नहीं है। मस्ती और बेफ़िक्री जीवन में जरूरी है। लेकिन मस्ती और बेफ़िक्री को लापरवाही तक पहुंचने नहीं देना चाहिए। और हमने यही किया है। इसलिए आज होली के मायने कहीं खो गए हैं। आइये न, इस होली कुछ नया करते हैं। उगते और डूबते सूरज से रंग चुराकर हम सब एक दूसरे के मन को रंगें। हमने मस्ती और बेफ़िक्री में सूरज के इस रंग को भुला दिया है। हमारी इसी भूल का परिणाम है कि HOLI का H और I कहीं खो गया है। हमें उसे वापस अपने जीवन में लाना है। आप समझ रहे हैं न? तो आइये सूरज से उसका यह रंग चुराकर सबको रंगें। खासकर बच्चों के मन को जरूर रंग दें क्योंकि इस रंग की सबसे ज्यादा जरूरत उन्हीं को है। अगर आज सुबह चूक गए हैं तो शाम को सूरज से ले लीजिए। अगर शाम को भी याद न रहे तो कल सुबह अवसर मिलेगा। आप रोज भूलेंगे तो भी सूरज आपको रोज मौका देगा क्योंकि सूरज हमारे लिए "भगवा होली" रोज मनाता है। होली की शुभकामनाएं...(मनोहर रुद्र पांडेय के फेसबुक वाल से साभार)
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वसंत के मौसम की शुरुआत को चिह्नित करते हुए होली रंगों का त्योहार है जो खुशी और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होली के खास अवसर पर भारतीय क्रिकेटरों सहित विदेशी खिलाड़ियों ने लोगों को शुभकामनाएं दी हैं। इनमें भारत के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली, पूर्व बल्लेबाज और वर्तमान राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण, इंग्लैंड की क्रिकेटर डेनिएल व्याट शामिल है। विराट ने अपने ट्विटर पर लिखा, इस त्योहार की भावना हमारे जीवन को खुशियों और शांति से भर दे। सभी को होली की शुभकामनाएं। भारत के पूर्व बल्लेबाज और वर्तमान राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने सभी के लिए प्यार और समृद्धि की कामना की। रोहित शर्मा ने भी लोगों को होली की शुभकामनाएं दी है। मुंबई इंडियंस ने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें वह काफी रीटेक के बाद लोगों को होली की शुभकामनाएं देते हैं। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी रितिका सजदेह भी होती है।
टीम एबीएन, रांची। बाहुबली सीरीज के बाद यह पहली ऐसी फिल्म है, जिसको लेकर भारतीय समाज इतना उत्साहित है। अधिक स्क्रीन देने का दबाव या फ्री टिकट उपलब्ध कराने जैसी खबरें यह साबित करती कि इस फिल्म को लेकर समाज किस तरह उत्साहित है। ऐसा कहा जा सकता है कि बाहुबली से भारतीय सिनेमा में बदलाव की जो यात्रा शुरू हुई, वह अब एक नए पड़ाव पर पहुंच गई है। भारतीय यथार्थ को बेझिझक होकर कहने का आत्मविश्वास भारतीय सिनेमा ने द कश्मीर फाइल्स" के साथ हासिल कर लिया है। इसे लेकर राजधानी रांची न्यूक्लियस मॉल के PVR में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास इस फिल्म को देखने पहुंचे।उनके साथ भाजपा विधायक अमर बावरी, भानु प्रताप शाही, ढुल्लू महतो साथ ही अन्य भाजपा कार्यकर्ता भी शामिल रहे हैं। वहीं रघुवर दास ने दा कश्मीर फाइल्स फिल्म को लेकर कहा कि जो पहली बार 1990 के दशक में कश्मीरी विद्रोह के दौरान कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार की कहानी है। विवेक अग्निहोत्री जी ने जो छिपा हुआ इतिहास था उसे इस फ़िल्म के माध्यम से दर्शाने का काम किया है।
एबीएन सोशल डेस्क। होली के त्योहार का एक खास महत्व है। होली का यह पावन पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा के अगले दिन पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। रंग खेलने से ठीक पहले फाल्गुन पूर्णिमा की रात में होलिका दहन किया जाता है। ऐसे में 2022 में होलिका दहन 17 मार्च को होगा जबकि रंग वाली होली 18 मार्च, शुक्रवार को मनाई जाएगी। वैसे भी भारत की होली पूरी दुनिया में मशहूर है। ब्रज की होली तो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। होली को राधा-कृष्ण का त्योहार कहा जाता है। फुलेरा दूज से होली की शुरुआत हो चुकी है। मथुरा-वृंदावन की होली देखने के लिए तो दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं। यहां इस दौरान होली के कई रूप देखने को मिलते हैं। होली के दिन रंगों में सराबोर होने के साथ यदि आप अपनी सुख समृद्धि के लिए कुछ विशेष उपाय करेंगे तो आपके घर धन की बरसात होगी। होली पर करें ये खास उपाय • घर के मुख्यद्वार पर होली के दिन लाल, हरे, गुलाबी और पीले रंग से रंगोली सजाएं। इससे परिवार में खुशियों का आगमन होगा। • होली के दिन गणेश जी की पूजा का विधान है। इस दिन भगवान गणेश को ठंडाई का भोग लगाएं और इसके बाद उसे प्रसाद के रूप में सबको बांट दें। ऐसा करने से भाग्योदय होता है और किस्मत साथ देने लगती है। • होली को राधा कृष्ण का पर्व माना जाता है। इसलिए होली के दिन राधा-कृष्ण की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा करें और उन्हें गुलाबी रंग का गुलाल अर्पित करें। ऐसा करने से आपका दंपती जीवन खुशनुमा बना रहेगा। • यदि आपके घर में कोई झण्डा लगा है तो होली के दिन उस झंडे को जरूर बदलें, ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आएगी और मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। • यदि आप चाहते हैं घर में धन की कमी न हो और आर्थिक रूप से उन्नति की चाह हो तो घर या दफ्तर की पूर्व दिशा में उगते हुए सूरज की तस्वीर लगाएं। इससे आपको लाभ की प्राप्ति होगी। इस उपाय से धन के साथ प्रतिष्ठा भी प्राप्त होगी।
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