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Published / 2026-04-28 22:59:12
मोहिनी एकादशी पर गूंजा दादी जी का मंगलगान

  • मोहिनी एकादशी पर गूंजा दादी जी का मंगलगान
  • भक्ति से सराबोर हुआ कृष्णा अपार्टमेंट

एबीएन सोशल डेस्क। मोहिनी एकादशी के पावन अवसर पर रांची के रातू रोड स्थित कृष्णा अपार्टमेंट में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब श्री धोली सती दादी महिला समिति द्वारा संदीप सर्राफ के आवास पर श्री धोली सती दादी जी उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। पूरा वातावरण दादी जी के जयकारों, मंगल पाठ और भजनों से भक्तिमय हो उठा। 

कार्यक्रम का शुभारंभ दादी जी के विशेष श्रृंगार से किया गया। पीले, लाल एवं सुनहरे वस्त्रों, आकर्षक आभूषणों तथा सुगंधित पुष्पों से सुसज्जित दादी जी का दिव्य स्वरूप अत्यंत मनोहारी लग रहा था। जैसे ही श्रद्धालुओं ने दादी जी के दर्शन किए, उनके चेहरों पर श्रद्धा, आनंद और आस्था की चमक दिखाई देने लगी। 

महिलाओं ने पुष्प अर्पित कर दादी जी का वंदन किया और मंगल ज्योत प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके पश्चात सामूहिक मंगल पाठ का आयोजन हुआ। समिति की महिलाओं ने पूरी निष्ठा, समर्पण और भक्ति भाव से दादी जी की महिमा का गुणगान किया। वातावरण जय दादी री, जय दादी री, दादी तेरी महिमा अपरंपार,मेरे घर आई दादी रानी जैसे मंगल गीतों और भजनों से गूंज उठा। 

उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर तालियां बजाते हुए भजनों का आनंद लेते रहे। समिति की सक्रिय सदस्या सविता सर्राफ, करुणा बगला, शारदा जी सहित अन्य महिलाओं ने मधुर स्वर में कई भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए। भजन-संध्या के दौरान महिलाओं ने दादी जी के श्रीचरणों में सुख-समृद्धि, परिवार कल्याण, समाज उन्नति और विश्व शांति की कामना की। 

कई महिलाएं भजनों की धुन पर भावविभोर होकर झूम उठीं, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी आध्यात्मिक हो गया। पूरे आयोजन के दौरान महिलाओं की सहभागिता अत्यंत उत्साहपूर्ण रही, यह आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक बना, बल्कि महिलाओं की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर गया। 

भजन-कीर्तन के पश्चात सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया। प्रसाद ग्रहण कर श्रद्धालुओं ने दादी जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक आरती के साथ हुआ, जिसमें सभी महिलाओं ने दीप जलाकर दादी जी की आराधना की। 

इस अवसर पर सविता सर्राफ, मंजू सर्राफ, शशि सर्राफ,मधु सर्राफ, संचिता सर्राफ, आशू सर्राफ, आशा सर्राफ, अनुराधा सर्राफ, रजनी सर्राफ, रेनू सर्राफ, रितु सर्राफ, बबीता मानपुरिया, मनीषा सर्राफ, करुणा बागला, सुनीता सर्राफ, श्वेता सर्राफ, सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।

श्री धोली सती दादी प्रचार समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि धोली सती दादी नारी शक्ति साहस और संरक्षण की प्रतीक है उनकी आराधना से परिवार में शांति सुख और समृद्धि का वास होता है। तथा मोहिनी एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने तथा मोह-माया से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।

Published / 2026-04-28 22:44:34
मोहिनी एकादशी पर गूंजा दादी जी का मंगलगान

  • मोहिनी एकादशी पर गूंजा दादी जी का मंगलगान
  • भक्ति से सराबोर हुआ कृष्णा अपार्टमेंट

एबीएन सोशल डेस्क। मोहिनी एकादशी के पावन अवसर पर रांची के रातू रोड स्थित कृष्णा अपार्टमेंट में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब श्री धोली सती दादी महिला समिति द्वारा संदीप सर्राफ के आवास पर श्री धोली सती दादी जी उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। पूरा वातावरण दादी जी के जयकारों, मंगल पाठ और भजनों से भक्तिमय हो उठा। 

कार्यक्रम का शुभारंभ दादी जी के विशेष श्रृंगार से किया गया। पीले, लाल एवं सुनहरे वस्त्रों, आकर्षक आभूषणों तथा सुगंधित पुष्पों से सुसज्जित दादी जी का दिव्य स्वरूप अत्यंत मनोहारी लग रहा था। जैसे ही श्रद्धालुओं ने दादी जी के दर्शन किए, उनके चेहरों पर श्रद्धा, आनंद और आस्था की चमक दिखाई देने लगी। 

महिलाओं ने पुष्प अर्पित कर दादी जी का वंदन किया और मंगल ज्योत प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके पश्चात सामूहिक मंगल पाठ का आयोजन हुआ। समिति की महिलाओं ने पूरी निष्ठा, समर्पण और भक्ति भाव से दादी जी की महिमा का गुणगान किया। वातावरण जय दादी री, जय दादी री, दादी तेरी महिमा अपरंपार,मेरे घर आई दादी रानी जैसे मंगल गीतों और भजनों से गूंज उठा। 

उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर तालियां बजाते हुए भजनों का आनंद लेते रहे। समिति की सक्रिय सदस्या सविता सर्राफ, करुणा बगला, शारदा जी सहित अन्य महिलाओं ने मधुर स्वर में कई भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए। भजन-संध्या के दौरान महिलाओं ने दादी जी के श्रीचरणों में सुख-समृद्धि, परिवार कल्याण, समाज उन्नति और विश्व शांति की कामना की। 

कई महिलाएं भजनों की धुन पर भावविभोर होकर झूम उठीं, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी आध्यात्मिक हो गया। पूरे आयोजन के दौरान महिलाओं की सहभागिता अत्यंत उत्साहपूर्ण रही, यह आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक बना, बल्कि महिलाओं की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर गया। 

भजन-कीर्तन के पश्चात सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया। प्रसाद ग्रहण कर श्रद्धालुओं ने दादी जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक आरती के साथ हुआ, जिसमें सभी महिलाओं ने दीप जलाकर दादी जी की आराधना की। 

इस अवसर पर सविता सर्राफ, मंजू सर्राफ, शशि सर्राफ,मधु सर्राफ, संचिता सर्राफ, आशू सर्राफ, आशा सर्राफ, अनुराधा सर्राफ, रजनी सर्राफ, रेनू सर्राफ, रितु सर्राफ, बबीता मानपुरिया, मनीषा सर्राफ, करुणा बागला, सुनीता सर्राफ, श्वेता सर्राफ, सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।

श्री धोली सती दादी प्रचार समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि धोली सती दादी नारी शक्ति साहस और संरक्षण की प्रतीक है उनकी आराधना से परिवार में शांति सुख और समृद्धि का वास होता है। तथा मोहिनी एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने तथा मोह-माया से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।

Published / 2026-04-28 18:20:43
गायत्री महामंत्र भारतीय संस्कृति व संस्कार परम्परा का परम उपास्य मंत्र है : यज्ञ पुरोहित

  • गायत्री महामंत्र भारतीय संस्कृति व संस्कार परम्परा का परम उपास्य मंत्र है : यज्ञ पुरोहित
  • 40 दिवसीय गायत्री मंत्र  जप-अनुष्ठान पुरश्चक्रण की सामूहिक पूर्णाहुति सोल्लास संपन्न हुई

एबीएन सोशल डेस्क, रांची। अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुञ्ज तत्वावधान व मार्गदर्शन में  परम वंदनीया सजल श्रद्धा स्वरूपा गुरुमाता भगवती देवी के पावन जन्म शताब्दी वर्ष सह दिव्य अखंड ज्योति शताब्दी वर्ष क्रम में नियोजित व निर्धारित अनुयाज प्रक्रिया में चलाये गये साधक-शिष्यों के सामूहिक 40 दिवसीय जप- अनुष्ठान पुरश्चक्रण अभियान के अंतर्गत शान्तिकुञ्ज गंगा तटीय क्षेत्र बैरागी दीप में विगत जनवरी वसन्तोत्सव में दिव्य अखंड ज्योति शताब्दी वर्ष सम्मेलन समारोह दौरान लिए गए संकल्प एवं 40 दिवसीय समूह महा पुरश्चक्रण जप-अनुष्ठान अभियान में संकल्पित  तथा स्थानीय स्तर पर सामूहिक साधक-शिष्यों के जप-अनुष्ठान की सामूहिक देव दक्षिणा पूर्णाहुति गायत्री महायज्ञ से शक्तिपीठ सेक्टर टू में संपन्न की गई। 

इस महत्वपूर्ण पावन अवसर पर यज्ञीय पुरोहित प्रमोद कुमार ने  युग निर्माण योजना एवं विचार क्रांति अभियान अंतर्गत बताया कि युग निर्माण व युग परिवर्तन बेला में महापुरश्चक्रण तप साधना अंतर्गत इन दिनों जितना सामूहिक जप-अनुष्ठान कराया जा रहा है, उसमें एकाकी व एकांत उपासना, साधना आराधना संबन्धित जपतपव्रत का अपना महत्व होता है।

बताया कि व्यक्तिगत स्तर पर आत्मिक लक्ष्य प्राप्त करने  में एकाकी व एकांत जपतप-अनुष्ठान साधना सही व महत्वपूर्ण है। लेकिन सामूहिक लक्ष्य प्राप्ति में समष्टि का कल्याण, समाज का उत्कर्ष, व्यापक विपदाओं का निवारण करने में आध्यात्मिक प्रयत्नों में सामूहिक प्रयत्न, सामूहिक अनुष्ठान, सामूहिक प्रार्थना महायज्ञ युग संधिकाल में पुरश्चक्रण जैसे प्रयास समाज व विश्व को ध्यान में रखकर ही किए जाते हैं।

जो शान्तिकुञ्ज मार्गदर्शन में  अपेक्षित है। विगत 23 जनवरी वसंत पंचमी,15 फरवरी महाशिव रात्रि, 19 मार्च चैत्र नवरात्र से  इस तीसरे क्रमिक चरण के अबतक रांची  शहर व प्रखंडों की समन्वय समिति से 40 साधक-शिष्य भाई-बहनों ने पुरश्चक्रण जप-अनुष्ठान अभियान में शामिल भारत राष्ट्र, जन कल्याण, विश्व शान्ति व उज्जवल भविष्य के लिए शान्ति व मंगलकामना पाठ किए। आगे उन्होंने बताया कि आगामी 40 दिवसीय जप-अनुष्ठान पुरश्चक्रण में भी और  साधक-शिष्य आवेदनपत्र भरने के क्रम में हैं। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।

Published / 2026-04-28 18:16:45
गायत्री महामंत्र भारतीय संस्कृति व संस्कार परम्परा का परम उपास्य मंत्र है : यज्ञ पुरोहित

  • गायत्री महामंत्र भारतीय संस्कृति व संस्कार परम्परा का परम उपास्य मंत्र है : यज्ञ पुरोहित
  • 40 दिवसीय गायत्री मंत्र  जप-अनुष्ठान पुरश्चक्रण की सामूहिक पूर्णाहुति सोल्लास संपन्न हुई

एबीएन सोशल डेस्क, रांची। अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुञ्ज तत्वावधान व मार्गदर्शन में  परम वंदनीया सजल श्रद्धा स्वरूपा गुरुमाता भगवती देवी के पावन जन्म शताब्दी वर्ष सह दिव्य अखंड ज्योति शताब्दी वर्ष क्रम में नियोजित व निर्धारित अनुयाज प्रक्रिया में चलाये गये साधक-शिष्यों के सामूहिक 40 दिवसीय जप- अनुष्ठान पुरश्चक्रण अभियान के अंतर्गत शान्तिकुञ्ज गंगा तटीय क्षेत्र बैरागी दीप में विगत जनवरी वसन्तोत्सव में दिव्य अखंड ज्योति शताब्दी वर्ष सम्मेलन समारोह दौरान लिए गए संकल्प एवं 40 दिवसीय समूह महा पुरश्चक्रण जप-अनुष्ठान अभियान में संकल्पित  तथा स्थानीय स्तर पर सामूहिक साधक-शिष्यों के जप-अनुष्ठान की सामूहिक देव दक्षिणा पूर्णाहुति गायत्री महायज्ञ से शक्तिपीठ सेक्टर टू में संपन्न की गई। 

इस महत्वपूर्ण पावन अवसर पर यज्ञीय पुरोहित प्रमोद कुमार ने  युग निर्माण योजना एवं विचार क्रांति अभियान अंतर्गत बताया कि युग निर्माण व युग परिवर्तन बेला में महापुरश्चक्रण तप साधना अंतर्गत इन दिनों जितना सामूहिक जप-अनुष्ठान कराया जा रहा है, उसमें एकाकी व एकांत उपासना, साधना आराधना संबन्धित जपतपव्रत का अपना महत्व होता है।

बताया कि व्यक्तिगत स्तर पर आत्मिक लक्ष्य प्राप्त करने  में एकाकी व एकांत जपतप-अनुष्ठान साधना सही व महत्वपूर्ण है। लेकिन सामूहिक लक्ष्य प्राप्ति में समष्टि का कल्याण, समाज का उत्कर्ष, व्यापक विपदाओं का निवारण करने में आध्यात्मिक प्रयत्नों में सामूहिक प्रयत्न, सामूहिक अनुष्ठान, सामूहिक प्रार्थना महायज्ञ युग संधिकाल में पुरश्चक्रण जैसे प्रयास समाज व विश्व को ध्यान में रखकर ही किए जाते हैं।

जो शान्तिकुञ्ज मार्गदर्शन में  अपेक्षित है। विगत 23 जनवरी वसंत पंचमी,15 फरवरी महाशिव रात्रि, 19 मार्च चैत्र नवरात्र से  इस तीसरे क्रमिक चरण के अबतक रांची  शहर व प्रखंडों की समन्वय समिति से 40 साधक-शिष्य भाई-बहनों ने पुरश्चक्रण जप-अनुष्ठान अभियान में शामिल भारत राष्ट्र, जन कल्याण, विश्व शान्ति व उज्जवल भविष्य के लिए शान्ति व मंगलकामना पाठ किए। आगे उन्होंने बताया कि आगामी 40 दिवसीय जप-अनुष्ठान पुरश्चक्रण में भी और  साधक-शिष्य आवेदनपत्र भरने के क्रम में हैं। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।

Published / 2026-04-27 09:24:08
आचरण से ही धर्म की रक्षा : स्वामी परिपूर्णानंद जी

विराट हिंदू सम्मेलन

आचरण से ही धर्म की रक्षा : स्वामी परिपूर्णानंद जी

एबीएन सोशल डेस्क, लालपुर (रांची)। लालपुर डिस्टिलरी पुल स्थित विवेकानंद पार्क में विराट हिंदू सम्मेलन का धूमधाम से आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में आयोजित 70 हजार से अधिक सम्मेलनों की इस कड़ी में सैकड़ों हिंदू बंधु-भगिनियां, महिलाएं, युवतियां और बच्चे एकजुट हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदू एकता मजबूत करना, आचरण-आधारित हिंदुत्व की रक्षा और संस्कृति संरक्षण पर जोर देना था।

कार्यक्रम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से आरंभ हुआ। गीता पाठ के माध्यम से सभी को शास्त्रीय ज्ञान प्रदान किया गया। लव जिहाद के खतरे पर आधारित प्रभावी लघु नाटक प्रस्तुत कर माताओं और युवतियों को जागरूक किया गया। 

अंजली गोस्वामी ने वंदे मातरम् का भावपूर्ण गान कर राष्ट्रप्रेम की लहर पैदा कर दी। चरमोत्कर्ष पर सैकड़ों महिलाओं ने भारत माता के चित्र के समक्ष भारत माता की आरती, जगत के भाग्य विधाता की की सामूहिक आरती कर भक्तिमय वातावरण बनाया। विषय प्रवेश सच्चिदानंद मिश्र ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संघ चालक विजय राज ने दिया।

क्षेत्र संयोजक (सामाजिक सद्भाव, झारखंड-बिहार) राकेश लाल ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए कहा, हिंदू व हिंद की रक्षा करने वाले के साथ खड़ा होना होगा। हम सब हिंदू हैं। हिंदू होने का भाव ही काफी है, यही हमारी ताकत है। हमें हिंदू दिखना भी चाहिए। 

हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान का भाव रखना होगा। उन्होंने परिवार केंद्रित अपील की, अपनी बेटियों के साथ संवाद करें, उनकी भावनाओं को जानें और उन्हें धर्म-संस्कृति से परिचित कराएं। घर पर तुलसी चौरा, रंगोली, स्वास्तिक, गणेश-हनुमान चित्र लगाएं। परिवार में एकत्र भोजन-भजन करें। 

मोहल्ले में मंदिरों पर सामूहिक आरती शुरू करें। राकेश लाल ने स्पष्ट किया कि हिंदू सम्मेलन जाति-भाषा से ऊपर उठकर एकता सिखाता है और कौन अपना-पराया है, इसकी पहचान आवश्यक है। उन्होंने 50,000 से अधिक सम्मेलनों का उल्लेख कर संगठन की शक्ति पर बल दिया।

चिन्मय आश्रम रांची के महंत स्वामी परिपूर्णानंद जी महाराज ने गहन प्रवचन में कहा, धर्मो रक्षति रक्षितः। धर्म की रक्षा करने वालों की धर्म रक्षा करता है। अपनी आचरण से ही हिंदुत्व की रक्षा कर सकेंगे। उन्होंने चेतावनी दी, नारे लगाने से धर्म जीवित नहीं रहता। आचरण में उतारें। 

दूसरे धर्म के लोग प्रतीकों और आचरण से पहचाने जाते हैं, हम क्यों नहीं? नित्य भगवान को प्रणाम करें, स्वाध्याय करें, संतों का सम्मान करें। दुर्योधन की तरह धर्म जानकर भी न अपनाना अधर्म है। थोड़ा-थोड़ा आचरण सुधारें, संगठित हों तो धर्म हमारी रक्षा करेगा।

विहिप प्रांत सेवा प्रमुख एवं कार्यक्रम संयोजक अजय अग्रवाल ने हिंदू संगठन की आवश्यकता पर बल दिया। राकेश लाल ने समापन में पुनः जोर दिया, संघे शक्ति कलियुगे। गीता में कहा गया है, संगठन ही कलियुग की शक्ति है। हिंदू हित में काम करें, हितरक्षकों के साथ खड़े हों। जय श्री राम!

कार्यक्रम में विधायक सीपी सिंह, बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री केबी प्रसाद यादव, महानगर संघ चालक पवन मंत्री, नगर कार्यवाह मदन कुमार राजभर, विभाग सेवा प्रमुख अक्षय प्रसाद, महानगर सह कार्यवाह विनायक मिश्र, प्रो. कृष्ण बल्लभ प्रसाद, विजय छापरिया, अधिवक्ता राजेंद्र मिश्रा, सत्या पांडेय, प्रांतीय सचिव लालाबाबू सिंह, संजीव विजय वर्गीय, चिंटू, परीक्षित पांडेय, अभिषेक कुमार पांडेय, कपिलदेव पांडेय, राजेश महतो, रंजय वर्मा, अजेश अग्रवाल सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। भारत माता की जय, वंदे मातरम और जय श्री राम के उद्घोषों के बीच प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। उक्त जानकारी शिवाजी नगर के प्रचार प्रमुख कविलास कुमार ने दी ।

Published / 2026-04-26 18:46:27
मोहिनी एकादशी पापों का नाश, सौभाग्य और मोक्ष प्रदान करने वाला पावन व्रत : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। वर्ष भर आने वाली सभी एकादशियों में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आने वाली मोहिनी एकादशी अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी मानी जाती है। 

इस वर्ष मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल को मनाई जायेगी। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और श्रद्धा-भक्ति से रखने पर समस्त पापों का नाश, सुख-समृद्धि तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत कलश को लेकर विवाद हुआ, तब भगवान विष्णु ने अत्यंत सुंदर मोहिनी रूप धारण किया। इस रूप से उन्होंने असुरों को मोहित कर देवताओं को अमृत पान कराया। 

भगवान विष्णु के इसी मोहिनी स्वरूप की स्मृति में यह एकादशी मनायी जाती है। इसलिए इसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है। यह व्रत मनुष्य के भीतर की आसक्ति, मोह, लोभ और पाप प्रवृत्तियों को दूर कर धर्म, संयम और भक्ति का मार्ग दिखाता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि मोहिनी एकादशी का व्रत करने से अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, आर्थिक उन्नति और आत्मिक बल प्रदान करता है। 

जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए यह व्रत करता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति मोह-माया के बंधनों से मुक्त होकर सद्कर्मों की ओर अग्रसर होता है। इसलिए यह एकादशी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का भी श्रेष्ठ माध्यम है। मोहिनी एकादशी का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को बुराइयों से दूर कर सत्य, संयम और सदाचार की प्रेरणा देना है। 

इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा, कथा श्रवण, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य किया जाता है। इस व्रत की विशेषता यह है कि यह व्यक्ति के मन में छिपे नकारात्मक विचारों को दूर कर जीवन में नई ऊर्जा और आशा का संचार करता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जो मानसिक तनाव, बाधाओं या पारिवारिक परेशानियों से गुजर रहे हों। 

प्राचीन कथा के अनुसार सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नामक नगरी में द्युतिमान नामक राजा राज्य करता था। उसके पुत्र धृष्टबुद्धि अत्यंत दुराचारी थे। पाप कर्मों के कारण उन्हें घर से निकाल दिया गया। वन में भटकते हुए वे महर्षि कौंडिन्य के आश्रम पहुंचे। वहां ऋषि ने उन्हें मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। 

धृष्टबुद्धि ने श्रद्धा से व्रत किया, जिससे उनके सारे पाप नष्ट हो गये और उन्हें उत्तम लोक की प्राप्ति हुई। मोहिनी एकादशी आत्मसंयम, भक्ति और जीवन सुधार का पावन पर्व है। यह व्रत केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि मनुष्य को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

Published / 2026-04-26 18:42:21
गायत्री उपासना नवयुग की आवश्यकता है : जयनारायण

गायत्री परिवार ने किया सम्मान समारोह का आयोजन  

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लापुंग/ रांची। लापुंग प्रखंड के ककरिया दुर्गा मंदिर परिसर में अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के संस्थापक परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति तपोनिष्ठ राम शर्मा आचार्य गुरुमाता भगवती देवी की जन्म शताब्दी वर्ष की अनुयाज पर ककरिया में समन्वय समिति के सदस्यों का सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। 

मौके पर गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर धुर्वा से पधारे जिला समन्वयक जय नारायण प्रसाद सहायक साधक, वादक, गायक शंतर सिंह व विजय कुमार ने  गायत्री संजीवनी महाविद्या महायज्ञ के अर्थ भावार्थ और उसकी महिमा पर प्रकाश डाला। साथ ही आगामी माह में गायत्री महायज्ञ कराने का प्रस्ताव रखा गया। 

अंत में  ग्रामे ग्रामे गायत्री यज्ञ एवं गृहे गृहे गायत्री उपासना, नित्य  स्वाध्याय,  संयम  सेवा हेतु देव स्थापना की आवश्यकता व उपयोगिता पर जोर दिया गया। मौके पर लक्ष्मी नारायण साहु, अनिल कुमार साहु, प्रवीण कुमार, विरेन्द्र साहु, नुनकरन साहु, रामप्रवेश सुभाष साहु, अर्चना देवी, बाबी देवी, सुबोध कुमार समेत कई लोग मौजूद रहे।  उक्त जानकारी गायत्री परिवार के सुजीत कुमार, विजय कुमार और जय नारायण प्रसाद ने दी।

Published / 2026-04-26 18:41:33
श्री सर्वेश्वरी समूह ने पांच जगहों पर शुरू की नि:शुल्क प्याऊ सेवा

टीम एबीएन, रांची। श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा रांची (औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड़ पश्चिम, रांची) द्वारा पिछले हफ्ते दि.20.04.2026 (दिन - सोमवार) से दी.26.04.2026 (दिन - रविवार) तक रांची शहर के पांच जगहों पर नि:शुल्क प्याऊ सेवा का शुभारम्भ किया गया। प्रत्येक वर्ष की तर श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा राँची द्वारा विधवत आरती पूजन के साथ निम्नलिखित स्थानों पर नि:शुल्क प्याऊ सेवा का शुभारम्भ किया गया -  

  1. दि.20.04.2026 (सोमवार) को पिस्का मोड़ स्थित गुरु कृपा बिल्डिंग 
  2. दि.21.04.2026 (मंगलवार) को किशोर गंज चौक स्थित प्रीति स्वीट्स के बगल में 
  3. दि.22.04.2026 (बुधवार) को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, रातु, के बगल में 
  4. दि.23.04.2026 (गुरुवार) को अरगोड़ा चौक के निकट, आई. डी. बी. आई. बैंक, अशोक नगर, के बगल में 
  5. दि.26.04.2026 (रविवार) को बाजरा चौक, आई. टी. आई, स्थित गौरी मेडिकल में 

इन नि:शुल्क प्याऊ के माध्यम से इस भीषण गर्मी में लोगों को पीने के लिए स्वछ एवं शीतल जल की व्यवस्था की जा रही है। प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी इन नि:शुल्क प्याऊ सेवा को ग्रीष्म ऋतु के समाप्ति तक रोजाना चलाया जायेगा।  ज्ञात हो कि संस्था द्वारा ग्रीष्म ऋतु में अनेक जनसेवा के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। नि:शुल्क प्याऊ सेवा उन्हीं जनसेवा के कार्यक्रमों में से एक है। 

इसके अलावा पंछी को दाना- पंछी को पानी कार्यक्रम के अंतर्गत मट्टी के सकोरा का वितरण भी किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का पहला चरण दि.24.04.2026 (शुक्रवार) को न्यू मधुकम स्थित, प्रोग्रेसिव पब्लिक स्कूल आॅफ लर्निंग में आयोजित किया गया जिसमें स्कूल के बच्चों के बीच 225 सकोरों के साथ दाना के पैकेटों का वित्रण किया गया। 

इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों के बीच जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया ताकी इस भीषण गर्मी में पक्षियों को पीने का पानी एवं दाना मिल सके साथ ही उनके प्राणों की रक्षा हो सके। इसके साथ अस्पताल एवं जरूरतमंदों के बीच ताड़ पत्ते से निर्मित हाथ पंखे का भी वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया जायेगा। इसके माध्यम से इस चिलचिलाती गर्मी में जरूरतमंदों को थोड़ा राहत मिल पायेगा।

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