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Published / 2026-03-14 20:36:41
नामकुम : लायंस क्लब के कैंप में 200 से अधिक महिलाओं की स्वास्थ्य जांच

एबीएन न्यूज नेटवर्क, नामकुम (रांची)। लायंस क्लब आॅफ रांची अम्बर की अध्यक्ष दीपाली रस्तोगी एवं सचिव रश्मि सिंह के नेतृत्व में ग्राम बराम, बराम पंचायत, नामकुम में लाइफ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर, रांची के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं के लिए नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 200 से अधिक ग्रामीण महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गयी। 

जांच के दौरान डायबिटीज, हाइपरटेंशन (ब्लड प्रेशर), हीमोग्लोबिन, बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) तथा बॉडी फैट की जांच की गयी और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया गया। शिविर में चिकित्सा टीम का नेतृत्व लायन सिमू रवि तथा डाइटिशियन रवि महतो ने किया। उनकी टीम ने भी ग्रामीण महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी। 

कार्यक्रम को सफल बनाने में लायन माधवेश, योगेंद्र, राधिका, मन्नू, अनुज, रवि, लायन ज्योति एवं लायन रंजीता सहित क्लब की पूरी टीम का विशेष सहयोग रहा। सभी के संयुक्त प्रयास से यह स्वास्थ्य शिविर ग्रामीण महिलाओं के लिए काफी लाभदायक साबित हुआ।

Published / 2026-03-13 17:34:06
विश्व उपभोक्ता दिवस 15 मार्च को

  • विश्व उपभोक्ता दिवस 15 मार्च को
  • उपभोक्ताओं को जागरूक सशक्त और जिम्मेदार बनाने तथा अधिकारों की जागरूकता का वैश्विक अभियान: संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 15 मार्च को पूरे विश्व में विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है। 

इस दिवस का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उन्हें शोषण से बचाना तथा बाजार व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। आज के आधुनिक उपभोक्तावादी युग में यह दिवस अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है क्योंकि बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा भी आवश्यक हो गई है।

विश्व उपभोक्ता दिवस मनाने की प्रेरणा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी के उस ऐतिहासिक भाषण से मिली, जो उन्होंने 15 मार्च 1962 को अमेरिकी संसद में दिया था। इस भाषण में उन्होंने उपभोक्ताओं के चार मूलभूत अधिकारों- सुरक्षा का अधिकार,जानकारी का अधिकार,चयन का अधिकार और अपनी बात सुने जाने का अधिकार-को मान्यता दी। इसी ऐतिहासिक पहल की स्मृति में बाद में उपभोक्ता संगठनों द्वारा 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। 

वर्ष 1983 से यह दिवस वैश्विक स्तर पर नियमित रूप से मनाया जा रहा है।इस दिवस का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है। उपभोक्ता किसी भी अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं, क्योंकि बाजार की पूरी व्यवस्था उन्हीं की आवश्यकताओं और मांगों के आधार पर संचालित होती है। 

यदि उपभोक्ता जागरूक और सशक्त होंगे तो व्यापारिक संस्थान भी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करने के लिए बाध्य होंगे। इसलिए इस दिन विभिन्न देशों में सेमिनार, जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।भारत में भी उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। 

वर्ष 1986 में भारत सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 लागू किया, जिसे बाद में और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 लागू किया गया। इस कानून के माध्यम से उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी, मिलावटी वस्तुओं, गलत विज्ञापन और खराब सेवाओं से सुरक्षा प्रदान की जाती है। 

इसके तहत जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता आयोग स्थापित किए गए हैं, जहां उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। विश्व उपभोक्ता दिवस का महत्व केवल अधिकारों की जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदार उपभोक्ता बनने का संदेश भी देता है। आज के समय में डिजिटल खरीदारी, ऑनलाइन सेवाएं और ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव के कारण उपभोक्ताओं के सामने नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

इसलिए यह आवश्यक है कि उपभोक्ता वस्तुओं की गुणवत्ता, कीमत, गारंटी और सेवा संबंधी सभी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही खरीदारी करें तथा किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी होने पर अपने अधिकारों का उपयोग करें। कहा जा सकता है कि विश्व उपभोक्ता दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को जागरूक, सशक्त और जिम्मेदार बनाने का वैश्विक अभियान है। 

यदि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगे तो बाजार व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी, अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर रोक लगेगी और समाज में न्यायपूर्ण एवं संतुलित आर्थिक व्यवस्था का निर्माण संभव हो सकेगा। इसलिए प्रत्येक नागरिक को इस दिवस के महत्व को समझते हुए अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना चाहिए।

Published / 2026-03-12 21:17:16
श्री राधाकृष्ण मंदिर कृष्णा नगर कॉलोनी में धूमधाम से मनेगी रामनवमी

टीम एबीएन, रांची। श्री राधाकृष्ण मंदिर कृष्णा नगर कॉलोनी में आज दिनांक 12/03/2026 को रामनवमी एवं नवरात्र  महोत्सव धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया।  रामनवमी के उपलक्ष में कलश यात्रा निकालने निर्णय लिया गया। 18/03/2026 दिन बुधवार को सुबह 7 बजे से शिव दुर्गा मंदिर से 108 महिलाओं द्वारा कलश उठाया जायेगा। 

जो कलश यात्रा हरि ओम मंदिर होते हुए, काली मंदिर होते हुए, भक्ति चौक, झंडा चौक होते हुए राधाकृष्ण मंदिर कृष्णा नगर कॉलोनी पहुंचेगी। उसके पश्चात मां का विशाल भंडारा भक्तों के बीच में वितरण किया जायेगा एवं कलश यात्रा में मुख्य आकर्षण माता की संजीव झांकी एवं श्री दुर्गा जागरण मंडली के सदस्यों के द्वारा भजनों का कार्यक्रम होगा। 

19/3/2026 संध्या 4 बजे से सुंदर कांड का सामूहिक पाठ मंदिर प्रांगण में होगा। मीडिया प्रभारी अरुण जसूजा से प्राप्त जानकारी के अनुसार नवरात्र नवरात्रों के दिनों में श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ 19/03/2026 से 26/03/2026 तक प्रात 7 बजे से 10 बजे तक होगी एवं मां की अखंड ज्योत जलायी जायेगी। 

महा अष्टमी के दिन रात्रि में 9 बजे 1008 ज्योत प्रज्ज्वलित की जायेगी और भजन कीर्तन का कार्यक्रम रात्रि 11 बजे तक होगी। 27 को रामनवमी महोत्सव कार्यकम 11  से दोपहर 3 बजे तक भजन कीर्तन का कार्यक्रम एवं विशाल भंडारा होगा। दसमी के दिन सुबह 10 बजे से हवंन एवं ज्योत विसर्जन का कार्यक्रम होगा। 

मौके पर प्रधान नंदकिशोर, अरोड़ा मुखी, राधेश्याम किंगर, चंद्रभान तलेजा, रामचंद्र तलेजा, मनोहर लाल जसुजा, सुनील कटारिया, चंदन सिराणा, किशोरी पपनेजा, अंचल किंगर, निखिल घेई, हरिश मनुजा, अरुण जसुजा,  मनीष मुंजल, कमल घई, विनीत अरोड़ा, अनिल मुंजल,  विकास घई, रोहित तलेजा, चंद्रभान मनुज, जिमी अरोड़ा, पवन पापनेजा, विजय जसुजा एवं समाज के बहुत सारे लोग उपस्थित हुए।

Published / 2026-03-11 20:13:46
देवपूजन व यज्ञीय विधान से पुंसवन (गर्भ पूजन) संस्कार पद्धति अभिभावकों ने कराये

गर्भस्थ शिशु परिवार,समाज व राष्ट्र का सौभाग्य व गौरव का कारण बने : गायत्री-परिवार 

एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में आज दो पुंसवन संस्कार दो परिवार द्वारा कराये गए। इस दौरान वर्तमान समय में पुंसवन संस्कार की आवश्यकता, गरिमा, महत्व व अपेक्षा पर प्रकाश डाला गया। यज्ञीय पुरोहित ने समय की अपेक्षा पर चर्चा करते हुए बताया कि गर्भस्थ शिशु परिवार, समाज, राष्ट्र का सौभाग्य, यश व गौरव का कारण बने। 

माता पिता अभिभावकों का ध्यान आकर्षित कर बताया गया कि गर्भस्थ शिशु में शारीरिक, बौद्धिक, तथा भावनात्मक नव-निर्माण व विकास के लिए अनुकूल वातावरण, खान-पान, आचार-विचार का, शुचिता पवित्रता का निर्धारण आवश्यक व आकर्षक होना चाहिए। पूर्व के कुसंस्कारों का निवारण तथा सुसंस्कारों की मंगलमय स्थापना, ग्रहण और विकास के लिए सत्संकल्प, सत्प्रयोजन, सत्पुरुषार्थ एवं देव अनुग्रह के संयोग का प्रयास रूचिकर व तीव्रतर होना चाहिए। 

गायत्री यज्ञ अनुष्ठान दौरान इस प्रकार दिशा-निर्देश व संकल्प साथ अच्छी तरह बताकर षटकर्म, देवपूजन, सर्व देव नमस्कार, स्वस्तिवाचन पाठ, रक्षा विधान कराकर शेष संस्कार विधिवत सोल्लास, एक बुराई परित्याग एवं एक अच्छाई ग्रहण कराकर संस्कार विधान संपन्न कराये गये। उक्त जानकारी गायत्री-परिवार रांची शक्तिपीठ के प्रमोद कुमार और जय नारायण प्रसाद ने दी।

Published / 2026-03-11 14:34:35
सद्गुरु, सत्संग और सत्सानिध्य...

सद्गुरु, सत्संग और सत्सानिध्य...

त्रिवेणी दास

एबीएन सोशल डेस्क। अध्यात्म के उपासना, साधना एवं आराधना के महाविज्ञान में सद्गुरु, सत्संग और सत्सानिध्य का ही प्रमुख महत्व है और उनके ही माध्यम से साधक स्वयं का परिमार्जन करता है। सद्गुरु उन्हें कहा जाता है जिनका सत्य के साथ एकात्मकता स्थापित हो जाती है। 

व्यक्ति एवं सत्य में विभेद ना रह जाए ऐसे व्यक्ति सद्गुरु के उच्च पद पर प्रस्थापित हो जाते हैं। सतगुरु से सशरीर सानिध्य सर्वोत्तम तो होता है परंतु यह भी आवश्यक नहीं है कि सद्गुरु से हर घड़ी शारीरिक निकटता बनी रहे। जब गुरु एवं शिष्य का सानिध्य गहन एवं सघन हो जाती है तब आत्म-मिलन और आत्म-एकाकार की अद्भुत घटना घटित होती है। 

सद्गुरु अपने शिष्य के सूक्ष्म शरीर में स्थापित हो जाते हैं और उनकी उपस्थिति का तरंग श्वास, प्रश्वास तथा हृदय की धड़कन के साथ संपूर्ण स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर में प्रवाहित होते रहता है। इंद्रियों के द्वारा अनुभूति तथा ग्रहण करने की क्षमता सीमित होती है, जबकि शारीरिक संरचना के अंदर अदृश्य संस्थाओं से उठने वाले तरंगों का प्रभाव व्यापक एवं स्थाई होता है। 

सत्य का अन्वेषण बुद्धि, विवेक एवं तर्क के आधार पर नहीं किया जा सकता है। सत्य के अन्वेषण के लिए श्रद्धा, भक्ति, विश्वास और निष्ठा का मिश्रित शक्तिशाली आधार चाहिए। जैसे ही सत्य की ओर यात्रा प्रारंभ होती है जीवन में अद्भुत घटित होने लगती है जिसे भौतिक जगत में चमत्कार के रूप में देखा और समझा जाता है।

जबकि सत्य के अन्वेषक को इन चमत्कारों से कोई लेना-देना नहीं रहता है वह तो सत्य से एकाकार बाद ही गुरु के ऋण से मुक्त हो पता है। मनुष्य की इच्छा अनंत है जिसकी पूर्ति शायद ही हो पाती है। इच्छाओं का, क्रिया प्रतिक्रिया का और असंतोष का भारी बोझ ढोने से कहीं अच्छा है सत्य के सानिध्य में जीवन की यात्रा को पूरी की जाय।

Published / 2026-03-10 18:43:30
नीले आकाश का सच की खास बातें

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नीले आकाश का सच एक ऐसी पुस्तक है, जो बिहार और झारखंड की राजनीति, सत्ता, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक तंत्र की जटिल सच्चाइयों को उजागर करती है। यह किताब सिर्फ घटनाओं का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक ऐसी पत्रकारिक यात्रा है, जो बताती है कि सत्ता के गलियारों में कैसे फैसले होते हैं, किस तरह घोटालों की गूंज लोकतंत्र के स्तंभों को हिलाती है और कैसे जनता की उम्मीदें राजनीतिक समीकरणों में गुम हो जाती हैं। 

किताब की शुरुआत बिहार विभाजन और झारखंड गठन से होती है, जिसमें झारखंड आंदोलन की पृष्ठभूमि, संघर्ष और अंतत: राज्य निर्माण की राजनीतिक खींचतान को विस्तार से बताया गया है। यह अध्याय दिखाता है कि कैसे राजनीतिक समीकरणों के चलते वरिष्ठ नेता कड़िया मुंडा मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचते-पहुंचते रह गये और बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बन गये। 

दूसरा अध्याय पशुपालन घोटाला और लालू प्रसाद बिहार की राजनीति के सबसे बड़े भ्रष्टाचार की कहानी कहता है। इसमें बताया गया है कि किस तरह करोड़ों रुपये सरकारी खजाने से फर्जी बिलों और घोटालों के जरिये निकाले गये और किस तरह इस घोटाला से बिहार की राजनीति का चेहरा बदल गया। 

तीसरा अध्याय लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के रोचक किस्से बिहार की सत्ता के दिलचस्प और कभी-कभी हास्यपूर्ण पहलुओं को सामने लाता है। इसमें सत्ता के भीतर के कई ऐसे किस्से हैं जो राजनीति के मानवीय और नाटकीय दोनों रूपों को दिखाते हैं। 

चौथा अध्याय सचिवालय का सच और रिपोर्टिंग की यात्रा लेखक की पत्रकारिक दृष्टि का परिचायक है। यह अध्याय सरकारी फाइलों, प्रशासनिक गड़बड़ियों और जमीनी रिपोर्टिंग के अनुभवों से भरा है। 

इसके बाद पांचवां अध्याय में बिहार के घोटालों से नहीं सीख लिया झारखंड ने में बताया गया है कि कैसे झारखंड ने बिहार की गलतियों को दोहराया। नये राज्य में भ्रष्टाचार, गुप्त फंड के दुरुपयोग और सत्ता की राजनीति ने जनता की उम्मीदों को धूमिल कर दिया। गुप्त फंड का गुप्त उपयोग, खान और उद्योग, और शराब पर खेल जैसे अध्याय सत्ता और व्यवसाय के गठजोड़ को उजागर करते हैं। ये दिखाते हैं कि किस तरह प्राकृतिक संसाधनों और योजनाओं को निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया गया। 

पानी के पाइप में बह रहा भ्रष्टाचार अध्याय में जलापूर्ति योजनाओं में हुए घोटालों का खुलासा किया गया है, जबकि रघुवर दास, मैनहर्ट और राज्यपाल का संयोग सत्ता के ऊपरी स्तर पर चल रही अदृश्य राजनीतिक ताकतों का चित्रण करता है। अंतिम 11 वां अध्याय द गार्डियंस बाबूलाल से हेमंत तक झारखंड की राजनीतिक यात्रा को समेटता है। इसमें राज्य के मुख्यमंत्रियों की भूमिका, उनके फैसले, और विकास बनाम राजनीति की जंग का सटीक विश्लेषण है। 

कुल मिलाकर, नीले आकाश का सच बिहार और झारखंड की राजनीति की मिट्टी से निकली वह कहानी है जिसमें सत्ता की सच्चाई, घोटालों की गंध, और उम्मीदों के नीले आकाश की तलाश एक साथ चलती है। यह किताब पत्रकारिता, राजनीति और समाज के उन अदृश्य सूत्रों को जोड़ती है जिनसे भारत के लोकतंत्र की असल तस्वीर उभरती है।

Published / 2026-03-10 18:40:29
बाल विवाह के खिलाफ कठोर कानून लाये संयुक्त राष्ट्र: भारत

भारत से उठी मांग, बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक दिवस घोषित करे संयुक्त राष्ट्र 

एबीएन सोशल डेस्क। दुनिया भर में जारी बाल विवाह की समस्या पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत के प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के विधिवेत्ता भुवन ऋभु ने संयुक्त राष्ट्र से बाल विवाह के उन्मूलन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग की है। 

संयुक्त राष्ट्र के कमीशन आन द स्टैटस आफ वूमन (सीएसडब्ल्यू) के 70वें सत्र के मौके पर एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत में बाल विवाह में उल्लेखनीय कमी आयी है, लेकिन आज भी दुनिया में हर तीन सेकेंड में कहीं न कहीं एक बाल विवाह हो रहा है। 

बाल विवाह जो कि बच्चों से बलात्कार है, कि रोकथाम के लिए वैश्विक स्तर पर जवाबदेही और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने के वास्ते एक समर्पित दिवस की आवश्यकता पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, भारत ने दिखाया है कि बाल विवाह का अंत संभव है।

रोकथाम, संरक्षण, अभियोजन व बच्चों, समुदायों और धर्मगुरुओं की भागीदारी पर आधारित संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज के दृष्टिकोण के साथ हमारा देश 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। 

भारत में तीन वर्षों से भी कम समय में बाल विवाह की दर 23 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत से नीचे आ गयी है। बाल विवाह दरअसल एक बच्चे के साथ होने वाले बलात्कार और यौन शोषण से कम नहीं है, जिसे अक्सर संस्कृति या परंपरा की आड़ में छिपा दिया जाता है। 

संयुक्त राष्ट्र को बाल विवाह उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस की घोषणा करनी चाहिए, ताकि इसके खिलाफ वैश्विक प्रतिबद्धता व जवाबदेही मजबूत हो और दुनिया भर की सरकारें तथा समाज इस अपराध को समाप्त करने के लिए संगठित हों। 

कार्यक्रम में मौजूद सिएरा लियोन की प्रथम महिला डॉ. फातिमा मादा बायो, नेपाल की महिला, बाल एवं वरिष्ठ नागरिक मंत्री श्रद्धा श्रेष्ठ एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने बाल विवाह के खात्मे के लिए एक समर्पित अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग का पुरजोर समर्थन किया।  

वर्ल्ड लॉ कांग्रेस 2025 में वर्ल्ड जूरिस्ट एसोसिएशन की ओर से मेडल आफ आनर से सम्मानित होने वाले पहले पहले भारतीय अधिवक्ता भुवन ऋभु ने इस कार्यक्रम को आनलाइन संबोधित किया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने यह कार्यक्रम सिएरा लियोन की प्रथम महिला तथा आर्गनाइजेशन आफ अफ्रीकन फर्स्ट लेडीज फॉर डेवलपमेंट की अध्यक्ष डॉ. फातिमा मादा बायो के कार्यालय के साथ साझेदारी में आयोजित किया था। 

कार्यक्रम में नेपाल सरकार की महिला, बाल एवं वरिष्ठ नागरिक मंत्री शारदा श्रेष्ठ; संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के सहायक महासचिव और कार्यक्रम निदेशक पियो स्मिथ; फ्रांस सरकार की मानवाधिकार राजदूत इसाबेल रोम; जर्मनी के उप स्थायी प्रतिनिधि राजदूत थॉमस जाहनाइजेन; अफ्रीकी संघ की ओर से डॉ. एंजेला मार्टिन्स; डोमिनिकन गणराज्य सरकार के राष्ट्रीय बाल एवं किशोर परिषद की कार्यकारी अध्यक्ष लिजिया जेनेट पेरेज पेना; द डिप्लोमैटिक कूरियर की संस्थापक एवं सीईओ एना रोल्ड; यूएन वूमेन की क्षेत्रीय राजदूत और रीजेनरेटिव हब्स की संस्थापक जहा दुकुरेह; इक्वेलिटी नाउ की एंडिंग जेंडर-बेस्ड वायलेंस निदेशक दिव्या श्रीनिवासन और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की जनरल काउंसिल रचना त्यागी सहित कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां शामिल हुईं। 

कार्यक्रम में मौजूद मंत्रियों, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों, विधिवेत्ताओं, नागरिक समाज के नेताओं और भुक्तभोगियों के पैरोकारों ने एक स्वर में सदस्य देशों से बाल विवाह समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस की घोषणा की मांग की। उनका कहना था कि इससे बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि कई देशों में बाल विवाह के खिलाफ सख्त कानूनी ढांचे पहले से मौजूद हैं लेकिन उनके कमजोर क्रियान्वयन के कारण यह प्रथा अब भी जारी है। 

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के क्षेत्र में कार्य करने वाले नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है जिसके 250 से भी अधिक सहयोगी संगठन 2030 तक भारत से बाल विवाह के खात्मे के लिए 451 जिलों में जमीन पर काम कर रहे हैं। इस नेटवर्क ने सरकारी एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के सहयोग से पिछले तीन वर्षों में भारत में लगभग 500,000 बाल विवाह रुकवाये हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

Published / 2026-03-10 18:30:16
रांची : गणेश मैदान रेलवे कॉलोनी में गायत्री परिवार का यज्ञीय अनुष्ठान शुरू

19वें पुराण पावन प्रज्ञा पुराण कथा एवं 9 कुंडीय गायत्री महायज्ञ मंगलकलश की रथयात्रा सहित कई कार्यक्रम 

10 से 15 मार्च 2026 तक गणेश मैदान (रेलवे कॉलोनी)  महानगर रांची में यज्ञीय अनुष्ठान शुभारंभ 

एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्रीपरिवार के विचार क्रांति अभियान अंतर्गत मनुष्य में देवत्व का उदय एवं धरती पर स्वर्ग के अवतरण लक्ष्याधीन में नये युग के वैचारिक प्रदूषण एवं उनसे उपजी समस्याओं से निपटने के लिए 19 वां पावन प्रज्ञा पुराण का नवसूजन कर युग प्रणेता परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य के आध्यात्मिक  समाधान पर मंच संचालन करते हुए रांची जिला सप्त आंदोलन समन्वयक नीरज कुमार ने संक्षिप्त प्रकाश डाला। प्रमोद कुमार एवं रणवीर कुमार ने दिव्य कलश पूजन पूर्व जयघोष, मंत्र पाठ, सद्गुरु वंदना कर प्रज्ञा गीतों के माध्यम से माहोल सृजन कर तीन गीत गाये। 

मां गायत्री प्रज्ञामाता! देकर हमें  सहारा अपना लीजिए, बेड़ा पार कीजिए मां! हमें तार दीजिए। 

मनुज देवता बने, बने यह धरती स्वर्ग समान, यही संकल्प हमारा।  

कलश पूजन दौरान प्रज्ञा गीत में आओ आओ बहिन सुहागिन, दिव्य कलश सिर धारण करो। कलश के मुख में श्रीविष्णु सोहें, कण्ठ में शंकर जी सोहें, ब्रह्माजी मूलाधार में सोहें। फिर दिव्य ज्योति-कलश रथ सहित पीताम्बरी माताओं बहनों ने कलश पूजनोपरांत वार्ड नं 46 की पार्षद आरती देवी के सान्निध्य व झंडा प्रदर्शन में बैंड बाजा सहित मंगलकलश यात्राकार्य शुभारंभ हुआ।  

रथ यात्रा कार्यक्रम स्थल गणेश मैदान से निकलकर स्थानीय काली मंदिर, कृष्णापुरी रोड नं 1 व 7 होते हुए पुन: वापिस कार्यक्रम स्थल पर हुई। आज कार्यक्रम में स्थानीय महिला मंडल, प्रज्ञा मंडल,रांची मुख्य शक्तिपीठ, अल्कापुरी शक्तिपीठ, मंडलों और समन्वय समितिगठन के परिजन, कार्यकर्ता भाई-बहनों ने कार्यक्रम को सजाया, संभाला।  

रेणु सिन्हा बहिन ने बताया कि आज से कार्यक्रम विवरण है:- प्रथम दिवस मंगलवार 10 मार्च प्रात: 9 बजे से मंगल कलश यात्रा + सायं 5 बजे से 8 बजे तक पावन प्रज्ञा पुराण की कथा। कलश यात्रा में 551 कलशधारी रहीं। इनके वापस आने पर सबकी अक्षत पुष्प वर्षा से स्वागत अभिनन्दन करके महा आरती की गयी। अंत में दिव्य कलश जल से सबको अभिसिंचन व शांति-पाठ तथा भोजनोपरान्त दोपहर विराम दिया गया। यह कार्यक्रम 9 से 12:30 बजे हुआ।  

सायंकाल में प्रज्ञापुराण कथा वाचन कार्यक्रम मुख्य पुरोहित टीम नायक संतोष कुमार संगम ने शुभारंभ किया। प्रथम भाग के प्रथम चरण में श्रीविष्णु भगवान एवं देवर्षि नारदजी मध्य सद्ज्ञान-सूत्र संवाद पर प्रकाश डाला। टीम सहायक व गीत संगीत में हारमोनियम वादक रंजन कुमार और तबला वादक रीकू सूदन जी ने सहयोग दिया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के कार्यक्रम प्रचारक प्रसारक जय नारायण प्रसाद ने दी।

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