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Published / 2022-03-31 06:01:14
महंगाई का मार्च : पेट्रोल-डीजल के दामों में आज फिर बढ़ोतरी

एबीएन डेस्क। सरकारी तेल कंपनियों ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल के दाम जारी कर दिए हैं। कंपनियों ने एक बार फिर से महंगाई का डोज दिया है। बीते दिनों की तरह आज भी तेल के दाम बढ़े हैं। आज 84 पैसे प्रति लीटर तक दाम बढ़ाए गए हैं। बता दें, पिछले दस दिनों में नौवीं बार पेट्रोल-डीजल के रेट्स बढ़े हैं। तेल कंपनी IOCL के ताजा रेट्स के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल-डीजल पर 80 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद, राजधानी में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 93.07 रुपये प्रति लीटर और डीजल 93.07 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। वहीं, मुंबई में पेट्रोल-डीजल के रेट्स में 84 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। यहां पर पेट्रोल 116.72 रुपये में पहुंच गया है, जबकि डीजल 100.94 रुपये का हो गया है। इसके अलावा, चेन्नई में आज एक लीटर पेट्रोल पर 76 पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बाद पेट्रोल 107.45 रुपये प्रति लीटर की कीमत में बिक रहा है। वहीं, डीजल 97.52 रुपये में बिक रहा। कोलकाता की बात करें तो यहां पेट्रोल पर 83 पैसे और डीजल पर 80 पैसे की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद पेट्रोल के दाम बढ़कर 111.35 रुपये और डीजल के रेट्स बढ़कर 96.22 रुपये हो गए हैं।

Published / 2022-03-30 15:21:37
तुम्हारा जीवन में आना कि जैसे मधुऋतु का छाना...

एबीएन डेस्क (डॉ सुषमा सिंह, आगरा)। आज आजादी के अमृतम होत्सव के उपलक्ष्य में प्रो जे बी पांडेय ,रांची के लक्ष्मी नगर आवास पर काव्य संध्या का आयोजन हुआ। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता कर रही हिंदी की परम विदुषी और राजा बलवंत राजपूत कॉलेज आगरा की पूर्व प्राचार्या डॉ. सुषमा सिंह ने काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अपना मधु-ऋतु पर यह मनोहर गीत गाकर समां बांध दिया- तुम्हारा जीवन में आना कि जैसे मधुऋतु का छाना। सार्थक लगता अपना होना, परिपूर्ण हुआ मन का कोना, फूलों का महक लुटाना खुशियों का रंग जमाना। कार्यक्रम का श्रीगणेश अशोक कुमार प्रमाणिक की सरस्वती वंदना - या कुन्देन्दु....... से हुआ ।प्रमाणिक जी ने एक अन्य प्रेम गीत सुनाकर कविता का आगाज किया- हम मन ही मन तुम्हें अब चाहने लगे हैं। जब से तुम्हारी सूरत निहारने लगे है।। विनोद सिंह गहरवार ने अपनी हास्य व्यंग्य रचना सुनाकर खूब वाहवाही लूटी- करते थे टोका टोकी आज टोके गए, खेलने से जीरो पर ही आज रोके गए। सभाओं में जो कहते थे खूब ठोको ताली, जनता के हाथों खुद आज ठोके गए।। डॉ सुनीता गुप्ता ने पंचपरगनिया में एक स्वागत गीत सुनाया। मुख्य अतिथि के रूप में चंडीगढ़ से आई सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ मीरा गौतम ने प्रेम कविता सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया- शब्दों के पंख लगा, मैं उड़ के चली आई वहां। तुम साधना रत हो जहां, फिर मैं तुमसे दूर कहाँ? अपने गीतों में अपना पता हूं, असंभव में संभव की कथा हूं। न देखी होगी रेगिस्तान में कमलों की खेती, उसी मरीचिका का मैं जल खास हूँ। अस्वस्थता के कारण डॉ.योगेंद्र नाथ शर्मा अरुण, डॉ.महेश चंद्रा मेरठ, डॉ ऋषभ देव शर्मा हैदराबाद नहीं आ सके। प्रो.जग बंधु महतो, मनु ओझा ,यश कुमार ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए। आगत अतिथियों का स्वागत डॉ जे बी पांडेय ने, संचालन तारामणि पांडेय ने और धन्यवाद ज्ञापन शुभम् कुमार ने किया ।आगत अतिथियों का स्वागत शॉल, स्मृति चिन्ह एवं पुस्तक देकर किया गया।कवि गोष्ठी का समापन राष्ट्रगान से हुआ।

Published / 2022-03-30 13:46:28
पंडितों की कहानी देख रो पड़े पंडित-पुरोहित

टीम एबीएन, रांची। बुधवार को फन सिनेमा में पंडित, पुजारी, पाहन, बैदा, महंत और संत समेत करीब 240 से अधिक लोगों ने द कश्मीर फाइल्स फिल्म देखी। लोगों में ललक ऐसी थी कि कई लोग सीट नहीं मिलने पर सीढ़ी पर बैठकर ही शांतिपूर्वक फिल्म देख। फिल्म दिखाने वाले प्रायोजक अजय कुमार सिंह थे। तपोवन मंदिर परिसर में सैकड़ों लोग उपस्थित हुए, जहां पूर्व मंत्री सीपी सिंह, महानगर संचालक पवन मंत्री, कार्यवाह विजय जी, संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर, प्रचारक विजय घोष, प्रचार प्रमुख संजय आजाद, गंगोत्री कुजूर, दिनेश उरांव, मुनचुन राय, मंजुलता दुबे, बबीता वर्मा, मंजू गडयान, सिल्पा डालमिया, सरना धर्म गुरू दिनेश टोप्पो, पत्रकार मनोज मिश्र, मिथिलेश्वर मिश्र, कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, अभिषेक चौबे, प्रवीण मिश्र समेत भारी संख्या में लोग उपस्थित थे। प्रायोजक अजय सिंह ने कहा यह फिल्म हर सनातनी को देखना चाहिए। समाज के परिवर्तन का पुरोधा वर्ग (पंडित-पाहन) फिल्म नहीं देख पाते थे, जिन्हें फिल्म दिखानी चाहिए। कार्यक्रम संचालक स्वामी दिव्यज्ञान जी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम का आयोजन हर शहर में आयोजित हो। पंडित रामदेव पाण्डेय ने कहा कि जिस कश्मीर से जीसस क्राइस ने ज्ञान लिया, उस शंकराचार्य-बुद्ध की धरती पर इतनी बर्बरता धर्मांधता कैसे आई यह अनुसंधान का विषय है। भारत सेवा संघ आचार्य प्रांत प्रमुख भुतेसानन्द जी, आचार्य कृष्ण कांत शास्त्री, पंडित संतोष पाठक सहित धर्माचार्य उपस्थित होकर फिल्म देखे। फिल्म देखने के लिए छतरपुर, गढ़वा, टांगीनाथ धाम आदि जगहों से लोग आए थे। बताते चलें कि देश में ऐसा पहली बार हुआ कि मंदिर के पुजारी, महंत, संत, पाहन, पुजारी, बैगा आदि एक साथ फिल्म देखे हैं। यह जानकारी पंडित रामदेव पाण्डेय ने दी।

Published / 2022-03-30 06:01:51
अप्रैल से जुलाई तक देशभर में 40 लाख शादियां, केवल दिल्ली में 3 लाख बारातों में बजेगा बैंड-बाजा!

एबीएन डेस्क। अप्रैल से शुरू होने जा रहे शादियों के सीजन में इस बार धूम धड़ाका देखने को मिलेगा। कोरोना काल में प्रतिबंधों के चलते सुस्त रहे शादियों के सीजन की भरपाई इस साल होने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि अप्रैल से जून तक देशभर में बंपर शादियों का अनुमान है। कहा जा रहा है कि 14 अप्रैल से शुरू होने जा रहे शादियों के सीजन में अगले तीन महीने तक देशभर में लगभग 40 लाख शादियां होंगी। अनुमान के अनुसार, अकेले दिल्ली अप्रैल से जुलाई तक देशभर में होंगी 40 लाख शादियां, अकेले दिल्ली में 3 लाख बारातों में बजेगा बैंड-बाजा) में ही करीब 3 लाख शादियां होंगी। बंपर शादियों के चलते दिल्ली सहित देश के बाजार पूरी तरह तैयार है और 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार होने की संभावनाएं है। दरअसल, इस वर्ष होली के त्योहारी सीजन में लगभग 30 प्रतिशत व्यापार वृद्धि से हुए जोरदार व्यापार से उत्साहित होकर दिल्ली सहित देशभर के व्यापारी अब शादी के सीजन की बिक्री की तैयारियों में जुट गए हैं। 14 अप्रैल से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलने वाले इस शादी के सीजन में देशभर में लगभग 40 लाख शादियों होने का अनुमान है और इस सीजन में लगभग 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार होगा। व्यापारी नेता और कंफेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि अकेले दिल्ली में ही इस सीजन में लगभग 3 लाख से ज्यादा शादियों होने का अनुमान है, जिससे दिल्ली में ही लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के व्यापार की संभावना है। खंडेलवाल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोरोना के पूरे प्रतिबंध हटने के बाद अब यह पहला मौका है, जब दिल्ली सहित देश भर के व्यापारी कोरोना से हुए व्यापार के नुकसान की कुछ भरपाई होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बीते दो वर्षों में कोविड एवं शादियों के बेहद कम मुहूर्त के दिन होने तथा सरकार द्वारा लगाए अनेक प्रतिबंधों के चलते शादियां बहुत ही छोटे स्केल पर व कम संख्या में हुई थी। अब लंबे अर्से के बाद शादियों के सीजन में मुहूर्त के अनुसार 43 दिन का इस बार शादियों का मुहूर्त आया है। कैट की आध्यात्मिक एवं वैदिक ज्ञान कमेटी के चेयरमैन तथा आचार्य दुर्गेश तारे ने बताया कि सनातन धर्म में पुराणों के अनुसार, तारों की गणना के हिसाब से अप्रैल महीने में 14 ,15 ,16 , 17 , 19, 20 , 21, 22 , 23, 24 एवं 27 जबकि मई महीने में 2 , 3, 9, 10, 11, 12, 15, 17, 19, 20, 21, 26, 27 एवं 31 तथा जून महीने में 1, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 13, 17, 23, 24 एवं जुलाई में 4, 6, 7, 8 एवं 9 है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अलावा आर्य समाज, सिख समाज, पंजाबी बिरादरी, अन्य धर्मों सहित अन्य अनेक वर्ग हैं, जो मुहूर्त के बारे में विचार नहीं करते, लेकिन फिर भी इस सीजन में ही अन्य अनेक लोग भी शादी करेंगे।

Published / 2022-03-30 03:37:15
झारखंड : लाह उत्पादन से सशक्त बन रहीं 73,000 से ज्यादा हज़ार किसान महिलाएं

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में वनोपज को बाजार और इससे जुड़े लोगों की समृद्धि के प्रति संजीदा मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के प्रयास के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस सिलसिले को और कारगर बनाने के लिए महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना एवं जोहार परियोजना के जरिए लाह की खेती को राज्य सरकार बढ़ावा दे रही है। राज्य की ग्रामीण महिलाओं को वनोपज आधारित आजीविका से जोड़कर आमदनी बढ़ोतरी के प्रयासों को महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के ज़रिए अमली जामा पहनाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के ये किसान लाह एवं लाह की खेती के ज़रिये बेहतर आजीविका की ओर अग्रसर हो रहे हैं। लाह की खेती से महिलाएं ना सिर्फ अपने गांव में रहकर ही अच्छी आमदनी कर रहीं हैं, बल्कि राज्य में लाह उत्पादन के आंकड़ों में भी बदलाव ला रही हैं। ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के ज़रिए सखी मंडल की ग्रामीण महिलाओं को लाह की वैज्ञानिक खेती से जोड़कर अत्याधुनिक प्रशिक्षण के जरिए आमदनी बढ़ोतरी के प्रयास हो रहे हैं। इस पहल से राज्य की 73 हजार से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को लाह की वैज्ञानिक खेती से जोड़ा गया है, जिनमें ज्यादातर अति गरीब एवं वनों के आस-पास रहने वाले ग्रामीण परिवार हैं। इस साल करीब 2000 मीट्रिक टन छिला लाह का उत्पादन इनके द्वारा किया गया है। पश्चिमी सिंहभूम के गोईलकेरा प्रखंड के रूमकूट गांव की रंजीता देवी लाह की खेती से सालाना 3 लाख रुपए तक की आमदनी प्राप्त कर रही हैं। रंजीता देवी विगत कुछ सालों से आधुनिक तकनीक के ज़रिये वैज्ञानिक विधि से बिहन लाह की खेती कर रही हैं। सखी मंडल से जुड़ने के बाद उन्हें लाह की उन्नत खेती करने का प्रशिक्षण मिला। रंजीता देवी बताती हैं, दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण हमारी आजीविका मुख्यत: जंगल और वनोपज पर निर्भर करती है। हमारे परिवार में पहले भी लाह की खेती का कार्य किया जाता था, लेकिन सखी मंडल से जुड़ने के बाद हमे 25 दिनों की सीआरपी ड्राइव के द्वारा वैज्ञानिक विधि से लाह की खेती करना सिखाया गया। इस प्रकार सखी मंडल के माध्यम से लाह की आधुनिक खेती से सम्बंधित प्रशिक्षण के साथ 5 किलो बिहन लाह (बीज के रूप में) प्राप्त हुआ। लाह की खेती में रंजीता देवी कम खर्च में कई गुना ज्यादा उपज एवं मुनाफा कमा रही हैं। पिछले साल रंजीता ने 300 किलो बिहन लाह बीज के रूप में लगाया, जिससे उन्हें 15 क्विंटल लाह की उपज प्राप्त। उससे उन्हें 3 लाख रुपए की आमदनी हुई। उनका कहना है, सखी मंडल के माध्यम से हमें अपने पारंपरिक पेशे में ही स्थानीय आजीविका के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

Published / 2022-03-30 03:31:56
सावधान : अप्रैल में 15 दिन बंद रहेंगे बैंक

एबीएन डेस्क। नए महीने की शुरुआत होने वाली है। अप्रैल में बैंकों की लंबी छुट्टियां हैं। अप्रैल महीने में बैंक 15 दिन बंद रहेंगे। जी हां RBI द्वारा बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में आधे महीने यानी 15 दिन बैंकों के कामकाज प्रभावित होंगे, बैंकों की छुट्टियां रहेंगी। हालांकि आपको बता दें कि ये छुट्टियां हर राज्य के हर शहर के बैंकों में एक साथ नहीं होगी,बल्कि आरबीआई द्वारा जारी बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट राज्यों और शहरों के आधार पर होती है। अप्रैल 2022 में बैंकों की लंबी छुट्टियां होने वाली है। आरबीआई द्वारा जारी छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक बैंक 15 दिन के लिए बंद रहेंगे। इन छुट्टियों मंब शनिवार और रविवार की साप्ताहिक छुट्टियां भी शामिल हैं। चैत्र नवरात्र, महावीर जयंती, बैसाखी, बिहू, गुड फ्राइडे जैसे त्योहारों के कारण बैंक 15 दिन बंद रहेंगे। आपको बता दें कि बैंकों की छुट्टियां किसी राज्य या क्षेत्र विशेष तक ही सीमित हैं। इसलिए अलग-अलग राज्यों और शहरों में छुट्टियां भी अलग-अलग दिन हैं। RBI द्वारा जारी बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक इसकी शुरुआत 1 अप्रैल से हो रही है। 1 अप्रैल को एनुअल क्लोजिंग के कारण आइजोल, चंडीगढ़, शिलॉन्ग, शिमला को छोड़कर देश के अधिकांश शहरों में बैंक बंद रहेंगे। 2 अप्रैल को बेलापुर, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, इंफाल, जम्मू, मुंबई, नागपुर, पणजी, श्रीनगर में बैंकों की छुट्टी होगी। इन शहरों में गुडी पड़वा, उगाडी फेस्टिवल, तुलुगु न्यू ईयर ,साजीबू नॉन्गमापनबा के कारण बैंक बंद रहेंगे। 3 अप्रैल को रविवार के कारण देशभर के बैंक बंद रहेंगे। 4 अप्रैल को सरहुल के कारण रांची में बैंक बंद रहेंगे। 5 अप्रैल को बाबू जगजीवन राम का जन्मदिवस के कारण हैदराबाद में बैंक बंद रहेंगे। 9 अप्रैल को महीने का दूसरा शनिवार हैं, जिसके कारण बैंकों की छुट्टी होगी। 10 अप्रैल को रविवार के कारण देशभर के बैंक बंद रहेंगे। 14 अप्रैल को डॉ बाबासाहेब अंबेडकर जयंती, महावीर जयंती, बैसाखी, तमिल न्यू ईयर डे, बोहाग बिहू के कारण शिलॉन्ग और शिमला को छोड़कर देशभर के बैंकों में छुट्टी रहेगी। आरबीआई की लिस्ट के मुताबिक 15 अप्रैल को गुड फ्राइडे,बंगाली न्यू ईयर डे के कारण जयपुर, जम्मू, श्रीनगर के अलावा देश के अधिकांश शहरों में बैंक बंद रहेंगे। 16 अप्रैल को गुवाहाटी में बैंकों की छुट्टी होगी। 17 अप्रैल को रविवार की छुट्टी के कारण बैंक बंद रहेंगे। 21 अप्रैल को गारिया पूजा के कारण अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। वहीं 23 अप्रैल को चौथे शनिवार के कारण बैंकों की छुट्टी होगी तो 24 अप्रैल को रविवार के कारण देशभर के बैंक बंद रहेंगे। 29 अप्रैल को शब ए कादर के कारण जम्मू, श्रीनगर में सभी बैंक बंद रहेंगे।

Published / 2022-03-27 15:20:15
महंगाई की चौतरफा मार से आम आदमी हलकान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इस बात का पता पहले से ही था कि जैसे ही विधानसभा चुनाव का खुमार उतरेगा, पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ेंगे। वैसे ही हुआ, चुनाव खत्म होते ही उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका जोर से लगा है। पहले पेट्रोल-डीजल के थोक मूल्यों में वृद्धि हुई, फिर फुटकर दामों में वृद्धि हुई और मंगलवार को रसोई गैस में भी पचास रुपये की वृद्धि कर दी गई है, जो तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गई है। सरकार कह रही है कि पेट्रोल व डीजल की कीमतों में महज अस्सी पैसे की वृद्धि हुई है। लेकिन सवाल उठता है कि थोक मूल्य में जो पच्चीस रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है क्या उससे सार्वजनिक परिवहन व माल ढुलाई महंगी नहीं होगी? देर-सवेर उसका भार आम आदमी पर तो पड़ेगा ही। सरकार की दलील है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 2008 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है। इसकी कीमतों में करीब चालीस फीसदी का इजाफा हुआ है। दरअसल, विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं में महंगाई मुद्दा न बने इसके चलते तेल कंपनियों ने सरकार के दबाव में दाम नहीं बढ़ाए थे। सवाल उठना स्वाभाविक है कि चुनाव व सरकार बनने के बीच कीमतें बढ़ाने का यह खेल लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनपक्षीय कहा जा सकता है? वैसे महंगाई केवल पेट्रोलियम पदार्थों की ही बढ़ी हो, ऐसा भी नहीं है। पिछले दिनों दूध, सीएनजी व मैगी की कीमतों में वृद्धि हुई है। विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सीएनजी की कीमतें बढ़ा दी गई थीं। इसी तरह ज्यादा उपयोग किये जाने वाले मशहूर कॉफी ब्रांडों व चायपत्ती के दामों में बढ़ोतरी हुई है। उसी तरह अमूल, मदर डेयरी, पराग व वेरका आदि सहकारी दूध संघों ने भी दूध के दामों में वृद्धि की है। बल्कि कई राज्यों में तो वृद्धि का प्रतिशत ज्यादा भी है। चिंता की बात यह भी है कि कोरोना संकट से उपजे हालात में आय के संकुचन के चलते महंगाई की मार दोहरी नजर आ रही है। कह सकते हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभावों का असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी नजर आने लगा है। दरअसल, यह महंगाई केवल भारत में ही हो, ऐसा भी नहीं है। दुनिया के तमाम देश महंगाई की बड़ी डोज से जूझ रहे हैं। कोरोना संकट के चलते सरकारों ने महामारी से लड़ने के लिये जो अधिक मुद्रा बाजार में उतारी, वह भी महंगाई बढ़ने की एक बड़ी वजह रही है। दुनिया के दूसरे बड़े तेल उत्पादक देश रूस व गैस आपूर्तिकर्ता यूक्रेन के युद्ध में उलझने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल व गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। आपूर्ति कम होने से दाम बढ़ने स्वाभाविक थे। यही वजह है कि देश में एलपीजी के दाम गत वर्ष अक्तूबर के बाद इस माह बढ़े हैं। वैसे ही डीजल व पेट्रोल के दाम भी करीब साढ़े चार माह बाद बढ़े हैं। विधानसभा चुनाव के चलते लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन अब फिर से दाम बढ़ने से लोग व्यथित हैं। देश के कई भागों में लोगों ने आक्रोश व्यक्त किया है। वैसे आशंका जतायी जा रही है कि आने वाले दिनों में पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में और वृद्धि हो सकती है। लेकिन इसके बावजूद सरकारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कोरोना संकट से उपजे हालात में महंगाई के चलते तमाम जरूरी चीजें आम उपभोक्ता की पहुंच से दूर निकल रही हैं। सरकार से संवेदनशील व्यवहार की उम्मीद की जा रही थी क्योंकि कोरोना संकट के चलते लाखों लोगों की नौकरियां गई हैं और करोड़ों लोगों की आय का संकुचन हुआ है। ऐसे में सरकार की ओर से लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की उम्मीद थी। बाजार में खाद्य तेल व अन्य दैनिक उपभोग की वस्तुएं महंगाई के चलते आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। यह सवाल भी आम आदमी को मथ रहा है कि जब विश्व बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने का तुरंत लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिलता तो उसके महंगे होने पर तुरंत महंगा क्यों किया जाता है?

Published / 2022-03-27 11:54:08
30 जून से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, 20,000 श्रद्धालु हर रोज कर सकेंगे दर्शन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भोले बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए खुशखबरी है। 2019 के तीन साल बाद अमरनाथ की यात्रा 30 जून से शुरू होने जा रही है। अमरनाथ यात्रा 30 जून से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगी। इसके साथ ही रोजाना यात्रा का कोटा बढ़ाकर 15 से 20 हजार कर दिया गया है। इसके अलावा हेलीकॉप्टर से जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अलग से होगी। माना जा रहा कि 42 दिन की इस यात्रा में श्रद्धालुओं की सारे पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड की बैठक रविवार को केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में श्री अमरनाथ की यात्रा को लेकर फैसला लिया गया। बता दें कि साल 2019 में आर्टिकल 370 हटने के कारण अमरनाथ यात्रा को मध्य में ही रोक दिया गया था। वहीं साल 2022-21 में कोरोना के कारण यात्रा नहीं हो पाई थी। अब जब कोरोना की रफ्तार थमने लगी है और सभी कोरोना पाबंदियां हटा ली गई हैं तो इस साल 2022 में अमरनाथ यात्रा फिर से शुरू होने जा रही है। इसी बीच आज हुई बैठक में यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को कायम रखने के लिए चर्चा की गई। साथ ही केंद्र सरकार से यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को यकीनी बनाने के लिए अपील की गई है।

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